बाल उत्सव ‘प्रगति–स्वाभिमान और सफलता की ओर 2.0’ में बच्चों ने भरी रचनात्मक उड़ान
*“संस्कार, संवाद और अनुशासन से संवरता है बचपन, आदतों पर निर्भर है बच्चों का भविष्य”*
*“मोबाइल नहीं, संस्कार बनाएं भविष्य—बच्चों की आदतों पर टिकी है सफलता की नींव”*
*“आज की आदतें, कल का नागरिक—बच्चों का भविष्य अभिभावकों की सजगता से जुड़ा”*
*गोण्डा 18 फरवरी 2026* - प्रकाश मैरिज हॉल, पंतनगर में मंगलवार को आयोजित प्रगति–स्वाभिमान और सफलता की ओर 2.0 बाल उत्सव में बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुक्त, ने कहा कि मीना मंच केवल एक मंच नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों, स्वाभिमान और नेतृत्व क्षमता को सशक्त करने की प्रयोगशाला है।
आयुक्त ने कहा कि जब बच्चे अपनी कहानी स्वयं लिखते हैं, कॉमिक्स बनाते हैं और जेंडर स्टीरियोटाइप, मीडिया के आदर्श स्वरूप तथा हानिकारक बॉडी टॉक जैसे विषयों पर विचार रखते हैं, तब वे केवल प्रतिभागी नहीं रहते—वे परिवर्तन के वाहक बनते हैं। शिक्षा का उद्देश्य पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न होकर अभिव्यक्ति, निर्णय क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और नेतृत्व कौशल का विकास होना चाहिए।
आयुक्त ने बच्चों की प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक और डिजिटल युग में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों से नियमित रूप से संवाद बनाए रखें, उनकी भावनाओं, विचारों और समस्याओं को गंभीरता से सुनें तथा विश्वास का वातावरण तैयार करें, जिससे बच्चे स्वयं को अकेला या उपेक्षित न महसूस करें।
आयुक्त ने विशेष रूप से बच्चों की स्क्रीन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि मोबाइल, टीवी और इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके विकल्प के रूप में खेलकूद, योग, व्यायाम और अन्य शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनेक बच्चे अवसाद, तनाव और नकारात्मक सोच से गुजर रहे हैं, ऐसे में अभिभावकों को समय-समय पर परामर्श (काउंसलिंग) की व्यवस्था करनी चाहिए। सकारात्मक आदतें, अनुशासन और संवेदनशील पालन-पोषण ही बच्चों को आत्मविश्वासी, संतुलित और जिम्मेदार नागरिक बनाने की मजबूत नींव रखते हैं। कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को आयुक्त देवीपाटन मंडल शशि भूषण लाल सुशील के हाथों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
आयुक्त ने बताया कि पुरस्कृत बच्चों को स्टेट लेवल प्रतियोगिता में प्रतिभाग के लिए भेजा जाएगा। जिन बच्चों को पुरस्कार नहीं मिल सका, उनसे कहा गया कि यह अंतिम अवसर नहीं है—निरंतर प्रयास से सफलता अवश्य मिलेगी।
इस अवसर पर चैंपियन ऑफ चेंज श्रेणी में 10 बच्चों को सम्मानित किया गया, जिनमें गोण्डा की अनसुइया यादव व लक्ष्मी सोनी, बलरामपुर की साक्षी, श्रावस्ती की अनुप्रिया, बहराइच की निधि तिवारी सहित अन्य प्रतिभाशाली बच्चे शामिल रहे।
बाल उत्सव का उद्देश्य उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित सेल्फ-स्ट्रीम एवं मीना मंच गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के सपनों और आकांक्षाओं का उत्सव मनाना, आत्मविश्वास को पोषित करना और सफलता की कहानियों को साझा करने का मंच प्रदान करना रहा। कार्यक्रम ने सिद्ध किया कि सही दिशा और अवसर मिलने पर बच्चे न केवल स्वयं आगे बढ़ते हैं, बल्कि समाज को भी सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर संयुक्त विकास आयुक्त देवीपाटन राकेश कुमार पाण्डेय, सहायक निदेशक (बेसिक शिक्षा) राम सागर पति त्रिपाठी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित सिंह उपस्थित रहे।
2 hours and 48 min ago
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