आनंद महिंद्रा हुए झारखंड की सुंदरता के कायल: बोले— "भारत का अनकहा रहस्य है यह राज्य, बादलों की पहाड़ियों में बसा है स्वर्ग।"

रांची: प्रसिद्ध उद्योगपति और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हुए इसे भारत का एक “अनकहा रहस्य” (Unspoken Secret) बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर किए गए उनके एक पोस्ट ने देश के पर्यटन मानचित्र पर झारखंड को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। महिंद्रा ने पारंपरिक पर्यटन स्थलों जैसे गोवा, राजस्थान और हिमाचल की तुलना में झारखंड की "अनटच्ड ब्यूटी" को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताया।

मेघहातुबुरु: बादलों की गोद में बसा स्वर्ग

आनंद महिंद्रा ने विशेष रूप से पश्चिमी सिंहभूम स्थित मेघहातुबुरु की मनमोहक तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने इसे “बादलों की पहाड़ी” (Hill of Clouds) संबोधित करते हुए बताया कि 700 पहाड़ियों वाले 'सारंडा जंगल' के बीच समुद्र तल से 4,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान किसी जादुई दुनिया से कम नहीं है। उन्होंने यहां के सूर्यास्त (Sunset Point) को प्रकृति प्रेमियों के लिए वास्तविक स्वर्ग करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेतरहाट की पहाड़ियों, बेतला नेशनल पार्क, बैद्यनाथ धाम की दिव्यता और हुंडरू फॉल्स के रोमांच का भी उल्लेख किया।

झारखंड सरकार ने जताया आभार

महिंद्रा के इस पोस्ट पर झारखंड के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार की ओर से उनका आभार व्यक्त किया। मंत्री ने कहा, "मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरदर्शी सोच के तहत हम झारखंड को एक 'यूनिक और सोलफुल' टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर रहे हैं।"

सरकार फिलहाल राज्य के प्रमुख स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक गेस्टहाउस, लग्जरी रिसॉर्ट्स और विशेष रूप से ‘इको-टूरिज्म’ को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण पर्यटन को भी सशक्त बनाना है ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले और सैलानी झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति से रूबरू हो सकें।

पर्यटन क्षेत्र में नई उम्मीदें

आनंद महिंद्रा जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व द्वारा की गई इस प्रशंसा से राज्य के पर्यटन विभाग में भारी उत्साह है। जानकारों का मानना है कि इस वैश्विक प्रचार से आने वाले समय में झारखंड में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। अपनी शुद्ध आबोहवा और घने जंगलों के कारण झारखंड अब प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बनने की राह पर है।

झारखंड में 'असम' की आंच: सरयू राय ने हेमंत सोरेन को दिया 'बिना शर्त' समर्थन का ऑफर, क्या कांग्रेस से नाता तोड़ेगी झामुमो?

रांचीः असम चुनाव ने झारखंड में सियासी तनाव बढ़ा दिया है. खासकर, झामुमो के असम चुनाव में ताल ठोकने के बाद. आलम यह है कि सत्ताधारी दल झामुमो और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरु हो गई है.

झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य कांग्रेस की तुलना विषैले सांप से कर चुके हैं. इसके जवाब में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने अपनी ही सरकार को हर मोर्चे पर फेल करार देते हुए कई सवाल खड़े कर चुके हैं.

इस बीच जदयू विधायक सरयू राय ने एक बयान देकर झारखंड की राजनीति को नई हवा दे दी है. उन्होंने सुझाव दिया है कि झामुमो को कांग्रेस और भाजपा से अलग सरकार बना लेनी चाहिए. ऐसा होता है तो वे सरकार को बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं. लिहाजा, हेमंत सोरेन को हिम्मत दिखानी चाहिए.

