झड़ौदा ब्लॉक-10 में कांग्रेस की मासिक बैठक, 30 लोगों ने थामी पार्टी की सदस्यता
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नई दिल्ली। झड़ौदा ब्लॉक 10 कांग्रेस की अध्यक्ष रेखा के नेतृत्व में आयोजित ब्लॉक की मासिक बैठक में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल देखने को मिली। बैठक के दौरान 30 नए साथियों को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई, जिसे संगठन विस्तार की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर ब्लॉक के सभी पदाधिकारी, ऑब्जर्वर रामनिवास राणा, जिला अध्यक्ष आदेश भारद्वाज, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मंगेश त्यागी एवं अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक में कांग्रेस की विचारधारा, नीतियों और जनहितकारी संघर्षों पर विस्तार से चर्चा की गई और लोगों को पार्टी से जोड़ने का संकल्प लिया गया। उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज देश और प्रदेश में जनता के लिए कांग्रेस ही एकमात्र सशक्त और भरोसेमंद विकल्प है। आम आदमी पार्टी की गलत नीतियों से दुखी होकर 20 सदस्यों तथा भाजपा से असंतुष्ट 10 लोगों ने कांग्रेस का दामन थामा। कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वालों में बबीता, सीमा, पिंटू कुमार, रविंदर कुमार, इदरीश खान, रामबाबू यादव, गुड़िया, पिंकी देवी, राधा, जीवन, करिश्मा, आशु, कांता, प्रेम देवी, सुनीता, राजरानी, महेंद्री, माधुरी, मुरली कुमार, प्रेम देवी, करिश्मा, गायत्री देवी, सविता देवी, चांद तारा, लक्ष्मी, नजमा, माधुरी, रूबी, विजयपाल और आलोक कुमार प्रमुख रूप से शामिल हैं। बैठक के अंत में सभी नए सदस्यों का स्वागत किया गया और संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया गया।
बांग्लादेश ने आईपीएल का प्रसारण किया बैन, मुस्तफिजुर को लीग से बाहर किए जाने पर फैसला

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2026) के मैच अब बांग्लादेश में नहीं दिखाई जाएंगे। बांग्लादेश सरकार ने आईपीएल के मैचों के टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। अपने क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश की सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। पड़ोसी देश के सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार (5 जनवरी) को इसे लेकर सभी स्थानीय टीवी चैनलों को एक पत्र भेजा है, जिसमें आईपीएल के टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी दी गई है।

बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इसमें लिखा गया कि बीसीसीआई ने 26 मार्च से शुरू हो रही इंडियन प्रीमियर लीग (आपीएल) में बांग्लादेश के क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स टीम से बाहर करने का निर्णय लिया है। बयान में कहा गया कि इस निर्णय के पीछे कोई ठोस या तार्किक कारण नहीं था। यह फैसला बांग्लादेश की जनता के लिए अपमानजनक, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। ऐसे में अगले निर्देश तक आईपीएल के सभी मैच के प्रचार, प्रसारण और पुन: प्रसारण को बंद रखने के निर्देश दिए जाते हैं।

मुस्ताफिजुर रहमान केस के बाद बढ़ा विवाद

आईपीएल 2026 के लिए हुए मिनी ऑक्शन में मुस्ताफिजुर रहमान को कोलकाता नाइटराइडर्स ने खरीदा था। मगर इसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर बीसीसीआई ने हस्तक्षेप करते हुए केकेआर फ्रेंचाइजी को मुस्ताफिजुर को रीलिज करने का आदेश दिया था। बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस फैसले को किसी भी तरह से अतार्किक ठहराया।

बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेलने की दी है धमकी

इससे पहले बांग्लादेश में मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से हटाए जाने की बांग्लादेश सरकार ने आलोचना की थी। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी इस फैसले का विरोध किया था। साथ ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेलने के लिए भारत में टीम नहीं भेजने का भी ऐलान कर दिया था। बीसीबी ने भारत में अपनी टीम की सुरक्षा को खतरा बताया था और इसके लिए मुस्तफिजुर रहमान को हटाए जाने के कारणों को आधार बनाया था। बीसीबी ने अपनी टीम के मैच भारत से श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग करते हुए आईसीसी को भी पत्र लिखा है।

दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मिले सीएम योगी, यूपी में मंत्रिमंडल फेरबदल पर कयास

