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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यों लिया ज्ञानेश कुमार का नाम? भारत में बढ़ी सियासी हलचल

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दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका में चुनावी पहचान को लेकर चल रही बहस के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनावी व्यवस्था की तारीफ की है। ट्रंप ने भारत के चुनाव सिस्टम का ज़िक्र करते हुए अमेरिका में वोटिंग के नियमों में बदलाव की अपनी मांग दोहराई है। यही नहीं, ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लिया है। ट्रंप ने कहा है कि भारत में इतनी बड़ी आबादी चुनाव में हिस्सा ले सकती है और वहां वोटर की पहचान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था है, तो अमेरिका में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

ट्रंप ने की भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में वोटिंग के नियम कड़े करने और 'सेव अमेरिका एक्ट' लागू करने की मांग करते हुए भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ की है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप ने लिखा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनकी सरकार से पूछा था कि अमेरिका में बिना किसी फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं।

वेलिड फ़ोटो आईडी की अनिवार्यता का भी ज़िक्र

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि भारत के हालिया आम चुनाव में करीब 64.6 करोड़ लोगों ने मतदान किया और एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं ने डाक मतपत्र का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र जरूरी था। हमें अभी 'द सेव अमेरिका एक्ट' पास करने की जरूरत है। ट्रंप ने भारत के चुनावी मॉडल को अमेरिका में अनिवार्य फोटो पहचान की जरूरत के समर्थन में उदाहरण के तौर पर पेश किया। उनका कहना है कि इससे चुनाव में धोखाधड़ी की आशंका को कम किया जा सकता है।

क्या है 'द सेव अमेरिका एक्ट'?

ट्रंप जिस सेव अमेरिका एक्ट के समर्थन में लगातार आवाज उठा रहे हैं, उसका पूरा नाम सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजीबिलिटी एक्ट है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका में मतदान के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को अपनी नागरिकता का प्रमाण देना होगा। इसके अलावा देशभर में मतदाता पहचान पत्र की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है। कानून डाक से मतदान की सुविधा पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने की दिशा में है। ट्रंप इसे चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए जरूरी कदम बताते हैं।

अमेरिका में वोट डालने के क्या नियम हैं?

अमेरिका में भारत की तरह पूरे देश में एक जैसा वोटर आईडी नियम नहीं है। संघीय कानून के तहत राष्ट्रीय चुनाव में वोट डालने वाला व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होना चाहिए, लेकिन नागरिकता का अनिवार्य प्रमाण देना जरूरी नहीं है। प्रस्तावित क़ानून में इसे अनिवार्य करने की बात कही गई है। वहां चुनाव मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के स्तर पर संचालित होते हैं। इसलिए वोट डालने के लिए पहचान पत्र की ज़रूरत भी राज्य के हिसाब से बदलती है। अमेरिकी सरकार की वेबसाइट के मुताबिक, कुछ राज्यों में मतदान केंद्र पर फोटो आईडी दिखानी होती है। इनमें ड्राइविंग लाइसेंस, राज्य सरकार का आईडी कार्ड या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज़ शामिल हो सकते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेटर्स यानी एनसीएसएल के मुताबिक 2026 में 36 राज्यों में मतदान केंद्र पर किसी न किसी तरह की पहचान दिखाने का नियम है, जबकि 14 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में मतदाता की पहचान दूसरे तरीकों से सत्यापित की जाती है।

ट्रंप पर भड़की कांग्रेस

इधर, ट्रंप ने जिस तरह से भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र किया है, उससे कांग्रेस भड़क गई है। पार्टी के मीडिया प्रभारी और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के जरिए डोनाल्ड ट्रंप से यहां तक कह दिया है कि वे हमेशा के लिए सीईसी ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाएं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने एक्स पोस्ट पर लिखा है-डियर डोनाल्ड ट्रंप, प्लीज ज्ञानेश कुमार गुप्ता को अमेरिका ले जाइए। और उन्हें वहीं रखिए। हम अगली ही फ्लाइट से अपने ईवीएम भी भेज देंगे। आपने हमारा जितना भी अपमान किया और जितना भी धमकाया, उसके बदले आपके लिए कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं। भारत से SIR को प्यार के साथ।'

भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ से घिरे डोनाल्ड ट्रंप, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका केस

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति एक बार फिर चर्चा में है। डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है। 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन 25 राज्यों ने 60 देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए नए टैरिफ के फैसले को चुनौती दी है। इन राज्यों का आरोप है कि ये नए टैरिफ फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए आयात करों को बदलने का बहाना हैं।

नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर

सोमवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों ने 60 व्यापारिक साझेदारों से आयात पर नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर यह मुकदमा 10 से 12.5 फीसदी के उन टैरिफ को निशाना बनाता है। यह टैरिफ पिछले महीने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे।

राज्यों का क्या है तर्क?

अपनी शिकायत में राज्यों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है। इतना ही नहीं, इसके लिए पर्याप्त वजह भी नहीं बताई गई। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को दुनिया भर की सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी रोकने के नाम पर लगाया, लेकिन दोनों के बीच कोई साफ संबंध नहीं है। याचिका में कहा गया है कि प्रभावित 60 देशों से आने वाले ज्यादातर सामान पर 10% या 12.5% टैरिफ लगाया गया है। इन देशों का अमेरिका के कुल आयात में करीब 99.4% हिस्सा है।

60 देशों के खिलाफ नया टैरिफ

नए टैरिफ तब प्रभावी हुए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अस्थायी टैरिफ की समय सीमा समाप्त हो गई। इस टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को हुई थी। ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 व्यापारिक साझेदारों के आयात पर लागू होते हैं। नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा है कि अमेरिका में एक सदी से जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है। अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा करने का समय आ गया है।

जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से लगा था झटका

इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई थी।

अब ट्रेड एक्ट की धारा 301 का रूख

अब ट्रंप 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत अधिक स्थायी टैरिफ लगा रहे हैं। यह धारा राष्ट्रपति को अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल देशों के खिलाफ आयात कर लगाने की अनुमति देती है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन पर बड़े टैरिफ लगाने के लिए धारा 301 का इस्तेमाल किया था, और वे अदालती चुनौतियों में भी टिके रहे थे।

सऊदी अरब और अमेरिका में न्यूक्लियर डील, जानें ट्रंप की इस मंजूरी के बाद कैसे बदलेंगे वैश्विक समीकरण?

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अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी 2026 से तनाव जारी है। दोनों देशों के बीच तनाव मामूली नहीं है। फरवरी से जारी जंग ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। अमेरिका और ईरान के बीच इस हालिया संघर्ष और तनाव का मुख्य कारण ईरान का तेजी से बढ़ता परमाणु कार्यक्रम, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता है। हालांकि, इसी बीच मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक ऐतिहासिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी है।

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अमेरिका देगा साथ

इस समझौते के तहत सऊदी अरब को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने में अमेरिका सहयोग देगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह समझौता भविष्य में सऊदी अरब को अपने देश में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने का रास्ता भी खोल सकता है। यूरेनियम संवर्धन का मतलब है यूरेनियम में शुद्धता बढ़ाना। साधारण यूरेनियम में काम आने वाले यूरेनियम (यू-235) की मात्रा बढ़ाना। इसी प्रक्रिया से बना यूरेनियम परमाणु बिजली बनाने में भी इस्तेमाल होता है, और अगर इसे बहुत ज्यादा संवर्धित किया जाए, तो परमाणु बम बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या परमाणु बम बनाएगा सऊदी अरब?

