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खामेनेई की मौत से 48 घंटे पहले ट्रंप-नेतन्याहू के बीच हुई बात, फिर मिला हमले का ग्रीन सिग्नल

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अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान पर हमले से महज 48 घंटे से भी कम समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों को अंतिम मंजूरी दी थी। इस ऐतिहासिक फोन कॉल में नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का यह सबसे अच्छा मौका हो सकता है।

ट्रंप ने पहले ही ऑपरेशन को मंजूरी दी थी

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू और ट्रंप दोनों के पास खुफिया रिपोर्ट थी कि खामेनेई अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ तेहरान में अपने कंपाउंड में बैठक करने वाले थे। यह ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ (खामेनेई की हत्या) का सुनहरा अवसर था। कॉल के दौरान नई खुफिया जानकारी आई कि बैठक शनिवार सुबह कर दी गई है। ट्रंप ने उस समय तक सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे रखी थी, लेकिन समय और अमेरिकी भूमिका पर फैसला बाकी था।

नेतन्याहू ने ट्रंप से क्या कहा?

नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका और इजराइल को खामेनेई को मारने और 2024 में ट्रंप की हत्या की साजिश का बदला लेने का इससे बेहतर मौका कभी नहीं मिलेगा। नेतन्याहू ने इसे रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों रूप में जरूरी बताया और ट्रंप को इसे सही ठहराने के लिए प्रेरित किया।

तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंकने की सलाह

नेतन्याहू ने ट्रंप से अपील की कि वे इतिहास रच सकते हैं। उनका तर्क था कि इस हमले से प्रोत्साहित होकर ईरान के लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और 1979 से चली आ रही एक रह की तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंक सकते हैं, जो वैश्विक आतंकवाद और अस्थिरता का बड़ा स्रोत रही है।

28 फरवरी को हुआ था पहला हमला

बता दें कि ईरान पर पहला हमला 28 फरवरी को हुआ। इसके बाद ट्रंप ने घोषणा की कि खामेनेई मारे गए। व्हाइट हाउस ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद था ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और उत्पादन क्षमता को खत्म करना, ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से यह खारिज किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध के लिए दबाव डाला। उन्होंने इसे फेक न्यूज कहा और कहा कि कोई भी ट्रंप को नहीं बताता कि क्या करना है। ट्रंप ने भी कहा कि ईरान पर हमला करने का अंतिम फैसला उनका खुद का था।

मिडिल ईस्ट संकट पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी, कहा-सरकार के पास ऊर्जा के पर्याप्त भंडार

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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में भारत की स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है।लोकसभा में प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई सुचारू बनी रहेगी। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि जनता को इन जरूरी ईंधनों की कोई कमी न हो।

पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही विपरित असर-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है। बीते 2-3 हफ्तों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने और हरदीप पुरी ने इस विषय पर संसद को जरूरी जानकारी दी है। अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है। इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है।

भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक भी हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में ये युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।

गैस सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी-पीएम मोदी

लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है, लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया है कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरे देश में बिना किसी रुकावट के जारी रहे। गैस की सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की ऊर्जा आयात की विविधता काफी बढ़ी है। पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, आज यह संख्या बढ़कर 41 देशों हो गई है। सरकार अलग-अलग सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में है और जहां से भी संभव हो, वहां से तेल, गैस और फर्टिलाइजर का आयात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) 53 लाख टन से अधिक है और इसे बढ़ाकर 65 लाख टन करने का काम तेजी से चल रहा है। तेल कंपनियों के अपने रिजर्व अलग से हैं. हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौटे

पीएम मोदी ने बताया कि भारत के करीब 1 करोड़ लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। वहां समुद्री जहाजों पर बहुत से भारतीय काम करते हैं। जब से ये युद्ध शुरू हुआ है, तब से भारतीय लोगों को मदद दी जा रही है। मैंने भी दो राष्ट्राध्यक्षों से इसके बारे में बात की है। दुर्भाग्य से इस युद्ध की वजह से कुछ लोगों की मौत है और कुछ लोग घायल हैं। विदेशों में हमारे जितने भी मिशन हैं। वह हमारे नागरिकों की मदद कर रहे हैं। विदेश में फंसें हमारे लोगों की मदद के लिए भारत में 24 घंटे हेल्पलाइन जारी की गई है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से 1000 से अधिक छात्र लौटे हैं। इसमें से अधिकतक मेडिकल के छात्र हैं।

ईरान पर हमले के लिए भारत ने अमेरिका को दिया अपना बेस! विदेश मंत्रालय ने बताई वायरल दावे की सच्चाई

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस झूठे दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य मदद मांगी है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका को भारत की जमीन से ईरान पर हमले के लिए अनुमति दी गई है।

भारत के पश्चिमी हिस्से के सैन्य इस्तेमाल का दावा

सोशल मीडिया के एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए उसकी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। यह दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से फैल रहा था। इसमें कहा गया था कि अमेरिका, LEMOA समझौते के तहत भारत के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए करना चाहता है और कोंकण तट के पास अपनी सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है।

