स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार की जरूरत : राजेंद्र शुक्ल

भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में भर्ती प्रक्रिया एवं विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए समयबद्ध एवं समन्वित रूप से कार्य पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाये। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में सीटीवीएस एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की स्वीकृति संबंधी कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार की देरी न होने पर विशेष बल दिया।

  उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बुधनी, दमोह एवं छतरपुर मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा आवश्यक फर्नीचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से इन मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कार्य प्रारंभ हो सके, इसके लिए सभी आवश्यक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थाओं में लंबित आउटसोर्स पदों पर भर्ती हेतु सभी जिलों में त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही, नर्सिंग कॉलेजों में नर्सिंग शिक्षकों के 59 राजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए मांग पत्र लोक सेवा आयोग को शीघ्र प्रेषित करने के निर्देश भी दिए।

  उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सीसीएचबी में नवीन पद सृजन के लिए प्रस्ताव तैयार करने तथा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कैंसर सर्जरी ब्लॉक से सेवाएं प्रारंभ करने हेतु विशेषज्ञों की नियुक्ति की कार्यवाही प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस उपस्थित रहे।

महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के नवनियुक्त अध्यक्ष कौशल शर्मा ने किया पदभार ग्रहण

- भाजपा प्रदेश कार्यालय में महापुरुषों को पुष्प अर्पित करने के पश्चात किया पदभार ग्रहण

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल की उपस्थिति में सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के नवनियुक्त अध्यक्ष कौशल शर्मा ने पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ताओं के साथ महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। तत्पश्चात उन्होंने संस्थान पहुंचकर विधि विधान से पूजन-अर्चन कर पदभार ग्रहण किया। 

महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि मैंने पं. दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर सेवा करने का संकल्प लिया है। मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल का आभार व्यक्त करता हूं कि मुझे कार्य करने का अवसर प्रदान किया। मैं महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान की कार्यप्रणाली को समझकर मध्यप्रदेश के उन्नति के लिए कार्य करूंगा। उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण केंद्र है। संस्था के माध्यम से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, शोध, अध्ययन एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके। 

इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के मंत्री श्री राव उदय प्रताप सिंह, विश्वास सारंग, प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन, प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल, मध्यप्रदेश योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र शर्मा, मध्यप्रदेश महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केशव सिंह भदौरिया, सांसद श्रीमती माया नारालिया सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस का महिला आरक्षण कानून के तत्काल क्रियान्वयन के लिए पोस्टकार्ड अभियान

भोपाल। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस द्वारा महिला आरक्षण कानून को तत्काल प्रभाव से लागू करने तथा इसमें ओबीसी, एससी एवं एसटी वर्ग की महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने की मांग को लेकर देशव्यापी पोस्टकार्ड अभियान प्रारंभ किया गया है। इसी क्रम में आज टी.टी. नगर पोस्ट ऑफिस, भोपाल से माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम पोस्टकार्ड प्रेषित किए गए।

महिला कांग्रेस की पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि महिला आरक्षण कानून का शीघ्र क्रियान्वयन देश की महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि आरक्षण के दायरे में समाज के सभी वर्गों—विशेषकर ओबीसी, एससी एवं एसटी महिलाओं—को उनका न्यायोचित प्रतिनिधित्व मिले।

कार्यक्रम के दौरान संतोष कंसाना (पूर्व पार्षद), रूपाली शर्मा (महासचिव), महक राणा (महासचिव), रतन पांडे (ब्लॉक अध्यक्ष), माया विश्वकर्मा, रेखा मोड सहित महिला कांग्रेस की अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।

मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि महिला आरक्षण कानून को बिना किसी विलंब के लागू किया जाए एवं सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप सभी वर्गों की महिलाओं को इसमें समान अवसर प्रदान किया जाए।

रुबात विवाद: 3 दिन बीते, 3 और बाकी... विवाद गहराएगा या उलेमा आगे आएंगे...?

