यारा तेरी यारी को... 46 बरस की दोस्ती जिंदा, आज भी जनार्दन ईद में, तो इरफान होते हैं दिवाली में शामिल

  • पंकज, राजेश, अशफाक और कमल बरसों भी जुड़े हैं एक डोर से 
  • गुड़ी पड़वा हो या रमजान एक दूसरे की मिठाई से नहीं गुरेज


खान आशु 

भोपाल। साल 1980... धार जिला मुख्यालय का आनंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय। पंकज ग्वालियर से तो जनार्दन, इरफान, राजेश, अशफाक और कमल किसी मुहल्ले के स्कूल से आकर यहां जमा हुए थे। सहपाठी दोस्त बने। दोस्ती गहराती रही, यहां तक कि कॉलेज तक भी साथ नहीं छूटा और स्नातक और स्नातकोत्तर पढ़ाई भी साथ ही चलती रही। इस बीच कई होली, कई रमजान, अनेक दिवाली और दर्जनों ईद के त्यौहार साथ मनाने का क्रम जारी रहा। जारी रहने का यह सिलसिला अब दशकों बाद भी बना हुआ है। इरफान की मास्टरी, राजेश की महिला एवं बाल विकास विभाग की सरकारी नौकरी, अशफाक की पत्रकारिता या पंकज का इंश्योरेंस वर्क या जनार्दन का मेडिकल काम कभी बाधा नहीं बना। बस फर्क इतना हुआ कि भौतिक मुलाकातों में कमी आ गई और उसकी जगह सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने ले ली, जिसकी डोर ने आज भी इन यारों की यारी को सरसब्ज रखा हुआ है।

स्कूल कॉलेज से हाथ छुड़ाते वक्त तय नहीं था कि कौन किस रास्ते आगे बढ़ेगा। लेकिन जहां राजेश ने सरकारी नौकरी के साथ खुद को धार की परिधि में ही बांध लिया था, वहीं इरफान भी चंद कदम दूर मांडू जाकर ठहर गए। पंकज और जनार्दन ने इंदौर को ठिकाना बनाया तो दोनों के घर भी संयोग से एक ही कालोनी में आ लगे। अशफाक अखबारों की दुनिया के साथ बहते हुए भोपाल तक आकर रुका, जबकि कमल पटेल ने अपनी पैतृक नगरी धार का दामन छोड़ पाने का मोह नहीं पाला।

  • पंकज की पारिवारिक दस्तक 

पंकज गुप्ता सब दोस्तों में ऐसा शख्स थे, जिनके घर पहला टीवी आया था, हमारा नियम से चित्रहार, साप्ताहिक या फिल्म देखने जाने का सिलसिला चलता रहा। यह क्रम ऐसा था कि दिन याद रखकर पंकज के पिताश्री घर आते तो हम लोगों के लिए भी खानपान के सामान साथ लेकर आते। जब बहन सपना दुल्हन बनी तो हम लोगों ने दिल्ली तक पहुंचकर शादी में शिरकत की और बहन को विदा किया।

  • मंडली का पहला दूल्हा राजेश

राजेश वाणी इस मंडली का पहला व्यक्ति था, जिसने सबसे पहले सात फेरे लिए थे। इरफान, पंकज के साथ अच्छे दोस्तों की तरह जोबट तक पहुंचे और देर रात होने वाले फेरों के लिए जागरण भी किया। हालांकि शादी के बाद जब भी हम लोग इंदौर जाकर पंकज के यहां ठहरते, पंकज ने राजेश के पास सोने से इनकार कर दिया था। वजह क्या थी, यह वही जानते हैं।

  • इरफान ने घुमाया आधा भारत

सरकारी मास्टर बनने से पहले इरफान पठान एक रोलिंग मिल में पर्चेस मैनेजर हुआ करते थे। जमाना कैश पेमेंट का था, डिजिटल लेनदेन उस समय नहीं होता था। कैश साथ होने की अपनी रिस्क और बनिए का दिमाग अपनी जगह। फैक्ट्री मालिक विष्णु सेठ ने मशवरा दिया कि अशफाक को भी साथ ले जाया करे इरफान। अच्छी जगह रुकने और अच्छा खाना खाने के साथ उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान का कोना कोना नापने का मौका दिया। इस दौरान हम कई बार अजमेर घूमते तो अनेक बार पावागढ़ के दर्शन से भी नहीं चूकते।