विदेश मंत्रीलय ने कहा-खबरें पूरी तरह फर्जी

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी देश को अपनी धरती का उपयोग किसी तीसरे देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी है। इस तरह की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है LEMOA समझौता

बता दें कि Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) एक समझौता है, जो 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे ईंधन भरना, मरम्मत कराना या आराम करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश दूसरे देश की जमीन से सीधे हमला कर सकता है। हर बार अलग से अनुमति लेनी होती है और वह भी सीमित कामों के लिए होती है।

रूस के बाद अब ईरानी तेल से हटा प्रतिबंध, क्या है जंग के बीच ट्रंप के यू-टर्न की वजह

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते तेल संकट और आसमान छूती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। अमेरिका ने रूस के बाद ईरान के तेल पर लगे दीर्घकालिक प्रतिबंधों को अगले एक महीने के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया है।

140 मिलियन बैरल तेल होगा उपलब्ध

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्येश्य मौजूदा आपूर्ति को जारी करके बाजारों को तेजी से स्थिर करना है। बेसेंट ने लिखा, दुनिया के लिए इस मौजूदा आपूर्ति को अस्थायी रूप से जारी करके अमेरका वैश्विक बाजारों में लगभग 140 मिलियन बैरल तेल तेजी से उपलब्ध कराएगा। यह छूट उस ईरानी तेल पर लागू होगी जो पहले से ही जहाज पर लदकर समुद्र में फंसा हुआ है।

दुनियाभर में गहरा रहा ऊर्जा संकट

अमेरिका और इजराइल के हमलों से उसके परमाणु, सैन्य या ऊर्जा ठिकानों को कितना नुकसान हुआ है। ये हमले 28 फरवरी से जारी हैं। ईरान के हमलों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में आए तीव्र उछाल ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा दिया था। मुद्रास्फीति और शेयर बाजार में भारी गिरावट को रोकने की उम्मीद में ट्रंप प्रशासन ने यह सामान्य लाइसेंस जारी किया है।

रूस को मिली थी ऐसी ही छूट

इसके पहले ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर भी इसी तरह की छूट दी थी, जिसमें समुद्र में मौजूद रूसी तेल शिपमेंट की खरीद पर 30 दिनों की छूट दी गई थी।। बेसेंट ने बताया कि प्रशासन ने पहले ही बाजार में 44 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल लाने के लिए काम कर रहा है। इसके होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा डालकर फायदा उठाने की ईरान की क्षमता कमजोर हुई है। बेसेंट ने ईरान को ग्लोबल आतंकवाद का सरगना बताया और कहा कि अमेरिका इस लड़ाई को उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से जीत रहा है।

खतरनाक स्थिति में पहुंची मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, अब सऊदी अरब ने दी ईरान को खुली चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ईरान कई देशों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है और गैस-तेल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है। इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को चेतावनी दी है।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि ईरान को अपने पड़ोसियों पर किए गए हमलों के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि खाड़ी देश जवाब देने में असमर्थ हैं, तो तेहरान गलत है। उन्होंने ईरान पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों के पास सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ईरान के आगे न तो ब्लैकमेल होंगे और न ही डरेंगे।

रियाद में अरब विदेश मंत्रियों की बैठक

प्रिंस फैसल ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक के बाद ये बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने रवैये पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की कार्रवाइयों का उसे राजनीतिक और नैतिक रूप से उल्टा असर झेलना पड़ेगा। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान के बार-बार के हमलों से उस पर से भरोसा टूट गया है। खास बात है कि जब बैठक चल रही थी, उसी दौरान ईरान ने रियाद और कतर के रास लफान इंडस्टिरयल सिटी पर हमला कर दिया।

क्या सीधे जंग में उतरेगा सऊदी अरब?

हाल के दिनों में सऊदी अरब पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। रियाद में अमेरिकी दूतावास, प्रिंस सुल्तान एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि सऊदी अमेरिका का कितना साथ देगा और क्या वह सीधे जंग में उतरेगा।

पाकिस्तान की भी होगी एंट्री!

सऊदी अरब के तेल को अगर टार्गेट किया गया तो वह इस युद्ध में खुलकर उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। इसका कारण है सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता। इस युद्ध के बाद से ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई बार सऊदी का दौरा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पर्दे के पीछे नया खेल चल रहा है।

इजराइली हमले में मारे गए अली लारिजानी, कमांडर सुलेमानी की भी मौत

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ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब 19वें दिन में पहुंच गया है और संकट और भी ज्यादा गहरा गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के 18वें दिन इजरायल ने तेहरान में जो कार्रवाई की, उसमें ईरान के दो सबसे वरिष्ठ लीडर भी मारे गए। ईरान के सुरक्षा प्रमुख और खामेनेई के करीबी अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंगलवार को अली लारीजानी की मौत की पुष्टि कर दी है। लारीजानी सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे और कहा जाता था कि पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मारे जाने के बाद पर्दे के पीछे से वही ईरान को चला रहे थे। इसके पहले इजरायल ने कहा था कि उसने अली लारीजानी को एक हमले में मार दिया है।

