ब्रिटिश सैन्य बेस का इस्तेमाल करेगा अमेरिका, पश्चिम एशिया तनाव के बीच बड़ा कदम*
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ब्रिटेन ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद करने का ऐलान कर दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने रविवार को एक बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों (बेस) के इस्तेमाल की अनुमति देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लंदन, ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के सीधे हमले में शामिल नहीं हो रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन पहले इन हमलों में शामिल नहीं था और अब भी उसका यही रुख है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका (US) को अपने सैन्य बेस के इस्तेमाल की अनुमति देगा। इसका मकसद ईरान के मिसाइल खतरों का मुकाबला करना है। स्टार्मर ने साफ किया कि यह अनुमति केवल खास और सीमित बचाव के लिए दी गई है। लंदन किसी भी तरह के सीधे हमले में शामिल नहीं होगा।
ईरान पर बड़ा आरोप
हालांकि, उन्होंने ईरान पर पिछले दो दिनों में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान उन देशों पर लगातार हमले कर रहा है जिन्होंने उस पर हमला नहीं किया। ईरान ने उन एयरपोर्ट और होटलों को भी निशाना बनाया है जहां ब्रिटिश नागरिक ठहरे हुए हैं। हालात को खतरनाक बताते हुए स्टार्मर ने कहा कि इस इलाके में करीब दो लाख ब्रिटिश नागरिक मौजूद हैं।
साइप्रस में रॉयल एयरफोर्स के एयरबेस पर हमला
दरअसल, रविवार रात साइप्रस में रॉयल एयरफोर्स (RAF) के एयरबेस पर ड्रोन हमले किए गये। हमले के दौरान धमाकों की तेज आवाजें सुनाई दी हैं। इस ब्रिटिश एयरबेस पर सैकड़ों ब्रिटिश एयरफोर्स के अधिकारी और उनके परिवार भी रहते हैं। यह हमला आधी रात को किया गया है। हमले के बाद एयर सायरन बजने लगे और RAF टाइफून और F-35B लाइटनिंग जेट को हवा से हवा में ईंधन भरने वाले टैंकरों के साथ भेजा गया।
हमले में कई ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल
हमले में कई ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था लेकिन ज्यादातर को इंटरसेप्ट कर लिया गया। हमला होते ही एयरबेस पर रहने वाले परिवारों को छिपने की चेतावनी जारी कर दी गई। द सन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि "एयरबेस की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।" रिपोर्ट के मुताबिक एयरबेस पर सारी रात सायरन बजते रहे और डर था कि कम से कम सात और मिसाइलों का हमला हो सकता है।





2 hours ago
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