  • इस कड़ी का एक और एंगल

पंकज, इरफान, जनार्दन, राजेश, अशफाक की इस मंडली का एक और हिस्सा हुआ करते थे, नाम था श्रीचंद मलानी। कारोबार के पक्के और व्यवहार के सच्चे इस मित्र के साथ बरसों की हजारों यादें अब भी बंधी हुई हैं। बस यह है कि आज भौतिक रूप से वह हमारे साथ नहीं हैं।

  • अब सोशल मीडिया पर जीवित संपर्क

काम की व्यस्तता ने सभी लोगों को भौतिक रूप से दूर जरूर कर दिया है, लेकिन वास्तविकता यह है आज भी दिल से सब एक दूसरे से उतने ही जुड़े हैं। वही अपनापन, वही मिलने की शिद्दत, वही एक दूसरे के लिए फिक्र। इरफान के बेटे की शादी हो या जनार्दन की सालगिरह, अशफाक के घर वालिद के दुनिया से रुखसत होने का गम, या राजेश या कमल के घर कोई मांगलिक कार्य, आज भी सभी उसी सम्मान और व्यवहार के साथ याद किए जाते हैं। इनकी 46 बरस की दोस्ती को जिंदा रखने के लिए एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया गया है स्कूल फ्रेंड्स, जो इस कड़ी को मजबूती देता रहता है। इसमें कुछ स्कूली दौर के साथी देवेंद्र काशिव भी मौजूद हैं और जितेंद्र आहूजा भी। इस ग्रुप से हटकर इस जमाने में साथ रहीं डॉ कुसुम बौरासी और नसीम खान भी गाहे बगाहे मुलाकातों में शामिल हैं।

साहित्यकार प्रवीण गुगनानी को प्रदान किया गया एनलाल जैन “स्वदेशी” सम्मान

भोपाल। दुष्यंत स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के तत्वाधान में आयोजित एनलाल जैन स्वदेशी सम्मान बैतूल के साहित्यकार प्रवीण गुगनानी को प्रदान किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोज श्रीवास्तव ने की और बतौर मुख्य अतिथि हेमंत मुक्तिबोध उपस्थित रहे। 

ज्ञातव्य है कि एनलाल जैन बैतूल जिले के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री और संवेदनशील साहित्यकार रहे हैं जिनकी उंगली पकड़कर साहिब राव राजुरकर जैसे कई छात्रों ने साहित्य और साहित्य की दुनिया की बारहखड़ी सीखी थी। उनके प्रेरणास्रोत का दायरा सम्पूर्ण बैतूल जिले में फैला था। उन्होंने लंबे समय तक “ताप्ती के तेवर” पत्रिका का संपादन किया और “वीणा के तार” एवं “अनुभूति की रेखाएँ” काव्य संग्रह प्रकाशित हुए। 

उनकी स्मृति में पहला सम्मान बैतूल के साहित्यकार प्रवीण गुगनानी को प्रदान किया गया।  

प्रवीण गुगनानी समकालीन हिंदी साहित्य और शिक्षण क्षेत्र से जुड़े एक सक्रिय व्यक्तित्व हैं। वे मुख्यतः लेखन, चिंतन और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में वैचारिक जागरूकता फैलाने के लिए जाने जाते हैं।

सर्वप्रथम एनलाल जैन की पुत्री करुणा राजुरकर ने पिता का मार्मिक स्मरण करते हुए कहा कि हमारे बाबू जिनका जन्म छिंदवाड़ा में हुआ था परन्तु उनकी कर्मभूमि बैतूल जिला रही। इसलिए उनकी स्मृति में यह सम्मान इन दो जिलों की साहित्यिक विभूतियों को प्रदान किया जाता है। 

प्रवीण गुगनानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि एनलाल जैन एक कुटुंब प्रणाली की उत्पत्ति थे और उन्होंने परिवार प्रथा को मज़बूत करने हेतु समर्पित भाव से कार्य किया था। वे कृषकाय लेकिन पक्की धारणा के व्यक्ति थे। मैं उनके नाम का सम्मान प्राप्त कर अनुगृहीत हूँ। 