खामेनेई की मौत के बाद थी अहम भूमिका

लारीजानी को ईरान के सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है, खासकर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई थी। लारीजानी पूर्व में संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ नीति सलाहकार भी रह चुके थे। परमाणु वार्ता में भी उनकी भूमिका रही थी। जनरल सुलेमानी पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए गए थे, क्योंकि उन पर वर्षों से विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाने का आरोप था।

अली लारीजानी के साथ उनके बेटे की भी मौत

ईरान के सरकारी टीवी और सुरक्षा परिषद के अनुसार अली लारीजानी की उनके बेटे मोर्तेजा और एक सहयोगी के साथ हत्या कर दी गई। ईरान के कई नेताओं ने इस हत्या की निंदा की है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इससे सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह संस्थाओं पर आधारित है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लारिजानी की जगह कौन लेगा, क्या सईद जलीली या फिर नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई कोई नई नियुक्ति करेंगे।

इजरायल ने किया मारे जाने का दावा

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने सबसे पहले लारीजानी के मारे जाने का ऐलान किया था। इजरायली सेना ने बताया कि सोमवार देर रात हुए हवाई हमले में अली लारीजानी और ईरान की एलीट बासिज फोर्स के कमांडर को मार दिया गया। मंगलवार शाम के इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी लारीजानी के मारे जाने घोषणा करते हुए कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान के नेतृत्व कमजोर करना था, ताकि ईरानी लोगों को उसे हटाने का मौका मिल सके।

गुलाम रज़ा सुलेमानी की भी मौत

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पुष्टि की है कि बसिज संगठन के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी भी इजराइली हमले में मारे गए। गोलम रजा सुलेमानी आईआरजीसी के एक उच्च पदस्थ कमांडर थे। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के पहले दिन कमांडर-इन-चीफ समेत कई सैन्य कमांडरों की मौत के बाद, सुलेमानी की मौत युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण खबरों में से एक है। बसिज, जो कि रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एक संगठनात्मक सहायक संस्था है, ईरानी सरकार की सुरक्षा शाखाओं में से एक है और आंतरिक संकटों के प्रबंधन और विरोध प्रदर्शनों को दबाने और नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

The Bhopal Shift: How Definite Success Classes Is Turning the City into India’s New NEET Preparation Hub

For decades, the path for medical aspirants in India was predictable: if you wanted a top-tier rank in NEET-UG, you packed your bags for established coaching hubs like Kota or Delhi. However, over the last few years, a significant shift has been brewing in Central India. Bhopal, once seen primarily as a regional academic center, has transformed into a high-performance hub that is now outperforming legacy cities in "selection-to-enrollment" ratios.This transition is backed by a series of high-stakes results and a growing reputation for academic excellence that has caught the attention of education analysts nationwide.

Breaking the "AIIMS Delhi" Barrier

The most telling indicator of a city's academic depth is its ability to place students in AIIMS Delhi—the most competitive medical institution in the country. For Bhopal, this was a rare feat, with the city often going seven or eight years without a single selection to the premier institute.

That cycle was decisively broken in the 2025 results. Aagam Jain, a student from the premier educational organization Definite Success Classes, secured All India Rank 45, earning a seat at AIIMS Delhi. For observers, this was a "proof of concept" for the city's evolving academic infrastructure, proving that the highest level of conceptual mastery required for top national ranks is now available within Bhopal through elite-level mentorship.

A Growing Magnet for National Student Migration

One of the most remarkable highlights of Bhopal’s rise is the changing geography of its student population. No longer just a center for local talent, Bhopal has become a "magnet city," drawing students from across the Indian map.

Enrollment data reveals a significant trend of student migration to the city, specifically to study under the guidance of Definite Success Classes. Families are now bypassing closer, traditional options to send their children to Bhopal from diverse regions, including:

● North & West: Rajasthan (Jaipur, Alwar, Jhalawar), Uttar Pradesh (Agra, Pratapgarh, Jhansi, Raebareli), and Punjab (Amritsar).

● East & South: West Bengal (Kolkata, Jalpaiguri), Bihar (Rohtas, Katihar), Jharkhand (Jamtara), and Maharashtra (Amravati).

● Remote Frontiers: Even students from the J&K region (Ladakh) and Himachal Pradesh (Kangra) are now choosing the academic stability of Bhopal over larger, more crowded metros.

Education professionals suggest this cross-state movement occurs because families perceive Bhopal to offer a balanced academic ecosystem—combining the high-intensity preparation of a legacy hub with a more supportive, less overwhelming environment.

A Legacy of Excellence: The Multi-Year Record

This national trust is built on a foundation of consistent, verified results. At the center of this trend is the focused approach of Definite Success Classes, which prioritizes academic stability and actual college conversion.