इस समझौते में 'गोल्ड स्टैंडर्ड' शामिल नहीं है। अगर यह शामिल होता, तो सऊदी अरब पर यूरेनियम को एनरिच करने या इस्तेमाल हो चुके न्यूक्लियर फ्यूल की रीप्रोसेसिंग करने पर रोक लग जाती। ये दोनों ही न्यूक्लियर हथियार बनाने के लिए जरूरी मटीरियल हासिल करने के मुख्य तरीके हैं। परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाले एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सऊदी अरब में अगर यूरेनियम एनरिचमेंट वाले प्लांट आ गए तो इससे इस देश के लिए परमाणु हथियार बनाने का रास्ता खुल सकता है। गौरतलब है कि सऊदी अरब के आक्रामक क्राउन प्रिंस ने संकेत दिया है कि अगर ईरान परमाणु बम हासिल कर लेता है, तो वे भी ऐसा कर सकते हैं।

30 साल की डील

30 साल तक चलने वाले इस नए समझौते की कीमत अरबों डॉलर होने का अनुमान है। इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि सऊदी अरब के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में अमेरिकी कंपनियों की मुख्य भूमिका हो और दूसरे विदेशी प्रतिस्पर्धियों को इससे बाहर रखा जा सके।

कौन रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजरायल के अलर्ट से अमेरिका में हड़कंप

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इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ खुफिया जानकारी सौंपी है। मोसाद ने दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रच रहा है। जराइल के इस दावे से अमेरिका में हड़कंप मच गया है। इजरायली एजेंसी ने ये दावा तब किया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले दावा किया था कि वो 'ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।

इजरायल के रिपोर्ट में क्या?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को एक ईरानी प्लान की जानकारी दी है। वहीं CNN की रिपोर्ट कहती है कि इजरायल ने अमेरिका को एक खास साजिश की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस पिछले कई हफ्तों से ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि इजरायल का इनपुट इन सबसे अलग एक नए और विशेष तरह के प्लान से जुड़ा बताया गया है।

ट्रंप कई बार कह चुके हैं ‘जान को खतरा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान की तरफ से उनकी जान को खतरा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो समिट में ही अपने हत्या की साजिश का जिक्र किया था। नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की के अंकारा में ट्रंप ने कहा था कि ईरान उन्हें खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहते हैं, यानी मुझे। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं।’ जिसके बाद अटकलें लग रही हैं कि उन्हें भी खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

ईरान के निशाने पर ट्रंप!

यह बात तब सामने आई जब नाटो समिट के दौरान अचान ट्रंप ने अपना नया एयरफोर्स वन छोड़कर पुराने अयरफोर्स वन से सफर करने का फैसला किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खतरे की वजह से उन्होंने तुर्किये से लौटते समय अपना विमान बदला था, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर माना कि वह ईरान के निशाने पर हैं।

मिडिल ईस्ट में तेज होगी जंग, ईरान के साथ अमेरिका का सीज फायर खत्म, ट्रंप का ऐलान

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मिडिल ईस्ट में जंग तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर खत्म हो चुका है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा की। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि ईरान के साथ युद्धविराम खत्म हो गया है। ट्रंप ने ईरान पर समझौते से मुकरने का आरोप लगाया और कहा कि अब तेहरान के साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।

ईरान के साथ बातचीत बस समय की बर्बादी- ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप इस समय तुर्की की राजधानी अंकारा में हैं जहां वह नाटो शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। यहां जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के साथ युद्धविराम अब खत्म हो गया है, तो उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से तो यह खत्म हो गया है।" उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत (नेगोशिएशन) करना बस समय की बर्बादी है।

ईरान के लोग घटिया और बीमार सोच वाले-ट्रंप

हालांकि, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के प्रतिनिधि ईरान के साथ बातचीत जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें शक है कि इसका कोई फायदा होगा भी या नहीं। उन्होंने कहा, "वे बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।" ट्रंप ने कहा, "वे घटिया और बीमार सोच वाले लोग हैं, उन्हें बीमार सोच वाले लोग ही चलाते हैं, और वे बेरहम और हिंसक हैं। अगर उनके पास परमाणु हथियार होता, तो वे उसका इस्तेमाल जरूर करते।"

खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़े

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर तेजी से बढ़ गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि ये हमले उसके होर्मोज़गान प्रांत और महशहर बंदरगाह पर हुई अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किए गए। ईरानी दावों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। बहरीन और कुवैत में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र को तत्काल सक्रिय कर दिया गया।

भारत-अमेरिका की दोस्ती वैश्विक भलाई की ताकत…”यूएस की 250वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी का ट्रंप को संदेश

