लखनऊ: सड़क किनारे अज्ञात महिला का शव मिलने से सनसनी
लखनऊ । राजधानी के काकोरी  थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब सड़क किनारे एक अज्ञात महिला का शव मिलने की सूचना मिली।
पुलिस के अनुसार आज सुबह घुरघुरी तालाब चौकी क्षेत्र के इब्राहिम गंज मदारपुर इलाके में सड़क किनारे एक महिला का शव पड़े होने की जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
प्राथमिक जांच में मृतका की उम्र करीब 30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है। महिला के सिर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पहचान कराने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और वैधानिक कार्रवाई जारी है।
लखनऊ समेत शहरों में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए नई एसओपी लागू, अब शहर के बड़े स्कूलों में एक साथ नहीं होगी छुट्टी
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इस व्यवस्था के तहत शहरों में यातायात को सुचारु बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय थानों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
पुलिस विभाग के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य प्रमुख मार्गों और चौराहों पर लगने वाले जाम को कम करना और आम लोगों की यात्रा को आसान बनाना है। इसके लिए 20 शहरों के 172 मार्गों को चिन्हित किया गया है, जहां विशेष रूप से ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत व्यस्त चौराहों और तिराहों के आसपास 100 मीटर के दायरे को खाली रखने का निर्देश दिया गया है। इस क्षेत्र में वाहन खड़े करने या सवारियों को चढ़ाने-उतारने पर रोक रहेगी। इसके अलावा, अधिक भीड़ वाले स्थानों पर पीक समय के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। नो एंट्री का उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि गलत दिशा में वाहन चलाने और अवैध पार्किंग पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
साथ ही, सड़कों पर अतिक्रमण हटाने, आवश्यकतानुसार मार्गों को चौड़ा करने और कुछ मुख्य मार्गों को ई-रिक्शा मुक्त क्षेत्र घोषित करने जैसे कदम भी प्रस्तावित किए गए हैं।
ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए स्कूलों और दफ्तरों के समय में बदलाव का सुझाव भी दिया गया है। इसके तहत अलग-अलग संस्थानों के खुलने और बंद होने के समय में 15-15 मिनट का अंतर रखने की सिफारिश की गई है।
इस योजना के तहत किए गए सर्वे में यह सामने आया कि कई प्रमुख मार्गों पर पीक समय में यात्रा का समय सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है। बख्शी का तालाब से पॉलिटेक्निक मार्ग और अवध चौराहा से दुबग्गा मार्ग ऐसे ही प्रमुख उदाहरण हैं, जहां जाम की समस्या ज्यादा देखी जाती है।
पुलिस विभाग का कहना है कि इन उपायों को लागू करने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है। फिलहाल संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा, सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया गया है। विजिलेंस जांच में उनके पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है, जो उनकी ज्ञात आय के मुकाबले कई गुना ज्यादा बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मूल रूप से चंदौली जनपद के निवासी केशव लाल वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-34 में रह रहे हैं। वर्ष 2017 में जब उनकी तैनाती कानपुर में थी, उसी दौरान 19 अप्रैल को आयकर विभाग ने उनके आवास पर छापा मारा था। इस छापेमारी में करीब 10 करोड़ रुपये नकद और लगभग 3 करोड़ रुपये के आभूषण बरामद किए गए थे।
छापे के दौरान अधिकारियों को घर के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर रखी गई नकदी मिली थी। गद्दों, पूजा कक्ष, अलमारियों के अलावा बाथरूम के बंद फ्लश और बेडरूम से भी नोटों की गड्डियां बरामद हुई थीं। पूछताछ के दौरान वह इस संपत्ति का संतोषजनक विवरण नहीं दे सके थे।
इस कार्रवाई के बाद मई 2017 में उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी और पूरे मामले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई थी। विस्तृत जांच के दौरान यह सामने आया कि उनके पास आय से कई गुना अधिक संपत्ति है, जिसकी कुल कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अनुमति मिलने पर अब विजिलेंस के कानपुर सेक्टर में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि केशव लाल के पास लखनऊ में दो संपत्तियां हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में एक-एक संपत्ति मौजूद है, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई जा रही है।
फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और विजिलेंस विभाग द्वारा संपत्तियों के स्रोत की गहन जांच की जा रही है।
पश्चिम यूपी में आतंकी मॉड्यूल का जाल, शामली के 6 युवक हिरासत में
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल से जुड़े नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम यूपी के कई युवक इस मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं।
एटीएस की पूछताछ में शामली के छह युवकों के नाम सामने आने के बाद सभी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि ये युवक सोशल मीडिया के माध्यम से मॉड्यूल और पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे।
दरअसल, एटीएस ने हाल ही में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर धमाका करने की साजिश रच रहे चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें मेरठ के साकिब और अरबाब, जबकि गौतमबुद्धनगर के लोकेश और विकास शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन आरोपियों से पूछताछ में पश्चिम यूपी के एक दर्जन से अधिक युवकों के इस मॉड्यूल से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इसके बाद एटीएस ने शामली के छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच तेज कर दी है।
फिलहाल एटीएस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। यदि पूछताछ और साक्ष्यों की पुष्टि होती है, तो संबंधित युवकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ: मारपीट कर रिवाल्वर और मोबाइल लूटने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ । राजधानी के थाना मोहनलालगंज क्षेत्र में मारपीट कर रिवाल्वर और मोबाइल लूटने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई रिवाल्वर, कारतूस और मोबाइल फोन भी बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार, 6 अप्रैल 2026 की रात होटल में आयोजित एक कार्यक्रम से लौटते समय कार पार्किंग को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित और उसके भाई को रोककर डंडों से मारपीट की और उनका लाइसेंसी रिवाल्वर, मोबाइल फोन व सोने की चेन छीन ली।
मामले में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की और करीब 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने हुलासखेड़ा क्षेत्र के पास से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में रवि सिंह उर्फ विक्की सिंह, आर्यन सिंह और विशेष त्रिवेदी उर्फ राज पंडित शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से .32 बोर रिवाल्वर, 4 जिंदा कारतूस और सैमसंग मोबाइल फोन बरामद किया है।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
यूपी में डीजीपी का सख्त एक्शन: 5 थाना प्रभारी लाइन हाजिर, 2 डिप्टी एसपी पर जांच के आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कानून-व्यवस्था और बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को लेकर बड़ा एक्शन लिया है। समीक्षा बैठक के दौरान डीजीपी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात 5 थाना प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए, जबकि 2 डिप्टी एसपी (सीओ ट्रैफिक) के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

* वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक
पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर, एडीजी जोन, आईजी/डीआईजी रेंज और जिलों के एसएसपी/एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

* दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी बनी कार्रवाई की वजह
जिन थाना क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में अधिक वृद्धि दर्ज की गई, वहां के थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की गई है।

इन थाना प्रभारियों पर गिरी गाज:

* वाराणसी कमिश्नरेट–चोलापुर थाना प्रभारी दीपक कुमार

* गोरखपुर–कैम्पियरगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह
कन्नौज–छिबरामऊ थाना प्रभारी विष्णुकांत तिवारी
* बाराबंकी–रामसनेहीघाट थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद शुक्ला
* जौनपुर–सिकरारा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह

इन अधिकारियों पर जांच के आदेश:
* बाराबंकी के सीओ ट्रैफिक आलोक कुमार पाठक
* जौनपुर के सीओ ट्रैफिक गिरेन्द्र कुमार सिंह
डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
गोरखपुर, कन्नौज और कानपुर डेयरी प्लांट का संचालन निर्धारित समय सीमा में शुरू किया जाए: धर्मपाल सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जनपद गोरखपुर, कन्नौज एवं कानपुर में स्थापित किए जा रहे दुग्ध संयंत्रों का संचालन निर्धारित समयसीमा में हर हाल में प्रारंभ किया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि कन्नौज डेयरी प्लांट का संचालन 30 अप्रैल 2026 तक, गोरखपुर डेयरी प्लांट का 05 मई तक तथा कानपुर डेयरी प्लांट का संचालन 20 मई 2026 तक प्रत्येक दशा में प्रारंभ कर दिया जाए। प्रदेश में प्लांट संचालन के लिए अमोनिया गैस अथवा अन्य आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं है, इसलिए सभी संयंत्रों का संचालन पूरी क्षमता के साथ सुचारु रूप से सुनिश्चित किया जाए। अतः किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में एनडीडीबी द्वारा स्थापित किए जा रहे कानपुर, गोरखपुर और कन्नौज दुग्ध संयंत्रों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को  सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इन दुग्ध संयंत्रों के शीघ्र संचालन से प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मंत्री ने दुग्ध विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराया जाए। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक एवं बेहतर प्रबंधन के माध्यम से उत्तर प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाया जाए।
बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, दुग्ध आयुक्त श्रीमती के. धनलक्ष्मी, डॉ. राम सागर, पीसीडीएफ के समन्वय राम चरण, संजय भारती सहित एनडीडीबी एवं दुग्ध विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही सरकार का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