सामने आया नया एंगल, नवाब परिवार सिर्फ निगराह, रुबात की जगह सऊदी सरकार की

• मर्जर एग्रीमेंट भी चर्चाओं में 

भोपाल। सऊदी अरब सरकार... भारत सरकार... नवाब परिवार... केयर टेकर... विधायक... रुबात के चाहतमंद... समाज के लोग....! सऊदी अरब में मौजूद मक्का और मदीना रुबात को लेकर जितना बात की जाए, उतने एंगल सामने आते जा रहे हैं। इस मामले में जहां विधायक और कारोबारी आमने सामने की लड़ाई में मशगूल हैं, वहीं तस्वीर का एक तीसरा एंगल बताया जा रहा है। इस बिंदु पर रुबात का असल मालिक न नवाब या उनके परिवार को माना जा रहा है, न ही अवाम का सीधा अधिकार इस पर बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इन रुबात का निर्माण सऊदी सरकार ने ही जमीन मुहैया करवा कर नवाबों को दी थी, ताकि उनकी रियासत के लोग इसमें आसान और मुफ्त ठहराव कर सकें।

   स्वयंसेवी संस्था नया कारवां के फाउंडर मो. तारिक का कहना है कि इस मामले में मर्जर एग्रीमेंट में उल्लेख मौजूद है। जिसमें कहा गया है कि रियासत भोपाल के जो अधिकार थे वही कायम रहेंगे उस अधिकार में मक्का मदीना रुबात का जो पूर्व निर्माण तत्कालीन सऊदी अरब सरकार द्वारा ही जमीन मुहैया कराई गई थी। बरसों पहले हुए इस निर्माण के लिए भारत सहित कई देशों व उनकी रियासतों के नवाबों को जिम्मेदारी दी गई थी। जिसमें यह शामिल था कि इन मुस्लिम रियासत के नवाब रुबात का निर्माण कराएंगे, जिनका फायदा रियासत की अवाम को हज के दौरान मिलता रहेगा। तय यह भी किया गया था कि रियासती महकमा शाही ओकाफ के अधीन जो भी संपत्तियां होंगी, उनका रखरखाव और देखरेख का जिम्मा हमेशा नवाब या उनके परिवार को रहेगा। इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। मो. तारिक का कहना है कि अन्य रियासतों की तरह भोपाल रियासत को भी यह लाभ मिलता रहा। शाही ओकाफ के गठन से पहले तक इसकी जिम्मेदारी दारुल कजा और इफ्ता के पास रही है। इस ओकाफ के गठन के बाद ही जिम्मेदारी बदलकर शाही परिवार के पास पहुंची है। वे यह भी कहते हैं कि मक्का और मदीना में निर्माण और विस्तार कार्यों के समय कई बार रुबात की जगह बदली गई है और इसके लिए सऊदी सरकार ने नई जगह का आवंटन किया है। ताजा हालात को देखते हुए मो. तारिक कहते हैं कि इस मामले में सियासत और जोरआजमाइश करने की बजाए फैसला उलेमाओं पर छोड़ देना चाहिए, ताकि इसका बेहतर हल निकले और भोपाल रियासत के हाजियों को रुबात का फायदा मिलता रहे।

नजर यहां भी लगी

रुबात से पिछले कई सालों से फायदा न मिल पाने को लेकर विवाद फैला हुआ है। विधायक आरिफ मसूद द्वारा जनता की इस आवाज को बुलंद करने और इस दौरान कुछ इल्जाम लगाए गए। जिस पर शाही ओकाफ के जिम्मेदार सिकंदर हफीज ने उनसे 7 दिन में माफी मांगने के लिए कहा है। इसके बाद वे विधायक मसूद के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई कर सकते हैं। गुरुवार को जारी किए गए इस बयान को अब तक 3 दिन गुजर चुके हैं, जबकि अगले 3 दिन में मामला अलग रूप ले सकता है।

* उलेमाओं और शहर के जिम्मेदारों की बारी

कहा जा रहा है कि इस मामले में अब शहर के उलेमाओं और बात का वजन रखने वाले जिम्मेदार शहरियों की भूमिका बढ़ गई है। यह लोग आपसी समझाइश से इस मामले का पटाक्षेप कर सकते हैं। जिससे इस हज तो हाजियों के मजा मक्का मदीना जाने का समय गुजर गया, लेकिन अगले साल से उन्हें इसका फायदा मिल सकता है।

एमपी स्टेट कराटे चैंपियनशिप 2026 में वॉरियर्स जर्नी का शानदार प्रदर्शन, दो रजत पदक जीते

