यूपी में मतदाता सूची पुनरीक्षण: 6 जनवरी से 6 मार्च तक 70.69 लाख नए आवेदन, सुनवाई 85.8% पूरी

* मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस वार्ता में दी जानकारी, मसौदा सूची में कुल मतदाता 12.55 करोड़

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों के लिए चल रहे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के तहत दावा एवं आपत्ति अवधि (6 जनवरी से 6 मार्च 2026) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं ने आवेदन किए हैं। शनिवार को लोकभवन स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में प्रदेश में कुल 12,55,56,025 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इनमें 6,88,43,159 पुरुष (54.83%), 5,67,08,747 महिलाएं (45.17%) और 4,119 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं।

* 1.26 करोड़ से अधिक मतदाताओं को नोटिस
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार पुनरीक्षण के दौरान 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता पाए गए जिन्होंने मिलान नहीं कराया, जबकि 2.22 करोड़ मतदाताओं के विवरण में तार्किक विसंगतियां मिलीं। इन्हें नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

नोटिस जारी करने की पहली तिथि: 14 जनवरी 2026

सुनवाई की शुरुआत: 21 जनवरी 2026

कुल नोटिस वितरण: 93.8%

6 मार्च तक सुनवाई पूरी: 85.8%

सुनवाई के लिए प्रदेश में 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 12,758 सहायक अधिकारी तथा 5,621 सुनवाई केंद्र बनाए गए हैं।

* दावा-आपत्ति अवधि में लाखों आवेदन
6 जनवरी से 6 मार्च 2026 के बीच नागरिकों से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए।

* फॉर्म-6 (नए मतदाता पंजीकरण)

कुल आवेदन: 70,69,810

पुरुष: 34,96,911
महिलाएं: 35,72,603
तृतीय लिंग: 296
18–29 आयु वर्ग: 47,81,526

* फॉर्म-7 (नाम विलोपन)

कुल आवेदन: 2,68,682

* फॉर्म-8 (संशोधन/पता परिवर्तन)
कुल आवेदन: 16,33,578
पता परिवर्तन: 1,12,877
प्रविष्टियों में सुधार: 14,88,115
ईपिक प्रतिस्थापन: 31,602

* राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी
पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तर पर पांच बैठकें आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त प्रदेश भर में गणना चरण और दावा-आपत्ति अवधि में कुल 3,090 बैठकें हुईं। राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 5,82,877 बूथ लेवल एजेंट भी पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल रहे।
* चार विशेष अभियान दिवस
अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए प्रदेश में 11 जनवरी, 18 जनवरी, 31 जनवरी और 22 फरवरी 2026 को विशेष अभियान दिवस आयोजित किए गए, जिनमें बूथ स्तर पर फॉर्म उपलब्ध कराए गए और अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया।

* शिकायत निस्तारण में यूपी आगे
राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल पर 27 अक्टूबर 2025 से 6 मार्च 2026 तक 92,497 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 91,790 (99.24%) का निस्तारण किया गया। फरवरी 2026 में शिकायत निस्तारण की रेटिंग के आधार पर उत्तर प्रदेश को देश में पहला स्थान मिला।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस और निर्धारित प्रक्रिया के किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। साथ ही मतदाताओं की सुविधा के लिए बूथ स्तर पर भी सुनवाई की व्यवस्था की गई है।
सवर्ण के दमन का कानून क्यों जुमला नहीं जवाब दो प्रधानमंत्री मोदी: सुरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष


लखनऊ। सवर्ण समाज की एक बैठक  सवर्ण आर्मी भारत के जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार शुक्ला जिला संरक्षक अखिलेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में हुआ बैठक का आयोजन यूजीसी बिल वापस लेने हेतु सामान्य वर्ग के साथ किये जा रहे भेद भाव हेतु समाज को जागृति करने के लिए हुई सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरज प्रसाद चौबे न कहा कि सवर्ण के दमन का कानून क्यों जुमला नहीं जवाब दो प्रधानमंत्री मोदी बे ने दलित मित्र के साथ बैठ कर खाना खाते हैं उसी दलित मित्र के साथ BA MA तक पहुंचने पर हाथ मिलाने में डरते है क्योंकि कि यूजीसी का एक ऐसा काला कानून है हमे भय लगता हैं कि हमारे ऊपर कार्रवाई न हो जाय उसमे बताया गया है कि SC ST OBC ki साथ जो भेद भाव होगा  वही शिर्फ जातिगत भेदभाव माना जाएगा वे लोग चाहे जितना ब्राह्मण, ठाकुर लाला बनिया का कब्र खोद ले,उनकी बहन बेटियों को छेड़े जातिगत भेद भाव नहीं माना जाएगा,हमारे बाप दादाओं ने राजनीतिक व्यक्तियों के झंडा ठंडा हमने भी थोथा तो  भी हमे क्या मिला एससीएसटी एक्ट, जातिगत आरक्षण अब यूजीसी जैसा काला कानून दिया मेरे भाईयों अब राजनेताओं राजनीतिक पार्टियों का झंडा ठंडा छोड़ कर सवर्ण आर्मी भारत का झंडा ठंडा उठाओ बाभन , ठाकुर बनिया ,लाला मिलकर बदलो अपनी दुनिया अगर नहीं बदलोगे तो आप को इस सिस्टम से बदल दिए जाओगे जब एक ब्राह्मण जप, भागवत गीता पूजा पाठ करता है तो क्या कहता है धर्म की जय हो ,अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो हम विश्व के कल्याण की बात करते हैं जिस विश्व में तालिबानी भी आते हैं,पाकिस्तानी भी आते हैं हमारा हृदय इतना बड़ा है कि हम विश्व कल्याण की बात करते हैं हमारे ऊपर शोषण का आरोप लगा रहे हैं,किसी स्थान पर योग्यता का कब्जा हो सकता है ये जाति का कब्जा बताते हैं मै योग्यता को प्राथमिकता देते हैं ये जाति को दे रहे हैं,अधर्म को मूक बनकर जो मात्र निहारे जाते हैं कर्ण,द्रोण भीष्म सब मारे जाते हैं आज अगर मौन रहेंगे तो इनका मौन ही  इनके मैंने बच्चों के मौत का कारण बनेंगे मै अपने सवर्ण समाज के लोगों को अवाहन करते हैं कि विधायक सांसद के बातों में मत आइए इनके बच्चे विदेश में जाकर पड़ लेगे यूजीसी वाले काले कानून  आप के बच्चेको  फेस करना पड़ेगा तो आप सड़क पर आ कर यूजीसी का विरोध करे
यूपी में ‘क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो’ बढ़कर 60% हुआ, फिर भी पूर्वांचल-बुंदेलखंड के कई जिले कर्ज वितरण में पीछे


