रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड में हुए भूस्खलन हादसे में लापता दो लोगों के शव और बरामद, 16 की तलाश में रेस्क्यू अभियान जारी

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 रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड भूस्खलन हादसे में लापता 18 लोगों में से आज शनिवार को दो शव बरामद हुए हैं। इनमें से एक शव महिला का और एक युवती का है, जिनकी शिनाख्त की जा रही है। बीते 3 अगस्त की रात्रि लगभग 11.30 बजे गौरीकुंड डाटपुल के समीप भारी भूस्खलन से हाईवे किनारे बनी तीन दुकानें भी बह गई थी जिसमें 23 लोग बह गए थे। जिनकी तलाश में गौरीकुंड में रेस्क्यू अभियान जारी है। 

वहीं गौरीकुंड भूस्खलन हादसे में लापता नेपाली मूल के 14 लोगों के बारे में जिला प्रशासन ने नेपाल दूतावास से भी उनके बारे में जानकारी मांगी है। साथ ही पुलिस से भी यात्रा के दौरान बाहरी लोगों के सत्यापन के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है। भूस्खलन हादसे के छह दिन बाद भी नेपाली मूल व अन्य सहित कुल 20 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया।

मलबे में दबी कार, पांच की मौत

वहीं रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर बृहस्पतिवार को आए मलबे में दबी कार में पांच लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त वाहन के अंदर से पांचों के शव बरामद किए गए हैं। राजमार्ग का 80 मीटर से अधिक हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त है। इस कारण दूसरे दिन भी यातायात बहाल नहीं हो पाया है।

शुक्रवार सुबह छह बजे से ही राजमार्ग पर भूस्खलन प्रभावित हिस्से में मलबा सफाई का काम शुरू हो गया था। दोनों तरफ से जेसीबी मशीनों से मलबे के साथ भारी बोल्डरों को तोड़कर साफ किया जा रहा था। शाम पांच बजे मलबा हटाते समय एक वाहन भी दिखाई दिया। एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, पुलिस और होमगार्ड के जवानों ने प्रभावित हिस्से में रेस्क्यू शुरू करते हुए मलबे की सफाई कर वाहन को निकाला। बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कार के अंदर से पांच शव बरामद किए गए।

हिट एंड रन के मामलों में 10 साल की जेल, जानिए, हादसों में होने वाली मौतें रोकने के लिए केंद्र सरकार ने किया प्रावधान

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 हिट-एंड-रन मामलों पर अंकुश लगाने के प्रयास में, सरकार ने देश में आपराधिक कानूनों में बदलाव के तहत एक नया प्रावधान प्रस्तावित किया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) को प्रतिस्थापित करने के लिए लाइ गई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की एक धारा, उन ड्राइवरों के लिए 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान करती है जो दुर्घटना के बाद घटनास्थल से भाग जाते हैं या पुलिस या मजिस्ट्रेट को घटना की रिपोर्ट करने में विफल रहते हैं। 

प्रस्तावित कानून की धारा 104(2) कहती है कि, 'जो कोई लापरवाही से या गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आने वाला कोई भी काम करके किसी व्यक्ति की मौत का कारण बनता है और घटना स्थल से भाग जाता है या घटना की रिपोर्ट, पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को जल्द करने में विफल रहता है, घटना के बाद, दस साल तक की जेल की सज़ा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।' सरकार ने तेज गति और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई मौत के लिए काफी लंबी जेल की सजा का भी प्रस्ताव रखा है, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आएगा। संहिता की धारा 104(1) में IPC की धारा 304ए के तहत दो साल की तुलना में सात साल तक की जेल की सजा का प्रस्ताव है। दोनों धाराओं में अपराधियों पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।

बता दें कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में सड़क दुर्घटनाओं में 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान चली गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 कैलेंडर वर्ष में कुल 4.12 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.54 लाख लोगों की जान चली गई और 3.84 लाख लोग घायल हो गए। इसमें बताया गया है कि जहां 2019 की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 8.1% की कमी आई और चोटें 14.8% कम हुईं, वहीं मृत्यु दर में 1.9% की वृद्धि हुई। 

