पुतिन से मुलाकात शेड्यूल न होने पर भड़के राहुल गांधी, बोले- सरकार नहीं चाहती मैं मिलूं

#rahulgandhiallegescentrebarslopfrommeetingforeign_leaders

Image 2Image 3

रूसी राष्ट्रपति पुतिन कुछ घंटे में भारत दौरे पर पहुंचने वाले हैं। 4 दिसंबर की शाम से कल तक पुतिन भारत के खास मेहमान होंगे। इस दौरान उनकी मुलाकात पीएम मोदी और राष्ट्रपति से होगी। इस बीच राहुल गांधी ने सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार नहीं चाहती है कि मैं बाहर से आने वाले लोगों से मिलूं। मोदी जी और विदेश मंत्रालय इस नियम का पालन नहीं करते हैं। यह उनकी इनसिक्योरिटी है।

परंपरा का पालन नहीं करने का आरोप

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, अब तक परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले नेता विपक्ष के नेता से भी मिलते थे। यह (पूर्व प्रधानमंत्री) अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के समय में भी होता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं कर रहे हैं।

सरकार क्या करती है हर बार ?

राहुल गांधी ने कहा, आजकल यह होता है कि जब बाहर से कोई आता है या मैं कहीं बाहर जाता हूं तो सरकार सुझाव देती है कि बाहर से आने वाले अतिथि या उनके (राहुल के) बाहर जाने पर वहां के लोग नेता प्रतिपक्ष से नहीं मिलें। उनका कहना था कि सरकार यह हर बार करती है।

राहुल बोले- हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व हम भी करते हैं

राहुल गांधी ने कहा, हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व हम भी करते हैं, सिर्फ सरकार नहीं करती है। विपक्ष का नेता भी भारत का प्रतिनिधित्व करता है और इन बैठकों से विदेशी नेताओं को एक अलग नजरिया मिलता है। सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष के लोग बाहर के लोगों से मिलें।

पांच वर्षों में देश के एक हजार शहरी केंद्रों का हाेगा डिजिटल मानचित्रण: मनोज जोशी

Image 2Image 3

दिल्ली ब्यूरो

नई दिल्ली। जियोस्मार्ट इंडिया 2025 के तीसरे दिन शहरी भूमि आधुनिकीकरण पर राष्ट्रीय नेतृत्व और तकनीकी विशेषज्ञों ने गहन चर्चा की। सत्रों में यह स्पष्ट हुआ कि भारत एकीकृत, सटीक और हाई-प्रिसीजन डिजिटल मैपिंग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां वास्तविक समय में उपलब्ध भू-स्थानिक परतें शासन, अवसंरचना निर्माण और देश की व्यापक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि भारत आने वाले महीनों में 157 शहरों में हाई-प्रिसीजन सर्वे पूरे करने की दिशा में है और अगले पांच वर्षों में 1,000 शहरी केंद्रों का व्यापक डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी राज्य इस अभियान में शामिल हैं। बड़े राज्यों में 10 पायलट शहर और छोटे राज्यों में 1–2 शहर तय किए गए हैं, लेकिन लक्ष्य एक है। पूरे देश के शहरी भू-अभिलेखों को सटीक और अद्यतन बनाना। श्री जोशी ने जमीन पर मौजूद व्यावहारिक चुनौतियों की भी ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि कई शहरों में, जिनमें दरभंगा और दिल्ली के नजदीक अलवर शामिल हैं, निजी सर्वेयर अब भी टेप से माप करने जैसे पुराने तरीकों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि अब समय है कि संपत्ति लेन-देन के लिए पूरी तरह लैटीट्यूड–लॉन्गिट्यूड आधारित डिजिटल स्केच अपनाए जाएँ। राजस्व विभागों को हाथ से बने रफ खाके छोड़कर जीआईएस-लिंक्ड रजिस्ट्रेशन सिस्टम अपनाने होंगे। नागरिक हमसे तेज़ चल रहे हैं, सरकार को भी उसकी गति पकड़नी होगी। उन्होंने उद्योग जगत से सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। “सरकारी अधिकारियों को जीआईएस की सीमित जानकारी है, हम सीख रहे हैं। निजी क्षेत्र को मार्गदर्शन में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। भारत में मजबूत जीआईएस बाज़ार तभी बनेगा जब दोनों क्षेत्र साथ मिलकर काम करेंगे।”