● The 2024 Performance: The city maintained its momentum with over 116 MBBS selections from this prestigious organization. This included elite placements such as Akshar Dubey (AIIMS Bhopal, 705/720), Aashna Jain (GGMC Mumbai, 700/720), and Nandini Jain (AIIMS Rajkot, 696/720).

● The 2023 Foundation: In this cycle, Definite Success Classes recorded a massive surge in students crossing the 650-mark threshold, resulting in 5 AIIMS selections (including the city topper Samridhi Saxena at 693/720) and over 70 Government Medical College seats.

The "Bhopal Factor": Transparency and Well-being

Beyond the numbers, the human factor plays a major role in why families are choosing Bhopal. In an era of high-pressure advertising, Definite Success Classes has set a standard for transparency by publicly verifying results with confirmed college allotments.

Furthermore, Bhopal offers a high quality of life with significantly lower stress and living costs compared to Tier-1 cities. This allows medical aspirants to focus entirely on their preparation in a safe, conducive environment, supported by a healthy student-to-teacher ratio that ensures they are never treated as "just another number."

The New Educational Map

The data suggests that the days of a few cities holding a monopoly on medical education are ending. Bhopal’s ascent—spearheaded by the consistent performance of prestigious organizations like Definite Success Classes—signals a new era where quality is determined by actual college conversion rates rather than the size of a billboard.

As more students from every corner of India choose Bhopal for their NEET journey, the city is no longer just a regional player; it is firmly established on the national map as a premier destination for the next generation of India’s doctors.

भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका', रूसी तेल खरीद को लेकर ईरान के मंत्री का बड़ा दावा

#iranfmsaysusbeggingindiaandtheworldtobuyrussianoil

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य मोर्चे पर तो लड़ाई जारी है, जुबानी जंग भी तेज हो गई है। एक दूसरे पर वार-पलटवार का दौर चल रहा है। रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन पर तीखा हमला बोला है। अराघची ने अमेरिका पर हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन, भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा हैष वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट शेयर की है, जिसमें कहा गया है कि ईरान युद्ध रूस की ऑयल इंडस्टी के लिए संजीवनी बनकर आया है।

यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना

अरगची ने अपनी पोस्ट में यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान पर 'अवैध युद्ध' का साथ देकर सोचा था कि अमेरिका उसके बदले रूस के खिलाफ उनका साथ देगा, लेकिन अब वे निराश हैं। मंत्री ने लिखा, 'यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से अमेरिका रूस के खिलाफ उसकी मदद करेगा। यह बहुत दयनीय है।'

रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका ने दी छूट

अराघची की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगा प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने की जानकारी दी थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वित्त विभाग ने रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की मंजूरी देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि यह मंजूरी केवल उस रूसी तेल के लिए होगी जो पहले से ही समुद्र में मौजूद है। अमेरिका ने कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की छूट दी थी।

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात, बोले- बातचीत से हो सामाधान

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पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग जारी हैं। ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में खलबली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल संकट भी है। इस तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बातचीत की है।

मौजूदा हालात पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में पैदा हुए गंभीर हालात और मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और सिटीजन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पूरे क्षेत्र की स्थिरता और शांति के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

संवाद और कूटनीति से हल निकालने की अपील

पीएम मोदी ने बताया, 'भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मैंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संवाद, कूटनीति का आग्रह किया।'

पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से की बात

पिछले दस दिनों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से भी बातचीत की है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए संयुक्त हमले के बाद से पश्चिम एशिया में संकट गहरा रहे संकट के बीच ये बातचीत हुई है। गौरतलब है कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले करते हुए इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इन हमलों का असर दुबई और दोहा जैसे वैश्विक व्यापार और विमानन केंद्रों के आसपास भी देखा गया है।

भारतीय जहाजों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, दो टैंकर सुरक्षित निकले, रंग लाई विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति

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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसके बाद पुष्पक और परिमलनाम के भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस हॉर्मुज से गुजर गए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

एस जयशंकर और अराघची की बातचीत से निकला हल

यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है। इस मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके ईरानी समकक्ष के बीच युद्ध छिड़ने के बाद कम से कम तीन बार बात हो चुकी है। जयशंकर ने मंगलवार को भी पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर अब्बास अराघची से बात की।

भारत के लिए ये क्यों खास है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ऐसे में इसे काफी अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

-सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

-इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

-दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

-इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।

खामेनेई की मौत से 48 घंटे पहले ट्रंप-नेतन्याहू के बीच हुई बात, फिर मिला हमले का ग्रीन सिग्नल

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अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान पर हमले से महज 48 घंटे से भी कम समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों को अंतिम मंजूरी दी थी। इस ऐतिहासिक फोन कॉल में नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का यह सबसे अच्छा मौका हो सकता है।

ट्रंप ने पहले ही ऑपरेशन को मंजूरी दी थी

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू और ट्रंप दोनों के पास खुफिया रिपोर्ट थी कि खामेनेई अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ तेहरान में अपने कंपाउंड में बैठक करने वाले थे। यह ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ (खामेनेई की हत्या) का सुनहरा अवसर था। कॉल के दौरान नई खुफिया जानकारी आई कि बैठक शनिवार सुबह कर दी गई है। ट्रंप ने उस समय तक सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे रखी थी, लेकिन समय और अमेरिकी भूमिका पर फैसला बाकी था।

नेतन्याहू ने ट्रंप से क्या कहा?

नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका और इजराइल को खामेनेई को मारने और 2024 में ट्रंप की हत्या की साजिश का बदला लेने का इससे बेहतर मौका कभी नहीं मिलेगा। नेतन्याहू ने इसे रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों रूप में जरूरी बताया और ट्रंप को इसे सही ठहराने के लिए प्रेरित किया।

तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंकने की सलाह

नेतन्याहू ने ट्रंप से अपील की कि वे इतिहास रच सकते हैं। उनका तर्क था कि इस हमले से प्रोत्साहित होकर ईरान के लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और 1979 से चली आ रही एक रह की तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंक सकते हैं, जो वैश्विक आतंकवाद और अस्थिरता का बड़ा स्रोत रही है।

28 फरवरी को हुआ था पहला हमला

बता दें कि ईरान पर पहला हमला 28 फरवरी को हुआ। इसके बाद ट्रंप ने घोषणा की कि खामेनेई मारे गए। व्हाइट हाउस ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद था ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और उत्पादन क्षमता को खत्म करना, ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से यह खारिज किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध के लिए दबाव डाला। उन्होंने इसे फेक न्यूज कहा और कहा कि कोई भी ट्रंप को नहीं बताता कि क्या करना है। ट्रंप ने भी कहा कि ईरान पर हमला करने का अंतिम फैसला उनका खुद का था।

मिडिल ईस्ट संकट पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी, कहा-सरकार के पास ऊर्जा के पर्याप्त भंडार

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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में भारत की स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है।लोकसभा में प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई सुचारू बनी रहेगी। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि जनता को इन जरूरी ईंधनों की कोई कमी न हो।

पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही विपरित असर-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है। बीते 2-3 हफ्तों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने और हरदीप पुरी ने इस विषय पर संसद को जरूरी जानकारी दी है। अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है। इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है।

भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक भी हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में ये युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।

गैस सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी-पीएम मोदी

लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है, लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया है कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरे देश में बिना किसी रुकावट के जारी रहे। गैस की सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की ऊर्जा आयात की विविधता काफी बढ़ी है। पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, आज यह संख्या बढ़कर 41 देशों हो गई है। सरकार अलग-अलग सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में है और जहां से भी संभव हो, वहां से तेल, गैस और फर्टिलाइजर का आयात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) 53 लाख टन से अधिक है और इसे बढ़ाकर 65 लाख टन करने का काम तेजी से चल रहा है। तेल कंपनियों के अपने रिजर्व अलग से हैं. हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौटे

पीएम मोदी ने बताया कि भारत के करीब 1 करोड़ लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। वहां समुद्री जहाजों पर बहुत से भारतीय काम करते हैं। जब से ये युद्ध शुरू हुआ है, तब से भारतीय लोगों को मदद दी जा रही है। मैंने भी दो राष्ट्राध्यक्षों से इसके बारे में बात की है। दुर्भाग्य से इस युद्ध की वजह से कुछ लोगों की मौत है और कुछ लोग घायल हैं। विदेशों में हमारे जितने भी मिशन हैं। वह हमारे नागरिकों की मदद कर रहे हैं। विदेश में फंसें हमारे लोगों की मदद के लिए भारत में 24 घंटे हेल्पलाइन जारी की गई है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से 1000 से अधिक छात्र लौटे हैं। इसमें से अधिकतक मेडिकल के छात्र हैं।

ईरान पर हमले के लिए भारत ने अमेरिका को दिया अपना बेस! विदेश मंत्रालय ने बताई वायरल दावे की सच्चाई

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस झूठे दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य मदद मांगी है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका को भारत की जमीन से ईरान पर हमले के लिए अनुमति दी गई है।

भारत के पश्चिमी हिस्से के सैन्य इस्तेमाल का दावा

सोशल मीडिया के एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए उसकी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। यह दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से फैल रहा था। इसमें कहा गया था कि अमेरिका, LEMOA समझौते के तहत भारत के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए करना चाहता है और कोंकण तट के पास अपनी सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है।

विदेश मंत्रीलय ने कहा-खबरें पूरी तरह फर्जी

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी देश को अपनी धरती का उपयोग किसी तीसरे देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी है। इस तरह की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है LEMOA समझौता

बता दें कि Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) एक समझौता है, जो 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे ईंधन भरना, मरम्मत कराना या आराम करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश दूसरे देश की जमीन से सीधे हमला कर सकता है। हर बार अलग से अनुमति लेनी होती है और वह भी सीमित कामों के लिए होती है।

