बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है : राजेन्द्र शुक्ल

* नारी शक्ति वंदन के संभाग स्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, पथ संचलन को दिखाई हरी झण्डी 

भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि बेटियों की पूजा व नारियों के सम्मान से ही देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के संबंध में जो विधेयक प्रस्तुत किया गया है। उससे भारत की आधी आबादी को देश हित के निर्णय में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। श्री शुक्ल ने नारी शक्ति पथ संचलन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना भी किया। 

कृष्णा राजकपूर आडिटोरियम रीवा में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जी ने स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने के उपरांत अब संसद में भी प्रतिनिधित्व देने का जो संकल्प लिया है वह अभिनंदनीय है जिसके माध्यम से नारी शक्ति को समुचित सम्मान मिलेगा। श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हित में अनेक योजनाएँ व कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं जिसके माध्यम से महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ नारी की पूजा व सम्मान होता हैे वहां देवता भी वास करते हैं। अत: नारी शक्ति का सम्मान करते हुए मजबूत इच्छा शक्ति के साथ उनके हक के लिये कार्य किये जा रहे हैं। श्री शुक्ल ने कहा कि विन्ध्य की महिलाएँ किसी से पीछे नहीं हैं देश की पहली महिला फाइटर पायलट हमारे यहाँ की है। 

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने हम महिलाओं के हित में हमेशा ही कार्य किया है। उनका संकल्प है कि हर घर की महिला जागरूक हो, आगे आये और बराबरी के साथ चले। लखपती दीदी, स्वसहायता समूहों में महिलाओं की भागीदारी के साथ ही स्थानीय निकायों में हमें प्रतिनिधित्व मिला और अब नई राह खुल रही है। कार्यक्रम में महिला विदुषी श्रीमती ज्ञानवती अवस्थी ने कहा कि हमारी संस्कृति में मातृ वंदना होती है। मातृ शक्ति को ही सृष्टि की रचना का श्रेय दिया गया है इसलिए वह वंदनीय है। नारी अपने चरित्र से पुरूषों को प्रेरणा देती है इस लिए उसका स्थान सर्वोपरी हैं। 

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह ने बताया कि नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा में 10 से 25 अप्रैल तक महिलाओं के सम्मान में अनेक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इसी कड़ी में संभाग स्तर का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने मोबाइल फोन से मिस्डकाल कर महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया। अवसर पर मातृ शक्तियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्रीमती पन्नाबाई प्रजापति, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती पूर्णिमा तिवारी, श्रीमती गीता माझी, जिला भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता, विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र कुमार प्रजापति, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, सीईओ जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास शशिश्याम उइके, श्रीमती दर्शना वाकड़े, आशीष द्विवेदी, जीवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी व मातृ शक्तियाँ उपस्थित रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती तिवारी ने किया।

निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से आगे बढ़ें छात्र: हेमंत खण्डेलवाल

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल तथा Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) के कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम में सफल हुए छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और अनुशासन का परिणाम है, और उन्हें निरंतर परिश्रम व सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए।

श्री खण्डेलवाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी ही आने वाले समय में देश का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने इस उपलब्धि में योगदान देने वाले अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी। साथ ही जिन छात्रों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है, उन्हें निराश न होने की सलाह देते हुए कहा कि असफलता केवल एक पड़ाव है, अंतिम मंजिल नहीं।

उन्होंने बताया कि कक्षा 10वीं और 12वीं के ऐसे छात्र जो मुख्य परीक्षा में असफल, अनुपस्थित रहे या अंक सुधारना चाहते हैं, वे 7 मई 2026 से आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। यह निर्णय मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में लिया गया है।

* शिक्षा की गुणवत्ता में हो रहा निरंतर सुधार

श्री खण्डेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया है। साथ ही मध्यप्रदेश सरकार शासकीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को लगातार सुदृढ़ कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ उन्होंने बताया कि कक्षा 10वीं और 12वीं के ऐसे छात्र जो मुख्य परीक्षा में असफल, अनुपस्थित रहे या अंक सुधारना चाहते हैं, वे 7 मई 2026 से आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। यह निर्णय मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में लिया गया है। रहे हैं और सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों से बेहतर हो रहा है।