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी जनता को शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को वैश्विक भलाई के लिए एक मजबूत ताकत बताया है। साथ ही उन्होंने अमेरिका के लिए आने वाले वर्षों में और अधिक समृद्धि, शांति और प्रगति की कामना की है।

दोनों देशों के बीच केवल रणनीतिक साझेदारी नहीं-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '1.4 अरब भारतीयों की ओर से मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों को आपके ऐतिहासिक 250वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं।' उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच केवल रणनीतिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र, कानून के शासन और लोगों की असीम क्षमता में साझा विश्वास भी है।

अमेरिका के लिए समृद्धि, शांति और प्रगति की कामना

प्रधानमंत्री ने कहा कि यही मूल्य भारत-अमेरिका की मित्रता को वैश्विक भलाई की एक मजबूत शक्ति बनाते हैं। उन्होंने अमेरिका के लिए आने वाले 250 वर्षों में और अधिक समृद्धि, शांति और प्रगति की कामना करते हुए भारत-अमेरिका साझेदारी के नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की उम्मीद जताई।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम

इस अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित भारतीय मिशन ने भी अमेरिकी नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। मिशन ने अपने संदेश में कहा कि भारत और अमेरिका “वी द पीपल”, स्वतंत्रता, आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का उत्सव मनाते हैं। वहीं, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भारतीय नौसेना ने आईएनएस सुदर्शिनी को अमेरिका भेजा है।

जी7 सम्मेलन में आज पीएम मोदी-ट्रंप की अहम मुलाकात, क्‍या भारत-अमेरिका तनाव होगा कम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 देशों के सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। आज मंगलवार को सम्मेलन के दूसरे दिन उन्होंने मजबूती से भारत का पक्ष रखा। जी7 देशों की बैठक से इतर पीएम मोदी आज शाम करीब 6.15 बजे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे।

16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। दोनों नेताओं के बीच फरवरी 2025 के बाद यानि करीब 16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक होनी है। इन 16 महीने में भारत अमेरिका के बीच के संबंध 20 साल पीछे जा चुके हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ संबंध काफी खराब कर लिए हैं।

तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा अहम

मोदी-ट्रंप के बीच बैठक उस वक्त हो रही है जब अमेरिकी सेना ने एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया जिसमें तीन भारतीय मारे गये हैं और भारत सरकार पर अमेरिका को सख्त संदेश देने का दबाव है। आज की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रह सकता है। कारण कि भारत ने पहले ही इस मसले पर अमेरिका के समक्ष अपना विरोध दर्ज करा दिया है। इसके अलावा ट्रेड से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संघर्ष पौर तमाम दूसरे द्विपक्षीय मसलों पर बातचीत होगी।

पीएम मोदी ने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा

इससे पहले जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ़्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान सुरक्षित समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से भारत के मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। साथ ही होर्मु स्ट्रेट में समुद्री व्यापाार में आई बाधा की वजह से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इस संघर्ष में भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है। पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सामूहिक दायित्व है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि नाविक बिना डर के काम कर सकें।

अमेरिका का नाम ना लेने पर विपक्ष हमलावर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओर से समुद्री में नाविकों की 'सुरक्षा का मुद्दा उठाने के तरीके' पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के भाषण के एक अंश को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''जी-7 मीटिंग में अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देश का सिर झुका दिया। उनका कायराना बयान इस देश के साथ एक भद्दा मज़ाक है। हमारे लोगों का अपमान है। हिन्दुस्तान के तीन नाविकों की अमेरिका ने क्रूर हत्या कर दी और नरेंद्र मोदी अमेरिका का नाम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। उन्होंने कई सिविलियन्स को जान गंवानी पड़ी कह कर छोड़ दिया। मृतकों का नाम आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया, परनाला सुरेश था है। इतना सम्मान तो देना चाहिए था। जो अपने देश का ना हुआ वह किसका होगा? लानत है मोदी जी!''

