बीमा क्षेत्र को डबल इंजन सरकार से नई रफ्तार: केशव प्रसाद मौर्य
लखनऊ/आगरा। आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित होटल ग्राण्ड मरक्यूर में आयोजित भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के विकास अधिकारियों के संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ इंश्योरेंस फील्ड वर्कर्स ऑफ इंडिया की उत्तर मध्य क्षेत्रीय द्विवर्षीय आमसभा/वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है, जो आमजन को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विकास अधिकारियों को संस्था की “रीढ़” बताते हुए उनके समर्पण और कार्यशैली की सराहना की।
उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऐतिहासिक कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान तक सुरक्षा कवच पहुंचाया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार विकास अधिकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह संवेदनशील है और उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बीमा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के विस्तार, पारदर्शिता और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय महासचिव विवेक सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगठन की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। इस दौरान उपमुख्यमंत्री को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। क्षेत्रीय सचिव संजय शाही ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
सम्मेलन में उत्तर मध्य क्षेत्र (उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड) की 225 शाखाओं से 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। आगरा, वाराणसी, गोरखपुर, अलीगढ़, प्रयागराज, अयोध्या, कानपुर, देहरादून, हल्द्वानी, बरेली, मेरठ और लखनऊ सहित 12 डिवीजनों की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को प्रभावी बनाया।
इस अवसर पर एमएलसी विजय शिवहरे, विधायक भगवान सिंह कुशवाहा, डॉ. जी.एस. धर्मेश, प्रशांत पोनिया, राजकुमार गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं एलआईसी परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। सम्मेलन में देशभर से संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भी सहभागिता रही।
रामस्वरूप मेमोरियल विवि में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी: डॉ. तेजस्कर पाण्डेय ने ‘प्रकृति–ब्रह्माण्ड समन्वय’ पर रखा दृष्टिकोण
‘यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे’ सिद्धांत के जरिए मानव, प्रकृति और ब्रह्माण्ड के गहरे संबंध को किया स्पष्ट

लखनऊ। श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में ज्योतिष आचार्य डॉ. तेजस्कर पाण्डेय (उप सचिव एवं प्रभारी संयुक्त निबंधक, उत्तर प्रदेश सूचना आयोग, लखनऊ) ने “वैदिक चिंतन में प्रकृति–ब्रह्माण्ड समन्वय” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में देश-विदेश के विद्वानों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में डॉ. पाण्डेय ने ‘ऋत’ सिद्धांत तथा “यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे” की अवधारणा के माध्यम से बताया कि मानव, प्रकृति और ब्रह्माण्ड एक समन्वित तंत्र हैं। उन्होंने कहा कि ग्रह-नक्षत्रों की गतियां केवल आकाशीय घटनाएं नहीं, बल्कि मानव जीवन के निर्णय, दिशा और मानसिक स्थिति से भी गहराई से जुड़ी होती हैं।
अपने शोध कार्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उनका अध्ययन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में ज्योतिषीय विश्वास-प्रणाली का विश्लेषण करता है, जिसमें तीन हजार से अधिक व्यक्तियों और पांच सौ ज्योतिषाचार्यों पर आधारित गुणात्मक व मात्रात्मक पद्धति अपनाई गई है। शोध के निष्कर्षों के अनुसार ज्योतिष आज भी एक जीवंत, अनुकूलनशील और प्रभावी प्रणाली के रूप में समाज में विद्यमान है, जो व्यक्ति को मार्गदर्शन, मानसिक संतुलन और सांस्कृतिक निरंतरता प्रदान करती है।
इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय में वैदिक विज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कुलपति श्री तिवारी का आभार जताया। साथ ही उन्होंने ब्रह्माण्ड विज्ञान एवं ज्योतिष का पृथक विभाग स्थापित करने तथा ज्योतिषीय परामर्श केंद्र शुरू करने का सुझाव दिया, जिससे आमजन को प्रमाणित विशेषज्ञों से विश्वसनीय मार्गदर्शन मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से वैदिक ज्योतिष में स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा दी जा रही है, जो इस क्षेत्र के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
अपने व्याख्यान के अंत में डॉ. पाण्डेय ने वैदिक ज्ञान को वर्तमान और भविष्य के मार्गदर्शक के रूप में अपनाने का आह्वान किया। संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों और प्रतिभागियों ने उनके व्याख्यान को उपयोगी, प्रेरणादायी और समसामयिक बताया।
थारू समाज को बड़ी राहत: मुकदमे वापस होंगे, हजारों परिवारों को मिला जमीन का अधिकार
* लखीमपुर खीरी में ₹817 करोड़ की 314 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, सीएम योगी की माफियाओं को कड़ी चेतावनी

