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यूथ कांग्रेस ने 200 से ज्यादा पदाधिकारियों को किया सस्पेंड, जानें इतने बड़े एक्शन की वजह

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इंडियन यूथ कांग्रेस ने 7 राज्यों के 200 से अधिक पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई की वजह 'इंडिया' गठबंधन द्वारा बुलाई गई रैली में हिस्सा नहीं लेना है। यूथ कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली से गायब रहने वाले अब तक करीब 200 पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा 60 पदाधिकारी मध्य प्रदेश से सस्पेंड किए गए। इसके बाद गुजरात से 49 पदाधिकारी सस्पेंड किए गए। फिर पश्चिम बंगाल से 26 पदाधिकारी सस्पेंड किए गए। तेलंगाना से 14 पदाधिकारी सस्पेंड किए गए। यूपी से 13 पदाधिकारी सस्पेंड किया गया। हिमाचल प्रदेश से 13 पदाधिकारी सस्पेंड किए गए। हरियाणा से 10 पदाधिकारी सस्पेंड किए गए।

बड़ी संख्या में पदाधिकारी रैली में नहीं रहे मौजूद

कार्रवाई की जद में प्रदेश उपाध्यक्ष, महासचिव और जिलाध्यक्ष स्तर तक के नेता आए हैं। पार्टी ने इस कदम के जरिए संगठन के भीतर जवाबदेही और अनुशासन का संदेश देने की कोशिश की है। बता दें कि रैली के लिए युवा कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के सभी पदाधिकारियों को शामिल होने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पदाधिकारी कार्यक्रम में मौजूद नहीं रहे।

1 नवंबर रामलीला मैदान में जुटा था विपक्ष

बता दें कि दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को विपक्षी गठबंधन इंडिया की ओर से 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने हिस्सा लिया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की रैली को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए कहा था कि ज्ञानेश कुमार को इसके लिए मुकदमे का सामना करना पड़ेगा और उन्हें जेल जाना होगा।

दिल्ली की हवा दिवाली से पहले हुई जहरीली, प्रदूषण के साथ ठंड की भी एंट्री

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दिल्ली में दिवाली के त्योहार से पहले ही वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के साथ ठंड ने भी एंट्री मार ली है। दिवाली से पहले ही लोगों को सर्दी का अहसास होने लगा है। वहीं गिरते तापमान में प्रदूषण स्तर बढ़ने से सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही है।

अचानक प्रदूषण में तेजी

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आज सुबह इस संबंध में जानकारी जारी की है। बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आज सुबह इंडिया गेट के आसपास के इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक 399 दर्ज किया गया है। 31 अक्टूबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एकीउआई) महज 117 था, लेकिन चार दिन बाद 4 नवंबर को यह बढ़कर 399 पहुंच गया। अचानक प्रदूषण में आई इस तेजी ने लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं कि दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा में इतना जहर कहां से आ गया?

क्या है विशेषज्ञों की राय?

विशेषज्ञों के अनुसार, 31 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री थी। इससे पहले 29 और 30 अक्टूबर को बारिश हुई थी। इसके बाद तापमान में गिरावट आई और दो दिन यह 15 डिग्री के आसपास, जबकि दो दिन 16 डिग्री के करीब रहा। बारिश का असर कम होने के साथ नमी बढ़ी और हवा की रफ्तार भी 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम ही रही है। सीपीसीबी के पूर्व एयर लैब्र एक्सपर्ट डॉ. डी. साहा ने बताया कि कम तापमान और अधिक नमी की स्थिति में प्रदूषण के कण ऊपर नहीं जा पाते और जमीन के आसपास बने रहते हैं। ऐसे में गाड़ियों, उद्योगों, पटाखों और दूसरे स्रोतों से निकलने वाला धुआं लगातार जम होता रहता है।

कितना है दिल्ली का एक्यूआई?

