बजट 2024: केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट में आदिवासी के विकास के लिए जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के लिए भी रखा प्रावधान,झारखण्ड को भी मिलेगा लाभ


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झा. डेस्क 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारण आज संसद में आम बजट 2024 पेश क़ी. बजट में झारखंड को भी कई अहम सौगातें मिली हैं.

वित्तमंत्री ने बजट पेश करते हुए नॉर्थ ईस्ट राज्यों के विकास के लिए पूर्वोदय योजना की घोषणा की है. वित्त मंत्री बताया कि केंद्र सरकार झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए 'पूर्वोदय' योजना तैयार करेगी.

सीतारमण ने आगे कहा कि केंद्र सरकार पूर्वी क्षेत्र में विकास के लिए औद्योगिक गलियारे का समर्थन करेगी.

पीएम जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान की होगी शुरुआत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बजट पेश करते हुए आदिवासियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा, ‘आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान शुरू किया जाएगा।

इसके अलावा, आदिवासी समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान द्वारा आदिवासी-बहुल गांवों और आकांक्षी जिलों में आदिवासी परिवारों के लिए संतृप्ति कवरेज को अपनाएगी। इससे 63,000 गांवों को कवर किया जाएगा जिससे 5 करोड़ आदिवासी लोगों को लाभ होगा।

इस बार राज्य के 30 प्रतिशत कुर्मी वोटों के तीन दावेदार, नितीश, सुदेश के अलावे जयराम महतो क़ी दावेदारी से दिलचस्प मुकबला के आसार

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झारखण्ड डेस्क 

झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा द्वारा शंखनाद किये जाने के बाद सभी राजनीतिक दल रेस हो गयी है. इस बीच झारखण्ड में और दो राजनितिक शक्ति के उदय से राज्य में कुर्मी वोटो का धुर्बीकरण होने क़ी संभवना है.

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वैसे झारखण्ड में शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रांची में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा दिया। इस अवसर पर भाजपा पार्टी के 26 हजार कार्यकर्ताओं का जुटान हुआ था. इस बार भाजपा का चुनावी एजेंडा वही है, जो लोकसभा में था. हेमंत सोरेन सरकार का भ्रष्टाचार, घुसपैठ और इसकी वजह से आदिवासी समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के अलावे बेरोजगारों के साथ हेमंत सरकार की वादाखिलाफी को आधार बना कर भाजपा जनता के बीच जाएगी.

 भाजपा के भीतर जातीय समीकरण पर भी फोकस होगा. आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटें जीतना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. इसके लिए भाजपा ने पहले से ही अपने बड़े आदिवासी नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है.

झारखंड में भाजपा को अपनी कामयाबी का भरोसा इसलिए दिखता है कि इसकी जड़ें पहले से जमी हुई हैं. सिर्फ इसे संभालने और पटरी पर लाने की जरूरत है. पर, भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती कुड़मी (कुर्मी) वोटर हैं, जिनकी आबादी 25 प्रतिशत के आस पास है.वैसे सरकारी महकमे में यह आबादी 16 फीसद बताई जाती है.

झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं. इनमें 28 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 30 विधानसभा सीटों पर कुड़मी वोटर निर्णायक माने जाते हैं. छह संसदीय क्षेत्रों में इनका खासा प्रभाव है.कुड़मी वोटर को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने इसी समाज से आने वाले सुदेश महतो की आजसू पार्टी से गठबंधन किया है. अभी तक कुड़मी समाज के वोटों पर सुदेश महतो का ही एकाधिकार था. हालांकि अब कुड़मी वोटों को ध्यान में रखते हुए इस बार इसके तीन दावेदारों के मैदान में होने की प्रबल संभावना है.

कुर्मी वोटों पर सुदेश क़ी रही दावेदारी

अभी तक झारखंड में कुड़मी नेता के रूप में आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की ही दावेदारी रही है. हालांकि कुड़मी बहुल 30 विधानसभा सीटें होने के बावजूद आजसू को उस हिसाब से कभी सीटें नहीं मिलीं.2005 के विधानसभा चुनाव में आजसू को सिर्फ दो सीटें मिली थीं. भाजपा के साथ तब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू भी था. भाजपा ने जेडीयू के साथ गठबंधन के तहत 63 सीटों पर चुनाव लड़ा था. और 30 सीटें जीतीं थी उसमे जेडीयू 18 पर लड़ कर छह सीटें जीता था.आजसू ने 40 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन उसे दो सीटें ही मिलीं. 2009 में आजसू 78 सीटों पर लड़ा और उसे सिर्फ एक सीट पर जीत मिली. 2014 में आजसू ने आठ पर लड़ कर पांच सीटें जीतीं. 2019 में 53 सीटों पर लड़ने के बावजूद आजसू को दो ही सीटों पर कामयाबी मिली. यानी 30 विधानसभा क्षेत्रों में कुड़मी वोटरों की बहुलता के बावजूद आजसू शुरू से 2019 तक एक से पांच सीटों पर जीतती रही है.