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक भूमि मैपिंग अर्थव्यवस्था के लिए कितनी अहम है। “भारत की आर्थिक भावना का बड़ा आधार भूमि और संपत्ति मूल्य हैं। कोई व्यक्ति 50 लाख की संपत्ति खरीदकर आज उसे 4 करोड़ मानता है और उसी भावना से खर्च करता है। लेकिन हमारा दस्तावेजी सिस्टम इसकी गति से नहीं चल पा रहा। राजस्व विभागों की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को स्पष्ट, सटीक और पारदर्शी अभिलेख उपलब्ध कराएं। भूमि अभिलेख विभाग के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी ने तकनीकी प्रगति का विवरण देते हुए कहा कि भारत के जटिल शहरी स्वरूप को पारंपरिक सर्वे से आगे की तकनीक की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सरकार 57 शहरों में एक बड़े पायलट की शुरुआत कर रही है, जिसमें पंजीयन दस्तावेज, नगर निकाय टैक्स रिकॉर्ड और अन्य भू-अभिलेखों को एकीकृत कर “प्रोकार्ड” नामक एकमात्र प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जो अपार्टमेंट स्तर तक स्वामित्व दर्शाएगा।

उन्होंने बताया, “भारत पहली बार ड्रोन, एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के माध्यम से 5 सेंटीमीटर सटीकता वाली एरियल इमेज तैयार कर रहा है। पहले एक भूखंड का सर्वे पूरे दिन ले लेता था। 2014 में कॉर्स (CORS) प्रणाली लागू होने के बाद वही काम 10 मिनट में हो जाता है और सर्वेयर अब रोजाना 200 संपत्तियाँ माप सकते हैं।” सत्यार्थी ने केरल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में एरियल मैपिंग की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार उन्नत ऑब्लिक कैमरों, फाइव-लेंस इमेजिंग और घने वृक्षों के भीतर तक स्कैन करने में सक्षम LiDAR सेंसर का उपयोग कर रही है। “यह संयोजन 20–30 राज्यों में परीक्षण में है ताकि सबसे कठिन भू-भाग में भी सटीक नक्शे तैयार किए जा सकें।” जियोस्पेशल वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने कहा कि भारत उस मोड़ पर है जहाँ उच्च-गुणवत्ता, वास्तविक समय और एकीकृत डिजिटल मानचित्र राष्ट्रीय नियोजन के लिए अनिवार्य बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि हम एक डिजिटल युग में हैं जहाँ लोकेशन स्वयं एक आर्थिक संपत्ति है। खाना मंगाने से लेकर टैक्सी बुक करने तक, आपकी लाइव लोकेशन मूल्य पैदा करती है। भारत अलग-अलग विभागों के अलग-अलग नक्शों के युग में नहीं रह सकता। वन नेशन, वन मैप अब नारा नहीं, आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में शहरों, कृषि और अवसंरचना में भारी बदलाव आए हैं, इसलिए एक अद्यतन और एकीकृत डिजिटल आधार अब जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब चुनौती मैपिंग नहीं बल्कि डाटा को सामंजस्यपूर्ण बनाना है। “हर विभाग को एक ही संदर्भ फ्रेम पर काम करना होगा। ड्रोन सर्वे से लेकर क्लाउड आधारित AI सिस्टम तक, सभी को साझा भू-स्थानिक परतों पर काम करना होगा तभी हम मजबूत राष्ट्रीय जियोस्पैशल इकोसिस्टम तैयार कर पाएंगे।” सत्र में भूमि संसाधन विभाग के निदेशक श्याम कुमार भी उपस्थित रहे, जो नक्ष कार्यक्रम के कई महत्वपूर्ण हिस्सों की निगरानी करते हैं और केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सत्र का समापन इस एकमत आह्वान के साथ हुआ कि नक्ष कार्यक्रम की रफ्तार बढ़ाई जाए, मल्टी-लेयर क्षमता वाले आधुनिक जीआईएस (GIS) सॉफ्टवेयर विकसित किए जाएं और देशभर में 30 सेंटीमीटर सटीकता वाले सैटेलाइट बेस मैप सुनिश्चित किए जाएं, जब तक कि पूर्ण रिसर्वे पूरे न हो जाएं। इन चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत के भू-सुधार सिर्फ तकनीकी उन्नयन नहीं हैं बल्कि नागरिक सुविधाओं, व्यापार अनुकूलता, विवादों में कमी, संपत्ति बाज़ार की मजबूती और आने वाले दशक में खरबों रुपये की आर्थिक क्षमता को खोलने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।

इंडिगो की 150 के करीब उड़ानें रद्द, देशभर के एयरपोर्ट पर हजारों यात्री परेशान, डीजीसीए ने मांग जवाब

#indigoflightscancelscrewwoesairportcheckinissue

Image 2Image 3

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों बड़े परिचालन संकट से जूझ रही है। एयरलाइन कंपनी इंडिगो में क्रू की कमी के कारण देशभर में एयरलाइन के ऑपरेशन पर बुरा असर पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु सहित कई बड़े एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स लगातार कैंसिल हो रही हैं। दो दिनों में 150 से अधिक फ्लाइटें रद्द करनी पड़ीं, जबकि सैकड़ों उड़ानें देर से उड़ीं।जिससे लाखों यात्रियों को भारी परेशानी हुई। हालात ये रहे कि डीजीसीए ने इंडिगो के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर जवाब मांग लिया है।