वहीं, दहेज हत्या के मामलों के लिए, संहिता में IPC के समान ही शब्द और सजा बरकरार रखी गई है। प्रस्तावित संहिता की धारा 79 में कम से कम सात साल की जेल की सजा का प्रावधान है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। यह IPC की धारा 304बी के समान है। ब्रिटिश शासनकाल के आपराधिक कानूनों में बदलाव के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने कल लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए। आपराधिक प्रक्रिया संहिता को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BS) को भारतीय साक्ष्य द्वारा प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव है। तीनों विधेयकों को स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है।

वर्ष 2017 के बाद से उत्तरप्रदेश में हुए 183 कथित मुठभेड़ों (एनकाउंटर्स ) के मामलों की जांच कहां तक पहुंची, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को विस्तृ

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह बताने के लिए कहा है कि 2017 के बाद से राज्य में हुई 183 कथित मुठभेड़ों से संबंधित मामलों की जांच कहां तक पहुंची है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को इन सभी मामलों के जांच की स्थिति को लेकर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस एस. आर. भट्ट और अरविंद कुमार की पीठ ने पूर्व सांसद व यूपी के बाहुबली नेता अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ की पुलिस हिरासत में हुई हत्या की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया है। पीठ ने राज्य सरकार से यह भी जानना चाहा कि मुठभेड़ के मामलों में पुलिस शीर्ष अदालत और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर रही है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दाखिल याचिका पर यह निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पांच-दस लोगों की सुरक्षा में अतीक अहमद की हत्या की घटना पर भी सवाल उठाया और कहा कि कोई कैसे आकर गोली मार सकता है? पीठ ने इस हत्याकांड में किसी की मिलीभगत पर भी संदेह जताया है। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने पीठ को बताया कि अतीक और उनके भाई की पुलिस हिरासत में हत्या के मामले में संबंधित अदालत में आरोप-पत्र दाखिल कर दी गई है।

याचिकाकर्ता विशाल तिवारी द्वारा दाखिल याचिकाओं में से एक में कहा गया है कि पुलिस मौजूदगी के बीच अतीक और उनके भाई अशरफ की हत्या की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जानी चाहिए। अतीक और उनके भाई की 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में पुलिस हिरासत के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

आयशा ने भतीजे असद के लिए डाली याचिका

एक अन्य याचिका गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद और अशरफ अहमद की बहन ने दाखिल की है। अतीक अहमद की बहन आयशा नूरी ने अपनी याचिका में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश या एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा मामले की व्यापक जांच की मांग की गई। उन्होंने अपने भतीजे और अतीक अहमद के बेटे की मुठभेड़ में हत्या की भी जांच की मांग की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में अतीक अहमद की मौत के मामले में शीर्ष अदालत में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है। इसमें शीर्ष अदालत को बताया गया कि पुलिस सुधार और आधुनिकीकरण के उपाय चल रहे हैं और कठोर अपराधियों को आसानी से भागने से रोकने के लिए हथकड़ी लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

आधुनिकीकरण प्रक्रिया से गुजर चुका पुलिस विभाग : यूपी

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि उसका पुलिस विभाग व्यापक आधुनिकीकरण प्रक्रिया से गुजर चुका है। इसमें मध्यम आकार की जेल वैन, ड्रोन, शरीर पर पहने जाने वाले कैमरे, पोस्टमार्टम किट, महिलाओं के लिए पूर्ण शरीर रक्षक, रेडियो उपकरण, सुरक्षा उपकरण, एटीएस से संबंधित उपकरण और विभिन्न वाहनों का अधिग्रहण शामिल है। ये अधिग्रहण भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों द्वारा अनुमोदित अनुदान के माध्यम से संभव हुए हैं।

जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा..', निलंबित होने पर बोले कांग्रेस सांसद अधीर रंजन, धृतराष्ट्र और भगोड़े नीरव मोदी से की थी PM की तुलना

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 'अनियंत्रित व्यवहार' को लेकर लोकसभा से निलंबित किए जाने के एक दिन बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को कहा कि उनकी टिप्पणी का मकसद, ''किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था।'' कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह सदन में अपनी दलीलें स्पष्ट रूप से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर वह ''सुप्रीम कोर्ट'' का रुख कर सकते हैं। चौधरी ने कहा, ''किसी को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि खुद को अभिव्यक्त करने के लिए इसका इस्तेमाल किया।''

दरअसल, मणिपुर हिंसा पर अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना भगोड़े अरबपति नीरव मोदी और धृतराष्ट्र से की थी। भारी आक्रोश के बाद इन टिप्पणियों को सदन के रिकॉर्ड से हटा दिया गया था। अब निलंबित होने के बाद अधीर रंजन ने एक प्रेस वार्ता में कहा है कि, 'मेरा इरादा अपने तर्कों को स्पष्ट रूप से रखना और जो कुछ भी मेरे मन में आया उसे व्यक्त करना था। क्या यह गलत था?'' उन्होंने आगे कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो मैं सुप्रीम कोर्ट जा सकता हूं।'

अधीर रंजन ने कहा कि, 'यह एक नई घटना है जिसे हमने संसद में अपने करियर में पहले कभी अनुभव नहीं किया है,यह विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सत्तारूढ़ दल द्वारा एक जानबूझकर की गई योजना है, यह संसदीय लोकतंत्र की भावना को कमजोर करेगा।' बता दें कि, भाजपा नेता प्रल्हाद जोशी द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव को लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद चौधरी को निलंबित कर दिया गया था। वह तब तक निलंबित रहेंगे जब तक विशेषाधिकार समिति इस मामले पर अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती। इस बीच, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चौधरी का निलंबन ''कमजोर आधार'' पर है। उनका बचाव करते हुए, खड़गे ने दावा किया कि चौधरी ने केवल "नीरव मोदी" कहा था और नीरव का अर्थ "शांत" है।

बलात्कार के मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान, डिटेल में जानिए नए आपराधिक कानूनों में सरकार ने क्या - क्या बदला ?


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 केंद्र सरकार द्वारा ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता (IPC) को बदलने के लिए शुक्रवार को संसद में पेश किए गए विधेयक में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए दंड को और अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें सामूहिक बलात्कार के लिए अधिकतम सजा के रूप में मौत की सजा की परिकल्पना की गई है। नाबालिग, और शादी के झूठे बहाने या नौकरी या पदोन्नति जैसे प्रलोभन देकर किसी महिला को यौन संबंध बनाने के लिए बरगलाने के कृत्य को एक अलग 'अपराध' के रूप में चिह्नित किया गया है।

प्रस्तावित कानून के तहत, जो IPC की जगह लेगा, 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी, जिसका अर्थ है उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन के लिए कारावास, और जुर्माना, या फिर अपराध की गंभीरता के हिसाब से मौत की सजा। बता दें कि, IPC में, नाबालिगों के सामूहिक बलात्कार से संबंधित प्रावधानों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है - जहां पीड़िता की उम्र 12 वर्ष से कम है और जहां उसकी उम्र 16 वर्ष से कम है। 12 साल से कम उम्र की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के अपराध के लिए IPC के तहत अधिकतम सजा मौत की सजा है, लेकिन 12 से 16 साल की लड़की के खिलाफ अपराध के लिए अधिकतम सजा आजीवन कारावास है।