सीपीसीबी द्वारा जारी नवीनतम जानकारी के मुताबिक, इंडिया गेट के आसपास के क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 399 रहा। इसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। दिल्ली एम्स के आसपास के इलाके में वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई है। नौरोज़ी नगर रिंग रोड पर एक्यूआई 416 तक पहुंच गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है। आनंद विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक 296 पाया गया, और इस क्षेत्र की हवा को 'खराब' श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। ये आंकड़े दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण की व्यापकता को उजागर करते हैं। अक्षरधाम मंदिर के आसपास 293 एक्यूआई दर्ज हुआ

दिवाली से पहले सर्दी का अहसास

प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही तापमान में भी गिरावट देखी जा रही है। भारतीय मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार आज अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। हालांकि सुबह के बाद उत्तर-पश्चिमी हवाएं 10-15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने से धुंध के छंटने में थोड़ी राहत मिल सकती है। आज बारिश की कोई संभावना नहीं है।

एक्टर अजय देवगन के बंगले पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण पर बीएमसी की कार्रवाई

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बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर बुरे फंस गए हैं। मुंबई के जुहू इलाके में आज सुपरस्टार अजय देवगन के बंगले पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बुलडोजर चलाया है। बीएमसी ने अभिनेता अजय देवगन के जुहू स्थित बंगले में चल रहे निर्माण कार्य को 'अनधिकृत' (बिना अनुमति के) करार दिया है। बीएमसी ने इस बंगले में किए गए अवैध निर्माण को ढहा दिया है।

एक्शन से पहले बीएमसी ने भेजा था नोटिस

बीएमसी के अनुसार, बंगले के भीतर बिना जरूरी मंजूरी के सिपोरेक्स ब्लॉक का इस्तेमाल कर दीवारों, खिड़कियों और अन्य ढांचागत हिस्सों में बदलाव किया जा रहा था। इस सिलसिले में बीएमसी के बिल्डिंग प्रपोजल विभाग ने मुंबई महानगरपालिका अधिनियम (1888) की धारा 354ए के तहत 10 सितंबर 2026 को काम रोकने का नोटिस दिया था।

नोटिस के बाद भी जारी रहा निर्माणकार्य

देवगन परिवार की ओर से जवाब के लिए चार हफ्ते का समय मांगा गया था, लेकिन तय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई दस्तावेज या जवाब पेश नहीं किया गया। यही नहीं, नगर निगम का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बाद भी काम बंद नहीं हुआ। आखिरकार, बिना अनुमति हो रहे इस निर्माण पर बीएमसी की टीम ने मौके पर पहुंचकर तोड़फोड़ की कार्रवाई की। बता दें कि जुहू की कपोल कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में स्थित यह बंगला अजय देवगन और उनकी मां वीणा देवगन का है। अजय देवगन का यह बंगला 7,802 वर्ग फुट पर बना है।

बंगले के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर विवाद

यह पूरा विवाद बंगले के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर शुरू हुआ। 10 अगस्त 2026 को देवगन परिवार ने इस बंगले को 'फ्लोरियन हुरेल सैलून्स प्राइवेट लिमिटेड' को 5 साल के लिए लीज पर दिया था। यह डील 10 करोड़ 61 लाख रुपये में हुई थी, जिसका शुरुआती मासिक किराया 16 लाख रुपये तय किया गया था। बंगले में व्यावसायिक सैलून और स्पा खोलने की योजना थी, जिसका कपोल सोसाइटी के निवासी लगातार विरोध कर रहे थे। सोसाइटी का कहना है कि बंगला केवल किराए (लीव-एंड-लाइसेंस) पर देने के लिए एनओसी दी थी, न कि इसका व्यावसायिक उपयोग करने या ढांचागत बदलाव करने के लिए। सोसाइटी ने देवगन परिवार को कानूनी मंजूरी दिखाने के लिए 15 दिन का समय दिया था। जब कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले, तो सोसाइटी ने 8 सितंबर को बीएमसी से शिकायत की और महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम (1966) की धारा 43 तथा 52 से 54 के तहत कार्रवाई की मांग की थी।

ध्रुव राठी की बढ़ी मुसीबत, कोर्ट ने जारी किया वारंट, जानें क्या है 8 साल पुराना मामला?

