यूपी कैबिनेट में बड़े प्रस्तावों की संभावना, CM योगी की नई हेलीकॉप्टर सुविधा भी चर्चा में
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक होने जा रही है। बैठक में कुल 27 प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। इस बैठक में सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति निगरानी और भ्रष्टाचार रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाने की संभावना है।

सरकार कर्मचारियों के लिए आचरण नियमावली 1956 में संशोधन कर रही है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, कोई भी कर्मचारी यदि किसी वर्ष में छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देना अनिवार्य होगा। वर्तमान में नियम में केवल दो माह के मूल वेतन से अधिक चल संपत्ति के लेन-देन की जानकारी देना अनिवार्य था। इसके अलावा, प्रत्येक कर्मचारी को पहली नियुक्ति के समय और उसके बाद हर साल अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना होगा। अभी यह नियम हर पांच वर्ष में लागू होता है।

कैबिनेट में अन्य प्रस्तावों में कानपुर में ट्रांस गंगा सिटी के लिए चार लाइन पुल का निर्माण, उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन, और टेक्सटाइल एवं गार्मेटिंग पॉलिसी 2022 में बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा परिवहन, आवास, औद्योगिक विकास, हथकरघा उद्योग, उच्च शिक्षा, सिंचाई, ऊर्जा, समाज कल्याण और खाद एवं रसद विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री की उड़ान और सुरक्षा में सुधार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हवाई यात्रा अब अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर से होगी। उत्तर प्रदेश सरकार के बेड़े में नया अगस्ता वेस्टलैंड AW139 हेलीकॉप्टर शामिल किया गया है। यह हेलीकॉप्टर वीवीआईपी यात्रा के लिए दुनिया के बेहतरीन हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। इसमें 12-15 यात्री एक साथ उड़ान भर सकते हैं और इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 310 किलोमीटर प्रति घंटा है।

डबल इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर में क्रैश सेफ्टी सिस्टम, डिजिटल ग्लास कॉकपिट और साउंडप्रूफ केबिन जैसी सुविधाएं हैं। अगर किसी इंजन में समस्या आ भी जाए, तो दूसरा इंजन सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करता है। खराब मौसम और रात के समय भी इसे उड़ाया जा सकता है। इटली की कंपनी Leonardo द्वारा निर्मित इस हेलीकॉप्टर की कीमत लगभग एक अरब रुपये है। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने अपने तीन पायलटों को इटली भेजकर इस हेलीकॉप्टर का प्रशिक्षण भी कराया।

इस बैठक के परिणामों से राज्य के सुरक्षा, प्रशासनिक और विकास संबंधी फैसलों पर व्यापक असर पड़ेगा।
टी-20 विश्वकप विजेता कुलदीप यादव का भव्य विवाह: 14 मार्च को मसूरी में सात फेरे, 17 मार्च को लखनऊ में रिसेप्शन
लखनऊ/मसूरी। भारतीय क्रिकेट टीम के टी-20 विश्वकप विजेता गेंदबाज कुलदीप यादव 14 मार्च 2026 को मसूरी में लखनऊ की वंशिका के साथ सात फेरे लेंगे। इसके पहले 13 मार्च को हल्दी और मेहंदी की रस्में आयोजित की जाएंगी।

कुलदीप यादव और वंशिका ने 4 जून 2025 को लखनऊ के एक होटल में सगाई की थी। शुरू में शादी नवंबर 2025 में तय थी, लेकिन भारतीय टीम के मैच और टी-20 विश्वकप में कुलदीप के चयन के कारण तारीख आगे बढ़ा दी गई।

शादी के बाद 17 मार्च को लखनऊ के होटल सेंट्रम में भव्य रिसेप्शन का आयोजन होगा। इस समारोह में बीसीसीआई के अधिकारी, यूपीसीए के पदाधिकारी, भारतीय टीम के पूर्व और वर्तमान क्रिकेटर, और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे।

कुलदीप के पिता रामसिंह यादव ने 8 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात कर उन्हें शादी और रिसेप्शन का निमंत्रण दिया था। शादी और रिसेप्शन में क्रिकेट जगत और समाज के कई प्रमुख लोग शामिल होकर इस खुशी के अवसर को और यादगार बनाएंगे।
वायरल वीडियो से मचा हड़कंप, ‘10 हजार दो’ वाले बयान पर CDO नागेंद्र नारायण मिश्रा निलंबित
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के एटा जिले में तैनात मुख्य विकास अधिकारी Nagendra Narayan Mishra का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। वीडियो में सीडीओ कथित तौर पर आंगनबाड़ी केंद्रों से पैसे की व्यवस्था कराने की बात करते सुनाई दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में सीडीओ जिला समन्वयक संजीव पचौरी से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इसमें वह कथित रूप से कहते सुनाई देते हैं कि “हर आंगनबाड़ी से 10 हजार रुपये चाहिए… आप अपने आदमी हैं पचौरी, पैसे दिलवाइए।” हालांकि वीडियो में संजीव पचौरी इस मांग को स्वीकार करने से साफ इनकार करते दिखाई देते हैं और किसी भी तरह के पैसे के लेन-देन में शामिल होने से मना कर देते हैं।


वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई। बताया जा रहा है कि नागेंद्र नारायण मिश्रा ग्राम्य विकास सेवा से प्रोन्नत होकर सीडीओ बने थे।मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि सीडीओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उन्हें मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।फिलहाल पूरे मामले को लेकर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
युद्ध से हिला निर्यात बाजार: गेहूं भेजने की तैयारी पर संकट, यूपी के मिलिंग उद्योग को झटका
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में तीन साल बाद शुरू होने जा रहे गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का असर पड़ने लगा है। समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने, शिपिंग संकट और बीमा लागत महंगी होने के कारण खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात एक बार फिर अनिश्चितता में घिर गया है।

निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 25 से 35 प्रतिशत तक

भारत सरकार ने फरवरी 2026 में सीमित मात्रा में 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों (आटा, मैदा, सूजी) के निर्यात को मंजूरी दी थी। यह कदम 2022 में लगे प्रतिबंध के बाद निर्यात को आंशिक रूप से फिर शुरू करने की दिशा में अहम माना जा रहा था, ताकि किसानों को बेहतर कीमत मिल सके।हालांकि निर्यातक संगठनों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और युद्ध जोखिम बीमा के महंगे होने के कारण कई नए निर्यात सौदे फिलहाल टाल दिए गए हैं।इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव और यूपी रोलर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक बजाज के अनुसार उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में है और गेहूं आधारित उत्पादों के निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 25 से 35 प्रतिशत तक है।

1700 करोड़ रुपये के कारोबार के अवसर बनने की उम्मीद थी

उन्होंने बताया कि निर्यात खुलने से यूपी के लिए करीब 1500 से 1700 करोड़ रुपये के कारोबार के अवसर बनने की उम्मीद थी। इसका लाभ कानपुर, आगरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ और बरेली समेत लगभग 20 जिलों के मिलिंग और प्रोसेसिंग उद्योग को मिलना था।इन क्षेत्रों की मिलें खाड़ी देशों यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत और कतर में आटा, मैदा और सूजी की आपूर्ति करती रही हैं। लेकिन यदि क्षेत्र में युद्ध की स्थिति लंबी चली तो शिपिंग लागत 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है और बीमा प्रीमियम भी दोगुना होने की आशंका है।ऐसे में तीन साल बाद खुला निर्यात बाजार फिर से प्रभावित होने का खतरा है, जिससे उत्तर प्रदेश के आटा-मैदा उद्योग और गेहूं व्यापार को बड़ा झटका लग सकता है।
कॉमर्शियल गैस सप्लाई रुकी तो लखनऊ में खाने का संकट, स्ट्रीट फूड से लेकर हॉस्टल मेस तक असर
लखनऊ । व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति रुकने से राजधानी लखनऊ में खानपान से जुड़ा बड़ा संकट खड़ा होने की आशंका बढ़ गई है। इसका सबसे अधिक असर स्ट्रीट फूड वेंडरों, छोटे रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और टिफिन सर्विस पर पड़ सकता है। इन कारोबारियों के पास सीमित सिलिंडर स्टॉक होता है, जो एक-दो दिन में खत्म हो सकता है।

लखनऊ में बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग, मजदूर, बाहर से आए विद्यार्थी और कामगार रोजाना खाने के लिए इन छोटे रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड दुकानों पर निर्भर रहते हैं। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोगों का भोजन सीधे तौर पर इस व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

होटल और रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े चारबाग के कारोबारी अनिल विरमानी का कहना है कि अगर कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति जल्द शुरू नहीं हुई तो सबसे ज्यादा दिक्कत मजदूरों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को होगी। इससे न केवल भोजन की व्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर भी संकट आ सकता है।

इसका असर शैक्षणिक संस्थानों के छात्रावासों की मेस पर भी पड़ सकता है। लखनऊ विश्वविद्यालय के दोनों परिसरों के 18 छात्रावासों में करीब दो हजार छात्र-छात्राएं रहते हैं, जिनके भोजन की व्यवस्था मेस के जरिए होती है। फिलहाल मेस में सीमित गैस भंडार है, जो अधिकतम सात दिन तक ही चल सकता है।

इसके अलावा गोमतीनगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले लगभग 1800 विद्यार्थियों के भोजन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इन संस्थानों में रोजाना बड़ी मात्रा में कॉमर्शियल सिलिंडरों की खपत होती है।