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बैंकों का क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो (सीडी रेशियो) वर्ष 2017 के 47 प्रतिशत से बढ़कर अब 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बैंकों में जमा कुल राशि का करीब 60 प्रतिशत प्रदेश के लोगों की आर्थिक जरूरतों और विकास कार्यों के लिए ऋण के रूप में खर्च किया जा रहा है।
हालांकि, इसके बावजूद प्रदेश के पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई जिलों में कर्ज वितरण की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के केवल 10 जिलों में ही क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो 75 से 89 प्रतिशत के बीच है। वहीं 69 जिलों में यह अनुपात पहले की तुलना में बढ़ा जरूर है, लेकिन जिलों के बीच अंतर अभी भी काफी ज्यादा बना हुआ है।
प्रदेश के जिन जिलों में क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो 50 प्रतिशत से कम है, उनमें राजधानी लखनऊ भी शामिल है। इसके अलावा बहराइच, चित्रकूट, जालौन, भदोही, संतकबीर नगर, अमेठी, बांदा, मिर्जापुर, कौशांबी, औरैया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, देवरिया, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, प्रयागराज, बागपत, सोनभद्र, अयोध्या, प्रतापगढ़, आजमगढ़, बलिया और उन्नाव जैसे जिले भी इस सूची में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ बैंकिंग सेवाओं और ऋण वितरण को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
यूपी: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, हजारों पद खाली; भर्ती प्रक्रिया भी अटकी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार लेवल-2 और लेवल-3 श्रेणी के डॉक्टरों के पद सबसे अधिक खाली हैं, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और जिला अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक लेवल-2 के डॉक्टरों के कुल 7240 पदों में से 5497 पद खाली हैं, जबकि लेवल-3 में 5199 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 2007 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इसके अलावा संयुक्त निदेशक स्तर के 2858 पदों में से 1330 पद रिक्त हैं। डेंटल सर्जन के 70 में से 58 पद और साधारण ग्रेड के डेंटल सर्जन के 970 पदों में से 157 पद भी खाली पड़े हैं।
स्वास्थ्य अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और हेल्थ कैंप में अहम भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 8853 पदों में से 6364 पद खाली हैं। वहीं स्टाफ नर्स के 8113 पदों में से 3257 पदों पर अब तक भर्ती नहीं हो सकी है।
भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं हो पाईं। स्वास्थ्य विभाग ने 601 विशेषज्ञ और 1790 एमबीबीएस डॉक्टरों की भर्ती के लिए नवंबर 2025 में आवेदन मांगे थे। जनवरी 2026 में इंटरव्यू भी कराए गए, लेकिन 30 जनवरी को आने वाला परिणाम मेरिट और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच जारी नहीं हो सका।
इसके अलावा पिछले वर्ष दिसंबर में “वॉक-इन इंटरव्यू” के जरिए 2300 से अधिक पदों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए थे, लेकिन उनमें भी एक भी नियुक्ति नहीं हो सकी।
इस संबंध में प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य का कहना है कि “मेडिकल भर्ती बोर्ड” के गठन के बाद अब भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से जल्द नियुक्तियां की जाएंगी।
लखनऊ अमौसी एयरपोर्ट से खाड़ी देशों की 8 उड़ानें रद्द, 450 से ज्यादा यात्री प्रभावित
* दुबई, अबुधाबी और दम्माम की फ्लाइट कैंसिल, ईरान पर हमले के बाद एयरस्पेस बंद होने से असर

लखनऊ। लखनऊ के अमौसी स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से खाड़ी देशों के लिए संचालित कई उड़ानें प्रभावित हो गई हैं। दुबई, अबुधाबी और दम्माम जाने वाली कुल 8 फ्लाइट रद्द कर दी गईं, जिससे 450 से अधिक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
फ्लाइट रद्द होने के कारण यात्रियों के टिकट भी कैंसिल कर दिए गए। एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों को करीब 2.25 लाख रुपये तक का रिफंड जारी किया है और आगे की यात्रा के लिए रीबुकिंग की सुविधा भी दी जा रही है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में ईरान पर हुए हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए कई देशों ने अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसके चलते दुबई और आसपास के एयरस्पेस में उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है, जिसका असर भारत से जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है।
इस कारण इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस सहित कई एयरलाइंस ने एहतियात के तौर पर अपनी कुछ उड़ानें रद्द कर दी हैं। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर जांच लें और संबंधित एयरलाइंस से संपर्क में रहें।
बिजली लाइनों पर काम में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, पावर कॉर्पोरेशन के सख्त निर्देश

* करंट से हुई हालिया दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, ऑपरेटर की जिम्मेदारी तय

लखनऊ। बिजली लाइनों पर काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। हाल ही में करंट लगने की घटनाओं के बाद विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है।
नए निर्देशों के अनुसार लाइन पर काम शुरू करने से पहले कर्मचारियों के पास मौजूद सुरक्षा उपकरणों की जांच करना संबंधित ऑपरेटर की जिम्मेदारी होगी। यदि कर्मचारी के पास हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या अर्थ रॉड जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं पाए गए तो इसके लिए ऑपरेटर को जिम्मेदार माना जाएगा।
कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी लाइन पर काम के लिए शटडाउन देने से पहले ऑपरेटर को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी पूरी तरह सुरक्षा किट से लैस हैं और काम के लिए तैयार हैं।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पावर कॉर्पोरेशन ने 440 वोल्ट से लेकर 33 केवी तक की बिजली लाइनों पर होने वाले सभी कार्यों की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी जोनल मुख्य अभियंताओं को विशेष मॉनिटरिंग करने के आदेश भी जारी किए गए हैं, ताकि कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वित्तीय अनियमितताओं पर योगी सरकार सख्त : अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय बर्खास्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सिद्ध होने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। साथ ही उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, जांच अधिकारी की रिपोर्ट, उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों, संबंधित अधिकारी के स्पष्टीकरण तथा लोक सेवा आयोग की सहमति के आधार पर यह कठोर कार्रवाई की गई। जांच में पांडेय पर लगाए गए 15 आरोपों में से 14 आरोप सही पाए गए।
जांच में यह सामने आया कि उन्होंने वित्तीय अनियमितताएं करने, कदाचार, तथ्यों को छिपाने, न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने और नियमों के विरुद्ध आदेश जारी कर अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर कृत्य किए। इसे उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (आचरण) नियमावली, 1956 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।
आरोप है कि उन्होंने एक मदरसे में पहले से सेवा समाप्त किए जा चुके व्यक्ति के लिए बिना वैध पुनर्नियुक्ति आदेश के वित्तीय अनुमोदन बहाल कर वेतन भुगतान का आदेश जारी कर दिया। इसके चलते एक ही पद पर दो व्यक्तियों को वेतन भुगतान की स्थिति बन गई।
जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिए और उ.प्र. अशासकीय मदरसा विनियमावली, 1987 तथा संशोधित विनियमावली 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन किया।
शासन ने 23 फरवरी 2026 को यह मामला लोक सेवा आयोग को भेजा था। आयोग ने 28 फरवरी को प्रस्तावित दंड पर सहमति प्रदान कर दी। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति मिलने पर बर्खास्तगी का आदेश जारी कर विभागीय कार्रवाई पूरी कर दी गई।
लखनऊ में किसान पथ पर कार ने बाइक में मारी टक्कर, ससुर-दामाद की मौत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी के निकट किसान पथ पर गुरुवार दोपहर एक सड़क हादसे में मोटरसाइकिल सवार दामाद सुशील और ससुर मुन्नी लाल की जान चली गई, जबकि सुशील की पत्नी की हालत गंभीर है।

यह हादसा उस समय हुआ जब एक तेज रफ्तार एसयूवी कार ने सुशील की मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी। हादसे में घायल महिला समेत दामाद और ससुर को गंभीर हालत में पीजीआई स्थित ट्रामा टू में भर्ती कराया। जहां दामाद सुशील व ससुर मुन्नी लाल की मौत हो गई जबकि महिला की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

