टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के पार्टी ऑफिस पर आखिर क्यों चला बुलडोजर?

#actionontmcgeneralsecretaryabhishekbanerjeefivestorey_office

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बंगाल सरकार का बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में शनिवार को प्रशासन का बड़ा बुलडोजर एक्शन देखने को मिला। अमतला में बुलडोजर का इस्तेमाल करके अभिषेक बनर्जी के ऑफिस को गिरा दिया गया।

प्रशासन ने बताया अवैध निर्माण

डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी का यह दफ्तर अमताला-बारुईपुर रोड पर स्थित था। प्रशासन ने इसे पूरी तरह से अवैध निर्माण करार दिया है। जानकारी के मुताबिक, विभागीय जांच में पाया गया था इस कार्यालय का निर्माण स्वीकृत भवन योजना के बिना और लागू नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया था।

इमारत का वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर एक्शन

जिला प्रशासन के मुताबिक, इस भव्य इमारत के निर्माण से जुड़ा कोई भी वैध दस्तावेज़ नहीं था। यह दफ्तर बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के बनाया गया था। प्रशासन ने इस संबंध में पहले ही एक नोटिस जारी कर इमारत पर चिपका दिया था। नोटिस के जरिए निर्माण से जुड़े कानूनी कागज मांगे गए थे। हालांकि, अभिषेक बनर्जी या उनकी टीम की तरफ से इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के बाद, प्रशासन ने इसे गिराने का कड़ा फैसला लिया।

बुलडोजर एक्शन पर लगे जय श्रीराम के नारे

शनिवार सुबह प्रशासन की टीम तीन बड़े बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची. पांच मंजिला मजबूत इमारत को ढहाने के लिए तीनों बुलडोजर एक साथ काम पर लगाए गए। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। जैसे ही अभिषेक बनर्जी के सांसद ऑफिस को तोड़ने का काम शुरू हुआ। इलाके में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुशी मनाई और जय श्री राम के नारे लगाए।

ममता बनर्जी हाउस अरेस्ट…', बारुईपुर जाने से पहले सिक्यॉरिटी बढ़ाने पर टीएमसी का गंभीर आरोप

#mamatabanerjeesecuritytmcallegesobstructioninbaruipurvictim_case

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 साल वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर सूबे की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी इस घटना के बाद बारुईपुर का दौरा करने वाली हैं। हालांकि, इससे पहले उनके आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई। आवास के बाहर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।वहां बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं। इसका मकसद ममता बनर्जी को बारुईपुर जाने से रोकना है। टीएमसी ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री को नजरबंद करने की साजिश बताया है।

ममता बनर्जी के घर के बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा

टीएमसी ने बताया कि ममता बनर्जी का घर कालीघाट में है। उनके घर के बाहर की संकरी गली में 10 से ज्यादा पुलिस की गाड़ियां खड़ी कर दी गई हैं। पास में ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का भी घर है। वहां भी पुलिस तैनात है। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूर्व सीएम बारुईपुर जाने वाली थीं। लेकिन उन्हें घर से निकलने से रोकने के लिए बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा दिए गए।

ममता ने पूछा- क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?

बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और हत्या के बाद पीड़िता के परिवार से मिलने के उनके प्रस्तावित दौरे से पहले पूर्व सीएम ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर के बाहर केंद्रीय बल और पुलिसकर्मी तैनात किए गए। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने 11 साल की लड़की के परिवार से मिलने के लिए बारुईपुर जाने का प्लान बनाया था। ऐसा क्या हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है? मैं बारुईपुर जाकर परिवार से मिलना चाहती थी। उन्होंने मेरे घर के बाहर इतनी पुलिस क्यों लगा दी है? क्यों? क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?’

टीएमसी ने कहा- सुपर इमरजेंसी

वहीं, टीएमसी सांसद डोला सेन ने इसे सुपर इमरजेंसी करार दिया। डोला सेन ने पत्रकारों से कहा कि बंगाल और कोलकाता में क्या हो रहा है? हर कोई जानता है कि बारुईपुर में क्या हुआ। दीदी (ममता बनर्जी) जन-नेता हैं। इतनी भयानक घटना के बाद वह वहां जाना चाहती थीं। लेकिन क्या उन्होंने उन्हें नजरबंद कर दिया है? ऐसा करके क्या वे दीदी को रोक पाएंगे? मुझे इसी वजह से यहां आना पड़ा। बिना किसी वजह के यहां इतनी पुलिस और प्रशासन तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन जो कर रहा है, वह सही नहीं है। यह सुपर इमरजेंसी है।

क्या है मामला?

