पुलिस प्रशासन व डीसीपीसी की कड़ी सुरक्षा में कोरांव पुलिस रमजान के पर्व पर ईद उल फितर कि नमाज बड़े हर्षोल्लास के साथ अदा की गई
विश्वनाथ प्रताप सिंह
कोरांव प्रयागराज । तहसील कोराव अंतर्गत आज दिनांक 21मार्च सन 2026 को रमजान के पावन पर्व ईद उल फितर कि नमाज बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ जिसमें नगर अध्यक्ष ओमप्रकाश केसरी पवन कुमार चतुर्वेदी राजेश पांडे हरिशंकर मिश्रा इत्यादि क्षेत्र के संभ्रांत व्यक्तियों ने नमाज समाप्त होने के बाद लोगों को ईद की मुबारकबाद देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की उत्तर प्रदेश चेयरमैन श्री कमलेश कुमार श्रीवास्तव प्रदेश सचिव संतोष कुमार श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन में तथा एसीपी संत प्रसाद उपाध्याय के आदेश के क्रम में यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से संचालन करने के लिए पुलिस बल के साथ जिला अपराध निरोधक कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य को थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार वर्मा जी आदेशानुसार थाना कमेटी प्रभारी नरेंद्रदेव मिश्र के नेतृत्व में यातायात सुगम बनाने हेतु मस्जिदों पर ड्यूटी के लिए उपस्थित रहे जिसमें सह थाना कमेटी प्रभारी मोहम्मद असलम संयुक्त सचिव संगम लाल जाय सवाल क्षेत्र प्रभारी चिदानंद चंद्र प्रकाश सिंह संतोष कुमार जायसवाल रागनी मिश्रा सुदीप कुमार चंद्रमा प्रसाद राकेश कुमार केसरी विवेक कुमार कृष्ण लाल रामानुज एहसान अहमद एस आई गिरीश चंद्र राय एस आई मोनीस आलम एस आई निहाल गुप्ता एस आई कृष्णा सोनी इत्यादि उपस्थित रहे।




संजय द्विवेदी प्रयागराज।झूंसी क्षेत्र की 67 वर्षीय महिला पिछले लगभग एक वर्ष से भोजन के बाद भारीपन बार-बार कच्ची डकार उल्टी गले में जलन और भोजन के मुंह में वापस आने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी।इन लक्षणों के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था और दवाइयों से केवल अस्थायी राहत मिल पा रही थी।लगातार परेशानी के बाद मरीज ने स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (SRN) में परामर्श लिया।यहां एंडोस्कोपी सहित विस्तृत जांच में उन्हें हायटल हर्निया नामक बीमारी का पता चला।इस स्थिति में पेट का ऊपरी हिस्सा अपनी जगह से खिसककर छाती में चला जाता है,जिससे एसिड रिफ्लक्स और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।हायटल हर्निया का प्रारंभिक उपचार दवाइयो और जीवनशैली में बदलाव से किया जाता है, लेकिन जब इनसे आराम नहीं मिलता और मरीज की दिनचर्या प्रभावित होने लगती है, तब सर्जरी आवश्यक हो जाती है।इस केस को और जटिल बनाता था मरीज का पूर्व चिकित्सा इतिहास।उन्हें पहले थायरॉयडेक्टॉमी हिस्टेरेक्टॉमी और रेक्टल प्रोलैप्स की सर्जरी हो चुकी थी जिससे पेट के अंदर चिपकाव(एड्हीजन) होने की संभावना अधिक थी। ऐसे में ऑपरेशन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।इन सभी परिस्थितियो को ध्यान में रखते हुए सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.वैभव श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने सावधानीपूर्वक योजना बनाकर मरीज का सफलतापूर्वक लैप्रोस्कोपिक फंडोप्लिकेशन ऑपरेशन किया।टीम में डॉ.तरुण कालरा डॉ.निशांत शुक्ला डॉ.हर्षित शर्मा डॉ. सृष्टि सिकदर और डॉ.सौरभ मिश्रा शामिल रहे।निश्चेतना विभाग से डॉ.शिवेन्दु ओझा और डॉ. साक्षी सिंह के मार्गदर्शन में डॉ. पल्लवी सूद एवं डॉ.उत्कर्ष मजूमदार ने सहयोग किया। ऑपरेशन थिएटर में प्रमिला राय दिनेश फ़ैयाज़ एवं अन्य कर्मचारियो की महत्वपूर्ण भूमिका रही।यह एक आधुनिक मिनिमली इनवेसिव सर्जरी है जिसमें छोटे चीरे के माध्यम से पेट के ऊपरी हिस्से को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि एसिड रिफ्लक्स रुक जाए।ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और उल्टी रिगर्जिटेशन व गले की जलन जैसी समस्याओ में स्पष्ट सुधार के बाद उन्हे छुट्टी दे दी गई।पहले इस प्रकार की सर्जरी के लिए मरीजों को लखनऊ वाराणसी या दिल्ली जाना पड़ता था लेकिन अब यह सुविधा प्रयागराज में ही उपलब्ध हो गई है।डॉ.वैभव श्रीवास्तव ने आम जनता से अपील की है कि लंबे समय तक सीने या गले में जलन खट्टी डकार या भोजन का बार-बार ऊपर आना जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उचित उपचार से हायटल हर्निया जैसी बीमारी का सफल इलाज संभव है।डॉ.वैभव श्रीवास्तव ने आगे बताया कि हायटल हर्निया के जटिल मामलों में भी यदि सही समय पर पहचान और उचित योजना के साथ उपचार किया जाए, तो लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा सुरक्षित और स्थायी समाधान संभव है।आधुनिक तकनीकों के उपयोग से मरीज को कम दर्द शीघ्र रिकवरी और बेहतर जीवन गुणवत्ता मिलती है।
2 hours and 36 min ago
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