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यूट्यूबर ध्रुव राठी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 8 साल पुराने मामले में ध्रुव राठी के खिलाफ बड़ा एक्शन हुआ है। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 2018 के मानहानि मामले में यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।

अदालत ने विकास सांक्रित्यायन की ओर से दायर मानहानि मामले में यह वारंट जारी किया है। . शिकायतकर्ता का आरोप है कि ध्रुव राठी के ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ वीडियो को लेकर यह मामला दर्ज कराया गया था। पिछली सुनवाई में अदालत ने समन की तामील के लिए दस्ती सेवा की अनुमति भी दी थी। आज यानी 17 अक्टूबर को मामले की सुनवाई थी।

मामले की सुनवाई कर रहे साकेत कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल जैन ने जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। अदालत को बताया गया कि ध्रुव राठी को नोटिस भेजा गया था, लेकिन उनके पते पर पहुंचने पर परिसर बंद मिला।

इससे पहले अदालत ने इस सप्ताह ध्रुव राठी को नए सिरे से समन जारी किया था। शिकायतकर्ता ने मामले की सुनवाई की तारीख पहले करने की मांग की थी। मामले की सुनवाई पहले 20 नवंबर को होनी थी। शिकायतकर्ता ने अदालत में कहा था कि ध्रुव राठी आमतौर पर विदेश में रहते हैं, लेकिन सीजेपी के प्रदर्शन के सिलसिले में फिलहाल भारत में हैं। ऐसे में उन्हें जल्द समन भेजने की मांग की गई थी।

रात भर हिरासत के बाद नेहा बोरा रिहा, तिरंगा मार्च से पहले गिरफ्तार दिपके की आज पेशी

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मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन कर रहे युवा आंदोलनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह नेहा को रिहा कर दिया। वहीं, तिरंगा मार्च से पहले गिरफ्तार कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को आज दोपहर 12 बजे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाएगा।

रिहाई के बाद नेहा बोरा ने क्या कहा?

शनिवार सुबह रिहा आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा, ''हर संभव तरीके से कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, मानो वे कोई खूंखार अपराधी हों। देश में लंबे समय से ऐसा होता आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ तौर पर उजागर कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है। चाहे दिन हो या शाम, उन्हें हिरासत में लेकर पूरी रात थाने में रखा जाता है और अगली सुबह या शाम को रिहा किया जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत ऐसा किया जा रहा है? किस कानून या आदेश के तहत किसी व्यक्ति को पूरी रात हिरासत में रखना जायज है? कानूनी तौर पर सूर्यास्त के बाद लोगों, खासकर महिलाओं को रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।''

अराजकता-अव्यवस्था का नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा

नेहा बोरा ने कहा, ''इसके अलावा, अब अराजकता और अव्यवस्था का एक नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? क्या वह, जो आपने मध्य दिल्ली में पैदा की है? दिल्ली के लोग राहत की सांस तक नहीं ले पा रहे हैं। वे काम पर जाने के लिए जिस भी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया भारत के लोगों को बख्श दीजिए। ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कीजिए और एसआईआर पर रोक लगाइए, ताकि देश के आम नागरिक राहत की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रहें।''

रूस पर ट्रंप के रूख में नरमी, तेल-गैस खरीद से हटाया बैन, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा टला

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। जिन्होंने राहत की सांस ली है।

ट्रंप के अचानक लिए फैसले की क्या है वजह?

ट्रंप ने शुक्रवार शाम जारी एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 के कुछ प्रावधानों से छूट देने का ऐलान किया। ट्रंप ने शुक्रवार शाम जारी कार्यकारी आदेश में कहा, “मैं इसके तहत ग्राहम कानून में दिए गए ऐसे प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के लागू होने से छूट दे रहा हूं।” उन्होंने कहा कि इस समय ऐसी छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस संबंध में उन्होंने कांग्रेस को प्रमाणपत्र भी सौंपा है।

प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था

इस कानून पर ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रंप को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रंप ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस और उससे तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर सख्त आर्थिक कदम उठाने का अधिकार मिला था। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रंप ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी

भारत को होगा फायदा

अमेरिका के इस फैसले से भारत को भी फायदा होगा। पिछले कुछ समय से अमेरिका लगातार नई दिल्ली पर मॉस्को से सस्ता कच्चा तेल और ईंधन न खरीदने का दबाव बना रहा था। ऐसा न करने पर भारी टैरिफ की धमकी भी मिल रही थी। हालांकि, भारत अब तक अमेरिका की इन धमकियों के आगे झुका नहीं है और लगातार रूस से तेल ले रहा है। अब अमेरिका डीजल की बेकाबू होती कीमतों पर काबू पाने के लिए ट्रंप ने खुद रूस से 3 लाख टन से अधिक डीजल खरीदने और पाबंदियों में छूट देने का आदेश जारी कर दिया है।

देश में अराजकता फैलाना चाहती है कांग्रेस, राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर बड़ा हमला

#rajnathsinghonrahulgandhicjpprotest

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अराजकता से सत्ता हासिल करना चाहती है। युवाओं को अराजक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं।

युवाओं को भड़काने का आरोप

वामपंथी छात्र संगठन ‘आइसा’ की अध्यक्ष नेहा बोरा के बांग्लादेश में छात्र आंदोलन को लेकर दिए हालिया बयान के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेस वार्ता कर कड़ा संदेश दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह से युवाओं को भड़का रहे ये स्पष्ट करता है कि इनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। कांग्रेस और उनके राजनीतिक सहयोगी प्रत्यक्ष रूप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र निर्माण के विचारों में लगाने की बजाय राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के साधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

लोकतंत्र अराजकता फैलाने का लाइसेंस नहीं-राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को समझना चाहिए कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने या भारत के विकास में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है। राजनीतिक हितों के लिए भारत की संवैधानिक संस्थाओं की बलि नहीं दी जा सकती। इस बात को समझने की जरूरत है। झूठा आक्रोश दिखाकर, संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करके और राजनीतिक अवसरवाद के जरिए भारत की विकास यात्रा को प्रभावित नहीं किया जा सकता। राहुल गांधी को बाधा डालने वाली राजनीति करने के बजाय, जन-जनादेश का सम्मान करना चाहिए और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्म-चिंतन करना चाहिए।

देश में अराजकता पैदा कर सत्ता हासिल करने की साजिश-राजनाथ सिंह

बीजेपी नेता ने कहा कि बांग्लादेश की तर्ज पर शासन बदलना चाहते हैं और एक प्रेस वार्ता में खुलकर कहते हैं कि उसने शासन बदलने की प्रेरणा बांग्लादेश से ली है। तो दूसरा डंके की चोट पर सरकार गिराने की बात करता है। राजनाथ बोले- इससे यह साफ होता है कि इनका इकलौता एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है। शासन बदलने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इससे पता चलता है कि उनकी लड़ाई चुनाव सुधार, SIR, ज्ञानेश कुमार, देश के नौजवानों के उज्जवल भविष्य के लिए नहीं है। उनकी लड़ाई देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की उनकी साजिश है।

पीएम मोदी दिसंबर में जाएंगे कनाडा, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने किया तारीखों का ऐलान

#pmnarendramodiwillvisitcanadaondecember11_and12

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर को कनाडा का दौरा करेंगे। ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को इसका ऐलान किया। बता दें कि अभी कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत की यात्रा पर हैं। इसी बीच पीएम मोदी का कनाडा दौरा भी तय हो गया है। ये दौरा दोनों देशों के रिश्ते को लेकर अहम माना जा रहा है। दरअसल, 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। अब आपसी सहयोग बढ़ाने और रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच मोदी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच फोन पर हुई बात

यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद की गई है। ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर, 2026 को कनाडा का दौरा करेंगे।' पोस्ट में आगे कहा गया है, 'प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हाल ही में हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने संबंधों में सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने और व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में ठोस परिणाम प्राप्त करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की।'