लखीमपुर खीरी/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने थारू समाज के लोगों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी कीमत पर थारू समाज पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा और सरकार उनके सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नदियों के कटाव से प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2350 परिवारों और थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भौमिक अधिकार पट्टों का वितरण किया। इसके साथ ही पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला गोकर्णनाथ विधानसभा क्षेत्रों में ₹817 करोड़ लागत की 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से अपने अधिकारों से वंचित इन परिवारों को आज जमीन का मालिकाना हक मिल रहा है, जो “अधिकार से आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान” की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि 4356 थारू परिवारों को 5338 हेक्टेयर और 2350 अन्य परिवारों को 4251 हेक्टेयर भूमि का अधिकार दिया गया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले संवेदनशीलता का अभाव था, जबकि वर्तमान सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि माफिया बनने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें “मिट्टी में मिलने” के लिए तैयार रहना होगा।
सीएम ने यह भी कहा कि सरकार थारू समाज को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उद्यमी बनाने की दिशा में काम कर रही है। खीरी में स्थापित थारू हस्तशिल्प कंपनी के जरिए उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। किसानों के मुद्दे पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और आपदा राहत के तहत मदद दी जाएगी। जनहानि और पशुहानि की स्थिति में 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने लखीमपुर खीरी के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि अब जिले की पहचान दुधवा नेशनल पार्क, गोला गोकर्णनाथ कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं से बन रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” नहीं, बल्कि “वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज” की दिशा में काम हो रहा है। कार्यक्रम में कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम” ऐतिहासिक कदम, महिलाओं को मिलेगा निर्णय में भागीदारी का अधिकार: बेबी रानी मौर्य


* 33 प्रतिशत आरक्षण से संसद-विधानसभाओं में बढ़ेगा महिला प्रतिनिधित्व, लोकतंत्र होगा और अधिक समावेशी

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री एवं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने शनिवार को पार्टी के राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय बताया।
उन्होंने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण प्रक्रिया में सशक्त भागीदार और निर्णयकर्ता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना उपाध्याय और महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री ममता पांडेय भी मौजूद रहीं।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया यह कानून देश की करोड़ों महिलाओं के सम्मान और अधिकारों का राष्ट्रीय संकल्प है। संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक प्रावधान लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाएगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। “भागीदारी बढ़ी है, लेकिन प्रतिनिधित्व संतुलित नहीं है—इसी अंतर को समाप्त करने के लिए यह कानून आवश्यक है,” उन्होंने कहा।
मौर्य ने बताया कि वैश्विक अनुभव दर्शाते हैं कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में नीतियां अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनती हैं। साथ ही जेंडर गैप कम होने से आर्थिक विकास को भी गति मिलती है।
उन्होंने पिछले एक दशक में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ाव बढ़ा और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उन्हें मिला। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और मातृत्व अवकाश में वृद्धि जैसे कदमों ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार किया है।
उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व यह दर्शाता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं प्रभावी नेतृत्व देती हैं। अब यही मॉडल संसद और विधानसभाओं में भी लागू होगा, जिससे नीति निर्माण अधिक जन-केंद्रित और जवाबदेह बनेगा।
मंत्री ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” केवल आरक्षण का प्रावधान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक व्यापक सुधार है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है।
ज्योतिबा फुले का समाज सुधार में योगदान अविस्मरणीय: केशव प्रसाद मौर्य
* जयंती पर उप मुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि, समतामूलक समाज निर्माण का दिया संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर लखनऊ स्थित कैम्प कार्यालय 7-कालिदास मार्ग में उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्योतिबा फुले का समाज सुधार में योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने जीवन को सामाजिक समता, शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया। उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं।
श्री मौर्य ने कहा कि महात्मा फुले केवल एक महान समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि प्रखर विचारक, लेखक और क्रांतिकारी दार्शनिक भी थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, भेदभाव और असमानताओं के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। विशेष रूप से स्त्री शिक्षा और वंचित वर्गों के उत्थान में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में महात्मा फुले के आदर्शों को आत्मसात कर ही एक समरस और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
यूजीसी हो या जातीय आरक्षण, एससीएसटी एक्ट यह खत्म होना चाहिए : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे आज निजी कार्यक्रम में वाराणसी के राधापुरम कालोनी में श्यामा देवी के आवास पर आएजहां पर सवर्ण समाज के लोगों  को सम्बोधित करते हैं  सवर्ण समाज के मुद्दों को लेकर जोरदार हुंकार भरी उन्होंने यूजीसी रेगुलेशन और एससीएसटी एक्ट, जातिगत आरक्षण को लेकर सरकार पर निशाना साधा कहा कि सामान्य वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है  सुरज प्रसाद चौबे ने कहा है सुनियोजित तरीके से सवर्ण को कमजोर किया जा रहा है और उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ।