क्रू की कमी से जूझ रही देश की सबसे बड़ी एयरलाइन

बता दें कि इंडिगो में क्रू की कमी है। इस पर डीजीसीए के नए नियमों को लागू करना इंडिगो के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। 1 नवंबर से लागू हुए नियमों के तहत एयरलाइंस को पायलटों, फ्लाइट अटेंडेंट्स को थकान से बचाना होगा ताकि उड़ानों की सुरक्षा प्रभावित न हो। नियमों के तहत सभी एयरलाइंस के क्रू सदस्य एक दिन में आठ घंटे से ज्यादा, हफ्ते में 35 घंटे से ज्यादा और महीने में 125 घंटे से ज्यादा और साल में एक हजार घंटे से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकेंगे। साथ ही क्रू सदस्यों को आराम देना भी जरूरी कर दिया गया है। पायलट रात के समय दो से ज्यादा लैंडिंग नहीं करेंगे और क्रू सदस्य दो लगातार रात्रि ड्यूटी के बाद फिर से नाइट शिफ्ट नहीं करेंगे।

धड़ाधड़ कैंसल हो रही फ्लाइट्स

क्रू की कमी से जूझ रही इंडिगो का परिचालन व्यवस्था चरमरा गया है।कंपनी को पिछले दो दिनों में सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। आज भी इंडिगो के ऑपरेशंस पर बड़ा असर दिख रहा है। दिल्ली से लेकर हैदराबाद और मुंबई एयरपोर्ट पर यात्री परेशान हैं। एयरलाइन की लगभग 8 फीसदी उड़ानें रद्द होने की संभावना जताई गई है। सुबह से कई फ्लाइट्स धड़ाधड़ कैंसल हो रही हैं।

बेंगलुरु में 100 से अधिक फ्लाइट्स कैंसल, यात्री परेशान

बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इंडिगो एयरलाइंस में स्टाफ की कमी के कारण 100 से अधिक उड़ानें ग्राउंड कर दी गईं, जिससे कोलकाता, गोवा, दिल्ली, हैदराबाद और पुणे जाने वाले यात्रियों पर असर पड़ा है। कई यात्री बीती रात से घंटों इंतज़ार कर रहे हैं और लंबे विलंब से नाराज होकर हवाई अड्डे पर विरोध भी जताया। बढ़ती नाराज़गी के बावजूद स्थिति अब तक पूरी तरह नहीं संभली है, और यात्रियों का आरोप है कि अधिकारी उड़ानों की स्थिति पूछने पर टाल-मटोल भरे जवाब दे रहे हैं।

दिल्ली एयरपोर्ट से कैंसिल हुईं इंडिगो की 30 फ्लाइट्स कैंसल्ड

इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन का व्‍यापक असर दिल्‍ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट पर भी दिख रहा है। सुबह दस बजे तक आईजीआई एयरपोर्ट से कैंसिल होने वाली फ्लाइट्स की संख्‍या करीब 30 हो गई है। कैंसिल हुई फ्लाइट्स में नागपुर, कोचीन कोलकाता, पुणे, मुंबई, वडोदरा, पटना और भोपाल एयरपोर्ट को जाने वाली फ्लाइट्स शामिल हैं।

डीजीसीए ने मांगा जवाब

इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन पर बड़ा अपडेट आया है. डीजीसीए यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने आज 4 दिसंबर को दोपहर में इंडिगो अधिकारियों को बैठक के लिए तलब किया है। डीजीसीए ने एयरलाइन से हाल में हुई अभूतपूर्व अव्यवस्थाओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।

इंडिगो ने कहा- 5 दिसंबर तक हालात सामान्य होंगे

वहीं, एयरलाइन ने बुधवार को अपने एक बयान में कहा कि छोटी-मोटी तकनीकी खराबी, सर्दियों के कारण शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में स्लो नेटवर्क और क्रू मेंबर्स के शिफ्ट चार्ट से जुड़े नए नियमों (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) के पालन के कारण हमारे ऑपरेशन पर बुरा असर पड़ा है। इसका पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं था। कंपनी ने कहा कि अगले 48 घंटों में परिचालन स्थिर हो जाएगा।

आज भारत दौरे पर आ रहे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, शाम 4 बजे पहुंचेंगे दिल्ली, पीएम मोदी के साथ रात्रिभोज