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यों लिया ज्ञानेश कुमार का नाम? भारत में बढ़ी सियासी हलचल

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दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका में चुनावी पहचान को लेकर चल रही बहस के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चुनावी व्यवस्था की तारीफ की है। ट्रंप ने भारत के चुनाव सिस्टम का ज़िक्र करते हुए अमेरिका में वोटिंग के नियमों में बदलाव की अपनी मांग दोहराई है। यही नहीं, ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लिया है। ट्रंप ने कहा है कि भारत में इतनी बड़ी आबादी चुनाव में हिस्सा ले सकती है और वहां वोटर की पहचान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था है, तो अमेरिका में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?

ट्रंप ने की भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में वोटिंग के नियम कड़े करने और 'सेव अमेरिका एक्ट' लागू करने की मांग करते हुए भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ की है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप ने लिखा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उनकी सरकार से पूछा था कि अमेरिका में बिना किसी फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं।

वेलिड फ़ोटो आईडी की अनिवार्यता का भी ज़िक्र

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि भारत के हालिया आम चुनाव में करीब 64.6 करोड़ लोगों ने मतदान किया और एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं ने डाक मतपत्र का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र जरूरी था। हमें अभी 'द सेव अमेरिका एक्ट' पास करने की जरूरत है। ट्रंप ने भारत के चुनावी मॉडल को अमेरिका में अनिवार्य फोटो पहचान की जरूरत के समर्थन में उदाहरण के तौर पर पेश किया। उनका कहना है कि इससे चुनाव में धोखाधड़ी की आशंका को कम किया जा सकता है।

क्या है 'द सेव अमेरिका एक्ट'?

ट्रंप जिस सेव अमेरिका एक्ट के समर्थन में लगातार आवाज उठा रहे हैं, उसका पूरा नाम सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजीबिलिटी एक्ट है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका में मतदान के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को अपनी नागरिकता का प्रमाण देना होगा। इसके अलावा देशभर में मतदाता पहचान पत्र की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है। कानून डाक से मतदान की सुविधा पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने की दिशा में है। ट्रंप इसे चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए जरूरी कदम बताते हैं।

अमेरिका में वोट डालने के क्या नियम हैं?

अमेरिका में भारत की तरह पूरे देश में एक जैसा वोटर आईडी नियम नहीं है। संघीय कानून के तहत राष्ट्रीय चुनाव में वोट डालने वाला व्यक्ति अमेरिकी नागरिक होना चाहिए, लेकिन नागरिकता का अनिवार्य प्रमाण देना जरूरी नहीं है। प्रस्तावित क़ानून में इसे अनिवार्य करने की बात कही गई है। वहां चुनाव मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के स्तर पर संचालित होते हैं। इसलिए वोट डालने के लिए पहचान पत्र की ज़रूरत भी राज्य के हिसाब से बदलती है। अमेरिकी सरकार की वेबसाइट के मुताबिक, कुछ राज्यों में मतदान केंद्र पर फोटो आईडी दिखानी होती है। इनमें ड्राइविंग लाइसेंस, राज्य सरकार का आईडी कार्ड या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज़ शामिल हो सकते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेटर्स यानी एनसीएसएल के मुताबिक 2026 में 36 राज्यों में मतदान केंद्र पर किसी न किसी तरह की पहचान दिखाने का नियम है, जबकि 14 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में मतदाता की पहचान दूसरे तरीकों से सत्यापित की जाती है।

ट्रंप पर भड़की कांग्रेस

इधर, ट्रंप ने जिस तरह से भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र किया है, उससे कांग्रेस भड़क गई है। पार्टी के मीडिया प्रभारी और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया के जरिए डोनाल्ड ट्रंप से यहां तक कह दिया है कि वे हमेशा के लिए सीईसी ज्ञानेश कुमार को अमेरिका ले जाएं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने एक्स पोस्ट पर लिखा है-डियर डोनाल्ड ट्रंप, प्लीज ज्ञानेश कुमार गुप्ता को अमेरिका ले जाइए। और उन्हें वहीं रखिए। हम अगली ही फ्लाइट से अपने ईवीएम भी भेज देंगे। आपने हमारा जितना भी अपमान किया और जितना भी धमकाया, उसके बदले आपके लिए कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं। भारत से SIR को प्यार के साथ।'

भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ से घिरे डोनाल्ड ट्रंप, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका केस

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति एक बार फिर चर्चा में है। डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है। 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन 25 राज्यों ने 60 देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए नए टैरिफ के फैसले को चुनौती दी है। इन राज्यों का आरोप है कि ये नए टैरिफ फरवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए आयात करों को बदलने का बहाना हैं।

नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर

सोमवार को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले 25 अमेरिकी राज्यों ने 60 व्यापारिक साझेदारों से आयात पर नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर यह मुकदमा 10 से 12.5 फीसदी के उन टैरिफ को निशाना बनाता है। यह टैरिफ पिछले महीने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे।

राज्यों का क्या है तर्क?

अपनी शिकायत में राज्यों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं है। इतना ही नहीं, इसके लिए पर्याप्त वजह भी नहीं बताई गई। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को दुनिया भर की सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी रोकने के नाम पर लगाया, लेकिन दोनों के बीच कोई साफ संबंध नहीं है। याचिका में कहा गया है कि प्रभावित 60 देशों से आने वाले ज्यादातर सामान पर 10% या 12.5% टैरिफ लगाया गया है। इन देशों का अमेरिका के कुल आयात में करीब 99.4% हिस्सा है।

60 देशों के खिलाफ नया टैरिफ

नए टैरिफ तब प्रभावी हुए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अस्थायी टैरिफ की समय सीमा समाप्त हो गई। इस टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को हुई थी। ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 व्यापारिक साझेदारों के आयात पर लागू होते हैं। नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा है कि अमेरिका में एक सदी से जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है। अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा करने का समय आ गया है।

जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से लगा था झटका

इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई थी।

अब ट्रेड एक्ट की धारा 301 का रूख

अब ट्रंप 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत अधिक स्थायी टैरिफ लगा रहे हैं। यह धारा राष्ट्रपति को अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल देशों के खिलाफ आयात कर लगाने की अनुमति देती है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन पर बड़े टैरिफ लगाने के लिए धारा 301 का इस्तेमाल किया था, और वे अदालती चुनौतियों में भी टिके रहे थे।

सऊदी अरब और अमेरिका में न्यूक्लियर डील, जानें ट्रंप की इस मंजूरी के बाद कैसे बदलेंगे वैश्विक समीकरण?

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अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी 2026 से तनाव जारी है। दोनों देशों के बीच तनाव मामूली नहीं है। फरवरी से जारी जंग ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। अमेरिका और ईरान के बीच इस हालिया संघर्ष और तनाव का मुख्य कारण ईरान का तेजी से बढ़ता परमाणु कार्यक्रम, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता है। हालांकि, इसी बीच मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक ऐतिहासिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी है।

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में अमेरिका देगा साथ

इस समझौते के तहत सऊदी अरब को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने में अमेरिका सहयोग देगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह समझौता भविष्य में सऊदी अरब को अपने देश में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने का रास्ता भी खोल सकता है। यूरेनियम संवर्धन का मतलब है यूरेनियम में शुद्धता बढ़ाना। साधारण यूरेनियम में काम आने वाले यूरेनियम (यू-235) की मात्रा बढ़ाना। इसी प्रक्रिया से बना यूरेनियम परमाणु बिजली बनाने में भी इस्तेमाल होता है, और अगर इसे बहुत ज्यादा संवर्धित किया जाए, तो परमाणु बम बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या परमाणु बम बनाएगा सऊदी अरब?

