पत्रकार चंद्रकांत दुबे की मां नगीना देवी का निधन
मुंबई । 'दोपहर का सामना' के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत दुबे की मां स्वरूप चाची नगीना देवी शिव प्रसाद दुबे (८५) का अकस्मात हृदयगति के रुक जाने से १८ मई को निधन हो गया। वे मुंबई से लेकर गांव तक समाज सेवा में समर्पित रही। उनका अंतिम संस्कार भायंदर पूर्व स्थित बंदरवाड़ी श्मशान में हुआ, जहां उनके बड़े बेटे दिवाकर प्रसाद दुबे ने मुखाग्नि दी और छोटे बेटे अरुण दुबे समाजसेवा से जुड़े हैं। बाकी सभी कार्यक्रम पैतृक गांव- दौलतपुर, खुटहन, जिला जौनपुर में किया जायेगा। नगीना देवी अत्यंत दयालु और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी । वे अपने पीछे जवाहर लाल दुबे, डॉ.विपीन दुबे, सुनील, मनोज, प्रभाकर, सुधाकर, कृष्णकांत, वशिष्ठ, ईशनारायण, शेष नारायण, महेश नारायण, रामानंद (डीएम),चिराग, सिद्धार्थ, अनुराग आदि से भरा पूरा परिवार छोड़ गई।
समरस फाउंडेशन ने किया सीमा पर तैनात सैनिक विकास यादव का सम्मान
मुंबई। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन द्वारा आज बोरीवली पूर्व स्थित कार्यालय में जम्मू में पाक सीमा पर तैनात सैनिक विकास यादव का सम्मान किया। संस्था के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह ने शॉल और पुष्पगुच्छ से उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के कारण ही हम भारतवासी चैन की नींद सो रहे हैं। विकट परिस्थितियों में भी सीमाओं पर तैनात सैनिकों के कारण ही देश सुरक्षित है। इस अवसर पर समाजसेवी रामकृपाल शर्मा, समाजसेवी सुग्रीव यादव, संस्था के महासचिव वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, उपाध्यक्ष मुकुंद शर्मा, उपाध्यक्ष मानिकचंद यादव, विधि सलाहकार एड. प्रशांत परदेसी, रामलिंगम, रामचंद्रन, पूरव गांधी, किरीट बावरिया समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
समाज के माथे पर कलंक –“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो”
–डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

आज सुबह जैसे ही हाथ में नवभारत टाइम्स का अखबार लिया, एक मार्मिक शीर्षक ने मन को भीतर तक झकझोर दिया —
“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो…”

यह केवल एक पंक्ति नहीं थी, यह उन असंख्य बेटियों की मौन चीख थी, जो दहेज जैसी कुप्रथा की भेंट चढ़ जाती हैं।
33 वर्षीय टि्वशा  शर्मा और 25 वर्षीय दीपिका…
दो नाम नहीं, दो अधूरे सपने थे।
दो जिंदगियाँ थीं, जिन्हें जीने का पूरा अधिकार था।
लेकिन दहेज की प्रताड़ना ने उन्हें इस हद तक तोड़ दिया कि उनकी जिंदगी खत्म हो गई।

यह हत्या थी या आत्महत्या — यह तो जांच का विषय है,
लेकिन इतना तय है कि जिन लोगों ने एक लड़की को अपने जीवन से हाथ धोने पर मजबूर कर दिया, वे किसी भी रूप में दोषी हैं।
ऐसे दरिंदों को कठोर से कठोर सजा मिलनी ही चाहिए।
क्योंकि किसी इंसान को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित कर देना कि वह जीने की इच्छा ही खो दे, यह भी किसी हत्या से कम नहीं।

यह समाचार पढ़कर मन में एक ही प्रश्न उठता है —
क्या सचमुच हम 21वीं सदी में जी रहे हैं?