यह सारा विवाद बच्ची का शव मिलने के कुछ घंटों बाद शुरू हुआ। यह बच्ची एक दिन पहले लापता हो गई थी। उसका शव कोलकाता से करीब 15 किलोमीटर दूर बारुईपुर के सूर्यपुर हाट इलाके में मिला। बच्ची का शव एक बोरे में भरा हुआ था। इसके बाद स्थानीय लोग भड़क गए। लोगों ने सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाए। गुस्साए लोगों ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। लोग दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में यह घटना और हिंसक हो गई। एक गुस्साई भीड़ ने अपराध में शामिल होने के आरोपी एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

टीएमसी के बागी सांसदों का नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय का ऐलान, स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात

#kakolighoshclaimssupportof22tmcmpstomeet_speaker

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद लोकसभा सांसदों की पार्टी छोड़कर जाने की खबरें छन-छन कर आ रही हैं। इस बीच 20 बागी सांसदों का गुट त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय का ऐलान किया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा

तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा। काकोली घोष और शताब्दी रॉय के साथ पार्टी के कुछ सांसद लोकसभा स्पीकर बिरला के घर पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया है उनके साथ पार्टी के 20 सांसद हैं। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से सदन में अपने गुट के सांसदों को अलग बिठाने की मांग की है।

काकोली घोष दस्तीदार ने क्या कहा?

काकोली घोष दस्तीदार ने ओम बिरला से मुलाकात करने के बाद पत्रकारों से कहा, ''हम अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के चुने हुए सांसद थे। हमने लोकसभा स्पीकर को एआईटीसी से अपनी नाराजगी के बारे में बताया। हमने संसद में अलग से बैठने की मांग की और कहा कि नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी के साथ विलय कर रहे हैं। हमारे साथ 20 सांसद हैं जो तृणमूल के 28 सांसदों के दो तिहाई से ज़्यादा हैं। हम एआईटीसी से अलग होकर एनडीए के साथ काम करेंगे।''

टीएमसी में टूट का सिलसिला

पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की 35 साल तक चली सरकार को हटाकर सत्ता में आईं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 15 सालों तक प्रदेश में शासन किया। हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रही है। पार्टी के नेता एक-एक कर साथ छोड़ रहे हैं। पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ विधानसभा में बगावत हुई उसके बाद राष्ट्रीय नेताओं में इस्तीफे का सिलसिला शुरू हुआ।

ममता को कल्याण बनर्जी ने भी दे दिया अल्टीमेटम! बोले- अभिषेक बनर्जी अगर टीएमसी में तो मैं नहीं रहूंगा

#tmc_mp_kalyan_banejee_said_he_will_leave_party_if_abhishek_banerjee_stay

पश्चिम बंगाल की सत्ता का 15 साल तक सिरमौर रहीं ममता बनर्जी और उनकी अगुवाई वाली पार्टी तृणमूल कांग्रेस मुश्किल में हैं। एक के बाद एक नेता टीएमसी से किनारा कर रहे हैं। पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने अपने पद से इस्तीफे दे दिया है तो लोकसभा के 20 सांसद उनके खिलाफ चले गए हैं। अब टीएमसी के सबसे सीनियर चेहरों में से एक कल्याण बनर्जी ने भी तल्ख तेवर दिखाए हैं।

अभिषेक या फिर मेरे जैसे वफादारों-कल्याण मुखर्जी

पिछले कुछ दिनों से ममता के समर्थन में बयान देने वाला कल्याण बनर्जी ने अब बड़ा ऐलान कर दिया है। ममता बनर्जी को सीधी चेतावनी देते हुए कल्याण ने साफ कह दिया है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। कल्याण बनर्जी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को यह अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो वह अभिषेक को चुन लें, या फिर मेरे जैसे वफादारों को। उन्होंने कहा कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूं। लेकिन अगर अभिषेक बनर्जी टीएमसी में रहेंगे तो मैं इस पार्टी का हिस्सा नहीं बनूंगा।

