साल में दो बार होंगी सीबीएसई 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं, जानें नए नियम में छात्रों के क्या-क्या
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए अपनी परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार किया है। बोर्ड के ताजा निर्णय के अनुसार, 2026 से सीबीएसई कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करेगा, जिससे छात्रों को अपना प्रदर्शन सुधारने का एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय मीटिंग में सीबीएसई को दो बार बोर्ड एग्जाम की स्कीम तैयार करने को कहा था। अब सीबीएसई ने मंगलवार को ड्राफ्ट पॉलिसी जारी कर दी है, जिस पर 9 मार्च तक सुझाव मांगे गए हैं।जनता से राय लेने के बाद जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।

सीबीएसई की ओर से जारी ड्राफ्ट के अनुसार छात्र एक बार या दोनों बार परीक्षा देने का विकल्प चुन सकते हैं। 10वीं बोर्ड परीक्षा का पहला सेशन 17 फरवरी से 6 मार्च तक और दूसरा 5 मई से 20 मई तक आयोजित किया जाएगा। साल में दो बार बोर्ड परीक्षा होने से स्टूडेंट्स को दो पेपरों के बीच केवल एक या दो दिन का समय मिलेगा, जो उनके विषय विकल्प पर निर्भर करेगा, जो वर्तमान अंतराल से काफी कम है। अभी दो पेपर के बीच गैप पांच या 10 दिनों तक भी हो जाता है। पहली परीक्षा के नतीजे 20 अप्रैल और दूसरी के 30 जून तक घोषित होने की संभावना है। जो छात्र दोनों परीक्षाओं में शामिल होना चुनते हैं, उन्हें अंतिम मार्कशीट पर अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर मिलेगा।

दो एग्जाम का मतलब यह नहीं है कि सेमेस्टर जैसे आधे-आधे सिलेबस का दो बार एग्जाम लिया जाएगा। तय किया गया है कि दोनों ही बार पूरे सिलेबस और पूरे टेक्स्टबुक के आधार पर एग्जाम लिया जाएगा। आप बस यह समझिए कि आपको दो बार एग्जाम में बैठने का मौका मिल रहा है।

*रजिस्ट्रेशन में बतानें होंगे ऑपशन*
2026 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन इस साल सितंबर तक पूरा हो जाएगा। इसी वक्त छात्रों को यह बताना होगा कि वे दोनों परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं या सिर्फ पहली या दूसरी परीक्षा में। रजिस्ट्रेशन के समय ही आपको ऑप्शनल सब्जेक्ट बताने होंगे। इसके बाद इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। साथ ही रजिस्ट्रेशन के बाद किसी नए बच्चे को पेपर में बैठने की इजाजत भी नहीं मिलेगी। अप्रैल में पहली परीक्षा के रिजल्ट आ जाएंगे। इसके बाद केवल वही छात्र दूसरी बोर्ड परीक्षा में बैठ पाएंगे जिन्होंने रजिस्ट्रेशन के समय ऐसा विकल्प चुना था। यहां भी उनके पास विकल्प होगा। वे जिन पेपर में चाहे दोबारा एग्जाम देंगे और जिसमें चाहेंगे नहीं देंगे।

*स्कोर बढ़ाने का होगा मौका*
पहली परीक्षा के नतीजे जारी होने के बाद अगर कोई छात्र अपने सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी और गणित में प्राप्त नंबरों से संतुष्ट हैं, तो वह दूसरी परीक्षा के लिए इन पेपरों को छोड़ सकते हैं और केवल शेष विषयों के लिए बैठ सकते हैं। अगर संतुष्ट नहीं है, तो वह दूसरी परीक्षा में इन पेपर को दे सकते हैं या सभी पेपर के एग्जाम में शामिल हो सकते हैं। अंतिम स्कोर कार्ड में सर्वश्रेष्ठ स्कोर बताए जाएंगे। दूसरी बार परीक्षा के लिए आवेदन करते समय छात्र को इन बातों का जिक्र करना होगा।