इन आयु उपवर्गीकरणों को दूर करते हुए, भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023 में कहा गया है कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के खिलाफ सामूहिक बलात्कार के अपराध में अपराध में शामिल सभी लोगों को मृत्युदंड मिल सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इसे जांच के लिए संसदीय पैनल के पास भेजा जाएगा। प्रस्तावित कानूनों ने महिलाओं के साथ झूठ बोलकर, धोखा देकर, लालच देकर, पहचान छुपाकर यौन संबंध बनाने के कृत्यों को दंडित करने के लिए एक अलग अपराध भी निर्धारित किया है, और इस अपराध के लिए 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। 

विधेयक की धारा 69 में कहा गया है कि: "जो कोई भी, धोखे से या किसी महिला से शादी करने का वादा करता है, उसे पूरा करने के इरादे के बिना, और उसके साथ यौन संबंध बनाता है, तो ऐसा यौन संबंध बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। लेकिन, अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।'' इस धारा का "स्पष्टीकरण" बताता है कि आपराधिक "कपटपूर्ण साधनों" में रोजगार या पदोन्नति का झूठा वादा, प्रलोभन देना या पहचान छिपाकर शादी करना शामिल होगा।

वहीं, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार से संबंधित अन्य प्रावधानों को समान दंड के साथ नए कानून के तहत बरकरार रखा गया है। इसी तरह, 2023 बिल के तहत यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, ताक-झांक और पीछा करने सहित महिलाओं के खिलाफ विभिन्न अन्य अपराधों के लिए परिभाषाएं और दंड समान रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले को लागू करते हुए, प्रस्तावित कानून पति को बलात्कार के आरोप से छूट देने के लिए पत्नी की न्यूनतम आयु 15 से बढ़ाकर 18 वर्ष कर देता है। 2017 में, शीर्ष अदालत ने धारा 375 के अपवाद 2 में इस हद तक हस्तक्षेप किया कि अगर पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम न हो तो पतियों को बलात्कार के आरोप के तहत मुकदमा चलाने से सुरक्षा मिल गई। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपवाद खंड को पढ़ते हुए कहा कि प्रतिरक्षा वैध होने के लिए पत्नी की उम्र IPC के तहत उल्लिखित 15 वर्ष के बजाय 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। विधेयक IPC की धारा 377 को भी हटा देता है, जो समलैंगिकता को आजीवन कारावास तक की सजा वाला अपराध बनाती थी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट की 2018 की संविधान पीठ के फैसले से लिया गया है, जिसमें सहमति से वयस्कों के बीच समलैंगिक यौन संबंध को अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया था।

निलंबन के बाद राघव चड्ढा ने ट्विटर पर बदला बायो, खुद को बताया “सस्पेंडेंड राज्यसभा सांसद” फर्जी हस्ताक्षर मामले में गिरी है गाज

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आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया है। राघव चड्ढा राज्यसभा से निलंबित होने के बाद काफी गुस्से में हैं। उन्होंने अपना गुस्सा अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए जाहिर किया है।निलंबन के बाद अब राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर अपना बायो चेंज कर लिया है। राघव चड्ढा ने अपना बायो चेंज कर के सस्पेंडेड सांसद रख दिया है। इससे पहले राघव चड्ढा के बायो में केवल सांसद ही लिखा था। बता दें कि शुक्रवार को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट आने तक सांसद राघव चड्ढा को सदन से निलंबित किया गया है। चड्ढा पर नियमों के घोर उल्लंघन, कदाचार, अपमानजनक रवैये और अवमाननापूर्ण आचरण करने का आरोप है।

चड्‌ढा ने की थी वीडियो जारी

वहीं, निलंबन के बाद राघव चड्‌ढा ने वीडियो रिलीज करते हुए बीजेपी पर भी निशाना साधा था। वीडियो रिलीज करते हुए राघव चड्‌ढा ने कहा- नमस्कार... मैं सस्पेंडेड राज्यसभा सांसद राघव चड्डा। जी हां, मुझे राज्यसभा से आज सस्पेंड कर दिया गया है। मुझे क्यों निलंबित किया गया? मेरा क्या अपराध है? क्या मेरा ये अपराध है कि मैंने संसद में खड़े होकर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के सबसे बड़े नेताओं से सवाल पूछ लिए?क्या इन्हें ये दर्द सताता है कि कैसे ये 34 साल का युवा संसद में खड़ा होकर हमें ललकारता है। ये बहुत शक्तिशाली लोग हैं। ये किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसी मानसून सत्र में AAP के 3 सांसदों को सस्पेंड किया गया है।

