भारतीय आभूषणों की विरासतः अतीत से वर्तमान तक एक निरंतर यात्रा

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ उजागर करती हैं भारतीय शिल्प, सौंदर्य और सांस्कृतिक निरंतरता का अद्भुत संगम भारत में आभूषण केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान, आस्था और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के सशक्त प्रतीक रहे हैं। बदलते समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन अवश्य हुआ है, किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि प्राचीन आभूषण शैलियाँ समय-समय पर आधुनिक फैशन में पुनः उभरती रहती हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय परंपरा की गहरी जड़ों और उसकी निरंतरता को दर्शाती है।

संचालनालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ इस सांस्कृतिक यात्रा का सजीव प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। इन मूर्तियों में अंकित आभूषण न केवल उस समय की शिल्पकला और तकनीकी दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि समाज की सौंदर्य दृष्टि और जीवन शैली को भी जीवंत रूप में सामने लाते हैं।

द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व की शुंगकालीन यक्षी प्रतिमा, भरहुत से प्राप्त, भारतीय आभूषणों के प्रारंभिक विकसित स्वरूप को दर्शाती है। विकसित कमल के मध्य अंकित इस प्रतिमा में मोतियों के पंचवली हार, कर्ण-कुंडल और बहु-लड़ी हारावली का सुंदर अंकन है। यक्षी अपने हाथों में सनाल पद्म धारण किए हुए हैं। यक्षी के चेहरे पर हल्की मुस्कान और शिरो-सज्जा में बालों का व्यवस्थित विन्यास उस समय की सौंदर्य दृष्टि को दर्शाता है।

9वीं-10वीं शताब्दी की हरिहर प्रतिमा में शिव और विष्णु का संयुक्त स्वरूप अंकित है। आधे भाग में जटामुकुट और दूसरे भाग में किरीट मुकुट, दोनों देवताओं की पहचान को स्पष्ट करते हैं। अन्य आभूषणों में केयूर, शिव सर्पकुंडल तथा विष्णु सूर्यवृत कुंडल, एकावलीहार, यज्ञोपवीत, उरूदाम धारण किए हुए हैं। हरि का वाहन गरुड मानव रूप में आलेखित हैं, तथा हर का वाहन नंदी भी प्रदर्शित हैं।

11वीं शताब्दी की परमारकालीन शिव-पार्वती प्रतिमा में 'रावणानुग्रह' का दृश्य अंकित है। शिव-पार्वती को कैलाश पर्वत पर अपने अपने वाहन नंदी एवं सिंह पर बैठा दिखाया गया हैं। पार्वती जटामुकुट धारण किए हुए हैं। पादपीठ पर रावण को कैलाश पर्वत उठाने के लिए घुटने के बल मुड़े हुए दिखाया गया हैं। गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा-विष्णु के साथ विद्याधर एवं गन्धों का आलेखन हैं। शिव के कानों में चक्राकार कर्णकुंडल, गले में एकावली (मुक्तामाला) तथा उसके ऊपर तीन लड़ी वाला हार दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त भुजाओं में केयूर (भुजबंध) अलंकरण को और समृद्ध बनाते हैं। एक बनमाला भी नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई गई है, जिसे पुष्पमाला के रूप में सजाया गया है।

पार्वती के कानों में भिन्न प्रकार के कुंडल; एक ओर चक्रकुंडल और दूसरी ओर ताटंक दर्शाए गए हैं। गले के आभूषण में हारावली मध्य भाग से नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई देती है, और भीतर की ओर स्तनसूत्र का भी अंकन है।

11वीं शताब्दी की कलचुरी कला में आभूषणों की सूक्ष्मता और जटिलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सुर सुंदरी स्खलित वसना प्रतिमा की भावांकन में सरलता, चक्र-कुंडल, एकावली, चंद्रहार, स्तनसूत्र, कुचबंध, केयूर, कंकण धारण किए हुए हैं। इस प्रतिमा में नायिका के स्नानोपरांत वस्त्र धारण करने का आलेखन है।