इस समझौते में 'गोल्ड स्टैंडर्ड' शामिल नहीं है। अगर यह शामिल होता, तो सऊदी अरब पर यूरेनियम को एनरिच करने या इस्तेमाल हो चुके न्यूक्लियर फ्यूल की रीप्रोसेसिंग करने पर रोक लग जाती। ये दोनों ही न्यूक्लियर हथियार बनाने के लिए जरूरी मटीरियल हासिल करने के मुख्य तरीके हैं। परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाले एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सऊदी अरब में अगर यूरेनियम एनरिचमेंट वाले प्लांट आ गए तो इससे इस देश के लिए परमाणु हथियार बनाने का रास्ता खुल सकता है। गौरतलब है कि सऊदी अरब के आक्रामक क्राउन प्रिंस ने संकेत दिया है कि अगर ईरान परमाणु बम हासिल कर लेता है, तो वे भी ऐसा कर सकते हैं।

30 साल की डील

30 साल तक चलने वाले इस नए समझौते की कीमत अरबों डॉलर होने का अनुमान है। इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि सऊदी अरब के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में अमेरिकी कंपनियों की मुख्य भूमिका हो और दूसरे विदेशी प्रतिस्पर्धियों को इससे बाहर रखा जा सके।

कौन रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजरायल के अलर्ट से अमेरिका में हड़कंप

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इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ खुफिया जानकारी सौंपी है। मोसाद ने दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रच रहा है। जराइल के इस दावे से अमेरिका में हड़कंप मच गया है। इजरायली एजेंसी ने ये दावा तब किया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले दावा किया था कि वो 'ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।

इजरायल के रिपोर्ट में क्या?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को एक ईरानी प्लान की जानकारी दी है। वहीं CNN की रिपोर्ट कहती है कि इजरायल ने अमेरिका को एक खास साजिश की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस पिछले कई हफ्तों से ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि इजरायल का इनपुट इन सबसे अलग एक नए और विशेष तरह के प्लान से जुड़ा बताया गया है।

ट्रंप कई बार कह चुके हैं ‘जान को खतरा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान की तरफ से उनकी जान को खतरा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो समिट में ही अपने हत्या की साजिश का जिक्र किया था। नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की के अंकारा में ट्रंप ने कहा था कि ईरान उन्हें खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहते हैं, यानी मुझे। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं।’ जिसके बाद अटकलें लग रही हैं कि उन्हें भी खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

ईरान के निशाने पर ट्रंप!

यह बात तब सामने आई जब नाटो समिट के दौरान अचान ट्रंप ने अपना नया एयरफोर्स वन छोड़कर पुराने अयरफोर्स वन से सफर करने का फैसला किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खतरे की वजह से उन्होंने तुर्किये से लौटते समय अपना विमान बदला था, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर माना कि वह ईरान के निशाने पर हैं।

मिडिल ईस्ट में तेज होगी जंग, ईरान के साथ अमेरिका का सीज फायर खत्म, ट्रंप का ऐलान

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मिडिल ईस्ट में जंग तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर खत्म हो चुका है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा की। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि ईरान के साथ युद्धविराम खत्म हो गया है। ट्रंप ने ईरान पर समझौते से मुकरने का आरोप लगाया और कहा कि अब तेहरान के साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।

ईरान के साथ बातचीत बस समय की बर्बादी- ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप इस समय तुर्की की राजधानी अंकारा में हैं जहां वह नाटो शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। यहां जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के साथ युद्धविराम अब खत्म हो गया है, तो उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से तो यह खत्म हो गया है।" उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत (नेगोशिएशन) करना बस समय की बर्बादी है।

ईरान के लोग घटिया और बीमार सोच वाले-ट्रंप

हालांकि, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के प्रतिनिधि ईरान के साथ बातचीत जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें शक है कि इसका कोई फायदा होगा भी या नहीं। उन्होंने कहा, "वे बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।" ट्रंप ने कहा, "वे घटिया और बीमार सोच वाले लोग हैं, उन्हें बीमार सोच वाले लोग ही चलाते हैं, और वे बेरहम और हिंसक हैं। अगर उनके पास परमाणु हथियार होता, तो वे उसका इस्तेमाल जरूर करते।"

खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़े

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर तेजी से बढ़ गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि ये हमले उसके होर्मोज़गान प्रांत और महशहर बंदरगाह पर हुई अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किए गए। ईरानी दावों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। बहरीन और कुवैत में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र को तत्काल सक्रिय कर दिया गया।