आज महिलाएँ युद्ध क्षेत्र में देश की रक्षा कर रही हैं, अंतरिक्ष में भारत का परचम फहरा रही हैं, विज्ञान, राजनीति, साहित्य, खेल और व्यापार हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
फिर भी, उसी समाज में एक बेटी को विवाह के बाद दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है, जलाया जाता है, अपमानित किया जाता है।
यह केवल अपराध नहीं, मानवता की हार है।

सबसे दुखद बात यह है कि दहेज मांगने वाले घरों में भी बहनें और बेटियाँ होती हैं।
फिर क्यों किसी और की बेटी को केवल पैसों और सामान के लिए यातना दी जाती है?
क्या रिश्तों की कीमत अब रुपयों से तय होगी?
क्या बहू अब इंसान नहीं, बल्कि मायके से सामान और धन लाने वाली एक “बैंक” बनकर रह गई है?

दहेज कभी किसी का जीवन नहीं चला सकता।
जीवन चलता है संस्कारों से, प्रेम से, सम्मान से और परिश्रम से।
भगवान ने सबको हाथ-पैर दिए हैं, शिक्षा दी है, क्षमता दी है —
तो फिर किसी बेटी के पिता की मेहनत की कमाई पर अपना अधिकार क्यों?

आज आवश्यकता केवल कानून बनाने की नहीं, सोच बदलने की है।
माता-पिता को भी चाहिए कि वे केवल “अच्छा घर” या ऊँचा दिखावा देखकर जल्दबाजी में बेटी का विवाह न करें।
रिश्तों की चमक-दमक से ज्यादा जरूरी है उस परिवार की मानसिकता को समझना।
दहेज के लालचियों की पहचान अक्सर शादी से पहले ही हो जाती है ।
कभी महंगे उपहारों की अपेक्षा में,
कभी बार-बार की मांगों में,
तो कभी तानों और व्यवहार में।

ऐसे समय में डरना नहीं चाहिए।
जरूरत पड़े तो सगाई तोड़ देनी चाहिए।
और यदि विवाह मंडप तक बात पहुँच जाए, तब भी हिम्मत करके बारात लौटा देनी चाहिए।
क्योंकि एक टूटा रिश्ता फिर भी जीवन बचा सकता है,
लेकिन गलत घर में की गई शादी पूरी जिंदगी बर्बाद कर देती है।

समाज को यह समझना होगा कि बेटी कोई बोझ नहीं, वह घर की सबसे सुंदर रचना है।
जिस घर में बेटियों का सम्मान नहीं, वह घर कभी सुखी नहीं हो सकता।

आइए संकल्प लें —
न दहेज देंगे,
न दहेज लेंगे,
और न ही दहेज मांगने वालों का समर्थन करेंगे।

ताकि फिर कभी किसी अखबार की हेडिंग यह न कहे —
“अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो…”।
महाराणा प्रताप जयंती व बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव का भव्य आयोजन