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उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बदलाव को लेकर अटकलें जारी है। इन सबके बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को दिल्ली पहुंचे। यहां सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष मुलाकात की। जिसके बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं और तेज हो चली हैं।

करीब एक घंटे चली बातचीत

मंत्रिमंडल के विस्तार पहले सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। नये वर्ष पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी के बीच पहली मुलाकात करीब एक घंटे की रही।

कैबिनेट विस्‍तार को लेकर अहम मंत्रणा

मुलाकात के दौरान पीएम मोदी के पास एक टैबलेट था तो सीएम के हाथ में फाइल। माना जा रहा है कि यूपी कैबिनेट विस्‍तार को लेकर दोनों के बीच अहम मंत्रणा हुई है। कहा जा रहा है कि इस कैबिनेट रिशफल में उन लोगों को तवज्‍जो दी जा सकती है जो जमीनी स्‍तर पर काम कर सकें। कुछ राज्‍यमंत्रियों का भी प्रमोशन हो सकता है।

नितिन नवीन से भी मिलेंगे योगी

पीएम से मिलने के बाद सीएम योगी नवनियुक्त कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले काफी वक्त से यूपी में मंत्रिमंडल में विस्तार की चर्चा चल रही है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी कैबिनेट में विस्तार से बीजेपी सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेगी।

बीजेपी नेता संगीत सिंह सोम को बांग्लादेशी नंबर से मिली धमकी, बम से उड़ाने की चेतावनी

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यूपी बीजेपी के फायरब्रांड नेता और मेरठ की सरधना से पूर्व विधायक संगीत सिंह सोम को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। यह धमकी बांग्लादेश से किए गए कॉल और मैसेज के जरिए दी गई है।

धमकी भरे फोन कॉल, मैसेज और वीडियो कॉल मिलने के बाद पूर्व विधायक के निजी सचिव शेखर ने सरधना थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

सभी संदिग्ध नंबर पुलिस को सौंपे

भाजपा नेता संगीत सोम ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 8 बजे उन्हें धमकी भरे मैसेज और वीडियो कॉल प्राप्त हुए। कॉल करने वालों ने पूर्व विधायक को परिवार सहित बम से उड़ाकर जान से मारने के साथ-साथ कुछ प्रमुख न्यूज चैनलों को भी बम से उड़ाने की धमकी भी दी। उन्होंने सभी संदिग्ध नंबर पुलिस को जांच के लिए सौंप दिए हैं।

धमकी देने वाले नंबर बांग्लादेश के

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमकी देने वाले नंबर बांग्लादेश के हैं। साइबर सेल और अन्य तकनीकी एजेंसियों की मदद से पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि धमकी देने वालों की पहचान की जा सके।

बांग्लादेश में हिंदुओं के शोषण पर बीजेपी नेता का कड़ा रूख

बता दें कि कि संगीत सोम ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था और IPL टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख खान और बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को लेकर तीखी टिप्पीणी की थी। सोम ने कहा था कि जब पड़ोसी देशों में भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है, तब ऐसे खिलाड़ियों पर करोड़ों खर्च करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा था कि वे ऐसे मुद्दों पर आगे भी खुलकर बोलते रहेंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी धमकियाँ क्यों न मिलें।

उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत, दिल्ली दंगा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी बड़ी साजिश के मामले में कोर्ट ने इन दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अन्य पांच आरोपियों गुलफिशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दोनों को बेल नहीं दी जा सकती है। यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के केस की तुलना दूसरे आरोपियों से नहीं की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हर आरोपी की जमानत याचिका की जांच अलग-अलग करनी होगी, क्योंकि सातों आरोपी अपराध के मामले में एक समान स्थिति में नहीं हैं।

मुकदमे के ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं

कोर्ट ने साफ किया कि मुकदमे के ट्रायल में हो रही देरी को 'ट्रंप कार्ड' की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से वैधानिक सुरक्षा उपाय स्वतः ही निरस्त होने का खतरा है। अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ यूएपीए के तहत प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं, इसलिए इस स्तर पर दोनों को राहत नहीं दी जा सकती।

उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका गंभीर

सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम टिप्पणी भी की कि कुछ आरोपियों की ‘केंद्रीय भूमिका’ होती है, जबकि कुछ की भूमिका केवल सहायक या मददगार की होती है। इन दोनों के बीच फर्क किए बिना फैसला करना अपने आप में मनमाना होगा। कोर्ट ने माना कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका बाकी आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर प्रकृति की प्रतीत होती है।