ऐसे में अब सवर्ण समाज को राजनीतिक विकल्प के रूप में खुद को विकल्प के रूप में स्थापित करना होगा उन्होंने सत्ता में बैठे सवर्ण नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यूजीसी जैसे मुद्दे पर खुल कर विरोध नहीं किया जिस देश के राष्ट्रपति की पहचान डेढ़ अरब लोगों की प्रथम नागरिक होने के बावजूद भी आदिवासी ही है। जिस देश का प्रधानमंत्री मंत्री 12 साल मुख्यमंत्री और 12 साल प्रधानमंत्री रहने के बाद भी अभी भी खुद को अभी भी अपने आप को पिछड़ा बताता हो उसी देश में एक बीघा जमीन पर गुजारा करने वाला सवर्ण परिवार सक्षम योग्य दबंग माना जाता है ये हमारे देश की संविधान की खूबसूरती है ।

भारत में जहां जाती पूछ कर मुकदमे लिखे जाते हैं और जाति पूछ कर नौकरी दी जाती हो  जहां जाती पूछ कर योजनाएं दी जाती है साथ ही साथ कालेल विश्वविद्यालय में कट्टी चौराहे पर जाती पूछ कर मार पीट की जा रही हो  सवर्ण ब्राह्मण को मारा पीटा जा रहा है फिर भी दोष सवर्ण ब्राह्मण का ही दिया जाता है हाल ही में बि एच यू में जाती पूछ कर ब्राह्मण को मारा गया है देश के स्वाधीनता संग्राम में अपने प्राण की आहुति देने वाले सवर्ण क्रांतिकारी की अपेक्षा की जा रही है ।

वही दूसरी तरफ अम्बेडकर जिनका स्वाधीनता संग्राम में कोई योगदान नहीं था का महिमा मंडित किया जा रहा है उत्तर प्रदेश सरकार भारी बजट छतरी बनवाने पर कर रही है। भगवान परशुराम जयंती पर अवकाश नहीं किया जाता है देश के 70 प्रतिशत जनरल वर्ग के छात्र लोन ले कर पढ़ते हैं लेकिन सरकार को इनकी चिंता नहीं है वो कारणों रुपए खर्च कर के आरक्षित वर्ग के लोग को विदेश भ्रमण करवाने में बिजी हो यूजीसी हो या जातीय आरक्षण एससीएसटी एक्ट यह खत्म होना चाहिए।
सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग: हमीरपुर नंबर-1, बरेली दूसरे और रामपुर तीसरे स्थान पर