हादसे की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने रोड जाम कर प्रदर्शन करने लगे। हंगामे और प्रदर्शन किए जाने की जानकारी मिलने पर एसीपी गोसाईगंज ऋषभ यादव, इंस्पेक्टर राजीव रंजन उपाध्याय कई थानों की फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस अफसर परिजनों को समझाने में जुटे हैं और जाम जैसी स्थिति बनी हुई है। स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि मोहनलालगंज के गोपाल खेड़ा निवासी सुशील कुमार (46), अपनी पत्नी और ससुर मुन्नी लाल (60) के साथ माेटरसाइकिल से रिश्तेदार के घर से रहे थे। तभी रास्ते में किसान पथ पर बेकाबू एसयूवी ने इनकी माेटरसाइकिल में टक्कर मार दी। हादसे में माेटरसाइकिल सवार सुशील और उनके ससुर मुन्नी लाल की मौत हो गई और सुशील की पत्नी की हालत गंभीर है। मामले की जांच की जा रही है।
लखनऊ में पुलिस की अनोखी होली, हजरतगंज से पुलिस लाइन तक निकली रंगारंग शोभायात्रा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सभी थानों और पुलिस लाइन में भी होली एक दिन बाद मनाई जाती है, इसलिए आज 5 मार्च को लखनऊ में पुलिसकर्मियों ने उत्साह और उल्लास के साथ अनोखे अंदाज में होली मनाई। शहर के हजरतगंज से पुलिस लाइन तक भव्य होली शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें पुलिस अधिकारी और जवान रंग-गुलाल के बीच जमकर झूमते नजर आए।
शोभायात्रा के दौरान डीजे की धुन पर पुलिसकर्मियों ने जमकर नृत्य किया। इस दौरान एसीपी विकास जायसवाल और इंस्पेक्टर विक्रम सिंह भी डांस करते नजर आए, जिससे माहौल और अधिक उत्साहपूर्ण हो गया।
शोभायात्रा में एक आकर्षक बग्घी भी शामिल रही, जिसकी लगाम एडीसीपी जितेंद्र ने संभाली, जबकि बग्घी में अमरेंद्र सिंह सेंगर सवार रहे। वहीं महिला पुलिसकर्मी विंटेज कार में सवार होकर शोभायात्रा का हिस्सा बनीं और होली के रंग में सराबोर दिखीं।
डीजे पर बज रहे लोकप्रिय गीत ‘गोली चल जावेगी’ पर महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों ने जमकर ठुमके लगाए। पूरे रास्ते रंग, गुलाल और संगीत के बीच पुलिसकर्मियों का उत्साह देखने लायक रहा।
शोभायात्रा के दौरान पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सिंह सेंगर और ज्वाइंट सीपी बबलू कुमार को पुलिसकर्मियों ने माला और टोपी पहनाकर सम्मानित किया। होली के इस आयोजन ने पुलिस परिवार में आपसी भाईचारे और उत्साह का संदेश दिया।
महिला दिवस पर लखनऊ में ‘पिंक रोजगार महाकुंभ’, 50 से अधिक कंपनियां देंगी 5 हजार महिलाओं को नौकरी का अवसर
लखनऊ। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को लखनऊ में “पिंक रोजगार महाकुंभ-2026” का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, लखनऊ द्वारा आयोजित किया जाएगा।
रोजगार महाकुंभ का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में सुबह 10 बजे से किया जाएगा। इस मेले के माध्यम से 5 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में यह विशेष रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है, जिसमें निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियां सीधे महिलाओं का चयन करेंगी।
* महिलाओं के लिए विशेष अवसर
पिंक रोजगार महाकुंभ में केवल महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसमें 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं भाग ले सकेंगी। योग्यता के रूप में 10वीं, 12वीं, स्नातक, परास्नातक, बी.टेक, बीबीए, एमबीए, फार्मेसी सहित अन्य तकनीकी एवं सामान्य डिग्रीधारी महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। इसका उद्देश्य विभिन्न शैक्षिक पृष्ठभूमि वाली महिलाओं को रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करना है।
* 50 से अधिक कंपनियां करेंगी भर्ती
रोजगार महाकुंभ में देश की कई प्रमुख कंपनियां भाग लेंगी। इनमें Flipkart, Reliance Jio, ICICI Bank, Bharti Airtel, Bajaj Finserv, Mahindra Finance, Amazon और KFC जैसी कंपनियां शामिल होंगी। ये कंपनियां सेल्स, कस्टमर सर्विस, आईटी सपोर्ट, बैंकिंग, रिटेल, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर से जुड़े पदों पर चयन प्रक्रिया संचालित करेंगी।
अधिकारियों के अनुसार इस रोजगार मेले के माध्यम से 5 हजार से अधिक महिलाओं को नौकरी से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
* ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य
रोजगार महाकुंभ में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों को पहले से ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए रोजगार संगम पोर्टल और National Career Service Portal पर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क है।
इंटरव्यू के समय अभ्यर्थियों को अपने साथ बायोडाटा की प्रतियां, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, शैक्षिक प्रमाणपत्र और रजिस्ट्रेशन स्लिप लानी होगी।
* महिला रोजगार को बढ़ावा देने की पहल
प्रदेश सरकार मिशन रोजगार, कौशल विकास कार्यक्रमों और सेवायोजन मेलों के माध्यम से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। पिंक रोजगार महाकुंभ महिलाओं को कंपनियों से सीधे जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि प्रदेश में महिला कार्यबल की भागीदारी भी मजबूत होगी।