11-12वीं शताब्दी की कच्छपघात शैली की वैष्णवी प्रतिमा में क्षेत्रीय कला का प्रभाव स्पष्ट है। भुजाओं में शंख, चक्र, गदा एवं पद्म धारण किए हुए हैं। देवी किरीट मुकुट कुंडल, हार, स्तनहार, कटीमेखला, वैजयंती माला, नूपुर, कंगन, बाजूबंध आदी आभूषणों से अलंकृत हैं। पादपीठ पर परिचारक देवी से आशीर्वाद ले रहा हैं।

उमा-महेश्वर अपने अपने वाहन सिंह एवं नंदी पर बैठे हुए जटा मुकुट, हार, बाजूबंद, कटीमेखला, नूपुर धारण किए हैं। प्रतिमा में उमा-महेश्वर को एक दूसरे की ओर निहारते हुए दिखाया गया हैं। चतुर्भुजी शिव की भुजाओं में त्रिशूल, सर्प, कमलपुष्प अंकित हैं। पार्वती की दाहिनी भुजा शिव के स्कन्ध एवं बांयी भुजा में दर्पण लिए हैं।

समभंग में स्थानक देवी के घुटने के नीचे का भाग खंडित हैं। द्विभुजी देवी की दायीं भुजा में अक्षमाला, बांयी भुजा में कमंडल का अंकन हैं। अलंकृत केश दोनों कंधों पर फैलें हुए हैं। देवी कर्णकुंडल, ग्रैवेयक, केयूर, कटीमेखला, पारदर्शी अधोवस्त्र आदि से अलंकृत हैं।

संयुक्त निदेशक डॉ. मनीषा शर्मा के शब्दों में, भारतीय आभूषण केवल अलंकरण नहीं, बल्कि समय, समाज और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ हैं। इन मूर्तियों में अंकित प्रत्येक कुंडल, हार और कटिमेखला अपने युग की सौंदर्य दृष्टि और सांस्कृतिक मूल्यों की कहानी कहती है। संचालनालय में संरक्षित ये धरोहर हमें यह समझने का अवसर देती हैं कि परंपरा कभी स्थिर नहीं होती; वह निरंतर विकसित होती है, फिर भी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी रहती है। आज के आभूषणों में जो रूप दिखाई देते हैं, वे इन्हीं प्राचीन परंपराओं की पुनरावृत्ति हैं, जो अतीत और वर्तमान के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती हैं।

कांग्रेसी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की भतीजी ने करोड़ों में बेच दी वक्फ संपत्ति

स्टे के बाद भी वक्फ कब्रिस्तान पर तन रहीं दुकानें

• नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति हो रही खुर्द बुर्द

खान आशु 

भोपाल। प्रदेश की संस्कारधानी कहलाने वाली जगह से सटे नरसिंहपुर जिले में भू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। संस्कारों को धता दिखाते हुए यहां एक वक्फ संपत्ति को औने पौने दाम पर बेच दिया गया है तो दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों के स्थान कब्रिस्तान को भी निशाना बनाने से नहीं चूका गया है। जमीन का सौदा करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया गया है, जिसपर जिला पंजीयक ने भी नजर नहीं डाली है। जबकि स्टे हो चुके कब्रिस्तान की जमीन पर हो रहे निर्माण पर भी प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। कांग्रेसियों द्वारा किए जा रहे इस गोरखधंधे को भाजपा शासनकाल में भाजपाइयों की शिकायत पर भी असर नहीं हो रहा है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान जैसे कई लोग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से लेकर वक्फ बोर्ड के जिम्मेदारों से गुहार लगा चुके हैं।