* मार्च रिपोर्ट में टॉप-5 में मैनपुरी और हरदोई भी शामिल, 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की होती है निगरानी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार तेज होती नजर आ रही है। सीएम डैशबोर्ड की मार्च माह की रिपोर्ट में हमीरपुर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि बरेली दूसरे और रामपुर तीसरे स्थान पर रहा है।
सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से प्रदेश में जनसुनवाई, जनकल्याणकारी योजनाओं, राजस्व कार्यों और कानून-व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाती है। इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और गति आई है।
* हर माह होती है व्यापक समीक्षा
सीएम डैशबोर्ड के जरिए हर महीने प्रदेश के 49 विभागों के 110 कार्यक्रमों की समीक्षा की जाती है। इन कार्यक्रमों का मूल्यांकन विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाता है, जिसके बाद जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। मार्च की रिपोर्ट में हमीरपुर ने 10 में से 9.55 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया, जबकि बरेली ने 9.54 और रामपुर ने 9.51 अंक के साथ क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान पाया।
* टॉप-5 में मैनपुरी और हरदोई
रिपोर्ट के अनुसार मैनपुरी चौथे और हरदोई पांचवें स्थान पर रहे। इसके अलावा टॉप-10 जिलों में शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, जालौन, सोनभद्र और कौशांबी ने भी जगह बनाई है।
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के मुताबिक यह रैंकिंग प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों की गुणवत्ता और राजस्व प्रबंधन के आधार पर तय की जाती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिले में विकास कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम रैंकिंग में देखने को मिल रहा है।
सीएम डैशबोर्ड की सख्त निगरानी से प्रदेश में विकास कार्यों में तेजी आई है और “उत्तम प्रदेश” के लक्ष्य की ओर उत्तर प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है।
IPL मैच को लेकर लखनऊ में ट्रैफिक अलर्ट : इकाना स्टेडियम के आसपास बड़ा डायवर्जन, इन रास्तों पर रहें सतर्क
लखनऊ। राजधानी में 12 अप्रैल को Indian Premier League के तहत होने वाले मैच को देखते हुए इकाना स्टेडियम के आसपास व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। यह व्यवस्था दोपहर 12 बजे से मैच समाप्ति तक प्रभावी रहेगी, जबकि कुछ प्रमुख मार्गों पर सुबह 9 बजे से ही दबाव बढ़ने की संभावना जताई गई है। यातायात पुलिस के अनुसार, शहर में कानून-व्यवस्था और सुगम यातायात बनाए रखने के लिए शहीद पथ, सुल्तानपुर रोड, रायबरेली रोड, कानपुर रोड और अयोध्या रोड से जुड़े प्रमुख चौराहों व मार्गों पर बड़े वाहन, बसों और सामान्य यातायात पर प्रतिबंध/डायवर्जन लागू किया गया है।

कहां-कहां रहेगा डायवर्जन

कमता तिराहा (अयोध्या रोड) से शहीद पथ की ओर जाने वाला यातायात डायवर्ट रहेगा। वाहन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, 1090 चौराहा, तेलीबाग, किसान पथ होते हुए आगे बढ़ेंगे।
शहीद पथ (कानपुर रोड तिराहा) से सुल्तानपुर, रायबरेली और अयोध्या रोड की ओर जाने वाले वाहन बाराबिरवा, बंगला बाजार, 1090 चौराहा या किसान पथ से जाएंगे।
गोसाईगंज व सुल्तानपुर रोड से आने वाले भारी वाहन अहिमामऊ की ओर नहीं जा सकेंगे, इन्हें वृंदावन योजना या किसान पथ की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
उतरेठिया अंडरपास (रायबरेली रोड) से शहीद पथ की ओर बड़े वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
हुसड़िया अंडरपास व लालबत्ती चौराहा से अहिमामऊ और सुल्तानपुर रोड की ओर यातायात सीमित रहेगा।
अहिमामऊ चौराहा से प्लासियो मॉल की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा।

शहीद पथ पर विशेष सतर्कता

सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक शहीद पथ पर भारी ट्रैफिक दबाव रहने की संभावना है। ऐसे में कानपुर, एक्सप्रेस-वे, अमौसी या बाराबिरवा की ओर जाने वाले वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे इस मार्ग से बचें और वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें।