* असफलता से सीखकर आगे बढ़ें छात्र

उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के अनेक अवसर मिलते हैं। जो विद्यार्थी इस बार सफल नहीं हो पाए हैं, उन्हें हताश होने की आवश्यकता नहीं है। पुनः संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रयास करने पर सफलता अवश्य मिलेगी।

अंत में श्री खण्डेलवाल ने सभी छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहें और प्रदेश व देश का नाम रोशन करें।

भोपाल में IIMC कनेक्शन्स 2026 का आयोजन, अभिनेता चंदन रॉय बने ‘एलुमनी ऑफ द ईयर’

भोपाल। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) एलुमनी एसोसिएशन के मध्य प्रदेश चैप्टर का वार्षिक मिलन समारोह “कनेक्शन्स 2026” भोपाल में उत्साह और गरिमा के साथ आयोजित किया गया। इस खास मौके पर लोकप्रिय ओटीटी सीरीज ‘पंचायत’ से चर्चित अभिनेता चंदन रॉय को ‘एलुमनी ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

- पत्रकारिता से अभिनय तक का सफर

आईआईएमसी के पूर्व छात्र चंदन रॉय ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी और आज वे अभिनय की दुनिया में एक मजबूत पहचान बना चुके हैं। इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में संस्थान के पूर्व विद्यार्थी भोपाल पहुंचे और समारोह में हिस्सा लिया। समारोह की अध्यक्षता मध्य प्रदेश चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. आशीष जोशी ने की।

कार्यक्रम में संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी, उपाध्यक्ष दीप्ति चौरसिया, पूर्व अध्यक्ष अनिल सौमित्र, महासचिव मानसी समाधिया, वरिष्ठ एलुमनी दिनेश कुमार, पी.के. मोहंती तथा सिद्धार्थ सामल सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने अपने-अपने पेशेवर अनुभव साझा किए और संवाद, सहयोग व नेटवर्किंग की इस परंपरा को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। वक्ताओं ने आईआईएमसीएए को एक सशक्त संगठन बनाने का श्रेय इसके सह-संस्थापक रितेश वर्मा को दिया।

- चंदन रॉय ने साझा किया संघर्ष

अपने संबोधन में चंदन रॉय ने अपने संघर्षपूर्ण सफर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आईआईएमसी उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, जिसने उनके अभिनय के सपने को साकार करने में बड़ी भूमिका निभाई। वहीं, प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने कहा कि आईआईएमसी के योगदान के बिना भारतीय पत्रकारिता का इतिहास अधूरा रहेगा। पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल सौमित्र ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए सभी को प्रेरित किया और संगठन की ऊर्जा को नई दिशा देने की बात कही। 

कार्यक्रम के सफल आयोजन में अंकित फ्रांसिस, कोमल बडोडेकर और अनंत सिंह सहित कई सक्रिय सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समारोह का समापन आत्मीय बातचीत, रोचक किस्सों और पुरानी यादों के आदान-प्रदान के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी सदस्यों ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लगातार निभाने का संकल्प भी लिया।

पुरातत्व के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को इंक्यूबेशन सेंटर्स स्थापित कर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए: मदन कुमार

भोपाल। प्रदेश की हजारों–लाखों वर्ष पुरानी स्मृतियों को यदि भौतिक रूप में सुरक्षित रखना है और अब तक हुई क्षति को न्यूनतम संभव स्तर तक लाना है, तो इस क्षेत्र में स्टार्टअप्स को इंक्यूबेशन सेंटर्स स्थापित कर प्रोत्साहित करना समय की माँग है।

यह बात आयुक्त, पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मदन कुमार ने डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान द्वारा आयोजित पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में व्याख्यानमाला में कही। मदन कुमार ने संस्थान में इंक्युवेशन सेंटर की स्थापना में उपस्थित लोगों से नवोन्मेषी विचारों को प्रेषित कर भागीदारी करने का आह्वान किया। 

