स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

क्या होता है ESMA, देशभर में किया गया लागू, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला

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ईरान-इजरायल जंग की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए हालातों का असर भारत में तेल-गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी रोकने और घरेलू गैस संकट को टालने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू किया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।

कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार की सख्त

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और ईंधन सप्लाई में दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने एलपीजी गैस को लेकर बड़े फैसले किए हैं। सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए नया नियम लगाया गया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को एक अहम फैसला लेते हुए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की बिना किसी रुकावट के आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी वस्तु अधिनियम की शक्तियों का उपयोग किया है।

क्या होता है ESMA ?

आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ईएसएमए) एक एक्ट है, जिसे कुछ सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। ये सेवाएं लोगों के सामान्य जीवन से जुड़ी हैं और इनके प्रभावित होने का सीधा असर आम जनता को पड़ता है। इसमें सार्वजनिक परिवहन (बस सेवाएं), स्वास्थ्य सेवाएं (डॉक्टर और अस्पताल) जैसी सेवाएं शामिल हैं।

क्या है फैसले की पीछे की वजह

सरकार ने देशभर में ESMA लगाने का फैसला अचानक नहीं लिया है। जिस तरह से ईरान पर इजराइल र अमेरिका ने हमला किया है और दोनों पक्षों के बीच सैन्य संघर्ष को 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इसका असर दुनियाभर के देशों में दिख रहा है। वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसमें एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है। इसी के बाद देशभर में ESMA का फैसला लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने की यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की वकालत, जानें क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ प्रावधानों को महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एक तरीका समान नागरिक संहिता यानी कि यूसीसी लागू करना भी हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जो महिलाओं को पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार नहीं देते। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण से पूछा कि क्या अदालत पर्सनल लॉ की संवैधानिक वैधता की जांच कर सकती है? जस्टिस बागची ने एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस फैसले में माना गया था कि पर्सनल लॉ को संविधान की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता।

बेंच ने यह भी पूछा कि अगर अदालत शरीयत के उत्तराधिकार नियमों को रद्द कर दे, तो क्या इससे कानूनी शून्य पैदा नहीं हो जाएगा, क्योंकि मुस्लिम उत्तराधिकार को नियंत्रित करने वाला कोई अलग वैधानिक कानून नहीं है। सीजेआई ने चिंता जताते हुए कहा कि सुधार की जल्दबाज़ी में कहीं ऐसा न हो कि हम मुस्लिम महिलाओं को मौजूदा अधिकारों से भी वंचित कर दें।

इस पर वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यदि शरीयत के प्रावधान हटते हैं तो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 लागू हो सकता है। अदालत यह घोषित कर सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर विरासत अधिकार मिलें। उन्होंने यह भी कहा कि विरासत का अधिकार एक सिविल राइट है, इसे धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के तहत “आवश्यक धार्मिक प्रथा” नहीं माना जा सकता। भूषण ने अपने तर्क के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल तलाक फैसले का हवाला दिया, जिसमें तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराया गया था।

मुस्लिम महिलाओं के लिए समान उत्तराधिकार अधिकारों की मांग करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि देश में सभी महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करना है। कोर्ट ने आगे कहा, “क्या हम पर्सनल लॉ पर आधारित सभी द्विविवाह संबंधों को अमान्य घोषित कर सकते हैं या नहीं। इसलिए हमें मौलिक कर्तव्यों को प्रभावी बनाने के लिए विधायी शक्ति पर निर्भर रहना होगा।” CJI सूर्यकांत ने कहा कि जैसा कि सही कहा गया है, इसका उत्तर समान नागरिक संहिता है।

शरद पवार, अठावले और सिंघवी समेत 26 नेता निर्विरोध पहुंचे राज्यसभा, अब 11 सीटों पर मुकाबला

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दस राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। अबबिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा।

इन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

महाराष्ट्र (7)

• शरद पवार (एनसीपी)

• रामदास आठवले (आरपीआई-आठवले)

• विनोद तावड़े (बीजेपी)

• रामराव वडुकुटे (बीजेपी)

• माया इवनाते (बीजेपी)

• ज्योति वाघमारे (शिवसेना -शिंदे)

• पार्थ पवार (एनसीपी)

तमिलनाडु (6)

• तिरुची शिवा (डीएमके)

• जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (डीएमके)

• एम थंबीदुरई (एआईएडीएमके)

• अंबुमणि रामदास (पीएमके)

• एम क्रिस्टोफर तिलक (कांग्रेस)

• एल के सुदीश (डीएमडीके)

पश्चिम बंगाल (5)