वसई। राजपूताना परिवार फाउंडेशन के तत्वावधान में चैत्र महोत्सव, संवत 2083 का भव्य स्वागत श्रद्धा, शौर्य एवं संस्कार के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति एवं क्षत्रिय धर्म का जीवंत उत्सव था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा महापुरुषों को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की लौ ने जैसे ही सभा को आलोकित किया, पूरा प्रांगणजय भवानी  के उद्घोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण कारगिल के वीर योद्धा नायक दीपचंद पंचग्रामी रहे, जिनका वीरता के लिए भव्य सम्मान किया गया। जनता ने खड़े होकर अपने नायक का अभिनंदन किया।
विश्वामित्र की भूमिका में "महर्षि" टाइटल से अलंकृत नालासोपारा के अघोर पीठाधीश्वर महंत बाबा अलख राम ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सनातन  का आध्यात्मिक महत्व बताया एवं क्षत्रिय धर्म पर जोर देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा ही क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य है। मुख्य वक्ता डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने मार्गदर्शन देते हुए कहा, _"आज से 200 साल पहले जब अंग्रेज नहीं आए थे तब एक जनवरी को नववर्ष नही मनाया जाता था, तब हमारे यहां केवल विक्रम संवत ही चलता था तथा वसंत पंचमी से होली तक पिछले वर्ष की विदाई की जाती थी एवं संपूर्ण चैत्र माह में चैत्र महोत्सव मनाकर नववर्ष का स्वागत किया जाता था । हमारे देश का हर वर्ग पूरे उत्साह से चैत्र महोत्सव मनाता था. आजके आधुनिक काल मे हर वर्ष चैत्र महोत्सव मनाकर ददन सिंह अपनी खोई हुई संस्कृती की पुनर्स्थापना कर रहे है. अपनी जड़ों से जुड़ना ही सच्चा राष्ट्रवाद है। मंच संचालन की बागडोर श्रीप्रकाश सिंह ने कुशलता से संभाली। पधारे हुए सभी अतिथियों का सत्कार राजपूताना परिवार फाउंडेशन के अध्यक्ष दद्दन सिंह चौहान ने शॉल एवं श्रीफल भेंट कर किया। कार्यक्रम में सम्मानमूर्ति के रूप में पधारीं क्षत्राणी नगरसेविका का विशेष सम्मान किया गया एवं  समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु श्रीमती बबीता देवराज सिंह, एकता सिंह, पिंकी राठौर, प्रदीपिका सिंह, जेपी सिंह, अभय कक्कड़, अशोक शेलके आदि को सम्मानित किया गया। 
नासिक से पधारे राजेंद्र सिंह चौहान, रामदुलार सिंह, लाल साहब सिंह, वीरेंद्र सिंह तोमर, कुमार शैलेंद्र सिंह, जय प्रकाश सिंह एवं श्रीमती रीता सिंह सहित अनेक आर्मी एवं नेवी के जवानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। सभी वीरों ने महाराणा प्रताप जयंती एवं बाबू वीर कुंवर सिंह जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गायक दामोदर राव, नंदिनी तिवारी, पूनम सिंह एवं सूरज सिंह 'तूफानी ने अपनी सुमधुर गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति और वीर रस के गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। राजपूताना परिवार के सदस्य वीरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, राजेश सिंह सूर्यवंशी, बबन सिंह, ललन सिंह, अरबिंद सिंह मनोज सिंह राकेश सिंह नाहर सिंह केदार सिंह रूपेश सिंह अजय सिंह सरवन सिंह सिसोदिया नरेंद्र सिंह राणावत वीरभद्र सिंह जडेजा अश्विन सिंह जाडेजा स्वरूप सिंह जडेजा जयेंद्र सिंह जडेजा जगदीश सिंह जडेजा सत्येंद्र रावत सुनील सिंह, मोहित सिंह, विजय सिंह, विनोद सिंह, राधा रमन सिंह, अमित सिंह, नाहर सिंह, भावेश सिंह, रोहित सिंह, राम सिंह, केदारनाथ सिंह, राज चौरसिया, जयकुमार यादव एवं संस्था के सभी सदस्यो पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। श्रीमती अंजू सिंह, खुशबू सिंह, आशा सिंह, गरिमा सिंह, सुषमा सिंह, संध्या सिंह, किरण सिंह, बबीता सिंह सहित तमाम बहनों एवं माताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।कार्यक्रम के पश्चात सभी ने *सुरुचिपूर्ण भोज* का आनंद लिया एवं प्रसाद ग्रहण किया।
सुनील सिंघवी को सर्वसम्मति से सौंपी गई जयपुर प्रवासी संघ की कमान
मुंबई। राजस्थानी समाज की प्रमुख संस्था जयपुर प्रवासी संघ (जेपीएस) की नई कार्यकारिणी के गठन की घोषणा समारोहपूर्वक की गई। पार्ले इंटरनेशनल होटल में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष पद के लिए सुनील सिंघवी का सर्वसम्मति से चयन किया गया। समारोह के दौरान जेपीएस की निवर्तमान कार्यकारिणी के कार्यों की सराहना के साथ उनको भावभीनी विदाई दी गई।जयपुर प्रवासी संघ के गवर्निंग संरक्षक कृष्ण कुमार राठी, संरक्षक कुसुम काबरा, चुनाव अधिकारी मनमोहन बागड़ी, वर्तमान अध्यक्ष धर्मचंद कोठारी, सचिव अरुण कुमार निगोतिया, कोषाध्यक्ष अनिल हीरावत सहित संघ के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित सदस्यों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुनील सिंघवी को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में जेपीएस नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा समाजहित के कार्यों को और अधिक गति मिलेगी। जेपीएस की नई कार्यकारिणी में अनिल कुमार हीरावत, अनिल अग्रवाल, अनिल कर्णावट, अनीता माहेश्वरी, धर्मचंद कोठारी, दीपेंद्र बैराठी, गिरीश अग्रवाल, मधु कुमार राठी, निलीन सोखिया, राज कुमार बैद, मनीष शाह, मनीष कचोलिया एवं विजय सेठ को शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि सुनील सिंघवी इससे पूर्व भी संघ में सचिव एवं अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। सभी सदस्यों ने सुनील सिंघवी को संस्था के प्रत्येक कार्य में पूर्ण योगदान का विश्वास दिलाते हुए गतिविधियों को आगे बढ़ाने की सहमति जताई। जेपीएस के संरक्षक कृष्ण कुमार राठी ने निवर्तमान कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के योगदान की सराहना करते हुए उनका सम्मान किया तथा नई कार्यकारिणी के सफल कार्यकाल की कामना की। नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुनील सिंघवी ने नई कार्यकारिणी के सदस्यों की घोषणा की।
पूर्व नगरसेवक सुरेश ठाकुर के निधन से वाकोला में शोक की लहर
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका में 2 बार नगरसेवक रहे सूर्यवंश ( सुरेश) ठाकुर का आज सुबह 75 वर्ष की उम्र में माहिम के रहेजा अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही सांताक्रूज़ पूर्व के वाकोला परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। सुरेश ठाकुर अपने पीछे अपने दो बेटों सुनील ठाकुर, अनिल ठाकुर और  पौत्र पौत्रियों से भरा पूरा परिवार छोड़ गए। उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह ने कहा कि मैंने अपना एक पुराना साथी खो दिया। सुरेश ठाकुर अत्यंत विनम्र, शालीन और उदार होने के साथ-साथ सबके दुख सुख में खड़े रहने वाले इंसान थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति और उनके परिवार को यह सदमा बर्दाश्त करने की ताकत दें। सुरेश ठाकुर के निधन पर पूर्व सांसद विनायक राऊत, नगरसेवक सदा परब, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, कृपाशंकर पाण्डेय, पूर्व नगरसेवक ब्रायन मिरांडा, शेखर सालियन, जीतू यादव, राम यादव जयप्रकाश विश्वकर्मा, रमाशंकर सिंह, जेपी सिंह, अजय सिंह, जगदीश सिंह, विनय शुक्ला, सुशील राय, विजई सिंह, डॉ मुकेश शुक्ला समेत अनेक लोगों ने गहरा दुख प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की है।
कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने किया पद्म भूषण पंकज उधास चौक और भित्तिचित्र स्मारक का उद्घाटन