रूस के बाद अब ईरानी तेल से हटा प्रतिबंध, क्या है जंग के बीच ट्रंप के यू-टर्न की वजह

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते तेल संकट और आसमान छूती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। अमेरिका ने रूस के बाद ईरान के तेल पर लगे दीर्घकालिक प्रतिबंधों को अगले एक महीने के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया है।

140 मिलियन बैरल तेल होगा उपलब्ध

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्येश्य मौजूदा आपूर्ति को जारी करके बाजारों को तेजी से स्थिर करना है। बेसेंट ने लिखा, दुनिया के लिए इस मौजूदा आपूर्ति को अस्थायी रूप से जारी करके अमेरका वैश्विक बाजारों में लगभग 140 मिलियन बैरल तेल तेजी से उपलब्ध कराएगा। यह छूट उस ईरानी तेल पर लागू होगी जो पहले से ही जहाज पर लदकर समुद्र में फंसा हुआ है।

दुनियाभर में गहरा रहा ऊर्जा संकट

अमेरिका और इजराइल के हमलों से उसके परमाणु, सैन्य या ऊर्जा ठिकानों को कितना नुकसान हुआ है। ये हमले 28 फरवरी से जारी हैं। ईरान के हमलों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे न केवल पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में आए तीव्र उछाल ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा दिया था। मुद्रास्फीति और शेयर बाजार में भारी गिरावट को रोकने की उम्मीद में ट्रंप प्रशासन ने यह सामान्य लाइसेंस जारी किया है।

रूस को मिली थी ऐसी ही छूट

इसके पहले ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल पर भी इसी तरह की छूट दी थी, जिसमें समुद्र में मौजूद रूसी तेल शिपमेंट की खरीद पर 30 दिनों की छूट दी गई थी।। बेसेंट ने बताया कि प्रशासन ने पहले ही बाजार में 44 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल लाने के लिए काम कर रहा है। इसके होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा डालकर फायदा उठाने की ईरान की क्षमता कमजोर हुई है। बेसेंट ने ईरान को ग्लोबल आतंकवाद का सरगना बताया और कहा कि अमेरिका इस लड़ाई को उम्मीद से भी ज्यादा तेजी से जीत रहा है।

खतरनाक स्थिति में पहुंची मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, अब सऊदी अरब ने दी ईरान को खुली चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ईरान कई देशों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है और गैस-तेल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है। इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को चेतावनी दी है।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि ईरान को अपने पड़ोसियों पर किए गए हमलों के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि खाड़ी देश जवाब देने में असमर्थ हैं, तो तेहरान गलत है। उन्होंने ईरान पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों के पास सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ईरान के आगे न तो ब्लैकमेल होंगे और न ही डरेंगे।

रियाद में अरब विदेश मंत्रियों की बैठक

प्रिंस फैसल ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक के बाद ये बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने रवैये पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की कार्रवाइयों का उसे राजनीतिक और नैतिक रूप से उल्टा असर झेलना पड़ेगा। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान के बार-बार के हमलों से उस पर से भरोसा टूट गया है। खास बात है कि जब बैठक चल रही थी, उसी दौरान ईरान ने रियाद और कतर के रास लफान इंडस्टिरयल सिटी पर हमला कर दिया।

क्या सीधे जंग में उतरेगा सऊदी अरब?

हाल के दिनों में सऊदी अरब पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। रियाद में अमेरिकी दूतावास, प्रिंस सुल्तान एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि सऊदी अमेरिका का कितना साथ देगा और क्या वह सीधे जंग में उतरेगा।

पाकिस्तान की भी होगी एंट्री!

सऊदी अरब के तेल को अगर टार्गेट किया गया तो वह इस युद्ध में खुलकर उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। इसका कारण है सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता। इस युद्ध के बाद से ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई बार सऊदी का दौरा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पर्दे के पीछे नया खेल चल रहा है।

इजराइली हमले में मारे गए अली लारिजानी, कमांडर सुलेमानी की भी मौत

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ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब 19वें दिन में पहुंच गया है और संकट और भी ज्यादा गहरा गया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के 18वें दिन इजरायल ने तेहरान में जो कार्रवाई की, उसमें ईरान के दो सबसे वरिष्ठ लीडर भी मारे गए। ईरान के सुरक्षा प्रमुख और खामेनेई के करीबी अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंगलवार को अली लारीजानी की मौत की पुष्टि कर दी है। लारीजानी सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे और कहा जाता था कि पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मारे जाने के बाद पर्दे के पीछे से वही ईरान को चला रहे थे। इसके पहले इजरायल ने कहा था कि उसने अली लारीजानी को एक हमले में मार दिया है।