रामराव वामनकर ने एनलाल जैन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे दुष्यंत संग्रहालय के अध्यक्ष भी रहे थे। संग्रहालय से जुड़ी नीतियां बनाने मे उनका महती योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। लक्ष्मीकांत जवणे ने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि एनलाल जैन और प्रवीण गुगनानी मुलताई में ज़मीन से जुड़े सामाजिक सरोकार के प्रमुख व्यक्तित्व थे। अशोक निर्मल ने बताया कि 

अपनी स्मृतियों को साझा किया। 

इस अवसर पर अध्यक्ष की आसंदी से बोलते हुए मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि करुणा जी ने पिता जी स्मृति में सम्मान स्थापित कर साहित्यिक पितृऋण का उतारा किया है। जो निश्चित ही सराहनीय कदम है। 

मुख्य अतिथि हेमन्त मुक्तिबोध ने कहा कि आज हम पहचान के संकट से गुज़र रहे हैं। एनलाल जैन जैसे महानुभाव एक ऐसी पहचान रखते थे जो भारतीय परंपरा से जाकर जुड़ती थी। 

महेश सक्सेना ने स्वागत उद्बोधन में एनलाल जैन के व्यक्तित्व के बारे में सभी अतिथियों को परिचित कराते हुए कहा कि उन्होंने प्रभातपट्टन में प्राचार्य के रूप में अधिकांश समय व्यतीत किया था। 

एनलाल जैन की नातिन विशाखा राजुरकर ने उपस्थित अतिथियों का आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन घनश्याम मैथिल ने किया। इस अवसर पर नगर के गणमान्य साहित्यकार मौजूद रहे।

अटल बिहारी वाजपई हिंदी विवि को बम से उड़ाने की धमकी

* बम स्क्वायड ने की छानबीन, नहीं हुई बम की पुष्टि

भोपाल। अटल बिहारी वाजपई हिंदी विश्वविद्यालय में अधिकृत मेल आईडी पर आज एक मेल आया जिसमें विश्वविद्यालय को बम से उड़ने की धमकी दी गई। जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर देवानंद हिडोलिया के निर्देश पर परिसर को खाली कर दिया गया। 

मेल मिलते ही प्रबंधन द्वारा पुलिस को सूचना दी गई। Sdop अंतिम समाधिया के निर्देशन में डॉग एवं बम स्क्वॉड ने पूरे परिसर में छानबीन कर बम की जानकारी झूठी होने की पुष्टि की। कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर हिंडोलिया ने सभी पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

हर्ष और उमंग के साथ क्षत्रिय मेर समाज ने मनाया होली मिलन समारोह

भोपाल। राजधानी में श्री शिव हनुमान मंदिर मेर समाज नारियल खेड़ा में मेर समाज सामाजिक उत्थान समिति द्वारा क्षत्रिय मेर समाज का होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। जिसमें अनेक समाज बंधुओं ने भाग लिए, मिलन समारोह में फूलों एवं गुलाल से होली फ़ाग गीतों से संग खेली गई। सभी समाज बंधुओं ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दी एवं मेर समाज की एकता को मजबूत करने हेतु सभी ने संकल्प लिया। इस अवसर पर मेर समाज प्रदेश अध्यक्ष हेमराज मेर, प्रदेश सचिव मुकेश मेर, वरिष्ठ समाज सेवी वी पी मेर, फ़िल्म कलाकार दयाराम मेर, तुलाराम मेर, मनीष मेर, मोहर सिंह मेर, योगेंद्र भदौरिया जी, राकेश मेर जी, खेमचंद पटेल, सतेंद्र सिंह, मुकेश भदौरिया, धनसिंह मेर एवं अन्य समाज बंधु उपस्थित रहे।

इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में बनेंगे “गीता भवन” : सीएम मोहन यादव

