रोशन-उद-दौला और छतर मंजिल के विकास से बदलेगा लखनऊ का पर्यटन स्वरूप

*बुटीक हेरिटेज स्टे के जरिए लखनऊ को MICE और वेडिंग टूरिज्म का अगला हब बनाने की तैयारी*

*स्थानीय पर्यटन से जुड़ेगा हरौनी गांव, स्थानीय समुदाय और महिलाओं को मिलेगा रोजगार*   

*‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ की पहचान से हेरिटेज अनुभवों तक, लखनऊ में बढ़ रहा पर्यटन का दायरा- जयवीर सिंह*

*लखनऊ, 15 अप्रैल 2026*

लखनऊ में पर्यटन को नई उड़ान देने की तैयारी शुरू हो गई है। अपने दौर की ऐतिहासिक धरोहरों रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल अब सिर्फ दर्शनीय स्थल नहीं रहेंगे, बल्कि यहां आने वाले पर्यटक अवध की संस्कृति, विरासत और जीवनशैली का अनुभव भी प्राप्त कर सकेंगे। राजधानी में इन प्रतिष्ठित इमारतों को नए और आकर्षक स्वरूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही अब इन दोनों प्रोजेक्ट्स को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत 'एडेप्टिव रियूज़' मॉडल पर विकसित किया जाएगा। खास बात ये है कि इसमें धरोहरों की ऐतिहासिक पहचान और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि ये स्थल पर्यटन के नए आकर्षण केंद्र बन सकें।'

*छतर मंजिल में बनेगा हेरिटेज होटल*
छतर मंजिल को 100 कमरों का एक भव्य हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां ठहरने के साथ-साथ पर्यटकों को लखनऊ की कला, संस्कृति और खानपान का अनुभव भी मिलेगा। प्रोजेक्ट के तहत ऑल-डे डाइनिंग रेस्तरां, स्थानीय शिल्प और डिजाइनर उत्पादों की रिटेल आर्केड तथा इमर्सिव डाइनिंग जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक इमारत को एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

*रोशन-उद-दौला में मिलेगा खास अनुभव*
वहीं रोशन-उद-दौला भवन को बुटीक लग्जरी प्रॉपर्टी के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां 26 कमरों का लग्जरी होटल, छोटे और विशेष आयोजनों जैसे प्री-वेडिंग फंक्शन, पारिवारिक कार्यक्रम और कॉर्पोरेट मीटिंग के लिए सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही स्पा और पारंपरिक वेलनेस सेवाएँ भी दी जाएंगी। खानपान में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को प्रमुखता दी जाएगी, जिससे लखनऊ की ‘गैस्ट्रोनॉमी सिटी’ की पहचान और मजबूत हो सके।

*पर्यटन से जुड़ेगा हरौनी गांव*
पर्यटन विकास की इस पहल को अब स्थानीय आजीविका से भी जोड़ा जा रहा है। हरौनी गांव की महिलाओं को हस्तकला, साड़ी और कंबल जैसे पारंपरिक उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का मौका मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय कला और कारीगरों को भी पहचान मिलेगी।

*पर्यटन को नई दिशा देगा विकास*
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि, 'सरकार का लक्ष्य पर्यटन विभाग द्वारा लखनऊ की धरोहरों को और अधिक सुलभ और आकर्षक बनाना है। उन्होंने कहा कि शहर अब तेजी से अपने पर्यटन दायरे को बढ़ा रहा है और आने वाले समय में यहां पर्यटकों को और बेहतर अनुभव मिलेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि, लखनऊ सिर्फ हजरतगंज और अमीनाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर में पर्यटन की संभावनाएं बढ़ रही हैं। रोशन-उद-दौला और छतर मंजिल के विकास के साथ अन्य परियोजनाएं भी मिलकर लखनऊ को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी।'
पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हमले मामले में विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत छह आरोपित दोषमुक्त
-24 साल पहले नदेसर क्षेत्र में धनंजय सिंह और उसके साथियों पर हुई थी फायरिंग



