ट्रंप ने होर्मुज पर सात देशों से मांगी मदद, सहयोगियों के इनकार के बाद क्या अकेला पड़ा यूएस?
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने के आह्वान किया था। लेकिन अमेरिका के सहयोगी देशों ने या तो सतर्क रुख अपनाया है या सीधे तौर पर इनकार कर दिया है।
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ट्रंप ने कई देशों से मांगा सहयोग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने करीब सात देशों से होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए वॉरशिप भेजने की मांग की। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट के बारे में कहा, "मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आएं और अपने इलाके की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका अपना इलाका है।" उन्होंने दावा किया कि शिपिंग चैनल ऐसी चीज नहीं है जिसकी अमेरिका को जरूरत है क्योंकि तेल तक उसकी अपनी पहुंच है। ट्रंप ने फ्लोरिडा से एयर फोर्स वन में वाशिंगटन वापस जाते समय पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही।
अमेरिका के करीबी सहयोगियों का इनकार
हालांकि, अब तक न तो ट्रंप किसी देश का नाम खुलकर बता पाए हैं और न ही किसी बड़े देश ने साफ तौर पर कहा है कि वह अमेरिका के साथ अपने युद्धपोत होर्मुज में भेजने जा रहा है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश जो अमेरिका के काफी करीबी सहयोगी हैं उन्होंने भी ट्रंप को झटका देते हुए होर्मुज में अपनी नौसेना भेजने से इनकार कर दिया है।
जापान ने कहा- नौसैनिक जहाज भेजने की कोई योजना नहीं
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद में कहा कि टोक्यो के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने अब तक कोई भी फैसला नहीं लिया है कि हम जहाज तैनात करेंगे या नहीं। हम यह देख रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानूनी ढांचे के भीतर क्या संभव है।"
ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के अनुरोध के बाद भी वह हॉर्मुज जनडमरूमध्य में नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा। ऑस्ट्रेलिया ने पुष्टि कर दी है कि वह इस क्षेत्र को नौसैनिक सहायता नहीं देगा। ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने ABC को बताया है कि हालांकि यह जलमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन कैनबरा को कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है और फिलहाल उसकी वहां सेना तैनात करने की कोई योजना नहीं है।
हॉर्मुज जलमार्ग की अहमियत
दुनिया के तेल व्यापार के लिए हॉर्मुज जलमार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। अनुमान है कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। लेकिन मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इसके कारण कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।








1 hour and 47 min ago
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