संविधान बनाम राज्य नियंत्रण: ट्रांस संशोधन विधेयक के खिलाफ लखनऊ में उभरा व्यापक जनप्रतिरोध

लखनऊ। ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ रविवार को लखनऊ की सड़कों पर क्वीयर समुदाय और नागरिक समाज का व्यापक और संगठित प्रतिरोध देखने को मिला। बेगम हज़रत महल पार्क गेट, परिवर्तन चौक से केडी सिंह बाबू स्टेडियम मेट्रो स्टेशन तक निकाले गए इस मार्च ने न केवल एक विधेयक का विरोध किया, बल्कि राज्य द्वारा पहचान, शरीर और अस्तित्व पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिशों को भी खुली चुनौती दी।
यह विरोध प्रदर्शन क्वीयर समुदाय और स्थानीय नागरिकों की संयुक्त पहल था, जिसका संचालन शांतम निधि ने किया। मार्च का नेतृत्व पायल, गुड्डन, प्रियंका, यादवेंद्र, आकाश और राजन सहित कई समुदाय प्रतिनिधियों ने किया। बड़ी संख्या में छात्र, युवा, महिलाएं और विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, बापसा बीबीएयू, एपवा, जन संस्कृति मंच और सीटू जैसे संगठनों ने भी एकजुटता दिखाई।
पूरे मार्च के दौरान “ट्रांस राइट्स मानवाधिकार हैं”, “पहचान पर राज्य का नियंत्रण नहीं चलेगा” और “संविधान की रक्षा करो” जैसे नारे गूंजते रहे, जो इस आंदोलन के मूल स्वर को स्पष्ट करते हैं।

* “पहचान प्रमाणपत्र नहीं, अस्तित्व है”
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने विधेयक को नागरिक अधिकारों के ढांचे पर सीधा हमला बताया। पायल ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून ट्रांस समुदाय की पहचान को व्यक्तिगत अधिकार से हटाकर राज्य के नियंत्रण में देना चाहता है। गुड्डन ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के कदमों का विरोध नहीं किया गया, तो भविष्य में व्यापक नागरिक अधिकारों पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
प्रियंका ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक NALSA निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यह विधेयक उस फैसले द्वारा दिए गए अधिकारों को कमजोर करता है। यादवेंद्र ने विधेयक को बिना पर्याप्त बहस और परामर्श के पारित किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। आकाश और राजन ने भी इसे संविधान और नागरिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर चुनौती करार दिया।

* राष्ट्रपति को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें विधेयक की कई संवैधानिक और व्यावहारिक खामियों को रेखांकित किया गया। ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन स्व-पहचान के अधिकार को समाप्त कर उसे चिकित्सा परीक्षण और प्रशासनिक स्वीकृति के अधीन करता है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव के खिलाफ संरक्षण), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। साथ ही, ‘अल्यूर्मेंट’ जैसे अस्पष्ट प्रावधानों के जरिए समुदाय और उसके सहयोगियों को अपराधी बनाए जाने की आशंका भी जताई गई।

* लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि विधेयक को बिना व्यापक बहस, संसदीय समिति को भेजे बिना और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद से पर्याप्त परामर्श किए बिना पारित किया गया। इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अवमूल्यन के रूप में देखा जा रहा है।