क्या है सरयू राय का फॉर्मूला और सुझाव

जदयू विधायक सरयू राय ने 3 अप्रैल को धनबाद में कहा है कि झामुमो के पास 34 विधायक हैं. अगर कांग्रेस को हटा दें तो झामुमो को राजद के 04 विधायकों और भाकपा माले के 02 विधायकों का समर्थन हासिल है. यह आंकड़ा 40 हो जाता है. 81 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरुरत है. अगर झामुमो ऐसा करता है तो वे खुद बिना शर्त सरकार को समर्थन देने को तैयार हैं.

जदयू विधायक ने कहा कि कांग्रेस ने असम चुनाव में झामुमो को हिस्सेदारी नहीं दी. बिहार चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था. ऐसे में झामुमो को नये विकल्प पर विचार करना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हवा का रुख कब बदल जाए, यह कहना मुश्किल है. ऐसा नहीं होना चाहिए कि असम चुनाव के बाद सीएम फिर कांग्रेस नेताओं से मिलें और कह दें कि अब हमारी सारी गलतफहमी दूर हो गई है.

उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस प्रभारी के. राजू यह कह रहे हैं कि झारखंड के अफसर माइनिंग माफिया के दबाव में काम कर रहे हैं तो यह सीधे तौर पर हेमंत सोरेन पर हमला है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि असम में झामुमो के चुनाव लड़ने से भाजपा को टी-ट्राइब वोट का नुकसान होगा.

सरयू राय के सुझाव पर वरिष्ठ पत्रकार मधुकर का तर्क

वरिष्ठ पत्रकार मधुकर का मानना है कि भाजपा किसी न किसी रुप में झामुमो को कांग्रेस से अलग करना चाहती है. अगर कांग्रेस से हटकर झामुमो सरकार बनाती है तो चुनौतियां और बढ़ जाएंगी. क्योंकि ज्यादा लोगों को संतुष्ट करना होगा. लिहाजा, ऐसी सरकार को चलाना मुश्किल हो जाएगा.

इसलिए कांग्रेस के बगैर झामुमो को सरकार चलाना मुश्किल होगा. यह भी समझना चाहिए कि झामुमो और भाजपा का वोट बैंक अलग है. वहीं झामुमो और कांग्रेस का वोट बैंक एक है. इससे दोनों को फायदा होगा. आगे चलकर फिर सीबीआई और ईडी की इंट्री हो तो अलग बात होगी.

वरिष्ठ पत्रकार मधुकर के मुताबिक भाजपा हर हाल में सरकार के करीब जाना चाहती है. क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हेमंत सोरेन बहुत मजबूत हुए हैं. हेमंत सोरेन को इस बात की अच्छी समझ होगी कि बिहार में नीतीश कुमार के साथ क्या हुआ. रही बात सुप्रियो और के. राजू के बयान की तो ऐसी बयानबाजी चलती रहती है.

बिहार में भाजपा और जदयू के बीच भी बयानबाजी होती थी लेकिन सरकार चलती रही. क्योंकि वहां विकल्प ही नहीं था. ऐसे में सरयू राय के ऑफर के बावजूद झामुमो इस लोभ में आएगा, ऐसा नहीं लगता. रही बात असम कि तो खाता खुलना या ना खुलना अलग मैटर है लेकिन वहां झामुमो की पैठ बनेगी. मधुकर के मुताबिक हालिया बयानबाजी के प्रेशर पॉलिटिक्स के रुप में देखना चाहिए और कुछ नहीं.

वरिष्ठ पत्रकार चंदन मिश्रा का आकलन

सरयू राय के सुझाव पर ईटीवी भारत की टीम ने वरिष्ठ पत्रकार चंदन मिश्रा का पक्ष लिया. उन्होंने दो टूक कहा कि क्या सरयू राय पार्टी लाइन से अलग होकर झामुमो सरकार को समर्थन दे सकते हैं. वे कौन होते हैं ऐसा कहने वाले. वे तो जदयू के विधायक हैं. वे फैसला नहीं ले सकते. क्या झारखंड जदयू अध्यक्ष खीरू महतो ऐसा कह रहे है. खास बात है कि कांग्रेस और झामुमो में संबंध विच्छेद तो हुआ नहीं है. फिर कहां से नई सरकार की बात आ रही है. यह अलग बात है कि कांग्रेस और झामुमो के बीच जुबानी जंग हुई है. यह भी देखना चाहिए कि इस मैटर पर टॉप लीडर कुछ नहीं बोल रहा है.

