राहुल गांधी और प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज, आकाशवाणी कार्यालय में जबरन घुसने का आरोप

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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के परिसर में बिना अनुमति के दाखिल होने और वहां धरना देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने संज्ञान लिया है। पुलिस ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी दलों के गठबंधन के कई अन्य सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

राहुल-प्रियंका समेत कई अन्य पर एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ आकाशवाणी कार्यालय में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई सांसदों पर आकाशवाणी कार्यालय में जबरन प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों से आकाशवाणी भवन परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया।

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाला था मार्च

एक दिन पहले ही सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही पुलिस की ओर से इसकी अनुमति दी गई थी। निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां भी विरोध-प्रदर्शन जारी रखा।

आरजी कर केस: हाई कोर्ट ने खड़दह थाने से छीनी जांच, CBI को सौंपा केस - पुलिस की नई FIR पर उठे सवाल*

*Kolkata* : आरजी कर मामले में नई FIR को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने खड़दह थाने से जांच अपने हाथ में लेकर सीबीआई को सौंप दी है।

पिछले 24 सितंबर को जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की याचिका पर खड़दह थाने के आईसी और जांच अधिकारी को 1 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। आदेश के मुताबिक गुरुवार को दोनों पुलिस अधिकारी कोर्ट में हाजिर हुए और अपनी रिपोर्ट दाखिल की।

लंबी सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि खड़दह थाने के केस नंबर 432 की जांच अब सीबीआई करेगी। इस मामले में जो लोग जेल में हैं, उनकी जिम्मेदारी भी सीबीआई अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही केस के सभी दस्तावेज बैरकपुर की एसीजेएम कोर्ट से सियालदह की एसीजेएम कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया है।

गौरतलब है कि आरजी कर अस्पताल में मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के आरोप में खड़दह थाने ने नई FIR दर्ज की थी। इसी आरोप में पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई थी।

हालांकि हाई कोर्ट ने कहा कि आरजी कर मामले की जांच पहले से ही कोर्ट की निगरानी में सीबीआई कर रही है और विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है। ऐसे में खड़दह थाने ने नई FIR कैसे दर्ज की, इस पर बेंच ने सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच की रूपरेखा पहले ही तय की जा चुकी थी, फिर भी नई FIR दर्ज करना क्या अदालत के साथ चालाकी है, इसकी जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं।

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হাইকোর্টের নির্দেশের পর গালিব স্ট্রিটে ব্যবসায় বন্ধের অভিযোগ, বিপাকে ৬০০ ব্যবসায়ী

কলকাতা: কলকাতা হাইকোর্টের নির্দেশের পর গালিব স্ট্রিটে ব্যবসা করতে না দেওয়ার অভিযোগ তুলে আদালতের দ্বারস্থ হলেন ওই এলাকার প্রায় ৬০০ ব্যবসায়ী।

সোমবার প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চের দৃষ্টি আকর্ষণ করেন ব্যবসায়ীরা। তাঁদের অভিযোগ, গত দুই রবিবার ধরে পুলিশ প্রশাসনের তরফে তাঁদের গালিব স্ট্রিটে পসরা নিয়ে বসতে দেওয়া হচ্ছে না। হাইকোর্টের নির্দেশের পরই পুলিশ সক্রিয় হয়েছে বলে দাবি ব্যবসায়ীদের।

ব্যবসায়ীদের আরও অভিযোগ, গত দুই সপ্তাহ ধরে কাউকেই ব্যবসা করতে দেওয়া হয়নি। তাঁদের প্রত্যেকের বৈধ ট্রেড লাইসেন্স থাকা সত্ত্বেও পুলিশ বাধা দিচ্ছে। এর ফলে চরম সমস্যায় পড়েছেন তাঁরা।

ব্যবসায়ীদের আবেদনের পরিপ্রেক্ষিতে আদালত হস্তক্ষেপের আশ্বাস দিয়েছে। আগামী ৬ অক্টোবর এই মামলার শুনানির সম্ভাবনা।

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সুখচরে বন্ধুর হাতে বন্ধু খুন, হাতুড়ি দিয়ে থেঁতলে খুনের অভিযোগ, আত্মসমর্পণ অভিযুক্তের