* संघर्ष जारी रहेगा
यह विरोध केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल एक विधेयक को वापस लेने की नहीं, बल्कि उस संवैधानिक सिद्धांत की रक्षा की है जिसके अनुसार व्यक्ति अपनी पहचान स्वयं निर्धारित करता है।
लखनऊ में उभरा यह जनप्रतिरोध संकेत देता है कि नागरिक समाज इस मुद्दे को लेकर न केवल सजग है, बल्कि लगातार और संगठित रूप से अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए तैयार भी है।
उप्र: 24 घंटे में फसल क्षति का आकलन कर किसानों को राहत दें: प्रमुख सचिव राजस्व
लखनऊ। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान से प्रभावित किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रमुख सचिव राजस्व अपर्णा यू ने सख्त आदेश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि फसल क्षति का आकलन कर 24 घंटे के भीतर प्रभावित किसानों को राहत राशि का वितरण सुनिश्चित किया जाए।
शनिवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन स्थित सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि राहत कार्यों में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि राहत राशि के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और 15 मार्च 2026 से अब तक लगभग 20 करोड़ रुपये की धनराशि जनपदों को जारी की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी जनपद में बजट की आवश्यकता हो, तो तत्काल राहत आयुक्त कार्यालय से मांग की जाए। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि राहत राशि प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई होने पर टोल-फ्री नंबर 1070 पर शिकायत दर्ज कराएं।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 31 मार्च तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में खराब मौसम की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की गई है। जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मौसम संबंधी सूचनाएं विभिन्न माध्यमों से व्यापक रूप से प्रसारित करें।
उल्लेखनीय है कि 15 मार्च से 28 मार्च 2026 के बीच प्रदेश में बेमौसम बारिश से 17 लोगों की मृत्यु, 11 पशुहानि तथा सहारनपुर और ललितपुर में 1661.75 हेक्टेयर फसल क्षति दर्ज की गई है।प्रमुख सचिव ने कहा कि राहत कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा कर प्रभावितों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
PNG सेवाओं के विस्तार पर केंद्र-राज्य समन्वय बैठक, यूपी में प्रगति की निगरानी खुद करेंगे ए.के. शर्मा
लखनऊ। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा जारी सूचना के अनुसार, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के विस्तार और PNG सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विज्ञान भवन में उच्च स्तरीय केंद्र-राज्य समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने सहभागिता करते हुए प्रदेश में PNG सेवाओं के विस्तार की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई नगरीय निकायों में NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) से जुड़े कुछ प्रकरण लंबित हैं, जिनमें बहराइच, वाराणसी, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज प्रमुख हैं। इन मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए वे स्वयं निगरानी करेंगे।
यह बैठक समूह मंत्रियों (GoM) के 25 मार्च 2026 के निर्णय के क्रम में आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, मनोहर लाल खट्टर तथा प्रह्लाद जोशी सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराने, PNG कनेक्शन वितरण में तेजी लाने तथा CGD नेटवर्क के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई। मंत्री ए.के. शर्मा ने भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को सरल व समयबद्ध बनाया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देने की बात कही कि NOC जारी करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।
बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर शहरी विकास को गति देने पर भी विशेष जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश के साथ हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और दिल्ली ने भी सक्रिय भागीदारी की, जबकि अन्य राज्यों ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की।
बिजली कर्मियों में उबाल: संविदा कर्मियों की छंटनी और अभियंताओं के निलंबन पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कड़ा विरोध जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि हटाए गए संविदा कर्मियों की बहाली और अभियंताओं के निलंबन की कार्रवाई वापस नहीं ली गई, तो अप्रैल माह में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
संघर्ष समिति के अनुसार, प्रबंधन द्वारा निजीकरण की दिशा में मनमाने तरीके से राजधानी लखनऊ समेत एक दर्जन से अधिक शहरों में तथाकथित “वर्टिकल व्यवस्था” लागू की गई है। अब उसी व्यवस्था की समीक्षा के लिए प्रबंधन ने अपने ही अधिकारियों—निदेशकों और प्रबंध निदेशकों—को जिम्मेदारी सौंप दी है, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
समिति का कहना है कि वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश की बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है और आने वाली गर्मियों में उपभोक्ताओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। “सिंगल विंडो सिस्टम” को समाप्त कर कार्यों को चार भागों में बांट दिया गया है, जिससे समन्वय और जवाबदेही कमजोर हो गई है।
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था ने उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ा दी हैं। कई मामलों में भुगतान के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो रही है, और उपभोक्ताओं को अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
समिति ने प्रबंधन पर आरोप लगाया कि अपनी विफलताओं का ठीकरा कर्मचारियों और अभियंताओं पर फोड़ा जा रहा है। वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी, नियमित पदों में कटौती और टीजी-2 कर्मचारियों को हटाया गया है। साथ ही, अभियंताओं के निलंबन की तैयारी से कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।
अलीगढ़ में एक मुख्य अभियंता के निलंबन का उदाहरण देते हुए समिति ने इसे मनोबल तोड़ने वाली कार्रवाई बताया। साथ ही कहा कि कम वेतन पर काम करने वाले संविदा कर्मियों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन जानबूझकर गर्मियों से पहले ऊर्जा निगमों में अस्थिरता पैदा कर रहा है, ताकि भविष्य में निजीकरण को उचित ठहराया जा सके। जिन शहरों में यह व्यवस्था लागू की गई है, वहां आगे अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी लागू करने की तैयारी भी चल रही है।
इसी क्रम में कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (KESCO) में बिजली कर्मियों ने उत्पीड़न के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया और प्रबंधन को चेतावनी दी। वहीं, पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का आंदोलन 486वें दिन भी जारी रहा। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सारस की उड़ान से सजी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की नई पहचान