चंदन मिश्रा का कहना है कि राजद ने बिहार में झामुमो को सहयोग नहीं दिया था. फिर भी राजद यहां की सरकार में शामिल है. उस वक्त कहा गया था राजद के खिलाफ कार्रवाई होगी लेकिन हुआ कुछ नहीं. क्योंकि झामुमो का सामने मजबूरी थी. चंदन मिश्रा ने कहा कि क्या हेमंत बोल सकते हैं कि उनको कांग्रेस का समर्थन नहीं चाहिए. मुझे लगता है कि सिर्फ असम चुनाव तक दोनों पार्टियां एक दूसरे पर थोड़ी छिंटाकशी करेंगी. फिर सबकुछ शांत हो जाएगा. यह भी समझना होगा कि हेमंत सोरेन को हिमंता विस्वा से चिढ़ थी. क्योंकि झारखंड चुनाव में हिमंता सक्रिय थे. इसलिए हेमंत सोरेन अब असम में अपनी ताकत दिखा रहे हैं. अगर झामुमो को जीतने की चाहत होती तो कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ते.

कांग्रेस प्रभारी ने क्या आरोप लगाए

पिछले दिनों कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा था कि राज्य के सरकारी स्कूलों में 70 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं. सोनुआ में आदिवासी समाज के बच्चे सरकारी स्कूलों के बजाए प्राइवेट स्कूलों का रुख कर रहे हैं. सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था लचर हो गई है. माइनिंग लॉ की आड़ में लोगों पर अन्याय हो रहा है. अधिकारी मनमानी कर रहे हैं. कांग्रेस नेता का घर तोड़ दिया गया. कोल बियरिंग एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिल रहा है. हर जिला में कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों की समस्याओं से प्रशासन को अवगत करा रहे हैं. इस काम को कांग्रेस गंभीरता से आगे लेकर जाएगी.

झामुमो ने कांग्रेस को दिया था ये सुझाव

कांग्रेस प्रभारी द्वारा अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी पर झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि गठबंधन में रहकर इस तरह के बयान से जनता के बीच गलत संदेश जाता है. इस गठबंधन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्हें सीएम से मिलकर अपनी बात रखनी चाहिए. तब कांग्रेस ने कहा था कि कांग्रेस तो सिर्फ जमीन अधिग्रहण कानून, 2013 का सही तरीके से डीसी के स्तर पर पालन नहीं कराया जाता है तो कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि आंदोलन कर इन बातों से सरकार को अवगत कराएं.

रांची में तेजस्वी यादव का 'झारखंडी' अंदाज में होगा अभिनंदन: कार्निवल हॉल में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी।

रांची: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव कल, 5 अप्रैल को रांची पहुंच रहे हैं। उनके आगमन को लेकर राजधानी रांची को राजद के झंडों, बैनरों और तोरणद्वारों से पाट दिया गया है। प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने बताया कि तेजस्वी यादव के स्वागत के लिए पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता पूरी तरह मुस्तैद हैं।

सड़क मार्ग से पहुंचेंगे तेजस्वी और ओसामा

मिली जानकारी के अनुसार, तेजस्वी यादव सड़क मार्ग से देर रात रांची पहुंचेंगे। उनके साथ रघुनाथपुर के विधायक ओसामा साहब सहित बिहार के कई अन्य प्रमुख नेता भी शामिल होंगे। यह दौरा सांगठनिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि तेजस्वी यादव आगामी चुनावों को देखते हुए झारखंड में पार्टी की जड़ों को मजबूत करने की रणनीति पर काम करेंगे।

