नीतीश कुमार आज लेंगे राज्यसभा सदस्य की शपथ, 2 दशक बाद दिल्ली की सियासत में वापसी

#nitishkumartotakerajyasabhamemberoathin_delhi

लगभग दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तैयारी में हैं। नीतीश कुमार आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। नीतीश कुमार को राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन के कक्ष में उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही नीतीश कुमार के सियासी सफर का एक नया अध्याय शुरू हो जाएगा।

चारों सदनों के सदस्य होने का बनेगा अनोखा रिकॉर्ड

नीतीश कुमार के नाम अब एक दुर्लभ संसदीय रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है। वह विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के बाद अब राज्यसभा के सदस्य बनकर भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों का हिस्सा बनने वाले नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो जाएंगे।

बिहार में जल्द होगा नेतृत्व परिवर्तन

इससे पहले गुरूवार को सीएम नीतीश कुमार ने नई दिल्ली पहुंचते ही साफ कर दिया कि बिहार में अब नए मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि 'मैंने बिहार में बहुत काम किया है। अब मुझे लगा कि मुझे यहां रहना चाहिए, और मैं यही कर रहा हूं।' नीतीश कुमार ने आगे कहा, 'मैं वहां अपने पद से हट जाऊंगा और यहां काम करूंगा। मैं तीन या चार दिनों में इस्तीफा दे दूंगा। नए लोगों को मुख्यमंत्री और मंत्री बनाया जाएगा।'

30 मार्च को विधान परिषद से दिया इस्तीफा

नीतीश कुमार राज्य विधान परिषद की सदस्यता से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। राज्यसभा के लिए निर्वाचन के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। जनता दल (यूनाइटेड) सुप्रीमो 16 मार्च को संसद के ऊपरी सदन के लिए निर्वाचित हुए थे।

पाक रक्षा मंत्री पर भड़के नेतन्याहू, ऐसा लगाई लताड़ की डिलीट किया पोस्ट, इजरायल को बताया था 'कैंसर'

#israelrespondspakistandefenceministerkhawajaasif_remarks

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तान और इजरायल भिड़ते दिख रहे है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया जिसके बाद पूरा मामल और गर्म हो गया है।

लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ और ‘कैंसर’ बताया। साथ ही लेबनान में हो रही सैन्य कार्रवाई को ‘नरसंहार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी चल रही है, उसी समय लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है। आसिफ ने आरोप लगाया कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में खूनखराबा जारी है।

ख्वाजा आसिफ के जहरीले बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को अभिशाप बताते हुए कहा, "जिन लोगों ने कैंसर जैसा देश बनाया है, वे उम्मीद करते हैं कि वो नर्क की आग में जलें।' हालांकि, बाद में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने इजरायल के खिलाफ दिए गए कैंसर वाले बयान समेत उन्हें नर्क में जला देने वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

ख्वाजा आसिफ के बयान पर क्या बोले नेतन्याहू ?

इस बयान के बाद इजरायल ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ है और किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता, खासकर उस देश के लिए जो खुद को शांति का मध्यस्थ बता रहा है। इसमें कहा गया कि इजरायल के विनाश की मांग घोर आपत्तिजनक है।

इजरायली विदेश मंत्री का पलटवार

इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, शांति की मध्यस्थता का दावा करने वाली सरकार की ओर से इन खुले तौर पर यहूदी-विरोधी और भड़काऊ आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है। यहूदी राष्ट्र को कैंसर कहना असल में उसे खत्म करने का ही आह्वान करना है। उन्होंने आगे कहा, इजरायल उन आतंकवादियों से अपनी रक्षा करेगा जिन्होंने उसे तबाह करने की कसम खाई है।

दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार, कल राज्यसभा सदस्‍य के तौर पर लेंगे शपथ

#cmnitishvisitsdelhiwilltakeoathinrajya_sabha

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द‍िल्‍ली पहुंच चके हैं। नीतीश कल यानी 10 अप्रैल को राज्‍यसभा सदस्‍य के तौर पर शपथ लेंगे। राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार के पटना लौटने पर बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत हैं। जानकारी के अनुसार पटना वापस आकर वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होगी।

आज जेडीयू के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने से पहले जनता दल यूनाईटेड के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक करेंगे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पहले से दिल्ली में मौजूद हैं। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी नेता मौजूद रहेंगे। इस बैठक में सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद जदयू की भूमिका, मंत्री और डिप्टी सीएम के पद पर विचार विमर्श किया जाएगा। निशांत कुमार की क्या भूमिका होगी? इस पर भी चर्चा की जाएगी।

पीएम मोदी और अमित शाह से करेंगे मुलाकात

शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलकात करेंगे। बिहार में नई एनडीए सरकार के प्रारूप को लेकर सीएम नीतीश कुमार गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर सकते हैं। नई सरकार का मंत्रिमंडल कैसा रहेगा? कौन रिपीट होंगे? किस नए चेहरे को मौका दिया जाएगा? इस पर सीएम नीतीश कुमार अपनी राय रखेंगे।

बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। बिहार में नई सरकार के गठन के लिए कवायद तेज है लगातार बिहार में सर्गर्मिया तेज है। आज जहां नीतीश कुमार दिल्ली के लिए रवाना हुए राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। वहीं भाजपा के नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी दिल्ली रवाना हुए। कल भाजपा की बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री शामिल होंगे। जिस तरह से नई सरकार के गठन की कवायद् है उसको लेकर बैठकों का दौर लगातार जारी है। 48 से 72 घंटे के अंदर नए मुख्यमंत्री के नाम से पर्दा हटने की संभावना जताई जा रही है। सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है।

अगले सीएम के नामों की चर्चा

बिहार के सियासी गलियारों में अगले सीएम के नामों की चर्चा हो रही। सबसे आगे जिन नामों को माना जा रहा है,उनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख है। सम्राट चौधरी संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है। वे पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी उनका नाम मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक तौर पर उन्हें आक्रामक और फैसले लेने वाला नेता माना जाता है। दूसरे नंबर पर, यानी मजबूत दावेदार के रूप में विजय कुमार सिन्हा का नाम लगातार चर्चा में है। विजय सिन्हा को संघ के करीब और अनुशासित नेता के रूप में देखा जाता है। वे पहले विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक संतुलित नेता के रूप में देखा जाता है, जो संगठन और सरकार के बीच तालमेल बनाए रख सकते हैं।

बंगाल के लिए पीएम मोदी की 6 गारंटी, बताया चुनाव जीते तो क्या-क्या करेंगे?

#westbengalelectionpmmodirallysix_guarantees 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल में चुनावी हुंकार भरी। वह आज बंगाल में एक के बाद एक ताबड़तोड़ 3 रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने सबसे पहले पूर्वी मेदिनीपुर के हल्दिया में फिर दूसरी रैली आसनसोल की और अब तीसरी रैली बीरभूम में हुई।

6 बड़ी गारंटी का ऐलान

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल तेज हो चुका है और सभी दल अपनी रणनीति मजबूत कर रहे हैं। राज्य में सभी पार्टियों के बड़े नेताओं की जन सभाएं और रैलियां आयोजित की जा रही है। इसी कड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाएं को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने बंगाल के लिए छह प्रमुख गारंटियों की घोषणा की।

बंगाल में पीएम मोदी की 6 गारंटी

1- भय की जगह भरोसा: मोदी की पहली गारंटी टीएमसी ने भय फैलाया। सरकार और सरकारी सिस्टम को भय का माध्यम बनाया। आज बात बातबात पर लोगों को कोर्ट से न्याय मांगना पड़ता है। बीजेपी सरकार भय की जगह भरोसा कायम करेगी। कानून पर भरोसा लौटाएगी।

2- जवाबदेह प्रशासन: मोदी की दूसरी गारंटी बीजेपी सरकार में सरकारी सिस्टम जनता की सेवा के लिए जवाबदेह होगा अकाउंटेबल होगा।

3- पुरानी फाइलें खुलेंगी: मोदी की तीसरी गारंटी हर घोटाले हर करप्शन और बेटियों के साथ हुए हर अन्याय हर रैप केस की फाइलें खुलेगी।

4-भ्रष्टाचारी जाएंगे जेल: मोदी की चौथी गारंटी टीएमसी के राज में जिसने भी करप्शन किया है उसकी जगह जेल में होगी। मंत्री हो या संत्री कानून सबका हिसाब करेगा। टीएमसी का कोई गुंडा अब कानून से बचने वाला नहीं है। मोदी टीएमसी को जनता जनार्दन का पैसा नहीं खाने देगा। पैसा नहीं खाने देगा।

5- शरणार्थी को हक: मोदी की पांचवी गारंटी जो शरणार्थी हैं उन्हें संविधान के तहत हर हक मिलेगा लेकिन जो घुसपैठिए हैं उनको खदेड़ा जाएगा। उनको भारत में नहीं रहने दिया जाएगा।

6- 7वां वेतन आयोग: मोदी की छठी गारंटी बंगाल के सभी सरकारी कर्मचारियों, सभी शिक्षकों और अन्य सेवाओं में जुटे साथियों के लिए आपको इतने वर्षों तक यह निर्मम सरकार ने भयभीत करके रखा है। मोदी आपके साथ खड़ा है। बीजेपी आपके साथ खड़ी है। आप कमल छाप पर बटन दबाइए। बीजेपी सरकार बनते ही यहां सेवंथ पे कमीशन लागू करवाएंगे। यह हमारी गारंटी है।

सरकार पर राज्य के विकास में बाधा डालने का आरोप

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह चुनाव विकसित बंगाल की मजबूत नींव रखने का चुनाव है और इसका पहला तथा सबसे अहम कदम इस निर्दयी सरकार को सत्ता से बाहर करना होगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर राज्य के विकास में बाधा डालने का आरोप लगाया।

पीएम मोदी ने किया बदलाव का आह्वान

पीएम मोदी ने देश की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि जहां देश के कई राज्य विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, वहीं टीएमसी की सरकार बंगाल को पीछे धकेल रही है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में मतदाताओं से बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य को विकास के रास्ते पर लाने के लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।

ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

#raisquestionsonpakistanroleasmediator-inusiranwar

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।

देश के दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान, केरल-असम और पुदुचेरी में वोटिंग जारी

#keralaassampuducherryvidhansabhachunav_voting

आज देश के दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है। आज असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव है। असम की 126, केरल की 140 और पुदुचेरी की 30 सीटों पर उम्मीदवारों अपनी किस्मत आज ईवीएम में कैद हो जाएगी।

असम में कुल 2.5 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.25 करोड़ पुरुष, 1.25 करोड़ महिलाएं और 343 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, केरल में 140 सीटों के लिए 883 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में कुल 2.71 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 थर्ड जेंडर वोटर्स शामिल हैं। पुदुचेरी में 30 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जिनमें 5 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। पुदुचेरी में कुल 9.50 लाख मतदाताओं में करीब 4.46 लाख पुरुष, 5.03 लाख महिलाएं और 139 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

पीएम मोदी ने असम के लोगों से की खास अपील

पीएम मोदी ने असम के लोगों से भी खास अपील की है। आज असम की 126 विधानसभा पर वोट डाले जा रहे हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, '2026 के असम विधानसभा चुनावों के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू होने के संदर्भ में, मैंने असम की जनता से बड़ी संख्या में बाहर आकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है। मुझे उम्मीद है कि राज्य के युवा, पुरुष और महिला मतदाता पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लेंगे और इस चुनाव को लोकतंत्र तथा नागरिक कर्तव्य के एक उत्सव में बदल देंगे।'

पीएम मोदी की केरल के लोगों से खास अपील

केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। इस बीच पीएम मोदी ने केरल के लोगों से खास अपील की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'मैं केरल के लोगों से 2026 के विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में मतदान करने का आह्वान करता हूं। रिकॉर्ड भागीदारी केरल की लोकतांत्रिक भावना को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। मैं विशेष रूप से राज्य के युवाओं और महिलाओं से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं और बड़ी संख्या में मतदान करें।

पुडुचेरी के मतदाताओं से लिए पीएम मोदी का पोस्ट

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों पर वोटिंग हो रही है। पीएम मोदी ने पुडुचेरी के लोगों से खास अपील की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'जैसे ही पुडुचेरी विधानसभा चुनाव शुरू हो रहे हैं, मैं हर मतदाता से आग्रह करता हूं कि वे बाहर निकलें और रिकॉर्ड संख्या में मतदान में हिस्सा लें। मैं विशेष रूप से हमारे युवाओं और महिला मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत करें। पुडुचेरी के भविष्य को संवारने में हर एक वोट मायने रखता है।'

बांग्लादेश के विदेश मंत्री भारत दौरे पर, क्या दूर होगी रिश्तों में आई तल्खियां ?

#bangladeshforeignministerindiavisit

शेख हसीना की सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद भारत बांग्लादेश संबंधों में तल्खियां देखने को मिली थी। दोनों देशों के बीच बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच अब रिश्तों को नए सिरे से संतुलित करने की दिशा में कोशिश होती दिखने लगी है। इसी क्रम में बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर खलीलुर रहमान 7 से 9 अप्रैल तक भारत के दौरे पर हैं।

नए सिरे से रिश्तों को संतुलित करने की कोशिश

रहमान की अगुवाई में हो रहा ये दौरा बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी की सरकार आने के बाद पहला हाई प्रोफाइल दौरा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाए जाने के बाद ढाका पर काबिज रहे युनूस प्रशासन के भारत के साथ बहुत अच्छे संबंध नहीं रहे हैं। रहमान के दौरे को दिल्ली और ढाका दोनों की ओर से नए सिरे से राजनीतिक इंगेजमेंट करने की दिशा में एक कड़ी की तरह देखा जा रहा है।

एस जयशंकर के साथ एक ही विमान से मॉरीशस जाएंगे

रहमान 7 अप्रैल को दिल्ली आ चुके हैं। बीती रात उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के साथ रात्रिभोज किया। इस दौरान दोनों में देशों के संबंधों को सुधारने पर चर्चा हुई। आज रहमान दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री जयशंकर के साथ मुलाकात करेंगे। इसके बाद उनका वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी के साथ भी मुलाकात का भी कार्यक्रम है। 9 अप्रैल को वे जयशंकर के साथ एक ही विमान से मॉरीशस जाएंगे।

किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

भारत ने अभी तक इस दौरे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि बातचीत में गंगा जल-बंटवारे समझौते के नवीनीकरण, संपर्क परियोजनाओं की प्रगति, भारत से ऊर्जा आपूर्ति और द्विपक्षीय व्यापार सुविधाओं की बहाली जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

उठ सकता है वीजा और सीमा का मुद्दा

भारत-बांग्लादेश सीमा पर होने वाली मौतों का मामला भी बातचीत में संवेदनशील मुद्दा रहेगा। बांग्लादेश पहले भी तस्करी रोधी अभियानों के दौरान सीमा पर नागरिकों की मौतों पर चिंता जताता रहा है। बांग्लादेश छात्रों, मरीजों और व्यापारियों के लिए वीजा सुविधाओं को फिर से खोलने और विस्तार देने की मांग उठा सकता है। बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2026-27 सत्र के लिए रहमान के नामांकन पर भारत का समर्थन मांग सकता हैं।

क्या शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठेगा?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना तख्तापलट के बाद पिछले साल अगस्त से ही भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश की नई सरकार कई बार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है। हालांकि, अब तक भारत ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि वो कानूनी प्रक्रिया के तहत हसीना के प्रत्यर्पण का समर्थन करती है। हालांकि, माना जा रहा है कि ये मुद्दा बड़ी अड़चन नहीं होगा।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव, क्या अमेरिका लिख रहा शहबाज शरीफ की X पोस्ट क्या?

#whyispmshahbazbeingtrolledaftertheiran_war

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भारी किरकिरी हो रही है। अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच खुद को चौधरी दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पोल खुल गई है। शहबाज शरीफ के मात्र एक पोस्ट से ईरान जंग के सीजफायर पर पाकिस्तान के रोल पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे है कि क्या पाकिस्तान को अमेरिकी की तरफ से कंट्रोल किया जा रहा है?

कैसी है पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका?

दरअसल, पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक सोशल मीडिया पोस्ट की। शहबाज शरीफ ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई की समयसीमा बढ़ाने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि कूटनीति को आगे बढ़ने का मौका देने के लिए समय सीमा को दो सप्ताह तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का भी आग्रह किया था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

सारा विवाद तब शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया यूजर्स ने शहबाज शरीफ के पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर ध्यान दिया। यूजर्स का ध्यान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर चला गया, जिससे पता लगता है कि उनकी इस पोस्ट को किसी दूसरे ने तैयार किया है। स्क्रीनशॉट के अनुसार, उस पोस्ट के शुरुआती संस्करण में सबसे ऊपर लिखा था: ‘Draft – Pakistan’s PM Message on X यानी ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश।’

सिर्फ टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा संदेश

ऐसा होना यह केवल एक छोटी सी टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा इशारा? किसी देश के प्रधानमंत्री के ऑफिशियल कम्युनिकेशन में ड्राफ्ट शब्द लिखा होना बड़े सवाल पैदा करता है, लेकिन क्या ये पाकिस्तान के अधिकारियों की लापरवाही थी या फिर किसी बड़ी बात का संकेत। सवाल उठ रहें है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये ड्राफ्ट पाकिस्तान को भेजा था। या फिर किसी और ने भेजा था।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव?

आलोचकों का कहना है कि यह किसी लीडर के अपनी आवाज में बोलने जैसा कम और उसके लिए तैयार किए गए टेम्पलेट जैसा अधिक लगता है। इस घटना ने जियोपॉलिटिकल सर्कल में एक लंबे समय से चली आ रही सोच को और बढ़ा दिया है कि पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक और डिप्लोमैटिक फैसले अक्सर बाहरी ताकतों से प्रभावित होते हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का निधन, देश ने खोई वरिष्ठ कांग्रेस नेता

नई दिल्ली/लखनऊ। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। वे लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहीं और अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से सम्मानित की जाती थीं।
मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और कांग्रेस पार्टी की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती थीं। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहीं।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ग्रामीण विकास, परिवहन और शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उनके प्रशासनिक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया।
मोहसिना किदवई का सहारनपुर से भी पारिवारिक संबंध रहा है। उनकी पौत्री का विवाह पूर्व सांसद मंसूर अली खान के पुत्र साद अली खान से हुआ है, जिससे उनका परिवार इस क्षेत्र से भी जुड़ा रहा।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए इसे देश की अपूरणीय क्षति बताया है।
पाकिस्तान बना मुखौटा, चीन सीजफायर का सूत्रधार, ईरान को बातचीत के लिए किया तैयार

#middleeastiranusceasefirenotpakistanbutchinaplaysvital_role

अमेरिका और ईरान के बीच 5 हफ्तों से ज्यादा तक चली जंग के बाद बुधवार 8 अप्रैल की सुबह राहत भरी खबर आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमले रोकने की घोषणा की। ट्रंप ने इसे दो तरफा युद्धविराम बताया और कहा कि यह इस शर्त पर होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलेगी।

चीन ने पर्दे के पीछे रहकर किया काम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर के पीछे चीन की अहम भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे रहकर ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई।

आखिरी समय में चीन के दखल आई काम

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने युद्धविराम में अहम भूमिका निभाई है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में दो हफ्ते के सीजफायर के फैसले के पीछे पाकिस्तान के अलावा चीन की बड़ी भूमिका सामने आई है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के जोरदार प्रयास के साथ-साथ चीन ने आखिरी मिनट में दखल देकर ईरान को समझाया और तनाव कम किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ने ईरान को साफ चेतावनी दी कि अगर ट्रंप अपनी धमकी के मुताबिक ईरान के एनर्जी साइट्स और बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

ट्रंप बोले- चीन ने ईरान को किया तैयार

सीजफायर को लेकर ट्रंप ने कहा है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एक टेलीफोनिक बातचीत में उनसे पूछा गया कि क्या चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए प्रेरित किया। इस पर ट्रंप ने कहा, “हां, मैंने सुना है”। हालांकि, इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

संघर्ष के बाद से ही चीन सीजफायर के लिए था प्रयासरत

वहीं, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही चीन सीजफायर और युद्ध खत्म कराने के लिए काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन हर उस प्रयास का स्वागत करता है जो शांति की दिशा में हो और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए मतभेद खत्म करने चाहिए। चीन ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष इस मौके का फायदा उठाकर जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करेंगे। गौरतलब है कि चीन इससे पहले 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता कराने में भी अहम भूमिका निभा चुका है।