दिल्ली दंगे का मास्टरमाइंड होने का आरोप

बता दें कि उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर फरवरी 2020 की हिंसा के 'मास्टरमाइंड' होने का आरोप है, जिसमें यूएपीए और कई दूसरी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। यह हिंसा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम और प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स के विरोध प्रदर्शनों के बीच भड़की थी। इसमें 53 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी, बोले-रूसी तेल छोड़ो वरना…पीएम मोदी को लेकर कही बड़ी बात

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। ट्रंप की ओर से सोमवार को की गई सख्त टिप्पणी में कहा गया है कि अगर रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर दिल्ली का रुख हमारे साथ मेल नहीं खाता है तो भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘अगर भारत रूस के तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।’

पहले की पीएम मोदी की तारीफ

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी ऑडियो संदेश में ट्रंप ने अपने विशेष सैन्य विमान- एयरफोर्स वन में मीडिया कर्मियों के साथ संवाद के दौरान पीएम मोदी पर टिप्पणियां कीं। उन्होंने भारत में रूसी तेल आयात से जुड़े एक सवाल के संदर्भ में कहा, 'वे मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे...प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वे नेक इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे (भारत-रूस) व्यापार करते हैं, उन्हें यह बात भलीभांति पता थी कि अमेरिका उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है।’

ट्रेड डील पर बातचीत के बीच बड़ा बयान

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने का यह बयान भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत के बीच आया है। कुछ समय पहले ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा और अब वह तेल नहीं खरीद रहे हैं। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज किया था। अब उन्होंने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी है और हम टैरिफ बढ़ाएंगे।

पहले भी लगा चुके हैं भारी टैरिफ

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन पहले ही भारतीय सामानों पर कुल 50% तक टैरिफ लगा चुका है। ट्रंप के मुताबिक, इसमें से 25% टैरिफ तो केवल इसलिए लगाया गया है ताकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की सजा दी जा सके। इस भारी-भरकम टैक्स का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के डेटा के मुताबिक, मई से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट लगभग 37.5% तक गिर गया है। जो निर्यात पहले 8.8 अरब डॉलर का हुआ करता था, वह घटकर केवल 5.5 अरब डॉलर रह गया है।

बातचीत से हो समाधान', वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर बोला भारत

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वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, इस हमले के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय का भी जवाब आ गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई का समर्थन करता है और सभी पक्षों से अपील करता है कि वे बातचीत के जरिए मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकालें, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।

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क्या कहा भारतीय विदेश मंत्रालय ने

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम बेहद चिंताजनक हैं। हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन दोहराता है। हम सभी संबंधित पक्षों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संवाद के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आह्वान करते हैं। काराकस स्थित भारतीय दूतावास के साथ भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान करना जारी रखेगा।

वेनेजुएला को लेकर भारत की ट्रैवल एडवाइजरी

इससे पहले भारत ने शनिवार रात अपने नागरिकों को वेनेजुएला की स्थिति को देखते हुए वहां गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी। मंत्रालय ने यह परामर्श वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा पकड़े जाने से जुड़े घटनाक्रम के मद्देनजर जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला में मौजूद सभी भारतीयों से भी अत्यधिक सावधानी बरतने और अपनी आवाजाही सीमित रखने को कहा है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए भारतीय नागरिकों को वहां सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सख्ती से सलाह दी जाती है। बयान में कहा गया, जो भारतीय किसी भी कारण से वेनेजुएला में हैं, उन्हें अत्यधिक सतर्क रहने, अपनी गतिविधियां सीमित रखने और काराकास स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी जाती है।

अमेरिकी हिरासत में मादुरो और उनकी पत्नी

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलीया फ्लोरेस इस समय अमेरिकी हिरासत में हैं। उन्हें 3 जनवरी को कराकास में की गई एक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद पकड़ा गया था। इस ऑपरेशन की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. जानकारी के मुताबिक मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क के न्यूबर्ग स्थित स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस लाया गया। फिलहाल दोनों को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है और अगले सप्ताह मैनहैटन की एक फेडरल अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। मादुरो पर अमेरिका में साल 2020 में नार्को-आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में तथाकथित कार्टेल दे लॉस सोल्स का नेतृत्व करना, एफएआरसी के साथ मिलकर कोकीन की तस्करी करना और हथियारों से जुड़े अपराध शामिल हैं।

वेनेजुएला पर अब अमेरिका का कब्जा, जानें क्या है हमले की वजह?