कार्निवल हॉल में भव्य अभिनंदन

कल दोपहर 12:00 बजे स्थानीय कार्निवल हॉल में तेजस्वी यादव का भव्य स्वागत झारखंडी रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। इस दौरान वे राज्यभर से आए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और उन्हें जमीनी स्तर पर पार्टी को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन देंगे।

वरिष्ठ नेताओं ने किया तैयारियों का जायजा

कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए आज पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने कार्निवल हॉल का दौरा कर सुरक्षा और बैठने की व्यवस्था का मुआयना किया। निरीक्षण के दौरान:

इरफान अंसारी के सरंक्षण में हुआ जामताड़ा आयुष्मान भारत घोटाला, पूरे मामले की हो उच्च स्तरीय जांच : भाजपा”


जामताड़ा में मोतियाबिंद के फर्जी ऑपरेशन और आयुष्मान भारत योजना में हुए कथित घोटाले को लेकर भाजपा ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए झारखंड सरकार पर बड़ा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं है, बल्कि यह झारखंड की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक विफलता का बड़ा उदाहरण है। उन्होंने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की कार्यशैली, भूमिका और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अजय साह ने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी क्रांतिकारी योजना की शुरुआत भले ही झारखंड की धरती से हुई हो, लेकिन विडंबना यह है कि हेमंत सोरेन सरकार ने इस योजना को घोटाले की भेंट चढ़ा दी। जामताड़ा के सिटी अस्पताल और मंगलम नेत्रालय ने मात्र एक महीने में हजारों मोतियाबिंद ऑपरेशन का दावा कर आयुष्मान भारत के नाम पर लाखों रुपये की निकासी कर ली। इतना बड़ा फर्जीवाड़ा महीनों तक चलता रहा और जब मामले का खुलासा हुआ तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले की लीपापोती करने का प्रयास किया गया।केवल एक सिविल सर्जन को दूसरे जिलें में भेज कर पूरे मामले को रफा दफा करने का प्रयास किया गया।

अजय साह ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री के ही विधानसभा क्षेत्र में महीनों तक इतना बड़ा घोटाला चलता रहा और मंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी, यह बात कोई भी सामान्य व्यक्ति स्वीकार नहीं कर सकता। प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित दोनों अस्पतालों में स्वास्थ्य मंत्री के करीबी लोगों का लगातार आना-जाना और पैरवी करना भी गंभीर जांच का विषय है। अस्पताल संचालकों और स्वास्थ्य मंत्री के बीच संबंधों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। हर मुद्दे पर बोलने वाले स्वास्थ्य मंत्री की इस मुद्दे पर चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

उन्होंने कहा कि जिन अस्पतालों में ये ऑपरेशन किए गए, वहां न केवल फर्जी ऑपरेशन हुए बल्कि बिना लाइसेंस के फार्मेसी और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी अवैध रूप से चलाई जा रही थीं। अगर स्वास्थ्य मंत्री अपने ही विधानसभा क्षेत्र में एक-दो कमरे के अस्पतालों में चल रहे घोटालों को नहीं रोक पाए, तो पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उनका नियंत्रण किस स्तर का है, यह समझा जा सकता है।

भाजपा ने मांग की है कि पूरे राज्य में आयुष्मान भारत के तहत हुए सभी मोतियाबिंद ऑपरेशनों का हेल्थ ऑडिट कराया जाए, ताकि जामताड़ा जैसे फर्जीवाड़े का पूरा सच सामने आ सके। अजय साह ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की योजनाओं में राज्य स्तर पर हो रही भारी अनियमितताओं के कारण ही कई बार केंद्र सरकार को फंड रोकना पड़ता है,

और बाद में राज्य सरकार उसी को राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश करती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के कार्यकाल में भी इसी तरह का फ़र्ज़ी मोतियाबिंद ऑपरेशन घोटाला सामने आया था, लेकिन उस मामले की जांच का क्या परिणाम निकला, यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है।

झारखंड जगुआर कैंप विस्तार का विरोध: हड़गड़ी जमीन बचाने उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के पास पहुंचे ग्रामीण।