2024 के चुनाव में होंगे कुर्मी वोटों के 3 दावेदार

इसबार 2024 के विधानसभा चुनाव में कुर्मी वोटों पर 3 दबेदार मैदान में हैं.पिछले चुनावों के अनुभव यही बताते हैं कि भले ही 30 सीटों पर कुड़मी वोटर निर्णायक हैं, लेकिन वे कुड़मी समाज से आने वाले सुदेश महतो की आजसू पार्टी पर भरोसा नहीं करते हैं.उनके वोट बंटते रहे हैं. इस बार कुड़मी वोटों के तीन दावेदार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. पहली दावेदार तो सुदेश महतो की पार्टी आजसू है. दूसरे नए दावेदार उसी समाज से आने वाले झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) के जयराम महतो हैं. तीसरी दावेदारी नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की होने की प्रबल संभावना है.

युवाओं में जयराम महतो का है क्रेज, लोकसभा चुनाव में दिखाया जलवा

झारखंड में कुड़मी नेता के रूप में उभरे नए नेता जयराम का जलवा हालिया लोकसभा चुनाव में देखने को मिला. जयराम महतो ने खुद गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से पहली बार चुनाव लड़ा और 3,47,322 वोट लाने में सफल रहे. गिरिडीह में एक ही समाज के तीन उम्मीदवार मैदान में थे. आजसू के टिकट पर चंद्र प्रकाश चौधरी ने जीत तो हासिल कर ली, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार मथुरा महतो को हार का सामना करना पड़ा. जेबीकेएसएस ने आठ संसदीय क्षेत्रों- गिरिडीह, रांची, हजारीबाग, चतरा, सिंहभूम, धनबाद, दुमका और कोडरमा में अपने उम्मीदवार उतारे थे। इन उम्मीदवारों को न्यूनतम 12,566 और अधिकतम 3,47,322 वोट मिले.

इस दंगल में कूदे नीतीश कुमार 12 सीट पर ठोंकेंगे ताल

 जेडीयू से झारखंड में 2005 में छह विधायक चुने गए थे. एनडीए में रहते हुए नीतीश कुमार की इच्छा झारखंड में भी चुनाव लड़ने की रही है, लेकिन मजबूत नेता और ढांचा न होने के कारण 2005 के बाद जेडीयू को पिछले दो चुनावों में मौका नहीं मिला. इस बार अपने भारत जनतंत्र मोर्चा का जेडीयू से सांठ गांठ कर सरयू राय ने नीतीश कुमार का उत्साह बढ़ाया है. नीतीश के साथ सरयू राय की लगातार मुलाकातों से इतना तो स्पष्ट हो गया है कि जेडीयू भी इस बार झारखंड में विधानसभा का चुनाव लड़ेगी.जेडीयू ने राज्यसभा में खीरू महतो को भेज कर पार्टी को झारखंड में खड़ा करने का संकेत पहले ही दे दिया था.अब तो सरयू राय जैसा नेता जेडीयू को मिल गया है.जेडीयू को भी झारखंड के कुड़मी वोटरों से ही अधिक उम्मीद है.