मुझ पर कीचड़ उछालकर बदनाम करने की कोशिश

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि मैं शहीदे आजम की धरती से आता हूं। विशेषाधिकार समिति द्वारा बुलाए जाने पर अपना पक्ष पूरी मजबूती से पक्ष रखूंगा। समिति को बताउंगा कि मैंने किसी सांसद के सिग्नेचर का दुरुपयोग नहीं किया है। रूल के हिसाब से मैंने कुछ सांसदों का नाम सेलेक्ट कमेटी के सामने प्रस्तावित किया था। रूल बुक के हिसाब से ऐसा करना मेरा अधिकार है। इसके लिए किसी सांसद के लिखित या सिग्नेचर की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे में नाम प्रस्तावित करने में गलत क्या है? बीजेपी वाले मनगढंत आरोप लगा रहे हैं। मुझ पर कीचड़ उछालकर बदनाम करना चहते हैं। इससे आगे वह कहते हैं कि विशेषाधिकार समिति ने मुझे से पहले पूर्व पीएम इंदिरा गांधी, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की थी। इसके बावजूद मैं किसी से डरता नहीं। मैं विशेषाधिकार समिति का डटकर सामना करूंगा। इसके आगे वो कहते हैं सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है। 

क्या है मामला?

राज्यसभा में 7 अगस्त को दिल्ली सर्विस बिल पास किया गया था। सदन की कार्यवाही के दौरान AAP सांसद राघव चड्ढा ने इस बिल को सिलेक्ट कमेट के पास भेजना का प्रस्ताव भेजा। उन्होंने इस कमेटी के लिए कुछ सांसदों के नामों का भी प्रस्ताव दिया। हालांकि, प्रस्तावित किए गए सदस्यों में से 5 सांसदों ने कहा कि राघव चड्ढा ने बिना उनकी सहमति के उनका नाम लिया जो कि सही नही हैं। सभी सांसदों ने इस पर अपनी शिकायत भी दर्ज कराई। इसके बाद मामले की जांच की मांग की गई थी। सदन की विशेषाधिकार समिति ने राघव चड्ढा को लीगल नोटिस भेजा।

कानून बना दिल्ली सेवा विधेयक, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

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दिल्ली सर्विस बिल अब कानून बन गया है। राष्ट्रपति से इसकी मंजूरी मिल गई है। भारत सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।सात अगस्त को संसद से दिल्ली सेवा विधेयक पारित हो गया था। कानून को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023 के नाम से जाना जाएगा। राज्यसभा ने 102 के मुकाबले 131 मतों से ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023’ को मंजूरी दी थी। लोकसभा ने इसे तीन अगस्त को पास कर दिया था।

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 11 मई को फैसला सुनाते हुए कहा था कि दिल्ली में जमीन, पुलिस और कानून-व्यवस्था को छोड़कर बाकी सारे प्रशासनिक फैसले लेने के लिए दिल्ली की सरकार स्वतंत्र होगी। अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर-पोस्टिंग भी कर पाएगी। उपराज्यपाल इन तीन मुद्दों को छोड़कर दिल्ली सरकार के बाकी फैसले मानने के लिए बाध्य हैं। 

कोर्ट के फैसले के एक हफ्ते बाद 19 मई को केंद्र सरकार एक अध्यादेश ले आई। केंद्र ने 'गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली ऑर्डिनेंस, 2023' लाकर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले का अधिकार वापस उपराज्यपाल को दे दिया। इस अध्यादेश के तहत राष्ट्रीय राजधानी सिविल सर्विसेज अथॉरिटी का गठन किया गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह सचिव को इसका सदस्य बनाया गया। मुख्यमंत्री इस अथॉरिटी के अध्यक्ष होंगे और बहुमत के आधार पर यह प्राधिकरण फैसले लेगा। हालांकि, प्राधिकरण के सदस्यों के बीच मतभेद होने पर दिल्ली के उपराज्यपाल का फैसला अंतिम माना जाएगा।