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अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इन हमलों के बाद वेनेज़ुएला में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। हमलों के बाद उसने देश के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अब वेनेजुएला पर अमेरिका का कब्जा है। उन्होंने कहा कि जब तक वहां हालात ठीक नहीं हो जाते, वेनेजुएला को अमेरिका ही चलाएगा।

अमेरिका ने भारतीय समय के मुताबिक शनिवार सुबह 11:30 बजे वेनेजुएला के 4 शहरों पर एकसाथ हमला किया था। इस दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो एक मिलिट्री बेस में सो रहे थे। सीएनएन ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि उन्होंने मादुरो और उनकी पत्नी को बेडरूम से घसीटकर बाहर निकाला और अपने कब्जे में ले लिया। मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया एडेला को अमेरिकी सैनिक न्यूयॉर्क लाया गया है।

मादुरो ने हमले के बाद दी थी चेतावनी

अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने बयान जारी कर कहा था कि वे जवाब देंगे। उन्होंने देशभर में इमरजेंसी लगाने का ऐलान किया था। उनके बयान जारी करने के 1 घंटे बाद ट्रंप ने उन्हें पकड़ने का ऐलान किया।

अमेरिका ने वेनेजुएला पर क्यों किया हमला?

अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर अमेरिका और वेनेजुएला के बीच ऐसे हालात क्यों बने? अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला की सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी और वहां से अमेरिका के खिलाफ साजिशें हो रही थीं। ट्रंप का आरोप है कि वेनेजुएला उनके देश में कोकीन और फेंटेनाइल जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी का बड़ा रास्ता बन चुका है। इसे खत्म करने के लिए मादुरो को सत्ता से हटाना जरूरी है।

क़ैदियों को जबरन अमेरिका भेजने का आरोप

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका में वेनेज़ुएला के लाखों लोग घुसे चले आ रहे हैं। उनका कहना है कि वहाँ से अवैध आप्रवासियों की बाढ़ के लिए मादुरो ज़िम्मेदार हैं। ये प्रवासी उन लगभग 80 लाख वेनेज़ुएला वासियों में शामिल हैं, जिनके बारे में अनुमान है कि वे 2013 से देश के आर्थिक संकट और दमन के कारण देश से भाग गए। ट्रंप ने मादुरो पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'अपनी जेलों और पागलखानों को ख़ाली कर दिया' और क़ैदियों को जबरन अमेरिका भेज दिया।

मादुरो पर आतंकी संगठन के नेतृत्व का आरोप

ट्रंप ने अमेरिका में ड्रग्स, ख़ासकर फ़ेंटानिल और कोकीन की बढ़ती सप्लाई को रोकने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने वेनेज़ुएला के दो गैंग - ट्रेन दे अरागुआ और कार्टेल दे लोस सोलेस को 'विदेशी आतंकवादी संगठनों' की लिस्ट में डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दूसरे समूह का नेतृत्व खडुद मादुरो करते हैं।

दोनों देशों के बीच विवाद का इतिहास

दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र बीते तीन दशकों से 'तेल' रहा है। दरअसल, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है, जो कि इस दक्षिण अमेरिकी देश को जबरदस्त तौर पर समृद्ध करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा वेनेजुएला में सोना और गैस के भी भंडार हैं। 1990 के दशक और इससे पहले तक वेनेजुएला की खुली अर्थव्यवस्था में अमेरिका की कंपनियां भी सम्मिलित रही थीं। अमेरिकी अधिकारियों ने कई मौकों पर खुले तौर पर कहा है कि वेनेजुएला का तेल वॉशिंगटन का है, और वे अमेरिकी कंपनियों के फायदे के लिए वेनेजुएला के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण को पलटवाना चाहते हैं। ओबामा और बाइडन जैसे डेमोक्रेट नेताओं के अंतर्गत अमेरिका ने कूटनीतिक तौर पर वेनेजुएला पर दबाव बनाया। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने 2017 में वेनेजुएला पर तेल प्रतिबंध लगाए और 2019 में उन्हें और कड़ा कर दिया। इससे वेनेजुएला की कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचने की क्षमता बाधित हुई। अब अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला पर कार्रवाई को और सख्त कर दिया है ।