हालांकि कुछ संस्थानों में फिलहाल गैस का सीमित भंडार मौजूद है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय और डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में कैंटीन और छात्रावास मेस के लिए लगभग 12 दिन तक गैस उपलब्ध होने की बात कही गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई और अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक प्रभावित रहे तो शहर में खानपान की व्यवस्था और छोटे होटल-ढाबा कारोबार को गंभीर झटका लग सकता है।
जब जब मोदी डरते हैं पुलिस  आगे करते हैं यूजीसी काले कानून वापस ले : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे 8 मार्च को जंतर मंतर नई दिल्ली में एडवोकेट अनिल मिश्रा जी के नेतृत्व में प्रदर्शन करने के बाद आज लखनऊ आने पर आवास पर लोगों से बात करते हुए कहा कि देश के 35 करोड़ सवर्ण समाज यह सवाल है कि जवाब जरूर देना यूजीसी के खिलाफ़ दिल्ली मे सवर्ण समाज के आंदोलन को रोकने के बाद क्या सवर्ण समाज मोदी को वोट करेगा? जिस तरह से दिल्ली पुलिस पूरी घेरा बंदी कर संबंधानिक शांति ढंग से प्रोटेस्ट कर ने गए थे को चारों तरफ से घेर कर गिरफ्तार कर रही थी बसे कम हो गई। भाजपा सवर्ण के आंदोलन के आयोजन से भयभीत नहीं है उसे भय इस बात का है कि एक बार आंदोलन के चलते यूजीसी का मुद्दा छा गया घर घर तक ये बात पहुंच गई कि नरेंद्र मोदी ने गत 11 वर्षों में कौसा तुष्टिकरण किया है जो उनका बनाया हुआ अवतारी पुरुष हिन्दू , हृदय सम्राट का तिलस्म तो खत्म होगा ही साथ में अमित शाह का किला भी भरभरा कर गिर सकता है वो इस खबर को विषय को यही रोकना चाहते हैं क्यों कि संघ से लेकर भाजपा के अंदुरूनी सर्कल में अब समझ सबको आ गया कि यह विषय उतना छोटा नहीं था। क्यों कि जब UGC अधिनियम आया और लोगों ने विरोध करना शुरु किया  तब भाजपा और संघ के नेताओं का अंदरूनी कहना था कि इस विरोध से कुछ होने वाला नहीं है चार लोग सड़क पर नहीं आयेंगे किन्तु जब लोगों ने सड़क पर उतरना शुरू किया तब  हाउस अरेस्ट किया गया और राजधानी आने वाले लोगों को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शन न करने को पूरी ताग़त झोंक दी लेकिन सवर्ण ने यह दिखा दिया कि जब तक UGC बिल वापस नहीं होगा सवर्ण समाज चुप नहीं बैठेगा जब भी मोदी सरकार डरती है पुलिस को आगे करती है के नारों से राजधानी नई दिल्ली गुंजा जिंदर देखो पूरा दिल्ली सवर्ण समाज से पटा था।
पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन हुई अटल आवासीय विद्यालय प्रवेश परीक्षा
लखनऊ। श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में चल रही अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश हेतु परीक्षा पहली बार पूरे प्रदेश में एक ही दिन आयोजित की गई। यह परीक्षा प्रदेश के सभी जनपदों में बनाए गए 89 केंद्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर योजना के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

21 हजार विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश परीक्षा में हिस्सा

कक्षा 6 में प्रवेश के लिए निर्धारित 2880 सीटों के सापेक्ष 12,018 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जबकि कक्षा 9 की 1140 सीटों के लिए 9,054 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस प्रकार दोनों कक्षाओं को मिलाकर कुल 21,072 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया।

योगी सरकार का सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन पर फोकस

इस बार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए प्रश्नपत्र प्रदेश स्तर पर विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराए गए, जिससे सभी परीक्षा केंद्रों पर समान मानकों के अनुसार परीक्षा आयोजित की जा सकी। योगी सरकार ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन, श्रम विभाग, नामित नोडल अधिकारियों और केंद्र अधीक्षकों के माध्यम से समुचित व्यवस्थाएं कराईं। सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए, जिसके परिणामस्वरूप परीक्षा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई।

निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा

गौरतलब है कि अटल आवासीय विद्यालय योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म, पुस्तकें, खेलकूद सुविधाएं और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां उपलब्ध कराई जातीं हैं। इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप आधुनिक कक्षाओं, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान और डिजिटल शिक्षण सुविधाओं के साथ शिक्षा दी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
निर्धारित शासनादेश के अनुसार ही लें परीक्षा शुल्क: उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय
* अधिक फीस वसूली पर होगी ऑडिट, विश्वविद्यालयों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश

लखनऊ। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य विश्वविद्यालयों को शासनादेश के अनुसार ही परीक्षा शुल्क लेने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक फीस वसूली जाती है तो उसकी ऑडिट कराई जाएगी और आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में मंत्री ने लखनऊ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा शासनादेश के विपरीत फीस लिए जाने के मामले में समीक्षा बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता, पारदर्शी और छात्रहितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक वृद्धि से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने चाहिए।
शासनादेश के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क की समानता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक और बायोटेक के लिए 1000 रुपये तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क तय किया गया है।
मंत्री ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे शासनादेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए, ताकि संस्थान आत्मनिर्भर बन सकें।
बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश कुमार सिंह, प्रमुख सचिव एम.पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी तथा प्रो. जय प्रकाश सैनी सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रोजेक्ट गंगा’ से गांव-गांव पहुंचेगा हाई-स्पीड इंटरनेट, एक लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे

* स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और हिंदूजा ग्रुप की कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच एमओयू, 20 लाख घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने का लक्ष्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल कर रही है। इसी क्रम में ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड (हिंदूजा ग्रुप की सहायक कंपनी) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
इस परियोजना के तहत अगले दो से तीन वर्षों में प्रदेश के 20 लाख से अधिक घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं को अवसर देने की योजना है। परियोजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।
कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि यह एमओयू उत्तर प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से मिलने वाला रोजगार अधिक प्रभावी और स्थायी होता है। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ (गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट) के जरिए लगभग 20 लाख घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने से करीब एक करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचने से डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन व्यवसाय, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नए अवसर खुलेंगे। सरकार युवाओं को डिजिटल उद्यमिता से जोड़ने के लिए आर्थिक सहयोग भी दे रही है। जनवरी 2024 में शुरू की गई योजना के तहत युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज और बिना गारंटी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लाभ अब तक एक लाख से अधिक लोग उठा चुके हैं। मंत्री ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी भाषा को भी प्रमुख स्थान देने पर जोर दिया।
मनोज कुमार सिंह ने कहा कि आज के दौर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल हाईवे का महत्व कई मामलों में भौतिक एक्सप्रेसवे से भी अधिक हो गया है। यह पहल डिजिटल डिवाइड और संभावित एआई डिवाइड को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, ओटीटी सेवाएं और हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध होगा, जिससे टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, ई-कॉमर्स और डिजिटल स्किलिंग के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
विंसले फर्नांडीज ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट गंगा’ का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। उन्होंने बताया कि परियोजना के दो प्रमुख स्तंभ युवा सशक्तिकरण और महिला सशक्तिकरण हैं और इसके तहत प्रदेश में लगभग एक लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम में श्रम विभाग के प्रमुख सचिव शन्मुगा सुंदरम, एसटीसी के एसीईओ अक्षत वर्मा, हिंदूजा ग्रुप के प्रतिनिधि डॉ. एस.के. चड्ढा, हिंदुजा ग्लोबल सॉल्यूशन लिमिटेड के डायरेक्टर विंसले फर्नांडीज तथा सत्य प्रकाश सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
दिव्यांगजन और पिछड़ा वर्ग के सशक्तीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता: मंत्री नरेन्द्र कश्यप

* योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पहुंचाने के निर्देश, विभागीय योजनाओं की समीक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार दिव्यांगजन और पिछड़ा वर्ग के सर्वांगीण सशक्तीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाबद्ध और परिणामोन्मुखी ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।
सोमवार को सचिवालय स्थित नवीन भवन में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति, वित्तीय उपलब्धियों और लाभार्थियों तक पहुंच की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना है। इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि ये दोनों विश्वविद्यालय दिव्यांगजनों के लिए उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र हैं और इन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने मंडल स्तर पर कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर दिव्यांग छात्रों तक इन विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक सुविधाओं और अवसरों की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए। साथ ही रिक्त शिक्षकीय पदों पर शीघ्र नियुक्ति तथा निर्माणाधीन परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने पर जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान (दिव्यांग पेंशन) योजना के तहत अब तक 11,98,725 दिव्यांगजन लाभान्वित हुए हैं। कुष्ठावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत 13,395 लाभार्थियों को लाभ दिया गया है। कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के तहत 22,672 दिव्यांगजनों को 26,830 कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में दिव्यांगजनों को निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि शादी अनुदान योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 232 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब तक 94,040 लाभार्थियों को 188.08 करोड़ रुपये की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।
छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 25,98,344 छात्रों को 1586.59 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इसके अतिरिक्त अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना भी संचालित की जा रही है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 34,892 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि दिव्यांगजन और पिछड़ा वर्ग को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।