मामला नरसिंहपुर जिले का है। यहां जिला मुख्यालय की नगरीय सीमा में स्थित है वक्फ दरगाह जहांगीर शाह एवं इमामबाड़ा। खसरा नंबर 35/1 एवं 35/2 पर बसी इस कृषि भूमि का आधिपत्य मप्र वक्फ बोर्ड का है, इसके रिकॉर्ड में यह दर्ज है। लेकिन कुछ भू माफियाओं की बदनीयत इस जमीन पर पड़ गई, जिसके लिए उन्होंने कुछ कूटरचित दस्तावेज बनाकर इसका सौदा कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की भतीजी शालिनी प्रजापति की इसमें मुख्य भूमिका है। उन्होंने खुद को इस वक्फ संपत्ति का मालिक करार देते हुए इसका सौदा विश्वास गोटे नामक व्यक्ति को कर दिया है। जानकारी के मुताबिक करीब एक करोड़, 24 रूपये के इस सौदे पर जिला पंजीयक ने भी बिना पड़ताल के सहमति की मुहर लगा दी है। प्रशासनिक अधिकारियों की जल्दबाजी का आलम यह है कि आनन फानन में वे इस विवादास्पद सौदे पर नामांतरण करने को भी तैयार हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्फ अमेंडमेंड बिल की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

शासकीय स्टे को भी धता

नरसिंहपुर जिले की तहसील है गाडरवाड़ा। जिसका एक गांव है कुंडिया। यहां मुस्लिम समाज का एक बरसों पुराना कब्रस्तान है, जो वक्फ बोर्ड के आधिपत्य में है। इस कब्रिस्तान पर भी नजर तिरछी कर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा। जिससे भविष्य में कब्रिस्तान की जगह कम तो होगी ही साथ एक नए विवाद की शुरुआत इससे हो सकती है। जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी ने इस निर्माण पर स्टे दे दिया है। लेकिन हठधर्मिता का आलम यह है कि स्टे के बावजूद यहां निर्माण कार्य सतत जारी है।

शिकायत सीएम से लेकर अध्यक्ष तक 

शहर के जिम्मेदारों और फिक्रमंद लोगों में शामिल जिला वक्फ कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के हुसैन पठान ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से शिकायत की है। उन्होंने वक्फ संपत्ति की इस बर्बादी को रोकने के लिए बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल से भी गुहार लगाई है। पठान ने कहा कि इस तरह वक्फ की बर्बादी से कल के लिए नया उदाहरण तय होगा, साथ ही इससे समाज में भी गलत संदेश जाएगा।

* इनका कहना है 

नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति के बारे में शिकायत मिली है। जिले के अधिकारियों को स्थिति को दुरुस्त करने के लिए कहा जा रहा है।

डॉ. सनव्वर पटेल 

अध्यक्ष 

मप्र वक्फ बोर्ड

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा समावेशी विकास : कृष्णा गौर

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी ईद की मुबारकबाद 

भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने प्रदेशवासियों को ईद की मुबारकबाद एवं बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ईद केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे, त्याग और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है, जो समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का कार्य करता है। राज्य मंत्री गौर ने प्रदेशवासियों से ईद के पावन अवसर पर आपसी सद्भाव, शांति और एकता को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लेने की अपील की।

राज्यमंत्री गौर ने अपने संदेश में कहा कि सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र के साथ कार्य करते हुए समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कई प्रभावी पहलें संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक एवं मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा जारी रखने में सहायता मिल रही है। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग सहायता योजनाएँ भी संचालित हैं, जिससे युवा वर्ग को बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया गया है, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षित कर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

राज्यमंत्री गौर ने बताया कि मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें आधुनिक विषयों को शामिल कर विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया जा रहा है। साथ ही, अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं, ताकि इन क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का संचालन करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका वास्तविक लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचे, इसके लिए पारदर्शिता, मॉनिटरिंग और जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

नहीं नजर आया चांद, आज होगा तीसवां रोजा, कल 21 को होगी ईदुल फितर

  • तैयारियों को अंतिम रूप देने उमड़ा शहर
  • काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी पढ़ाएंगे ईदगाह में पहली नमाज 

