“कॉकरोच” टिप्पणी पर CJI सूर्यकांत का स्पष्टीकरण
* बोले— बेरोजगार युवाओं नहीं, फर्जी डिग्री वालों पर की थी टिप्पणी

**नई दिल्ली।** सीजेआई सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी कथित “कॉकरोच” टिप्पणी को लेकर सफाई जारी करते हुए कहा कि उनकी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवियों” से की थी। हालांकि, सूर्यकांत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना उन लोगों को लेकर थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के जरिए वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जो नकली और फर्जी डिग्रियों की मदद से कानूनी पेशे में घुस आए हैं”।
सूर्यकांत ने आगे कहा कि ऐसे लोग केवल वकालत ही नहीं, बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं और समाज के लिए “परजीवी” की तरह हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बाद आया है, जिसमें सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर उनकी टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
“कॉकरोच” टिप्पणी पर CJI सूर्यकांत का स्पष्टीकरण
* बोले— बेरोजगार युवाओं नहीं, फर्जी डिग्री वालों पर की थी टिप्पणी

**नई दिल्ली।** सीजेआई सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी कथित “कॉकरोच” टिप्पणी को लेकर सफाई जारी करते हुए कहा कि उनकी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवियों” से की थी। हालांकि, सूर्यकांत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना उन लोगों को लेकर थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के जरिए वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा “मुझे यह देखकर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। मैंने विशेष रूप से उन लोगों की आलोचना की थी, जो नकली और फर्जी डिग्रियों की मदद से कानूनी पेशे में घुस आए हैं”।
सूर्यकांत ने आगे कहा कि ऐसे लोग केवल वकालत ही नहीं, बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं और समाज के लिए “परजीवी” की तरह हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बाद आया है, जिसमें सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर उनकी टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
182 करोड़ की 'जिहादी ड्रग' जब्त, जिसे खाते ही आतंकी बन जाते हैं खूंखार

#ncbmajorconsignmentcaptagondrugseizedfirsttimeinthecountry

देश की मोदी सरकार को ड्रग तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए पहली बार ‘जिहादी ड्रग’ कहे जाने वाले ‘कैप्टागन’ की बड़ी खेप जब्त की है। मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी।

पहली बार कैप्टागन नामक ड्रग की बड़ी खेप जब्त

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने पहली बार कैप्टागन नामक ड्रग की बड़ी खेप जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है। गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ड्रग-फ्री इंडिया के संकल्प के साथ लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत एजेंसियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।

ड्रग्स के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस

अमित शाह ने कहा कि मध्य पूर्व जा रही ड्रग्स की खेप को जब्त करना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी ड्रग्स के प्रति हमारी शून्य सहिष्णुता की प्रतिबद्धता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मैं दोहराता हूं कि हम भारत में प्रवेश करने वाले या हमारे क्षेत्र को पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग करके देश से बाहर जाने वाले हर ग्राम ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। एनसीबी के बहादुर और सतर्क योद्धाओं को सलाम।

कैप्टागन को जिहादी ड्रग्स क्यों कहते हैं?

अब सवाल यह है कि आखिर कैप्टागन को जिहादी ड्रग्स क्यों कहा जाता है? इसका इस्तेमाल कौन करता है और भारत की नारकोटिक्स एजेंसियों ने कैसे इसका भंडाफोड़ किया। कैप्टागन असल में फेनेथिलिन नामक एम्फेटामिन आधारित ड्रग का रूप है। मिडिल ईस्ट के युद्धग्रस्त इलाकों और आतंकी संगठनों के लड़ाकों के बीच इसके इस्तेमाल की वजह से इसे ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है। इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान को दर्द, डर या थकान का एहसास कम हो जाता है। इसे लेने के बाद इंसान लंबे समय तक जाग सकता है, थकान महसूस नहीं होती, फोकस बढ़ जाता है और दिमाग में एक अलग तरह का जोश और खुशी महसूस होती है। यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

अमेरिका ने ISIS के दूसरे सबसे बड़े आतंकी अबू-बिलाल अल-मिनुकी को मारा, डोनाल्ड ट्रंप ने दी जानकारी

