जनरल नरवणे की किताब में क्या लिखा? छपने से पहले ही गरमा गई सियासत

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क्या पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद (एमएम) नरवणे की किताब को सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है? एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। 

जनरल नरवणे की ऑटोबायोग्राफी 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' भले अभी रिलीज नहीं हुई, लेकिन इसने सरकार, विपक्ष, पब्लिक, लेखक-प्रकाशक जैसे फोर स्टार्स ऑफ पॉलिटिक्स को जन्म दे दिया है। भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की ऑटोबायोग्राफी के हवाले से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रखना चाहते हैं। लेकिन, सरकार की दलील है कि किसी किताब के हवाले से कुछ नहीं कहा जाना चाहिए। 

रक्षा मंत्रालय ने एक साल से अधिक समय से रिव्यू के लिए रखा

दरअसल, बीते दिनों सरकार ने संसद में दावा किया कि राहुल गांधी लोकसभा में नरवणे की अप्रकाशित किताब से अंश नहीं पढ़ सकते हैं, क्योंकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि रक्षा मंत्रालय की अपनी प्रशासनिक शाखा ने किताब को एक साल से अधिक समय से रिव्यू के तहत रखा हुआ है, जिससे प्रकाशन रुका हुआ है।

क्या सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही किताब?

राहुल गांधी ने लोकसभा में सोमवार को कहा था, "इस पत्रिका में नरवणे जी ने कहा है कि यह उनका संस्मरण है। जो सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है। मैं इसमें से सिर्फ़ पांच लाइन पढ़ना चाहता हूं।"

राहुल ने पूछा- क्या लिखा जिससे घबरा रहे?

राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा, "यह कहते हैं कि आतंकवाद से लड़ते हैं, लेकिन ये एक उद्धरण से डरते हैं। इसमें क्या लिखा है जिससे वो घबरा रहे हैं और मैं बोल नहीं पा रहा हूं। अगर ये डर नहीं रहे हैं तो मुझे पढ़ने की इजाज़त दें।"

जनवरी 2024 में ही आनी थी किताब

बता दें कि दिसंबर 2023 में ही पेंगुइन ने जनरल नरवणे की 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का ऐलान किया था। तब इसका प्री-ऑर्डर भी लिया जा रहा था। किताब जनवरी 2024 में ही आनी थी, लेकिन इसकी रिलीज रोक दी गई। कहा गया कि रक्षा मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली है। रक्षा मंत्रालय भी नहीं बता रहा है कि पूर्व सेना प्रमुख की इस किताब को क्लियरेंस कब मिलेगी और मिलेगी या नहीं।

किताब में क्या?

इंडियन एक्सप्रेस की एक में दावा किया गया है, यह किताब 2020 में चीन के साथ पूर्वी लद्दाख़ में हुए सैन्य विवाद के बारे में बताती है। इसमें गलवान घाटी की झड़प और अग्निपथ योजना का भी ज़िक्र है। इस किताब में 31 अगस्त 2020 की रात को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हुई बातचीत का ज़िक्र है। एक्सप्रेस की रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि दिसंबर 2023 में, न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने जनरल नरवणे की किताब से कुछ हिस्से छापे थे। इसमें भी 31 अगस्त की शाम की घटना का विस्तार से जिक्र था। इस घटना के बारे में अब कारवां मैगज़ीन में भी एक आर्टिकल छपा है।

परीक्षा पे चर्चा आज, पीएम मोदी छात्रों से करेंगे संवाद, देख सकेंगे लाइव

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विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से बाहर निकालने और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का आयोजन आज होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को परीक्षा पे चर्चा करेंगे।

कार्यक्रम कहां और कितने बजे होगा?

‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ का आयोजन आज यानी 6 फरवरी को सुबह 10 बजे से होगा। इसकी स्क्रीनिंग संसद के बालयोगी ऑडिटोरियम में होगी, जहां करीब 250 छात्र मौजूद रहेंगे।

परीक्षा पे चर्चा को लाइव कहां देख सकते हैं?

इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रधानमंत्री के यूट्यूब चैनल, दूरदर्शन (डीडी) और शिक्षा मंत्रालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा. आप अपनी सुविधानुसार इसे कहीं भी देख सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन का बना नया रिकॉर्ड

इस साल कार्यक्रम ने अपनी लोकप्रियता के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस बार 4.5 करोड़ से अधिक छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जो पिछले साल के 3.53 करोड़ के ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ से कहीं ज्यादा है।

'एग्जाम वॉरियर्स' अभियान का हिस्सा

परीक्षा पे चर्चा केंद्र सरकार की एग्जाम वॉरियर्स पहल से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के दौरान होने वाली चिंता और दबाव से बाहर निकालना है। फरवरी के मध्य से सीबीएसई सहित विभिन्न बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और अप्रैल में जेईई मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित होंगी। ऐसे समय में यह संवाद छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार माना जाता है।

तिरुपति में मानसुम सीनियर लिविंग की नई शुरुआत, ‘मयूरा – टेम्पल टाउन’ हुआ लॉन्च
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नई दिल्ली। दक्षिण भारत में सीनियर हाउसिंग के क्षेत्र में अग्रणी बेंगलुरु स्थित कंपनी मानसुम सीनियर लिविंग ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति में अपने पहले सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट ‘मयूरा – टेम्पल टाउन’ के लॉन्च की घोषणा की है। यह तिरुपति का अपनी तरह का पहला सुसज्जित सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट है, जिसे वसुंधरा कंस्ट्रक्शंस के सहयोग से विकसित किया गया है।

यह प्रोजेक्ट रेनिगुंटा रोड पर श्रीनिवासम कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित 3.5 एकड़ में फैले रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट टेम्पल टाउन का हिस्सा है। मयूरा को वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, आराम और सामाजिक जुड़ाव को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है, ताकि वे एक निश्चिंत और सम्मानजनक जीवन जी सकें। आध्यात्मिक नगरी तिरुपति की पृष्ठभूमि में यह प्रोजेक्ट आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक मूल्यों का संतुलन प्रस्तुत करता है।

मानसुम सीनियर लिविंग पहले से ही बेंगलुरु, मैसूर और गोवा में अपने प्रोजेक्ट्स का सफल संचालन कर रहा है, जहाँ 850 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं। तिरुपति में प्रवेश के साथ कंपनी ने अपने विस्तार को धार्मिक और टियर-2 शहरों की ओर बढ़ाया है।

मानसुम सीनियर लिविंग के को-फाउंडर अनंतराम वी वरयूर ने कहा कि मयूरा में रिटायरमेंट लाइफ को नए सिरे से परिभाषित किया गया है, जहाँ देखभाल, सुविधाएँ और समुदाय एक साथ मिलते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को यहाँ केवल घर ही नहीं, बल्कि अपनापन भी मिलेगा।

प्रोजेक्ट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए 2 बीएचके, 2.5 बीएचके और 3 बीएचके फ्लैट्स उपलब्ध हैं। इनमें एंटी-स्किड फ़्लोरिंग, ग्रैब बार, पैनिक अलार्म सिस्टम और सुविधाजनक मूवमेंट जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
फ्लैट्स की शुरुआती कीमतें इस प्रकार हैं—
2 बीएचके: ₹73 लाख,
2.5 बीएचके: ₹92 लाख,
3 बीएचके: ₹1.07 करोड़।

यहाँ 10,000 वर्ग फुट में फैली सीनियर लिविंग सुविधाएँ मानसुम की अपनी टीम द्वारा संचालित की जाएँगी, जिनमें पौष्टिक भोजन, ऑन-साइट हेल्थकेयर, 24 घंटे आपातकालीन सेवा, हाउसकीपिंग, कंसीयर्ज सर्विस और दैनिक गतिविधियाँ शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, 20,000 वर्ग फुट का आधुनिक क्लब हाउस भी विकसित किया गया है, जिसमें जिम, योग एवं ध्यान कक्ष, लाइब्रेरी, स्विमिंग पूल और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए हॉल उपलब्ध हैं। गार्डन, वॉकिंग ट्रैक और कम्युनिटी हॉल सामाजिक मेलजोल और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देंगे।

मानसुम की को-फाउंडर सुश्री सुमथी अनंतराम ने कहा कि प्रत्येक कम्युनिटी की योजना वरिष्ठ नागरिकों की ज़रूरतों को केंद्र में रखकर बनाई जाती है। मयूरा में तिरुपति की आध्यात्मिक भावना के साथ सुरक्षा और देखभाल का समन्वय किया गया है।

मानसुम के को-फाउंडर कुशल रमेश ने कहा कि मयूरा वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मान, स्वतंत्रता और साथ का प्रतीक है, जहाँ वे एक खुशहाल और सुरक्षित जीवनशैली चुन सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि जेएलएल और एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया (एएसएलआई) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की संगठित सीनियर हाउसिंग का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण भारत में है। इसी को ध्यान में रखते हुए मानसुम अपने प्रोजेक्ट्स का विस्तार कर रहा है।