इंदौर। कराटे इंडिया ऑर्गनाइजेशन के सानिध्य में मध्यप्रदेश खेल कराटे संघ द्वारा आयोजित “एमपी स्टेट सब जूनियर, कैडेट एवं जूनियर कराटे चैंपियनशिप 2026” का आयोजन 1 से 3 मई 2026 तक आईपीएस स्कूल, राजेंद्र नगर, इंदौर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

प्रतियोगिता में वॉरियर्स जर्नी कराटे फेडरेशन ऑफ इंडिया (इंदौर एवं महू शाखा) के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। सब जूनियर गर्ल्स कैटेगरी में भाग लेने वाली टीम की 5 खिलाड़ियों में से 2 ने रजत पदक हासिल कर संस्था का नाम रोशन किया।

पदक विजेता खिलाड़ी:

  • आर्या सोनी (8 वर्ष, अंडर 20 किग्रा) – रजत पदक
  • धानी सिंह (7 वर्ष, अंडर 25 किग्रा) – रजत पदक

इसके अलावा आध्या चांडक (9 वर्ष, अंडर 35 किग्रा), अद्विका महेश्वरी (8 वर्ष, अंडर 30 किग्रा) और अज़्रिएल अनाइशा भान (8 वर्ष, अंडर 25 किग्रा) ने भी कड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि वे पदक से चूक गईं।

सभी खिलाड़ियों के जज्बे और मेहनत की सराहना की जा रही है। इस उपलब्धि का श्रेय हेड कोच जसप्रीत सिंह एवं ट्रेनर करण साहू के मार्गदर्शन को जाता है। कोचिंग टीम ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

वल्लभ भवन में ‘अल्पविराम’ कार्यक्रम, पुलिस कर्मियों को आंतरिक आनंद का दिया गया प्रशिक्षण

भोपाल। भोपाल स्थित मंत्रालय वल्लभ भवन में आनंद विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा ‘अल्पविराम’ (स्वयं की स्वयं से बात) विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वल्लभ भवन, सतपुड़ा एवं विंध्याचल भवन में कार्यरत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निजी जीवन और कार्यस्थल पर आनंद के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, जीवन में आंतरिक आनंद की भूमिका और मानसिक संतुलन बनाए रखने के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर मंत्रालय के रजिस्ट्रार मनोज श्रीवास्तव, सहायक पुलिस आयुक्त (सुरक्षा) अविनाश शर्मा, आनंद विभाग की मास्टर ट्रेनर श्रीमती अंजना श्रीवास्तव सहित मुकेश, अजीत और समन्वयक के रूप में आनंद विभाग के मनु दीक्षित उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए इसे उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।

बागरोदा में शंकर पट बैलगाड़ी प्रतियोगिता: परंपरा और संरक्षण का अनोखा संगम

60 किमी रफ्तार से दौड़े बैल, दर्शकों को किया रोमांचित

भोपाल (हुजूर विधानसभा)। ग्राम बागरोदा में आयोजित शंकर पट बैलगाड़ी प्रतियोगिता ने ग्रामीण संस्कृति और परंपरा की जीवंत झलक पेश की। प्रतियोगिता में क्षेत्रभर से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहां फाइनल राउंड में बैलों ने लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ लगाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

प्रतियोगिता में ‘आमखो’ ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व जिला पंचायत सदस्य विष्णु विश्वकर्मा ने विजेताओं को पुरस्कार वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस आयोजन ने न केवल ग्रामीण खेल परंपराओं को जीवित रखने का संदेश दिया, बल्कि गौवंश संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई। बैल प्रेमियों ने बताया कि ऐसे आयोजनों से पूर्वजों के संस्कार आज भी सजीव बने हुए हैं और पशुधन के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होती है।

कार्यक्रम के दौरान इब्राहिम भाई, आशिक भाई, कमलेश विश्वकर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने बारिश के बाद भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने प्रतियोगिता का आनंद लिया और आयोजन को सफल बनाया।

मार्केट बंद होने में दो कानून नहीं चलेगा, पुलिस को सख्‍ती से अंकुश लगाना आवश्‍यक : आलोक शर्मा