खामेनेई की मौत के बाद थी अहम भूमिका

लारीजानी को ईरान के सबसे ताकतवर शख्स माना जाता है, खासकर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई थी। लारीजानी पूर्व में संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ नीति सलाहकार भी रह चुके थे। परमाणु वार्ता में भी उनकी भूमिका रही थी। जनरल सुलेमानी पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों द्वारा प्रतिबंध लगाए गए थे, क्योंकि उन पर वर्षों से विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाने का आरोप था।

अली लारीजानी के साथ उनके बेटे की भी मौत

ईरान के सरकारी टीवी और सुरक्षा परिषद के अनुसार अली लारीजानी की उनके बेटे मोर्तेजा और एक सहयोगी के साथ हत्या कर दी गई। ईरान के कई नेताओं ने इस हत्या की निंदा की है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि इससे सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह संस्थाओं पर आधारित है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लारिजानी की जगह कौन लेगा, क्या सईद जलीली या फिर नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई कोई नई नियुक्ति करेंगे।

इजरायल ने किया मारे जाने का दावा

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने सबसे पहले लारीजानी के मारे जाने का ऐलान किया था। इजरायली सेना ने बताया कि सोमवार देर रात हुए हवाई हमले में अली लारीजानी और ईरान की एलीट बासिज फोर्स के कमांडर को मार दिया गया। मंगलवार शाम के इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी लारीजानी के मारे जाने घोषणा करते हुए कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान के नेतृत्व कमजोर करना था, ताकि ईरानी लोगों को उसे हटाने का मौका मिल सके।

गुलाम रज़ा सुलेमानी की भी मौत

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पुष्टि की है कि बसिज संगठन के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी भी इजराइली हमले में मारे गए। गोलम रजा सुलेमानी आईआरजीसी के एक उच्च पदस्थ कमांडर थे। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के पहले दिन कमांडर-इन-चीफ समेत कई सैन्य कमांडरों की मौत के बाद, सुलेमानी की मौत युद्ध की सबसे महत्वपूर्ण खबरों में से एक है। बसिज, जो कि रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एक संगठनात्मक सहायक संस्था है, ईरानी सरकार की सुरक्षा शाखाओं में से एक है और आंतरिक संकटों के प्रबंधन और विरोध प्रदर्शनों को दबाने और नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

The Bhopal Shift: How Definite Success Classes Is Turning the City into India’s New NEET Preparation Hub

For decades, the path for medical aspirants in India was predictable: if you wanted a top-tier rank in NEET-UG, you packed your bags for established coaching hubs like Kota or Delhi. However, over the last few years, a significant shift has been brewing in Central India. Bhopal, once seen primarily as a regional academic center, has transformed into a high-performance hub that is now outperforming legacy cities in "selection-to-enrollment" ratios.This transition is backed by a series of high-stakes results and a growing reputation for academic excellence that has caught the attention of education analysts nationwide.

Breaking the "AIIMS Delhi" Barrier

The most telling indicator of a city's academic depth is its ability to place students in AIIMS Delhi—the most competitive medical institution in the country. For Bhopal, this was a rare feat, with the city often going seven or eight years without a single selection to the premier institute.

That cycle was decisively broken in the 2025 results. Aagam Jain, a student from the premier educational organization Definite Success Classes, secured All India Rank 45, earning a seat at AIIMS Delhi. For observers, this was a "proof of concept" for the city's evolving academic infrastructure, proving that the highest level of conceptual mastery required for top national ranks is now available within Bhopal through elite-level mentorship.

A Growing Magnet for National Student Migration

One of the most remarkable highlights of Bhopal’s rise is the changing geography of its student population. No longer just a center for local talent, Bhopal has become a "magnet city," drawing students from across the Indian map.

Enrollment data reveals a significant trend of student migration to the city, specifically to study under the guidance of Definite Success Classes. Families are now bypassing closer, traditional options to send their children to Bhopal from diverse regions, including:

● North & West: Rajasthan (Jaipur, Alwar, Jhalawar), Uttar Pradesh (Agra, Pratapgarh, Jhansi, Raebareli), and Punjab (Amritsar).

● East & South: West Bengal (Kolkata, Jalpaiguri), Bihar (Rohtas, Katihar), Jharkhand (Jamtara), and Maharashtra (Amravati).

● Remote Frontiers: Even students from the J&K region (Ladakh) and Himachal Pradesh (Kangra) are now choosing the academic stability of Bhopal over larger, more crowded metros.

Education professionals suggest this cross-state movement occurs because families perceive Bhopal to offer a balanced academic ecosystem—combining the high-intensity preparation of a legacy hub with a more supportive, less overwhelming environment.

A Legacy of Excellence: The Multi-Year Record

This national trust is built on a foundation of consistent, verified results. At the center of this trend is the focused approach of Definite Success Classes, which prioritizes academic stability and actual college conversion.

● The 2024 Performance: The city maintained its momentum with over 116 MBBS selections from this prestigious organization. This included elite placements such as Akshar Dubey (AIIMS Bhopal, 705/720), Aashna Jain (GGMC Mumbai, 700/720), and Nandini Jain (AIIMS Rajkot, 696/720).