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अमेरिकी सेना ने नाइजीरिया में आईएसआईएस के दूसरे सबसे बड़े वैश्विक कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी का खात्मा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को खुद इसकी जानकारी दी। ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को घोषणा की है कि अमेरिका ने नाइजीरिया में एक ऑपरेशन चलाया था जिसमें अल-मिनुकी मारा गया।

अमेरिकी-नाइजीरियाई सेनाओं के ज्वाइंट ऑपरेशन

डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा है "आज रात मेरे निर्देश पर बहादुर अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सेना ने दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकवादी को युद्ध के मैदान से खत्म करने के लिए एक बहुत ही बारीकी से प्लान किए गए और बेहद मुश्किल मिशन को बिना किसी गलती के अंजाम दिया।"

दुनिया भर में ISIS का दूसरे नंबर का था कमांडर

ट्रंप ने आगे लिखा "अबू-बिलाल अल-मिनुकी, जो दुनिया भर में ISIS का दूसरे नंबर का कमांडर था, उसे लगा कि वह अफ्रीका में छिप सकता है, लेकिन उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि हमारे पास ऐसे सूत्र थे जो हमें पल-पल की खबर दे रहे थे कि वह क्या कर रहा है।"

नाइजीरिया सरकार का जताया आभार

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि "अब आईएसआईएस का यह नेता अफ्रीका के लोगों को डराने या अमेरिकियों पर हमले की योजना बनाने में मदद नहीं कर सकेगा। उसके मारे जाने के बाद ISIS की वैश्विक गतिविधियां काफी कमजोर हो गई हैं। इस ऑपरेशन में साझेदारी के लिए नाइजीरिया सरकार का धन्यवाद।"

कौन था अबू-बिलाल अल-मिनुकी?

अबू-बिलाल अल-मिनुकी को अबू बक्र इब्न मुहम्मद इब्न अली अल-मैनुकी के नाम से भी जाना जाता था। वह अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में ISIS की गतिविधियों से जुड़ा एक वरिष्ठ नेता था। वह इस्लामिक दुनिया बनाना चाहता था। अमेरिकी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, वह ISIS के जनरल डायरेक्टरेट ऑफ प्रोविन्सेज से जुड़ा था और उसके कई नाम थे। जैसे अबू बिलाल अल-मिनुकी, अबुबकर मैनोक और अबोर मैनोक। अमेरिका के विदेश विभाग ने 2023 में उसे आधिकारिक तौर पर ISIS का वरिष्ठ नेता घोषित किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, साहेल क्षेत्र में ISIS से जुड़ी गतिविधियों में उसकी बड़ी भूमिका थी और संगठन की अंतरराष्ट्रीय संरचना में उसे एक महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता था।

हमें अभी किसी युद्ध की जरूरत नहीं', ताइवान मुद्दे पर बदले ट्रंप के सुर, जिनपिंग की धमकी का असर?

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन और ताइवान के बीच चल रहे भारी तनाव को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर ताइवान पर बदले नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय अमेरिका को किसी भी युद्ध की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, खासकर ऐसे युद्ध की जो 9,500 मील दूर हो।

चीन यात्रा के समापन पर फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ट्रंप ने ताइवान को लेकर कहा, "हम युद्ध नहीं चाहते हैं और अगर आप स्थिति को वैसा ही बनाए रखते हैं, जैसी वह अभी है, तो मुझे लगता है कि चीन को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई यह कहे, चलो हम स्वतंत्र हो जाते हैं, क्योंकि अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है।" इंटरव्यू में ट्रंप ने दोहराया कि ताइवान पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

1982 के समझौते और हथियारों की बिक्री पर क्या बोले ट्रंप?

पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा 1982 में दिए गए उस भरोसे के बारे में पूछा, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचने पर चीन से सलाह नहीं लेगा, तो ट्रंप ने इसका बेबाकी से जवाब दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 1982 अब बहुत पुरानी बात हो चुकी है।

9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत-ट्रंप

ट्रंप ने साफ किया कि बातचीत के दौरान खुद चीनी राष्ट्रपति ने यह मुद्दा उठाया था। ट्रंप ने कहा कि वे 1982 के समझौते का हवाला देकर बातचीत से पीछे नहीं हट सकते थे। इसलिए दोनों नेताओं ने ताइवान और उसे हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि इस पर वह जल्द ही कोई फैसला लेंगे, लेकिन अभी 9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत है।

क्यों बदले ट्रंप के सुर?