सांसद ने कहा - भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

सांसद आलोक शर्मा ने पुलिस आयुक्त से की मुलाकात

भोपाल। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल में मार्केट बंद होने के दो कानून प्रचलित है, जिस पर पुलिस को सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए। उन्होंने कहा पुराने भोपाल शहर में रातभर दुकानें खुली रहती है, जहां पर आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने रात सोने के लिए बनाई है। घर पर अब्बू, अम्मी इंतजार करते हैं कि बेटा आएगा और हमें दवाई देगा लेकिन बेटा तो रातभर बिरयानी की दुकान और मार्केट में ही बिताता है। ये चिंता आज कई परिवारों की है। युवा गलत रास्ता अपना लेते हैं। शनिवार को सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात कर उन्हें इस आशय का एक पत्र सौंपा है जिसमें भोपाल के सभी मार्केट एक समय पर बंद करने का आग्रह किया है। ज्ञात रहे सांसद शर्मा पूर्व में भी कई बार ये मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन पुलिस की सख्ती न होने के कारण आज भी व्यवस्था वैसी ही है। सांसद शर्मा ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात के दौरान बताया कि अभी भोपाल शहर में दो कानून प्रचलित हैं, न्यू मार्केट, एमपी नगर, संत हिरदाराम नगर, बीएचईएल बरखेड़ा, इंद्रपुरी सोनागिरि, 6 नंबर मार्केट, 10 नंबर मार्केट, लखेरापुरा, सराफा चौक आदि रात में 10 बजे तक बंद हो जाते हैं। जबकि पुराने भोपाल शहर के मार्केट्स काजीकैंप, लक्ष्मी टॉकीज, बसस्टैंड, रेलवे स्टेशन, रॉयल मार्केट जीपीओ, इमामी गेट, राजू टी-स्टाल, जिंसी-जहांगीराबाद, सब्बन चौराहा, इतवारा, बुधवारा में दुकानें रातभर खुली रहती हैं जिससे आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है और शहर की कानून व्यवस्था बिगड़ती है। सांसद शर्मा को पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने शहर के सभी मार्केट्स एक समय पर बंद कराने की कार्यवाही सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया है।

* भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल वक्फ की जागीर नहीं है। शहर में कहीं भी डेवलपमेंट के काम करने जाएं तो खड़े हो जाते हैं कि यह वक्फ की जमीन है। महापौर रहते जब हम पॉलिटेक्निक से भारत माता चौराहे तक स्मार्ट रोड बनाने गए तो रोड़ा अटकाया। बोले कि यह वक्फ की जमीन है जबकि आज वहां स्मार्ट रोड बन जाने के बाद मुसलमान भी उस रोड पर निकलता है, हिंदू भी उस पर रोड पर निकलता है, सभी वर्ग के लोग उस स्मार्ट रोड का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार श्यामला हिल्स पर मानस भवन के पीछे की झुग्गियां का हटाने का मामला भी है। वहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी को आवास का पैसा जमा किया गया है। किसी को बेघर नहीं किया जाएगा लेकिन शहर के अंदर सरकारी जमीन पर किसी को भी अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वक्फ के नाम पर किसी को भी अवैध कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।

6 मई को भव्य होगा रामनिवास रावत का कार्यभार ग्रहण समारोह

- वन विकास निगम के अध्यक्ष पद की संभालेंगे जिम्मेदारी, समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी तेज

भोपाल। आगामी 6 मई 2026 को प्रातः 10 बजे पूर्व मंत्री रामनिवास रावत मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर वन भवन में आयोजित होने वाले समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

समारोह की रूपरेखा तय करने के लिए मप्र मीना समाज सेवा संगठन की बैठक प्रदेश संगठन महामंत्री एड. संतोष मीना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ जनों ने व्यापक चर्चा करते हुए कार्यक्रम को यादगार बनाने का संकल्प लिया।

बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष लीलेन्द्र सिंह मारण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लखन सिंह मीना सहित समाजसेवी विमल सिंह मारण, ब्रजेश मीणा, हरभजन मीना, रामसेवक मीना, रामजीवन मीना, सुदेश मारण, जीवन मारण, जगदीश मारण, पर्वत सिंह मारण, सत्यम मीना और भैयालाल मारण सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रामनिवास रावत के कार्यभार ग्रहण समारोह को भव्य स्वरूप दिया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।

RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)