● The 2023 Foundation: In this cycle, Definite Success Classes recorded a massive surge in students crossing the 650-mark threshold, resulting in 5 AIIMS selections (including the city topper Samridhi Saxena at 693/720) and over 70 Government Medical College seats.

The "Bhopal Factor": Transparency and Well-being

Beyond the numbers, the human factor plays a major role in why families are choosing Bhopal. In an era of high-pressure advertising, Definite Success Classes has set a standard for transparency by publicly verifying results with confirmed college allotments.

Furthermore, Bhopal offers a high quality of life with significantly lower stress and living costs compared to Tier-1 cities. This allows medical aspirants to focus entirely on their preparation in a safe, conducive environment, supported by a healthy student-to-teacher ratio that ensures they are never treated as "just another number."

The New Educational Map

The data suggests that the days of a few cities holding a monopoly on medical education are ending. Bhopal’s ascent—spearheaded by the consistent performance of prestigious organizations like Definite Success Classes—signals a new era where quality is determined by actual college conversion rates rather than the size of a billboard.

As more students from every corner of India choose Bhopal for their NEET journey, the city is no longer just a regional player; it is firmly established on the national map as a premier destination for the next generation of India’s doctors.

भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका', रूसी तेल खरीद को लेकर ईरान के मंत्री का बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य मोर्चे पर तो लड़ाई जारी है, जुबानी जंग भी तेज हो गई है। एक दूसरे पर वार-पलटवार का दौर चल रहा है। रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन पर तीखा हमला बोला है। अराघची ने अमेरिका पर हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन, भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा हैष वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट शेयर की है, जिसमें कहा गया है कि ईरान युद्ध रूस की ऑयल इंडस्टी के लिए संजीवनी बनकर आया है।

यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना

अरगची ने अपनी पोस्ट में यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान पर 'अवैध युद्ध' का साथ देकर सोचा था कि अमेरिका उसके बदले रूस के खिलाफ उनका साथ देगा, लेकिन अब वे निराश हैं। मंत्री ने लिखा, 'यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से अमेरिका रूस के खिलाफ उसकी मदद करेगा। यह बहुत दयनीय है।'

रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका ने दी छूट

अराघची की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगा प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने की जानकारी दी थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वित्त विभाग ने रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की मंजूरी देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि यह मंजूरी केवल उस रूसी तेल के लिए होगी जो पहले से ही समुद्र में मौजूद है। अमेरिका ने कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की छूट दी थी।

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात, बोले- बातचीत से हो सामाधान

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पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग जारी हैं। ईरान जंग की वजह से पूरी दुनिया में खलबली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल संकट भी है। इस तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बातचीत की है।

मौजूदा हालात पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में पैदा हुए गंभीर हालात और मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और सिटीजन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पूरे क्षेत्र की स्थिरता और शांति के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

संवाद और कूटनीति से हल निकालने की अपील

पीएम मोदी ने बताया, 'भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मैंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संवाद, कूटनीति का आग्रह किया।'

पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से की बात

पिछले दस दिनों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से भी बातचीत की है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए संयुक्त हमले के बाद से पश्चिम एशिया में संकट गहरा रहे संकट के बीच ये बातचीत हुई है। गौरतलब है कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले करते हुए इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इन हमलों का असर दुबई और दोहा जैसे वैश्विक व्यापार और विमानन केंद्रों के आसपास भी देखा गया है।

भारतीय जहाजों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, दो टैंकर सुरक्षित निकले, रंग लाई विदेश मंत्री जयशंकर की कूटनीति

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ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत के लिए अच्छी खबर आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसके बाद पुष्पक और परिमलनाम के भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस हॉर्मुज से गुजर गए।

भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता

पश्चिम एशिया में भड़के युद्ध के बीच पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन खतरे में है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पश्चिमी देशों के विदेशी जहाजों के लिए लगभग 'नो-गो जोन' बन चुका है। ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

एस जयशंकर और अराघची की बातचीत से निकला हल

यह घटनाक्रम भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद सामने आया है। इस मसले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की उनके ईरानी समकक्ष के बीच युद्ध छिड़ने के बाद कम से कम तीन बार बात हो चुकी है। जयशंकर ने मंगलवार को भी पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर अब्बास अराघची से बात की।

भारत के लिए ये क्यों खास है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है और ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है, जो होर्मुज से गुजरता है। युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) से पहले ही कई भारतीय जहाज फंस गए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के मुताबिक, 28 से 37 भारतीय फ्लैग वाले जहाज वहां थे, जिनमें 1000 से ज्यादा भारतीय सीफेयरर्स थे। ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों पर सख्ती बरती है, लेकिन भारत जैसे गैर-पश्चिमी देशों को छूट दी है। ऐसे में इसे काफी अहम माना जा रहा है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है।

-सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 31 प्रतिशत है।

-इस मार्ग में बाधा आने से इराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

-दुनिया के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

-इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार, सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर देखने को मिलता है।