लखनऊ/ मऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के मर्यादपुर में आयोजित निषाद राज जयंती कार्यक्रम में प्रतिभाग कर निषाद समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समाज के समग्र विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में मंत्री श्री शर्मा ने निषाद समाज की भूमिका और योगदान का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस के प्रसिद्ध केवट प्रसंग को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और निषादराज गुह्य की मित्रता भारतीय संस्कृति में सच्ची निष्ठा, भक्ति और आत्मीयता का अद्वितीय उदाहरण है। वनवास के कठिन समय में निषादराज द्वारा भगवान राम की सहायता, विशेष रूप से गंगा नदी पार कराने की घटना, यह दर्शाती है कि सच्चे संबंध जाति और वर्ग से ऊपर होते हैं। यह प्रसंग समाज को आपसी विश्वास, सहयोग और समानता का संदेश देता है।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आज के समय में इस प्रकार के प्रेरक प्रसंगों से सीख लेकर समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि सभी को समान अवसर और सम्मान मिल सके।उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने निषाद समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से अपने भविष्य को सशक्त बनाएं और देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर रुद्रपुर, देवरिया के विधायक जयप्रकाश निषाद भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में निषाद समाज की एकता, संघर्ष और प्रगति पर प्रकाश डालते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कृषि में वैल्यू एडिशन और तकनीक के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय : केशव प्रसाद मौर्य
* एमिटी विवि में डिप्टी सीएम ने किया अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) विषय पर
“पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी: क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एंड लैंडस्केप कंजर्वेशन” विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उप मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत करते हुए उन्हें अंगवस्त्र, पगड़ी (साफा) पहनाकर तथा एक पौधा सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने “Pathogens, Plant Health and Food Security” नामक पुस्तक का विमोचन किया तथा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने इस उत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, नवाचार और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और प्रभावी विपणन से जुड़ा एक व्यापक विषय है, जिस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश देश की सबसे उपजाऊ भूमि वाला प्रदेश है, जहां उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद फसलों के भंडारण की कमी, कोल्ड चेन की अपर्याप्त व्यवस्था तथा वैल्यू एडिशन के अभाव के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अधिक उत्पादन होने पर भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जो शोध और नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसी तकनीकों का विकास करें, जिससे प्राकृतिक आपदाओं जैसे वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि अब समय क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर ध्यान देने का है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताते हुए श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश में चाहे सड़क मार्ग हो, चाहे रेल मार्ग या फिर हवाई मार्ग, इन सबके निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में गरीब, किसान, युवा एवं मातृशक्ति के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार का लक्ष्य उन्हें “लखपति दीदी” से आगे “करोड़पति दीदी” बनाना है।
श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP)’ योजना ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है तथा अब “एक जनपद, एक व्यंजन” के माध्यम से खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन बढ़ाकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार किसानों और किसानी के सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सम्मेलन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन (ए.एफ.ए.एफ), एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी (आईएसएमपीपी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वस्तरीय चर्चा और विचार-मंथन के लिए  प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं।
डॉ. अशोक के. चौहान ने वर्चुवल रूप से जुड़ते हुये मुख्य अतिथि सहित सभी का स्वागत करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से जुड़े होने के नाते वे कृषि और किसानों की परेशानियों से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में विश्वभर के वरिष्ठ और स्थापित वैज्ञानिकों को एक साथ देखकर विश्वास मजबूत होता है कि भारत न केवल कृषि में बल्कि हर क्षेत्र में सुपर पावर बनकर रहेगा और एमिटी विश्वविद्यालय इसमें अपना हर प्रकार का सहयोग देगा।
डॉ. असीम चौहान ने अपने वर्चुवल सम्बोधन मे ग्रामीण विकास में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, मूल्य संवर्धन और ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग के महत्व को रेखांकित  किया और कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और बदलते मौसम का सामना करने के उपायों पर  हमे और काम करना होगा।
प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने डॉ. अशोक के. चौहान एवं डॉ. असीम चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए जलवायु परिवर्तन, उभरती पादप बीमारियों तथा खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव जैसे वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सम्मेलन को ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग एवं नवाचार के लिए एक सशक्त मंच बताया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने जलवायु-लचीली कृषि प्राप्त करने में पादप स्वास्थ्य, रोगजनकों के प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सी. डी. मयी ने कृषि को किसान, रोगजनक कीटाणुओं और पर्यावरण के एक जटिल संबंध के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संतुलित एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई तथा रासायनिक उपयोग पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति सावधान किया।
डॉ. एस. एस. चाहल ने कृषि परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा करते हुए आक्रामक प्रजातियों, उभरते रोगजनकों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान में जीनोमिक्स एवं पारिस्थितिक दृष्टिकोण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. (डॉ.) पोखर रावल ने इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती सदस्यता और वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने इसकी शोध पत्रिका के वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध होने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. ललित महात्मा ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए शैक्षणिक जीवन में मूल्यों, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। उन्होंने बीजों के माध्यम से वायरस संचरण के प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से पारंपरिक धारणाओं की पुनर्समीक्षा करने का आह्वान किया।
डॉ. डी. आर. सिंह ने भारत की कृषि विविधता, विशेषकर बिहार के मखाना, आम और लीची जैसे उत्पादों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने खाद्य पर्याप्तता से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कीटनाशकों के अवशेष और माइकोटॉक्सिन प्रदूषण के खतरों को उजागर किया।
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक उत्कृष्टता का उत्सव भी मनाया गया, जिसमें विशिष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष उपलब्धि पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए गए।
प्रति कुलपति एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर प्रोफेसर (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, एमेरिटस प्रेसिडेंट आईएसएमपीपी डॉ. एस. एस. चाहल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ‘कॉटन मैन’ के नाम से विख्यात, प्रेसिडेंट साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, नई दिल्ली, डॉ. सी. डी. मयी, सचिव आईएसएमपीपी प्रो. (डॉ.) पोखर रावल, अध्यक्ष आईएसएमपीपी डॉ. ललित महात्मा, कुलपति बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी डॉ. डी. आर. सिंह और सम्मेलन की आयोजन सचिव एवं निदेशक, एएफएएफ, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ परिसर, प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने  सम्मेलन मे औपचारिकरुप सै भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडर प्रेसिडेंट, एमिटी एजुकेशन ग्रुप, रितनंद बलवेद एजुकेशन फाउंडेशन, डॉ. अशोक के. चौहान, और चेयरमैन एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ कैंपस डॉ. असीम चौहान ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
यूपी बिजली विभाग में बड़े स्तर पर रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी, पद खत्म होने और छंटनी का खतरा