#russianpresidentvladimirputinsindiavisit

Image 2Image 3

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली आ रहे हैं। पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे। पुतिन की इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं और कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेंगे। दिल्ली पुलिस से लेकर केंद्रीय एजेंसियों तक सभी अलर्ट मोड पर हैं।

रूसी राष्ट्रपति 4 और 5 दिसंबर को भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पुतिन 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत और रूस के बीच हर साल शिखर वार्ता होती है। अब तक दोनों देशों के बीच 22 वार्ताएं हो चुकी हैं। पिछले साल जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी मॉस्को गए थे, जबकि पुतिन आखिरी बार 2021 में भारत आए थे।

पीएम मोदी के साथ करेंगे रात्रिभोज

जानकारी के अनुसार, पुतिन का प्लेन आज शाम करीब 6 बजे पालम एयरपोर्ट पर लैंड करेगा। इसके बाद वह सीधे चाणक्यपुरी स्थित सरदार पटेल मार्ग पर बने आईटीसी मौर्य होटल जाएंगे। फिर आज शाम ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सम्मान में निजी डिनर की मेजबानी करेंगे।

पुतिन का भारत दौरा क्यों है अहम

मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात को देखते हुए प्रेसिडेंट पुतिन का भारत दौरा खास तौर पर अहम है। यह सामरिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देश रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, छात्र आदान-प्रदान और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे विषयों पर गहन बातचीत कर सकते हैं।

सुरक्षा चाकचौबंद

पुतिन की भारत यात्रा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारी ट्रैफिक मैनेजमेंट से लेकर उन क्षेत्रों की साफ-सफाई समेत सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे, जहां रूसी राष्ट्रपति अपने प्रवास के दौरान जा सकते हैं। तैयार रूट प्लान के अनुसार, आवागमन के मार्ग के लिए व्यापक तैयारी है। यात्रियों की असुविधा को कम करने के लिए प्रतिबंधों के बारे में सलाह भी जारी की जाएगी।

एयरपोर्ट से होटल तक रहेगा ट्रैफिक पर असर

सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पुतिन गुरुवार शाम को पालम एयरपोर्ट उतरेंगे और वहां से सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल जाएंगे। इस दौरान एयरपोर्ट से होटल तक एनएच-8, धौला कुआं और दिल्ली कैंट इलाके में ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। शाम को प्रधानमंत्री आवास पर डिनर के लिए जाते समय सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग, शांति पथ और आस-पास के मार्गों पर भी ट्रैफिक पर असर पड़ेगा।

चार साल बाद भारत आ रहे पुतिन

बता दें कि रूसी राष्ट्रपति चार साल के अंतराल के बाद भारत पहुंचेंगे। वे आखिरी बार भारत 2021 में भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे। हालांकि पुतिन का इस बार का भारत दौरा पिछली यात्रा के मुकाबले काफी अहम माना जा रहा है। दिसंबर 2021 में हुआ पुतिन का दौरा मात्र कुछ ही घंटों का था। लेकिन इस बार पुतिन भारत के दो दिन रहने वाले हैं।

2030 तक 1.06 लाख करोड़ होगा भारत का जियोस्पेशियल मार्केट: अमिताभ कांत

Image 2Image 3

अमरेश द्विवेदी

नई दिल्ली। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयाेजित तीन-दिवसीय (2-4 दिसंबर) जियोस्मार्ट वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो 2025 की शुरुआत हुई, जिसमें भारत के भू-स्थानिक एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए तीव्र और परिवर्तनकारी बदलावों को रेखांकित किया गया। उद्घाटन वक्तव्य में कहा गया कि भारत की यह यात्रा “तेज़ गति से विकसित हुई है और इसने देश के विकास, संसाधन प्रबंधन और नीति-निर्माण के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित किया है।

कार्यक्रम के पहले दिन (एलएंडटी, एचसीएल, इंडिगो, फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स), पूर्व जी20 शेरपा एवं नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि भारत का ₹50,000 करोड़ का भू-स्थानिक बाजार 2030 तक दोगुना होकर ₹1.06 लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना है, जबकि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2033 तक 44 बिलियन डाॅलर तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े भारत की महत्वाकांक्षाओं को और ऊंचा स्थापित करने का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि हमने 2021 में भारी विरोध के बावजूद भू-स्थानिक सेक्टर को खोला। आज संभावनाएँ अपार हैं, लेकिन नवाचार की गति भारत के 30-ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के अनुरूप होनी चाहिए। भू-स्थानिक तकनीकें आधारभूत हैं—बिना इनके ‘विकसित भारत’ संभव नहीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बंद या प्रतिबंधित डेटा नवाचार को धीमा करता है, और भारत को वैश्विक नेताओं—यूके, सिंगापुर और नॉर्डिक देशों—की तरह आगे बढ़ने के लिए ओपन, इंटरऑपरेबल और मशीन-रीडेबल डेटा अपनाना होगा।