झारखंड के बाघमारा में छपे 90 लाख रुपए के अवैध लॉटरी टिकट को आसनसोल पुलिस ने किया जब्त, दो गिरफ्तार, ऑटो जब्त*
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आसनसोल साउथ थाना व जहांगीरी मोहल्ला पुलिस फाड़ी को उस समय बड़ी सफलता हाथ लगी, जब उन्होनें गुप्त सुचना के आधार पर संयुक्त रूप से काली पहाड़ी मोड़ पर नाका चेकिंग के दौरान एक ऑटो में करीब 9 बोरा में भरा झारखंड का अवैध लॉटरी टिकट बरामद किया। इसके साथ ही पुलिस ने दो आरोपी को भी गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस की माने तो लॉटरी टिकट की संख्या कुल 9 लाख है, जिसकी अनुमानित क़ीमत बाजार में करीब 90 लाख रूपये है। फिलहाल पुलिस इस धंधे से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रहीं है। घटना के संबंध में पुलिस ने बताया की यह लॉटरी टिकट झारखंड से ट्रेन के माध्यम से आसनसोल लाया जा रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी की आसनसोल रेलवे स्टेशन से अवैध लॉटरी टिकट का एक बड़ा खेप पाण्डेश्वर ले जाया जा रहा है। जिसके बाद पुलिस ने काली पहाड़ी मोड़ पर नाका चेकिंग लगा दी। इसके अलावा आसनसोल रेलवे स्टेशन पर भी पुलिस नजर बनाए हुई थी। लेकिन अवैध लॉटरी धंधेबाजों को इसकी भनक लग गई थी। वें आसनसोल रेलवे स्टेशन पर पुलिस को चकमा देकर एक ऑटो पर अवैध लॉटरीयो से भरी बोरियों को लोड कर दिया और पाण्डेश्वर की ओर रवाना हो गये। लेकिन पुलिस भी उनके पीछे सायें की तरह लगी हुई थी। जैसे ही अवैध लॉटरीयों से लदी ऑटो लेकर लॉटरी धंधेबाज काली पहाड़ी मोड़ पहुंचे, पहले से ही ताक में बैठी पुलिस ने उनको धर दबोचा और ऑटो की तलाशी शुरू कर दी। ऑटो से पुलिस ने नौ बोरे में भरी टिकट के साथ दो लोगों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की अगर मानें तो कुल्टी में भी अवैध लॉटरीयों को लेकर चल रही कार्रवाई में भारी पैमाने पर कुल्टी पुलिस ने अवैध लॉटरी बरामद किया है। पुलिस यह अनुमान लगा रही है की झारखंड में अवैध लॉटरी को लेकर झारखंड पुलिस द्वारा लगाई गई लगाम के बाद अवैध लॉटरी तस्करों ने आसनसोल को अपना सुरक्षित स्थान बना लिया है। जहां से वह झारखंड की अवैध लॉटरीयों की टिकट को पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में खपाने का काम कर रहे हैं। झारखंड की इस अवैध लॉटरी के धंधे में कुछ सफेदपोश लोग भी जुड़े हैं, जिनकी मदद से तस्कर झारखंड की इन अवैध लॉटरीयों की टिकट को बंगाल में जमकर खपा रहे हैं। वहीं चंद पैसों की लालच में आकर लॉटरी विक्रेता भी पश्चिम बंगाल की भोली भाली जनता को ना चाहकर भी अपने पापी पेट के लिये बेवकूफ बनाकर उनको करोड़पति बनाने का सपना दिखाकर ठगने का काम कर रही है। जिनको पुलिस तलाश रही है।
सड़क दुर्घटना, ट्राफिक जाम रोकने के लिए सड़क सुरक्षा समिति गंभीरता से करें काम : उपायुक्त


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झा. डेस्क 

धनबाद :उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सुश्री माधवी मिश्रा की अध्यक्षता में आज जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई।

इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाएं, ट्रैफिक जाम, रॉन्ग साइड पर चलने वाले वाहन, शहरी क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क अवरुद्ध करने वाले आवारा व पालतु पशुओं तथा यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सड़क सुरक्षा समिति गंभीरता से काम करें।

उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए नगर निगम, परिवहन कार्यालय, यातायात पुलिस, आरसीडी, एनएच, एनएचएआई सहित अन्य विभाग समन्वय बनाकर व्यवस्था को ठीक करने के लिए कारगर कदम उठाए।

साथ ही सभी मोड़ और चौराहों पर ऑटो, ई रिक्शा व अन्य वाहनों के पार्किंग पर प्रतिबंध लगाने तथा सड़क पर अवैध कट को बंद करने का भी उपायुक्त ने निर्देश दिया। 

उपायुक्त ने कहा कि सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशु, रॉन्ग साइड पर चलने वाले वाहन, अवैध कट से निकलने वाले वाहनों के कारण गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हुई है। कई दुर्घटना में परिवार खत्म हो जाते हैं। यह बहुत दर्दनाक और संवेदनशील है। इसके प्रति गंभीरता बरतते हुए सभी विभाग कम करें।

बैठक में गोविंदपुर और निरसा में सर्विस लेन से अतिक्रमण हटाने, कोर्ट मोड़ तथा सरायढेला स्टील गेट में सड़क जाम को दूर करने, जोड़ापीपल मोड़ के पास रंबल स्ट्रिप लगाने, गोविंदपुर मोहन पेट्रोल पंप के पास डिवाइडर में क्रॉसिंग के दोनों ओर रंबल स्ट्रिप लगाने, झरिया से डिगवाडीह रोड में बने स्पीड ब्रेकर्स पर पेंट करने सहित अन्य विषयों पर चर्चा की गई।