  • 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान
  • 100 निकायों में भूमि उपलब्ध, 4 शहरों में ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर और जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाए जा रहे हैं। गीता भवन के माध्यम से दार्शनिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास है। इन केन्द्रों में युवा वर्ग को गीता के निष्काम कर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ने और शोधार्थियों के लिए विशेष संसाधन उपलब्ध कराना गीता भवन का मुख्य उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को विस्तार देने के लिए 'गीता भवन' परियोजना को अब वृहद स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 413 शहरों में गीता भवन निर्माण की योजना के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना के वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नगरीय क्षेत्रों में भारतीय दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श के लिए एक आधुनिक अवसंरचना तैयार करना है। इंदौर और जबलपुर में निर्मित गीता भवन की सफलता को आधार मानते हुए अब इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

  • 4 शहरों में प्रोजेक्ट्स स्वीकृत, 100 निकायों में भूमि चिन्हांकित

 योजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए विभाग ने चार प्रमुख शहरों में ब्राउनफील्ड (Brownfield) प्रोजेक्ट्स को तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इनमें रीवा (5 करोड़ रुपये), छिंदवाड़ा (2.5 करोड़ रुपये), कटनी (2.4 करोड़ रुपये) तथा खंडवा (2 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 नगर निगमों सहित 100 नगर पालिकाओं में 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो चुकी है, जिनकी डीपीआर (DPR) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शेष 313 नगरीय निकायों में भी भूमि का चिन्हांकन कर लिया गया है और जिला कलेक्टरों के माध्यम से आवंटन की प्रक्रिया प्रचलन में है।

  • आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होंगे सांस्कृतिक केंद्र

प्रत्येक 'गीता भवन' को एक बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके प्रमुख घटकों में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम: वृहद स्तर पर सांस्कृतिक एवं वैचारिक आयोजनों के लिये ज्ञान का केंद्र: ज्ञानार्जन के लिए समृद्ध लाइब्रेरी एवं हाई-टेक ई-लाइब्रेरी। व्यावसायिक एवं जन-सुविधाएं: कैफेटेरिया और विशेष रूप से पुस्तकों एवं आध्यात्मिक सामग्री के लिए समर्पित विक्रय केंद्र शामिल हैं।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा ने घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की

  • राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के अधिकारियों को जिले में निर्बाध गैस आपूर्ति के दिये निर्देश

 भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा जिले में घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिये कि नियमित घरेलू गैस सिलेण्डर आपूर्ति की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कराई जाय। बुकिंग के आधार पर गैस लेने वाले उपभोक्ताओं को सुगमता से गैस सिलेण्डर मिले। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने केन्द्रीय व प्रदेश स्तर के अधिकारियों से फोन से रीवा जिले में नियमित गैस सिलेण्डर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस बात के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं कि जिले में नियमित गैस सिलेण्डर की आपूर्ति होती रहे और बुकिंग का बैकलाग समाप्त हो जाय और लोगों को बिना किसी परेशानी के गैस सिलेण्डर मिलता रहे। 

  कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि सर्वर के ठीक ढंग से कार्य करने से गैस की आनलाइन बुकिंग हो रही है। रीवा शहर में गैस की उपलब्धता के अनुसार वितरण किया जा रहा है। नियमित आपूर्ति के सभी प्रयास जारी हैं ताकि बैकलाग को पूरा करते हुए लोगों को सुगमता से गैस सिलेण्डर का वितरण हो सके। बैठक में गैस एजेंसी संचालकों ने गैस वितरण में प्रशासन द्वारा दिये गये सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गैस वितरण की सुगम व्यवस्था के लिए एजेंसियों द्वारा कार्य किया जा रहा है। बैठक में अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय, अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी, जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश ताण्डेकर सहित गैस एजेंसी के संचालक उपस्थित रहे।

संस्कृति और परंपराओं का उल्लास आने वाली पीढ़ी को समझाएगा उनका महत्व: शुक्ल

  • माँ कर्मा जयंती महोत्सव में उप मुख्यमंत्री हुए शामिल 

भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को जितना उल्लास के साथ मनायेंगे आने वाली पीढ़ी उसके महत्व को समझेगी और वह भी इस परंपरा को आजीवन काल तक चिर स्थाई बनाकर रख सकेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल रीवा में माँ कर्मा जयंती महोत्सव में शामिल हुए। 