कार्यक्रम में नारायण व्यास, कैलाश चंद्र पाण्डे (मंदसौर), डॉ. मनोज कुमार कुर्मी (अधीक्षण पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण), डॉ. सुरेश कुमार दुबे (झांसी) आदि अतिथि के रूप में मौजूद थे। वक्ताओं ने पुरातत्व के क्षेत्र में डॉ. वाकणकर जी के योगदान को रेखांकित किया।

उन्होंने बताया कि मंदसौर जिले में स्थित छिब्बर नाला, दरकी चट्टान, चतुर्भज नाला के शैलचित्रों को प्रकाश में लाने का श्रेय वाकणकर जी को है। इस दौरान वाकणकर जी के समक्ष आई चुनौतियों एवं समाधान प्रयासों का उल्लेख भी किया गया। इस दौरान बताया गया कि वाकणकर जी द्वारा अपनी नागपुर यात्रा के दौरान 23 मार्च 1957 को अपनी यात्रा स्थगित कर भीमबैटका के शैलचित्रों की खोज की गई, जिसे कालंतर में विश्वधरोहर घोषित किया गया। इसी खोज के आधार पर उन्हें भारत सरकार से 1975 में पद्मश्री सम्मान मिला।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में आयुक्त पुरातत्व द्वारा प्रदेश की पुरासंपदा को रेखांकित करते हुए डिंडौरी एवं उमरिया जिलों की शैलगुहओं मटकें वाला पत्थर, डाईनासौर के जीवाष्म एवं घुघुआ फॉसिल पार्क का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि द मोनूमेंट मन फिल्म के ट्रैलर के माध्यम से फिल्म के नायकों जैसे पुरातत्व के प्रति जागरुकता लाने पर जोर दिया। यह भी अवगत कराया गया कि यूनेस्को द्वारा एआरवीआर प्रोजेक्ट चालू किया गया। आधुनिक परिवेश में प्रदेश की पुरावशेषों एवं संस्कृतिक धरोहरों को प्रकाश में लाने एवं उनके प्रति जनजागृति लाने तथा अध्ययन के लिये विभिन्न योजना तैयार कर डॉ. वाकणकर शोध संस्थान को नोडल संस्थान के रुप में विकसित करने एवं शोध कार्यों को बढ़ावा देने के मंतव्य से अवगत कराया। 

सम्मान सत्र भी हुआ

इस अवसर पर आयुक्त पुरातत्व द्वारा डॉ. नारायण व्यास को पद्मश्री प्राप्त होने पर एवं कैलाशचंद्र पाण्डे को पुरातत्व के क्षेत्र में दिए गए योगदान हेतु सम्मानित किया गया। साथ ही वाकणकर जी की शिष्य परम्परा में राजेन्द्र नागदेव, डॉ. रेखा भटनागर व अन्य विद्वानो का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कला समय पत्रिका विशेषांक का विमोचन भी किया गया।

दुर्लभ पांडुलिपियों को खोजने चला एक अभियान, तीन माह की मशक्कत, सामने आ सकती हैं कई अद्भुत बातें

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मंशा जाहिर की, और मप्र पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग इसको अमलीजामा पहनाने पर जुट गया। मार्च से मई तक चलने वाली इस मशक्कत के दौरान कई दुर्लभ पांडुलिपियों के सामने आने की संभावना है। इसके लिए विधिवत एक ऐप भी विकसित किया है, जिसपर इन पांडुलिपियों को अपलोड किया जा रहा है, यह काम अनवरत जारी है। 

मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के माध्यम से राज्य में 'ज्ञान भारतम् मिशन' का सक्रिय रूप से क्रियान्वयन कर रहा है, जो भारत की अमूल्य पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, प्रलेखन एवं डिजिटलीकरण के लिए समर्पित एक राष्ट्रीय पहल है। इस मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण मार्च से मई 2026 की अवधि में राज्य के सभी जिलों में संचालित किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य संस्थानों, मंदिरों, निजी संग्रहों तथा पारंपरिक संरक्षकों के पास सुरक्षित पांडुलिपियों की व्यवस्थित पहचान कर उनका डिजिटल प्रलेखन करना है, ताकि उनका दीर्घकालिक संरक्षण एवं सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