भोपाल। रमजान महीने का 29वा रोजा रखने के बाद गुरुवार शाम को आसमान में चांद देखने के लिए शहर मोती मस्जिद में जमा हुआ। साफ आकाश के बीच भी चांद ने अपनी आमद देकर ईदुल फितर की खुशियों का ऐलान नहीं किया। रूआते हिलाल कमेटी ने आसपास के बड़े शहरों और छोटे गांवों से भी इसकी तस्दीक की, लेकिन कहीं से भी ऐसी कोई खबर नहीं आई। जिसके बाद काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी ने शनिवार को ईद का त्यौहार मनाए जाने का ऐलान कर दिया। 

मोती मस्जिद में जमा हुए उलेमाओं और लोगों ने इस बात की तस्दीक कर दी कि गुरुवार को ईद का चांद दिखाई नहीं दिया है। जिसके बाद जहां गुरुवार को नमाज ए ईशा के बाद तरावीह की आखिरी नमाज अदा की गई। शुक्रवार को जुमा की नमाज अदा की जाएगी, जिसे जुमातुल विदा के रूप में मनाया जाएगा। यह जुमा इसलिए भी खास हो गया है कि इस रमजान महीने में पड़ने वाला यह पांचवा जुमा होगा।

नहीं थे इमकानात 

रमजान महीने की शुरुआत 29वें चांद के साथ हुई थी, सऊदी अरब में भी बुधवार को चांद दिखाई नहीं दिया था। आमतौर पर सऊदी में ईद का त्यौहार भारत से एक दिन पहले मनाया जाता है। इन हालात को देखकर यह अंदाज लगाया जा रहा था कि भारत के आसमान पर भी ईद की खुशियों का पैगाम गुरुवार की बजाए शुक्रवार को ही नमूदार होगा। अब यहां शनिवार को चांद दिखाई नहीं देने पर भी ईद मना की जाएगी, कारण यह भी है कि शुक्रवार को महीने के 30 रोजे पूरे हो जाएंगे।

हुआ बाजारों का रुख

ईद की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शहर का रुख बाजारों की तरफ बढ़ गया। शहर के चौक बाजार, नदीम रोड, लखेरापुरा, जुमेराती, लक्ष्मी टॉकीज, बुधवारा, इतवारा, छावनी, जहांगीराबाद आदि बाजारों में पैर न रखने जैसे हालात बन गए। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस की यातायात विंग ने शहर में कई जगह बेरीकेटिंग भी कर दी, जिससे वाहनों की भीड़ से पैदल ग्राहकों को दिक्कत न हो।

अब क्षेत्रीय बाजारों का जोर

शहर के परम्परागत बाजारों के अलावा शहर में कई जगह नए बाजार भी आकार लेने लगे हैं। टीला जमालपुरा, सिंधी कॉलोनी चौराहा, निजामुद्दीन कालोनी, जहांगीराबाद और बाग के छोटे स्थाई बाजारों के अलावा शहर में कई जगह अस्थाई ईद बाजार भी इन दिनों सजे हुए हैं।

यह होगा नमाज का वक्त 

ईदगाह– सुबह 7:30 बजे

जामा मस्जिद–सुबह 7:45 बजे

ताज-उल-मसाजिद – सुबह 8:00 बजे

मोती मस्जिद – सुबह 8:15 बजे

मस्जिद रब्बानी, एमपी नगर – सुबह 9:00 बजे

  • मसाजिद कमेटी की शहर को ताकीद

मसाजिद कमेटी भोपाल ने ईद की नमाज को लेकर शहर के नाम कुछ ताकीद की हैं। कमेटी के प्रभारी सचिव सैयद उवैस अली द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि ईदगाह से पहले किसी भी मस्जिद में नमाज ए ईद अदा नहीं की जाए।

