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राहुल गांधी के बहस का प्रस्ताव अभी भी कायम’ थरूर ने पीएन मोदी को बहस की खुली चुनौती

#shashitharoorsupportrahulgandhiofferto_debate

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने सरकार को खुली बहस की पेशकश की है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के बहस के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा है कि यदि संसद का सत्र फिर से बुलाया जाता है, तो यह प्रस्ताव अभी भी कायम है।

थरूर ने कहा, ‘संसद का अभी सत्रावसान नहीं हुआ है, इसलिए इसे फिर से बुलाया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि यदि संसद की बैठक होती है तो राहुल गांधी का बहस का प्रस्ताव अब भी बरकरार है।’ बता दें कि 25 नवंबर 2026 को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होगा। शीतकालीन सत्र में इस बार गरमागरम बहस देखने को मिल सकती है। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की खुली चुनौती दे चुके हैं। पीएम मोदी की तरफ से अब तक राहुल की चुनौती पर कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई है, लेकिन अमित शाह सहित बीजेपी के दूसरे दिग्गज नेता राहुल को संसद में बहस करने की नसीहत दे रहे हैं।

अमित शाह ने संसद में बहस की चुनौती दी

इससे पहले, गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती दी थी। हरियाणा के करनाल में एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा था कि यदि राहुल गांधी के आरोपों में सच्चाई, तथ्य और तर्क हैं तो उन्हें सड़क पर राजनीति करने के बजाय संसद में आकर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि राहुल गांधी सरकार के जवाबों का सामना नहीं कर पाएंगे और हमेशा की तरह पीछे हट जाएंगे।

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

अमित शाह की यह चुनौती राहुल गांधी की उस पेशकश के एक दिन बाद आई थी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुली बहस करने की बात कही थी। किसी भी स्टेज पर आप जगह चुनिए और मेरे साथ बहस कीजिए। देशद्रोही कौन है। विदेशी फोर्स का कनेक्शन किसका है और किस प्रकार का कनेक्शन है। जल्दी से जल्दी कीजिए। डरिए मत। दोनों मिलेंगे। मीडिया होगी। देश के युवा होंगे। टेबल होगी। एक साइड आप बैठेंगे, एक साइड मैं। आप जिसके जज बनाना चाहते हो बना लो। चलो मोहन भागवत जी को बैठा लो और फिर डिबेट करते हैं।

ब्रिक्स पर बंटी कांग्रेस, चिदंबरम बोले- भारत को क्या मिला, थरूर ने गिना दिए फायदे

#pchidambaramshashitharoorbrics_summit

देश की राजधानी दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तरह से तैयार है। दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का अगले कुछ दिनों तक भारत में जमावड़ा रहेगा। ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ गए हैं। वहीं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 सितंबर को भारत आने वाले हैं। ऐसे में दुनिया भर की नजर भारत पर लगी है। वहीं, देश में इसपर भी सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है।

कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर

ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है। समिट को लेकर कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। चिदंबरम पर इस समिट को लेकर सवाल उठाया। तो इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर जवाब दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर देश को मिल रहे इस मौके से गदगद हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की नकारात्मक सोच की हवा निकाल दी है।

कांग्रेस सांसद थरूर ने क्या कहा?

भारत की अगुवाई में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है, 'सबसे पहले बात ये है कि हम ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मुहैया करवा रहे हैं।' थरूर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को गुरुवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन ग्लोबल साउथ के वे महत्वपूर्ण 11 खिलाड़ी जुट रहे हैं, जो बहुत अधिक विविधता वाले विचारों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करते हैं और ये वो देश भी हैं जिनकी हम इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे हैं।'

चिदंबरम ने क्या कहा था?

इससे पहले बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से भारत को मिले लाभों पर सवाल उठाया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा नहीं देखा है। उन्होंने बताया कि भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और क्वाड सहित कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इनसे देश को कौन से ठोस लाभ मिले हैं।

सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?

वहीं, पी. चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, 'चिदंबरम बहुत अनुभवी और गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति हैं। हम सभी उनकी बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं। अगर वे कोई चेतावनी दे रहे हैं, तो हमें उसे सही भावना से लेना चाहिए। इनमें से कई मल्टीनेशनल ऑर्गनाइजेशन सिर्फ चर्चा कर पाते हैं, लेकिन उनसे कोई नतीजा नहीं निकलता। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि हमें लीडरशिप की जरूरत है ताकि ऐसे नतीजे मिलें जिन पर हम गर्व कर सकें। मौजूदा सरकार को चिदंबरम के सुझावों पर ध्यान देना चाहिए।'

थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना, 'छात्रों की गूंज' पर बोले- हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए

#shashitharooroncongressgenzchhatronkigoonjcjpstudent_protest

कांग्रेस सांसद शशि थरूर आए दिन अपनी ही पार्टी को लेकर ऐसा बयान देते हैं कि वह सुर्खियों में आ जाते हैं। एक बार फिर थरूर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाने का काम किया है। राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को छात्रों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात पर थरूर ने कहा, पार्टी शायद युवाओं और खासकर Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रही।

'छात्रों की गूंज' सीजेपी प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा-थरूर

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल में जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, वे मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा पहले से ही थे। जिसमें राहुल गांधी छात्रों से पेपर लीक के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान सीजेपी के प्रदर्शन जितना असर नहीं छोड़ सका। शशि थरूर ने मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर बातचीत के दौरान यह बात कही।

थरूर बोले- हमें समझना होगा हम क्या नहीं कर पाए?