नोएडा/ लखनऊ। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने अपनी ब्रांड पहचान को वैश्विक स्तर पर अलग और प्रभावशाली बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस को अपने प्रतीक चिन्ह (लोगो) के रूप में अपनाया है। यह पहल योगी आदित्यनाथ के उस विजन को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया जा रहा है।
सारस, जो प्रदेश की समृद्ध परंपरा और प्राकृतिक संतुलन का प्रतीक है, अब एयरपोर्ट की वैश्विक पहचान का हिस्सा बन गया है। इस लोगो के माध्यम से राज्य अपनी सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

* तकनीक और पर्यावरण का संतुलित डिजाइन
एयरपोर्ट का लोगो पतली और एकीकृत रेखाओं से डिजाइन किया गया है, जो आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, गति और बेहतर कनेक्टिविटी का संकेत देता है। इसमें इस्तेमाल किया गया नीला-हरा ग्रेडिएंट तकनीकी प्रगति और इको-फ्रेंडली सोच के संतुलन को दर्शाता है, जो राज्य की ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट नीति के अनुरूप है।

* प्रगति और आत्मविश्वास का प्रतीक बनी उड़ान
लोगो में उड़ता हुआ सारस उत्तर प्रदेश के विकास, आत्मविश्वास और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है। यह राज्य को एक उभरते वैश्विक निवेश और कनेक्टिविटी हब के रूप में स्थापित करने के विजन को भी मजबूती देता है।नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह नया प्रतीक न केवल इसकी ब्रांडिंग को सशक्त बना रहा है, बल्कि इसे एक ऐसे केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, जहां आधुनिकता, संस्कृति और सतत विकास का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
“संगठन की एकजुटता ही हमारी असली ताकत” — जसवंत सिंह का कर्मचारियों से आह्वान
लखनऊ। परिवहन निगम के कर्मचारियों से एकजुट होने की अपील करते हुए संघ के प्रदेश महामंत्री जसवंत सिंह ने कहा कि यदि कर्मचारी स्वयं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तो दूसरों को दोष देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मांगों को पूरा न होने पर संगठन को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो क्या कर्मचारियों ने कभी अपने सहयोग और भागीदारी का आंकलन किया है।
उन्होंने कहा कि करीब 55 हजार कर्मचारियों के हितों की लड़ाई में यदि केवल एक-दो हजार लोग ही शामिल होते हैं, तो यह संख्या महज 5 से 10 प्रतिशत भागीदारी को दर्शाती है। ऐसी स्थिति में निगम मुख्यालय यह मान लेता है कि ये मांगें सभी कर्मचारियों की नहीं हैं, जिससे आंदोलन की प्रभावशीलता कमजोर पड़ जाती है।
जसवंत सिंह ने आगे कहा कि जब कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष करने के बजाय अलग-अलग समूहों में बंटे रहते हैं, तो उनकी मांगें कमजोर हो जाती हैं और अधिकार “भीख” की तरह प्रतीत होने लगते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अधिकार संघर्ष से मिलते हैं, न कि मांगने से।
उन्होंने कर्मचारियों से आत्ममंथन करने, एकजुट रहने और ईमानदार नेतृत्व का चयन करने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नेतृत्व निष्पक्ष और कर्मठ नहीं होगा, तो कर्मचारियों को शोषण और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता रहेगा। अंत में उन्होंने कहा कि संगठित संघर्ष और मजबूत एकता के बल पर ही कर्मचारियों के हितों की रक्षा संभव है।
हरदोई में भड़काऊ बयान पर बवाल: श्रीराम पर टिप्पणी करने वाला सपा नेता गिरफ्तार, पार्टी से भी निष्कासित