प्रोजेक्ट लॉन्च इवेंट तिरुपति में आयोजित किया गया, जिसमें सी. दिवाकर रेड्डी, चेयरमैन, तिरुपति अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (टीयूडीए) सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
नाम लिए बिना नड्डा का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, बोले-कांग्रेस को अबोध बालक का बंधन न बनाएं

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संसद के बजट सत्र में अमेरिका से डील और पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब पर सातवें दिन भी हंगामा जारी है। विपक्षी सांसद राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोके जाने पर हंगामा करते रहे। लोकसभा शुरू होने के साथ ही सांसदों ने नारेबाजी की। इसके बाद 65 सेकंड के अंदर ही कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। 12 बजे कार्यवाही शुरू हुई, 5 मिनट बाद ही 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।

कांग्रेस पार्टी को अहंकार से बचने की सलाह

वहीं राज्यसभा में भी राहुल गांधी को बोलने से रोकने का मुद्दा उठाया गया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस पर जेपी नड्डा ने कहा कि लोकसभा की बात राज्यसभा मत करिए। कांग्रेस पार्टी को अहंकार से बचना चाहिए। पार्टी को अबोध बालक का बंधक न बनाएं।

नड्डा ने विपक्ष के रवैये पर उठाए सवाल

राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति की अनुमति से जेपी नड्डा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर समय और सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में पीएम मोदी जवाब देने के लिए तैयार बैठे रहे, लेकिन विपक्ष ने लोकसभा को चलने नहीं दिया। जहां तक राज्यसभा का सवाल है, विपक्ष ने कहा कि सरकार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान दे

सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने का रास्ता बंद, यूपीएससी ने बदले नियम

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संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन बुधवार को जारी किया है। आयोग ने इस बार प्रयास और पात्रता से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों में सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने का रास्ता बंद कर दिया गया है। यानी अब एक बार IAS, IPS या IFS बन गए तो बार-बार यूपीएससी का एग्जाम नहीं दे पाएंगे।

यूपीएससी के नए नियम के अनुसार, सिविल सर्विस ज्वॉइन करने वाले उम्मीदवारों को सिर्फ एक अटेंप्ट मिलेगा। वे तीसरी बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। नए नियम की शर्ते इस प्रकार हैं।

सिर्फ एक बार रैंक सुधारने का मौका

सिविल सर्विस एग्जाम-2026 में अगर ग्रुप-ए या फिर आईपीएस मिलती है, तो उम्मीदवार को सिर्फ एक बार यानी सीएसई-2027 में रैंक सुधारने का मौका मिलेगा। मौका तभी मिलेगा जब उम्मीदवार को ट्रेनिंग जॉइन न करने की वन टाइम एक्जेम्शन (एक बार की छूट) मिले।

छूट फाउंडेशन कोर्स तक सीमित

छूट फाउंडेशन कोर्स तक सीमित होगी। यदि उम्मीदवार न ट्रेनिंग जॉइन करता है, और न छूट लेता है, तो सीएसई-2026 और सीएसई-2027 दोनों के आधार पर मिली सेवा अपने आप रद्द हो जाएगी।

नए सेलेक्शन के बाद पुराना सेलेक्शन हो जाएगा कैंसिल

अगर कोई ऐसा उम्मीदवार यूपीएससी सीएसई-2027 में सेलेक्ट होता है, तो वह सीएसई -2026 या सीएसई -2027 के आधार पर अलॉट की गई सेवा को एक्सेप्ट कर सकता है और सीएसई -2027 के लिए निर्धारित ट्रेनिंग में शामिल हो सकता है। इस लेवल पर उसके द्वारा चुनी गई सेवा के अलावा अन्य सेवा का अलॉटमेंट रद्द कर दिया जाएगा। अगर उसे सीएसई -2027 के आधार पर कोई सेवा आवंटित नहीं की जाती है, तो वह सीएसई-2026 के माध्यम से आवंटित सेवा में शामिल हो सकता है।

Mood of the Nation सर्वे में सांसद रवि किशन देश के नंबर-1 OTT स्टार

* India News–C Voter सर्वे में 16.1% लोगों की पहली पसंद बने गोरखपुर के सांसद, दिग्गज कलाकारों को छोड़ा पीछे

नई दिल्ली। India News द्वारा प्रसारित एवं प्रतिष्ठित सर्वे एजेंसी C-Voter के राष्ट्रीय स्तर के “Mood of the Nation” सर्वे में गोरखपुर से सांसद एवं जाने-माने अभिनेता रवि किशन शुक्ला को देश का सबसे लोकप्रिय OTT स्टार घोषित किया गया है।