लखनऊ ।जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह और उनके साथियों पर 24 साल पहले वाराणसी के नदेसर क्षेत्र में दिनदहाड़े हुए जानलेवा हमले में बुधवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया गया। अदालत ने  आरोप साबित न होने पर संदेह का लाभ देते हुए आरोपित विधायक अभय सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, सतेंद्र ऊर्फ बबलू सिंह, संदीप सिंह उर्फ पप्पू, विनोद सिंह व एमएलसी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि चार अक्टूबर 2002 को जौनपुर के पूर्व सांसद व तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह अपने कुछ साथियों के साथ सफारी गाड़ी से अस्पताल में भर्ती पारिवारिक सदस्य एक को देखकर शाम छह बजे वापस जौनपुर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी सफारी गाड़ी नदेसर क्षेत्र में स्थित टकसाल सिनेमा हाल के समीप पहुंचे, तभी पहले से वहां मौजूद अभय सिंह अपने साथियों के साथ सफारी और बोलेरो गाड़ी से उतरे और जान से मारने की नियत से धनंजय सिंह के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग करने लगे। आत्मरक्षार्थ उनके गनर ने गोली चलाना शुरू कर दिया। इसी दौरान मौके पर पुलिस की गाड़ी आ गई तो अभय सिंह और उसके साथी अपनी गाड़ी से कचहरी की तरफ भाग निकले। इस हमले में तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह,गनर वासुदेव पांडेय, ड्राइवर दिनेश कुमार गुप्ता समेत अन्य लोग घायल हो गए। वहीं अचानक गोलियां चलने से वहां भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी। मौके पर पहुंची पुलिस ने धनंजय सिंह और उसके साथियों को इलाज के लिए मलदहिया स्थित सिंह मेडिकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। इस मामले में धनंजय सिंह ने अभय सिंह एवं अन्य के ख़िलाफ़ कैंट थाना में नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। कैंट पुलिस ने विवेचना पूरी करके अभय सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, सतेंद्र सिंह उर्फ बबलू, संदीप सिंह उर्फ पप्पू, विनोद सिंह तथा वर्तमान में एमएलसी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह के खिलाफ 14 दिसंबर 2002 को अदालत में आरोपपत्र प्रेषित कर दी। घटना के समय धनंजय सिंह रारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक थे।
अलीगढ़ में 211 लाख और अयोध्या मंडल में 1019 लाख से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, समयबद्ध कार्य के निर्देश
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने पर्यटन विकास को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद अलीगढ़ और अयोध्या मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं हेतु करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद अलीगढ़ में तीन प्रमुख पर्यटन परियोजनाओं के लिए कुल 211 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत खैर क्षेत्र के ग्राम जलालपुर स्थित हनुमानगढ़ कुटी आश्रम, इगलास के प्राचीन शिव मंदिर बरखंडी आश्रम गोरई तथा बरौली क्षेत्र के सुमेर दरियापुर स्थित प्राचीन चामुंडा माता मंदिर का पर्यटन विकास किया जाएगा।
इन परियोजनाओं के लिए क्रमशः 64 लाख, 54 लाख और 93 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है। मंत्री ने बताया कि इन कार्यों के लिए यूपीएसटीडीसी को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है और उसे निर्देश दिए गए हैं कि सभी कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जाएं।
वहीं अयोध्या मंडल के अंतर्गत आने वाली 13 विधानसभाओं में पर्यटन विकास के लिए कुल 1019 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं में संत बाबा गोविंद साहब की तपोभूमि, काली मंदिर भीटी, अष्टखंभा स्तूप, श्रवण क्षेत्र, विभिन्न आश्रमों और प्राचीन मंदिरों का सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य शामिल हैं।
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष प्रथम किस्त जारी कर दी गई है और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विकास कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्ता और समयसीमा का पालन करते हुए पूर्ण कराए जाएं।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिले, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित हों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
अर्बन चैलेंज फंड से शहरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार, यूपी में नवाचार आधारित परियोजनाओं पर जोर
लखनऊ। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में बुधवार को अर्बन चैलेंज फंड (UCF) के संचालन को लेकर एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में राज्यों को फंड के दिशा-निर्देशों का गहन अध्ययन कर शीघ्र क्रियान्वयन शुरू करने के निर्देश दिए गए। साथ ही लंबित प्रक्रियाओं और हस्ताक्षर संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि योजना का लाभ समयबद्ध रूप से जनता तक पहुंच सके।
केंद्रीय मंत्री श्री खट्टर ने जानकारी दी कि अर्बन चैलेंज फंड के तहत 1 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता का प्रावधान किया गया है, जिसमें पात्र परियोजनाओं को 25 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी, जो अपनी कुल लागत का कम से कम 50 प्रतिशत भाग बाजार आधारित संसाधनों—जैसे बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल—से जुटाने में सक्षम हों।
उन्होंने बताया कि इस फंड के अंतर्गत “Cities as Growth Hubs”, “Creative Redevelopment of Cities” और “Water and Sanitation” जैसे प्रमुख क्षेत्रों में दीर्घकालिक और परिवर्तनकारी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने कहा कि यह फंड शहरी विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। इससे नगर निकायों को वित्तीय संसाधन जुटाने में सहूलियत मिलेगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में नवाचार आधारित, जनहितकारी और दीर्घकालिक प्रभाव वाली परियोजनाओं की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे प्रदेश के शहरों को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाया जा सके।
सत्ता के संरक्षण में चल रहे दोहरे मापदंड अब देश को बर्बादी की ओर ले जा रहा है : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रिय अध्यक्ष

लखनऊ । सत्ता के संरक्षण में चल रहा ये 'दोहरा मापदंड' अब देश को बर्बादी की ओर ले जा रहा है। जब सभ्य और शांत रहने वाला सामान्य वर्ग अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए सड़क पर यूजीसी के खिलाफ उतरा, तो उसे हाउस अरेस्ट और सरकारी दमन का उपहार मिला, लेकिन आज जो भीड़ मंदिर तोड़ रही है, पुलिस पर पत्थर बरसा रही है और थानों में गुंडागर्दी कर रही है, उसे 'शोषित-वंचित' बताकर अभयदान दिया जा रहा है।

यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि वोट बैंक की फसल काटने के लिए रचा गया एक गहरा और सुनियोजित षड्यंत्र है। सरकार की नजर में सनातनी समाज की शांति उसकी कमजोरी बन गई है, इसीलिए अराजकता पर कार्रवाई करने के बजाय उसे 'फेक न्यूज़' बताकर दबा दिया जाता है। अगर हम अब भी जाति-पाति में बंटे रहे और एकजुट नहीं हुए, तो सत्ता की यह तुष्टिकरण वाली राजनीति देश को गृहयुद्ध की आग में झोंक देगी। जागिए, वरना आपकी चुप्पी ही आपके विनाश का कारण बनेगी। उक्त बाते सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरज प्रसाद चौबे आज लखनऊ में निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए गोमतीनगर नेहरू एनक्लेव में उच्चन्यालय लखनऊ के अधिवक्ता बृजेश कुमार देव जी के आवास पर,वर्तवान राजनीत पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लोक तंत्र के नाम पर दलित मुस्लिम तुष्टिकरण का खेल खेला जा रहा है जहां जनता को वोट बैंक के रूप में देखा जा रहा है चुनाव आते हि समाज को जाति वर्ग धर्म में बाट कर अलग अलग तरीके से प्रभावित किया जाता है ये संविधान को मानने वाले जय भीम का नाम ले कर नकली लोग उपद्रवी , राष्ट द्रोही ,समाज दोही और आतंक वादी है जो कल अंडेडकर के जयंती पर देखने को मिल आगरा में परशुराम चौक को कब्जा करने का तथा भगवान परशुराम को अपमानित करने का कार्य किया गया वही पुलिस मैंन रही आखिर में सरकार क्या चाहती है सवर्ण उत्तर चाहता है।
अंबेडकर जयंती पर मंत्री ए.के. शर्मा का मऊ दौरा, बाबा साहब को दी श्रद्धांजलि

* गांव-गांव पहुंचकर सामाजिक समरसता का संदेश, अंबेडकर पार्क व पुस्तकालय निर्माण का आश्वासन

लखनऊ। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर जनपद मऊ में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रतिभाग कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने जवाहिरपुर, रामपुर छतहरा, मरूखपुर, मर्यादपुर, तीनहरी, रसूलपुर, कांठतराव, सूरजपुर एवं सहरोज सहित कई गांवों का दौरा कर स्थानीय लोगों के साथ जयंती कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए मंत्री शर्मा ने कहा कि बाबा साहब केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने समाज के वंचित, शोषित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने लोगों से बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करने और समाज से भेदभाव व कुरीतियों को समाप्त करने का आह्वान किया।
मंत्री ने युवाओं से शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार गरीबों और वंचितों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि आयुष्मान भारत योजना से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के जरिए बेटियों के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस दौरान स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय विकास से जुड़ी मांगें मंत्री के सामने रखीं। मंत्री शर्मा ने अंबेडकर पार्क के निर्माण और पुस्तकालय की स्थापना का आश्वासन देते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी रही। सभी ने बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
नोएडा में मंगलवार को भी श्रमिकों का बवाल जारी, कई जगह उग्र प्रदर्शन

नाेएडा व ग्रेटर नाेएडा के 80 प्रतिशत कंपनियां आज बंद रही
सेक्टर 70 में पथराव करने वाले 15 से अधिक लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया
सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी गई
लखनऊ । जिला गाैतमबुद्ध नगर में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कई दिनाें से चल रहा श्रमिकाें का आंदाेलन उग्र हाेता जा रहा है।मंगलवार 6वें दिन श्रमिकों ने नोएडा के कई इलाकों में पथराव और तोड़फोड़ कर बवाल किया। इसके साथ ही कई औद्योगिक इलाकों में फैक्टरियों के बाहर मजदूर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। तनाव के बीच तमाम औद्योगिक इकाइयों में कामकाज ठप है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दी गई राहत के बाद भी श्रमिकाें का उग्र प्रदर्शन खत्म नहीं हाे रहा है। इसके चलते नाेएडा व ग्रेटर नाेएडा के 80 प्रतिशत कंपनियां आज बंद रही हैं। श्रमिकों के आंदोलन के चलते उद्योगपति फैक्टरी या कंपनी खोलने से घबरा रहे हैं। आज भी कई जगहों पर श्रमिक हिंसक हो उठे। सेक्टर 70 में क्लियो काउंटी सोसाइटी के पास श्रमिकाें ने पथराव कर तोड़फोड़ भी की है। श्रमिकाें ने पुलिसकर्मियाें काे भी निशाना बनाया है। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को काबू किया। नगर के सेक्टर 70 के अलावा सेक्टर 80 में भी सुबह श्रमिक बेहद उग्र दिखे। सेक्टर 80 में कई फैक्टरियों के बाहर जुटे प्रदर्शनकारियों ने कानून को हाथ में लेने की कोशिश की। हालांकि, पहले से सतर्क पुलिस ने स्थिति को ज्यादा बिगड़ने नहीं दिया। सेक्टर 70 में पथराव करने वाले 15 से अधिक लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि आज सुबह से ही विभिन्न औद्योगिक क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि छुटपुट घटनाओं को छोड़कर शांति बनी हुई है। उन्होंने श्रमिकों से अपील किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वेतन बढ़ोतरी और उनकी अन्य मांगों काे मान लिया है। अब सभी शांतिपूर्वक काम पर लौट आएं। अपर पुलिस आयुक्त ने कहा कि उपद्रव करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। सोमवार और आज हो रहे प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वालों की पहचान वीडियाे क्लिप के आधार पर पहचान कर गिरफ्तार किया जा रहा है। पुलिस ने अभी तक 300 से ज्यादा उपद्रवियाें काे गिरफ्तार किया है। अभी तक कुल 7 एफआईआर दर्ज हुई है। 2 एक्स हैंडल पर भी भ्रामक खबर फैलाने पर मुकदमा हुआ है। पुलिस ने माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी है। जिला प्रशासन के अनुसार सोमवार के हिंसक प्रदर्शन के बाद 24 घंटे के भीतर सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है और संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी की हैं। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि मजदूरी में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने वृद्धि की है। इस फैसले को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कल देर रात मंजूरी दे दी।' उन्हाेंने बताया कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये प्रति माह के बजाय 13,690 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी। अन्य नगर निगम क्षेत्रों में संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किया गया है। शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रतिमाह, अर्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
‘संभव’ बना जनता का सशक्त हथियार, ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने दिलाया त्वरित न्याय

* ऑनलाइन जनसुनवाई में मौके पर समाधान, लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई, गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति और स्मार्ट मीटर समस्याओं पर विशेष फोकस

लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री  ए.के. शर्मा ने जनपद मऊ के बहुउद्देशीय भवन ‘मंगलम’ में “संभव” ऑनलाइन शिकायत निस्तारण प्रणाली के माध्यम से व्यापक जनसुनवाई कर पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील शासन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से जुड़े 100 से अधिक शिकायतकर्ताओं ने सीधे मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, जिनका त्वरित समाधान मौके पर ही सुनिश्चित किया गया।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि “संभव” प्रणाली से शिकायतकर्ता और अधिकारी आमने-सामने जुड़ते हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और समस्याओं के समाधान में अनावश्यक विलंब समाप्त होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनसुनवाई के दौरान कई मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बाराबंकी में गलत एस्टीमेट बनाने पर लाइनमैन को हटाने, जेई को निलंबित करने और अधिशासी अभियंता के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। आजमगढ़, बरेली और आगरा समेत अन्य जनपदों में भी दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
महाराजगंज में एस्टीमेट जमा होने के बावजूद विद्युत कनेक्शन न देने पर संबंधित अधिकारी को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। वहीं बरेली और मेरठ के मामलों में उपभोक्ताओं को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। वाराणसी के एक प्रकरण में विधिक राय लेकर शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए, जबकि उन्नाव में स्मार्ट मीटर बिलिंग समस्याओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
ऊर्जा मंत्री ने झांसी, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर और मथुरा में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए अधिकारियों को मौके पर निरीक्षण कर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर बल दिया।
जनसुनवाई के समापन पर मंत्री श्री शर्मा ने ग्रीष्मकाल को देखते हुए रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, शाम के समय अनावश्यक कटौती बंद करने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिकायतकर्ताओं ने “संभव” पहल की सराहना करते हुए इसे जनहित में प्रभावी और भरोसेमंद मंच बताया। कार्यक्रम में यूपीपीसीएल और विभिन्न विद्युत निगमों के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल एवं भौतिक रूप से उपस्थित रहे।
आंबेडकर का जीवन मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत: केशव प्रसाद मौर्य
* जयंती पर उप मुख्यमंत्री ने लखनऊ में अर्पित किए श्रद्धासुमन, समता और न्याय के मूल्यों को बताया आज भी प्रासंगिक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ‘भारत रत्न’ बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर मंगलवार को लखनऊ स्थित अपने कैम्प कार्यालय, 7-कालिदास मार्ग पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का संपूर्ण जीवन मानवता के लिए एक सशक्त संदेश है। अपने संघर्ष, शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने समाज के वंचित, शोषित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जो कार्य किए, वे आज भी प्रेरणास्रोत हैं।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक न्याय के अग्रदूत और भारतीय संविधान के शिल्पी बाबा साहब ने शिक्षा को परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया और वंचितों, श्रमिकों तथा किसानों को अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके समता, न्याय और मानव गरिमा के सिद्धांत आज भी राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ बाबा साहब के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ‘पंचतीर्थ’ सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।

श्री मौर्य ने कहा कि बाबा साहब का संघर्षमय जीवन हमें कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे बाबा साहब के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर समतामूलक और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दें।
यूपी में नोएडा गाजियाबाद में श्रमिकों को मिलेगा सबसे ज्यादा वेतन
लखनऊ /नोएडा। उत्तर प्रदेश में जनपद गौतम बुद्धनगर के नाेएडा क्षेत्र में सोमवार को हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में इजाफा कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित उच्च अधिकार प्राप्त समूह की सिफारिशों पर अकुशल, अर्धकुशल और कुशल मजदूरों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि की गई है। खास बात यह है कि सबसे अधिक मजदूरी नोएडा और गाजियाबाद में मिलेगी। इसके अलावा नगर निगम वाले अन्य जिलाें और गैर नगर निगम वाले जिलाें में मजूदरी की दर अलग-अलग है।

उत्तर प्रदेश में अभी तक अकुश मजदूरों को 11,313 रुपये न्यूनतम मजदूरी (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) मिलती थी। नोएडा और गाजियाबाद में अब 2,377 रुपये का इजाफा किया गया है। इन दो जनपदों में काम करने वाले अकुशल मजदूरों को अब न्यूनतम 13,690 रुपये मिलेंगे। नगर निगम वाले अन्य जनपदों के लिए यह दर 13,006 रुपये,जबकि अन्य जनपदों के लिए 12,356 रुपये तय की गई है।

अर्धकुशल कर्मचारियों के लिए उत्तर प्रदेश में पहले 12,445 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय थी। अब नोएडा और गाजियाबाद में अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक 2614 रुपये का इजाफा किया गया है। नोएडा गाजियाबाद में अब उन्हें 15059 रुपये,अन्य नगर निगम वाले जनपदों में 14,306 रुपये और अन्य जनपदों में 13,591 रुपये मिलेंगे। कुशल श्रमिकों के लिए उत्तर प्रदेश में अभी तक 13,940 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय थी। नोएडा, गाजियाबाद में कुशल श्रमिकों को अब मासिक 2,908 रुपये अधिक मिलेंगे। प्रति माह उन्हें न्यूनतम 16,868 रुपये मिलेंगे। नगर निगम वाले अन्य जनपदों में अब 16,025 रुपये और अन्य जनपदों में 15,224 रुपये मिलेंगे।

जनपद गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी मेंधा रूपम ने बताया कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह मनगढ़ंत एवं झूठा समाचार प्रचारित किया जा रहा है कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये प्रति माह निर्धारित कर दिया गया है। जिसका अनुपालन नियोक्ता संगठनों द्वारा नहीं किया जा रहा है। वस्तुस्थिति यह है कि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम "फ्लोर वेज" निर्धारित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इस पहल का उद्देश्य देशभर के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की एक समान आधार रेखा सुनिश्चित करना है,जिससे सभी राज्यों में श्रमिकों को न्यायसंगत एवं उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो सके। राज्य सरकार से भी नियोक्ता संगठनों एवं श्रमिक संगठनों सहित सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है। प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण किया जा रहा है,ताकि संतुलित एवं व्यावहारिक निर्णय लिया जा सके।