संसद के मानसून सत्र में दिल्ली सेवा विधेयक पेश किया गया। इस बिल को लोकसभा में 3 अगस्त को पारित किया गया। लोकसभा में बहुमत के चलते केंद्र को बिल पास कराने में कोई मुश्किल सामने नहीं आई। राज्यसभा में सरकार के पास नंबर कम थे और वहां इसे पास कराने की चुनौती थी लेकिन सरकार को वहां भी कामयाबी मिली और 7 अगस्त को उच्च सदन से भी ये विधेयक पारित हो गया।

'मुसलमानों के मन की बात सुनें पीएम मोदी', जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी की अपील

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दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुख़ारी ने कहा है कि देश में पैदा हुए हालातों पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि देश में 'नफ़रत की आंधी' चल रही है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि देश में जिस तरह से नफ़रत का माहौल बना रहा है उसमें प्रधानमंत्री को मुसलमानों के 'मन की बात' सुननी होगी।

बुखानी ने की बातचीत की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुसलमानों के मन की बात सुनने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि हम सरकार से बातचीत का समर्थन करते हैं और बातचीत के लिए तैयार हैं। हिंदू नेताओं से भी बात करें और फिर एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाए। नूंह हिंसा और रेलवे पुलिस फोर्स के जवान के चार लोगों को मारने की घटना का ज़िक्र करते हुए इमाम बुखारी ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात करनी चाहिए

मौजूदा हालात में मुसलमान परेशान हैं- बुखारी

उन्होंने कहा, देश के मौजूदा हालात ने मुझे इस बारे में बोलने के लिए मजबूर कर दिया है। मौजूदा हालात में मुसलमान परेशान हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।उन्होंने कहा, “एक ख़ास धर्म के लोगों को खुली चुनौती दी जा रही है। पंचायतें हो रही हैं जिनमें मुसलमानों का बहिष्कार करने और उनके साथ कारोबार ना करने का ऐलान किया जा रहा है। दुनिया में 57 इस्लामिक देश हैं जहां ग़ैर-मुसलमान रहते हैं और उनके रोज़गार को कोई ख़तरा नहीं है।

चुनाव की वजह से माहौल बनाया जा रहा है- शाही इमाम

उन्होंने आरोप लगाया कि नफरत का माहौल देश को अपनी चपेट में ले रहा है और यह बहुसंख्यक समाज के ‘धर्मनिरपेक्ष लोग’ भी महसूस कर रहे हैं। बुखारी ने मेवात की स्थिति पर कहा कि मुल्क में हिंदू -मुसलमान साथ रहते हैं, लेकिन कुछ लोग पंचायतें कर मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं और उन्हें ‘धमकियां’ दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव की वजह से माहौल बनाया जा रहा है ताकि ध्रुवीकरण हो और वोट एकतरफा तौर पर एक पार्टी के पक्ष में पड़ें।

सरकार ने अपनाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है जीरो-टॉलरेंस की नीति, जी 20 मंत्रिस्तरीय बैठक में बोले पीएम मोदी

#pm_modi_at_g20_anti_corruption_working_groups_meeting

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार पर हर तरह से नकेल कस रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो-टॉलरेंस की सख्त नीति है।साथ ही उन्होंने ये बी कहा कि ने कहा कि भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा असर गरीबों और हाशिये पर पहुंचे लोगों पर पड़ता है।पीएम मोदी ने कोलकाता में हो रही G20 एंटी-करप्शन वर्किंग ग्रुप की बैठक में ये बातें कहीं।प्रधानमंत्री ने इस बैठक को वर्चुअल तरीके से संबोधित किया। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ना हमारे लोगों के प्रति हमारा पवित्र कर्तव्य है।विदेशी संपत्तियों की वसूली में तेजी लाने के लिए, G20 देश गैर-दोषी आधारित जब्ती का उपयोग करके एक उदाहरण स्थापित कर सकते हैं। इससे उचित न्यायिक प्रक्रिया के बाद अपराधियों की त्वरित वापसी और प्रत्यर्पण सुनिश्चित होगा।