छत्तीसगढ़ में बड़ा एक्शन, सुकमा में 14 नक्सली ढेर

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छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शनिवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ों में अब तक 14 माओवादी ढेर कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई सुकमा और बीजापुर जिलों में अलग-अलग स्थानों पर चल रहे दो बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशनों के दौरान हुई।

गश्त पर निकले जवानों से आमना-सामना

सुकमा जिले के किस्टाराम एरिया में जवान गश्त पर निकले थे। तभी उनका नक्सलियों से सामना हो गया और गोलीबारी शुरू हो गई। दोनों तरफ से काफी देर तक गोलीबारी चली। इस दौरान जवानों ने कई नक्सलियों को मार गिराया। बताया जा रहा है कि इस मुठभेड़ में 14 से ज़्यादा नक्सली मारे गए हैं। मौके से कई शव बरामद किए गए हैं। अधिकारी ने साफ किया कि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है और पूरे इलाके की गहन सर्चिंग की जा रही है।

नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, बीजापुर और सुकमा जिलों के दक्षिणी इलाकों में सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। अभियान के तहत दक्षिण बस्तर क्षेत्र में डीआरजी की विशेष टीमों को रवाना किया गया था। ऑपरेशन के दौरान बीजापुर जिले में सुबह लगभग 5 बजे से डीआरजी और नक्सलियों के बीच रुक-रुक कर मुठभेड़ जारी रही। वहीं, सुकमा जिले में भी सुबह लगभग 8 बजे सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग की स्थिति बनी हुई है।

आईपीएल 2026 से बांग्लादेश के मुस्तफिजुर रहमान बाहर, शाहरुख खान की टीम से छुट्टी

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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ चल रही हिंसा के कारण भारत में भावनात्मक उबाल जोरों पर है। इसका असर क्रिकेट भी भी दिख रहा है। इंडियन प्रीमियर लीग में बांग्लादेशी क्रिकेटर के खेलने को लेकर लगातार चल रहे विरोध के बाद अब इस मामले में कार्रवाई की गई है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) को अपने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज करने का आदेश दिया है।

बीसीसीआई का बड़ा फैसला

बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान आईपीएल 2026 नहीं खेलेंगे। कोलकाता नाइटराइडर्स ने उन्हें स्क्वॉड से रिलीज कर दिया है। दरअसल, भारत में भारी विरोध के बीच मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल 2026 से हटाने की मांगों के बीच बीसीसीआई ने बड़ा फैसला लिया था। बीसीसीआई सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने बताया कि बोर्ड ने शाहरुख खान की आईपीएल फ्रेंचाइजी केकेआर से मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज करने के आदेश दे दिए हैं।

केकेआर ने मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था

बता दें कि बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को केकेआर फ्रेंचाइजी ने आईपीएल 2026 की नीलामी में 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। हालांकि, हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा के बाद लगातार केकेआर और टीम के मालिक शाहरूख खान पर सवाल उठाए जा रहे थे। बीसीसीआई की भी आलोचना हो रही थी। विवाद को बढ़ता देख अब बीसीसीआई ने मामले में हस्तक्षेप किया और केकेआर को मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज करने का निर्देश दिया।

बांग्लादेश में हिंदूओं पर हिंसा को लेकर बढ़ा विवाद

मुस्तफिजुर रहमान पहले भी आईपीएल का हिस्सा रहे हैं और कई फ्रेंचाइजी के लिए खेल चुके हैं। लेकिन इस बार ही उनके खेलने पर बवाल हो रहा है। दरअसल, इसकी पूरी जड़ बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की घटनाएं हैं। हाल के महीनों में बांग्लादेश से आई इन खबरों ने भारत में चिंता बढ़ाई है। इस कारण ही भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में कुछ दिनों में टकरार देखने मिली है। इन्हीं घटनाओं का हवाला देते हुए भाजपा और शिवसेना के कई नेताओं ने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी को खेलने देने पर सवाल खड़े किए थे। मुस्तफिजुर को खरीदने पर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। जहां कुछ नेता इसे देशद्रोह से जोड़ रहे हैं, वहीं कई राजनीतिक दल और नेता शाहरुख खान के समर्थन में खुलकर सामने आए थे।