क्यों अहम है पीएम मोदी का कनाडा यात्रा

भारत और कनाडा के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच यह दौरा अहम माना जा रहा है। भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों की कथित भूमिका को लेकर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने खारिज किया था। दोनों देशों ने एक-दूसरे के छह-छह राजनयिकों को निष्कासित भी किया था। हालांकि, मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्तों में सुधार और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों देश इस साल के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर सालाना 70 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

हिंदू धर्म बदलने पर नहीं मिलेगा आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट का रिजर्वेशन पर बड़ा फैसला

#supremecourtsaysnoreservationbenefitsifyouchangeyourreligion

रिजर्वेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था के पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जाति का व्यक्ति दूसरा धर्म अपनाकर आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता। ये फैसला तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनाया है। इसके साथ ही मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

इस मामले में हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने वाले कुछ लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) की श्रेणी में शामिल कर आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने कहा है कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था के पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जाति का व्यक्ति दूसरा धर्म अपनाने के बाद आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जो व्यक्ति हिंदू सामाजिक व्यवस्था से निकलकर किसी गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था में चला जाता है, वह केवल अपने धर्म परिवर्तन से पहले की सामाजिक पिछड़ेपन की स्थिति के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत मिलने वाले विशेष लाभों का दावा नहीं कर सकता। पिछली सामाजिक व्यवस्था में झेला गया पिछड़ापन, नए धर्म में भी स्वतः ही लागू नहीं हो जाता, जिससे उसे उस नए धर्म में ‘पिछड़ा वर्ग’ का दर्जा मिल सके।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के एक व्यक्ति की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का जन्म हिंदू परिवार में हुआ था। उसने वर्ष 2016 में इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार एक महिला से निकाह किया और इस्लाम धर्म अपना लिया। इसके बाद उसने अपना नाम बदलकर समीर अहमद रख लिया। याचिकाकर्ता के मुताबिक, कायाथार स्थित सुन्नत जमात ने वर्ष 2015 में एक प्रमाण पत्र जारी किया था, जिसमें उसके इस्लाम स्वीकार करने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उसने खुद को मुस्लिम लेब्बई समुदाय का बताते हुए सामुदायिक प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। हालांकि, कायाथार के तहसीलदार ने उसका आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद उसने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के फैसले को किया था रद्द

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसके तहत इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण का लाभ देने की अनुमति दी गई थी। इस आदेश के तहत अन्य पिछड़े वर्गों के ऐसे व्यक्तियों को जो इस्लाम धर्म अपना लेते थे, पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। मामले में तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार का तर्क है कि धर्म परिवर्तन के कारण सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

दिल्ली में इंटरनेट बंद पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी माफी, हलफनामा में कहा- जानबूझकर नहीं किया

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दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के चलते 10 अक्टूबर को कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा बाधित हुई थी। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई थी। इस मामले में केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया गया है। केंद्र ने इसे बिना अनुमति प्रदर्शन रोकने के लिए उठाया गया कदम बताया और बिना शर्त माफी मांगी।

अवमानना के आरोपों से इनकार

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बुधवार की देर शाम को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नोटिस का जवाब दिया। इसमें केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। हालांकि, गोविंद मोहन ने अवमानना के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इंटरनेट पाबंदियां लगाने के संबंध में 9 अक्टूबर को दिए गए कोर्ट के आदेश का कोई जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया।

नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन का हवाला

सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर केंद्र सरकार की ओर से गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि 9 अक्टूबर को केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों का मकसद शांति बनाए रखना और कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकना था। उन्होंने बताया कि बिना जरूरी अनुमति के एक विरोध प्रदर्शन होने वाला था। साथ ही, उन्होंने नीट पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस को आए अनुभवों का भी हवाला दिया।

दिल्ली में 9 और 10 अक्टूबर को बंद रही थी सेवाएं

बता दें कि केंद्र के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का अनुरोध किया था। सरकार ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद इसे मंजूरी दी थी। जिसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन वाले इलाके में इंटरनेट सेवा बाधित रही थी। दिल्ली के रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट प्रतिबंध था। यह पाबंदी केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर थी, इसमें वाई-फाई और ब्रॉडबैंड कनेक्शन शामिल नहीं थे।