*प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट एक ही बार होंगे*
सीबीएसई दसवीं में छात्र लिखित परीक्षा तो दो बार दे सकेंगे, लेकिन प्रैक्टिकल व इंटरनल असेसमेंट एक ही बार होगा। अलग-अलग विषयों में होने वाले प्रैक्टिकल व इंटरनल असेसमेंट के जो नंबर मिल जाएंगे, उसे लिखित परीक्षा के बेस्ट स्कोर में जोड़कर रिजल्ट जारी किया जाएगा।
केजरीवाल के राज्यसभा जाने का रास्ता साफ! सांसद संजीव अरोड़ा को बनाया गया विधानसभा उपचुनाव का उम्मीदवार
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आम आदमी पार्टी की दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार हुई है। आप के साथ राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की भी करारी हार हुई। अब मीडिया के गलियारों में केजरीवाल के सियासी सफर पर अटकलें जारी है। अरविंद केजरीवाल के राज्यसभा जानें की अटकलें लगाई जा रही है। इस बीच आप ने संजीव अरोड़ा को लुधियाना वेस्ट का प्रत्याशी बनाया है। अब कहा जा रहा है कि संजीव अरोड़ा की खाली सीट से केजरीवाल राज्यसभा जाएंगे। हालांकि आम आदमी पार्टी ने इसका खंडन किया है।

संजीव अरोड़ा साल 2022 में राज्यसभा सांसद बने थे। अभी उनका करीब तीन साल का कार्यकाल बाकी है। इससे पहले दिल्ली की हार से उबरने के लिए आम आदमी पार्टी ने पंजाब में बड़ा दांव चला है। पार्टी ने लुधियाना वेस्ट विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में अपने राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को टिकट दिया है।

हालांकि अभी तक निर्वाचन आयोग ने चुनाव का ऐलान नहीं किया है, लेकिन पहले ही आम आदमी पार्टी ने अपने प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में आम आदमी पार्टी के इस ऐलान के कई मतलब निकाले जा रहे हैंष इस सीट पर अब तक किसी अन्य राजनीतिक दल ने अपने उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है।

संजीव अरोड़ा के नाम ऐलान से पहले ही ऐसा कहा जा रहा था कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल अरोड़ा की सीट से राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि पार्टी ने इन अटकलों को खारिज किया है। आप की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि केजरीवाल राज्यसभा नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक केजरीवाल का मसला है तो मीडिया में यह भी कहा गया कि वह पंजाब के सीएम बनेंगे। अब मीडिया ही कह रहा है कि वह राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगे। ये दोनों गलत हैं। अरविंद केजरीवाल आप के राष्ट्रीय संयोजक हैं। मैं जानती हूं कि उनकी हर जगह मांग है लेकिन वह किसी एक सीट तक सीमित नहीं हैं।

*केजरीवाल के लिए राह हुई आसान*
बता दें कि सुनील अरोड़ा द्वारा विधायक का चुनाव लड़े जाने पर उनकी राज्यसभा वाली सीट खाली हो जाएगी। उसके बाद बड़े आराम से अरविंद केजरीवाल को उस सीट पर राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया जाएगा। यह अपने आप में एक पूरी तरह से बिना खतरे वाला सौदा होगा। क्योंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी का बहुमत है ऐसे में अरविंद केजरीवाल बड़े आराम से राज्यसभा का चुनाव जीत कर संसद पहुंच जाएंगे।

*कांग्रेस का दावा होगा सच!*
पंजाब कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केजरीवाल पंजाब के रास्ते राज्यसभा में जाना चाहते हैं। बाजवा ने दावा किया, केजरीवाल पंजाब के माध्यम से सत्ता में प्रवेश करना चाहते हैं, और कुछ राज्यसभा सदस्यों को उनके लिए त्याग करना होगा।
यूएनएचआरसी से विदेश मंत्री एस जयशंकर की दो टूक, बोले-आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा भारत
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 58वें सत्र को अपने संबोधन में मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए देश की प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र में एक वर्चुअल संबोधन किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रूख को साफ किया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा ही आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की वकालत करेगा।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, दुनिया को एक नई बहुपक्षीय प्रणाली की स्पष्ट और तत्काल जरूरत है जो समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को दर्शाती हो, क्योंकि पिछले कुछ सालों में मौजूदा संरचनाओं की गंभीर रूप से कमी सामने आई है। विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा चुनौतियों के बीच यह परिस्थितियां और अधिक विकृत, अनिश्चित और अस्थिर होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें और तैयारी की जरूरत है। इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए फिट होना जरूरी है। अब हमें बहुआयामी प्रणाली की जरूरत है जो समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप हों।

एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा व्यवस्था पर इशारा करते हुए कहा कि जब विश्व को इनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब यह खुद अभावग्रस्त व लाचार थे। जयशंकर ने कहा कि भारत हमेशा से वैश्विक प्रोन्नति और मानवाधिकार की रक्षा में अहम भूमिका निभाता रहा है। हमने हमेशा ही वित्तीय जिम्मेदारी के सिद्धांतों, पारदर्शिता और निरंतरता का पालन किया है। इस प्रतिबद्धता के साथ भारत ने हमेशा ही विभिन्न देशों के साथ विकास की साझेदारी निभाई है। लेकिन इसी के साथ भारत ने बिना किसी समझौते के आतंकवाद का मुकाबला किया है।

उन्होंने कहा, हम आतंकवाद का मुकाबला करने में दृढ़ और अडिग रहे हैं। भारत हमेशा आतंकवाद के लिए कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति की वकालत करेगा और इसे सामान्य बनाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। हम वसुधैव कुटुम्बकम यानी दुनिया को एक परिवार मानने की बात केवल बोलते नहीं हैं, बल्कि इसके अनुसार जीते हैं और आज, पहले से कहीं अधिक, इस दृष्टिकोण की तत्काल जरूरत है।
अपना “खजाना” अमेरिका को सौंपने को तैयार हुए जेलेंस्की, डील के लिए शुक्रवार को पहुंच रहे व्हाइट हाउस

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यूक्रेन और अमेरिका जल्द ही एक बड़ा समझौता कर सकते हैं। इस समझौते में यूक्रेन अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले राजस्व में हिस्सा अमेरिका को देगा। यानी यूक्रेन रेयर अर्थ मटेरियल (दुर्लभ खनिज) अमेरिका को देने पर राजी हो गया है। यूक्रेन और अमेरिका दोनों देशों के अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि जेलेंस्की इस डील पर साइन करने के लिए शुक्रवार को अमेरिका का दौरा कर सकते हैं।

*जानें क्या है डील*
राष्ट्रपति चुनाव से पहले पिछले सितंबर में जेलेंस्की ने ट्रंप के सामने एक प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य ट्रंप को अमेरिका द्वारा सुरक्षा गारंटी जारी रखने के लिए एक ठोस कारण प्रदान करना था। हालांकि पिछले हफ्ते अमेरिकियों द्वारा प्रस्तुत किए गए ड्राफ्ट डील में कथित तौर पर यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों से राजस्व का 50 प्रति शत मांगा गया था, बदले में सुरक्षा प्रतिबद्धताओं की पेशकश नहीं की गई थी। ट्रंप प्रशासन ने उस अनुरोध को पिछले अमेरिकी सैन्य और वित्तीय सहायता के लिए मुआवजा बताया ।

*जेलेंस्की पर भड़के थे ट्रंप*
जेलेंस्की ने अधिकारियों से इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने को कहा था, जिसके बाद अमेरिकी नाराज हो गया था। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर जेलेंस्की को तानाशाह कह दिया था, जो बिना चुनाव को यूक्रेन की सत्ता में बने हुए हैं। उन्होंने यूक्रेन पर ही युद्ध को शुरू करने का आरोप लगाया था।

*यूक्रेन के पास दुनिया का 5% कच्चा माल*
यूक्रेन के पास रेयर अर्थ मटेरियल के दुनिया के कुल कच्चे माल का लगभग 5% है। इसमें ग्रेफाइट का लगभग 19 मिलियन टन भंडार शामिल हैं। इसके अलावा यूरोप के कुल लीथियम भंडार का 33% हिस्सा यूक्रेन के पास है। जंग की शुरुआत से पहले ग्लोबल टाइटेनियम उत्पादन में 7% हिस्सा यूक्रेन का था। यूक्रेन के पास रेयर अर्थ मटेरियल के कई अहम भंडार हैं। हालांकि, जंग के बाद इनमें से कई रूस के कब्जे में पहुंच गए हैं। यूक्रेनी मंत्री यूलिया स्विरीडेन्को के मुताबिक रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी हिस्से में 350 अरब डॉलर के संसाधन मौजूद हैं।
तेलंगाना के सुरंग में पांच दिनों से फंसी हैं आठ जिंदगियां, रैट माइनर्स को सौंपा गया रेस्क्यू का काम

#tunnel_accident_in_telangana_8_workers_trapped 

हैदराबाद से 132 किमी दूर नागरकुर्नूल में बन रही 42 किमी की दुनिया की सबसे लंबी पानी की टनल में 8 कर्मचारियों को फंसे हुए आज पांचवा दिन है। इन 8 जिंदगियों को बचाने के लिए सेना, नौसेना,एनडीआरफ, एसडीआरएफ, आईआईटी चेन्नई और एलएनटी कंपनी के एक्सपर्ट्स शामिल हैं। लेकिन अब तक फंसे हुए कर्मचारियों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इसके बाद अब यह काम 12 रैट माइनर्स (चूहों की तरह खदान खोदने वाले मजदूर) को सौंपा गया है। इन्होंने ही 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को सही-सलामत बाहर निकाला था।

6 रैट माइनर्स की एक टीम सोमवार दोपहर को पहुंच चुकी है। 6 लोगों की बाकी टीम कल (बुधवार) पहुंचेगी। अभी यह टीम अंदर जाकर सिर्फ हालात का जायजा लेगी। एनडीआरफ और एसडीआरएफ के साथ रैट माइनर्स टीम की मीटिंग के बाद रेस्क्यू शुरू होगा। नौसेना के जवान इस काम में रैट माइनर्स टीम की मदद करेंगे। ये आईआईटी चेन्नई के स्पेशल पुश कैमरे और रोबोट की मदद से खुदाई का सही रास्ता बताएंगे। पानी की वजह से रेस्क्यू में ज्यादा वक्त लग सकता है।

सुरंग से पानी और कीचड़ निकालने का काम चल रहा है, लेकिन जैसे-जैसे समय निकल रहा है श्रमिकों की कुशलता को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। सेना और एनडीआरएफ के सदस्य पहले से ही बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे नागरकुर्नूल के जिला कलेक्टर बी संतोष ने कहा कि आगे कोई भी कदम उठाने से पहले सुरंग की स्थिरता को ध्यान में रखा गया है। सुरंग से जल निकासी का काम भी चल रहा है। जीएसआई और एनजीआरआई की सलाह ले रहे हैं। स्थिति का आकलन करने के लिए एलएंडटी से जुड़े ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है। कीचड़ और मलबा भरने के कारण हम आखिर के 40-50 मीटर के अंदर नहीं जा पा रहे हैं, जहां श्रमिक फंसे हुए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, तेलंगाना के डिप्टी सीएम भट्टी विक्रमारक ने कहा कि राज्य सरकार तब तक हार नहीं मानेगी, जब तक सुरंग के अंदर फंसे आठों लोग नहीं मिल जाते। शनिवार सुबह सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे आठ मजदूर अंदर फंस गए थे। रेस्क्यू टीम 13.85 किलोमीटर लंबी सुरंग के 13.79 किलोमीटर तक का दायरा खंगाल चुके हैं। लेकिन आखिरी हिस्से में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है। इसका मतलब है कि उन आठ जिंदगियों की सलामती के लिए महज 0.06 किलोमीटर का फासला है।

महाकुंभ के आखिरी दिन महाशिवरात्रि पर महास्नान, सुबह 8 बजे तक 60.12 लाख लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी


#prayagraj_kumbh_mela_mahashivratri_sangam_snan 

महाकुंभ का आज आखिरी दिन है। महाशिवरात्रि के स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। फिलहाल पूरी संगम नगरी हर-हर महादेव की जयकारों से गूंज रही है। भोले बाबा के भक्त भक्ति से सराबोर हैं। सुबह 8 बजे तक 60.12 लाख लोग स्नान कर चुके हैं। स्थिति यह है कि बुधवार सुबह 6:00 बजे तक ही 40 लाख से अधिक लोग स्नान कर चुके हैं। महाशिवरात्रि पर 3 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। यानी, कुल आंकड़ा 66 से 67 करोड़ तक पहुंच जाएगा। वहीं सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक अधिकारी अलर्ट पर हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से महाकुंभ की निगरानी कर रहे हैं।

पुण्यकाल और मुहूर्त का इंतजार किए बिना श्रद्धालु आधी रात से ही आस्था की डुबकी लग रहे हैं। संगम जाने वाली सड़कों पर हर तरफ जन प्रवाह नजर आ रहा है। सभी रास्ते श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरे हैं। त्रिवेणी बांध से लेकर कई मार्ग और संगम से जुड़े अन्य मार्गों पर भीड़ का तांता लगा है। 

महाशिवरात्रि के मौके पर, महाकुंभ नगर प्रशासन और प्रयागराज जिला प्रशासन ने शहर के सभी शिव मंदिरों के पुजारियों और प्रबंधकों के साथ बैठक की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि किसी भी तरह के जुलूस या शिव बारात का आयोजन नहीं किया जाएगा। शिव मंदिर खुले रहेंगे और श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा कर सकेंगे, लेकिन कहीं भी भीड़ जुटाने वाली कोई गतिविधि नहीं होगी।

इसके अलावा, प्रशासन ने महाकुंभ नगर और प्रयागराज शहर को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया है। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि सड़कों पर वाहनों की आवाजाही कम हो और भीड़ का दबाव नहीं बढ़े। महाशिवरात्रि के दिन, जब आखिरी अमृत स्नान होगा, अन्य शहरों और राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि यातायात से जुड़ी कोई समस्या न हो।

प्रयागराज की पावन धरा पर आयोजित महाकुंभ के आखिरी स्नान के कारण प्रयागराज जंक्शन पर श्रद्धालुओं का तांता लगा है। सभी प्लेटफार्म पर भारी भीड़ है। भीड़ को देखते हुए रेलवे ने खुशुरू बाग में होल्डिंग एरिया बनाया है। संगम में आस्था की डुबकी लगाकर आने वाले सभी श्रद्धालुओं को होल्डिंग एरिया से सीधे प्रयागराज जंक्शन में एंट्री दी जा रही है। जबकि देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को प्लेटफार्म नम्बर-6 सिविल लाइन की तरफ से महाकुंभ मेले में भेजा जा रहा है। श्रद्धालुओं को सकुशल उनके गंतत्व तक पहुंचाने के लिए रेलवे ने आज 170 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई है।

बर्बाद हो चुके यूक्रेन से क्या चाहते हैं ट्रंप? मदद के बदले खनिज समझौते पर हस्ताक्षर का दबाव

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रूस जैसे शक्तिशाली देश से जंग कर यूक्रेन पहले ही बर्बाद हो चुका है। अब यूक्रेन के पास बची-खुची जो संपदा है, उस पर अमेरिका की नजर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन की मदद के बदले उसके दुर्लभ पृथ्वी तत्वों तक अपनी पहुंच की मांग की है। डोनाल्‍ड ट्रंप यूक्रेन पर जंग खत्‍म करने का लगातार दबाव बना रहे हैं। लेकिन, एकमात्र शांति ही वो वजह नहीं है। ट्रंप की नजर यूक्रेन के उस खजाने पर है, जिसे लेकर वे मालामाल होना चाहते हैं। यूक्रेन के एक मंत्री ने दावा क‍िया क‍ि राष्‍ट्रपत‍ि वोलोदि‍मीर जेलेंस्‍की और अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि के बीच यूक्रेन के खनिज भंडारों को लेकर एक डील होने ही वाली है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा है कि अमेरिका ने रूस के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए यूक्रेन के समर्थन में जो मदद दी है, वो उसे लाने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की कोशिश, बाइडेन प्रशासन के दौरान यूक्रेन को दिए गये मदद को वापस लेना है।

डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन में कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस में प्रतिनिधियों से कहा, कि "मैं पैसे वापस पाने या सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा हूं।" उन्होंने कहा कि "मैं चाहता हूं कि वे हमारे द्वारा लगाए गए सभी पैसे के बदले हमें कुछ दें। हम दुर्लभ पृथ्वी और तेल मांग रहे हैं, जो कुछ भी हमें मिल सकता है। हमें अपना पैसा वापस मिलेगा। मुझे लगता है कि हम सौदे के बहुत करीब हैं, और हमें करीब होना चाहिए क्योंकि यह एक भयानक स्थिति रही है।"

वहीं, रूस-यूक्रेन संघर्ष आरंभ होने के तीन साल पूरे होने के अवसर पर रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेलेंस्की ने कहा, यदि आपकी शर्त यह है कि यदि मैं समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता तो आप मदद नहीं देंगे तो बात साफ है। जेलेंस्की ने कहा, यदि हम पर दबाव डाला जाता है और हम इसके बिना कुछ नहीं कर सकते तो शायद हम इस दिशा में आगे बढ़ें... हालांकि मैं सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप से बात करना चाहता हूं। ट्रंप प्रशासन ने रूस के हमले से बचाने और हमले का जवाब देने के लिए यूक्रेन को दी गई मदद के बदले अब यूक्रेन को अपनी दुर्लभ खनिज संपदा तक अमेरिका को पहुंच देने का दबाव बनाना आरंभ किया है। इसके लिए ट्रंप के वार्ताकार कीव में मौजूद हैं।

गौरतलब है कि जेलेंस्की ने पहले अमेरिका के शुरुआती ऑफर को पूरी तरह ठुकरा दिया था। उनका कहना था कि इससे यूक्रेन को रूस के खतरे से अपनी सुरक्षा करने की गारंटी नहीं मिलती। जेलेंस्की ने रविवार को कहा कि वह अमेरिका को यूक्रेन के दुर्लभ खनिजों से लाभान्वित होने देने के लिए तैयार हैं लेकिन ट्रंप प्रशासन की ओर से इस मद में ऑफर की जा रही 500 अरब डॉलर की सहायता राशि उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा, मैं ऐसे किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा जिसकी कीमत यूक्रेन की दस पीढ़ियों को चुकानी पड़े।

शांति का मतलब यूक्रेन का आत्मसमर्पण नहीं होना चाहिए', फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति ने ट्रंप की बोलती बंद की

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का स्वागत किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस-यूक्रेन वॉर में शांति वार्ता को लेकर मुलाकात की है। इसके बाद दोनों देशों के राष्ट्रपति ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस किया, लेकिन इस दौरान दोनों के बीच मतभेद साफ दिखाई दिए। इस दौरान मैक्रों ने कहा, बिना किसी गारंटी के युद्धविराम नहीं होना चाहिए। यह शांति यूक्रेन की संप्रभुता को बनाए रखने वाली होनी चाहिए और उसे अन्य देशों से स्वतंत्र रूप से बातचीत करने की अनुमति देनी चाहिए।

सोमवार को जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष इमैनुएल मैक्रों से वॉइट हाउस में मुलाकात की, तो इस पर पूरी दुनिया की नजर थी। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति ने ट्रंप की बोलती बंद कर दी। दरअसल, वॉइट हाउस में मुलाकात के बाद जब दोनों नेता प्रेस के सामने थे, उसी दौरान ट्रंप ने एक बार फिर से यूरोपीय देशों के पैसा उधार देने का जिक्र किया तो मैक्रों ने ट्रंप का हाथ पकड़कर उन्हें रोका और जोर देकर खंडन किया। मैक्रों ने कहा, वास्तव में अगर स्पष्ट रूप से कहें तो हमने भुगतान किया है। हमने कुल प्रयास का 60% भुगतान किया है और यह अनुदान के माध्यम से था, कर्ज के रूप में नहीं। हमने असलियत में धन दिया।

मैक्रों ने जोर देकर कहा कि यूरोप ने रूस की लगभग 230 अरब डॉलर की संपत्ति की फ्रीज कर दिया। इसके साथ ही स्पष्ट किया कि इसका उपयोग क्षतिपूर्ति के रूप में नहीं किया जा रहा है क्योंकि ये संपत्ति रूस की है और अभी फ्रीज है। उन्होंने यह भी कहा कि आखिर में यह संपत्तियां रूस के साथ समझौते का हिस्सा हो सकती हैं।

वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई कि यूक्रेन में रूस का युद्ध खत्म होने के करीब है। लेकिन फ्रांस के नेता ने आगाह किया कि यह महत्वपूर्ण है कि मॉस्को के साथ कोई भी संभावित समझौता यूक्रेन के लिए आत्मसमर्पण करने जैसा न हो। मैक्रों ने कहा, शांति का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि यूक्रेन को बिना सुरक्षा गारंटी के युद्ध विराम के लिए मजबूर किया जाए। शांति का अर्थ यूक्रेन की संप्रभुता को बनाए रखना और उसे अन्य देशों के साथ बातचीत करने का मौका देना होना चाहिए।

मोदी सरकार फासिस्ट नहीं”, सीपीएम के इस बदले तेवर का कांग्रेस-सीपीआई में विरोध तेज

#modigovtisnotfascistwhycpmsuddenlychange

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को फासिस्ट यानी फासीवादी या नियो फासिस्ट नहीं मानती। दरअसल, सीपीएम) की अप्रैल महीने में तमिलनाडु के मदुरै में 24वीं कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए तैयार किए गए राजनीतिक प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को फासिस्ट या नियो फासिस्ट नहीं कहा गया है। इस प्रस्ताव के मसौदे को सीपीएम केंद्रीय समिति ने कोलकाता में 17 से 19 जनवरी के बीच अपनी बैठक में मंजूरी दी थी। अब सीपीएम के इस रुख ने केरल की सियासत में तूफान मचा दिया है। इसको लेकर कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सीपीआई ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे बीजेपी के प्रति नरम रुख अपनाने की रणनीति बताया है।

इस प्रस्ताव के मसौदे को सीपीएम केंद्रीय समिति ने कोलकाता में 17 से 19 जनवरी के बीच अपनी बैठक में मंजूरी दी थी। सीपीएम ने अपने मसौदा राजनीतिक प्रस्ताव में कहा है कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान दक्षिणपंथी, सांप्रदायिक और सत्तावादी ताकतों का एकीकरण हुआ है जो 'नियो फासिस्ट विशेषताओं' को दर्शाता है। लेकिन वह मोदी सरकार को सीधे तौर पर फासिस्ट या नियो फासिस्ट नहीं मानती। प्रस्ताव में यह भी बताया गया है कि मोदी सरकार को फासिस्ट या नियो फासिस्ट क्यों नहीं कहा गया है, क्योंकि इसके कुछ कदम फासिस्ट विचारधारा से मेल नहीं खाते हैं। सीपीएम के इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह दिखाना था कि सरकार की नीतियां पूरी तरह से फासिस्ट नहीं हैं, बल्कि उनमें कुछ तत्त्व ऐसे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।

सीपीएम की बीजेपी के वोटों को हासिल करने की कोशिश-कांग्रेस

मोदी सरकार को लेकर सीपीएम के राजनीतिक प्रस्ताव में इस टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने तल्ख टिप्पणी की है। केरल में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने आरोप लगाया कि सीपीएम बीजेपी के प्रति नरम रवैया अपना रही है और इस प्रस्ताव के जरिए वह केरल में बीजेपी समर्थकों के वोट हासिल करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनावों में सीपीएम ने बीजेपी के वोटों से जीत हासिल की थी और अब 2026 के चुनावों के लिए वही रणनीति अपनाई जा रही है।

सीपीएम की यह रणनीति समझ से परे-सीपीआई

वहीं, सीपीएम की गठबंधन सहयोगी सीपीआई ने भी अपने स्टैंड में सुधार की मांग कर दी है। सीपीआई ने कहा है कि सीपीएम की ओर से मोदी सरकार को फासीवादी बचाने से बचने की जल्दबाजी नहीं समझ आ रही है। पार्टी की केरल इकाई के सचिव बिनॉय विश्वम ने कहा कि सीपीएम की यह रणनीति समझ से परे है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार धर्म और आस्था का राजनीतिक उपयोग कर रही है। जो कि फासिस्ट विचारधारा की पहचान होती है। उनका आरोप था कि सीपीएम जानबूझकर मोदी सरकार को फासीवादी कहने से बच रही है।

सीपीएम के बदले रुख की वजह

वहीं, सीपीएम के इस अचानक हुए “हृदय परिवर्तन” से सवाल उठना लाजमी है। जानकार इसे पिनराई विजयन की चुनावी रणनीति मान रहे हैं। केरल में बीजेपी जिस तेजी से पैर पसार रही है, वह एलडीएफ को टेंशन देने के लिए काफी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने केरल में अपना खाता खोल दिया है। अगर बीजेपी के वोटर बढ़े तो सर्वाधिक नुकसान वाम दलों को ही होगा। 10 साल की एंटी इम्कबेंसी से निपटने के लिए जरूरी है कि बीजेपी और कांग्रेस की ओर झुक रहे वोटर लेफ्ट के सपोर्ट में वोटिंग करें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि केरल में बीजेपी के प्रति सहानुभूति रखने वाले वोटर्स का एक धड़ा है जो कांग्रेस को नहीं पसंद करता है। सीपीएम की नजर उस पर भी है।

चिढ़ जाएगी कांग्रेसः मतभेद के बीच शशि थरूर ने मोदी के मंत्री पीयूष गोयल के साथ शेयर की सेल्फी

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इन दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी की खबर हैं। कांग्रेस से बढ़ती नाराजगी के बीच शशि थरूर ने कुछ ऐसा कर दिया है, जिससे पार्टी का “पारा” हाई हो सकता है। दरअसल थरूर ने केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता पीयूष गोयल के साथ एक फोटो पोस्ट की है। ये तस्वीर भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते पर चर्चा के बाद की है।इस सेल्फी में वह केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार राज्य सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ नजर आ रहे हैं।

शशि थरूर ने मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार एवं व्यापार राज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ एक सेल्फी पोस्ट की और कहा कि लंबे समय से रुकी हुई भारत-ब्रिटेन एफटीए वार्ता का पुनरुद्धार स्वागत योग्य है। सोमवार को एक कार्यक्रम में अपनी मुलाकात के बारे में उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- 'ब्रिटेन के व्यापार एवं व्यापार राज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ उनके भारतीय समकक्ष वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में बातचीत करके अच्छा लगा।' थरूर ने एक्स पर कहा, टलंबे समय से रुकी हुई एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) वार्ता फिर से शुरू हो गई है, जो बहुत स्वागत योग्य है।'

शशि थरूर ने एक्स पर ये पोस्ट केरल सरकार की नीतियों की तारीफ करने के बाद उनके और कांग्रेस पार्टी के संबंधों में आई खटास के बाद लिखी है। इसके बाद एक बार फिर से पार्टी में उनके फ्यूचर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

बता दें कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर की कांग्रेस पार्टी से नाराजगी देखने को मिल रही है। इसे लेकर वह हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिले थे और नाराजगी भी जताई थी। पार्टी में हाशिए पर धकेले जाने को लेकर वह नाराज हैं। उन्होंने कांग्रेस के सामने ये भी साफ कर दिया था कि पार्टी को ये न लगे कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

बता दें कि शशि थरूर ने इससे पहले केरल की पिनारई विजयन सरकार की तारीफ की थी। इसके बाद थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की भी तारीफ की थी।