ट्रंप का यह बयान तब आया है, जब शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मीटिंग में ताइवान के मुद्दे पर चेतावनी दे दी थी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। शी ने ट्रंप से कहा, अगर ताइवान के मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों में टकराव या यहां तक कि झड़प भी हो सकती।

चीन और ताइवान में तनाव की वजह

चीन ताइवान पर अपना अधिकार जताता है और इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं करता है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का कहना है कि ताइवान को औपचारिक आजादी घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह खुद को पहले से ही एक संप्रभु राष्ट्र मानता है। ताइवान के राष्ट्रपति को लेकर बीजिंग अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुका है। चीन ने उन्हें समस्या पैदा करने वाला और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति भंग करने वाला बताया है। ताइवान में बहुत से लोग खुद को अलग देश का हिस्सा मानते हैं। हालांकि, उनमें से ज्यादातर मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के पक्ष में हैं, जिसमें ताइवान न तो चीन से आजादी घोषित करता है और न ही उसके साथ होता है।वहीं, अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता रहा है, जिसमें उसे आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराना भी शामिल है।

भारत और UAE के बीच रक्षा, ऊर्जा और गैस सप्लाई पर अहम समझौते, पीएम मोदी के अबूधाबी दौरे पर बड़ी डील

#pmmodiuae_visit

धानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अपने पांच देशों के विदेशी दौरे के पहले चरण में यूएई की राजधानी अबू धाबी पहुंचे। अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र समेत अहम समझौतों पर मुहर

पीएम मोदी के शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी पहुंचने पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसें रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र समेत अहम समझौतों पर मुहर लगी है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक फ्रेमवर्क पर समझौता हुआ है।

कौन-कौन से समझौते हुए?

भारत और यूएई के बीच स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप पर समझौता हुआ। इससे रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग और मजबूत होगा। इसके अलावा, पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर भी एमओयू साइन किया गया। दोनों देशों के बीच एलपीजी यानी रसोई गैस सप्लाई को लेकर भी समझौता हुआ है, जिससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा में फायदा मिलेगा। सबसे बड़ा एलान निवेश को लेकर हुआ। यूएई ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में कुल पांच अरब डॉलर निवेश की घोषणा की है।

पीएम मोदी बोले, मैं अपने दूसरे घर में आया हूं

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा, 'मैं आपसे फोन पर बात करता रहता था, लेकिन आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए मैं बहुत उत्सुक था।' उन्होंने राष्ट्रपति के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया और कहा, 'जैसा कि आपने कहा - मैं अपने दूसरे घर में आया हूं। यह भावना मेरे लिए बहुत मायने रखती है।' मोदी ने हाल ही में भारत में आई प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के प्रति यूएई की संवेदना के लिए भी राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया।

अगले साल से ऑनलाइन होगी नीट की परीक्षा, पेपर लीक के बीच केन्द्र सरकार का बड़ा ऐलान

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परीक्षा रद्द होने के बाद नई डेट घोषित की गई। नीट री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। नीट यूजी परीक्षा अगले साल से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस पर डिटेल में जानकारी दी है।

नीट पेपर कैंसिल करना कड़ा फैसला-प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीट परकीक्षा रद्द किए जानें को लेकर कहा कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीट पेपर कैंसिल करने का कड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने कहा, छात्रों के प्रति सरकार की पूरी संवेदनाएं हैं। नीट पेपर लीक और गड़बडी के माफिया के खिलाफ अभियान जारी है।