थरूर ने कहा, इसीलिए हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना होगा कि कहीं वह छात्रों की बात सुनने में तो नाकाम नहीं रही। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत है और कांग्रेस को यह समझना होगा कि वह इस मामले में कहां पीछे रह गई।

क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए-थरूर

थरूर ने पूछा, “क्या हम ‘जेन ज़ी’ की नब्ज नहीं पकड़ पाए?” उनके इस बयान को कांग्रेस की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच को लेकर अहम आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के कैंपेन को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही थरूर का यह आत्ममंथन वाला बयान सियासी चर्चा का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने 17 जून को शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शामिल था। शुरुआती प्रदर्शनों में से एक के तहत नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 12 मई को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन उस घटना के कुछ दिनों बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान देहरादून पहुंचा। वहां राहुल गांधी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की। राहुल गांधी ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और परिवारों से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस की मुहिम उस व्यापक छात्र लामबंदी में नहीं बदल पाई

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने देश हिला दिया

वहीं, दूसरी ओर सीजेपी ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के पहले जेन जी प्रदर्शन के नाम से चर्चित हुआ। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो प्रदर्शन और तेज हुआ। बाद में कई अन्य छात्र और कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में कॉकरेच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया। लेकिन तय मार्च से कुछ दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की। जिसके बाद सियसी विवाद बढ़ा जो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के साथ थमा।

राहुल गांधी के बहस का प्रस्ताव अभी भी कायम’ थरूर ने पीएन मोदी को बहस की खुली चुनौती

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने सरकार को खुली बहस की पेशकश की है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के बहस के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा है कि यदि संसद का सत्र फिर से बुलाया जाता है, तो यह प्रस्ताव अभी भी कायम है।

थरूर ने कहा, ‘संसद का अभी सत्रावसान नहीं हुआ है, इसलिए इसे फिर से बुलाया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि यदि संसद की बैठक होती है तो राहुल गांधी का बहस का प्रस्ताव अब भी बरकरार है।’ बता दें कि 25 नवंबर 2026 को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होगा। शीतकालीन सत्र में इस बार गरमागरम बहस देखने को मिल सकती है। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की खुली चुनौती दे चुके हैं। पीएम मोदी की तरफ से अब तक राहुल की चुनौती पर कोई प्रतिक्रिया तो नहीं आई है, लेकिन अमित शाह सहित बीजेपी के दूसरे दिग्गज नेता राहुल को संसद में बहस करने की नसीहत दे रहे हैं।

अमित शाह ने संसद में बहस की चुनौती दी

इससे पहले, गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती दी थी। हरियाणा के करनाल में एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा था कि यदि राहुल गांधी के आरोपों में सच्चाई, तथ्य और तर्क हैं तो उन्हें सड़क पर राजनीति करने के बजाय संसद में आकर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि राहुल गांधी सरकार के जवाबों का सामना नहीं कर पाएंगे और हमेशा की तरह पीछे हट जाएंगे।

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

अमित शाह की यह चुनौती राहुल गांधी की उस पेशकश के एक दिन बाद आई थी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुली बहस करने की बात कही थी। किसी भी स्टेज पर आप जगह चुनिए और मेरे साथ बहस कीजिए। देशद्रोही कौन है। विदेशी फोर्स का कनेक्शन किसका है और किस प्रकार का कनेक्शन है। जल्दी से जल्दी कीजिए। डरिए मत। दोनों मिलेंगे। मीडिया होगी। देश के युवा होंगे। टेबल होगी। एक साइड आप बैठेंगे, एक साइड मैं। आप जिसके जज बनाना चाहते हो बना लो। चलो मोहन भागवत जी को बैठा लो और फिर डिबेट करते हैं।

ब्रिक्स पर बंटी कांग्रेस, चिदंबरम बोले- भारत को क्या मिला, थरूर ने गिना दिए फायदे

#pchidambaramshashitharoorbrics_summit

देश की राजधानी दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तरह से तैयार है। दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का अगले कुछ दिनों तक भारत में जमावड़ा रहेगा। ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ गए हैं। वहीं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 12 सितंबर को भारत आने वाले हैं। ऐसे में दुनिया भर की नजर भारत पर लगी है। वहीं, देश में इसपर भी सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है।

कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर

ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है। समिट को लेकर कांग्रेस के अंदर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। चिदंबरम पर इस समिट को लेकर सवाल उठाया। तो इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर जवाब दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर देश को मिल रहे इस मौके से गदगद हैं और उन्होंने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की नकारात्मक सोच की हवा निकाल दी है।

कांग्रेस सांसद थरूर ने क्या कहा?

भारत की अगुवाई में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है, 'सबसे पहले बात ये है कि हम ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मुहैया करवा रहे हैं।' थरूर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को गुरुवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन ग्लोबल साउथ के वे महत्वपूर्ण 11 खिलाड़ी जुट रहे हैं, जो बहुत अधिक विविधता वाले विचारों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करते हैं और ये वो देश भी हैं जिनकी हम इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे हैं।'

चिदंबरम ने क्या कहा था?

इससे पहले बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से भारत को मिले लाभों पर सवाल उठाया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा नहीं देखा है। उन्होंने बताया कि भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और क्वाड सहित कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इनसे देश को कौन से ठोस लाभ मिले हैं।

सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?

वहीं, पी. चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, 'चिदंबरम बहुत अनुभवी और गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति हैं। हम सभी उनकी बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं। अगर वे कोई चेतावनी दे रहे हैं, तो हमें उसे सही भावना से लेना चाहिए। इनमें से कई मल्टीनेशनल ऑर्गनाइजेशन सिर्फ चर्चा कर पाते हैं, लेकिन उनसे कोई नतीजा नहीं निकलता। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि हमें लीडरशिप की जरूरत है ताकि ऐसे नतीजे मिलें जिन पर हम गर्व कर सकें। मौजूदा सरकार को चिदंबरम के सुझावों पर ध्यान देना चाहिए।'

थरूर ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना, 'छात्रों की गूंज' पर बोले- हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए

#shashitharooroncongressgenzchhatronkigoonjcjpstudent_protest

कांग्रेस सांसद शशि थरूर आए दिन अपनी ही पार्टी को लेकर ऐसा बयान देते हैं कि वह सुर्खियों में आ जाते हैं। एक बार फिर थरूर ने अपनी ही पार्टी को आइना दिखाने का काम किया है। राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन को छात्रों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात पर थरूर ने कहा, पार्टी शायद युवाओं और खासकर Gen Z की नब्ज पकड़ने में नाकाम रही।

'छात्रों की गूंज' सीजेपी प्रदर्शन जितना असरदार नहीं रहा-थरूर

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल में जिन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया, वे मुद्दे कांग्रेस के छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा पहले से ही थे। जिसमें राहुल गांधी छात्रों से पेपर लीक के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान सीजेपी के प्रदर्शन जितना असर नहीं छोड़ सका। शशि थरूर ने मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर बातचीत के दौरान यह बात कही।

थरूर बोले- हमें समझना होगा हम क्या नहीं कर पाए?

थरूर ने कहा, इसीलिए हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम क्या नहीं कर पाए? कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना होगा कि कहीं वह छात्रों की बात सुनने में तो नाकाम नहीं रही। उन्होंने कहा कि राजनीति में लोगों की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत है और कांग्रेस को यह समझना होगा कि वह इस मामले में कहां पीछे रह गई।

क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए-थरूर

थरूर ने पूछा, “क्या हम ‘जेन ज़ी’ की नब्ज नहीं पकड़ पाए?” उनके इस बयान को कांग्रेस की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पार्टी की पहुंच को लेकर अहम आत्ममंथन के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी के कैंपेन को लेकर कांग्रेस के भीतर से ही थरूर का यह आत्ममंथन वाला बयान सियासी चर्चा का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने 17 जून को शुरू किया 'छात्रों की गूंज' अभियान

बता दें कि पेपर लीक के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वालों में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई भी शामिल था। शुरुआती प्रदर्शनों में से एक के तहत नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने 12 मई को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन उस घटना के कुछ दिनों बाद हुआ था, जब पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट परीक्षा रद्द कर दी थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान शुरू किया था। इसके बाद यह अभियान देहरादून पहुंचा। वहां राहुल गांधी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से बातचीत की। राहुल गांधी ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों और परिवारों से बातचीत की। इसके बावजूद कांग्रेस की मुहिम उस व्यापक छात्र लामबंदी में नहीं बदल पाई

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन ने देश हिला दिया

वहीं, दूसरी ओर सीजेपी ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के खिलाफ 20 जून से प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन ने सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के पहले जेन जी प्रदर्शन के नाम से चर्चित हुआ। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो प्रदर्शन और तेज हुआ। बाद में कई अन्य छात्र और कार्यकर्ता भी उनके साथ जुड़ गए। बाद में कॉकरेच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया। लेकिन तय मार्च से कुछ दिन पहले वांगचुक को जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की। जिसके बाद सियसी विवाद बढ़ा जो धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के साथ थमा।