सर्वे के मुताबिक, कुल 20 लोकप्रिय कलाकारों में से 16.1 प्रतिशत दर्शकों ने रवि किशन शुक्ला को अपनी पहली पसंद बताया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि उनकी लोकप्रियता केवल अभिनय तक सीमित नहीं, बल्कि आम जनता से उनके गहरे जुड़ाव का प्रमाण भी है।

* नवाजुद्दीन, मनोज बाजपेयी और बॉबी देओल को छोड़ा पीछे

सर्वे में दूसरे स्थान पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी (15.3%) और तीसरे स्थान पर मनोज बाजपेयी (12.8%) रहे। वहीं बॉबी देओल, अनिल कपूर और पंकज त्रिपाठी जैसे स्थापित कलाकार भी इस सूची में शामिल रहे, लेकिन रवि किशन शुक्ला ने सभी को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया।

* संघर्ष, संस्कार और सशक्त अभिनय की पहचान

भोजपुरी सिनेमा से अपने करियर की शुरुआत कर हिंदी फिल्मों, टेलीविजन और अब OTT प्लेटफॉर्म तक अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले रवि किशन शुक्ला ने हर माध्यम में दर्शकों का भरोसा जीता है। हालिया फिल्म “लापता लेडीज़” में निभाई गई उनकी भूमिका को दर्शकों और समीक्षकों ने खासा सराहा।

* राजनीति और अभिनय में संतुलन का उदाहरण

भारतीय जनता पार्टी के सांसद होने के साथ-साथ रवि किशन शुक्ला ने यह सिद्ध किया है कि जनसेवा और रचनात्मक क्षेत्र में संतुलन संभव है। संसद से लेकर स्क्रीन तक, उन्होंने हर भूमिका को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया है।

* जनता को समर्पित किया सम्मान

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए रवि किशन शुक्ला ने कहा,

“यह सम्मान मेरे दर्शकों, मेरे गोरखपुर और देश की जनता का है। जनता का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। हर हर महादेव।”

यह उपलब्धि न केवल रवि किशन शुक्ला की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आज का दर्शक कंटेंट, किरदार और कनेक्शन को सबसे अधिक महत्व देता है।

NCP के दोनों गुटों का होने वाला था विलय, डेट भी था फाइनल? अजीत पवार के निधन के बाद बड़ा खुलासा

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राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP के दोनों धड़े एक होने वाले था। शरद पवार और अजित पवार ने इसके लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। मर्जर का डेट भी तय कर लिया गया था। एक भव्‍य कार्यक्रम में NCP शरद पवार गुट और अजित पवार गुट के एक होने की जानी बाकी थी। अजित पवार के निधन के बाद ये चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।

किरण गुजर का बड़ा दावा

अजित पवार के निधन के बाद से ही उनके राजनीतिक विरासत को लेकर अलग-अलग तरह से कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच अब उनके एक करीबी ने ये बड़ा खुलासा किया है। दिवंगत अजित पवार के करीबी किरण गुजर ने दावा किया कि "वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के विलय के लिए उत्सुक थे, और यह जल्द ही होने वाला था।" दिग्गज नेता के निधन के दो दिन बाद किरण गुजर ने बताया कि उनसे यह बात खुद अजित पवार ने साझा की थी।

विलय पर बातचीत उन्नत चरण में

एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ विधायक जयंत पाटिल और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शशिकांत शिंदे ने भी इस बात की पुष्टि कि दोनों गुटों के विलय को लेकर जारी बातचीत उन्नत चरण में है। यह बातचीत इस बिंदु तक पहुंच गई है कि संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल और नए चेहरों को शामिल करने पर अनौपचारिक रूप से विचार किया जा रहा है।

शरद पवार के घर हुई थी बैठक

जयंत पाटिल ने कहा, "हाल के दिनों में हम (दोनों गुट) अक्सर मिलते रहे थे। 16 जनवरी को मेरे आवास पर मिले थे ताकि साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सके। 17 जनवरी को शरद पवार के घर पर एक बैठक हुई थी। दोनों गुटों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी।”

पीटी उषा के पति वी श्रीनिवास का निधन, घर में इस हालत में मिला शव

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भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य पी टी उषा के पति वी श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनका देहांत केरल के कोझिकोड स्थित आवास पर हुआ। वे 67 वर्ष के थे।

श्रीनिवासन अपने घर थिक्कोडी पेरुमलपुरम में लगभग 1:00 बजे गिर पड़े थे। उन्हें तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह घटना तब हुई जब पीटी उषा एक संसदीय सत्र से लौट रही थीं और घर पर मौजूद नहीं थीं।

किरेन रिजिजू का ट्वीट

किरेन रिजिजू ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राज्यसभा सांसद और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की प्रेसिडेंट पी टी उषा जी के पति श्री वी. श्रीनिवासन जी के निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। उषा जी और शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इस मुश्किल समय में उन्हें शक्ति मिले, इसके लिए प्रार्थना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटी उषा से फोन पर बात कर उनके पति के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति और समर्थन भी जताया।

कौन थे वी. श्रीनिवासन?