रांची: राजधानी के कांके प्रखंड अंतर्गत मौजा-टेण्डर में प्रस्तावित झारखंड जगुआर (एस.टी.एफ.) कैंप विस्तार का मामला अब जिला प्रशासन की चौखट पर पहुंच गया है। शनिवार, 04 अप्रैल 2026 को स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री से मुलाकात कर अपनी चिंताओं से अवगत कराया।

आस्था और परंपरा की रक्षा की गुहार

मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने उपायुक्त को बताया कि जिस जमीन पर झारखंड जगुआर कैंप का विस्तार प्रस्तावित है, वह आदिवासी समाज की गहरी आस्था से जुड़ा 'हड़गड़ी स्थल' है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पवित्र स्थल पर वर्षों से पूजा-अर्चना और पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित होती आ रही हैं। समाज की भावनाओं का हवाला देते हुए प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि प्रशासन इस भूमि के बजाय कैंप विस्तार के लिए किसी वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था करे।

सरहुल के सफल आयोजन पर जताया आभार

विरोध की मांगों के बीच ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के प्रति सकारात्मक रुख भी दिखाया। हाल ही में संपन्न हुए सरहुल पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और व्यवस्थित वातावरण में संपन्न कराने के लिए ग्रामीणों ने उपायुक्त और पूरी प्रशासनिक टीम का धन्यवाद किया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री को शॉल ओढ़ाकर और गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष श्री अजय तिर्की, वार्ड पार्षद श्री अमित मिंज सहित टेण्डर मौजा के कई ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि उपायुक्त उनकी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए जनहित में उचित निर्णय लेंगे।

नक्सलवाद के एक खूनी अध्याय का अंत: माओवादी थिंक टैंक प्रशांत बोस उर्फ 'किशन दा' की मौत।

रांची: भारत में नक्सलवाद के पांच दशक पुराने एक बड़े अध्याय का कल औपचारिक रूप से समापन हो गया। भाकपा माओवादी संगठन के आधार स्तंभ और 'सेकंड-इन-कमान' रहे प्रशांत बोस उर्फ किशन दा ने शुक्रवार, 03 अप्रैल 2026 को दुनिया को अलविदा कह दिया।

साल 2021 से रांची की जेल में बंद प्रशांत बोस की मौत को देश से नक्सलवाद के पूर्ण सफाए पर 'आखरी कील' के तौर पर देखा जा रहा है।

मजदूर यूनियन से शीर्ष कमांडर तक का सफर

प्रशांत बोस का सफर 60 के दशक में कोलकाता के मजदूर यूनियनों से शुरू हुआ था। एमसीसीआई (MCCI) के संस्थापक कन्हाई चटर्जी के साथ मिलकर उसने जमींदारी प्रथा के खिलाफ आंदोलन छेड़ा और बाद में रतिलाल मुर्मू के साथ मिलकर 'सनलाइट सेना' का गठन किया। 2004 में जब एमसीसीआई और पीडब्ल्यूजी (PWG) का विलय हुआ, तब प्रशांत बोस को ईआरबी (ERB) का प्रमुख और संगठन का मुख्य रणनीतिकार बनाया गया।

खौफनाक वारदातों का 'मास्टरमाइंड'

प्रशांत बोस केवल एक नेता नहीं, बल्कि माओवादियों का 'थिंक टैंक' था। देश की सुरक्षा को हिला देने वाली कई बड़ी घटनाओं के पीछे इसी का दिमाग था:

  • प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश: पुणे के भीमा कोरेगांव हिंसा और पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने में एनआईए (NIA) की चार्जशीट में इसका नाम प्रमुखता से शामिल था।
  • झीरम घाटी कांड (2013): छत्तीसगढ़ के बस्तर में विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र करमा समेत 30 कांग्रेस नेताओं की नृशंस हत्या की मंजूरी प्रशांत बोस ने ही दी थी।

  • सैकड़ों मामले: अकेले झारखंड में इसके खिलाफ 70 और इसकी पत्नी शीला मरांडी के खिलाफ 18 मामले दर्ज थे। बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी यह वांटेड था।

2021 की वह ऐतिहासिक गिरफ्तारी

प्रशांत बोस को पकड़ना सुरक्षा बलों के लिए दशकों की सबसे बड़ी कामयाबी थी। साल 2021 में झारखंड के तत्कालीन डीजीपी नीरज सिन्हा, आईजी अभियान अमोल वी. होमकर और आईबी की संयुक्त टीम ने उसे सरायकेला के कांड्रा से दबोचा था। उस समय डीजीपी ने बताया था कि प्रशांत बोस माओवादी संगठन के रहस्यों का 'महासागर' है, जिसकी गिरफ्तारी ने संगठन की कमर तोड़ दी थी।

नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने ही देश से नक्सलवाद के लगभग समाप्त होने की घोषणा की थी। केंद्र और राज्य सरकारों के साझा ऑपरेशनों, मजबूत इच्छाशक्ति और विकास कार्यों ने माओवाद को समाज की जड़ों से उखाड़ फेंका है। प्रशांत बोस की मौत के साथ ही अब वह विचारधारा भी इतिहास के पन्नों में सिमटने की कगार पर है जिसने दशकों तक देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती दी।

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: भाजपा नेता सत्येंद्र नाथ तिवारी ने राज्यपाल संतोष गंगवार को सौंपा ज्ञापन।

राँची/गढ़वा: गढ़वा के विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता श्री सत्येंद्र नाथ तिवारी ने आज राजभवन में राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने गढ़वा, पलामू और लातेहार जिलों के साथ राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कथित 'सौतेले व्यवहार' और मंडल डैम विस्थापितों के पुनर्वास में हो रही अनियमितताओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और हस्तक्षेप की मांग की।

भाषा विवाद: छात्रों के भविष्य पर संकट

विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने राज्यपाल को अवगत कराया कि पलामू प्रमंडल (गढ़वा, पलामू, लातेहार) की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान भोजपुरी, मगही और हिंदी से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार आगामी झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल न करके स्थानीय युवाओं के साथ विश्वासघात कर रही है।

उन्होंने कहा, "जिस भाषा में यहां के विद्यार्थी वर्षों से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, उसे परीक्षा से बाहर रखना मेधावी छात्रों के रोजगार के अवसरों को छीनने जैसा है। क्षेत्रीय भाषा में क्वालीफाई करने की बाध्यता के कारण हमारे क्षेत्र के युवा पिछड़ जाएंगे।"

मंडल डैम विस्थापन: रंका में तनावपूर्ण स्थिति

श्री तिवारी ने रंका प्रखंड के विश्रामपुर और बलीगढ़ के जंगलों में मंडल डैम के 780 विस्थापित परिवारों को जबरन बसाने के जिला प्रशासन के निर्णय पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष प्रमुख बिंदु रखे:

रोजगार का संकट: जिस 1000 एकड़ जंगल पर विस्थापितों को बसाया जा रहा है, वह करीब 20 गांवों के स्थानीय आदिवासियों के भरण-पोषण (महुआ, बीड़ी पत्ता, जड़ी-बूटी) का एकमात्र साधन है।

पुलिसिया बर्बरता: विधायक ने आरोप लगाया कि 8 दिसंबर को पुलिस ने बिना ग्राम सभा की अनुमति के महिलाओं पर लाठियां बरसाईं और ग्रामीणों की आवाज दबाने का प्रयास किया।

संवैधानिक पेसा (PESA) एक्ट का उल्लंघन: विस्थापित परिवार 5वीं अनुसूची और पेसा एक्ट के तहत आते हैं, जबकि उन्हें सामान्य पंचायत में बसाया जा रहा है, जिससे उन्हें मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा।

राज्यपाल से मांग

विधायक ने महामहिम से मांग की है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में भोजपुरी, मगही और हिंदी को तुरंत शामिल कराया जाए। साथ ही, मंडल डैम के विस्थापितों को स्थानीय ग्रामीणों की सहमति के बिना उनके रोजगार वाले जंगलों में न बसाकर कहीं अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए।

"हेमंत सरकार पलामू प्रमंडल की अस्मिता और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। प्रशासन की तानाशाही और छात्रों के साथ हो रहा अन्याय भाजपा बर्दाश्त नहीं करेगी।"

— सत्येंद्र नाथ तिवारी, विधायक (गढ़वा)

चाय बागान मजदूरों को अधिकार दिलाना हमारी प्राथमिकता: गोसाईंगांव में कल्पना सोरेन का बड़ा वादा।

गोसाईंगांव/असम: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में आज गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र से जेएमएम प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा के पक्ष में एक विशाल चुनावी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसे मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड की गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने संबोधित किया।

इतिहास बदलने वाला चुनाव

जनसभा को संबोधित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि असम विधानसभा का यह चुनाव कोई सामान्य राजनीतिक मुकाबला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के वंचितों और आदिवासियों के लिए इतिहास बनाने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि असम की जनता अब वर्तमान व्यवस्था से ऊब चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।

चाय बागान मजदूरों और आदिवासियों के हितों पर जोर

कल्पना सोरेन ने असम के चाय बागान मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जेएमएम इन मजदूरों को उनका उचित हक और अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा:

असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा अब केवल जेएमएम ही कर सकती है।

आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है, जो असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को राजनीतिक और सामाजिक मजबूती प्रदान करेगा।

दिग्गज नेताओं की उपस्थिति

इस अवसर पर जेएमएम की वरिष्ठ नेता और सांसद श्रीमती जोबा माझी तथा विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन ने भी जनता को संबोधित किया। नेताओं ने प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा की साफ-सुथरी छवि और सेवा भाव का जिक्र करते हुए उन्हें भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की।

बदलाव की बयार

सभा में उमड़ी भारी भीड़ और कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए कल्पना सोरेन ने दावा किया कि गोसाईंगांव सहित असम की कई सीटों पर जेएमएम एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर तीर-धनुष (जेएमएम का चुनाव चिह्न) पर बटन दबाएं और शोषण मुक्त असम के निर्माण में भागीदार बनें।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू ने 3 अप्रैल को मशाल जुलूस,9 अप्रैल को झारखंड बंद को लिया वापस

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू आज देर शाम नई दिल्ली से रांची पहुंचते ही प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता के मीडिया को संबोधित किया।

श्री साहू ने विष्णुगढ़ कुसुंबा में बेटी की निर्मम हत्या को लेकर पार्टी द्वारा घोषित 3 अप्रैल के मशाल जुलूस और 9 अप्रैल की झारखंड बंदी को वायस लेने की घोषणा की।

उन्होंने राज्य सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा के प्रचंड दबाव के बाद कुसुंबा की बेटी की निर्मम हत्या का उद्भेदन हुआ है,लेकिन आगे इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि बलि देने संबंधी बातों की सच्चाई सामने आए। बलि पत्थर से मारकर नहीं दी जाती है। पुलिस ने जो बातें बताई है उसकी और छानबीन की जरूरत है, पोक्सो एक्ट आदि के उल्लंघन संबंधी बातें भी उजागर हो।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार भीम राम कभी भी किसी स्तर का भाजपा कार्यकर्ता नहीं रहा।मीडिया में सत्ता पक्ष के दबाव में भ्रामक खबरें चलाई जा रही है।

कहा कि भाजपा ही जिसके स्वयं प्रदेश अध्यक्ष सहित सांसद विधायकगण,,जिलाध्यक्ष रामनवमी जुलूस त्यौहार के बीच घटना स्थल गए, हजारीबाग बंद और आंदोलन के माध्यम से पुलिस प्रशासन पर दबाव का परिणाम है हत्या के षडयंत्र का उद्भेदन ,गिरफ्तारी।