अभिषेक एक घमंडी आदमी- कल्याण बनर्जी

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक एक घमंडी आदमी है। उनके घमंडी रवैये के कारण मेरे लिए पार्टी में काम करना मुश्किल हैं। उन्होंने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर केस से भी खुद को अलग करने का ऐलान किया और कहा कि अभिषेक बनर्जी ने कभी भी मुझपर भरोसा नहीं किया और आगे भी नहीं करेंगे।

या तो आप अभिषेक को रखिए या फिर हमें छोड़िए-कल्याण बनर्जी

सेरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, “मैं पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हूं और राजनीति का भी लंबा अनुभव है। मैं इस तरह का घमंडी और अपमानजनक रवैया कतई बर्दाश्त नहीं करूंगा। मैं ममता दीदी से साफ कहूंगा या तो आप अभिषेक को रखिए या फिर हमें छोड़ दीजिए।

टीएमसी के विलय की अटकलों पर कांग्रेस ने तोड़ी चुप्पी, जयराम रमेश ने बताया सोनिया-ममता की मुलाकात का सच

#congresstermsreportsofmergerwithtmcasmisleading

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बने सियासी हालात के बीच कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के विलय की अटकलें लगाई जा रही है। चर्चाओं ने तब जोर पकड़ा, जब कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी के बीच हाल ही में बैठक हुई। इस बैठक के ठीक एक दिन बाद राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की भी मुलाकात हुई। इन मुलाकातों के बाद जारी चर्चा पर कांग्रेस ने चुप्पी तोड़ी है।

मीडिया में चल रही कई खबरें पूरी तरह गलत-जयराम रमेश

कांग्रेस ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की मुलाकात के दौरान टीएमसी के कांग्रेस में विलय पर चर्चा हुई। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को लेकर मीडिया में चल रही कई खबरें पूरी तरह गलत हैं।।

सोनिया-ममता के बीच निजी विषयों पर चर्चा

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच हुई मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई थी। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध हैं और मुलाकात के दौरान कई निजी विषयों पर चर्चा हुई।

टीएमसी ने भी खारिज की विलय की खबरें

तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने भी पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के कांग्रेस में विलय की कोई योजना नहीं है और इस तरह की खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

टीएमसी में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच मुलाकातें

बता दें कि टीएमसी में जारी अंदरूनी खींचतान और कुछ नेताओं की बगावत के बीच मंगलवार को ममता बनर्जी ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं कि कांग्रेस नेतृत्व ने टीएमसी के कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव रखा है।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

#mamatabanerjeetmccrisis50mlasmayquitparty

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।

अभिषेक के बाद कल्याण बनर्जी पर हमला, पब्लिक ने ‘चोर-चोर’ कहकर पीटा

#tmcmpkalyanbanerjeeattackedafterabhishek_banerjee

तृणमूल कांग्रेस महासचिव और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बाद पार्टी के एक और नेता पर जोरदार हमला हुआ है। हुगली के चंदीतला पुलिस स्टेशन के पास टीएमसी सांसद कल्यान बनर्जी को पब्लिक ने पीटा है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।

कल्याण बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट

जानकारी के अनुसार टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के साथ मारपीट की घटना उस समय हुई जब वह चंडीतला थाने में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। रास्ते में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कल्याण बनर्जी का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि इसी दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और सांसद के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की गई।

कल्याण बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया हमले का आरोप

इस दौरान सुरक्षाबलों को स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए भी देखा गया। वहीं, टीएमसी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी को संभाला और उन्हें भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया। कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं अकेला आ रहा था। मेरे साथ कोई नहीं था। बीजेपी सदस्यों ने गाली-गलौज की और मेरे सिर पर बॉल से मारा। मेरे सिर से खून बह रहा है। उन्होंने कहा कि अब लोग तय करेंगे कि क्या सही है या गलत। सांसदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