बैठक में जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए लगातार समिति द्वारा काम किया जा रहा है। जिसके तहत 18 ब्लैक स्पॉट में नियमित सुधार किया गया है। सुधार के बाद 13 स्थान ब्लैक स्पॉट के दायरे से बाहर हो गए हैं। छात्रों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यालयों में नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अलावा जिला परिवहन कार्यालय, मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर तथा डीसीपी ट्रैफिक द्वारा लगातार वाहनों की जांच की जा रही है। जिसके अंतर्गत जून 2024 में 1947 वाहनों की जांच की गई। इसमें से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 1448 वाहनों से 44 लाख रुपए से अधिक राशि दंड के रुप में वसूली गई।

बैठक में उपायुक्त सुश्री माधवी मिश्रा, नगर आयुक्त श्री रवि राज शर्मा, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री दिवाकर सी द्विवेदी, अनुमंडल पदाधिकारी श्री उदय रजक, ट्राफिक डीएसपी श्री अरविंद कुमार सिंह, एनएचएआई दुर्गापुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री मनीष कुमार, एनएचएआई धनबाद से श्री राजीव रंजन, एनएच धनबाद के सहायक अभियंता श्री अशोक प्रसाद, आरसीडी के कार्यपालक अभियंता श्री मिथिलेश प्रसाद, सहायक अभियंता श्री पंकज कुमार, जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक श्री सुनिल कुमार सहित अन्य विभाग के पदाधिकारी मौजूद थे।

कृष्णा बम ने 72 साल के उम्र में भी कावड़ लेकर पहुंची बैधनाथ धाम, किया भोले बाबा पर जलाभिषेक

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झा. डेस्क

भगवान भोलेनाथ की भक्त कृष्णा बम आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है. वे मुजफ्फरपुर से सुल्तानगंज निकलती है. वहां से देवघर तक की यात्रा करने वाली कृष्णा बम के दर्शन के लोग अभिलाषी रहते है. वे सावन की पहली सोमवारी यानी आज 22 जुलाई को बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण की, उनकी एक झलक पाने के लिए लोग अभी उत्साहित थे.

सुल्तानगंज से देवघर तक की सफर: 

 72 वर्ष की उम्र में वह बिना रुके सुल्तानगंज से देवघर तक का सफर तय करती रही है . इसी वजह से उन्हें कृष्णा बम की पहचान मिली है. वे बीते 40 वर्ष से बाबा बैद्यनाथ पैदल जलाभिषेक करने वाली अनोखी भक्त है. कृष्णा बम को देखने और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए सुल्तानगंज से लेकर बाबा धाम तक होड़ लगी रहती है.

72 वर्ष की उम्र में देवघर के लिए निकली मुजफ्फरपुर की कृष्णा बम की जलाभिषेक:

यह मान्यता है कि महादेव की विशेष कृपा कृष्णा माता बम पर प्राप्त है. वे इस बार 41वीं बार महादेव का जलाभिषेक करेंगी. वर्ष 1976 में पहली बार बाबा गरीबनाथ पर जलाभिषेक करने वाली कृष्णा माता बम को 1982 में बाबा बैद्यनाथ के दरबार में गईं. इसके बाद से लेकर 2022 तक लगातार वह बतौर डाक बम के रूप में सुलतानगंज से गंगा जल लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ जाती हैं. वहां जलाभिषेक करती आई हैं.

महाकाल मंदिर में जाकर भी करेंगी पूजा:

 वर्ष 2023 में हादसा में पैर टूटने की वजह से नहीं जा सकी थीं लेकिन शिव के प्रति आस्था ने उन्हें एक बार फिर से खड़ा कर दिया है. इस बार भी वे जा रही हैं. देवघर के बाद ओंकारेश्वर और फिर महाकाल मंदिर में जाकर जलाभिषेक कर आशीर्वाद लेंगी. यही नहीं बल्कि हर सोमवार को अलग-अलग धाम विशेषकर बाबा के ज्योतिर्लिंग का दर्शन पूजन करती आई हैं.

"72 साल की कृष्णा माता बम ने कहा कि मैं कुछ नहीं करती बस महादेव सब कुछ करवा देते हैं. मेरा कुछ भी नहीं है जो है वह सब महादेव का दिया हुआ है.

 मैं वर्ष 1982 से लगातार बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए निकलती हूं. सावन माह की पहली सोमवार को शुरूआत करते हुए दूसरी, तीसरी और चौथी सोमवार को अलग-अलग ज्योतिर्लिंग का दर्शन पूजन करती हूं. इस बार वह बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने के बाद एमपी के ओंकारेश्वर का दर्शन कर नर्मदा नदी का जलभोझी कर बाबा महाकाल का दर्शन पूजन करेंगी और फिर आगे का पड़ाव जारी रखेंगी." 

कृष्णा बम, भक्तमानसरोवर का दर्शन अद्भुत:

कृष्णा जी बताती हैं कि जीवन के सबसे बड़े और अद्भुत क्षण में से एक कैलाश पर्वत का दर्शन करना और मानसरोवर का दर्शन करना रहा है. यह अलौकिक है और सनातन धर्म में इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व भी है. इसकी चर्चा महादेव ने शिवपुराण में की है. महादेव से जो भक्त दिल से जो भी मांगता है, वह उसकी मुराद अवश्य पूरा कर देते हैं.

पाकिस्तान में भी कर चुकी जलभिषेक:

बता दें कि साल 2019 में भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद कृष्णा बम पाकिस्तान के लाहौर से 180 किमी की दूरी पर अवस्थित कटास राज मंदिर महादेव का दर्शन और पुजा कर आ चुकी है. यही नहीं उस दौरान पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें विशेष भेंट भी दिया था, जिसको आज भी वह संजोए कर रखी हुई हैं.

यहां गिरे थे भगवान शिव के आंसू:

कृष्णा माता बम ने कहा कि महाभारत काल के दौरान में युधिष्ठिर द्वारा दिए गए उत्तर के बाद तालाब का जल ग्रहण किया था और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. दुनिया भर में कटास जी महाराज मंदिर और राजस्थान के पुष्कर में पुष्कर झील का विशेष महत्व है. मान्यता है कि भगवान शिव के दो आंसू इन्हीं दो जगहों पर गिरे थे.

NCRT ने सोशल स्टडी की छठी कक्षा की किताब में किए कई बदलाव,जातीय भेदभाव को भी हटाया


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झा. डेस्क 

पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि ग्रीनविच मध्य रखा से पहले भी एक ‘मध्य रेखा’ थी जो कि उज्जैन से होकर गुजरती थी।इसके अलावा पाठ्युपुस्तक में जाति आधारित भेदभाव का उल्लेख नहीं किया गया है। अब तक पढ़ाई जाने वाली हड़प्पा सभ्यता को ‘सिंधु-सरस्वती’ सभ्यता बताया गया है।

सोशल स्टडी यानी सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक के अनुसार ग्रीनविच मध्यरेखा से काफी पहले भारत की अपनी प्रधान मध्यरेखा थी जिसे ‘मध्यरेखा’ कहा जाता था और जो मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से गुजरती थी।वास्तव में, यूरोप से कई शताब्दियों पहले, भारत की अपनी एक प्रधान मध्यरेखा थी।

अंबेडकर के विचार के संदर्भ में बदलाव

नए पाठ्यक्रम के अनुसार विकसित पाठ्यपुस्तक में जो बदलाव किए गए हैं उनमें जाति-आधारित भेदभाव का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

भेदभाव के बारे में BR आंबेडकर के अनुभव के संदर्भ में बदलाव किया गया है। इसमें वेदों का विवरण दिया गया है और कहा गया है कि महिलाओं और शूद्रों को इन ग्रंथों का अध्ययन करने का अधिकार नहीं था।

बता दें कि पुरानी पुस्तक में कहा गया था कि कुछ पुजारियों ने लोगों को चार समूह में विभाजित किया था जिसे वर्ण व्यवस्था कही जाती थी।महिलाओं ओर शूद्रों को वैदिक अध्ययन की अनुमति नहीं थी। महिलाओं को भी शूद्रों के वर्ग में रखा जाता था।

बोकारो के 3 छात्रों का किया गया गणतंत्र दिवस 2025 परेड के लिए चयन, मिली ये जिम्मेदारी


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बोकारो : बोकारो के राम रूद्र सीएम उत्कृष्ट विद्यालय के एयरविंग एनसीसी कोर्स के तीन बच्चे मृत्युंजय कुमार, कृष्ण कुमार और प्रियंका कुमारी का चयन गणतंत्र दिवस 2025 परेड के लिए हुआ है. 

इन बच्चों का चयन 1 से 10 जुलाई तक जमशेदपुर में आयोजित प्री आइजीजीबीसी कम कंबाइंड एनुअल ट्रेनिंग में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर किया गया है.

चयनित छात्रा प्रियंका कुमारी ने कहा कि वह कक्षा दसवीं की छात्रा है. गणतंत्र दिवस 2025 परेड के लिए बहुत उत्सुक है. उनका सपना भारतीय वायु सेवा में फाइटर पायलट बनना है. वहीं अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर प्रियंका ने बताया कि उनके पिता जितेंद्र सिंह बिजनेस करते हैं. मां संजू देवी गृहिणी है.

गैंगस्टर अमन साहू को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गिरिडीह केंद्रीय कारा से चाईबासा मंडल कारा शिफ्ट किया गया

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जेल सुपरिटेंडेंट को उसने दी थी धमकी, सुबिधा मुहैया नहीं कराने के कारण नुकसान पहुँचाने के. लिए कर रहा था उसके फैमली. का रेकी

झा. डेस्क 

गिरिडीह.:बड़ी खबर गिरिडीह से आई है। गैंगस्टर अमन साहू को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गिरिडीह केंद्रीय कारा से चाईबासा मंडल कारा शिफ्ट किया गया है। 21 जून को अमन को दोबारा पलामू जेल से गिरिडीह शिफ्ट किया गया था।

दरअसल, वह प्रतिबंधित सुविधाएं हासिल करने के लिए गिरिडीह जेल प्रशासन पर लगातार दबाव बना रहा था। उसने न सिर्फ जेल सुपरिटेंडेंट हिमानी प्रिया, बल्कि उनके परिजनों को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी मोबाइल पर दी थी।

अमन गिरोह के गुर्गों ने जेल सुपरिटेंडेंट के आवास से लेकर उनके देवघर स्थित घर की रेकी की थी। इसके गुर्गे हमला करने ही वाले थे कि पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।

बताया जाता है कि लगभग 10 अन्य अपराधियों को भी अन्यत्र शिफ्ट करने का अनुरोध कारा महानिरीक्षक से किया गया है। इस बारे में अभी तक अनुमति नहीं मिली है।

कारा महानिरीक्षक सुदर्शन मंडल ने अमन साहू को चाईबासा जेल शिफ्ट करने का आदेश शनिवार को भेजा था। उसे शिफ्ट करने की सभी तैयारियां कल ही पूरी कर ली गयी थीं। एक ओर जहां कोर्ट से अनुमति ली गयी, वहीं दूसरी ओर टीम का भी गठन किया गया।

निर्णय के मुताबिक रविवार को प्रात: चार बजे उसे गिरिडीह केंद्रीय कारा से भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकालकर लगभग एक बजे चाईबासा मंडल कारा पहुंचा दिया गया। अमन की सुरक्षा में पुलिस के तीन-तीन वाहन लगाये गये थे। इसमें 35 से भी ज्यादा जवान लगाये गये थे।

गैंगस्टर अमन साहू के इशारे पर ना सिर्फ देश के विभिन्न राज्यों में कांड को अंजाम दिया जाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसके तार जुड़े हुए हैं।

जबसे इसे गिरिडीह जेल शिफ्ट किया गया था, तभी से जेल की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। बताया जाता है कि जेल में ऐसे अपराधी के लिए जो व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं है। अंडा सेल समेत अन्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किये गये थे।

इससे पूर्व भी एकबार अमन को गिरिडीह जेल शिफ्ट किया गया था। उस वक्त भी जेल सुपरिटेंडेंट अनिमेष चौधरी को न सिर्फ जान से मारने की धमकी दी, बल्कि उनके वाहन पर हमला कराया। हालांकि हमले के दिन श्री चौधरी के स्थान पर वाहन पर जेलर प्रमोद कुमार बैठे हुए थे।

बताया जाता है कि दूसरी बार गिरिडीह जेल में शिफ्ट होने के बाद से लगातार वह जेल प्रबंधन पर तरह-तरह से दबाव बना रहा था। इन बातों को देखते हुए डीसी नमन प्रियेश लकड़ा, एसपी दीपक कुमार शर्मा और जेल सुपरिटेंडेंट हिमानी प्रिया ने कारा महानिरीक्षक को पत्र लिखकर इसे दूसरी जेल में शिफ्ट करने का अनुरोध किया था। अंतत: कारा महानिरीक्षक ने इसकी अनुमति दे दी।

राज्य और केंद्र सरकार ने पहल पर अफ्रीका के कैमरून में फंसे झारखंड के 27 मज़दूरों क़ी वतन वापसी,मज़दूरों के परिवार में ख़ुशी क़ी लहर


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झा. डेस्क 

अफ्रीका के कैमरून में फंसे झारखंड के 27 मजदूरों को राज्य सरकार के आग्रह पर मोदी सरकार सकुशल वतन वापस ले आयी . ये मजदूर पिछले दिन वीडियो संदेश जारी कर केंद्र व राज्य सरकार से सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगाई थी। 

राज्य सरकार ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से आग्रह किया था। चार महीने से मजदूरी नहीं मिलने के कारण खाने-पीने में मजदूरों को परेशानी हो रही थी। कामगारों ने वीडियो संदेश जारी किया था। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद झारखंड व भारत सरकार हरकत में आई।

इस सिलसिले में प्रवासी श्रमिकों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने केंद्र और राज्य सरकार से मजदूरों की सकुशल वतन वापसी के लिए पहल करने की मांग की थी।

 भारतीय दूतावास में बकाया मजदूरी और वतन वापसी को लेकर संबंधित कंपनी और मजदूरों के बीच वार्ता हुई थी और इसका निष्पादन विनायक कंपनी और एलएंडटी कंपनी की मध्यस्थता के कारण सफल हो पाई और चार महीने का बकाया मजदूरी भुगतान के साथ वतन वापसी का रास्ता साफ हो गया। 

वतन वापसी की खबर की सूचना पर प्रवासी मजदूरों के परिवार में ख़ुशी

वतन वापसी की खबर की सूचना पर प्रवासी मजदूरों के परिवार में खुशी की लहर देखी जा रही है। कैमरून में बोकारो, गिरिडीह, और हजारीबाग जिले के मजदूर हैं। 27 मजदूर में से 18 मजदूर बोकारो, 4 मजदूर गिरिडीह और 5 हजारीबाग जिला के रहनेवाले हैं।

 बोकारो जिला के रहनेवाले मजदूरों में डुमरी विधानसभा क्षेत्र के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कडरूखूंटा के मोहन महतो, जगदीश महतो, गोविंद महतो, डेगलाल महतो, चुरामन महतो, मुरारी महतो, पुसन महतो और लखीराम. जबकि गोनियाटो के महेश कुमार महतो, कमलेश कुमार महतो, दामोदर महतो और मुकुंद कुमार नायक, घवईया के अनु महतो और धनेश्वर महतो, नारायणपुर के परमेश्वर महतो और रालीबेड़ा के शीतल महतो और कुलदीप हांसदा के नाम शामिल हैं।

वहीं गिरिडीह जिला के सरिया थाना क्षेत्र स्थित चिचकी के सुकर महतो, डुमरी थाना क्षेत्र के विजय कुमार महतो, अतकी के रमेश महतो और दूधपनिया के दौलत कुमार महतो हैं जबकि हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के अचलजामु निवासी बिसुन, खरना के छत्रधारी महतो, भीखन महतो, जोबार के टेकलाल महतो और चानो के चिंतामण महतो शामिल हैं। 

इस कार्य के लिए प्रवासी मजदूरों ने सरकार और मीडिया का आभार जताया। सिकंदर अली की भी तारीफ की।

झारखंड में जदयू ने चुना 12 विंधानसभा सीट ,पहले भाजपा से तालमेल की होगी कोशिश,बात नही बनने पर सरयू राय के साथ मिलकर लड़ेंगे चुनाव*
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झा. डेस्क झारखंड विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड कम से कम 12 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. नीतीश कुमार की पार्टी ने इसको लेकर प्लान भी तैयार कर लिया है. खुद नीतीश कुमार इस पूरे प्लान की निगरानी कर रहे हैं. जेडीयू की कोशिश इस बार लोकसभा की तरह ही झारखंड विधानसभा में भी किंगमेकर बनने की है. राज्य की 81 विधानसभा सीटों पर अब से 3 महीने बाद चुनाव होने हैं. सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को नीतीश कुमार के साथ झारखंड जेडीयू नेताओं की बैठक हुई, जिसमें उन 12 सीटों को तय किया गया, जिस पर जेडीयू किसी भी हाल में चुनाव लड़ेगी. 12 सीटों की पूरी डिटेल *1. डाल्टनगंज-* पलामू जिले की इस सीट पर जेडीयू चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. साल 2000 और 2005 में जेडीयू को यहां से जीत मिली थी. *2. बिश्रामपुर-* पलामू के बिश्रामपुर में भी नीतीश कुमार की पार्टी का मजबूत दबदबा है. यहां पिछले चुनाव में पार्टी उम्मीदवार को 7,928 वोट मिले थे. *3. मांडू-* 2005 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने यहां से जीत हासिल की थी. यह सीट प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद खीरू महतो की है. महतो को ही सीट पर चुनाव लड़ाने के लिए उम्मीदवार खोजना है. *4. बाघमारा-* यह सीट भी कुर्मी बाहुल्य है और यहां पर जेडीयू लंबे वक्त से लड़ती आ रही है. 2009 में जेडीयू यहां दूसरे नंबर पर रही थी. 2019 में जेडीयू इस सीट पर तीसरे नंबर पर रही थी. *5. छतरपुर-* दलितों के लिए रिजर्व इस सीट पर भी जेडीयू की नजर है. पार्टी 2019 में यहां पर तीसरे नंबर पर रही थी. वर्तमान में इस सीट पर आरजेडी का कब्जा है. *6. चतरा-* बिहार बॉर्डर की इस सीट पर भी जेडीयू चुनाव लड़ने की फुल तैयारी में है. 2019 में पार्टी यहां पर तीसरे नंबर पर आई थी. उसे इस बार यहां जीत की उम्मीद है. *7. पांकी-* यह सीट एक वक्त में समता पार्टी का गढ़ हुआ करता था, लेकिन धीरे-धीरे यहां जेडीयू कमजोर होती गई. 2009 में जेडीयू यहां पर दूसरे नंबर पर थी. 2014 और 2019 में यहां से पार्टी चुनाव ही नहीं लड़ी. *8. तमार-* रांची की तमार सीट जेडीयू की मजबूत पकड़ वाली सीट रही है. 2005 और 2009 में इस सीट पर जेडीयू को जीत मिली थी. हालांकि, 2 चुनाव से जेडीयू यहां पर परफॉर्म नहीं कर पा रही है. *9. हुसैनाबाद–* जेडीयू की नजर हुसैनाबाद सीट पर भी है. यह मुस्लिम बाहुल्य सीट है और वर्तमान में यहां पर एनसीपी का कब्जा है. जेडीयू साल 2009 में यहां पर तीसरे नंबर पर थी. *10. गोड्डा-* संथाल परगना की गोड्डा सीट पर भी नीतीश कुमार की पार्टी नजर गड़ाए हुए है. जेडीयू 2019 में इस सीट तीसरे नंबर पर थी. *11. देवघर-* बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर कभी जेडीयू का मजबूत किला था. 2005 में जेडीयू ने यहां जीत हासिल की थी और 2019 में तीसरे नंबर पर पार्टी रही थी. *12. डुमरी-* कुर्मी बाहुल्य इस सीट पर जेडीयू पहले भी चुनाव लड़ती आई है. 2009 में पार्टी यहां पर दूसरे नंबर पर रही थी. 2019 में पार्टी के उम्मीदवार को यहां पर 5,219 वोट मिले थे. *चुनाव लड़ने के लिए पहले भाजपा से होगी तालमेल कोशिश,प्लान बी में सरयू राय की पार्टी* जेडीयू सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को पटना में जो बैठक हुई, उसमें यह तय हुआ है कि नीतीश कुमार की पार्टी पहले भारतीय जनता पार्टी से बात करेगी. जेडीयू की कोशिश एनडीए फोल्डर में ही रहकर पार्टी का विस्तार करना है. झारखंड में एनडीए की तरफ से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. बीजेपी से सीटों पर बात करने का जिम्मा कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को दिया गया है. झा बीजेपी शीर्ष नेतृत्व से बात करके सीट शेयरिंग फाइनल करेंगे. झारखंड में अभी एनडीए गठबंधन में बीजेपी के साथ आजसू है. *2. नहीं बनी बात तो सरयू राय के साथ लड़ेगी चुनाव* जेडीयू की बात अगर बीजेपी से नहीं बनती है तो पार्टी ने प्लान-बी भी तैयार किया है. पार्टी झारखंड में सरयू राय की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. हाल ही में सरयू राय ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की है. राय नीतीश कुमार के पुराने दोस्त माने जाते हैं. अगर प्लान-बी के तहत जेडीयू चुनाव लड़ती है तो उसकी सीटों में कुछ इजाफा भी हो सकता है. हालांकि, यह तब होगा, जब जेडीयू को एनडीए गठबंधन में एक भी सीट न मिले. 2019 के चुनाव में जेडीयू अकेले दम पर 14 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. *सिर्फ एक बार सरकार को मिला है पूर्ण बहुमत* 'न्यूज़ फास्ट' के अनुसार झारखंड में विधानसभा के अब तक 5 बार चुनाव हुए हैं, लेकिन सिर्फ एक बार ही किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत मिला है. नहीं तो 4 बार झारखंड में गठबंधन की ही सरकार बनी है. साल 2014 में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला था. झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं, जिसमें सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को 41 विधायकों की जरूरत होती है.