मध्य प्रदेश के लिए नियुक्त नोडल प्रमुख निलेश लोखंडे के नेतृत्व में यह पहल जन-सहभागिता एवं प्रौ‌द्योगिकी के समन्वय पर विशेष बल देती है। इस हेतु एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने पास उपलब्ध अथवा जात पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर सकते हैं। शासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व संरक्षकों के पास ही सुरक्षित रहेगा तथा संरक्षण हेतु केवल उनकी डिजिटल प्रतियाँ तैयार की जाएंगी। यह मिशन मध्य प्रदेश की समृद्ध बौ‌द्धिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का एक सामूहिक प्रयास है।

किसको किया शामिल

लोखंडे ने बताया कि कागजी पांडुलिपियों का इतिहास करीब 75 साल पहले के दस्तावेज को माना गया है। इससे पहले पेड़ के पत्तों, लकड़ी, चमड़ा, ताम्र पत्र आदि पर दस्तावेज अंकित होते थे।

मई तक चलेगा सर्वे

तीन माह चलने वाले इस अभियान की शुरुआत में अब तक करीब 76000 दस्तावेज संग्रहित कर लिए गए हैं। प्रधानमंत्री की मंशा के अनुसार इसमें करीब एक करोड़ दस्तावेज संग्रहित किए जाएंगे। मप्र से बड़ी संख्या में दस्तावेज मिलने की उम्मीद की जा रही है।

* क्या होगा जन का फायदा

लोखंडे ने बताया कि ज्ञान भारतम अभियान के तहत करीब 24 भाषा की पांडुलिपि शामिल की जा रही हैं। आध्यात्मिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की पांडुलिपियों को अपलोड करने में मदद करने वाले और इसके बारे में जानकारी मुहैया कराने वाले लोगों को प्रशस्ति पत्र देने और सम्मानित करने की योजना बनाई जा रही है।

111 कन्याओं की पूजन से शुरू होगी खेड़ापति हनुमान की भव्य शोभायात्रा

धूमधाम से मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव का दसवां वर्ष

भोपाल। श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ द्वारा आगामी हनुमान जन्मोत्सव को प्रति वर्ष के अनुसार भव्य आयोजन के रूप में मनाया जाएगा। हनुमान जन्मोत्सव कार्यक्रम के संयोजक महेन्द्र यादव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयोजन की शुरुआत में प्रेमनगर स्थित दुर्गा मंदिर में खेड़ापति हनुमान का दिव्य अभिषेक किया जाएगा। दिन के पूजन अनुष्ठान के बाद शाम को कन्या पूजन के साथ शोभायात्रा प्रारंभ होगी। संयोजक महेन्द्र यादव ने कहा कि शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु सम्मिलित होंगे, शोभायात्रा का समापन खेड़ापति हनुमान मंदिर छोला पर होगा। 

श्रद्धा आस्था और भक्ति के महोत्सव का दसवां वर्ष

श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि श्री हनुमान जन्मोत्सव संघ का वार्षिक आयोजन है। संस्था द्वारा विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि आयोजन में कन्या पूजन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और भेदभाव रहित समाज बनाने का संदेश दिया जाता रहा है। वहीं संस्था के उपाध्यक्ष अमन चौरसिया और महासचिव दीपक नामदेव ने बताया कि आयोजन की तैयारी पूर्ण हो चुकी है, तथा आयोजन को और अधिक व्यापक बनाने को लेकर संस्था के सामूहिक प्रयास निरंतर जारी हैं।

खेड़ापति हनुमान मंदिर पर लगेंगे 21 धर्म ध्वज, दक्षिण भारतीय वेश में होंगे श्रद्धालु

श्री बाबा महाँकाल सेवा संघ द्वारा हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर हनुमान जी महाराज को 21 धर्म ध्वज अर्पित किए जाएंगे। बता दें कि संस्था द्वारा विगत आयोजनों में भी धर्म ध्वज अर्पित किए जाते रहे हैं इसके साथ ही इस वर्ष संस्था के सभी सदस्य दक्षिण भारतीय वेश में शोभायात्रा में सम्मिलित होंगे, वहीं संगठन से जुड़ी मातृशक्ति लाल साड़ी और पगड़ी धारण करेंगी।