*উৎপল দাস,খড়দহ:* উত্তর ২৪ পরগনার সুখচরের ডাঃ গোপাল চ্যাটার্জি রোডে চাঞ্চল্যকর ঘটনা। বন্ধুর হাতেই খুন হল বন্ধু। মৃতের নাম বাবু ঘোষ। অভিযুক্ত আশীষ ব্যানার্জি ওরফে বাপি। স্থানীয় সূত্রে জানা গেছে, ওই বাড়িতে দীর্ঘ প্রায় ৫ বছর ধরে একই ঘরে একসঙ্গে বসবাস করতেন দুই বন্ধু বাবু ঘোষ ও আশীষ ব্যানার্জি। তাদের সঙ্গে থাকত একটি পোষ্য সারমেয়। অভিযোগ, প্রতিদিনই মদ্যপান করতেন দুজন, তারপর সাময়িক বচসায় জড়িয়ে পড়তেন। গতকাল রাতেও একই ঘরে ছিলেন দুই বন্ধু। আর সকাল হতেই নাটকীয় মোড়। আশীষ ব্যানার্জি ওরফে বাপি সরাসরি খড়দহ থানায় গিয়ে আত্মসমর্পণ করেন এবং পুলিশের কাছে গোটা ঘটনা খুলে বলেন। তার বয়ান শুনে খড়দহ থানার পুলিশ তাকে সঙ্গে নিয়েই ঘটনাস্থলে পৌঁছায়। সেখানে গিয়ে পুলিশ দেখে, রক্তাক্ত ও নগ্ন অবস্থায় ঘরের মেঝেতে পড়ে রয়েছে বাবু ঘোষের দেহ। হাতুড়ি দিয়ে থেঁতলে দেওয়া হয়েছে তার মাথা। খবর ছড়াতেই এলাকায় চাঞ্চল্য ছড়ায়। স্থানীয় বাসিন্দারা জানান, দীর্ঘদিন ধরেই ওই ঘরে দুই বন্ধু থাকতেন। মাঝেমধ্যেই তাদের মধ্যে ঝগড়া-বচসা হতো। তবে গতকাল রাতে ঠিক কী ঘটেছিল, সে বিষয়ে তারা কিছুই জানেন না। পুলিশ দেহ উদ্ধার করে ময়নাতদন্তের জন্য পাঠিয়েছে। অভিযুক্ত আশীষ ব্যানার্জিকে আটক করে জিজ্ঞাসাবাদ শুরু করেছে খড়দহ থানার পুলিশ। খুনের পিছনে মদ্যপ অবস্থায় বচসা নাকি অন্য কোনও কারণ রয়েছে, তা খতিয়ে দেখছে পুলিশ। #Khardah #Sukhchar #Murder #FriendMurder #KhardahPolice #Barrackpore #North24Parganas #CrimeNews #WestBengalNews
বিজেপি নেতা গ্রেফতার কাণ্ডে চাঞ্চল্য খড়দহে

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মহিলাকে কুপ্রস্তাব দেওয়ার অভিযোগে গ্রেফতার বিজেপি সংখ্যালঘু মোর্চার রাজ্য সহ-সভাপতি রমজান আলী

উৎপল দাস,খড়দহ: এক মহিলাকে কুপ্রস্তাব দেওয়ার অভিযোগে বিজেপির এক রাজ্য নেতাকে গ্রেফতার করল উত্তর ২৪ পরগনার রহড়া থানার পুলিশ। ধৃত নেতার নাম রমজান আলী। তিনি বিজেপি মাইনরিটি মোর্চার রাজ্য কমিটির সহ-সভাপতি পদে ছিলেন বলে জানা গিয়েছে।

পুলিশ সূত্রে খবর, খড়দহের বন্দিপুর বলাগড় এলাকায় এক মহিলাকে কুপ্রস্তাব দেওয়ার অভিযোগ ওঠে রমজান আলীর বিরুদ্ধে। ওই মহিলার অভিযোগের ভিত্তিতেই রহড়া থানার পুলিশ তাকে গ্রেফতার করে।

আজ ধৃতকে ব্যারাকপুর মহকুমা আদালতে তোলা হয়। আদালত চত্বরে সাংবাদিকদের সামনে রমজান আলী দাবি করেন, "আমাকে তৃণমূলের লোকজন ফাঁসিয়ে দিয়েছে। খড়দার এমএলএ অফিসে বসে আমাকে খুনের হুমকি দিচ্ছে। আমি প্রতিবাদ করায় আমাকেই ফাঁসানো হয়েছে। এই ঘটনায় আমার কোনও অপরাধ ছিল না।"

ঘটনাকে কেন্দ্র করে খড়দহ এলাকায় রাজনৈতিক চাঞ্চল্য ছড়িয়েছে। বিজেপির তরফে এখনও পর্যন্ত এই বিষয়ে কোনও সরকারি প্রতিক্রিয়া পাওয়া যায়নি। পুলিশ গোটা ঘটনার তদন্ত শুরু করেছে।

লেখা ও ছবি: উৎপল দাস।

ब्रिक्स समिट को लेकर दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 15 हजार पुलिस कर्मी तैनात

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12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स समिट आयोजित हो रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस के 15,000 जवानों और अर्ध सैनिक बलों की 200 कंपनी तैनात की गई हैं। दिल्ली में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है।

किले में तब्दील दिल्ली

दिल्ली यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिखर सम्मेलन के मद्देनजर पूरी दिल्ली बंद नहीं होगी लेकिन वीवीआईपी के काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी रूप से ट्रैफिक को रोका जा सकता है। कुछ जगहों पर रूट डायवर्जन किया जा सकता है और कुछ रास्तों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा के साथ आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं और यातायात संबंधी एडवाइजरी पहले ही जारी की जा चुकी है।

खुफिया अलर्ट के बाद निगरानी बढ़ाई गई

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अलर्ट के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरों को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ संगठन या समूह वीवीआईपी नेताओं की आवाजाही में बाधा डालने, सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने या विरोध-प्रदर्शन के जरिए सम्मेलन को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। खुफिया इनपुट में दीवारों पर आपत्तिजनक या विरोध से जुड़े नारे लिखने, ड्रोन उड़ाने और वीवीआईपी रूट में घुसने जैसी कोशिशों का खतरा बताया गया है। इसके बाद सम्मेलन स्थल, प्रमुख होटलों, वीवीआईपी रूट, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों और बड़े परिवहन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।

500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए

सुरक्षा व्यवस्था हवाई अड्डे, विदेशी नेताओं को ठहराए जाने वाले होटलों, भारत मंडपम और उन अन्य स्थानों तक रहेगी जहां ये विदेशी मेहमान जाएंगे। नई दिल्ली इलाके में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों के अलावा चेहरे की पहचान करने वाली प्रणाली और वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। सम्मेलन स्थल और विदेशी मेहमानों को ठहराए जाने वाले होटलों में प्रवेश नियंत्रण, पहचान सत्यापन, खुफिया जानकारी जुटाने, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।

क्या है ब्रिक्स ?

ब्रिक्स दुनिया की पाँच सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। ब्रिक्स अंग्रेजी के अक्षर B R I C S से बना वो शब्द है, जिसमें हर अक्षर एक देश का प्रतिनिधित्व करता है। ये देश हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका। ब्रिक्स में दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती 11 प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश शामिल हैं- रूस, चीन, भारत, ब्राज़ील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जनवरी 2024 से जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में इस ग्रुपिंग का पूर्ण सदस्य बना। बेलारूस, बोलीविया, कज़ाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम 2025 में ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में संपन्न हुए ब्रिक्स समिट में इस ग्रुपिंग के पार्टनर देश बने। कुछ जानकारों का कहना है कि ये देश साल 2050 तक विनिर्माण उद्योग, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख सप्लायर यानी आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे। उनका मानना है कि चीन और भारत विनिर्माण उद्योग और सेवाओं के मामले में पूरी दुनिया के प्रमुख सप्लायर हो जाएंगे जबकि रूस और ब्राज़ील कच्चे माल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे।

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज, एक दिन की पुलिस कस्टडी में, निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में एक्शन

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इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक स्वतंत्र भारद्वाज नाम खूब चर्चा में है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता संजय कुमार को चोट लगने के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सामने आया है। सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान निशु आजाद के पिता से मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन पहले पुलिस ने पकड़ा था अब उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।

शुक्रवार को पुलिस ने लिया था हिरासत में

कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में संबंधित जज के आवास पर शनिवार को स्वतंत्र भारद्वाज की पेशी हुई। जिसके बाद उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में जज ने भेजा है। शुक्रवार को पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। यह कार्रवाई एक पॉडकास्ट की वायरल क्लिप के सामने आने के बाद हुई थी, जिसमें आरोपी ने एक छात्रा के पिता पर हमला करने की बात कबूली थी।

स्वतंत्र भारद्वाज पर क्या है आरोप

स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान 14 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। मामले में पुलिस की कार्रवाई उस समय तेज हुई, जब एक पॉडकास्ट इंटरव्यू की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसमें भारद्वाज ने कथित हमले का जिक्र करते हुए निशु के पिता की “खोपड़ी फोड़ने” का दावा किया था। जिसमें उन्हें 60 टांके लगे थे।

सीजेपी के धरना-प्रदर्शन के बाद एक्शन

वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज यह कहते भी सुना जा सकता है कि घटना के बाद संजय को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया गया और उनकी बेटी पुलिस थाने के बाहर खड़ी होकर न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या करने की बात कह रही थी। उसका दावा था कि इस सबके बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में सीजेपी नेता और कार्यकर्ता पर्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे थे और आरोपी की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। सांसद चंद्रशेखर आजाद भी इसमें शामिल हुए थे। इसी मांग और प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से पकड़ा था। अब उसे दिल्ली में जज के सामने पेशी के बाद पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

भारद्वाज की हिरासत पर क्यों भड़के हिंदू संगठन?

स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली में उनके समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गया। शनिवार को हिंदू रक्षा दल समेत कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता संसद मार्ग थाने के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र की रिहाई की मांग की और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वतंत्र के खिलाफ दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि केस में कुछ गंभीर धाराएं दबाव में जोड़ी गई हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए।

कौन है स्वतंत्र भारद्वाज?

स्वतंत्र भारद्वाज बिहार के दरभंगा के रहने वाले बताए जाते हैं। वह यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आए और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। विभिन्न पॉडकास्ट में वह खुद को दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़ा बताते रहे हैं और हिंदूवादी संगठनों से अपने संबंधों की बात करते रहे हैं। उनसे जुड़े पुराने वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। एक तस्वीर में वह कथित तौर पर पुलिस के जूते पहने दिखाई दे रहे हैं। उनके कुछ पुराने पॉडकास्ट में जेल, आपराधिक धाराओं और हिंसा से जुड़े विषयों पर बातचीत भी सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है।

कौन है निशु आजाद जिसके पिता को न्याय दिलाने सड़क पर उतरी सीजेपी, संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन

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कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर सड़क पर उतरी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जून को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए निशु आजाद के पिता को न्याय दिलाने के लिए सीजेपी संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए गाजियाबाद के संजय कुमार (38) की बेटी निशु ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर निशु का एक वीडियो आया है, जिसमें वह कह रही हैं कि अब दिल्ली पुलिस से उनकी आशा और उम्मीद टूटने लगी है।

वीडियो आने के बाद बवाल बढ़ा

निशु का वीडियो आने के बाद इसे लेकर बवाल बढ़ गया है। निशु वीडियो में कह रही हैं कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह साफ कह रहा कि उस पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज होना चाहिए था। निशु ने कहा कि जब मेरे पापा का सिर फोड़ा था। तब उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर रही है। निशु ने अपना वीडियो राहुल गांधी को भी टैग किया है। उनका कहना है कि अब पुलिस से उम्मीद नहीं है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को कानून का डर नहीं है। अब मुझे बस राहुल गांधी से उम्मीद है।

सौरव दास का थाने के सामने धरना-प्रदर्शन

निशु दिल्ली पुलिस से एक्शन की मांग कर रही हैं। साथ ही वह स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही हैं। इसे लेकर आज संसद थाने के बाहर काफी गहमागहमी है। निशु मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और कुछ लोग पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे हैं। थाने के सामने सड़क पर बैठ गए हैं।

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थक के पिता पर हुए हमले में कार्रवाई न करने की बात कही। रांका के अनुसार, सौरभ और उनके पूरे दल ने दिल्ली पुलिस से हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। उन्होंने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की भी मांग की थी। हालांकि, पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। आज, घटना में शामिल लोग खुले तौर पर संजय पर हमला करने की बात स्वीकार कर रहे हैं। वे यह भी मान रहे हैं कि उन्होंने संजय को जान से मारने का प्रयास किया था। इसके बावजूद, दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर कोई कदम नहीं उठाया है। यह आरोप कपिल मिश्रा और भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रभाव में कार्रवाई न करने का है।

स्वतंत्र भारद्वाज के वीडियो में क्या?

इस बीच कथित हमलावर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि उसने सीजेपी के एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, उसे 60 टांके लगे थे और उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वह मौत के करीब पहुंच गया था। वह यह भी कहता है कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। वीडियो में उसने आगे कहा 'मैं अगले दिन ही पुलिस हिरासत से बाहर आ गया। मुझे जेल भी नहीं जाना पड़ा। मैंने पुलिस को यह कहते सुना कि कपिल मिश्रा का फोन आया था। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं।

दंगों के मास्टरमाइंड थे शरजील इमाम और उमर खालिद', दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस ने किया जमानत का विरोध

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में जोरदार विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को मास्टरमाइंड बताया है। अदालत में पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का भी विरोध किया।

'दोनों दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड'

31 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाब दाखिल करने को कहा था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड थे। पुलिस के पास इनके खिलाफ दंगों की योजना बनाने, लोगों को जुटाने और दंगों में रणनीतिक भूमिका निभाने से जुड़े अहम सबूत है।

'याचिकाएं ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली'

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों की नई जमानत याचिकाएं अपने आप में ही ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सहआरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था कि दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका अलग है। पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि इस केस में यूएपीए की धारा 43डी(5) लागू होती है, जिसमें जमानत की सख्त शर्तों का प्रावधान है।

नए सिरे से लगा सकते हैं जमानत याचिका

पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि जनवरी के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते समय नए सिरे से जमानत के लिए दो शर्त लगाई थीं। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील इस मामले में अहम गवाहों के बयान होने या फिर इस फैसले के एक साल पूरी होने पर नए सिरे से फिर जमानत की याचिकाएं लगा सकते है।

सीएए के विरोध में हुए थे दंगे

बता दें कि यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए दंगों से जुड़ा है, जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से खालिद और शरजील जेल में बंद हैं।

संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी, पैलेट गन फायरिंग मामले में FIR दर्ज करने की मांग*

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जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा अब थाने तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को पीड़ित छात्र साहिल और उसके परिवार के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे। राहुल गांधी की मांग है कि छात्र को लगी चोटों की जांच हो और इस मामले में FIR दर्ज की जाए।

पैलेट गन पीड़ित साहिल लोचब का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनकी शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया है। राहुल और साहिल पहले कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन बाद में FIR दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में DCP ऑफिस गए। इस दौरान, राहुल गांधी ने पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी।

पैलेट गन फायरिंग में घायल युवक के साथ धरने पर बैठे

कथित पैलेट गन फायरिंग में घायल हुए युवक के साथ राहुल गांधी पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी नुपुर प्रसाद से मुलाकात की। उन्हें चार्ज संभाले अभी दो दिन ही हुए हैं। मुलाकात के बाद राहुल गांधी बाहर आए और यहां पहुंचने के बाद अचानक बाहर ही बैठ गए।

राहुल पहले भी उठे चुके हैं ये मामला

राहुल गांधी के साथ मौजूद साहिल वही छात्र है, जिसे लेकर कांग्रेस नेता पहले भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। राहुल गांधी ने उस दौरान छात्र के शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए दावा किया था कि ये पैलेट गन के छर्रों से लगी चोटें हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ और साहिल की आंख की रोशनी भी बुरी तरह प्रभावित हुई। अब राहुल गांधी चाहते हैं कि पुलिस मेडिकल जांच और दूसरे सबूतों के आधार पर यह साफ करे कि छात्र को चोट किस चीज से लगी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए गठित की हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा तथा पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी (एचपीईसी) का गठन किया है। कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा या अनुचित बल का इस्तेमाल तो नहीं किया। इसमें पैलेट गन, बिजली के डंडे, लाठी और आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच होगी। यह देखा जाएगा कि इनका इस्तेमाल पर्याप्त चेतावनी दिए बिना या जरूरत से अधिक तो नहीं किया गया।

क्या है पैलेट गन विवाद?

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट में घायलों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारी पैलेट गन से घायल हुए थे। रिपोर्ट्स में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, जबकि दिल्ली पुलिस ने इस तरह के हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया और कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उनके पास न तो पैलेट गन हैं और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं।

राहुल गांधी और प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज, आकाशवाणी कार्यालय में जबरन घुसने का आरोप

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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के परिसर में बिना अनुमति के दाखिल होने और वहां धरना देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने संज्ञान लिया है। पुलिस ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी दलों के गठबंधन के कई अन्य सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

राहुल-प्रियंका समेत कई अन्य पर एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ आकाशवाणी कार्यालय में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई सांसदों पर आकाशवाणी कार्यालय में जबरन प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों से आकाशवाणी भवन परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया।

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाला था मार्च

एक दिन पहले ही सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही पुलिस की ओर से इसकी अनुमति दी गई थी। निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां भी विरोध-प्रदर्शन जारी रखा।

आरजी कर केस: हाई कोर्ट ने खड़दह थाने से छीनी जांच, CBI को सौंपा केस - पुलिस की नई FIR पर उठे सवाल*

*Kolkata* : आरजी कर मामले में नई FIR को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने खड़दह थाने से जांच अपने हाथ में लेकर सीबीआई को सौंप दी है।

पिछले 24 सितंबर को जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की याचिका पर खड़दह थाने के आईसी और जांच अधिकारी को 1 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। आदेश के मुताबिक गुरुवार को दोनों पुलिस अधिकारी कोर्ट में हाजिर हुए और अपनी रिपोर्ट दाखिल की।

लंबी सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि खड़दह थाने के केस नंबर 432 की जांच अब सीबीआई करेगी। इस मामले में जो लोग जेल में हैं, उनकी जिम्मेदारी भी सीबीआई अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही केस के सभी दस्तावेज बैरकपुर की एसीजेएम कोर्ट से सियालदह की एसीजेएम कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया है।

गौरतलब है कि आरजी कर अस्पताल में मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने के आरोप में खड़दह थाने ने नई FIR दर्ज की थी। इसी आरोप में पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि राज्य में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई थी।

हालांकि हाई कोर्ट ने कहा कि आरजी कर मामले की जांच पहले से ही कोर्ट की निगरानी में सीबीआई कर रही है और विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है। ऐसे में खड़दह थाने ने नई FIR कैसे दर्ज की, इस पर बेंच ने सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच की रूपरेखा पहले ही तय की जा चुकी थी, फिर भी नई FIR दर्ज करना क्या अदालत के साथ चालाकी है, इसकी जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं।

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হাইকোর্টের নির্দেশের পর গালিব স্ট্রিটে ব্যবসায় বন্ধের অভিযোগ, বিপাকে ৬০০ ব্যবসায়ী

কলকাতা: কলকাতা হাইকোর্টের নির্দেশের পর গালিব স্ট্রিটে ব্যবসা করতে না দেওয়ার অভিযোগ তুলে আদালতের দ্বারস্থ হলেন ওই এলাকার প্রায় ৬০০ ব্যবসায়ী।

সোমবার প্রধান বিচারপতির ডিভিশন বেঞ্চের দৃষ্টি আকর্ষণ করেন ব্যবসায়ীরা। তাঁদের অভিযোগ, গত দুই রবিবার ধরে পুলিশ প্রশাসনের তরফে তাঁদের গালিব স্ট্রিটে পসরা নিয়ে বসতে দেওয়া হচ্ছে না। হাইকোর্টের নির্দেশের পরই পুলিশ সক্রিয় হয়েছে বলে দাবি ব্যবসায়ীদের।

ব্যবসায়ীদের আরও অভিযোগ, গত দুই সপ্তাহ ধরে কাউকেই ব্যবসা করতে দেওয়া হয়নি। তাঁদের প্রত্যেকের বৈধ ট্রেড লাইসেন্স থাকা সত্ত্বেও পুলিশ বাধা দিচ্ছে। এর ফলে চরম সমস্যায় পড়েছেন তাঁরা।

ব্যবসায়ীদের আবেদনের পরিপ্রেক্ষিতে আদালত হস্তক্ষেপের আশ্বাস দিয়েছে। আগামী ৬ অক্টোবর এই মামলার শুনানির সম্ভাবনা।

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সুখচরে বন্ধুর হাতে বন্ধু খুন, হাতুড়ি দিয়ে থেঁতলে খুনের অভিযোগ, আত্মসমর্পণ অভিযুক্তের


*উৎপল দাস,খড়দহ:* উত্তর ২৪ পরগনার সুখচরের ডাঃ গোপাল চ্যাটার্জি রোডে চাঞ্চল্যকর ঘটনা। বন্ধুর হাতেই খুন হল বন্ধু। মৃতের নাম বাবু ঘোষ। অভিযুক্ত আশীষ ব্যানার্জি ওরফে বাপি। স্থানীয় সূত্রে জানা গেছে, ওই বাড়িতে দীর্ঘ প্রায় ৫ বছর ধরে একই ঘরে একসঙ্গে বসবাস করতেন দুই বন্ধু বাবু ঘোষ ও আশীষ ব্যানার্জি। তাদের সঙ্গে থাকত একটি পোষ্য সারমেয়। অভিযোগ, প্রতিদিনই মদ্যপান করতেন দুজন, তারপর সাময়িক বচসায় জড়িয়ে পড়তেন। গতকাল রাতেও একই ঘরে ছিলেন দুই বন্ধু। আর সকাল হতেই নাটকীয় মোড়। আশীষ ব্যানার্জি ওরফে বাপি সরাসরি খড়দহ থানায় গিয়ে আত্মসমর্পণ করেন এবং পুলিশের কাছে গোটা ঘটনা খুলে বলেন। তার বয়ান শুনে খড়দহ থানার পুলিশ তাকে সঙ্গে নিয়েই ঘটনাস্থলে পৌঁছায়। সেখানে গিয়ে পুলিশ দেখে, রক্তাক্ত ও নগ্ন অবস্থায় ঘরের মেঝেতে পড়ে রয়েছে বাবু ঘোষের দেহ। হাতুড়ি দিয়ে থেঁতলে দেওয়া হয়েছে তার মাথা। খবর ছড়াতেই এলাকায় চাঞ্চল্য ছড়ায়। স্থানীয় বাসিন্দারা জানান, দীর্ঘদিন ধরেই ওই ঘরে দুই বন্ধু থাকতেন। মাঝেমধ্যেই তাদের মধ্যে ঝগড়া-বচসা হতো। তবে গতকাল রাতে ঠিক কী ঘটেছিল, সে বিষয়ে তারা কিছুই জানেন না। পুলিশ দেহ উদ্ধার করে ময়নাতদন্তের জন্য পাঠিয়েছে। অভিযুক্ত আশীষ ব্যানার্জিকে আটক করে জিজ্ঞাসাবাদ শুরু করেছে খড়দহ থানার পুলিশ। খুনের পিছনে মদ্যপ অবস্থায় বচসা নাকি অন্য কোনও কারণ রয়েছে, তা খতিয়ে দেখছে পুলিশ। #Khardah #Sukhchar #Murder #FriendMurder #KhardahPolice #Barrackpore #North24Parganas #CrimeNews #WestBengalNews
বিজেপি নেতা গ্রেফতার কাণ্ডে চাঞ্চল্য খড়দহে