टीएमसी बोली- 24 घंटों में 2 नेताओं पर हमला अराजकता

टीएमसी ने कल्याण बनर्जी की तस्वीर शेयर करते हुए एक्स पर लिखा- लोकतंत्र पर हमला हो रहा है, पूरी तरह से अराजकता है। इन गुंडों को पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा होने की इजाजत कैसे दी गई? पुलिस की मौजूदगी में पत्थरबाजी कैसे हो सकती है? चुनाव नतीजे घोषित हुए 26 दिन बीत चुके हैं, फिर भी चुनाव के बाद होने वाली हिंसा लगातार जारी है।

एक दिन पहले अभिषेक बनर्जी पर हुआ था हमला

पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को दक्षिण सोनारपुर में हमला हुआ था, जहां वे चुनाव बाद हिंसा के पीड़ित कार्यकर्ताओं से मिलने गए थे। भीड़ ने अभिषेक पर हमला किया और अंडे भी फेंके। हाथापाई के दौरान अभिषेक की शर्ट भी फाड़ दी। भीड़ के हमले से बचने के लिए अभिषेक बनर्जी हेलमेट पहनकर निकले। इस मामले में अब तक 5 लोगों को अरेस्ट कर लिया गया है।

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद एक्शन में शुभेन्दु सरकार, 5 आरोपी गिरफ्तार

#tmcmpabhishekbanerjeeattackpolicearrested5people

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले के मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अभिषेक बनर्जी शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने गए थे। इसी दौरान कथित तौर पर एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और राज्य की राजनीति गरमा गई।

पुलिस ने पांच लोगों को किया गिरफ्तार

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद बंगाल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनमें से दो लोगों की पहचान तपन मैती और आकाश के रूप में हुई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और पकड़े गए पांचों लोगों से पूछताछ की जा रही है।

ममता ने हमले के लिए भाजपा को ठहराया जिम्मेदार

टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी को चिकित्सा सुविधा मिलने से रोकने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा, सत्ता में बैठे लोग अस्पतालों और संबंधित अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं ताकि अभिषेक बनर्जी को भर्ती न किया जाए, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका इलाज हो। उन्होंने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

हमले के विरोध में टीएमसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे

उधर, अभिषेक बनर्जी के कथित हमले के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। हुगली जिले के चुंचुड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने पिपुलपाती मोड़ पर सड़क जाम कर धरना दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। असित मजूमदार ने कहा कि अत्याचार का सामना कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में जाने पर अभिषेक बनर्जी को कथित रूप से अपमानित किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए, जिसके विरोध में तृणमूल कांग्रेस सड़क पर उतरी है।

टीएमसी में बढ़ा आपसी कलह, काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ स्पीकर को लिखा पत्र

#tmcmpkakolighoshwritestolsspeakertocomplainaboutkalyanbanerjee

पश्चिम बंगाल में सत्ता के बदलते ही तृणमूल कांग्रेस का आपसी कलह खुल कर सामने आ गया है। कभी ममता की बेहद करीबी रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। काकोली घोष ने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप

पत्र में काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से अपनी पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी का उनके खिलाफ ही नहीं बल्कि अन्य महिला सांसदों के प्रति भी व्यवहार अनुचित और अपमानजनक रहा है।

स्पीकर से हस्तक्षेप करने की अपील

काकोली घोष ने अपने पत्र में लोकसभा स्पीकर से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है और औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही काकोली घोष ने उचित कार्रवाई के बाद सजा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

पार्टी के सभी पदों से दे चुकीं हैं इस्तीफा

टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया हैं। इसके एक दिन बाद ही उनका लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की शिकायत की, जो दिखा रहा है कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी के लोकसभा सचेतक पद से हटाया गया है। काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को ही लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।

कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने

काकोली घोष के आरोपों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि सदन में कोई घटना होने के बाद, स्पीकर को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। यही नियम है। किसी भी घटना की जानकारी बिना किसी देरी के स्पीकर को दी जानी चाहिए। जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने क्या और कब कहा। असल समस्या उनकी नीयत में है। ऐसा लगता है कि वे किसी मकसद से काम कर रहे हैं, जिससे मेरे मन में संदेह पैदा होता है।

भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!

टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के पार्टी ऑफिस पर आखिर क्यों चला बुलडोजर?