21 जून को दोबारा होगी परीक्षा

शिक्षा मंत्री ने कहा, तीन मई को परीक्षा हुई थी और सात मई को एनटीए के पास कहीं से आपत्ति आई कि गेस पेपर में ऐसे कुछ प्रश्न आए हैं, जो इस बार के पेपर में थे। एनटीए और सरकार ने तुरंत उसकी जांच की। राज्यों की एजेसियों से संपर्क किया गया। जब हम स्पष्ट हुए कि इस बार पेपर लीक हुआ है, हम नहीं चाहते थे कि शिक्षा माफियाओं के षड्यंत्र के कारण किसी भी सही छात्र के अधिकार वंचित हो जाएं। इसलिए हमने 12 मई को परीक्षा को रद्द कर दिया। हमने आज परीक्षा की नई तिथि की घोषणा की। नीट की फिर से परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।

परीक्षा शुल्क वापस करेगी एनटीए

धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ न पड़े। इसी के तहत एनटीए परीक्षा शुल्क भी वापस करेगी। साथ ही उम्मीदवारों का मानसिक तनाव कम करने के लिए एक बड़ा बदलाव नीट यूजी की टाइमिंग में किया गया है। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी। छात्रों को इस बार अपनी सुविधा अनुसार परीक्षा शहर और सेंटर चुनने की स्वतंत्रता दी जाएगी। वहीं एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी कर दिए जाएंगे।

पेपर लीक कके बाद कैंसिल हुई थी परीक्षा

नीट यूजी की परीक्षा 3 मई को देशभर में आयोजित की गई थी। इसके बाद पेपर लीक और परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने की जानकारी सामने आते ही इसकी जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया था। मामले की जांच चल रही है।

नीट एग्जाम की नई डेट घोषित, 21 जून को होगी परीक्षा, जानें जरूरी अपडेट्स

#reneet2026examdateannounced21_june

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट (यूजी) 2026 की परीक्षा के लिए नई तारीख की घोषणा कर दी है। भारत सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया है कि अब नीट (यूजी) 2026 का री-एग्जामिनेशन 21 जून 2026 को होगा। नीट यूजी पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोपों के बाद केंद्र सरकार और एनटीए ने 3 मई को हुई परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था। जिसके बाद अब नई तारीख घोषित की गई है।

एनटीए ने क्या कहा?

परीक्षा की तारीख की घोषणा करते हुए एनटीए ने कहा कि उसने केंद्र सरकार की अनुमति के बाद नीट-यूजी-2026 की पुन: परीक्षा रविवार 21 जून 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया है। परीक्षार्थियों व अभिभावकों से अनुरोध है कि वे केवल एनटीए के आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें। अगर नीट परीक्षा से जुड़ी अन्य कोई भी जानकार उन्हें लेनी है तो वो ईमेल आईडी या 011-40759000 / 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं। परीक्षा के आयोजन को लेकर केंद्र सरकार और एनटीए ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

हेल्पलाइन नंबर

नीट यूजी री- एग्जामिनेशन इसके लिए स्टूडेंट्स को फिर से रजिस्ट्रेशन करने की आवश्यक्ता नहीं है। पहले जिन छात्रों ने इस एग्जाम में अप्लाई किया था, वे सभी स्टूडेंट्स परीक्षा में बैठ सकेंगे। इसके लिए किसी तरह अलग से कोई फीस नहीं ली जाएगी। परीक्षा से पहले छात्रों के प्रवेश पत्र भी जारी किए जाएंगे। इसकी जानकारी एनटीए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर समय-समय पर उपलब्ध करवाएगा।

3 मई को हुई थी परीक्षा

इससे पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 3 मई को देशभर में नीट की यूजी की परीक्षा आयोजित की थी। जिसमें 22 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। इसके बाद पेपर लीक और गड़बड़ी के कारण 12 मई को एनटीए ने परीक्षा कैंसिल करने का निर्णय लिया। अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। विशेष टीमें इसकी अलग-अलग जगहों पर जांच कर रही हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) नीट यूजी परीक्षा लीक होने को 'सिस्टेमैटिक फेलियर' बताया है और एनटीए के खिलाफ याचिका भी दायर की गई है।

पांच देशों की यात्रा पर रवाना हुए पीएम मोदी, आज यूएई के राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात

#pmmodidepartsonafivenation_tour

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से पांच देशों के दौरे पर रहेंगे। मोदी 5 देशों की यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। पीएम मोदी अगले 6 दिनों में यूएई, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी कई विश्व नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे। इस दौरे का मकसद भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना है। उनका पहला पड़ाव यूएई होगा, जहां वे राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।

क्या होगा यूएई यात्रा का मुख्य फोकस?