मुंबई। ग़ज़ल गायक पद्मभूषण पंकज उधास की 75वीं जयंती के अवसर पर रविवार को पेडर रोड स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट के सामने वाले चौक का आधिकारिक रूप से “पद्मभूषण पंकज उधास चौक” नामकरण किया गया। साथ ही कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथो  इस चौक पर स्थापित पंकज उधास के भित्तिचित्र स्मारक (म्युरल) का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर उधास परिवार, वरिष्ठ गायक-संगीतकार तथा बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक हरिहरन,सोनू निगम, पापोन  तथा संगीतकार-गायक सलीम मर्चंट  के साथ समाजसेविका श्रीमती मंजू जी  लोढ़ा भी उपस्थित थीं।बइस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा, “पेडर रोड क्षेत्र में पंकज उधास का लंबे समय तक निवास रहा। उनके परिवार की इच्छा थी कि इस परिसर में उनकी स्मृति में कोई स्थायी स्मारक बनाया जाए। इसके लिए मैंने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रयास शुरू किए थे। आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी। उनके मार्गदर्शन और मुंबई महानगरपालिका के सहयोग से यह भित्तिचित्र स्मारक तैयार किया गया है। यह चौक अब संगीत और ग़ज़ल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। स्मारक में पंकज उधास के अमर गीतों के लिए क्यूआर कोड भी दिया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक उनकी ग़ज़लों का आनंद ले सकेंगे।”
कार्यक्रम में पढ़कर सुनाए गए संदेश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पंकज उधास की मधुर और संवेदनशील आवाज़ ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया और ग़ज़ल गायकी को वैश्विक पहचान दिलाई। ‘चिट्ठी आई है’ जैसे उनके गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में जीवित हैं।”
गायक हरिहरन ने भी पंकज उधास को याद करते हुए कहा, “पंकजजी ने ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुँचाया। उनकी कई ग़ज़लें आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।”
गायक पापोन ने पंकज उधास के सरल स्वभाव को याद करते हुए कहा, “मैं उनसे उम्र में बहुत छोटा था, फिर भी वे मुझे हमेशा आदरपूर्वक ‘आप’ कहकर संबोधित करते थे।” संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर के पुत्र आदिनाथ मंगेशकर ने उधास और मंगेशकर परिवार के दशकों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मेरा पहला फोटो लता मंगेशकर जी  की गोद में है और उसमें पंकजजी भी मौजूद हैं। हमारे घर का गणेशोत्सव उनकी उपस्थिति के बिना अधूरा माना जाता था।”
गायक सोनू निगम ने भी अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा, “मेरी माँ हमेशा पंकज उधास के गीत सुना करती थीं। बाल कलाकार रहते हुए मैंने उनकी ग़ज़लों के शब्द और धुन दोनों याद कर लिए थे।”
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में पंकज उधास ने 50 से अधिक एल्बम और 1,000 से ज्यादा गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संगीत क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री और वर्ष 2025 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।
पंकज उधास की यादों से पेडर रोड क्षेत्र भावुक माहौल में डूबा हुआ था। उन्होंने भारतीय ग़ज़ल को सात समंदर पार तक पहुँचाया और उनके प्रशंसक केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं। समाजसेविका मंजू लोढ़ा ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे महान गायक का स्मारक और चौक होना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज़ की कोमलता और विरह की भावना आने वाली कई पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।
जैन देरासर में उमड़ा श्रद्धा और वैराग्य का सैलाब, मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह का भावपूर्ण बहुमान