#actionontmcgeneralsecretaryabhishekbanerjeefivestorey_office

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बंगाल सरकार का बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में शनिवार को प्रशासन का बड़ा बुलडोजर एक्शन देखने को मिला। अमतला में बुलडोजर का इस्तेमाल करके अभिषेक बनर्जी के ऑफिस को गिरा दिया गया।

प्रशासन ने बताया अवैध निर्माण

डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी का यह दफ्तर अमताला-बारुईपुर रोड पर स्थित था। प्रशासन ने इसे पूरी तरह से अवैध निर्माण करार दिया है। जानकारी के मुताबिक, विभागीय जांच में पाया गया था इस कार्यालय का निर्माण स्वीकृत भवन योजना के बिना और लागू नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया था।

इमारत का वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर एक्शन

जिला प्रशासन के मुताबिक, इस भव्य इमारत के निर्माण से जुड़ा कोई भी वैध दस्तावेज़ नहीं था। यह दफ्तर बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के बनाया गया था। प्रशासन ने इस संबंध में पहले ही एक नोटिस जारी कर इमारत पर चिपका दिया था। नोटिस के जरिए निर्माण से जुड़े कानूनी कागज मांगे गए थे। हालांकि, अभिषेक बनर्जी या उनकी टीम की तरफ से इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के बाद, प्रशासन ने इसे गिराने का कड़ा फैसला लिया।

बुलडोजर एक्शन पर लगे जय श्रीराम के नारे

शनिवार सुबह प्रशासन की टीम तीन बड़े बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची. पांच मंजिला मजबूत इमारत को ढहाने के लिए तीनों बुलडोजर एक साथ काम पर लगाए गए। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। जैसे ही अभिषेक बनर्जी के सांसद ऑफिस को तोड़ने का काम शुरू हुआ। इलाके में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुशी मनाई और जय श्री राम के नारे लगाए।

ममता बनर्जी हाउस अरेस्ट…', बारुईपुर जाने से पहले सिक्यॉरिटी बढ़ाने पर टीएमसी का गंभीर आरोप

#mamatabanerjeesecuritytmcallegesobstructioninbaruipurvictim_case

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 साल वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर सूबे की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी इस घटना के बाद बारुईपुर का दौरा करने वाली हैं। हालांकि, इससे पहले उनके आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई। आवास के बाहर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।वहां बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं। इसका मकसद ममता बनर्जी को बारुईपुर जाने से रोकना है। टीएमसी ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री को नजरबंद करने की साजिश बताया है।

ममता बनर्जी के घर के बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा

टीएमसी ने बताया कि ममता बनर्जी का घर कालीघाट में है। उनके घर के बाहर की संकरी गली में 10 से ज्यादा पुलिस की गाड़ियां खड़ी कर दी गई हैं। पास में ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का भी घर है। वहां भी पुलिस तैनात है। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूर्व सीएम बारुईपुर जाने वाली थीं। लेकिन उन्हें घर से निकलने से रोकने के लिए बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा दिए गए।

ममता ने पूछा- क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?

बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और हत्या के बाद पीड़िता के परिवार से मिलने के उनके प्रस्तावित दौरे से पहले पूर्व सीएम ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर के बाहर केंद्रीय बल और पुलिसकर्मी तैनात किए गए। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने 11 साल की लड़की के परिवार से मिलने के लिए बारुईपुर जाने का प्लान बनाया था। ऐसा क्या हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है? मैं बारुईपुर जाकर परिवार से मिलना चाहती थी। उन्होंने मेरे घर के बाहर इतनी पुलिस क्यों लगा दी है? क्यों? क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?’

टीएमसी ने कहा- सुपर इमरजेंसी

वहीं, टीएमसी सांसद डोला सेन ने इसे सुपर इमरजेंसी करार दिया। डोला सेन ने पत्रकारों से कहा कि बंगाल और कोलकाता में क्या हो रहा है? हर कोई जानता है कि बारुईपुर में क्या हुआ। दीदी (ममता बनर्जी) जन-नेता हैं। इतनी भयानक घटना के बाद वह वहां जाना चाहती थीं। लेकिन क्या उन्होंने उन्हें नजरबंद कर दिया है? ऐसा करके क्या वे दीदी को रोक पाएंगे? मुझे इसी वजह से यहां आना पड़ा। बिना किसी वजह के यहां इतनी पुलिस और प्रशासन तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन जो कर रहा है, वह सही नहीं है। यह सुपर इमरजेंसी है।

क्या है मामला?