लखनऊ । हरदोई जिले में भगवान श्रीराम और माता कौशल्या पर कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव यदुनंदन लाल वर्मा का एक वीडियो वायरल होने के बाद जिले भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी नेता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो हरपालपुर क्षेत्र की एक सार्वजनिक सभा का है, जिसमें यदुनंदन लाल वर्मा भगवान श्रीराम, माता कौशल्या और हिंदू धार्मिक ग्रंथों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। हालांकि वीडियो कब का है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसके सामने आते ही हिंदूवादी संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया।
स्थिति को बिगड़ता देख हरपालपुर कोतवाली पुलिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए उप निरीक्षक विजय शुक्ल की ओर से प्राथमिकी दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार पंकज के अनुसार, आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
इस मामले में सपा के अंदर भी विरोध देखने को मिला। जिलाध्यक्ष शराफत अली ने यदुनंदन लाल वर्मा के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे शर्मनाक बताया और जानकारी दी कि उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है। साथ ही प्रदेश संगठन को भी आगे की कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
वीडियो वायरल होने के बाद जिले भर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में रहा और त्वरित कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित किया।
गौरतलब है कि यदुनंदन लाल वर्मा पहले भी कई राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं और 2008 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और वायरल वीडियो की सत्यता की भी पड़ताल की जा रही है।
आगरा में दरिंदगी की हद पार: 8 साल की मासूम की हत्या, आटे के ड्रम में छिपाया शव… मुठभेड़ में ढेर हुआ दरिंदा
लखनऊ । आगरा के ताजगंज इलाके में एक दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। 8 साल की मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या कर उसके शव को आटे के ड्रम में छिपाने वाले मुख्य आरोपी सुनील को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। इस दौरान हुई गोलीबारी में एक दरोगा भी घायल हो गए।
घटना 24 मार्च की है, जब जूता कारखाना संचालक की बेटी अचानक लापता हो गई। परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद ताजगंज थाने में मामला दर्ज कर बच्ची की तलाश शुरू की गई। पुलिस ने कई टीमें बनाकर खोजबीन शुरू की, लेकिन अगले ही दिन जो सामने आया, उसने हर किसी को सन्न कर दिया।
25 मार्च को बच्ची का शव उसी मकान में किराए पर रहने वाले सुनील के कमरे से बरामद हुआ। आरोपी ने हत्या के बाद कमरे में फैले खून को पानी से धोने की कोशिश की और शव को आटे के ड्रम में ठूंसकर छिपा दिया था। इस खौफनाक सच्चाई के सामने आते ही इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल फैल गया।
पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 12 टीमें गठित कीं और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। लगातार दबिश और तलाश के बीच 27 मार्च की रात पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी बमरौली कटारा इलाके में छिपा हुआ है।
पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की, लेकिन खुद को घिरता देख आरोपी सुनील ने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी में एक दरोगा घायल हो गए। हालात को देखते हुए पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान सुनील को गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल आरोपी को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौके से पुलिस ने बिना नंबर की स्प्लेंडर बाइक, 315 बोर का तमंचा, छह खोखे और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
इस सनसनीखेज हत्याकांड और मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई में शामिल टीम की सराहना करते हुए कहा कि इस जघन्य अपराध के आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास किया गया।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज को भी झकझोर कर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर मासूमों की सुरक्षा कब और कैसे सुनिश्चित होगी।
पीलीभीत में दरिंदगी का LIVE वीडियो: खंभे से बांधकर युवक को पीटा, फिर बाइक पर ले जाकर किया लापता