स्टेडियम जाने वाले दर्शकों के लिए व्यवस्था

इकाना स्टेडियम की पार्किंग में जाने वाले बड़े वाहन/बसों को अहिमामऊ चौराहा होकर प्रवेश दिया जाएगा।
दर्शक ट्रैफिक से बचने के लिए अर्जुनगंज और कैंट मार्ग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

आपातकालीन सेवाओं को छूट

एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, स्कूल वाहन और शव वाहन को विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंधित मार्गों से भी जाने की अनुमति रहेगी।

जरूरी हेल्पलाइन

किसी भी ट्रैफिक समस्या या आपात स्थिति में नागरिक ट्रैफिक कंट्रोल नंबर: 9454405155 पर संपर्क कर सकते हैं।लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे निर्धारित डायवर्जन का पालन करें, अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाले मार्गों से बचें और पुलिस का सहयोग करें, ताकि सभी के लिए सुरक्षित और सुचारु यातायात सुनिश्चित किया जा सके।
कृषि विज्ञान कांग्रेस का समापन, 30 विशेषज्ञों को सम्मान; डिजिटल खेती और नवाचार पर जोर
* विकसित भारत के लक्ष्य के साथ कृषि के भविष्य पर मंथन, राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने किया सम्मानित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस का राष्ट्रीय गन्ना संस्थान में भव्य समापन हुआ। "विकसित कृषि, विकसित भारत थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल कृषि और टिकाऊ विकास पर व्यापक चर्चा की गई।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि उद्यान एवं कृषि विपणन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 30 विशेषज्ञों एवं संस्थानों को सम्मानित किया। इनमें 14 एकेडमी अवार्डी, 9 फेलो अवार्डी और 7 ऑनरेरी फेलो शामिल रहे।
कार्यक्रम में भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (झांसी), रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (झांसी) और असारा बायोटेक प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड (बाराबंकी) को उत्कृष्ट कृषि विज्ञान संस्थान/विश्वविद्यालय के रूप में सम्मानित किया गया।
कांग्रेस के अंतिम दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में आजीविका सुरक्षा, डेयरी, पशुपालन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और डिजिटल कृषि जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वैज्ञानिकों ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों जैसे पशुधन की कम उत्पादकता, चारे की कमी, एंटीबायोटिक प्रतिरोध और घटते मृदा कार्बन पर चिंता व्यक्त की।
विशेषज्ञों ने टिकाऊ कृषि के लिए जैविक खाद, फसल चक्र और प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में देशभर के वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे कृषि के दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
मथुरा में दर्दनाक नाव हादसा, 10 श्रद्धालुओं की मौत, बचाव अभियान जारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में शुक्रवार दोपहर एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। केसी घाट पर श्रद्धालुओं से भरी एक नाव पंटून पुल से टकराकर यमुना नदी में पलट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाव में सवार करीब 25 श्रद्धालु नदी में डूब गए। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। गोताखोरों की टीम गहरे पानी में उतरकर लापता लोगों की तलाश में जुटी रही। बचाव अभियान के दौरान 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिनमें से एक श्रद्धालु को गंभीर हालत में संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।

इस हादसे में अब तक 10 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और राहत टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा होने के कारण बचाव कार्य में कुछ दिक्कतें भी आईं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौके पर भीड़ न लगाएं और बचाव दल का सहयोग करें, ताकि अभियान तेजी से चल सके।

जांच में यह भी सामने आया है कि लगभग 150 लोगों का एक दल लुधियाना (पंजाब) और मुक्तेश्वर से वृंदावन आया हुआ था, और नाव में सवार श्रद्धालु उसी समूह का हिस्सा थे। बताया जा रहा है कि नाव एक निजी नाविक द्वारा संचालित की जा रही थी। हादसे के बाद नाव भी नदी में डूब गई है, जिसकी तलाश जारी है।

प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि नाव में क्षमता से अधिक लोग तो सवार नहीं थे और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। फिलहाल, क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।