वी. श्रीनिवासन का जन्म कुट्टिक्काड पोन्नानी के वेंगाली थारवाद में नारायणन और सरोजिनी के घर हुआ था। वे सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) में उप अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने 1991 में पीटी उषा से शादी की थी, जो उनकी दूर की रिश्तेदार भी थीं।

उषा के जीवन और करियर में निभाई अहम भूमिका

केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी श्रीनिवासन उषा के शानदार खेल करियर और राजनीतिक करियर के दौरान हमेशा उनके साथ रहे। उन्हें उषा का मजबूत संबल और उनकी कई पेशेवर उपलब्धियों के पीछे प्रेरक शक्ति माना जाता था। इस दंपति का एक बेटा है जिसका नाम उज्ज्वल है।

कम हो गई कड़वाहट! राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिले शशि थरूर

#shashitharoormeetrahulgandhiandkharge

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब शशि थरूर की पार्टी नेतृत्व से नाराजगी की खबरें आ रही हैं।

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर राहुल गांधी के ऑफिस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की। यह आधे घंटे से अधिक समय तक चली। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, "सब ठीक है।" उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे- थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हमारी बातचीत हुई। हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई। सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैं और क्या कह सकता हूं?... मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?

उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं-थरूर

जब उनसे पूछा गया कि क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज़ के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अभी, मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है। मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है।'

शशि थरूर लगातार सुर्खियों में

बता दें कि हाल के महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर। कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर। कभी केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर। बीते कुछ समय में शशि थरूर ने कई अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया। केरल चुनाव की रणनीति पर होने वाली बैठक में वे नहीं पहुंचे। सोनिया गांधी के आवास पर हुई मीटिंग भी मिस की। वजह यात्रा बताई गई। लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंदरूनी नाराजगी की बात भी सामने आई।

थरूर ने माना-कुछ मुद्दे हैं

वहीं, थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। थरूर ने कहा था, 'मैं बस इतना कह सकता हूं कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें मुझे अपने पार्टी नेतृत्व के साथ उठाना है, न कि किसी सार्वजनिक मंच पर। मैं संसद के लिए दिल्ली जाऊंगा, और मुझे मौका मिलेगा, मेरा मानना है, कि मैं अपनी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व के सामने बहुत स्पष्ट रूप से रख सकूं और उनका दृष्टिकोण जान सकूं, एक उचित बातचीत कर सकूं।'

UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा-दुरुपयोग का खतरा

#supreme_court_stayed_ugc_equity_regulations_2026

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियमों को लेकर पूरे देशभर में जबरदस्त विरोध हो रहा है। नए नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला किया है और यूजीसी के नियम पर फिलहाल रोक लगा दी है।

केंद्र को नोटिस जारी, 19 मार्च तक मांगा जवाब

सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कहा कि ये प्रावधान पहली नज़र में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया। सीजेआई सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को रेगुलेशंस को फिर से बनाने के लिए कहा है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब देने को कहा है।

कोर्ट ने पूछा अहम सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 23 जनवरी को जारी किए गए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने' वाले नियमों में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से ऐसा लगता है कि इनका दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हम समाज में एक निष्पक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाला माहौल बनाना चाहते हैं। जस्टिस बागची ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि जब पहले से ही 3 'E' मौजूद हैं, तो फिर 2 'C' की क्या जरूरत पड़ जाती है? यह सवाल नियमों की प्रासंगिकता पर उठाया गया था।

दरअलस, यूजीसी के नए नियमों पर बीते कुछ दिनों से बवाल जारी है। सवर्ण तबके के स्टूडेंट्स इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी बुधवार को ही यूजीसी नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए हामी भरी थी। याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव पैदा कर सकते हैं। मामला राहुल देवन और अन्य बनाम केंद्र सरकार है। सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका को सुनवाई के लिए आज लिस्ट किया था।