सरदार पतविन्दर सिंह ने 'धुरंधर 2 फिल्म' पर सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस-आहत करने के आरोप लगाए।
तत्काल सिख समुदाय से सार्वजनिक माफी मांगे और ऐसे दृश्यों को फिल्म,पोस्टर और ट्रेलर से तुरंत हटाया जाए।
फिल्म में सिख किरदार द्वारा धूम्रपान किया जा रहा है
विश्वनाथ प्रताप सिंह
प्रयागराज। भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविन्दर सिंह ने आदित्य धर द्वारा निर्देशित और रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म 'धुरंधर 2' (जिसे 'धुरंधर द रिवेंज' भी कहा जा रहा है) फिल्म 'धुरंधर 2' को तत्काल रोक लगाई जाएl19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह ने कहा कि फिल्म में सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत पहुंचा जा रहा है l फिल्म में
सिख किरदार द्वारा धूम्रपान किया जा रहा है फिल्म में रणवीर सिंह एक सिख किरदार (जसकीरत सिंह रंगी) की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें धूम्रपान (सिगरेट पीते हुए) करते हुए दिखाया गया है।जो धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ सिख धर्म में तंबाकू और धूम्रपान पूरी तरह से वर्जित है। सिखों के लिए यह एक अत्यंत पवित्र और कड़ाई से पालन किए जाने वाले नियम के खिलाफ है।क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह ने कहा कि अपमानजनक चित्रण पगड़ी पहने हुए एक सिख पात्र को धूम्रपान करते हुए दिखाना सिख धर्म के सिद्धांतों का अपमान है और यह धार्मिक रूप से असंवेदनशील है।
क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह ने कहा कि तत्काल सिख समुदाय से सार्वजनिक माफी मांगे और ऐसे दृश्यों को फिल्म,पोस्टर और ट्रेलर से तुरंत हटाया जाए।




संजय द्विवेदी प्रयागराज।झूंसी क्षेत्र की 67 वर्षीय महिला पिछले लगभग एक वर्ष से भोजन के बाद भारीपन बार-बार कच्ची डकार उल्टी गले में जलन और भोजन के मुंह में वापस आने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी।इन लक्षणों के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था और दवाइयों से केवल अस्थायी राहत मिल पा रही थी।लगातार परेशानी के बाद मरीज ने स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (SRN) में परामर्श लिया।यहां एंडोस्कोपी सहित विस्तृत जांच में उन्हें हायटल हर्निया नामक बीमारी का पता चला।इस स्थिति में पेट का ऊपरी हिस्सा अपनी जगह से खिसककर छाती में चला जाता है,जिससे एसिड रिफ्लक्स और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।हायटल हर्निया का प्रारंभिक उपचार दवाइयो और जीवनशैली में बदलाव से किया जाता है, लेकिन जब इनसे आराम नहीं मिलता और मरीज की दिनचर्या प्रभावित होने लगती है, तब सर्जरी आवश्यक हो जाती है।इस केस को और जटिल बनाता था मरीज का पूर्व चिकित्सा इतिहास।उन्हें पहले थायरॉयडेक्टॉमी हिस्टेरेक्टॉमी और रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी हो चुकी थी जिससे पेट के अंदर चिपकाव(एड्हीजन) होने की संभावना अधिक थी। ऐसे में ऑपरेशन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।इन सभी परिस्थितियो को ध्यान में रखते हुए सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.वैभव श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने सावधानीपूर्वक योजना बनाकर मरीज का सफलतापूर्वक लैप्रोस्कोपिक फंडोप्लिकेशन ऑपरेशन किया।टीम में डॉ.तरुण कालरा डॉ.निशांत शुक्ला डॉ.हर्षित शर्मा डॉ. सृष्टि सिकदर और डॉ.सौरभ मिश्रा शामिल रहे।निश्चेतना विभाग से डॉ.शिवेन्दु ओझा और डॉ. साक्षी सिंह के मार्गदर्शन में डॉ. पल्लवी सूद एवं डॉ.उत्कर्ष मजूमदार ने सहयोग किया। ऑपरेशन थिएटर में प्रमिला राय दिनेश फ़ैयाज़ एवं अन्य कर्मचारियो की महत्वपूर्ण भूमिका रही।यह एक आधुनिक मिनिमली इनवेसिव सर्जरी है जिसमें छोटे चीरे के माध्यम से पेट के ऊपरी हिस्से को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि एसिड रिफ्लक्स रुक जाए।ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और उल्टी रिगर्जिटेशन व गले की जलन जैसी समस्याओ में स्पष्ट सुधार के बाद उन्हे छुट्टी दे दी गई।पहले इस प्रकार की सर्जरी के लिए मरीजों को लखनऊ वाराणसी या दिल्ली जाना पड़ता था लेकिन अब यह सुविधा प्रयागराज में ही उपलब्ध हो गई है।डॉ.वैभव श्रीवास्तव ने आम जनता से अपील की है कि लंबे समय तक सीने या गले में जलन खट्टी डकार या भोजन का बार-बार ऊपर आना जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उचित उपचार से हायटल हर्निया जैसी बीमारी का सफल इलाज संभव है।डॉ.वैभव श्रीवास्तव ने आगे बताया कि हायटल हर्निया के जटिल मामलों में भी यदि सही समय पर पहचान और उचित योजना के साथ उपचार किया जाए, तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा सुरक्षित और स्थायी समाधान संभव है।आधुनिक तकनीकों के उपयोग से मरीज को कम दर्द शीघ्र रिकवरी और बेहतर जीवन गुणवत्ता मिलती है।
1 hour and 38 min ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0.2k