यह संसार स्थायी नहीं है ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है: जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नारायण नंद तीर्थ महाराज
लालगंज, मीरजापुर। गंगहरा कला में चल रहे शिव शक्ति महायज्ञ के तीसरे दिन काशी धर्म पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नारायण नंद तीर्थ महाराज के प्रवचन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। उन्होंने कहा यह संसार स्थायी नहीं है ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है। ब्रह्म के दो स्वरूप होते हैं निर्गुण और सगुण।
उन्होंने कहा पार्थिव लिंग का निर्माण कर शिवलिंग का विधि विधान से पूजन करना चाहिए। नियमपूर्वक दर्शन और पूजन करने से शिवलोक की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया मिट्टी गोबर फूल और फल सहित विभिन्न पदार्थों से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया जा सकता है।प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा जो पढ़े हनुमान चालीसा होए सिद्ध साखी गौरीशा। इसे कोई भी स्त्री या पुरुष श्रद्धा भाव से पढ़ सकता है।कथा के क्रम में उन्होंने सुरसा प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया सुरसा हनुमान की परीक्षा ले रही थीं। उन्होंने हनुमान से कहा तुम राम काज करोगे क्योंकि तुम बुद्धिमान और बलवान हो।जगतगुरु ने कहा भगवान की माया सबसे कठिन है लेकिन भगवान का आश्रय लेने से इस माया से पार पाया जा सकता है। उन्होंने कहा भाग्यशाली लोगों को ही सद्गुरु का सान्निध्य प्राप्त होता है। जिसके हृदय में भक्ति होती है वह सदैव प्रसन्न रहता है और जीवन में आगे बढ़ता है।उन्होंने कहा इस भवसागर से पार होने के लिए भगवान का नाम ही सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।कहा कि ईश्वर सतोगुण,रजोगुण व तमोगुण तीनों में है।वह परिवर्तनशील है और ब्रम्ह सजीव से मुक्त है।वह अव्यक्त है।वह दृश्य और अदृश्य है।कहा कि सगुण ब्रह्म की आराधना होती है। ईश्वर की आराधना उपासना का विरोध नहीं करना चाहिए।वह सृजन कर्ता है।वह पालन करता है। समिति अध्यक्ष कृष्ण कुमार दुबे,जगत नारायण दुबे, रामजतन दुबे,डा गोविंद दुबे,अमरेश द्विवेदी,अनिल शुक्ला, चंद्रदत्त त्रिपाठी, राजेंद्र सिंह यादव, लवकुश त्रिपाठी, चंद्रभूषण पाल,सुनील दुबे, अमरेंद्र, लक्ष्मीनारायण, ज्ञानेंद्र दुबे, राहुल पांडे, उदित नारायण दुबे आदि भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष कथा श्रवण किया।
2 hours and 45 min ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
3.0k