पीएम मोदी सबसे पहले यूएई जाएंगे। पीएम मोदी के संयुक्त अरब अमीरात के आधिकारिक दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे सहयोग के खास क्षेत्र पर बातचीत करेंगे।

यूएई भारत के लिए एलपीजी का सबसे बड़ा स्रोत

बता दें कि यूएई भारत की ऊर्जा सुरक्षा में एक अहम साझीदार रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल यूएई कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत था, जिसने भारत की जरूरत का लगभग 11% हिस्सा पूरा किया। यूएई भारत के लिए एलपीजी का सबसे बड़ा स्रोत है, जो भारत की जरूरत का लगभग 40% हिस्सा पूरा करता है। लंबे समय के लिए सप्लाई के समझौते होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हुई है। ऊर्जा सहयोग को बढ़ाना इस दौरे का एक अहम एजेंडा होगा।

दो अहम समझौते की उम्मीद

विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा अहम व्यापार और निवेश जुड़ाव को बढ़ावा देगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी के दौरे के दौरान ऊर्जा सुरक्षा खास फोकस क्षेत्र में से एक होगा और एलपीजी और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व के क्षेत्र में दो अहम एमओयू होने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यूएई पिछले 25 सालों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और कुल मिलाकर निवेश का सातवां सबसे बड़ा सोर्स रहा है। यूएई में 4.5 मिलियन से ज्यादा भारतीय रहते हैं, इसलिए यह दौरा उनके कल्याण के बारे में बात करने का भी एक मौका होगा।

यूएई के बाद नीदरलैंड का दौरा

अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, प्रधानमंत्री नीदरलैंड का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान, वे नीदरलैंड के किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे, साथ ही प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ भी बातचीत करेंगे। वार्ता में सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, इनोवेशन, रक्षा और जल प्रबंधन जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।

स्वीडन के साथ व्यापार बढ़ाने पर फोकस

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन जाएंगे। वहां वे अपने स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देश व्यापार और सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री यूरोपीय उद्योग जगत के बड़े मंच 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को भी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहेंगी।

नॉर्वे और फिर इटली की यात्रा

स्वीडन के बाद पीएम मोदी नॉर्वे पहुंचेंगे। यहां, 19 मई को ओस्लो में आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता भी शामिल होंगे। दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19 से 20 मई तक इटली जाएंगे, जहां वह प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से मुलाकात करेंगे। भारत और इटली के बीच हाल के वर्षों में रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा है।

महंगाई का एक और झटका! पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल, सीएनजी भी हुआ महंगा

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देश के आम लोगों पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। महंगाई की मार से परेशान लोगों को लगातार झटके लग रहे हैं। पहले दूध महंगा हुआ फिर पेट्रोल-डीजल के रेट भी बढ़ गए। अब सीएनजी भी महंगा हो गया है।

पेट्रोल-डीजल के दामों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी

पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम तीन-तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। वैश्विक बाजार में ऊर्जा की जो कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं, उसका सीधा बोझ अब तेल कंपनियों ने ग्राहकों के कंधों पर डाल दिया है। इसी का नतीजा है कि अब आपको अपनी गाड़ी में तेल भरवाने के लिए पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। पेट्रोल-डीजल के दामों में आखिरी बार वृद्धि अप्रैल 2022 में हुई थी।

सरकार ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी क्यों की?

फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही थी क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में फिलहाल पर्याप्त ईंधन स्टॉक मौजूद है, लेकिन ग्लोबल ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण पेट्रोल-डीजल महंगा करना पड़ा।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा

पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि चुनाव खत्म होते ही जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा दिया गया है। पार्टी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल ₹3-₹3 प्रति लीटर और सीएनजी ₹2 महंगी कर दी गई है। कांग्रेस ने अपने पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा, “चुनाव खत्म, अब शुरू हुई मोदी सरकार की वसूलीय़’