उद्योग को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि अगले 12 महीनों में भारत का एक ऐसा वास्तविक शहर विकसित करें जो लाइव भू-स्थानिक और AI ऑपरेटिंग सिस्टम पर चले—कोई पायलट नहीं, कोई डेमो नहीं। एक वास्तविक शहर, वास्तविक सुधारों के साथ। ऐसा शहर वैश्विक मानक स्थापित कर सकता है। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने स्वामित्व कार्यक्रम की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे सरल भू-स्थानिक उपकरणों ने ग्रामीण भारत में आर्थिक सशक्तिकरण को गति दी है।

उन्होंने बताया कि 3.5 लाख से अधिक गाँवों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, 3 करोड़ से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए गए हैं और सत्यापित भू-स्थानिक मैप्स ने करोड़ों नागरिकों को विवाद समाधान, ऋण सुविधा और संपत्ति अधिकार प्रदान किए हैं। उन्होंने बताया कि यह केवल मैपिंग नहीं है—यह ग्रामीण भारत की आर्थिक और सामाजिक कहानी को नए सिरे से लिख रहा है।” भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने भारत के लैंड स्टैक (Land Stack) की अवधारणा काे प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय बेस मैप, सत्यापित प्लॉट सीमाएँ और एकीकृत भू-खंड डेटा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सटीक भूमि मानचित्र पारदर्शी शासन, प्रभावी योजना और नागरिक विश्वास की रीढ़ हैं।

भू-स्थानिक डेटा प्रमोशन एवं डेवलपमेंट समिति के अध्यक्ष श्रीकांत सत्री ने हाल ही में विमानन क्षेत्र में जीपीएस व्यवधान की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता जोखिमपूर्ण है। भू-स्थानिक केवल तकनीक नहीं है यह भारत की आर्थिक शक्ति और तकनीकी संप्रभुता की नींव है। उन्होंने ऑपरेशन द्रोणगिरि की सफलता साझा की, जिसमें बहु-एजेंसी समन्वय और भू-स्थानिक-स्पेस इंटेलिजेंस ने किसानों को वास्तविक लाभ प्रदान किए। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने भू-स्थानिक डेटा के राष्ट्रीय सांख्यिकी ढाँचे से एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे योजना, निगरानी और सेवा वितरण में सटीकता और प्रभावशीलता बढ़ेगी। एसरी इंडिया (Esri India) के प्रबंध निदेशक अगेन्द्र कुमार ने बताया कि पूरे देश में जीआईएस का उपयोग तेजी से बढ़ा है और आज एसरी इंडिया के प्लेटफॉर्म पर 800 से अधिक प्रामाणिक डेटासेट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक तकनीक अब राष्ट्रीय विकास का रणनीतिक साधन है—और भारत इसे नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है। डिजिटल एवं आईटी, जीएमआर ग्रुप के समूह अध्यक्ष डॉ. राहुल शांडिल्य ने वेक्सेल (Vexcel) के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्पैटियल डेटा बैंक बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उच्च-रिज़ॉल्यूशन एरियल डेटा से भू-खंड मैपिंग, अधोसंरचना निगरानी, शहरी लचीलापन, पर्यावरणीय अंतर्दृष्टियां सभी में क्रांतिकारी सुधार होंगे। सर्वे ऑफ इंडिया के अतिरिक्त सर्वेयर जनरल एसके सिन्हा ने वन नेशन-वन मैप की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि विकेंद्रीकृत डेटा स्वामित्व और केन्द्रीय एकीकरण मिलकर एक सशक्त भू-स्थानिक ढाँचा तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैप अब स्थिर दस्तावेज नहीं—वे गतिशील परिसंपत्तियाँ हैं जो सटीक शासन और राष्ट्रीय संप्रभुता को मजबूत करती हैं।

इस साल, जियोस्मार्ट इंडिया एक्सपो 2025 के लॉन्च के साथ अनुभव को और बेहतर बना रहे हैं, जो भारत के जियोस्पेशियल और स्पेस टेक्नोलॉजी के विकास को आगे बढ़ा रहा है, जो अब विजन, इनोवेशन और लीडरशिप के एक बड़े मेल में बदल रहा है। यह एडिशन एक आम इंडस्ट्री एक्सपो की सीमाओं को पार करके एक नेशनल मूवमेंट बन गया है। तीन बदलाव आने वाले दिनों में, यह इवेंट स्टेकहोल्डर्स के एक असाधारण क्रॉस-सेक्शन को इकट्ठा करेगा जिनमें केंद्रीय मंत्रालयों, रक्षा एजेंसियों और स्मार्ट सिटी अथॉरिटीज से लेकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्मों, घरेलू स्टार्टअप्स और एकेडमिक संस्थानों तक सभी भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के अगले युग की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक साथ आएंगे। बड़े एग्जिबिशन स्पेस, बेमिसाल नेटवर्किंग मौकों और नए भारत के लक्ष्यों को दिखाने वाले जबरदस्त शोकेस के साथ, जियोस्मार्ट इंडिया एक्सपो 2025 नए मापक, संप्रभुता और भविष्य की तैयारी का सबसे बड़ा सेलिब्रेशन है।