मुंबई। श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन देरासर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और वैराग्य के अनुपम वातावरण के बीच संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य आचार्य श्री लब्धीचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के मंगलमय आशीर्वाद तथा मुनिराज श्री सर्वेशचंद्र सागरजी महाराज एवं मुनिराज श्री मंत्रेश सागरजी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब उपस्थित हुआ, जब 81 वर्ष की आयु में दीक्षा अंगीकार करने जा रहे भावी दीक्षार्थी महेंद्रभाई मोहनलाल शाह का श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष-ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह एवं संघ के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण बहुमान किया गया। इस अवसर पर पूरे सभागार में श्रद्धा, सम्मान और वैराग्य की भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके त्यागमय एवं धर्मनिष्ठ जीवन को नमन किया। अपने संबोधन में संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि महेंद्रभाई शाह का त्याग, धर्म के प्रति अटूट आस्था और संयममय जीवन समाज के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में 81 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना अत्यंत दुर्लभ, अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। मुंबई में अपनी दीक्षा की पवित्र तैयारी कर रहे मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह अपनी सरलता, विनम्रता और गहन धार्मिक निष्ठा से सभी के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची साधना, वैराग्य और आत्मजागृति के लिए आयु कभी बाधा नहीं बनती। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहर मोतीलाल शाह, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह सहित जयेशभाई, लब्धीशिल्पाबेन, विलास शाह एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। गुरु भगवंतों के आशीर्वचन, धर्ममय वातावरण और भावी दीक्षार्थी के बहुमान ने पूरे आयोजन को अत्यंत भावुक, प्रेरणादायी और अविस्मरणीय बना दिया।
जैन देरासर में उमड़ा श्रद्धा और वैराग्य का सैलाब, मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह का भावपूर्ण बहुमान