राज कपूर आडिटोरियम में साहू युवा संगठन के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने माँ कर्मा की विधि विधान से आरती की। उन्होंने कहा कि माँ कर्मा कृष्ण भक्त थीं और भगवान श्री कृष्ण उनकों साक्षात दर्शन देते थे और उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति करते थे। माँ कर्मा भक्ति की प्रतीक थी। माँ कर्मा जयंती का आयोजन महान आत्माओं को याद दिलाने का आयोजन है। इस आयोजन के लिए आयोजनकर्ता बधाई के पात्र हैं। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मैं कल भी माँ कर्मा शोभा यात्रा का साक्षी बना था और आज इस आयोजन में भी उपस्थिति हुआ हूं। मैं सौभाग्यशाली हूं कि इन आयोजनों में शामिल हुआ। 

माँ कर्मा जयंती महोत्सव में विधायक सिंगरौली रामनिवास शाह, पूर्व मंत्री रविकरण साहू, करण साहू, नगर परिषद अध्यक्ष रामपुर नैकिन रामकुमार साहू सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर रायपुर छत्तीसगढ़ की भजन गायिका हीना सिंह ने शानदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, वंशीलाल साहू सहित बड़ी संख्या में साहू समाज के पदाधिकारी एवं आयोजक उपस्थित रहे।

विकसित भारत : दो दिवसीय संगोष्ठी, समेटे गए कई विषय

भोपाल। शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में विकसित भारत 2047 ज्ञान संस्कृति और सततता पर अन्तर्विषयी दृष्टिकोण विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर अनुपम राजन ने संतुलित आर्थिक विकास पर जोर देते हुए कहा कि प्रगति ऐसी हो जिसमें पर्यावरण, विरासत और संस्कृति का समन्वय बना रहे। विशिष्ट वक्ता मनोज श्रीवास्तव ने धर्म और संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति हमेशा से वन हेल्थ "मानव और प्रकृति का सह अस्तित्व" की पक्षधर रही है। डॉ. आरआर रश्मि ने ग्लोबल वार्मिंग नेट जीरो उत्सर्जन की चुनौतियों पर बात की।

दूसरे सत्र के वक्ता डॉ. उदयन बाजपेयी ने राष्ट्र और साहित्य के अन्तर संबंधों को स्पष्ट किया तथा मानवेतर जगत के अस्तित्व की अनिवार्यता पर बल दिया। राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस में प्रातः काल सर्वप्रथम 14 किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा करने वाली क्वींस ऑन व्हील्स का महाविद्यालय के प्राचार्य तथा अन्य प्राध्यापकों व छात्रों के द्वारा स्वागत किया गया यात्रा पर आधारित एक वीडियो भी दिखाया गया। इसके संयोजक अमोल थाटे ने इस यात्रा का पूरा विवरण बताया। विकसित भारत 2047 विषय पर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्रों शिक्षकों तथा आगंतुकों को भारत के समृद्ध ऐतिहासिक सांस्कृतिक तथा पुरातात्विक विरासत से परिचय करना था। यह कार्यक्रम भारतीय इतिहास के गौरवशाली स्वरूप को उजागर करने वाला रहा।

आयोजन के दूसरे दिन अनुराग श्रीवास्तव, लोकेंद्र ठक्कर, डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी आदि आमंत्रित वक्ता थे। जिन्होंने चर्चा में भाग लिया। इस दौरान डॉ. अदिति चतुर्वेदी ने शिक्षा के क्षेत्र में आगामी परिदृश्य पर बात की। इसके पश्चात् चेंज मेकर कार्यक्रम में समीर सागर तथा डॉ. अलका शर्मा से उनके व्यवसाय तथा उसकी सफलता के बारे में बातचीत की गई।  राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल 285 रजिस्ट्रेशन हुए 181 शोधपत्र प्राप्त हुए एवं 102 शोध पत्र प्राप्त हुए। कुल 73 शोध पत्रों का वाचन किया गया। इसमें संस्कृति, इतिहास, विज्ञान, जैव विविधता इत्यादि विषयों पर शोधार्थियों ने अपने पत्र प्रस्तुत किया।