• राहुल सिन्हा (बीजेपी)

• बाबुल सुप्रियो (टीएमसी)

• पूर्व डीजीपी राजीव कुमार (टीएमसी)

• सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (टीएमसी)

• कोएल मलिक (टीएमसी)

असम (3)

• जोगेन मोहन (भाजपा)

• तेरोस गोवाला (भाजपा)

• प्रमोद बोरो (यूपीपीएल)

तेलंगाना (2)

• अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस)

• वेम नरेंद्र रेड्डी (कांग्रेस)

छत्तीसगढ़ (2)

• लक्ष्मी वर्मा (भाजपा)

• फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हिमाचल प्रदेश (1)

• अनुराग शर्मा (कांग्रेस)

किन राज्यों की कितनी सीटों पर होगा चुनाव?

37 में से 26 निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब 11 सीटों पर चुनाव होगा। इन सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान किया जाएगा।

सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की

बाकी बचे सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की हैं। दरअसल बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन चुनावों में राज्यसभा के लिए चुने जाने की संभावना है। बिहार की पांच सीटों पर 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। पांचवीं सीट पर आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के एडी सिंह के बीच टक्कर होगी। वहीं बिहार विधानसभा में विधायकों के गणित के हिसाब से सीएम नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का राज्यसभा जाना भी सुनिश्चित है। इसके अलावा जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और बीजेपी के शिवेश कुमार का भी राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

दिल्ली दंगे का आरोपी शरजील इमाम को राह, कोर्ट ने दी 10 दिन की अंतरिम जमानत

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दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम को बड़ी राहत मिली है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें 10 दिन की अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने इमाम को अपने भाई की शादी में शामिल होने के लिए जमानत दी है। इमाम भड़काऊ भाषण देने और दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में लंबे समय से जेल से जेल में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को 5 जनवरी को जमानत देने से मना कर दिया था।

मानवीय आधार पर 10 दिन की राहत

शरजील इमाम के वकीलों ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए अर्जी लगाई थी कि उसके घर में सगे भाई की शादी होने वाली है। इसके साथ ही यह दलील भी दी गई कि उसकी मां की तबीयत काफी खराब चल रही है। पारिवारिक जिम्मेदारियों, शादी के कार्यक्रम और बीमार मां की देखभाल का हवाला देकर कोर्ट से रिहाई की गुहार लगाई गई थी। अदालत ने इस मानवीय आधार पर गौर करते हुए उसे 10 दिन के लिए जेल से बाहर आने की इजाजत दे दी है।

20 मार्च से 30 मार्च तक जमानत

जानकारी के मुताबिक एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेई की कोर्ट ने शरजील इमाम को 20 मार्च से 30 मार्च तक अंतरिम जमानत दी है। हालांकि कोर्ट ने उनसे साफ कहा है कि न ही वो सोशल मीडिया का इस्तेमाल करेंगे और न ही इस दौरान मीडिया से संपर्क करेंगे।

2020 दिल्ली दंगे में गई थी 53 लोगों की जान

शरजील इमाम 2020 दिल्ली दंगा के साजिश मामले में आरोपी है, जिसमें 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क गए थे. शरजील जनवरी 2020 से जेल में बंद है। 2020 में यूएपीए के तहत गिरफ्तार उसे किया गया था और उस पर हिंसा भड़काने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है।

शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा है। सीबीआई की याचिका पर ये जवाब मांगा गया है। हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 अन्य लोगों को अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किये जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलीलें

दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई तब तक टालने का भी निर्देश दिया, जब तक कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं कर लिया जाता।

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या तर्क दिया?

इस दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया।

16 मार्च को अगली सुनवाई

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किये जाने के विरूद्ध सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 मार्च तय की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया था बरी

बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

ईरान के नेताओं से संपर्क करना काफी मुश्किल', भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर, मिडिल ईस्ट तनाव पर बोले जयशंकर

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ईरान पर इजरायल और अमेरिका का हमला होने के बाद मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर बने हुए हैं। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में भारतीय भी हैं। ऐसे में संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन पश्चिम एशिया का मुद्दा उठा। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे को उठाया। इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब दिया।

प्रधानमंत्री मोदी घटनाक्रम पर रख रहे नजर

विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नए घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं ताकि सही कदम उठाए जा सकें। उन्होंने बताया कि यह विवाद भारत के लिए बड़ी चिंता की बात है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। यह इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहां तेल और गैस के मुख्य सप्लायर हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आना एक गंभीर मुद्दा है।

अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट

सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि फंसे हुए भारतीयों की मदद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों की वापसी को सुगम बनाने के लिए उड़ानों को मंजूरी दे दी है और उन्हें संचालित भी किया है, जिसके तहत लगभग 67,000 भारतीय नागरिक देश लौट चुके हैं।आर्मेनिया के रास्ते भारतीयों को निकाला जा रहा। इस क्षेत्र में भारतीय एंबेसी लगातार लोगों तक जरूरी मदद पहुंचा रही है।

संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता*

जयशंकर ने कहा, हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। हम अब भी मानते हैं कि तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का सहारा लेना चाहिए।

ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर फैसला आज, हंगामे के आसार*

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संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है। पहले दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों की ओर से दिए गए नोटिस पर विचार करेगी। पहले दिन की कार्यवाही में ही इस विषय को लिस्टेड किया गया है।

कांग्रेस को मिला टीएमसी का साथ

विपक्ष ने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। उस समय ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर साइन नहीं किए थे, लेकिन अब पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर विपक्ष का समर्थन करेगी।

स्पीकर का पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है। विपक्ष का कहना है कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और अन्य नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। साथ ही आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ महिला सांसदों के खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए।

रिजिजू ने पहले कांग्रेस पर बोला हमला

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा से एक दिन पहले कांग्रेस पर नया हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पार्टी को चेयर के खिलाफ अपने कदम पर आखिर में 'पछतावा होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यह कदम संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार निशाना बनाने जैसा ही है।

मनीष तिवारी ने दिया कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस

कांग्रेस के तीन सांसद मोहम्मद जावेद, के सुरेश और मल्लु रवि द्वारा आज ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया जाना है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता के ही एक लेटर ने सबको असमंजस में डाल दिया है। संसद के बजट सत्र में दूसरे फेज के पहले दिन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है। इस नोटिस में कहा गया है कि मैं प्रस्ताव करता हूं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से उत्पन्न गंभीर चिंताओं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसके प्रभावों पर विचार करने के लिए सदन में प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन के अन्य सभी सूचीबद्ध कार्यवाहियों को स्थगित कर दे।

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष लामबंद, टीएमसी करेगी ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन

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बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले एक बार फिर सियासी तापमान अपने चरम पर पहुंच रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला किया है। पार्टी के सांसदों को यह निर्देश तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से दिया गया है।

बिरला पर भेदभाव करने का आरोप

लोकसभा में बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव में, बिरला पर खुलकर भेदभाव करने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस सांसदों ने बिरला पर राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकने, पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने और जनता के मुद्दों को उठाने वाले सांसदों को निलंबित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

9 मार्च को प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना

बजट सत्र के पहले चरण के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया था। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा और उसी दिन इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है।

अविश्वास प्रस्ताव पर क्या बोली कांग्रेस?

इससे पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा, 'तृणमूल कांग्रेस के अलावा सभी विपक्षी दलों के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। कहा गया है कि इस पर नौ मार्च को विचार किया जाएगा।'

दोनों पक्षों ने जारी किया व्हिप

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस दोनों ने अपने लोकसभा सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। इसके तहत 9 से 11 मार्च के बीच सदन में सभी सांसदों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।

गुरमीत राम रहीम को 23 साल पुराने पत्रकार हत्या मामले में राहत, हाईकोर्ट ने डेरा मुखी को किया बरी

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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के राम रहीम को बरी कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने 3 आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा को बरकरार रखा है।इन सभी को इस मामले में सीबीआई अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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हत्‍या के मामले में बरी

रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में 11 जनवरी 2019 को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। डेरा प्रमुख और अन्य सह-आरोपियों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। अब हाईकोर्ट ने राम रहीम की अपील को स्‍वीकार करते हुए उसे हत्‍या के मामले में बरी कर दिया है।

हाई कोर्ट ने कहा- पर्याप्त सबूत नहीं

फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड में राम रहीम के साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। जिस वजह से राम रहीम को बरी कर दिया गया। राम रहीम इससे पहले डेरा मैनेजर रणजीत हत्याकांड में पहले ही हाईकोर्ट से बरी हो चुका है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने इसको चुनौती दी है।

2002 में हुई थी पत्रकार की हत्या

बता दें कि पत्रकार रामचंद्र ने ही गुरमीत राम रहीम के खिलाफ यौन शोषण के मामले का खुलासा किया था। रामचंद्र की साल 2002 में गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने ही साल 2002 में इस रेप केस की जानकारी पहली बार दी थी, जिसमें गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया गया था। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति 2002 में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई थी।