भारत-अमेरिका की दोस्ती वैश्विक भलाई की ताकत…”यूएस की 250वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी का ट्रंप को संदेश

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी जनता को शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को वैश्विक भलाई के लिए एक मजबूत ताकत बताया है। साथ ही उन्होंने अमेरिका के लिए आने वाले वर्षों में और अधिक समृद्धि, शांति और प्रगति की कामना की है।

दोनों देशों के बीच केवल रणनीतिक साझेदारी नहीं-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '1.4 अरब भारतीयों की ओर से मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों को आपके ऐतिहासिक 250वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं।' उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच केवल रणनीतिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र, कानून के शासन और लोगों की असीम क्षमता में साझा विश्वास भी है।

अमेरिका के लिए समृद्धि, शांति और प्रगति की कामना

प्रधानमंत्री ने कहा कि यही मूल्य भारत-अमेरिका की मित्रता को वैश्विक भलाई की एक मजबूत शक्ति बनाते हैं। उन्होंने अमेरिका के लिए आने वाले 250 वर्षों में और अधिक समृद्धि, शांति और प्रगति की कामना करते हुए भारत-अमेरिका साझेदारी के नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की उम्मीद जताई।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम

इस अवसर पर न्यूयॉर्क स्थित भारतीय मिशन ने भी अमेरिकी नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। मिशन ने अपने संदेश में कहा कि भारत और अमेरिका “वी द पीपल”, स्वतंत्रता, आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का उत्सव मनाते हैं। वहीं, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भारतीय नौसेना ने आईएनएस सुदर्शिनी को अमेरिका भेजा है।

जी7 सम्मेलन में आज पीएम मोदी-ट्रंप की अहम मुलाकात, क्‍या भारत-अमेरिका तनाव होगा कम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 देशों के सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। आज मंगलवार को सम्मेलन के दूसरे दिन उन्होंने मजबूती से भारत का पक्ष रखा। जी7 देशों की बैठक से इतर पीएम मोदी आज शाम करीब 6.15 बजे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे।

16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। दोनों नेताओं के बीच फरवरी 2025 के बाद यानि करीब 16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक होनी है। इन 16 महीने में भारत अमेरिका के बीच के संबंध 20 साल पीछे जा चुके हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ संबंध काफी खराब कर लिए हैं।

तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा अहम

मोदी-ट्रंप के बीच बैठक उस वक्त हो रही है जब अमेरिकी सेना ने एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया जिसमें तीन भारतीय मारे गये हैं और भारत सरकार पर अमेरिका को सख्त संदेश देने का दबाव है। आज की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रह सकता है। कारण कि भारत ने पहले ही इस मसले पर अमेरिका के समक्ष अपना विरोध दर्ज करा दिया है। इसके अलावा ट्रेड से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संघर्ष पौर तमाम दूसरे द्विपक्षीय मसलों पर बातचीत होगी।

पीएम मोदी ने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा

इससे पहले जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ़्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान सुरक्षित समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से भारत के मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। साथ ही होर्मु स्ट्रेट में समुद्री व्यापाार में आई बाधा की वजह से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इस संघर्ष में भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है। पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सामूहिक दायित्व है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि नाविक बिना डर के काम कर सकें।

अमेरिका का नाम ना लेने पर विपक्ष हमलावर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओर से समुद्री में नाविकों की 'सुरक्षा का मुद्दा उठाने के तरीके' पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के भाषण के एक अंश को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''जी-7 मीटिंग में अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देश का सिर झुका दिया। उनका कायराना बयान इस देश के साथ एक भद्दा मज़ाक है। हमारे लोगों का अपमान है। हिन्दुस्तान के तीन नाविकों की अमेरिका ने क्रूर हत्या कर दी और नरेंद्र मोदी अमेरिका का नाम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। उन्होंने कई सिविलियन्स को जान गंवानी पड़ी कह कर छोड़ दिया। मृतकों का नाम आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया, परनाला सुरेश था है। इतना सम्मान तो देना चाहिए था। जो अपने देश का ना हुआ वह किसका होगा? लानत है मोदी जी!''