जनसुनवाई में कलेक्टर ने सुनी लोगों की समस्याएं, दिए अधिकारियों को निर्देश

  • जनसुनवाई में 117 आवेदन प्राप्त हुए

भोपाल। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने मंगलवार को जिले से जनसुनवाई में आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अनेक समस्याओं का निराकरण मौके पर ही किया। जनसुनवाई में आए नागरिकों से 117 आवेदन प्राप्त हुए। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी, एडीएम अंकुर मेश्राम एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर सिंह ने जनसुनवाई में आए हर एक आवेदक से धैर्यपूर्वक उनकी समस्याओं पर चर्चा की और उन्हें उनके शीघ्र निराकरण का आश्वासन भी दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को नागरिकों से प्राप्त आवेदनों पर संवेदनशील रूख अपनाते हुए निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आवेदकों की समस्याओं पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

सफलता की कहानी: सास-बहू से देवरानी-जेठानी तक

  • रिश्तों की साझेदारी से खिल रहा ग्रामीण पर्यटन, होम-स्टे से बदली गांव की तस्वीर

सास-बहू, मां-बेटी या देवरानी-जेठानी के रिश्तों को अक्सर तकरार और मतभेद के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम इन धारणाओं को बदलते हुए एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। जिले के गॉवों की महिलाएं आपसी सहयोग और विश्वास के साथ होम-स्टे चला रही हैं और रिश्तों की मजबूती को तरक्की की नई राह में बदल रही हैं।

पर्यटन ग्राम धूसावानी की मनेशी धुर्वे और अलका धुर्वे रिश्ते में सास-बहू हैं, लेकिन जब उनके होम-स्टे में पर्यटक आते हैं तो दोनों मिलकर पूरे उत्साह से मेहमाननवाजी में जुट जाती हैं। इसी तरह सावरवानी में मालती यदुवंशी अपनी सास शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे जिले में उभरती एक नई सामाजिक और आर्थिक तस्वीर है, जहां रिश्तों की साझेदारी महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है।

  • रिश्तों की साझेदारी से मिली पहचान

छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में चल रहे होम-स्टे केवल आय का साधन नहीं हैं, बल्कि ये महिलाओं की सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास का भी प्रतीक बन चुके हैं। यहां सास-बहू, मां-बेटी और देवरानी-जेठानी मिलकर पर्यटकों का स्वागत करती हैं, भोजन तैयार करती हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं। इन रिश्तों की सामूहिक ताकत ने यह साबित किया है कि जब परिवार की महिलाएं साथ मिलकर काम करती हैं, तो घर ही नहीं बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ सकता है।

  • जिले में 50 से अधिक होम-स्टे

मध्यप्रदेश में सर्वाधिक होम-स्टे संचालित करने वाले जिलों में शामिल छिंदवाड़ा में इस समय 50 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं। खास बात यह है कि इन सभी होम-स्टे का पंजीयन महिलाओं के नाम पर किया गया है और संचालन की अधिकांश जिम्मेदारी भी महिलाएं ही संभाल रही हैं। सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में स्थानीय महिलाएं पारंपरिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

  • स्थानीय स्वाद और संस्कृति से जुड़ते पर्यटक

गांव की महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजन तैयार करती हैं। इसके साथ ही वे लोकनृत्य और लोक गायन से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी पर्यटकों को परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है, वहीं महिलाओं को आय का सम्मानजनक साधन भी प्राप्त हो रहा है।

  • महिलाओं के हाथों में होम-स्टे की कमान

गांव की महिलाएं स्वयं होम-स्टे का संचालन कर रही हैं। पर्यटकों के स्वागत से लेकर भोजन व्यवस्था, आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रबंधन तक की पूरी जिम्मेदारी वे ही निभाती हैं। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सास-बहू, देवरानी-जेठानी जैसे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध ही नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास के मजबूत आधार भी बन सकते हैं। यही साझेदारी आज छिंदवाड़ा के ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान दे रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बन रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि होम-स्टे की यह पहल गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं।