प्रयागराज में मशरूम उत्पादन तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का दूसरा दिन संपन्न
100 प्रशिक्षार्थियों ने सीखी मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकें
विश्वनाथ प्रताप सिंह
प्रयागराज। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र, खुसरो बाग प्रयागराज में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत औद्यानिक फसलों के उत्पादन प्रबंधन एवं संरक्षित खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन तकनीक पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन लगभग 100 प्रशिक्षार्थियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण में फतेहपुर, कौशांबी, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जनपदों से आए किसानों और प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया। मुख्य उद्यान विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा योजना के अंतर्गत ₹5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण लेकर किसान मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि लगभग ₹2 लाख की लागत से एक मिनी मशरूम उत्पादन यूनिट स्थापित कर किसान एक छोटी झोपड़ी से भी मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं, जिससे प्रति माह ₹20,000 से ₹25,000 तक आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मशरूम में प्रोटीन, विटामिन-डी और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो डायबिटीज, हृदय रोग और बीपी के मरीजों के लिए लाभदायक होता है।
शुभ सेवा एग्रो वेल्फेयर फाउंडेशन के सीईओ डॉ. एस. आर. बघेल ने प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि भूसे को भिगोने (शॉकिंग) के बाद उसमें उचित नमी बनाए रखते हुए स्पॉन डालकर बैग कैसे तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम बैग को कमरे में कैसे रखना है, कितने दिनों में उत्पादन शुरू होता है, मशरूम को ड्राई करने की प्रक्रिया क्या है तथा बाजार में पैकिंग कर बिक्री कैसे की जाती है।
मशरूम विशेषज्ञ कुंवारी ईशा ने बताया कि बटन मशरूम उत्पादन के लिए कंपोस्ट तैयार करनी पड़ती है, जिसमें लगभग 28 दिन का समय और 7 बार पलटाई करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि बटन मशरूम का उत्पादन अक्टूबर से फरवरी के बीच बेहतर होता है।






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1 hour and 26 min ago
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