  • काजी साहब या रूआते हिलाल कमेटी की तस्दीक के बिना शहर में कहीं भी ईद की खुशियों के गोले न दागे जाएं।
  • ईद की नमाज अदा करने से पहले सभी लोग अपना सदका ए फितर ₹70 प्रति व्यक्ति अदा करें।
  • ईदगाह में नमाज पढ़ने के लिए लोग समय से पहले पहुंचे।
  • अपने वाहन पार्किंग में निर्धारित स्थान पर लगाएं।
  • व्यवस्था में लगे पार्किंग वालेंटियर्स को सहयोग करें।
यारा तेरी यारी को... 46 बरस की दोस्ती जिंदा, आज भी जनार्दन ईद में, तो इरफान होते हैं दिवाली में शामिल

  • पंकज, राजेश, अशफाक और कमल बरसों भी जुड़े हैं एक डोर से 
  • गुड़ी पड़वा हो या रमजान एक दूसरे की मिठाई से नहीं गुरेज


खान आशु 

भोपाल। साल 1980... धार जिला मुख्यालय का आनंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय। पंकज ग्वालियर से तो जनार्दन, इरफान, राजेश, अशफाक और कमल किसी मुहल्ले के स्कूल से आकर यहां जमा हुए थे। सहपाठी दोस्त बने। दोस्ती गहराती रही, यहां तक कि कॉलेज तक भी साथ नहीं छूटा और स्नातक और स्नातकोत्तर पढ़ाई भी साथ ही चलती रही। इस बीच कई होली, कई रमजान, अनेक दिवाली और दर्जनों ईद के त्यौहार साथ मनाने का क्रम जारी रहा। जारी रहने का यह सिलसिला अब दशकों बाद भी बना हुआ है। इरफान की मास्टरी, राजेश की महिला एवं बाल विकास विभाग की सरकारी नौकरी, अशफाक की पत्रकारिता या पंकज का इंश्योरेंस वर्क या जनार्दन का मेडिकल काम कभी बाधा नहीं बना। बस फर्क इतना हुआ कि भौतिक मुलाकातों में कमी आ गई और उसकी जगह सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने ले ली, जिसकी डोर ने आज भी इन यारों की यारी को सरसब्ज रखा हुआ है।

स्कूल कॉलेज से हाथ छुड़ाते वक्त तय नहीं था कि कौन किस रास्ते आगे बढ़ेगा। लेकिन जहां राजेश ने सरकारी नौकरी के साथ खुद को धार की परिधि में ही बांध लिया था, वहीं इरफान भी चंद कदम दूर मांडू जाकर ठहर गए। पंकज और जनार्दन ने इंदौर को ठिकाना बनाया तो दोनों के घर भी संयोग से एक ही कालोनी में आ लगे। अशफाक अखबारों की दुनिया के साथ बहते हुए भोपाल तक आकर रुका, जबकि कमल पटेल ने अपनी पैतृक नगरी धार का दामन छोड़ पाने का मोह नहीं पाला।

  • पंकज की पारिवारिक दस्तक 

पंकज गुप्ता सब दोस्तों में ऐसा शख्स थे, जिनके घर पहला टीवी आया था, हमारा नियम से चित्रहार, साप्ताहिक या फिल्म देखने जाने का सिलसिला चलता रहा। यह क्रम ऐसा था कि दिन याद रखकर पंकज के पिताश्री घर आते तो हम लोगों के लिए भी खानपान के सामान साथ लेकर आते। जब बहन सपना दुल्हन बनी तो हम लोगों ने दिल्ली तक पहुंचकर शादी में शिरकत की और बहन को विदा किया।

  • मंडली का पहला दूल्हा राजेश

राजेश वाणी इस मंडली का पहला व्यक्ति था, जिसने सबसे पहले सात फेरे लिए थे। इरफान, पंकज के साथ अच्छे दोस्तों की तरह जोबट तक पहुंचे और देर रात होने वाले फेरों के लिए जागरण भी किया। हालांकि शादी के बाद जब भी हम लोग इंदौर जाकर पंकज के यहां ठहरते, पंकज ने राजेश के पास सोने से इनकार कर दिया था। वजह क्या थी, यह वही जानते हैं।