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव पौटा कला निवासी 22 वर्षीय युवक आरिफ को कुछ लोगों ने सरेआम खंभे से बांधकर बेरहमी से पीटा और फिर अधमरी हालत में उसे अपने साथ ले गए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है।
परिजनों के मुताबिक, 24 मार्च की शाम आरिफ दौड़ लगाने के लिए घर से निकला था। रास्ते में गांव के ही कुछ लोगों ने उसे घेर लिया। आरोप है कि करीब 10 से 12 लोगों ने मिलकर पहले उसे एक खंभे से रस्सी के सहारे बांध दिया और फिर लात-घूसों व डंडों से उसकी बुरी तरह पिटाई की। वीडियो में युवक को बेरहमी से पीटते हुए देखा जा सकता है, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई।
परिवार का आरोप है कि पिटाई के बाद आरोपी उसे अधमरी हालत में जबरन बाइक पर बैठाकर अपने साथ ले गए। इसके बाद से आरिफ का कोई पता नहीं चल सका है। युवक के अचानक लापता हो जाने से परिवार में दहशत और मातम का माहौल है।
पीड़ित के पिता शफीक शाह, जो ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं, ने बरखेड़ा थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी है। उन्होंने पुलिस को पिटाई का वीडियो भी सौंपा है और बेटे की जल्द से जल्द बरामदगी की गुहार लगाई है।
घटना का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर युवक की तलाश तेज कर दी है और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक ऐसी बर्बर घटनाएं होती रहेंगी।
आस्था और पर्यावरण का संगम: बागपत का पुरा महादेव बना जीरो वेस्ट तीर्थ पर्यटन का मॉडल

* बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024 से सम्मानित पुरा महादेव में ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल से सतत विकास की नई मिसाल

लखनऊ/बागपत। उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव ने ‘बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024’ का गौरव हासिल करने के बाद अब सतत और जिम्मेदार तीर्थ पर्यटन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल के तहत परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर जीरो वेस्ट व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की गई।
इस पहल के तहत मंदिर में चढ़ने वाली भेंट और उत्सव के दौरान उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन किया गया, वह भी धार्मिक परंपराओं की पवित्रता को बनाए रखते हुए। फूलों, दूध, जैविक अवशेष, प्लास्टिक बोतलों, पूजा धागों और यहां तक कि छोड़ी गई चप्पलों को भी एकत्र कर प्रोसेस कर पुनः उपयोग में लाया गया।

* कचरा नहीं, संसाधन: सफलता की मिसाल
इस अनूठी पहल के परिणाम प्रभावशाली रहे। 450 किलोग्राम से अधिक फूलों को प्रोसेस किया गया, लगभग एक टन जैविक सामग्री से खाद तैयार हुई और करीब 700 किलोग्राम प्लास्टिक को फाइबर फिल में बदला गया। 3,000 से अधिक पूजा धागों का पुनः उपयोग हुआ, 2,500 चप्पलों को मैट व इंस्टॉलेशन में बदला गया, जबकि 4,563 लीटर दूध पशु देखभाल के लिए उपयोग में लाया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार यह मॉडल दो प्रमुख स्तंभों—भेंट सामग्री की रिकवरी एवं पुनर्वितरण तथा समुदाय आधारित सर्कुलर पुनः उपयोग—पर आधारित है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिला है।
इस पहल में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही, विशेषकर महिलाओं ने छंटाई और प्रोसेसिंग कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह सिद्ध हुआ कि धार्मिक स्थल न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के भी प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
मंदिर परिसर में स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने स्वच्छ वातावरण और भेंट सामग्री के सम्मानजनक पुनः उपयोग की सराहना की। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल प्रदेश की टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक सहभागिता और सुव्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से धार्मिक स्थलों को जिम्मेदार पर्यटन के प्रभावी मॉडल में बदला जा सकता है। बागपत प्रशासन अब इस मॉडल को अन्य मंदिरों में लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर सततता और स्वच्छता को और बढ़ावा मिल सके।