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মহিলাকে কুপ্রস্তাব দেওয়ার অভিযোগে গ্রেফতার বিজেপি সংখ্যালঘু মোর্চার রাজ্য সহ-সভাপতি রমজান আলী

উৎপল দাস,খড়দহ: এক মহিলাকে কুপ্রস্তাব দেওয়ার অভিযোগে বিজেপির এক রাজ্য নেতাকে গ্রেফতার করল উত্তর ২৪ পরগনার রহড়া থানার পুলিশ। ধৃত নেতার নাম রমজান আলী। তিনি বিজেপি মাইনরিটি মোর্চার রাজ্য কমিটির সহ-সভাপতি পদে ছিলেন বলে জানা গিয়েছে।

পুলিশ সূত্রে খবর, খড়দহের বন্দিপুর বলাগড় এলাকায় এক মহিলাকে কুপ্রস্তাব দেওয়ার অভিযোগ ওঠে রমজান আলীর বিরুদ্ধে। ওই মহিলার অভিযোগের ভিত্তিতেই রহড়া থানার পুলিশ তাকে গ্রেফতার করে।

আজ ধৃতকে ব্যারাকপুর মহকুমা আদালতে তোলা হয়। আদালত চত্বরে সাংবাদিকদের সামনে রমজান আলী দাবি করেন, "আমাকে তৃণমূলের লোকজন ফাঁসিয়ে দিয়েছে। খড়দার এমএলএ অফিসে বসে আমাকে খুনের হুমকি দিচ্ছে। আমি প্রতিবাদ করায় আমাকেই ফাঁসানো হয়েছে। এই ঘটনায় আমার কোনও অপরাধ ছিল না।"

ঘটনাকে কেন্দ্র করে খড়দহ এলাকায় রাজনৈতিক চাঞ্চল্য ছড়িয়েছে। বিজেপির তরফে এখনও পর্যন্ত এই বিষয়ে কোনও সরকারি প্রতিক্রিয়া পাওয়া যায়নি। পুলিশ গোটা ঘটনার তদন্ত শুরু করেছে।

লেখা ও ছবি: উৎপল দাস।

ब्रिक्स समिट को लेकर दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 15 हजार पुलिस कर्मी तैनात

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12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स समिट आयोजित हो रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस के 15,000 जवानों और अर्ध सैनिक बलों की 200 कंपनी तैनात की गई हैं। दिल्ली में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है।

किले में तब्दील दिल्ली

दिल्ली यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिखर सम्मेलन के मद्देनजर पूरी दिल्ली बंद नहीं होगी लेकिन वीवीआईपी के काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी रूप से ट्रैफिक को रोका जा सकता है। कुछ जगहों पर रूट डायवर्जन किया जा सकता है और कुछ रास्तों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा के साथ आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं और यातायात संबंधी एडवाइजरी पहले ही जारी की जा चुकी है।

खुफिया अलर्ट के बाद निगरानी बढ़ाई गई

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अलर्ट के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरों को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ संगठन या समूह वीवीआईपी नेताओं की आवाजाही में बाधा डालने, सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने या विरोध-प्रदर्शन के जरिए सम्मेलन को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। खुफिया इनपुट में दीवारों पर आपत्तिजनक या विरोध से जुड़े नारे लिखने, ड्रोन उड़ाने और वीवीआईपी रूट में घुसने जैसी कोशिशों का खतरा बताया गया है। इसके बाद सम्मेलन स्थल, प्रमुख होटलों, वीवीआईपी रूट, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों और बड़े परिवहन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।

500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए

सुरक्षा व्यवस्था हवाई अड्डे, विदेशी नेताओं को ठहराए जाने वाले होटलों, भारत मंडपम और उन अन्य स्थानों तक रहेगी जहां ये विदेशी मेहमान जाएंगे। नई दिल्ली इलाके में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों के अलावा चेहरे की पहचान करने वाली प्रणाली और वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। सम्मेलन स्थल और विदेशी मेहमानों को ठहराए जाने वाले होटलों में प्रवेश नियंत्रण, पहचान सत्यापन, खुफिया जानकारी जुटाने, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।

क्या है ब्रिक्स ?

ब्रिक्स दुनिया की पाँच सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। ब्रिक्स अंग्रेजी के अक्षर B R I C S से बना वो शब्द है, जिसमें हर अक्षर एक देश का प्रतिनिधित्व करता है। ये देश हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका। ब्रिक्स में दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती 11 प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश शामिल हैं- रूस, चीन, भारत, ब्राज़ील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जनवरी 2024 से जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में इस ग्रुपिंग का पूर्ण सदस्य बना। बेलारूस, बोलीविया, कज़ाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम 2025 में ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में संपन्न हुए ब्रिक्स समिट में इस ग्रुपिंग के पार्टनर देश बने। कुछ जानकारों का कहना है कि ये देश साल 2050 तक विनिर्माण उद्योग, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख सप्लायर यानी आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे। उनका मानना है कि चीन और भारत विनिर्माण उद्योग और सेवाओं के मामले में पूरी दुनिया के प्रमुख सप्लायर हो जाएंगे जबकि रूस और ब्राज़ील कच्चे माल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे।

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज, एक दिन की पुलिस कस्टडी में, निशु आजाद के पिता से मारपीट मामले में एक्शन

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इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक स्वतंत्र भारद्वाज नाम खूब चर्चा में है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता संजय कुमार को चोट लगने के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सामने आया है। सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान निशु आजाद के पिता से मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को एक दिन पहले पुलिस ने पकड़ा था अब उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।

शुक्रवार को पुलिस ने लिया था हिरासत में

कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में संबंधित जज के आवास पर शनिवार को स्वतंत्र भारद्वाज की पेशी हुई। जिसके बाद उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में जज ने भेजा है। शुक्रवार को पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। यह कार्रवाई एक पॉडकास्ट की वायरल क्लिप के सामने आने के बाद हुई थी, जिसमें आरोपी ने एक छात्रा के पिता पर हमला करने की बात कबूली थी।

स्वतंत्र भारद्वाज पर क्या है आरोप

स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान 14 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। मामले में पुलिस की कार्रवाई उस समय तेज हुई, जब एक पॉडकास्ट इंटरव्यू की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इसमें भारद्वाज ने कथित हमले का जिक्र करते हुए निशु के पिता की “खोपड़ी फोड़ने” का दावा किया था। जिसमें उन्हें 60 टांके लगे थे।

सीजेपी के धरना-प्रदर्शन के बाद एक्शन

वीडियो में स्वतंत्र भारद्वाज यह कहते भी सुना जा सकता है कि घटना के बाद संजय को गंभीर हालत में एम्बुलेंस से ले जाया गया और उनकी बेटी पुलिस थाने के बाहर खड़ी होकर न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या करने की बात कह रही थी। उसका दावा था कि इस सबके बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। इसी मुद्दे पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में सीजेपी नेता और कार्यकर्ता पर्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे थे और आरोपी की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। सांसद चंद्रशेखर आजाद भी इसमें शामिल हुए थे। इसी मांग और प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से पकड़ा था। अब उसे दिल्ली में जज के सामने पेशी के बाद पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

भारद्वाज की हिरासत पर क्यों भड़के हिंदू संगठन?

स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली में उनके समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गया। शनिवार को हिंदू रक्षा दल समेत कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता संसद मार्ग थाने के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र की रिहाई की मांग की और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वतंत्र के खिलाफ दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि केस में कुछ गंभीर धाराएं दबाव में जोड़ी गई हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए।

कौन है स्वतंत्र भारद्वाज?

स्वतंत्र भारद्वाज बिहार के दरभंगा के रहने वाले बताए जाते हैं। वह यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आए और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। विभिन्न पॉडकास्ट में वह खुद को दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़ा बताते रहे हैं और हिंदूवादी संगठनों से अपने संबंधों की बात करते रहे हैं। उनसे जुड़े पुराने वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। एक तस्वीर में वह कथित तौर पर पुलिस के जूते पहने दिखाई दे रहे हैं। उनके कुछ पुराने पॉडकास्ट में जेल, आपराधिक धाराओं और हिंसा से जुड़े विषयों पर बातचीत भी सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है।

कौन है निशु आजाद जिसके पिता को न्याय दिलाने सड़क पर उतरी सीजेपी, संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन

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कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर सड़क पर उतरी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जून को सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए निशु आजाद के पिता को न्याय दिलाने के लिए सीजेपी संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन में घायल हुए गाजियाबाद के संजय कुमार (38) की बेटी निशु ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर निशु का एक वीडियो आया है, जिसमें वह कह रही हैं कि अब दिल्ली पुलिस से उनकी आशा और उम्मीद टूटने लगी है।

वीडियो आने के बाद बवाल बढ़ा

निशु का वीडियो आने के बाद इसे लेकर बवाल बढ़ गया है। निशु वीडियो में कह रही हैं कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह साफ कह रहा कि उस पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज होना चाहिए था। निशु ने कहा कि जब मेरे पापा का सिर फोड़ा था। तब उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर रही है। निशु ने अपना वीडियो राहुल गांधी को भी टैग किया है। उनका कहना है कि अब पुलिस से उम्मीद नहीं है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को कानून का डर नहीं है। अब मुझे बस राहुल गांधी से उम्मीद है।