लखनऊ। प्रदेश के बिजली विभाग में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। Uttar Pradesh Power Corporation Limited (यूपीपीसीएल) द्वारा विद्युत वितरण क्षेत्र के बाद अब ट्रांसमिशन सेक्टर में भी व्यापक रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी की जा रही है।

Vidyut Karmchari Sanyukt Sangharsh Samiti ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर पद समाप्त किए जाएंगे, जिससे नियमित और संविदा कर्मचारियों की छंटनी की आशंका है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ट्रांसमिशन क्षेत्र में रिस्ट्रक्चरिंग लागू करने के संकेत दिए हैं। पहले चरण में सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े करीब 150 पद समाप्त किए जाने की योजना है।

इसके अलावा कई मंडलों और खंडों के विलय की भी तैयारी है। प्रस्ताव के तहत गोरखपुर और प्रयागराज मंडल को मिलाकर वाराणसी मंडल, जबकि मुरादाबाद और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर मेरठ मंडल बनाए जाने की योजना है। अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के मर्जर प्रस्तावित हैं।

प्रस्तावित ढांचे में अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर के पदों में बड़ी कटौती की बात सामने आई है। कुल मिलाकर पहले चरण में ही डेढ़ सौ से अधिक पद समाप्त किए जा सकते हैं।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि आगे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और अन्य विभागों में भी बड़े स्तर पर पद समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों पर असर पड़ेगा।

कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि इस फैसले से बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, खासकर गर्मियों के दौरान जब मांग अधिक होती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

इसी क्रम में 12 अप्रैल को Lucknow में संघर्ष समिति की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।