बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री करेंगे शादी, जानें कैसी दुल्हन है पसंद
छतरपुर, मध्य प्रदेश। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी शादी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने मंच से कहा, "मैंने मां को बोल दिया है कि शादी के लिए लड़की ढूँढ लें। अब शादी पक्की होगी।" बाबा बागेश्वर के इस ऐलान के बाद उनके अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उनकी शादी मां की पसंद की लड़की से होगी। उन्होंने कहा, "गुरुजी की आज्ञा मिल गई है, अब तो शादी करनी पड़ेगी। मैंने मां को लड़की तलाशने के लिए कह दिया है।" उनका यह फैसला अनुयायियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और हर कोई जानना चाहता है कि उनकी होने वाली दुल्हन कौन होंगी।
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने हाल ही में 305 गरीब बेटियों के विवाह कर उन्हें अपनी बेटी की तरह विदा किया है। बाबा धीरेंद्र शास्त्री का मानना है कि मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं बल्कि सेवा का केंद्र भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा सपना है कि एक दिन 1100-1100 अनाथ बेटियों का विवाह बागेश्वर धाम की भूमि से हो।"
बाबा ने बुंदेलखंड के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इलाके के लोग मजदूरी पर निर्भर हैं और पलायन के लिए मजबूर हैं। उनका उद्देश्य है कि बुंदेलखंड शिक्षा, स्वास्थ्य और सनातन धर्म में आगे बढ़े। उन्होंने भविष्य में कैंसर हॉस्पिटल बनाने का भी सपना साझा किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बनेगा। बाबा के इस निर्णय और सामाजिक कार्यों ने उनके अनुयायियों में उत्साह और आस्था दोनों बढ़ा दी है।









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डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान में लागू आयुष्मान भारत योजना की पात्रता शर्तों के कारण लगभग 48 प्रतिशत परिवार योजना के दायरे से बाहर हैं। साथ ही, योजना में निर्धारित 5 लाख रुपये की सीमा महंगे और जटिल उपचार के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को बिना आय सीमा आयुष्मान योजना में शामिल किया गया है, तो फिर सभी नागरिकों को सार्वभौमिक निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती?
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों तथा उनके आश्रितों को सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद भी 100 प्रतिशत निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलती है। “यदि प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुविधा मिल सकती है, तो आम जनता को इससे वंचित रखना अन्यायपूर्ण है,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस विधायक ने अनुमान जताया कि ऐसी योजना लागू करने पर राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 19 से 28 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय वहन करना पड़ सकता है। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया—
बजट सत्र में तेज हुई बहस
इस प्रस्ताव ने बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए यह कदम जरूरी है, ताकि गरीब से अमीर तक हर नागरिक को उच्च स्तरीय और समान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके।
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