सिरसा के जामा मस्जिद में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ईद का त्योहार।
संजय द्विवेदी प्रयागराज।यमुनानगर अन्तर्गत मेजा क्षेत्र के सिरसा कस्बे की जामा मस्जिद में ईद का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह से ही नमाजियों की भीड़ मस्जिद की ओर उमड़ने लगी। लोगों ने नए कपड़े पहनकर, इत्र लगाकर और सज-धज कर ईदगाह व मस्जिद पहुंचकर नमाज अदा की। निर्धारित समय पर ईद की नमाज अदा की गई,जिसमें इमाम साहब ने सभी को अमन,शांति और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।“ईद मुबारक” की गूंज पूरे इलाके में सुनाई देती रही। छोटे बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला, जो नए कपड़े पहनकर अपने बड़ों से ईदी लेने में खुश नजर आए। वहीं महिलाओं ने भी घरों में तरह-तरह के पकवान जैसे सेवइयां, मिठाइयां और अन्य व्यंजन तैयार किए।इस मौके पर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया।मस्जिद के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए ज़गए थे, जिससे त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्था का जायजा लिया।ईद का यह पर्व आपसी प्रेम भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है।सिरसा में भी इस त्योहार ने समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया। सभी समुदाय के लोगों ने एक- दूसरे के घर जाकर बधाइयां दीं और मिठाइयां बांटीं।कुल मिलाकर सिरसा में ईद का त्योहार शांति सद्भाव और उल्लास के वातावरण में मनाया गया, जिसने लोगों के दिलों में खुशी और एकता का संदेश भर दिया।पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष श्याम कृष्ण और पप्पू यादव सुद्दू अनस सबनाएं कुरैशी मोहम्मद आरिफ समीर इरफान अली सानू कुरेशी मिराज अंसारी टॉपिक उपस्थित रहे




संजय द्विवेदी प्रयागराज।झूंसी क्षेत्र की 67 वर्षीय महिला पिछले लगभग एक वर्ष से भोजन के बाद भारीपन बार-बार कच्ची डकार उल्टी गले में जलन और भोजन के मुंह में वापस आने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी।इन लक्षणों के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था और दवाइयों से केवल अस्थायी राहत मिल पा रही थी।लगातार परेशानी के बाद मरीज ने स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (SRN) में परामर्श लिया।यहां एंडोस्कोपी सहित विस्तृत जांच में उन्हें हायटल हर्निया नामक बीमारी का पता चला।इस स्थिति में पेट का ऊपरी हिस्सा अपनी जगह से खिसककर छाती में चला जाता है,जिससे एसिड रिफ्लक्स और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।हायटल हर्निया का प्रारंभिक उपचार दवाइयो और जीवनशैली में बदलाव से किया जाता है, लेकिन जब इनसे आराम नहीं मिलता और मरीज की दिनचर्या प्रभावित होने लगती है, तब सर्जरी आवश्यक हो जाती है।इस केस को और जटिल बनाता था मरीज का पूर्व चिकित्सा इतिहास।उन्हें पहले थायरॉयडेक्टॉमी हिस्टेरेक्टॉमी और रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी हो चुकी थी जिससे पेट के अंदर चिपकाव(एड्हीजन) होने की संभावना अधिक थी। ऐसे में ऑपरेशन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।इन सभी परिस्थितियो को ध्यान में रखते हुए सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.वैभव श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने सावधानीपूर्वक योजना बनाकर मरीज का सफलतापूर्वक लैप्रोस्कोपिक फंडोप्लिकेशन ऑपरेशन किया।टीम में डॉ.तरुण कालरा डॉ.निशांत शुक्ला डॉ.हर्षित शर्मा डॉ. सृष्टि सिकदर और डॉ.सौरभ मिश्रा शामिल रहे।निश्चेतना विभाग से डॉ.शिवेन्दु ओझा और डॉ. साक्षी सिंह के मार्गदर्शन में डॉ. पल्लवी सूद एवं डॉ.उत्कर्ष मजूमदार ने सहयोग किया। ऑपरेशन थिएटर में प्रमिला राय दिनेश फ़ैयाज़ एवं अन्य कर्मचारियो की महत्वपूर्ण भूमिका रही।यह एक आधुनिक मिनिमली इनवेसिव सर्जरी है जिसमें छोटे चीरे के माध्यम से पेट के ऊपरी हिस्से को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि एसिड रिफ्लक्स रुक जाए।ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और उल्टी रिगर्जिटेशन व गले की जलन जैसी समस्याओ में स्पष्ट सुधार के बाद उन्हे छुट्टी दे दी गई।पहले इस प्रकार की सर्जरी के लिए मरीजों को लखनऊ वाराणसी या दिल्ली जाना पड़ता था लेकिन अब यह सुविधा प्रयागराज में ही उपलब्ध हो गई है।डॉ.वैभव श्रीवास्तव ने आम जनता से अपील की है कि लंबे समय तक सीने या गले में जलन खट्टी डकार या भोजन का बार-बार ऊपर आना जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उचित उपचार से हायटल हर्निया जैसी बीमारी का सफल इलाज संभव है।डॉ.वैभव श्रीवास्तव ने आगे बताया कि हायटल हर्निया के जटिल मामलों में भी यदि सही समय पर पहचान और उचित योजना के साथ उपचार किया जाए, तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा सुरक्षित और स्थायी समाधान संभव है।आधुनिक तकनीकों के उपयोग से मरीज को कम दर्द शीघ्र रिकवरी और बेहतर जीवन गुणवत्ता मिलती है।
2 hours and 3 min ago
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