  • इरफान ने घुमाया आधा भारत

सरकारी मास्टर बनने से पहले इरफान पठान एक रोलिंग मिल में पर्चेस मैनेजर हुआ करते थे। जमाना कैश पेमेंट का था, डिजिटल लेनदेन उस समय नहीं होता था। कैश साथ होने की अपनी रिस्क और बनिए का दिमाग अपनी जगह। फैक्ट्री मालिक विष्णु सेठ ने मशवरा दिया कि अशफाक को भी साथ ले जाया करे इरफान। अच्छी जगह रुकने और अच्छा खाना खाने के साथ उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान का कोना कोना नापने का मौका दिया। इस दौरान हम कई बार अजमेर घूमते तो अनेक बार पावागढ़ के दर्शन से भी नहीं चूकते।

  • इस कड़ी का एक और एंगल

पंकज, इरफान, जनार्दन, राजेश, अशफाक की इस मंडली का एक और हिस्सा हुआ करते थे, नाम था श्रीचंद मलानी। कारोबार के पक्के और व्यवहार के सच्चे इस मित्र के साथ बरसों की हजारों यादें अब भी बंधी हुई हैं। बस यह है कि आज भौतिक रूप से वह हमारे साथ नहीं हैं।

  • अब सोशल मीडिया पर जीवित संपर्क

काम की व्यस्तता ने सभी लोगों को भौतिक रूप से दूर जरूर कर दिया है, लेकिन वास्तविकता यह है आज भी दिल से सब एक दूसरे से उतने ही जुड़े हैं। वही अपनापन, वही मिलने की शिद्दत, वही एक दूसरे के लिए फिक्र। इरफान के बेटे की शादी हो या जनार्दन की सालगिरह, अशफाक के घर वालिद के दुनिया से रुखसत होने का गम, या राजेश या कमल के घर कोई मांगलिक कार्य, आज भी सभी उसी सम्मान और व्यवहार के साथ याद किए जाते हैं। इनकी 46 बरस की दोस्ती को जिंदा रखने के लिए एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया गया है स्कूल फ्रेंड्स, जो इस कड़ी को मजबूती देता रहता है। इसमें कुछ स्कूली दौर के साथी देवेंद्र काशिव भी मौजूद हैं और जितेंद्र आहूजा भी। इस ग्रुप से हटकर इस जमाने में साथ रहीं डॉ कुसुम बौरासी और नसीम खान भी गाहे बगाहे मुलाकातों में शामिल हैं।

साहित्यकार प्रवीण गुगनानी को प्रदान किया गया एनलाल जैन “स्वदेशी” सम्मान

भोपाल। दुष्यंत स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के तत्वाधान में आयोजित एनलाल जैन स्वदेशी सम्मान बैतूल के साहित्यकार प्रवीण गुगनानी को प्रदान किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोज श्रीवास्तव ने की और बतौर मुख्य अतिथि हेमंत मुक्तिबोध उपस्थित रहे। 

ज्ञातव्य है कि एनलाल जैन बैतूल जिले के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री और संवेदनशील साहित्यकार रहे हैं जिनकी उंगली पकड़कर साहिब राव राजुरकर जैसे कई छात्रों ने साहित्य और साहित्य की दुनिया की बारहखड़ी सीखी थी। उनके प्रेरणास्रोत का दायरा सम्पूर्ण बैतूल जिले में फैला था। उन्होंने लंबे समय तक “ताप्ती के तेवर” पत्रिका का संपादन किया और “वीणा के तार” एवं “अनुभूति की रेखाएँ” काव्य संग्रह प्रकाशित हुए। 

उनकी स्मृति में पहला सम्मान बैतूल के साहित्यकार प्रवीण गुगनानी को प्रदान किया गया।  

प्रवीण गुगनानी समकालीन हिंदी साहित्य और शिक्षण क्षेत्र से जुड़े एक सक्रिय व्यक्तित्व हैं। वे मुख्यतः लेखन, चिंतन और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में वैचारिक जागरूकता फैलाने के लिए जाने जाते हैं।