यह सारा विवाद बच्ची का शव मिलने के कुछ घंटों बाद शुरू हुआ। यह बच्ची एक दिन पहले लापता हो गई थी। उसका शव कोलकाता से करीब 15 किलोमीटर दूर बारुईपुर के सूर्यपुर हाट इलाके में मिला। बच्ची का शव एक बोरे में भरा हुआ था। इसके बाद स्थानीय लोग भड़क गए। लोगों ने सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाए। गुस्साए लोगों ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। लोग दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में यह घटना और हिंसक हो गई। एक गुस्साई भीड़ ने अपराध में शामिल होने के आरोपी एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

टीएमसी के बागी सांसदों का नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय का ऐलान, स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात

#kakolighoshclaimssupportof22tmcmpstomeet_speaker

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद लोकसभा सांसदों की पार्टी छोड़कर जाने की खबरें छन-छन कर आ रही हैं। इस बीच 20 बागी सांसदों का गुट त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय का ऐलान किया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा

तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा। काकोली घोष और शताब्दी रॉय के साथ पार्टी के कुछ सांसद लोकसभा स्पीकर बिरला के घर पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया है उनके साथ पार्टी के 20 सांसद हैं। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से सदन में अपने गुट के सांसदों को अलग बिठाने की मांग की है।

काकोली घोष दस्तीदार ने क्या कहा?

काकोली घोष दस्तीदार ने ओम बिरला से मुलाकात करने के बाद पत्रकारों से कहा, ''हम अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के चुने हुए सांसद थे। हमने लोकसभा स्पीकर को एआईटीसी से अपनी नाराजगी के बारे में बताया। हमने संसद में अलग से बैठने की मांग की और कहा कि नेशनलिस्ट सिटिज़ंस पार्टी के साथ विलय कर रहे हैं। हमारे साथ 20 सांसद हैं जो तृणमूल के 28 सांसदों के दो तिहाई से ज़्यादा हैं। हम एआईटीसी से अलग होकर एनडीए के साथ काम करेंगे।''

टीएमसी में टूट का सिलसिला

पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे की 35 साल तक चली सरकार को हटाकर सत्ता में आईं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 15 सालों तक प्रदेश में शासन किया। हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रही है। पार्टी के नेता एक-एक कर साथ छोड़ रहे हैं। पहले ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के साथ विधानसभा में बगावत हुई उसके बाद राष्ट्रीय नेताओं में इस्तीफे का सिलसिला शुरू हुआ।

ममता को कल्याण बनर्जी ने भी दे दिया अल्टीमेटम! बोले- अभिषेक बनर्जी अगर टीएमसी में तो मैं नहीं रहूंगा

#tmc_mp_kalyan_banejee_said_he_will_leave_party_if_abhishek_banerjee_stay

पश्चिम बंगाल की सत्ता का 15 साल तक सिरमौर रहीं ममता बनर्जी और उनकी अगुवाई वाली पार्टी तृणमूल कांग्रेस मुश्किल में हैं। एक के बाद एक नेता टीएमसी से किनारा कर रहे हैं। पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने अपने पद से इस्तीफे दे दिया है तो लोकसभा के 20 सांसद उनके खिलाफ चले गए हैं। अब टीएमसी के सबसे सीनियर चेहरों में से एक कल्याण बनर्जी ने भी तल्ख तेवर दिखाए हैं।

अभिषेक या फिर मेरे जैसे वफादारों-कल्याण मुखर्जी

पिछले कुछ दिनों से ममता के समर्थन में बयान देने वाला कल्याण बनर्जी ने अब बड़ा ऐलान कर दिया है। ममता बनर्जी को सीधी चेतावनी देते हुए कल्याण ने साफ कह दिया है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। कल्याण बनर्जी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को यह अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो वह अभिषेक को चुन लें, या फिर मेरे जैसे वफादारों को। उन्होंने कहा कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूं। लेकिन अगर अभिषेक बनर्जी टीएमसी में रहेंगे तो मैं इस पार्टी का हिस्सा नहीं बनूंगा।