पीएम मोदी ने कहा, मुझे खुशी है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच अनौपचारिक सहयोग पर सहमति बन गई है, क्योंकि इससे अपराधियों को कानूनी खामियों का फायदा उठाने से रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार संसाधनों के आवंटन को प्रभावित करता है, बाज़ारों को विकृत करता है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के साथ ही भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ बड़ी जंग का एलान किया था। मोदी सरकार ने इसके लिए स्विटजरलैंड और अन्य टैक्स हेवेन देशों से आंकड़े जुटाए और फिर देश में भ्रष्टाचार और काली कमाई करने वालों पर शिकंजा कसा। बैंकों से लिए गए लोन को वापस न कर विदेश भागने वाले विजय माल्या और नीरव मोदी सरीखे बड़े नामचीन लोगों के भी प्रत्यर्पण की कार्यवाही मोदी सरकार ने शुरू कराई। इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट को मजबूत कर आर्थिक अपराध करने वालों और भ्रष्टाचारियों पर भी शिकंजा और कस दिया गया।

मिग-29 की श्रीनगर एयर बेस पर हुई तैनाती, पाकिस्तान के साथ चीन पर भी होंगी निगाहें

#india_deployed_mig_29_srinagar_air_base

पड़ोसी मुल्कों से जारी तनातनी के बीच भारत ने अपना सैन्य बल और मजबूत कर लिया है। भारत ने पाकिस्तानी और चीनी दोनों मोर्चों पर किसी भी संभावित खतरे से निपटने का इंतजाम कर लिया है। भारत ने श्रीनगर सैन्य बेस पर और अधिक शक्तिशाली लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। भारत ने मिग-29 लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन तैनात किया है। इंडियन एयरफोर्स के ट्राइडेंट स्क्वाड्रन जिसे ‘उत्तर के रक्षक’ के रूप में भी जाना जाता है, ने श्रीनगर हवाई अड्डे पर मिग-21 स्क्वाड्रन की जगह ले ली है।

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न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार भारतीय वायु सेना के पायलट स्क्वाड्रन लीडर विपुल शर्मा ने बताया कि श्रीनगर कश्मीर घाटी के केंद्र में स्थित है और इसकी ऊंचाई मैदानी इलाकों से अधिक है। सीमा के निकट होने के कारण कम समय में बेहतर रिस्पॉन्स देने वाला एयरक्राफ्ट रखना रणनीतिक रूप से ठीक है। एक और बात जो मिग-29 ट्राइडेंट स्क्वाड्रन को मिग-21 से अलग बनाती है वह है, इन लड़ाकू विमानों की उन्नत तकनीक, जो लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हैं। जो सभी मानदंडों को पूरा करता है. ऐसे में हम दोनों मोर्चों पर दुश्मनों से लोहा लेने में सक्षम हैं।

बता दें कि मिग-21 की तुलना में मिग-29 के कई फायदे हैं। हालांकि, मिग-21 स्क्वाड्रन को कमतर नहीं आंका जा सकता, जिसने वर्षों तक कश्मीर घाटी में अपनी जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई और साल 2019 में बालाकोट हवाई हमलों के बाद पाकिस्तानी आतंकवादी शिविरों पर बम बरसाने, पीएएफ के एफ-16 को मार गिराने में भी कामयाब रहे। मिग-29 इस मामले में बेहतर है कि अपग्रेड के बाद उसे बहुत लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियारों से लैस किया गया है।