भारतीय आभूषणों की विरासतः अतीत से वर्तमान तक एक निरंतर यात्रा

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ उजागर करती हैं भारतीय शिल्प, सौंदर्य और सांस्कृतिक निरंतरता का अद्भुत संगम भारत में आभूषण केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान, आस्था और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के सशक्त प्रतीक रहे हैं। बदलते समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन अवश्य हुआ है, किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि प्राचीन आभूषण शैलियाँ समय-समय पर आधुनिक फैशन में पुनः उभरती रहती हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय परंपरा की गहरी जड़ों और उसकी निरंतरता को दर्शाती है।

संचालनालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ इस सांस्कृतिक यात्रा का सजीव प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। इन मूर्तियों में अंकित आभूषण न केवल उस समय की शिल्पकला और तकनीकी दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि समाज की सौंदर्य दृष्टि और जीवन शैली को भी जीवंत रूप में सामने लाते हैं।

द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व की शुंगकालीन यक्षी प्रतिमा, भरहुत से प्राप्त, भारतीय आभूषणों के प्रारंभिक विकसित स्वरूप को दर्शाती है। विकसित कमल के मध्य अंकित इस प्रतिमा में मोतियों के पंचवली हार, कर्ण-कुंडल और बहु-लड़ी हारावली का सुंदर अंकन है। यक्षी अपने हाथों में सनाल पद्म धारण किए हुए हैं। यक्षी के चेहरे पर हल्की मुस्कान और शिरो-सज्जा में बालों का व्यवस्थित विन्यास उस समय की सौंदर्य दृष्टि को दर्शाता है।

9वीं-10वीं शताब्दी की हरिहर प्रतिमा में शिव और विष्णु का संयुक्त स्वरूप अंकित है। आधे भाग में जटामुकुट और दूसरे भाग में किरीट मुकुट, दोनों देवताओं की पहचान को स्पष्ट करते हैं। अन्य आभूषणों में केयूर, शिव सर्पकुंडल तथा विष्णु सूर्यवृत कुंडल, एकावलीहार, यज्ञोपवीत, उरूदाम धारण किए हुए हैं। हरि का वाहन गरुड मानव रूप में आलेखित हैं, तथा हर का वाहन नंदी भी प्रदर्शित हैं।

11वीं शताब्दी की परमारकालीन शिव-पार्वती प्रतिमा में 'रावणानुग्रह' का दृश्य अंकित है। शिव-पार्वती को कैलाश पर्वत पर अपने अपने वाहन नंदी एवं सिंह पर बैठा दिखाया गया हैं। पार्वती जटामुकुट धारण किए हुए हैं। पादपीठ पर रावण को कैलाश पर्वत उठाने के लिए घुटने के बल मुड़े हुए दिखाया गया हैं। गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा-विष्णु के साथ विद्याधर एवं गन्धों का आलेखन हैं। शिव के कानों में चक्राकार कर्णकुंडल, गले में एकावली (मुक्तामाला) तथा उसके ऊपर तीन लड़ी वाला हार दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त भुजाओं में केयूर (भुजबंध) अलंकरण को और समृद्ध बनाते हैं। एक बनमाला भी नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई गई है, जिसे पुष्पमाला के रूप में सजाया गया है।

पार्वती के कानों में भिन्न प्रकार के कुंडल; एक ओर चक्रकुंडल और दूसरी ओर ताटंक दर्शाए गए हैं। गले के आभूषण में हारावली मध्य भाग से नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई देती है, और भीतर की ओर स्तनसूत्र का भी अंकन है।

11वीं शताब्दी की कलचुरी कला में आभूषणों की सूक्ष्मता और जटिलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सुर सुंदरी स्खलित वसना प्रतिमा की भावांकन में सरलता, चक्र-कुंडल, एकावली, चंद्रहार, स्तनसूत्र, कुचबंध, केयूर, कंकण धारण किए हुए हैं। इस प्रतिमा में नायिका के स्नानोपरांत वस्त्र धारण करने का आलेखन है।

11-12वीं शताब्दी की कच्छपघात शैली की वैष्णवी प्रतिमा में क्षेत्रीय कला का प्रभाव स्पष्ट है। भुजाओं में शंख, चक्र, गदा एवं पद्म धारण किए हुए हैं। देवी किरीट मुकुट कुंडल, हार, स्तनहार, कटीमेखला, वैजयंती माला, नूपुर, कंगन, बाजूबंध आदी आभूषणों से अलंकृत हैं। पादपीठ पर परिचारक देवी से आशीर्वाद ले रहा हैं।

उमा-महेश्वर अपने अपने वाहन सिंह एवं नंदी पर बैठे हुए जटा मुकुट, हार, बाजूबंद, कटीमेखला, नूपुर धारण किए हैं। प्रतिमा में उमा-महेश्वर को एक दूसरे की ओर निहारते हुए दिखाया गया हैं। चतुर्भुजी शिव की भुजाओं में त्रिशूल, सर्प, कमलपुष्प अंकित हैं। पार्वती की दाहिनी भुजा शिव के स्कन्ध एवं बांयी भुजा में दर्पण लिए हैं।

समभंग में स्थानक देवी के घुटने के नीचे का भाग खंडित हैं। द्विभुजी देवी की दायीं भुजा में अक्षमाला, बांयी भुजा में कमंडल का अंकन हैं। अलंकृत केश दोनों कंधों पर फैलें हुए हैं। देवी कर्णकुंडल, ग्रैवेयक, केयूर, कटीमेखला, पारदर्शी अधोवस्त्र आदि से अलंकृत हैं।

संयुक्त निदेशक डॉ. मनीषा शर्मा के शब्दों में, भारतीय आभूषण केवल अलंकरण नहीं, बल्कि समय, समाज और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ हैं। इन मूर्तियों में अंकित प्रत्येक कुंडल, हार और कटिमेखला अपने युग की सौंदर्य दृष्टि और सांस्कृतिक मूल्यों की कहानी कहती है। संचालनालय में संरक्षित ये धरोहर हमें यह समझने का अवसर देती हैं कि परंपरा कभी स्थिर नहीं होती; वह निरंतर विकसित होती है, फिर भी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी रहती है। आज के आभूषणों में जो रूप दिखाई देते हैं, वे इन्हीं प्राचीन परंपराओं की पुनरावृत्ति हैं, जो अतीत और वर्तमान के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती हैं।

कांग्रेसी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की भतीजी ने करोड़ों में बेच दी वक्फ संपत्ति

स्टे के बाद भी वक्फ कब्रिस्तान पर तन रहीं दुकानें

• नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति हो रही खुर्द बुर्द

खान आशु 

भोपाल। प्रदेश की संस्कारधानी कहलाने वाली जगह से सटे नरसिंहपुर जिले में भू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। संस्कारों को धता दिखाते हुए यहां एक वक्फ संपत्ति को औने पौने दाम पर बेच दिया गया है तो दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों के स्थान कब्रिस्तान को भी निशाना बनाने से नहीं चूका गया है। जमीन का सौदा करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया गया है, जिसपर जिला पंजीयक ने भी नजर नहीं डाली है। जबकि स्टे हो चुके कब्रिस्तान की जमीन पर हो रहे निर्माण पर भी प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। कांग्रेसियों द्वारा किए जा रहे इस गोरखधंधे को भाजपा शासनकाल में भाजपाइयों की शिकायत पर भी असर नहीं हो रहा है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान जैसे कई लोग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से लेकर वक्फ बोर्ड के जिम्मेदारों से गुहार लगा चुके हैं।

मामला नरसिंहपुर जिले का है। यहां जिला मुख्यालय की नगरीय सीमा में स्थित है वक्फ दरगाह जहांगीर शाह एवं इमामबाड़ा। खसरा नंबर 35/1 एवं 35/2 पर बसी इस कृषि भूमि का आधिपत्य मप्र वक्फ बोर्ड का है, इसके रिकॉर्ड में यह दर्ज है। लेकिन कुछ भू माफियाओं की बदनीयत इस जमीन पर पड़ गई, जिसके लिए उन्होंने कुछ कूटरचित दस्तावेज बनाकर इसका सौदा कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की भतीजी शालिनी प्रजापति की इसमें मुख्य भूमिका है। उन्होंने खुद को इस वक्फ संपत्ति का मालिक करार देते हुए इसका सौदा विश्वास गोटे नामक व्यक्ति को कर दिया है। जानकारी के मुताबिक करीब एक करोड़, 24 रूपये के इस सौदे पर जिला पंजीयक ने भी बिना पड़ताल के सहमति की मुहर लगा दी है। प्रशासनिक अधिकारियों की जल्दबाजी का आलम यह है कि आनन फानन में वे इस विवादास्पद सौदे पर नामांतरण करने को भी तैयार हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्फ अमेंडमेंड बिल की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

शासकीय स्टे को भी धता

नरसिंहपुर जिले की तहसील है गाडरवाड़ा। जिसका एक गांव है कुंडिया। यहां मुस्लिम समाज का एक बरसों पुराना कब्रस्तान है, जो वक्फ बोर्ड के आधिपत्य में है। इस कब्रिस्तान पर भी नजर तिरछी कर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा। जिससे भविष्य में कब्रिस्तान की जगह कम तो होगी ही साथ एक नए विवाद की शुरुआत इससे हो सकती है। जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी ने इस निर्माण पर स्टे दे दिया है। लेकिन हठधर्मिता का आलम यह है कि स्टे के बावजूद यहां निर्माण कार्य सतत जारी है।

शिकायत सीएम से लेकर अध्यक्ष तक 

शहर के जिम्मेदारों और फिक्रमंद लोगों में शामिल जिला वक्फ कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के हुसैन पठान ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से शिकायत की है। उन्होंने वक्फ संपत्ति की इस बर्बादी को रोकने के लिए बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल से भी गुहार लगाई है। पठान ने कहा कि इस तरह वक्फ की बर्बादी से कल के लिए नया उदाहरण तय होगा, साथ ही इससे समाज में भी गलत संदेश जाएगा।

* इनका कहना है 

नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति के बारे में शिकायत मिली है। जिले के अधिकारियों को स्थिति को दुरुस्त करने के लिए कहा जा रहा है।

डॉ. सनव्वर पटेल 

अध्यक्ष 

मप्र वक्फ बोर्ड

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा समावेशी विकास : कृष्णा गौर

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी ईद की मुबारकबाद 

भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने प्रदेशवासियों को ईद की मुबारकबाद एवं बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ईद केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे, त्याग और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है, जो समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का कार्य करता है। राज्य मंत्री गौर ने प्रदेशवासियों से ईद के पावन अवसर पर आपसी सद्भाव, शांति और एकता को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लेने की अपील की।

राज्यमंत्री गौर ने अपने संदेश में कहा कि सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र के साथ कार्य करते हुए समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कई प्रभावी पहलें संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक एवं मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा जारी रखने में सहायता मिल रही है। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग सहायता योजनाएँ भी संचालित हैं, जिससे युवा वर्ग को बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया गया है, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षित कर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

राज्यमंत्री गौर ने बताया कि मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें आधुनिक विषयों को शामिल कर विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया जा रहा है। साथ ही, अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं, ताकि इन क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका वास्तविक लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचे, इसके लिए पारदर्शिता, मॉनिटरिंग और जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

नहीं नजर आया चांद, आज होगा तीसवां रोजा, कल 21 को होगी ईदुल फितर

  • तैयारियों को अंतिम रूप देने उमड़ा शहर
  • काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी पढ़ाएंगे ईदगाह में पहली नमाज 

भोपाल। रमजान महीने का 29वा रोजा रखने के बाद गुरुवार शाम को आसमान में चांद देखने के लिए शहर मोती मस्जिद में जमा हुआ। साफ आकाश के बीच भी चांद ने अपनी आमद देकर ईदुल फितर की खुशियों का ऐलान नहीं किया। रूआते हिलाल कमेटी ने आसपास के बड़े शहरों और छोटे गांवों से भी इसकी तस्दीक की, लेकिन कहीं से भी ऐसी कोई खबर नहीं आई। जिसके बाद काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी ने शनिवार को ईद का त्यौहार मनाए जाने का ऐलान कर दिया। 

मोती मस्जिद में जमा हुए उलेमाओं और लोगों ने इस बात की तस्दीक कर दी कि गुरुवार को ईद का चांद दिखाई नहीं दिया है। जिसके बाद जहां गुरुवार को नमाज ए ईशा के बाद तरावीह की आखिरी नमाज अदा की गई। शुक्रवार को जुमा की नमाज अदा की जाएगी, जिसे जुमातुल विदा के रूप में मनाया जाएगा। यह जुमा इसलिए भी खास हो गया है कि इस रमजान महीने में पड़ने वाला यह पांचवा जुमा होगा।

नहीं थे इमकानात 

रमजान महीने की शुरुआत 29वें चांद के साथ हुई थी, सऊदी अरब में भी बुधवार को चांद दिखाई नहीं दिया था। आमतौर पर सऊदी में ईद का त्यौहार भारत से एक दिन पहले मनाया जाता है। इन हालात को देखकर यह अंदाज लगाया जा रहा था कि भारत के आसमान पर भी ईद की खुशियों का पैगाम गुरुवार की बजाए शुक्रवार को ही नमूदार होगा। अब यहां शनिवार को चांद दिखाई नहीं देने पर भी ईद मना की जाएगी, कारण यह भी है कि शुक्रवार को महीने के 30 रोजे पूरे हो जाएंगे।

हुआ बाजारों का रुख

ईद की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शहर का रुख बाजारों की तरफ बढ़ गया। शहर के चौक बाजार, नदीम रोड, लखेरापुरा, जुमेराती, लक्ष्मी टॉकीज, बुधवारा, इतवारा, छावनी, जहांगीराबाद आदि बाजारों में पैर न रखने जैसे हालात बन गए। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस की यातायात विंग ने शहर में कई जगह बेरीकेटिंग भी कर दी, जिससे वाहनों की भीड़ से पैदल ग्राहकों को दिक्कत न हो।

अब क्षेत्रीय बाजारों का जोर

शहर के परम्परागत बाजारों के अलावा शहर में कई जगह नए बाजार भी आकार लेने लगे हैं। टीला जमालपुरा, सिंधी कॉलोनी चौराहा, निजामुद्दीन कालोनी, जहांगीराबाद और बाग के छोटे स्थाई बाजारों के अलावा शहर में कई जगह अस्थाई ईद बाजार भी इन दिनों सजे हुए हैं।

यह होगा नमाज का वक्त 

ईदगाह– सुबह 7:30 बजे

जामा मस्जिद–सुबह 7:45 बजे

ताज-उल-मसाजिद – सुबह 8:00 बजे

मोती मस्जिद – सुबह 8:15 बजे

मस्जिद रब्बानी, एमपी नगर – सुबह 9:00 बजे

  • मसाजिद कमेटी की शहर को ताकीद

मसाजिद कमेटी भोपाल ने ईद की नमाज को लेकर शहर के नाम कुछ ताकीद की हैं। कमेटी के प्रभारी सचिव सैयद उवैस अली द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि ईदगाह से पहले किसी भी मस्जिद में नमाज ए ईद अदा नहीं की जाए।

  • काजी साहब या रूआते हिलाल कमेटी की तस्दीक के बिना शहर में कहीं भी ईद की खुशियों के गोले न दागे जाएं।
  • ईद की नमाज अदा करने से पहले सभी लोग अपना सदका ए फितर ₹70 प्रति व्यक्ति अदा करें।
  • ईदगाह में नमाज पढ़ने के लिए लोग समय से पहले पहुंचे।
  • अपने वाहन पार्किंग में निर्धारित स्थान पर लगाएं।
  • व्यवस्था में लगे पार्किंग वालेंटियर्स को सहयोग करें।