अभिषेक एक घमंडी आदमी- कल्याण बनर्जी

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक एक घमंडी आदमी है। उनके घमंडी रवैये के कारण मेरे लिए पार्टी में काम करना मुश्किल हैं। उन्होंने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर केस से भी खुद को अलग करने का ऐलान किया और कहा कि अभिषेक बनर्जी ने कभी भी मुझपर भरोसा नहीं किया और आगे भी नहीं करेंगे।

या तो आप अभिषेक को रखिए या फिर हमें छोड़िए-कल्याण बनर्जी

सेरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, “मैं पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हूं और राजनीति का भी लंबा अनुभव है। मैं इस तरह का घमंडी और अपमानजनक रवैया कतई बर्दाश्त नहीं करूंगा। मैं ममता दीदी से साफ कहूंगा या तो आप अभिषेक को रखिए या फिर हमें छोड़ दीजिए।

टीएमसी के विलय की अटकलों पर कांग्रेस ने तोड़ी चुप्पी, जयराम रमेश ने बताया सोनिया-ममता की मुलाकात का सच

#congresstermsreportsofmergerwithtmcasmisleading

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बने सियासी हालात के बीच कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के विलय की अटकलें लगाई जा रही है। चर्चाओं ने तब जोर पकड़ा, जब कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी के बीच हाल ही में बैठक हुई। इस बैठक के ठीक एक दिन बाद राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की भी मुलाकात हुई। इन मुलाकातों के बाद जारी चर्चा पर कांग्रेस ने चुप्पी तोड़ी है।

मीडिया में चल रही कई खबरें पूरी तरह गलत-जयराम रमेश

कांग्रेस ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की मुलाकात के दौरान टीएमसी के कांग्रेस में विलय पर चर्चा हुई। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात को लेकर मीडिया में चल रही कई खबरें पूरी तरह गलत हैं।।

सोनिया-ममता के बीच निजी विषयों पर चर्चा

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच हुई मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई थी। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध हैं और मुलाकात के दौरान कई निजी विषयों पर चर्चा हुई।

टीएमसी ने भी खारिज की विलय की खबरें

तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने भी पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के कांग्रेस में विलय की कोई योजना नहीं है और इस तरह की खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

टीएमसी में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच मुलाकातें

बता दें कि टीएमसी में जारी अंदरूनी खींचतान और कुछ नेताओं की बगावत के बीच मंगलवार को ममता बनर्जी ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं कि कांग्रेस नेतृत्व ने टीएमसी के कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव रखा है।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

#mamatabanerjeetmccrisis50mlasmayquitparty

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।

अभिषेक के बाद कल्याण बनर्जी पर हमला, पब्लिक ने ‘चोर-चोर’ कहकर पीटा

#tmcmpkalyanbanerjeeattackedafterabhishek_banerjee

तृणमूल कांग्रेस महासचिव और पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बाद पार्टी के एक और नेता पर जोरदार हमला हुआ है। हुगली के चंदीतला पुलिस स्टेशन के पास टीएमसी सांसद कल्यान बनर्जी को पब्लिक ने पीटा है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।

कल्याण बनर्जी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट

जानकारी के अनुसार टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के साथ मारपीट की घटना उस समय हुई जब वह चंडीतला थाने में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। रास्ते में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कल्याण बनर्जी का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि इसी दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और सांसद के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की गई।

कल्याण बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया हमले का आरोप

इस दौरान सुरक्षाबलों को स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए भी देखा गया। वहीं, टीएमसी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी को संभाला और उन्हें भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया। कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं अकेला आ रहा था। मेरे साथ कोई नहीं था। बीजेपी सदस्यों ने गाली-गलौज की और मेरे सिर पर बॉल से मारा। मेरे सिर से खून बह रहा है। उन्होंने कहा कि अब लोग तय करेंगे कि क्या सही है या गलत। सांसदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

टीएमसी बोली- 24 घंटों में 2 नेताओं पर हमला अराजकता

टीएमसी ने कल्याण बनर्जी की तस्वीर शेयर करते हुए एक्स पर लिखा- लोकतंत्र पर हमला हो रहा है, पूरी तरह से अराजकता है। इन गुंडों को पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा होने की इजाजत कैसे दी गई? पुलिस की मौजूदगी में पत्थरबाजी कैसे हो सकती है? चुनाव नतीजे घोषित हुए 26 दिन बीत चुके हैं, फिर भी चुनाव के बाद होने वाली हिंसा लगातार जारी है।

एक दिन पहले अभिषेक बनर्जी पर हुआ था हमला

पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को दक्षिण सोनारपुर में हमला हुआ था, जहां वे चुनाव बाद हिंसा के पीड़ित कार्यकर्ताओं से मिलने गए थे। भीड़ ने अभिषेक पर हमला किया और अंडे भी फेंके। हाथापाई के दौरान अभिषेक की शर्ट भी फाड़ दी। भीड़ के हमले से बचने के लिए अभिषेक बनर्जी हेलमेट पहनकर निकले। इस मामले में अब तक 5 लोगों को अरेस्ट कर लिया गया है।

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद एक्शन में शुभेन्दु सरकार, 5 आरोपी गिरफ्तार

#tmcmpabhishekbanerjeeattackpolicearrested5people

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले के मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। अभिषेक बनर्जी शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में चुनाव बाद हुई हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने गए थे। इसी दौरान कथित तौर पर एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और राज्य की राजनीति गरमा गई।

पुलिस ने पांच लोगों को किया गिरफ्तार

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद बंगाल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनमें से दो लोगों की पहचान तपन मैती और आकाश के रूप में हुई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और पकड़े गए पांचों लोगों से पूछताछ की जा रही है।

ममता ने हमले के लिए भाजपा को ठहराया जिम्मेदार

टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी को चिकित्सा सुविधा मिलने से रोकने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा, सत्ता में बैठे लोग अस्पतालों और संबंधित अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं ताकि अभिषेक बनर्जी को भर्ती न किया जाए, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका इलाज हो। उन्होंने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

हमले के विरोध में टीएमसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे

उधर, अभिषेक बनर्जी के कथित हमले के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। हुगली जिले के चुंचुड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने पिपुलपाती मोड़ पर सड़क जाम कर धरना दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। असित मजूमदार ने कहा कि अत्याचार का सामना कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में जाने पर अभिषेक बनर्जी को कथित रूप से अपमानित किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए, जिसके विरोध में तृणमूल कांग्रेस सड़क पर उतरी है।

टीएमसी में बढ़ा आपसी कलह, काकोली घोष ने अपनी ही पार्टी के नेता के खिलाफ स्पीकर को लिखा पत्र

#tmcmpkakolighoshwritestolsspeakertocomplainaboutkalyanbanerjee

पश्चिम बंगाल में सत्ता के बदलते ही तृणमूल कांग्रेस का आपसी कलह खुल कर सामने आ गया है। कभी ममता की बेहद करीबी रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष ने बागी रूख अख्तियार कर लिया है। काकोली घोष ने अपनी पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। घोष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप

पत्र में काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर से अपनी पार्टी के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। काकोली घोष ने दावा किया कि कल्याण बनर्जी का उनके खिलाफ ही नहीं बल्कि अन्य महिला सांसदों के प्रति भी व्यवहार अनुचित और अपमानजनक रहा है।

स्पीकर से हस्तक्षेप करने की अपील

काकोली घोष ने अपने पत्र में लोकसभा स्पीकर से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है और औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही काकोली घोष ने उचित कार्रवाई के बाद सजा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

पार्टी के सभी पदों से दे चुकीं हैं इस्तीफा

टीएमसी नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया हैं। इसके एक दिन बाद ही उनका लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की शिकायत की, जो दिखा रहा है कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी के लोकसभा सचेतक पद से हटाया गया है। काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को ही लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है।

कल्याण बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने

काकोली घोष के आरोपों पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा है कि सदन में कोई घटना होने के बाद, स्पीकर को तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। यही नियम है। किसी भी घटना की जानकारी बिना किसी देरी के स्पीकर को दी जानी चाहिए। जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने क्या और कब कहा। असल समस्या उनकी नीयत में है। ऐसा लगता है कि वे किसी मकसद से काम कर रहे हैं, जिससे मेरे मन में संदेह पैदा होता है।

भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!