भारत आ रहे व्लादिमीर पुतिन, जानें 30 घंटे के दौरान कैसी होगी रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था

#russiapresidentvladimirputinindiavisitwhich_security

Image 2Image 3

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिनों के नई दिल्ली के दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने पर हो रहा है, जो दोनों देशों के लिए बहुत खास है। साथ ही यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि यूक्रेन से युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन का यह पहला भारत दौरा है।

व्लादिमीर पुतिन भारत में दो दिनों के दौरे पर होंगे लेकिन उनके यहां रुकने की अवधि करीब 30 घंटे होने वाली है। रूसी राष्ट्रपति 4 दिसंबर की शाम को नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां पीएम मोदी उनकी मेजबानी करेंगे। चलिए देखते हैं उनका पूरा शेड्यूल क्या होगाः-

4 दिसंबर

• पुतिन शाम को करीब 6 बजे भारत पहुंचेंगे।

• आगमन के बाद उनकी कुछ महत्वपूर्ण मीटिंग्स होंगी, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्राइवेट डिनर और अन्य निजी कार्यक्रम शामिल हैं।

5 दिसंबर

• सुबह 9:30 बजे राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत समारोह।

• इसके बाद राजघाट जाकर श्रद्धांजलि कार्यक्रम।

• सीमित दायरे की वार्ता, फिर हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय तथा प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत।

• प्रतिनिधिमंडलों के साथ लंच, इसमें कुछ प्रमुख उद्योगपति भी शामिल हो सकते हैं।

• हैदराबाद हाउस में समझौतों की घोषणा।

• हैदराबाद हाउस में प्रेस स्टेटमेंट।

• भारत-रूस बिजनेस फोरम, जिसमें दोनों नेता शामिल हो सकते हैं।

• राष्ट्रपति की ओर से शाम को राज्य भोज।

• भोज के बाद भारत से प्रस्थान।

कई घेरों की सुरक्षा

पुतिन के दिल्ली आगमन से पहले सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, साथ ही कई वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रमों के मद्देनजर व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त की तैयारी में जुटे हैं। 4-5 दिसंबर जब रूसी राष्ट्रपति भारत में होंगे तो दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा रहेगा। जिसमें दिल्ली पुलिस, केंद्रीय एजेंसियां और पुतिन की निजी सुरक्षा टीम शामिल होगी। स्वाट टीम, आतंकवाद-रोधी दस्तों और त्वरित प्रतिक्रिया टीम सहित विशेष इकाइयां राजधानी भर में रणनीतिक स्थानों पर तैनात रहेंगी। ड्रोन, सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी और तकनीकी खुफिया प्रणालियां भी तैनात की जाएंगी।

दौरे से पहले सुरक्षा जांच

व्लादिमीर पुतिन दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र प्रमुखों में से एक हैं, इसलिए जब भी वह अपने किसी राजकीय दौरे या अन्य देशों में किसी मीटिंग या सम्मेलनों में भाग लेने जाते हैं, तो उनकी सुरक्षा भी चाक-चौबंद होती है। जब भी पुतिन किसी दौरे या सम्मेलन में भाग लेने के लिए किसी दूसरे देश में जाते हैं तो लगभग 100 रूसी फ़ेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस के सुरक्षा कर्मी हमेशा पुतिन के साथ होते हैं। इनमें से करीब 50 सुरक्षा कर्मी पुतिन के दौरे से पहले उस देश में जाते हैं जहां पुतिन का दौरा होता है, और यह सुरक्षाकर्मी उन सभी जगहों की जांच और गहन छानबीन करते हैं जहां पुतिन जाएंगे। इसके अलावा, उनके भोजन की जांच रूस से लाई गई एक पोर्टेबल लैब में की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की ज़हर देने की साजिश से बचा जा सके। उनके व्यक्तिगत कचरे (मल-मूत्र) को भी परीक्षण के लिए वापस मॉस्को भेजा जाता है।

अरावली पहाड़ियों के लिए 'डेथ वारंट'...जानें किस कारण सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को घेरा

#soniagandhiaravalliminingmodigovernmentenvironment_policy

Image 2Image 3

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अरावली पहाड़ियों के लिए 'डेथ वारंट' जैसा कदम उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों में खनन की छूट से अरावली पर्वतमाला को भारी नुकसान होगा। सोनिया गांधी ने अंग्रेजी दैनिक अखबार 'द हिंदू' के लिए लिखे एक लेख में इस बात का जिक्र किया कि अरावली के 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले किसी भी क्षेत्र में खनन को छूट दे दी गई है।

‘डेथ वारंट' पर हस्ताक्षर जैसा

सोनिया गांधी ने कहा, गुजरात से लेकर राजस्थान और हरियाणा तक फैली अरावली पर्वतमाला ने लंबे समय से भारतीय भूगोल और इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोदी सरकार ने अवैध खनन से पहले ही बर्बाद हो चुकी इन पहाड़ियों के लिए अब लगभग ‘डेथ वारंट' पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

ये फैसला अवैध खननकर्ताओं-माफियाओं के लिए खुला निमंत्रण-सोनिया

सोनिया गांधी ने कहा, सरकार ने घोषणा की है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली कोई भी पहाड़ी खनन के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों के अधीन नहीं है। यह फैसला अवैध खननकर्ताओं और माफियाओं के लिए खुला निमंत्रण है कि वे इस श्रृंखला के उस 90 प्रतिशत हिस्से का भी सफाया कर दें, जो सरकार द्वारा निर्धारित ऊंचाई सीमा से नीचे आता है।

सरकारी नीति में पर्यावरण की गहरी उपेक्षा- सोनिया

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकारी नीति निर्धारण में पर्यावरण के प्रति गहरी और निरंतर उपेक्षा व्याप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर दिया गया है, लेकिन अब उसके गौरवपूर्ण स्थान को बहाल किया जाना चाहिए और सरकारी नीति और दबाव से स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

साथ काम करने की आवश्यकता पर बल

सोनिया गांधी ने कहा, हमें पर्यावरणीय मामलों पर अधिक अंतर-सरकारी समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता है। एनसीआर में वायु प्रदूषण संकट के लिए भूजल यूरेनियम संदूषण मुद्दे की तरह ही एक संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण के साथ एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की पर्यावरण नीतियों को कानून के शासन के प्रति सम्मान, स्थानीय समुदायों के खिलाफ नहीं बल्कि उनके साथ काम करने की प्रतिबद्धता और पर्यावरण व मानव विकास के बीच अटूट संबंध की समझ द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा, केवल ऐसे दृष्टिकोण के साथ ही हम स्वस्थ और सुरक्षित भारत निर्माण कर सकते हैं।

कांग्रेस ने पीएम मोदी का चाय बेचते AI वीडियो किया पोस्ट, बीजेपी ने लगाई क्लास

#congresscirculatesaivideoofpmmodisellingtea

Image 2Image 3

कांग्रेस ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चाय बेचते हुए एक AI जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया है। इसमें पीएम को चायवाला दिखाया गया है। उनके हाथ में चाय की केतली है। दूसरे हाथ में ग्लास है। वीडियो में मोदी‌ को जोर-जोर से 'चाय बोलो, चाय-चाय चाहिए' बोलते दिखाया गया गया है। कांग्रेस ने ये वीडियो साझा कर बड़े विवाद को जन्म दे दिया है।

कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने साझा किया वीडियो

कांग्रेस की नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक एआई वीडियो साझा किया है। छह सेकंड के वीडियो में PM मोदी को वैश्विक मंच पर चायवाले के तौर पर दर्शाया गया है। उनके एक हाथ में चाय की केतली है और दूसरे हाथ में ग्लास हैं। उनके पीछे भारत सहित कई देशों के झंडे लगे हैं। इनमें भाजपा का भी झंडा है। रागिनी ने इस वीडियो के कैप्शन में लिखा, "अब ई कौन किया बे।"

भाजपा ने जताया कड़ा विरोध

यह वीडियो भले ही व्यंग्यात्मक शैली में बनाया गया हो, लेकिन भाजपा के लिए यह एक गंभीर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। भाजपा ने इस पर कड़ा विरोध भी जताया है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे शर्मनाक बताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा, 'नामदार कांग्रेस ओबीसी समुदाय से आने वाले कामदार प्रधानमंत्री को बर्दाश्त नहीं कर सकती। जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

पीएम का उनकी मां के साथ AI वीडियो किया गया था पोस्ट

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने पीएम मोदी को लेकर कोई विवादास्पद वीडियो साझा किया। इससे पहले बिहार चुनाव के दौरान कांग्रेस ने एक एआई वीडियो साझा किया था। वीडियो में दिखाया गया कि प्रधानमंत्री के सपने में उनकी मां आकर कहती हैं- अरे बेटा पहले तो तुमने मुझे नोटबंदी की लाइनों में खड़ा किया। मेरे पैर धोने की रील्स बनवाईं। अब बिहार में मेरे नाम पर राजनीति कर रहे हो। तुम मेरे अपमान के बैनर-पोस्टर छपवा रहे हो। तुम फिर बिहार में नौटंकी कर रहे हो। राजनीति के नाम पर कितना गिरोगे।

चुनावी चंदे से मालामाल हुई बीजेपी, टाटा ग्रुप के ट्रस्ट ने दिए 757 करोड़, जानें कांग्रेस को कितना मिला

#tatagroupdonated758crorerupeesto_bjp

फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म किए जाने के बाद भी बीजेपी की फंडिंग पर असर नहीं पड़ा है। इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद कहा जा रहा था कि राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग पर असर पड़ेगा, लेकिन 2024-25 के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी को ट्रस्ट रूट के जरिए भारी चंदा मिला है।

Image 2Image 3

टाटा समूह के राजनीतिक चंदे में 83% रकम बीजेपी को मिले

टाटा समूह के नियंत्रण वाले प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट (पीईटी) के जरिए 2024-25 में 915 करोड़ रुपये के राजनीतिक चंदे में से लगभग 83% रकम बीजेपी को मिली, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 8.4% हिस्सा मिला।

अलग-अलग ट्रस्ट्स से लगभग ₹959 करोड़ की फंडिंग

2024-25 में बीजेपी को अलग-अलग ट्रस्ट्स से लगभग ₹959 करोड़ की फंडिंग मिली। सबसे अधिक योगदान पीईटी का रहा, जबकि कई अन्य ट्रस्ट्स ने भी पार्टी को समर्थन दिया। पार्टी को प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से 757.6 करोड़ रुपये, न्यू डेमोक्रेटिक ट्रस्ट से 150 करोड़ रुपये, हार्मनी ट्रस्ट से 30.1 करोड़, ट्रॉयम्फ ट्रस्ट से 21 करोड़, जन कल्याण ट्रस्ट से 9.5 लाख और आइंजिगार्टिग ट्रस्ट से 7.75 लाख रुपये मिले।

कांग्रेस को कितना मिला चुनावी चंदा?

वहीं, कांग्रेस को चुनावी चंदे में भी बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस को 2024-25 में प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से 77.3 करोड़ रुपये मिले, जबकि न्यू डेमोक्रेटिक ट्रस्ट से 5 करोड़ और जन कल्याण ट्रस्ट से 9.5 लाख रुपये मिले। इसके अलावा प्रूडेंट ने कांग्रेस को 216.33 करोड़ और AB जनरल ट्रस्ट ने 15 करोड़ रुपये दिए। इस तरह कांग्रेस को इस साल कुल चंदे का बड़ा हिस्सा ट्रस्टों के जरिए मिला, हालांकि यह रकम 2023-24 में बॉन्ड से मिले 828 करोड़ रुपये की तुलना में काफी कम रही।

पीएमओ का नाम अब सेवा तीर्थ होगा, देशभर के राजभवन का भी नाम बदला

#theprimeministerofficetobecalledsevateerth

Image 2Image 3

प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदल गया है। अब पीएमओ को सेवातीर्थ के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही केंद्रीय सचिवालय के नाम में भी बदलाव किया गया है। सचिवालय का नाम कर्तव्य भवन होगा। इससे एक दिन पहले राजभवनों का नाम बदला गया था। राज्यों में बने राजभवन अब लोकभवन के नाम से जाने जाएंगे।

दशकों से दक्षिण ब्लॉक में संचालित हो रहा पीएमओ अब नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने की तैयारी में है। नया कार्यालय सेवा तीर्थ-1 में बनाया गया है, जो वायु भवन के पास निर्मित एक आधुनिक और सुरक्षित सरकारी कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है।

सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3 में होंगे प्रमुख कार्यालय

‘सेवा तीर्थ’ परिसर में कुल तीन हाई-टेक इमारतें बनाई गई हैं। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय शिफ्ट होगा. सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का कार्यालय स्थापित किया जाएगा। यह स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 14 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सेवा तीर्थ-2 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेना प्रमुखों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की, जो नए परिसर की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।

राजभवनों होंगे ‘लोक भवन’

इसी कड़ी में राजभवनों को अब ‘लोक भवन’ नाम दिया जा रहा है। उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत देश के 8 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने औपनिवेशिक काल की पहचान मिटाने के लिए अपने राज भवन का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया है। यह बदलाव गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक निर्देश के बाद हुआ है।

इन राज्यों में राज भवन का नाम बदला

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा ने अपने राज भवन का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया है। वहीं लद्दाख के उपराज्यपाल के निवास-कार्यालय को अब लोक निवास कहा जाएगा। इसे पहले राज निवास कहा जाता था।