कहा कि आज जो सड़कों पर झंडा लेकर कांग्रेस झामुमो के लोग नाच रहे,अनर्गल बयानबाजी कर रहे वे 8 दिन तक किस बिल में छुपे थे।क्यों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन,विधायक कल्पना सोरेन ने कोई ट्वीट तक नहीं किया। क्यों नहीं घटना स्थल गए।

कहा कि पिछले 6 वर्षों में राज्य में लगातार लूट,हत्या दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी है। अब तो हिंदू पर्व त्योहारों में पत्थरबाजी ,अड़ंगा आम बात हो गई है।ये सब सरकार के तुष्टीकरण नीति का परिणाम है।

कहा कि राज्य सरकार चेते,विधि व्यवस्था को ठीक करे, पुलिस प्रशासन को बालू कोयला पत्थर चोरों से वसूली कराना बंद करे।

उन्होंने कहा कि भाजपा चेतावनी देती है कि पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में फिर कोई बेटी की इज्जत नहीं लूटी जाए, हत्या नहीं हो, खनिज बालू पत्थर की लूट बंद हो नहीं तो भाजपा कार्यकर्ता झारखंड को ठप करेंगे, सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

सरूपथर में उमड़ा जनसैलाब: मुख्यमंत्री सोरेन बोले—साहिल मुंडा को चुनना मतलब अपने हक-अधिकार को चुनना।

सरूपथर/असम: असम विधानसभा चुनाव के सियासी रण में झारखण्ड के मुख्यमंत्री और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन ने पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को असम के सरूपथर विधानसभा क्षेत्र में जेएमएम प्रत्याशी साहिल मुंडा के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर जमकर प्रहार किया और क्षेत्र की जनता से 'मिट्टी और जज्बे' के नाम पर वोट मांगा।

साहिल मुंडा: सत्ता नहीं, सामाजिक परिवर्तन का चेहरा

जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि साहिल मुंडा का राजनीति में आना महज एक चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि यह असम की माटी और झारखण्ड के जज्बे का एक ऐतिहासिक संगम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहिल मुंडा केवल एक प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि वे उस वंचित समाज की आवाज हैं जिसे दशकों तक हाशिए पर रखा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, "साहिल का लक्ष्य विधायक की कुर्सी पाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास सुनिश्चित करना है। वे पद के लालच से ऊपर उठकर जनता के हक के लिए संघर्ष करने वाले नेता हैं।"

स्थानीय अधिकारों और अस्मिता की रक्षा

हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में 'झारखण्डी अस्मिता' और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरूपथर के युवाओं और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए साहिल मुंडा से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने जनता को आगाह किया कि उन्हें अपने हक और अधिकार की रक्षा के लिए एक ऐसे नेतृत्व को चुनना होगा जो उनकी भाषा, उनकी संस्कृति और उनकी समस्याओं को गहराई से समझता हो।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि साहिल मुंडा युवाओं को केवल 'वोट बैंक' नहीं समझते, बल्कि उन्हें नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार कर रहे हैं। जेएमएम के नेतृत्व में सरूपथर में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय स्वायत्तता के मुद्दों पर ऐतिहासिक काम करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

विरोधियों पर प्रहार और विकास का संकल्प

विपक्ष पर निशाना साधते हुए सोरेन ने कहा कि जो लोग केवल विभाजन की राजनीति करते हैं, उन्हें जनता इस बार करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में जिस तरह उनकी सरकार जल-जंगल-जमीन और आदिवासियों-मूलवासियों के हितों के लिए काम कर रही है, वही मॉडल अब जेएमएम असम में भी लागू करना चाहती है।

"साहिल मुंडा के रूप में आपके पास एक नई उम्मीद है। इन्हें चुनना मतलब अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना है।"

— मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

जनसभा के दौरान जेएमएम कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर था और "जय झारखण्ड, जय असम" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस सभा के बाद सरूपथर का चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री की इस रैली ने स्थानीय मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश दिया है।