मुंबई। श्री चंद्रप्रभ स्वामी जैन देरासर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और वैराग्य के अनुपम वातावरण के बीच संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य आचार्य श्री लब्धीचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के मंगलमय आशीर्वाद तथा मुनिराज श्री सर्वेशचंद्र सागरजी महाराज एवं मुनिराज श्री मंत्रेश सागरजी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब उपस्थित हुआ, जब 81 वर्ष की आयु में दीक्षा अंगीकार करने जा रहे भावी दीक्षार्थी महेंद्रभाई मोहनलाल शाह का श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष-ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह एवं संघ के सदस्यों द्वारा भावपूर्ण बहुमान किया गया। इस अवसर पर पूरे सभागार में श्रद्धा, सम्मान और वैराग्य की भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके त्यागमय एवं धर्मनिष्ठ जीवन को नमन किया। अपने संबोधन में संजय जीवनलाल शाह ने कहा कि महेंद्रभाई शाह का त्याग, धर्म के प्रति अटूट आस्था और संयममय जीवन समाज के लिए प्रेरणा का उज्ज्वल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में 81 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह-माया का त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना अत्यंत दुर्लभ, अनुकरणीय और प्रेरणादायी है। मुंबई में अपनी दीक्षा की पवित्र तैयारी कर रहे मुमुक्षु महेंद्रभाई शाह अपनी सरलता, विनम्रता और गहन धार्मिक निष्ठा से सभी के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची साधना, वैराग्य और आत्मजागृति के लिए आयु कभी बाधा नहीं बनती। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहर मोतीलाल शाह, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह सहित जयेशभाई, लब्धीशिल्पाबेन, विलास शाह एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। गुरु भगवंतों के आशीर्वचन, धर्ममय वातावरण और भावी दीक्षार्थी के बहुमान ने पूरे आयोजन को अत्यंत भावुक, प्रेरणादायी और अविस्मरणीय बना दिया।
श्री गौरीशंकर ग्राम सेवा मंडल के नए पदाधिकारियों एवं ट्रस्ट बोर्ड का चुनाव

मुंबई । श्री गौरीशंकर ग्राम सेवा मंडल, मुंबई की वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) का आयोजन सकल नारायण शर्मा सभागृह, शारदा ज्ञान पीठ इंटरनेशनल स्कूल, दत्त मंदिर रोड, मालाड पूर्व, मुंबई में संपन्न हुआ। सभा में सर्वसम्मति से नए ट्रस्ट बोर्ड एवं व्यवस्थापक समिति का चुनाव किया गया। सभा में डॉ. शारदा प्रसाद शर्मा को ट्रस्ट बोर्ड का चेयरमैन तथा सुभाष चन्द्र उपाध्याय को प्रबंध ट्रस्टी चुना गया। इसके साथ ही डॉ. आर.आर. उपाध्याय, प्रो. मंगला प्रसाद दुबे, अजय शर्मा, मुकेश सभापति पाण्डेय एवं विवेक उपाध्याय को ट्रस्टी के रूप में चयनित किया गया।
व्यवस्थापक समिति में राम सेवक पाण्डेय को अध्यक्ष चुना गया, जबकि कौशल कुमार तिवारी, मानकेश्वर चौबे एवं छोटेलाल उपाध्याय को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। संयुक्त मंत्री पद पर सुभाष चन्द्र उपाध्याय, विनोद कुमार मिश्र एवं राधेश्याम दूबे का चयन हुआ। समिति सदस्यों के रूप में डॉ. शारदा प्रसाद शर्मा, शिवराम चौरसिया, धर्मचन्द्र  उपाध्याय, विंध्यवासिनी उपाध्याय, ओमप्रकाश पाण्डेय, राकेश उपाध्याय (प्रबंधक), अमरनाथ त्रिपाठी, डॉ. अखिलेशचन्द्र चौबे, डॉ. नीरज चंद्रशेखर दुबे, योगेश गुलाब तिवारी, डॉ. संदीप मिश्रा, ओंकारनाथ उपाध्याय, डॉ. देवेंद्र तिवारी एवं अखिलेश अक्षयधन तिवारी को चुना गया।
मानद सदस्यों में माया शंकर मिश्र, माता प्रसाद चतुर्वेदी, सुनील रामसेवक पाण्डेय, अनिरुद्ध पाण्डेय एवं डॉ. मिथिलेश दुबे का चयन किया गया। वहीं विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में सुधाकर उपाध्याय एवं अच्छेलाल पाण्डेय को सर्वसम्मति से मनोनीत किया गया।
डॉ. शारदा प्रसाद शर्मा ने नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए मंडल के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।