सौरव दास का थाने के सामने धरना-प्रदर्शन

निशु दिल्ली पुलिस से एक्शन की मांग कर रही हैं। साथ ही वह स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही हैं। इसे लेकर आज संसद थाने के बाहर काफी गहमागहमी है। निशु मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और कुछ लोग पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे हैं। थाने के सामने सड़क पर बैठ गए हैं।

सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थक के पिता पर हुए हमले में कार्रवाई न करने की बात कही। रांका के अनुसार, सौरभ और उनके पूरे दल ने दिल्ली पुलिस से हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। उन्होंने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की भी मांग की थी। हालांकि, पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। आज, घटना में शामिल लोग खुले तौर पर संजय पर हमला करने की बात स्वीकार कर रहे हैं। वे यह भी मान रहे हैं कि उन्होंने संजय को जान से मारने का प्रयास किया था। इसके बावजूद, दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर कोई कदम नहीं उठाया है। यह आरोप कपिल मिश्रा और भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रभाव में कार्रवाई न करने का है।

स्वतंत्र भारद्वाज के वीडियो में क्या?

इस बीच कथित हमलावर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि उसने सीजेपी के एक प्रदर्शनकारी के पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की थी, उसे 60 टांके लगे थे और उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वह मौत के करीब पहुंच गया था। वह यह भी कहता है कि उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाना चाहिए था। वीडियो में उसने आगे कहा 'मैं अगले दिन ही पुलिस हिरासत से बाहर आ गया। मुझे जेल भी नहीं जाना पड़ा। मैंने पुलिस को यह कहते सुना कि कपिल मिश्रा का फोन आया था। वह मेरे बड़े भाई जैसे हैं।

दंगों के मास्टरमाइंड थे शरजील इमाम और उमर खालिद', दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस ने किया जमानत का विरोध

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में जोरदार विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को मास्टरमाइंड बताया है। अदालत में पुलिस ने अपना जवाब दाखिल करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का भी विरोध किया।

'दोनों दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड'

31 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जवाब दाखिल करने को कहा था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा कि शरजील इमाम और उमर खालिद दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड थे। पुलिस के पास इनके खिलाफ दंगों की योजना बनाने, लोगों को जुटाने और दंगों में रणनीतिक भूमिका निभाने से जुड़े अहम सबूत है।

'याचिकाएं ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली'

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों की नई जमानत याचिकाएं अपने आप में ही ‘गैरकानूनी’ और कोर्ट को गुमराह करने वाली हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सहआरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था कि दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका अलग है। पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि इस केस में यूएपीए की धारा 43डी(5) लागू होती है, जिसमें जमानत की सख्त शर्तों का प्रावधान है।

नए सिरे से लगा सकते हैं जमानत याचिका

पुलिस ने यह भी जिक्र किया कि जनवरी के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते समय नए सिरे से जमानत के लिए दो शर्त लगाई थीं। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील इस मामले में अहम गवाहों के बयान होने या फिर इस फैसले के एक साल पूरी होने पर नए सिरे से फिर जमानत की याचिकाएं लगा सकते है।

सीएए के विरोध में हुए थे दंगे

बता दें कि यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हुए दंगों से जुड़ा है, जिनमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से खालिद और शरजील जेल में बंद हैं।

संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी, पैलेट गन फायरिंग मामले में FIR दर्ज करने की मांग*

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जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा अब थाने तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को पीड़ित छात्र साहिल और उसके परिवार के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे। राहुल गांधी की मांग है कि छात्र को लगी चोटों की जांच हो और इस मामले में FIR दर्ज की जाए।

पैलेट गन पीड़ित साहिल लोचब का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनकी शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया है। राहुल और साहिल पहले कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन बाद में FIR दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में DCP ऑफिस गए। इस दौरान, राहुल गांधी ने पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी।

पैलेट गन फायरिंग में घायल युवक के साथ धरने पर बैठे

कथित पैलेट गन फायरिंग में घायल हुए युवक के साथ राहुल गांधी पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी नुपुर प्रसाद से मुलाकात की। उन्हें चार्ज संभाले अभी दो दिन ही हुए हैं। मुलाकात के बाद राहुल गांधी बाहर आए और यहां पहुंचने के बाद अचानक बाहर ही बैठ गए।

राहुल पहले भी उठे चुके हैं ये मामला

राहुल गांधी के साथ मौजूद साहिल वही छात्र है, जिसे लेकर कांग्रेस नेता पहले भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। राहुल गांधी ने उस दौरान छात्र के शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए दावा किया था कि ये पैलेट गन के छर्रों से लगी चोटें हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ और साहिल की आंख की रोशनी भी बुरी तरह प्रभावित हुई। अब राहुल गांधी चाहते हैं कि पुलिस मेडिकल जांच और दूसरे सबूतों के आधार पर यह साफ करे कि छात्र को चोट किस चीज से लगी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए गठित की हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा तथा पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी (एचपीईसी) का गठन किया है। कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा या अनुचित बल का इस्तेमाल तो नहीं किया। इसमें पैलेट गन, बिजली के डंडे, लाठी और आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच होगी। यह देखा जाएगा कि इनका इस्तेमाल पर्याप्त चेतावनी दिए बिना या जरूरत से अधिक तो नहीं किया गया।

क्या है पैलेट गन विवाद?

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट में घायलों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारी पैलेट गन से घायल हुए थे। रिपोर्ट्स में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, जबकि दिल्ली पुलिस ने इस तरह के हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया और कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उनके पास न तो पैलेट गन हैं और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं।