राहुल की भारत जोड़ो न्याय यात्रा का आज चौथा दिन, महाकाल की नगरी पहुंचकर करेंगे दर्शन

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भारत जोड़ो न्याय यात्रा का मध्य प्रदेश में आज चौथा दिन बताया जा रहा है। राहुल गांधी की न्याय यात्रा आज उज्जैन पहुंचने वाली है। राहुल गांधी सबसे पहले उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन करने वाले है। जिसके उपरांत महाकाल से देवास गेट तक रोड शो होने वाले है।

वहीं रोड शो के उपरांत राहुल गांधी सभा को संबोधित करने वाले है। राहुल गांधी के उज्जैन आगमन पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पूरी तैयारी भी कर चुकी है। आम सभा के बाद राहुल गांधी इंगोरिया के लिए रवाना होने वाले है। जहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन बड़नगर होते हुए बदनावर पहुंचने वाले है।

संकट में कांग्रेसः लगातार पार्टी से दूर हो रहे हैं बड़े चेहरे

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कांग्रेस इस वक्त सबसे बुरे दौर में हैं। कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की लिस्ट बहुत लंबी है। नेताओं में कांग्रेस छोड़ने की होड़ सी लगी हुई है। भारत जोड़ो यात्रा और अब भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए खोई साख हासिल करने में जुटी कांग्रेस अपने ही नेताओं को जोड़े रखने में विफल नजर आ रही है। महाराष्ट्र, असम,पश्चिम बंगाल के बाद अब गुजरात में भी दिग्गजों ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। गुजरात में अर्जुन मोढवाडिया, अंबरीश डेर ने कांग्रेस का हाथ झटक दिया। कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले अंबरीश डेर और सीनियर विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने मंगलवार को भाजपा का दामन थाम लिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल की मौजूदगी में अंबरीश डेर, वरिष्ठ विधायक अर्जुन मोढवाडिया और अन्य ने भाजपा की सदस्यता ली। बता दें कि कांग्रेस की गुजरात इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष अंबरीश डेर और वरिष्ठ विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने सोमवार को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का ‘बहिष्कार’ करने के पार्टी के निर्णय पर आक्रोश प्रकट करते हुए इस्तीफा दे दिया था।

पिछले चार महीनों में इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के तीसरे विधायक

कांग्रेस से जो लंबे समय से जुड़े हुए बड़े नेता थे, वे धीरे धीरे पार्टी से किनारा करने लगे हैं। लगातार कांग्रेस नेता नाराज होकर पार्टी का दामन छोड़ रहे हैं जो आने वाले चुनाव में कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। कांग्रेस छोड़ने का ताजा मामला गुजरात का है। 7 मार्च को राहुल गांधी की न्याय जोड़ो यात्रा गुजरात पहुंचेगी। लेकिन राहुल के गुजरात में कदम रखने से पहले ही कांग्रेस के लिए सोमवार को बुरी खबर आई। राज्य में कांग्रेस को अंबरीश डेर के बाद एक और बड़ा झटका दिग्गज नेता अर्जुन मोढवाडिया ने दिया। विधायक अर्जुन मोढवाडिया के इस्तीफे के साथ ही 182 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 14 रह गई है। मोढवाडिया पिछले चार महीनों में चिराग पटेल और सीजे चावड़ा के बाद इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के तीसरे विधायक हैं। पटेल ने दिसंबर और चावड़ा ने जनवरी में इस्तीफा दिया था।

लगातार कांग्रेस से दूर हो रहे हैं बड़े चेहरे

लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस को रोज एक न एक झटका लग रहा है। उसके नेता कब उसका साथ छोड़ दें पता नहीं चलता। जैसे ही कोई चुनाव शुरू होता है, उसी समय से नेताओं का कांग्रेस छोड़कर जाना शुरू हो जाता है। क्या गुजरात, क्या महाराष्ट्र, क्या मध्य प्रदेश, क्या कर्नाटक, सभी राज्यों से कांग्रेस के कई बड़े नेता या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या छोड़ने की अटकलें लग रही हैं। इससे पहले 28 फरवरी को कांग्रेस को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष राणा गोस्वामी और पश्चिम बंगाल कांग्रेस नेता कौस्तव बागची ने झटका दिया था। दोनों ही नेताओं ने काग्रेंस से नाता तोड़ लिया था। असम में गोस्वामी जोरहाट से विधायक थे। इससे पहले असम में कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ और बसंत दास ने अपने-अपने पार्टी पदों से इस्तीफा दिया था। इतना ही नहीं इन दोनों ही नेताओं ने भाजपा के विकास एजेंडे का समर्थन भी किया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण 13 फरवरी को मुंबई में भाजपा में शामिल हुए थे। महाराष्ट्र में कांग्रेस को छोड़ने वाले अन्य दिग्गजों में मिलिंद देवरा और बाबा सिद्दीकी भी का नाम भी शामिल है।

अंतर्कलह के कारण टूटती कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी के अंदर अभी जो हलचल है, वह हाल-फिलहाल से नहीं है। बल्कि अंतर्कलह की वजहों से काफी सालों से है, जिसको सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अब मल्लिकार्जुन खरगे तक रोकने में असक्षम दिख रहे हैं। सोनिया गांधी के साथी, कैप्टन अमरिंदर सिंह, गुलाम नबी आजाद (अलग पार्टी), रीता बहुगुणा जोशी, तो वहीं राहुल गांधी की लगभग टीम आज बीजेपी के साथ हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, सुष्मिता देव, प्रियंका चतुर्वेदी, जितिन प्रसाद, अशोक तंवर, आरपीएन सिंह, हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर, जैसे नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं। इसके अलावा अशोक चौधरी, हिमन्त बिश्व शर्मा, सुनील जाखड़, अश्वनी कुमार, जैसे बड़े नेता भी पार्टी को अलविदा कर चुके हैं।

एलन मस्क अब नहीं रहे दुनिया के सबसे अमीर शख्स, इस शख्स ने छीना ताज

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दुनियाभर के अमीरों की लिस्ट में बड़ी उलटफेर देखने को मिली है। एलन मस्क का दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का तमगा छिन गया है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, एक्स और टेस्ला जैसी दिग्गज कंपनियों के मालिक एलन मस्क अब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति नहीं रहे। टेस्ला इंक के शेयरों में 7.2% की गिरावट के बाद एलन मस्क ने सबसे अमीर शख्स की पोजिशन ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स में खो दी है। जिसके बाद दुनिया के सबसे अमीर शख्स होने का ताज अब किसी और बिजनेसमैन के पास चला गया है।

एलन मस्क से दुनिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन का खिताब जेफ बेजोस ने छीन लिया है। एलन मस्क की कुल संपत्ति 197.7 बिलियन है, जबकि बेजोस की कुल संपत्ति 200.3 अरब डॉलर है। 2021 के बाद से यह पहली बार है जब अमेजन के फाउंडर बेजोस ब्लूमबर्ग की सबसे अमीर लोगों की रैंकिंग में टॉप पर हैं।

52 साल के एलन मस्क और 60 साल के जेफ बेजोस के बीच संपत्ति का अंतर एक समय में 142 बिलियन डॉलर तक था, जो कि अमेजन और टेस्ला के शेयरों के बीच बढ़ते अंदर की वजह से यह भी कम हो गया है। दोनों ही कंपनियों के शेयर टॉप 7 शेयरों में शामिल हैं, जिन्होंने अमेरिकी इक्विटी बाजारों को भी इंन्फ्लूएंस किया है। टेस्ला अपने 2021 के पीक से करीब 50% डाउन है।

टेस्ला के शेयरों में सोमवार को गिरावट देखी गई। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, शंघाई में उसके कारखाने से शिपमेंट एक साल से ज्यादा समय में सबसे निचले स्तर पर आ गया। इस बीच, अमेजॉन कोरोना महामारी की शुरुआत से ही ऑनलाइन बिक्री में अव्वल रहा है। जेफ बेजोस की संपत्ति का बड़ा हिस्सा अमेजन में उनकी 9% हिस्सेदारी की वजह से है। पिछले महीने करीब 8.5 बिलियन डॉलर के 50 मिलियन शेयर अनलोडिंग के बाद भी, अमेजन ऑनलाइन रिटेलर में सबसे बड़ा शेयर होल्डर है.। जेफ बेजोस के लिए संपत्ति की धन रैंकिंग में शीर्ष पर जगह बनाना कोई नई बात नहीं है।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान का प्रधानमंत्री चुने जाने पर शहबाज शरीफ को दी बधाई, जानें क्या कहा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहबाज शरीफ को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद बधाई दी है। शहबाज शरीफ ने सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह 2022 के बाद दूसरी बार देश की बागडोर संभाल रहे हैं।बता दें कि पाकिस्तान में हाल ही में आम चुनाव संपन्न हुए। इसमें काफी उठापटक के बाद शाहबाज शरीफ का पीएम बनना तय हुआ। वहीं शहबाज शरीफ ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर दूसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पाकिस्तान के नए पीएम शहबाज शरीफ को बधाई दी है। पीएम मोदी ने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए एक्स पर शहबाज को बधाई संदेश दिया। पीएम मोदी ने लिखा, "शहबाज शरीफ को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए बधाई।"

शहबाज शरीफ ने सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह 2022 के बाद दूसरी बार देश की बागडोर संभालेंगे। शहबाज ने दूसरी बार ऐसे समय में पाकिस्तान की बागडोर संभाली है, जब देश आर्थिक बदहाली का सामना कर रहा है। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने राष्ट्रपति भवन ‘ऐवान-ए-सद्र’ में आयोजित एक समारोह में 72 वर्षीय शहबाज को पद की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण से पहले शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी नेशनल असेंबली में अपने पहले संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाया और इसकी तुलना फिलिस्तीन से की थी। शहबाज ने नेशनल असेंबली से कश्मीरियों और फिलिस्तीनियों के लिए एक प्रस्ताव पारित करने का भी आह्वान किया। शहबाज शरीफ ने जम्मू कश्मीर को लेकर कई दावे किए। उन्होंने कहा, 'कश्मीर में कश्मीरियों के खून बहाए जा रहे हैं और वादी खून से सुर्ख हो गई है।' शरीफ ने इंटरनेशनल कम्युनिटी पर हमला बोलते हुए कहा, 'लेकिन फिर भी दुनिया के होंठ सिले हुए हैं।' शहबाज ने विपक्षी सांसदों से 'फिलिस्तीन और कश्मीर की आजादी' के लिए साथ मिलकर काम करने की अपील भी की. जिसमें फिलिस्तीन और कश्मीर में 'जुल्म' के खिलाफ एक प्रस्ताव पास करने का जिक्र हुआ।

बता दें कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के लिए हुए पिछले महीने हुए चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। इसके बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने गठबंधन कर सरकार बनाने की कोशिश की, लेकिन पीएम पद किसके पास रहेगा इसे लेकर भी तनातनी बनी रही। उसके बाद रविवार यानी 3 मार्च को दोनों पार्टियों के बीच पीएम पद के लिए वोटिंग हुई। जिसमें पीएमएल-एन के वरिष्ठ नेता शहबाज शरीफ ने जीत हासिल की. अब शरीब पाकिस्तान की गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे

इजराइल पर लेबनान से दागी गई मिसाइल, चपेट में आए 3 भारतीय, एक ने गंवाई जान

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इजराइल और हमास के बीच पांच महीने से ज्यादा समय से जंग जारी है। दोनों पक्षों के बीच अब तक युद्धविराम की कोशिशें लगातार नाकाम रही हैं। इस बीच इजराइल को गाजा पट्टी में हमास के साथ-साथ लेबनान की तरफ से हिजबुल्ला के हमलों का भी सामना करना पड़ रहा है। इस बीच इजरायल में एक बार फिर से बमबारी हुई है। इजराल के उत्तरी इलाके में लेबनान से एक एंटी-टैंक मिसाइल दागी गई है, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए है। अधिकारियों के मुताबिक, लेबनान की तरफ से दागी गई एंटी-टैंक मिसाइल से इजराइल के उत्तरी सीमा के पास मारगैलियॉट में एक बाग को निशाना बनाया गया।

इजरायली रेस्क्य सर्विस मैगन डेविड एडोम के प्रवक्ता जकी हेलर ने बताया कि हिजबुल्लाह ने एंटी-टैंक मिसाइल से सोमवार सुबह करीब 11 बजे (स्थानीय समयानुसार) इजराइल के उत्तर में गैलील क्षेत्र में मोशव (सामूहिक कृषि समुदाय) मार्गालियट में एक बागान पर हमला किया। इस मिसाइल हमले में केरल के कोल्लम के पटनीबिन मैक्सवेल की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि घटना में बुश जोसेफ जॉर्ज और पॉल मेल्विन भी घायल हो गए और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि जॉर्ज को चेहरे और शरीर पर चोट आने के बाद बीलिनसन अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसका एक ऑपरेशन किया गया है। वह चोटों से उबर रहा है और उसे निगरानी में रखा गया है। वह भारत में अपने परिवार से बात कर सकता है।

प्रवक्ता के मुताबिक, वहीं, इस हमले में बुश जोसेफ जॉर्ज और पॉल मेल्विन घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पतालों में ले जाया गया। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि चेहरे और शरीर पर चोट लगने के बाद जॉर्ज को पेटा टिकवा के बेलिन्सन अस्पताल ले जाया गया। उनका ऑपरेशन किया गया, उनकी हालत में सुधार हो रहा है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। वह भारत में अपने परिवार से बात कर सकते हैं।

घायल हुए दूसरे शख्स पॉल मेलविन को हल्की चोटें आईं और उन्हें इस्राइल के साफेद शहर के जिव अस्पताल में ही रखा गया है। वह केरल के इदुक्की जिले से आते हैं। इससे पहले इस्राइली एजेंसी ने कहा था कि इस घटना में एक विदेशी नागरिक की मौत हुई है, जबकि सात अन्य घायल हुए हैं।

पटना में बैठे जान सकेंगे प्रदेश के सभी प्रखंडों की वायु गुणवत्ता, निगरानी सेंसर के लिए एक एकीकृत डैशबोर्ड करने लगा काम

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पटना : राजधानी पटना में बैठकर प्रदेश के सभी प्रखंडों की वायु की गुणवत्ता की जानकारी मिलेगी। राज्य के सभी प्रखंडों में अब वायु गुणवत्ता, निगरानी सेंसर के लिए एक एकीकृत डैशबोर्ड काम करने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को इसका अनावरण किया। इस दौरान सीएम ने 108 करोड़ की पार्क, ईको टूरिज्म, भूजल संरक्षण समेत आधारभूत संरचना विकास की 26 योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा पूर्णिया और भागलपुर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के उद्घाटन के साथ बिहार की जलवायु अनुकूल एवं न्यून कार्बन प्रारूप रणनीति का लोकार्पण किया गया। वायु जलवायु कार्य से जुड़ा बिहार घोषणा पत्र भी जारी किया गया। 

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सहयोग से आईआईटी कानपुर द्वारा स्वदेशी तकनीक से ग्रामीण क्षेत्रों में परिवेशीय वायु गुणवत्ता संकेतकों की निगरानी के लिए उन्नत तकनीकों पर उत्कृष्टता केन्द्र के तत्वावधान में एक परियोजना प्रारंभ की गयी है। इस के तहत सभी 534 प्रखंड कार्यालयों में इंटरनेट ऑफ थिंग्स सर्वश्रेष्ठ सेंसर परिवेशीय वायु गुणवत्ता मॉनिटर लगाए गए हैं। एक डाटा विजुएलाइजेशन डैशबोर्ड विकसित किया गया है।

आखिर पवन सिंह ने आसनसोल से क्यों वापस ली उम्मीदवारी? टिकट मिलने के 24 घंटे के अंदर नाम वापस लिया

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लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। बीजेपी ने शनिवार को 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेश की 195 सीटों पर कैंडिडेट के नाम का ऐलान कर दिया। बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में भोजपुरी गायक पवन सिंह को पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। बीजेपी की ओर से आसनसोल सीट से उनके नाम का ऐलान किया था तो उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया में पोस्ट करते हुए बीजेपी आलाकमान को धन्यवाद दिया।हालांकि, दूसरे दिन ही उन्होंने कहा कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की वजह नहीं बतायी है, लेकिन ट्वीट करके जरूर कहा कि किसी कारणवश चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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आखिर 24 घंटे से भी कम समय में ऐसा क्या हो गया कि पवन सिंह ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। पवन सिंह की उम्मीदवारी वापिस लिए जाने को लेकर अभी तक पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि उनके चुनाव मैदान से पीछे हटने की बड़ी वजह अब सामने आने गई है। पवन के इस तरह से पीछे हटने की वजह बंगाल भाजपा नेताओं का दबाव है। पवन सिंह को टिकट मिला तो इसका विरोध पार्टी के अंदर ही हुआ और कई नेताओं ने पवन सिंह को हटाने के लिए अमित शाह और जेपी नड्डा को लेटर लिख दिया। पार्टी नेताओं का मानना है कि पवन सिंह को टिकट मिलने से महिलाओं के खिलाफ अत्याचार पर स्टैंड कमजोर पड़ जाता। वो भी ऐसे समय में जब बीजेपी संदेश खाली में महिलाओं के खिलाफ हुए अत्याचार के लिए मोर्चा खोले हुए है। उनका टिकट बंगाल बीजेपी के नेताओं के कहने पर ही पार्टी हाईकमान ने वापस ले लिया है। 

वहीं, पवन सिंह को टिकट मिलने के बाद से ही टीएमसी ने भोजपुरी गायक की उम्मीदवारी को लेकर हमला बोल दिया था। तृणमूल कांग्रेस ने पवन सिंह के जरिये बीजेपी पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है। पार्टी समर्थकों का कहना था कि पीएम मोदी एक तरफ तो नारी शक्ति के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वहीं दूसरी तरफ स्त्री द्वेषी, महिला के साथ दुर्व्यवहार करने वाले को चुनाव मैदान में उतारते हैं। पवन सिंह के खिलाफ अपनी पत्नी के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था। इतना ही नहीं एक मशहूर भोजपुरी अभिनेत्री के साथ उनके दुर्व्यवहार की खबरें भी मीडिया में सुर्खियां बनी थीं। 

टीएमसी का कहना था कि बंगाल की महिलाएं आपको करारा जवाब देंगी। विपक्षी दल पवन सिंह को बंगाल से बाहर रखने की मांग कर रहे थे। बंगाल में पवन सिंह के महिला विरोधी, अश्लील गानों को लेकर भी विरोध हो रहा था। भोजपुरी में पवन सिंह ने बंगाली महिलाओं को लेकर कुछ गीत और एल्बम बनाए हैं। उनको लेकर वे लगातार आलोचना का सामना कर रहे थे। विरोधियों का कहना था कि पवन सिंह ऐसे वीडियो बनाते हैं जो बेहद अश्लील, स्त्री विरोधी और स्त्रीद्वेषी होते हैं। अपने वीडियो में वे बंगाल की महिलाओं को निशाना बनाते हैं। टीएमसी की नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने 'हम हसीना बंगाल के' गाने के साथ पवन सिंह की उम्मीदवारी पर सवाल खड़े किए थे।

बता दें कि पवन सिंह भोजपुरी फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्रीज में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पवन सिंह का बहुत बड़ा फैनबेस है। पवन सिंह की लोकप्रियता का आलम यह है कि उनका गाना यूट्यूब पर रिलीज होते ही एक ही दिन में चार से पांच मिलियन व्यूज बटोर लेता है। भोजपुरी के दबदबे को इस बात से समझा जा सकता है कि भाजपा ने अब तक चार भोजपुरी अभिनेताओं पर दांव लगाया है। उसमें से तीन दिनेश लाल यादव निरहुआ, मनोज तिवारी और रवि किशन पहले से ही भाजपा के सांसद हैं। मनोज तिवारी जैसे भोजपुरी गायक और अभिनेता ना सिर्फ दिल्ली से लोकसभा का चुनाव जीतते हैं बल्कि दिल्ली में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। यही वजह है कि भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह को भाजपा ने पश्चिम बंगाल के आसनसोल सीट से चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की है। हालांकि बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिर गया।

इसरो चीफ एस सोमनाथ को कैंसर, आदित्य एल-1 लॉन्च वाले दिन चला पता

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस सोमनाथ कैंसर से पीड़ित हैं।सोमनाथ को कैंसर होने का उस दिन पता चला, जिस दिन भारत का आदित्य-एल1 मिशन अंतरिक्ष में लॉन्च हुआ था।हालांकि, वो घबराए नहीं और अपना इलाज करवा शुरू किया। एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में सोमनाथ ने खुद इसका खुलासा किया है।

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‘टारमक मीडिया हाउस’ के साथ एक इंटरव्यू में सोमनाथ ने पुष्टि की है कि स्कैन में से एक कैंसर में बढ़ोतरी देखी गई थी। सोमनाथ ने कहा कि ‘चंद्रयान-3 मिशन लॉन्च के दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं। हालांकि, उस समय यह मेरे लिए साफ नहीं था, मुझे इसके बारे में साफ समझ नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनको कैंसर का पता उसी दिन चला था, जिस दिन आदित्य-एल1 मिशन लॉन्च किया गया था। यह डाइग्नोसिस न केवल उनके लिए बल्कि उनके परिवार और सहकर्मियों के लिए भी एक झटका था, जो इस चुनौतीपूर्ण अवधि में उनके साथ थे। 

2 सितंबर 2023 को भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य एल-1 ने अपनी यात्रा शुरू की थी। इसी दिन एस सोमनाथ रूटीन चेकअप के लिए गए थे। इसी दौरान उनके पेट में कैंसर का पता चला।इस बीमारी की जानकारी मिलने के बाद वो चेन्नई गए ताकि और भी जांच की जा सके। वहां भी उनके कैंसर होने की पुष्टि हुई। उनके सामने प्रोफेशनल के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौती भी सामने आ गई थी। कीमोथेरेपी के बाद एस सोमनाथ का एक ऑपरेशन भी हुआ था।

अस्पताल में केवल चार दिन बिताने के बाद उन्होंने पांचवें दिन से बिना किसी दर्द के काम करते हुए इसरो में अपनी ड्यूटी फिर से शुरू कर दी। सोमनाथ ने बताया कि मैं लगातार मेडिकल चेकअप्स और स्कैन करवा रहा हूं। लेकिन अब मैं पूरी तरह से ठीक हो चुका हूं। अपना काम और इसरो के मिशन और लॉन्च को पर पूरा ध्यान है। इसरो के आगे के सारे मिशन पूरा करके ही दम लूंगा।

सुप्रीम कोर्ट से “आप” को झटका, राउज एवेन्यू वाला पार्टी कार्यालय खाली करने का निर्देश, 15 जून तक की मोहलत

#supreme_court_directed_to_vacate_aap_delhi_office

आम आदमी पार्टी (आप) को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आप को राउज एवेन्यू में अपना कार्यालय खाली करने का निर्देश दिया है।पार्टी को दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित दफ्तर 15 जून तक खाली करना होगा। कोर्ट ने माना कि आप कार्यालय राउज एवेन्यू कोर्ट की जमीन पर बना है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि यह जमीन दिल्‍ली हाई कोर्ट को आवंटित की गई थी।

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सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए आप को 15 जून तक की मोहलत दी है। कोर्ट ने कहा कि आप का वर्तमान कार्यालय जिस भूमि पर बना है उस पर पार्टी के पास कोई कानूनी अधिकारी नहीं है। यह दिल्ली हाईकोर्ट को दी गई जमीन पर बनाया गया है। इस भूमि का उपयोग राउज एवेन्यू कोर्ट के विस्तार के लिए होना है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप को उस जमीन पर बने रहने का कोई कानूनी हक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पार्टी चाहे तो ऑफिस के लिए लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस से जमीन आवंटित करने का आवेदन कर सकती है। अदालत ने लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस से चार हफ्तों के भीतर अपने फैसले की जानकारी आप को देने को कहा है।

आप की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि ‘आप’ देश की छह राष्ट्रीय पार्टियों में से एक है। सिंघवी ने कहा, वे हमें बता रहे हैं कि एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में हमें कुछ नहीं मिलता है। मुझे पार्टी ऑफिस के लिए बदरपुर दिया गया है, जबकि बाकी सभी लोग बेहतर स्थानों पर हैं।अदालत ने कहा, आगामी आम चुनावों के मद्देनजर, हमें परिसर खाली करने के लिए 15 जून, 2024 तक का समय दिया गया है ताकि जिला न्यायपालिका का विस्तार करने के लिए आवंटित भूमि का उपयोग शीघ्र आधार पर किया जा सके।

लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त बीजेपी, तीसरे कार्यकाल के शुरुआती 100 दिन के एजेंडे पर मंथन

#pm_narendra_modi_confident_100_day_agenda_before_election 

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आने वाले महीनों में लोकसभा चुनाव होने हैं। हालांकि, अब तक चुनाव की तारीखें घोषित नहीं हुई है। उससे पहले सभा राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार से लेकर सीटों पर मंतन के साथ लिस्ट भी जारी करने शुरू कर दिया हैं। इन सबसे इतर अपने जीत को लेकर फुल कॉन्फिडेंस में दिख रही बीजेपी ने रविवार को प्रधानमंत्री मोदी अगली सरकार के शुरुआती 100 दिन के एजेंडे, अगले 25 साल के 'विकसित भारत 2047' के विजन डॉक्यूमेंट और अगले पांच साल के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर आठ घंटे तक मंथन किया।

लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपानीत एनडीए सरकार की सत्ता में वापसी के प्रति आश्वस्त हैं। यही वजह है कि अगली सरकार के शुरुआती 100 दिन के एजेंडे, अगले 25 साल के 'विकसित भारत 2047' के विजन डॉक्यूमेंट और अगले पांच साल के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर आठ घंटे तक मंथन चला। सरकार के सूत्रों ने बताया कि बैठक में मई में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद के पहले 100 दिन के अजेंडे पर भी चर्चा की गई। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में आम चुनाव से पहले यह आखिरी बैठक बताई जा रही है। मोदी ने पहले ही सभी मंत्रियों को 100 दिन के एक्शन प्लान और अपने-अपने मंत्रालय के पांच साल के रोडमैप के साथ आने को कहा था। मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद की आखिरी बैठक में कई मंत्रालयों के सचिवों ने प्रजेंटेशन दिया।

मोदी ने भी करीब एक घंटे के अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत की झलक अगले पूर्ण बजट में दिखाई देगी, जो जून में पेश होगा। मोदी ने अपनी सरकार की 10 साल की सफलताओं, भविष्य की प्राथमिकताओं और लक्ष्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

बीजेपी के विकसित भारत का ये रोडमैप दो साल की गहन तैयारी के बाद तैयार किया गया है। इसके लिए सभी मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शिक्षाविदों, उद्योग निकायों, नागरिक समाज, वैज्ञानिक संगठनों से चर्चा की गई। इसके लिए 2700 से अधिक बैठकें, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित किए गए। सरकार को 20 लाख से ज्यादा युवाओं के सुझाव प्राप्त हुए। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों में आर्थिक विकास, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी), जीवन में आसानी, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसमें प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य जीरो गरीबी, प्रशिक्षित युवा और शत प्रतिशत लाभार्थी का उद्देश्य शामिल है।

इस दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों को कहा कि जाइए और जीत कर आइए, फिर जल्दी मिलेंगे। उन्होंने मंत्रियों को आगाह किया कि ज्यादा बोलने से परहेज करें। जो भी बयान दें, सोच-समझ कर दें। आजकल डीप फेक का चलन है, जिसमें आवाज बदल दी जाती है। चुनाव के समय लोगों से मिलते-जुलते समय सतर्क रहें। जो भी बोलना है, योजनाओं पर बोलें। विवादित बयानों से बचें।