सर्वप्रथम एनलाल जैन की पुत्री करुणा राजुरकर ने पिता का मार्मिक स्मरण करते हुए कहा कि हमारे बाबू जिनका जन्म छिंदवाड़ा में हुआ था परन्तु उनकी कर्मभूमि बैतूल जिला रही। इसलिए उनकी स्मृति में यह सम्मान इन दो जिलों की साहित्यिक विभूतियों को प्रदान किया जाता है। 

प्रवीण गुगनानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि एनलाल जैन एक कुटुंब प्रणाली की उत्पत्ति थे और उन्होंने परिवार प्रथा को मज़बूत करने हेतु समर्पित भाव से कार्य किया था। वे कृषकाय लेकिन पक्की धारणा के व्यक्ति थे। मैं उनके नाम का सम्मान प्राप्त कर अनुगृहीत हूँ। 

रामराव वामनकर ने एनलाल जैन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे दुष्यंत संग्रहालय के अध्यक्ष भी रहे थे। संग्रहालय से जुड़ी नीतियां बनाने मे उनका महती योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। लक्ष्मीकांत जवणे ने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि एनलाल जैन और प्रवीण गुगनानी मुलताई में ज़मीन से जुड़े सामाजिक सरोकार के प्रमुख व्यक्तित्व थे। अशोक निर्मल ने बताया कि 

अपनी स्मृतियों को साझा किया। 

इस अवसर पर अध्यक्ष की आसंदी से बोलते हुए मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि करुणा जी ने पिता जी स्मृति में सम्मान स्थापित कर साहित्यिक पितृऋण का उतारा किया है। जो निश्चित ही सराहनीय कदम है। 

मुख्य अतिथि हेमन्त मुक्तिबोध ने कहा कि आज हम पहचान के संकट से गुज़र रहे हैं। एनलाल जैन जैसे महानुभाव एक ऐसी पहचान रखते थे जो भारतीय परंपरा से जाकर जुड़ती थी। 

महेश सक्सेना ने स्वागत उद्बोधन में एनलाल जैन के व्यक्तित्व के बारे में सभी अतिथियों को परिचित कराते हुए कहा कि उन्होंने प्रभातपट्टन में प्राचार्य के रूप में अधिकांश समय व्यतीत किया था। 

एनलाल जैन की नातिन विशाखा राजुरकर ने उपस्थित अतिथियों का आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन घनश्याम मैथिल ने किया। इस अवसर पर नगर के गणमान्य साहित्यकार मौजूद रहे।

अटल बिहारी वाजपई हिंदी विवि को बम से उड़ाने की धमकी

* बम स्क्वायड ने की छानबीन, नहीं हुई बम की पुष्टि

भोपाल। अटल बिहारी वाजपई हिंदी विश्वविद्यालय में अधिकृत मेल आईडी पर आज एक मेल आया जिसमें विश्वविद्यालय को बम से उड़ने की धमकी दी गई। जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर देवानंद हिडोलिया के निर्देश पर परिसर को खाली कर दिया गया। 

मेल मिलते ही प्रबंधन द्वारा पुलिस को सूचना दी गई। Sdop अंतिम समाधिया के निर्देशन में डॉग एवं बम स्क्वॉड ने पूरे परिसर में छानबीन कर बम की जानकारी झूठी होने की पुष्टि की। कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर हिंडोलिया ने सभी पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

हर्ष और उमंग के साथ क्षत्रिय मेर समाज ने मनाया होली मिलन समारोह

भोपाल। राजधानी में श्री शिव हनुमान मंदिर मेर समाज नारियल खेड़ा में मेर समाज सामाजिक उत्थान समिति द्वारा क्षत्रिय मेर समाज का होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। जिसमें अनेक समाज बंधुओं ने भाग लिए, मिलन समारोह में फूलों एवं गुलाल से होली फ़ाग गीतों से संग खेली गई। सभी समाज बंधुओं ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दी एवं मेर समाज की एकता को मजबूत करने हेतु सभी ने संकल्प लिया। इस अवसर पर मेर समाज प्रदेश अध्यक्ष हेमराज मेर, प्रदेश सचिव मुकेश मेर, वरिष्ठ समाज सेवी वी पी मेर, फ़िल्म कलाकार दयाराम मेर, तुलाराम मेर, मनीष मेर, मोहर सिंह मेर, योगेंद्र भदौरिया जी, राकेश मेर जी, खेमचंद पटेल, सतेंद्र सिंह, मुकेश भदौरिया, धनसिंह मेर एवं अन्य समाज बंधु उपस्थित रहे।

इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में बनेंगे “गीता भवन” : सीएम मोहन यादव

  • 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान
  • 100 निकायों में भूमि उपलब्ध, 4 शहरों में ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाए जा रहे हैं। गीता भवन के माध्यम से दार्शनिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास है। इन केन्द्रों में युवा वर्ग को गीता के निष्काम कर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ने और शोधार्थियों के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराना गीता भवन का मुख्य उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को विस्तार देने के लिए 'गीता भवन' परियोजना को अब वृहद स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 413 शहरों में गीता भवन निर्माण की योजना के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में भारतीय दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श के लिए एक आधुनिक अवसंरचना तैयार करना है। इंदौर और जबलपुर में निर्मित गीता भवन की सफलता को आधार मानते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

  • 4 शहरों में प्रोजेक्ट्स स्वीकृत, 100 निकायों में भूमि चिन्हांकित

 योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए विभाग ने चार प्रमुख शहरों में ब्राउनफील्ड (Brownfield) प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इनमें रीवा (5 करोड़ रुपये), छिंदवाड़ा (2.5 करोड़ रुपये), कटनी (2.4 करोड़ रुपये) तथा खंडवा (2 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 नगर निगमों सहित 100 नगर पालिकाओं में 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है, जिनकी डीपीआर (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शेष 313 नगरीय निकायों में भी भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है और जिला कलेक्टरों के माध्यम से आवंटन की प्रक्रिया प्रचलन में है।

  • आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे सांस्कृतिक केंद्र

प्रत्येक 'गीता भवन' को एक बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके प्रमुख घटकों में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम: वृहद स्तर पर सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजनों के लिये ज्ञान का केंद्र: ज्ञानार्जन के लिए समृद्ध लाइब्रेरी एवं हाई-टेक ई-लाइब्रेरी। व्यावसायिक एवं जन-सुविधाएं: कैफेटेरिया और विशेष रूप से पुस्तकों एवं आध्यात्मिक सामग्री के लिए समर्पित विक्रय केंद्र शामिल हैं।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा ने घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की

  • राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के अधिकारियों को जिले में निर्बाध गैस आपूर्ति के दिये निर्देश

 भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले में घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि नियमित घरेलू गैस सिलेण्डर आपूर्ति की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराई जाय। बुकिंग के आधार पर गैस लेने वाले उपभोक्ताओं को सुगमता से गैस सिलेण्डर मिले। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अधिकारियों से फोन से रीवा जिले में नियमित गैस सिलेण्डर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस बात के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं कि जिले में नियमित गैस सिलेण्डर की आपूर्ति होती रहे और बुकिंग का बैकलाग समाप्त हो जाय और लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेण्डर मिलता रहे। 

  कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि सर्वर के ठीक ढंग से कार्य करने से गैस की आनलाइन बुकिंग हो रही है। रीवा शहर में गैस की उपलब्धता के अनुसार वितरण किया जा रहा है। नियमित आपूर्ति के सभी प्रयास जारी हैं ताकि बैकलाग को पूरा करते हुए लोगों को सुगमता से गैस सिलेण्डर का वितरण हो सके। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों ने गैस वितरण में प्रशासन द्वारा दिये गये सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण की सुगम व्यवस्था के लिए एजेंसियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी, जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश ताण्डेकर सहित गैस एजेंसी के संचालक उपस्थित रहे।