*नूंह हिंसा के विरोध में बजरंग दल और विहिप की रैलियों पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यूपी, हरियाणा, दिल्ली सरकार को नोटिस*

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हरियाणा के नूंह जिले में हिंसा फैलने के बाद देश के अलग-अलग जगहों पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद द्वारा निकाली जा रही रैलियों को रोकने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसपर दो जजों की पीठ ने सुनवाई की। रैलियों पर रोक की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने आज हो रही रैली और प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए हरियाणा सरकार और राज्य की पुलिस से कहा कि ये सुनिश्चित किया जाए कि किसी तरह की हिंसा ना हो और ना ही कोई हेट स्पीच हो। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी, हरियाणा, दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को करने का फैसला किया है।

हरियाणा के नूंह में हुई हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद आज दिल्ली में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन और रैली निकाल रहा है। इन रैलियों पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल दिल्ली में 23 जगहों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। याचिका में इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। 

विरोध प्रदर्शनों की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश

याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया लेकिन कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ बयानबाजी या कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह सुनिश्चित करें कि सर्वोच्च अदालत के 21 अक्तूबर, 2022 के फैसले (हेट स्पीच) के दिशानिर्देशों का अनुपालन करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच पर हमारा 11 सदस्यीय पीठ का फैसला है। कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरों से विरोध प्रदर्शनों की निगरानी करने और वीडियोग्राफी के निर्देश दिया और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती का भी निर्देश दिया। 

बता दें कि मंगलवार को हरियाणा के नूंह में एक धार्मिक यात्रा के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसा हो गई थी। हिंसा में छह लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। नूंह, मेवात, गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में अभी भी तनाव बना हुआ है।

राजेंद्र गुढ़ा ने जारी किए ‘लाल डायरी’ के अंश, सीएम गहलोत के बेटे का नाम लेकर लगाए गंभीर आरोप, कहा-मुझे माफी मांगने के लिए बनाया जा रहा दबाव*

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राजस्थान सरकार से बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा इन दिनों अपनी लाल डायरी को लेकर खासे चर्चा में हैं। झुंझुनूं की उदयपुरवाटी विधानसभा सीट के विधायक राजेंद्र गुढ़ा की लाल डायरी ने राजस्थानी की सियासत में तूफान मचा दिया है। अब लाल डायरी से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है।दरअसल, बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने बुधवार को अपने घर पर मीडिया से बातचीत में विवादास्पद लाल डायरी के कुछ अंश जारी किए हैं।

सीएम के बेटे का नाम लेकर किया आरसीए में करप्शन का जिक्र

प्रेसवार्ता में गुढ़ा ने कहा,’लाल डायरी में जो तथ्य थे, उसके कुछ अंश मैं आपके सामने रख रहा हूं।’ इस दौरान उन्होंने धर्मेंद्र राठौड़ की हैंड राइटिंग दिखाई। राजेंद्र गुढ़ा ने कहा,’डायरी में लिखा है राजस्थान क्रिकेट संघ( आरसीए) को लेकर मेरी वैभव से बात हुई। भवानी सामोता किस तरह तय करके लोगों को अब तक पैसा नहीं दे रहा। सामोता ने वादा पूरा नहीं किया। डायरी में सौभाग का भी नाम है।

बता दें कि उन्होंने जिस डायरी के अंश जारी किए हैं। उसमें सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और राजस्थान क्रिकेट संघ के सचिव और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के करीबी भवानी सामोता का जिक्र है।

मीडिया में समय-समय पर जानकारी देने की बात

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि विधासनभा में डायरी को टेबल पर रखना चाहता था, मेरे खिलाफ झूठे मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। राजेंद्र गुढ़ा ने आगे कहा कि मैं इस डायरी को विधानसभा की पटल पर रखना चाहता था जिससे सारे तथ्य आधिकारिक रूप से सामने आ जाएं। उन्होंने कहा कि मेरे विश्वस्त के पास डायरी की पूरी डिटेल है। उन्होंने कहा कि अगर मुझे जेल में डाल दिया जाता है तो मीडिया के सामने समय-समय पर जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मुझ पर दबाव बना रही है। गुढ़ा ने कहा कि मुझे माफी मांगने के लिए सरकार की ओर से दबाव बनाया गया। 

आरटीडीसी के चैयरमेन धर्मेंद्र राठौड़ की लिखावट का दावा

गुढ़ा ने कहा कि सरकार मुझे ब्लैकमेल कर रही है। मंत्री ने दावा किया कि डायरी में सीएम के करीबी और आरटीडीसी के चैयरमेन धर्मेंद्र राठौड़ की लिखावट है। डायरी में आरसीए को लेकर लेनदेन की बातें कोडवर्ड में हैं। इसके अलावा सीएम गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के सचिव को लेकर भी बातें लिखी गई हैं।

24 जुलाई को सदन में लहराई थी लाल डायरी*

बता दें कि मानसून सत्र के पहले चरण में राजेंद्र गुढ़ा ने सदन में मणिपुर हिंसा पर चर्चा के दौरान राजस्थान में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अपनी ही सरकार निशाना साधा था। इसके बाद सीएम गहलोत ने उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद वे 24 जुलाई को कथित लाल डायरी लेकर सदन पहुंचे थे और उसे विधानसभा पटल पर रखने की मांग कर रहे थे। इसके बाद स्पीकर के आदेश पर गुढ़ा को सदन से निष्कासित कर दिया गया था।

*हरियाणा में हिंसा के बाद कैसे हैं हालात, सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दी जानकारी*

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हरियाणा के नूंह में सोमवार को एक धार्मिक जुलूस के दौरान शुरू हुई हिंसा की आग आसपास के इलाकों में भी फैल गई। फिलहाल हालात काबू में है। बड़े पैमाने पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात किया गया है। इस बीच हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने हिंसा के बाद के हालात की जानकारी दी है। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि नूंह की घटना में 6 लोगों की मौत हुई है जिसमें 2 होमगार्ड और 4 आम नागरिक हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हिंसा को लेकर जानकारी दी है और बताया है कि जिन जगहों पर हिंसा की घटनाएं हुई, वहां अब कैसे हालात हैं।खट्टर ने बताया कि नूंह में झड़प के बाद अन्य स्थानों पर हिंसा की घटनाएं हुईं जिनपर काबू पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि साजिशकर्ताओं की पहचान की जा रही है, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आम लोगों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस की 30 कंपनी और केंद्रीय सुरक्षा बल की 20 कंपनियों को तैनात किया गया है। केंद्रीय सुरक्षा बल की 20 कंपनी में से 3 पलवल, 2 गुरुग्राम, 1 फरिदाबाद और 14 कंपनी नूंह में तैनात हैं। 

खट्टर ने बताया कि राज्य में सांप्रदायिक हिंसा में दो होम गार्ड समेत छह लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि घायलों को नूंह के नलहड़ और गुरुग्राम के मेदांता सहित विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हिंसा के मामले में अभी तक 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। खट्टर ने कहा-मेरी जनता से अपील है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की घटना को आगे न बढ़ने दें।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नूंह हिंसा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया है और कहा है कि विश्व हिंदू परिषद की यात्रा पर हमला सुनियोजित था, जो एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, 'सुनियोजित और षडयंत्र पूर्ण तरीके से नूंह में सामाजिक यात्रा को भंग करने के लिए आक्रमण किया गया और पुलिस को भी निशाना बनाया गया, जो बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है।

*देवदास-जोधा अकबर के आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई ने की आत्महत्या, स्टूडियो में फांसी के फंदे पर लटकता मिला शव*

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बॉलीवुड से एक बार फिर गमगीन करने वाली खबर सामने आ रही है।मशहूर आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई ने खुदकुशी कर ली है। नितिन ने मुंबई से लगभग 80किमी दूर कर्जत इलाके में बने एनडी स्टूडियो में फांसी लगाकर खुदकुशी की है। रिपोर्ट्स की माने तो नितिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे।

नितिन देसाई की बॉडी स्टूडियो में मिलने के बाद वहां के स्टाफ ने पुलिस को इस बात की सूचना दी। अब पुलिस उसके अनुसार आगे की कार्रवाई कर रही है।खबरों के अनुसार आत्महत्या के दो दिन पहले तक वह स्टूडियो में थे। कल तक उन्होंने अपनी टीम को आगामी प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी भी दी थी, लेकिन आज सुबह से उन्होंने किसी का फोन नहीं उठाया तो कर्मचारियों ने इसकी जानकारी एनडी स्टूडियो के अधिकारियों को दी। इसके बाद उन्होंने दरवाजा तोड़ा और पुलिस को इसकी सूचना दी।

एडवर्टाइजिंग एजेंसी ने लगाया था धोखाखड़ी का आरोप

कुछ दिन पहले उनपर एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी ने धोखाखड़ी का आरोप लगाया था।एक एजेंसी ने उन पर 3 महीने तक काम करवाने के बाद पैसा नहीं देने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट्स की माने तो ये रकम करीब 51 लाख रुपए थी। हालांकि नितिन ने इन आरोपों को गलत ठहराया था।

चाण्क्य और तमस जैसे धारावाहिकों से शुरू किया था करियर

बता दें कि नितिन देसाई मशहूर कला निर्देशक होने के साथ-साथ निर्माता, निर्देशक और अभिनेता भी थे। नितिन देसाई मराठी और हिंदी सिनेमा का एक बड़ा नाम थे। नितिन देसाई ने चाण्क्य और तमस जैसे धारावाहिकों से अपने करियर की शुरुआत की थी और उन्हें पहली बार '1942 ए लव स्टोरी' में उनके काम के लिए नोटिस किया गया। नितिन ने कई बेहतरीन फिल्में इंडस्ट्री को दी हैं। इनमें से कुछ हम दिल दे चुके सनम, लगान, जोधा अकबर और प्रेम रतन धन पायो शामिल हैं। नितिन ने इस फिल्मों के सेट डिजाइन किए थे। इन सभी फिल्मों में भव्य सेट दिखाए गए थे जिसकी हर बार तारीफ की जाती है।

चार बार जीता नेशनल अवॉर्ड

नितिन देसाई ने कला निर्देशन के लिए चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों भी जीते हैं। उन्हें बेस्ट आर्ट डायरेक्शन के लिए इन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। इनमें साल 1999 में उन्हें डॉ. आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल है। इसके साथ ही उन्हें ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘लगान’ और ‘देवदास’ के लिए सम्मानित किया गया था। आखिरी बार उन्होंने ‘पानीपत’ फिल्म के लिए काम किया।

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मास्टरमाइंड सचिन को लाया गया भारत, फर्जी पासपोर्ट के जरिये भाग गया था विदेश

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पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मुख्य आरोपित सचिन बिश्नोई उर्फ सचिन थापन को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अजरबैजान प्रत्यर्पित कर भारत ले आई है। अब सचिन को भारत प्रत्यर्पित होने से इस मामले में सिंगर की हत्या की पीछे की वजह का खुलासा हो सकता है।

जानकारी के अनुसार,पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता सचिन बिश्नोई को दिल्ली ले आया गया है। उसे सोमवार देर रात दिल्ली लाया गया। दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस की टीम उसे लाने के लिए अजरबैजान गई थी। इससे पहले तीन मई को स्पेशल सेल की टीम ने कुख्यात गैंगेस्टर दीपक पहल उर्फ बॉक्सर को सिंगापुर से प्रत्यर्पण पर भारत लाया था।

अजरबैजान गई थी दिल्ली पुलिस की टीम

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड को लेकर केंद्रीय एजेंसियों व पुलिस की जांच में सचिन बिश्नोई का नाम मुख्य आरोपित के तौर पर सामने आया था, जिसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में थी। बता दें कि सचिन बिश्नोई गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भांजा है।

सिद्धू मूसेवाला की हत्या से ठीक पहले वह लारेंस का भांजा सचिन और भाई अनमोल फर्जी पासपोर्ट की मदद से विदेश भाग गए थे। एक पार्टी का वीडियो लीक होने के बाद पिछले साल सचिन को अजरबैजान में डिटेन किया गया था। सचिन, अनमोल ने ही कनाडा में बैठे गोल्डी बराड़ से मिलकर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की प्लानिंग की थी। सचिन के भारत आने के बाद मामले में कई खुलासे होने की उम्मीद है।

UAE से किया विक्रम बराड़ को गिरफ्तार

इस मामले में पंजाब पुलिस की ओर से कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है लेकिन मुख्य आरोपित जो विदेशों में बैठे है उन्हें वापस लाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ प्रयास किए जा रहे है। ध्यान रहे कि पिछले हफ्ते राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) ने सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस में लॉरेंस बिश्नोई के बेहद खास गुर्गे विक्रम बराड़ को यूएई से गिरफ्तार किया था।

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने सीमा हैदर मामले में दी प्रत‍िक्रि‍या, बोले, दो देशों का मामला, सुरक्षा एजेसियों की रिपोर्ट के ब

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने सीमा हैदर मामले में प्रत‍िक्रि‍या दी है। समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में सीएम योगी से पूछा गया, क्‍या सीमा हैदर का मामला र‍िवर्स लव ज‍िहाद है? इस सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा, ‘दो देशों से जुड़ा हुआ मामला है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को देख रही हैं। उनके द्वारा जो भी रिपोर्ट दी जाएगी, उसके आधार पर विचार किया जाएगा।’

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सच‍िन के प्‍यार में भारत आई सीमा

पाकिस्तान के कराची की रहने वाली सीमा हैदर पब्जी गेम खेलने के दौरान नोएडा के सचिन के संपर्क में आ गई थी। दोनों में प्यार हो गया था। अपने प्यार को पाने के लिए सीमा हैदर अवैध तरीके से नेपाल के रास्ते भारत की सीमा में प्रवेश करके रबूपुरा आकर रहने लगी।

पुल‍िस ने की थी पूछताछ

पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज द‍िया था। हालांक‍ि, दो दिन बाद ही कोर्ट ने दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया। यूपी एटीएस ने भी सीमा और सचिन के साथ उसके पिता नेत्रपाल से पूछताछ की थी।

सीमा ने कहा- सच‍िन के साथ ही रहूंगी

सीमा का कहना है क‍ि वह स‍िर्फ सच‍िन से प्‍यार की खाति‍र भारत आई है और अब वह यहीं रहेगी। नेपाल के रास्ते भारत आई सीमा को अभी भारतीय नागरिकता मिलने पर फैसला होना बाकी है। इससे पहले ही सीमा ने अपने आप को भारतीय मानना शुरू कर दिया है। सीमा ने ‘मेरा भारत महान’ का बैज लगाकर खुद का वीडियो इंस्टग्राम पर वायरल किया है, जिसके बैकग्राउंड में देश भक्ति गीत बज रहा है।

इंदिरा गांधी के आरएसएस के कई नेताओं के साथ थे अच्छे संबंध, आपातकाल में भी मिला था साथ, नई किताब में दावा

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कई नेताओं से अच्छे संबंध थे लेकिन उन्होंने सतर्कतापूर्ण संगठन से व्यक्तिगत दूरी रखी। आपातकाल के दौरान संघ ने न सिर्फ इंदिरा का साथ दिया, बल्कि 1980 में उन्हें सत्ता में लौटने में मदद भी की। पत्रकार नीरजा चौधरी की नई किताब 'हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड' में यह दावे किए गए हैं।

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पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी किताब में पूर्व प्रधानमंत्रियों के काम करने के तरीके का विश्लेषण उनके ऐतिहासिक महत्व के छह फैसलों के आधार पर किया है। इन छह निर्णयों में इंदिरा गांधी की आपातकाल के बाद 1980 में सत्ता में वापसी की रणनीति, शाह बानो मामला, मंडल आयोग, बाबरी मस्जिद की घटना, अटल बिहारी वाजपेयी की परमाणु परीक्षण की अनुमति और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत-अमेरिका परमाणु समझौता शामिल है।

आरएसएस ने पूरे आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के साथ मित्रवत संबंध रखा

किताब में दावा किया गया है कि आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इंदिरा गांधी को प्रस्ताव दिया था।किताब में दावा किया गया है कि आरएसएस ने पूरे आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के साथ मित्रवत संबंध रखा। चौधरी लिखती हैं, ‘आरएसएस प्रमुख बालासाहेब देवरस ने कई बार उन्हें पत्र लिखा। कुछ आरएसएस नेताओं ने कपिल मोहन के जरिये संजय गांधी से संपर्क किया। अब 1977 में उन्हें यह देखना है कि कैसे प्रतिक्रिया करनी है लेकिन उन्हें बहुत सतर्क होकर काम करना होगा।

इंदिरा मुसलमानों की नाराजगी से बचने के लिए राजनीति का हिंदूकरण करना चाहती

आपातकाल के दौर में आरएसएस तीसरे प्रमुख बालासाहेब देवरस ने उन्हें कई बार लिखा। कई संघ लीडर कपिल मोहन के जरिए संजय गांधी से संपर्क करते थे। नीरजा के अनुसार इंदिरा को यह अंदेशा था कि मुसलमान कांग्रेस से नाराज हो सकते हैं, इसी वजह से वे अपनी राजनीति का हिंदूकरण करना चाहती थीं। इस काम में आरएसएस से थोड़ा सा समर्थन बल्कि उसका तटस्थ रुख भी उनके लिए बड़ा मददगार साबित होता। साल 1980 में जब अटल बिहारी वाजपेयी अपनी सेकुलर छवि बनाने में जुटे थे, इंदिरा गांधी कांग्रेस का हिंदूकरण कर रहीं थीं। पुस्तक में बाली का कथन है कि इंदिरा गांधी मंदिरों में बहुत जाने लगी थीं, जिसने संघ के लीडरों को प्रभावित किया। बालासाहेब देवरस ने तो एक बार टिप्पणी भी की कि 'इंदिरा बहुत बड़ी हिंदू हैं।' बाली के अनुसार देवरस और बाकी संघ लीडर इंदिरा में हिंदुओं का नेता देखते थे।

आरएसएस ने 1980 में 353 सीटों के साथ सत्ता में लौटने में मदद की

पुस्तक में इंदिरा के करीबी रहे अनिल बाली के हवाले से दावा किया गया कि संघ ने उन्हें 1980 में 353 सीटों की विशाल जीत के साथ सत्ता में लौटने में मदद की, वे खुद इतनी सीटें नहीं जीत सकती थीं। वह जानती थी कि आरएसएस ने उसका समर्थन किया है, लेकिन उसने कभी भी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया। वह निजी तौर पर स्वीकार करती थी कि अगर आरएसएस ने उसे समर्थन नहीं दिया होता, तो वह 353 सीटें नहीं जीत पाती, जो कि उसके सुनहरे दिनों में जीती गई सीटों से एक अधिक है।

लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारियां तेज, बसपा सुप्रीमो मायावती से गठबंधन और सीटों के तालमेल का फार्मूला भी तय

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अगले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। यूपी में भाजपा ने क्लीन स्वीप की रणनीति बनाई है। पिछले कई दिनों से भाजपा और जयंत चौधरी की आरएलडी के बीच गठबंधन की चर्चा चल रही थी। अब दोनों तरफ से इसे लेकर साफ इनकार कर दिया गया है। भाजपा को आरएलडी की तुलना में मायावती की बसपा ज्यादा मुफीद लग रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बसपा से गठबंधन और सीटों के तालमेल का फार्मूला भी तय कर लिया गया है। भाजपा नेताओं का मानना है कि आरएलडी से उतना फायदा नहीं होगा जितना बसपा से गठबंधन होने पर मिल सकता है। बसपा प्रमुख मायावती फिलहाल विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया और भाजपा के गठबंधन एनडीए दोनों से दूरी बनाकर चल रही हैं।

पूर्वी यूपी में भाजपा ने सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर और दारा सिंह चौहान को अपने साथ लाकर पहले ही अपनी स्थिति मजूबत कर ली है। अब उसके निशाने पर पश्चिमी यूपी है। भाजपा नेताओं का मानना है कि आरएलडी के जाट वोट पहले से ही बीजेपी के साथ हैं। विधानसभा से लेकर निकाय चुनाव में जाट वोट भाजपा को मिलते रहे हैं।

एक तीर से दो निशाने की तैयारी में बीजेपी

बसपा से गठबंधन कर भाजपा एक तीर से दो निशाने मारने की कोशिश में है। पिछले चुनाव में बसपा ने पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर जोरदार उपस्थिति दर्ज की थी। इसका लाभ बसपा और भाजपा दोनों को मिलेगा। बसपा से गठबंधन हुआ तो सपा के साथ आरएलडी का भी खेल बिगड़ जाएगा। बसपा के साथ सीटों का तालमेल भी भाजपा में तय कर लिया गया है। पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा को उसकी जीती हुई सीटें देने पर पार्टी नेता सहमत हैं। बसपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में दस सीटें जीती थीं।

भाजपा को क्यों दिख रही उम्मीदें

अभी मायावती या बसपा की तरफ से इस बारे में हालांकि कोई बयान तो नहीं आया है लेकिन भाजपा को उम्मीद है कि गठबंधन हो जाएगा। भाजपा नेताओं का मानना है कि बसपा के अकेले लड़ने पर विधानसभा चुनाव जैसे उसकी स्थिति हो सकती है। बसपा 2007 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही लगातार हार का सामना कर रही है।

2012 में सपा ने बसपा को हराकर यूपी की सत्ता हथिया ली थी। 2014 के लोकसभी चुनाव में भाजपा की सुनामी चली और सपा ने पांच सीटें जीतीं लेकिन बसपा बुरी तरह हार गई। उसे 2017 में वापसी की उम्मीद थी लेकिन लगातार तीसरी हार के बाद उसने 2019 में सपा से गठबंधन किया। उसे दस लोकसभा सीटों पर जीत भी मिली।

अकेले लड़ने से विधानसभा चुनाव में बसपा का सफाया

2022 में अकेले उतरने का फैसला लिया था। इससे विधानसभा से उसका एक तरह से सफाया हो गया था। बसपा को केवल एक सीट पर जीत मिली थी। बलिया के रसड़ा से बसपा के उमाशंकर सिंह जीते थे। हालांकि यह जीत बसपा की कम और उमाशंकर की ज्यादा मानी जाती है। दस साल पहले तक सत्ता संभाल रही बसपा को विधानसभा में केवल एक सीट मिलने के साथ ही उसका वोट बैंक भी लगातार खिसकता रहा है। 

अकेले लड़ने पर लोकसभा से भी सफाया की आशंका

बसपा इस समय अकेले नजर आ रही है। बसपा का बेस वोटबैंक यूपी में ही है। मायावती को पता है कि पिछले लोकसभा चुनाव में मिली दस सीटों पर जीत 2024 में तभी बरकरार रह सकती है जब किसी से गठबंधन किया जाए। बसपा के अकेले उतरने पर विधानसभा और निकाय चुनाव जैसे हालत हो सकती है। बसपा की इसी मुश्किलों को देखते हुए भाजपा की तरफ से गठबंधन का पासा फेंका गया है।

मुस्लिमों का साथ नहीं मिलने से मायावती मायूस

मायावती लगातार मुस्लिमों को साधने के लिए तरह तरह के प्रयोग करती रही हैं। इसके बाद भी उन्हें मुस्लिमों का साथ उस तरह नहीं मिल रहा जैसे सपा को मिलता रहा है। वहीं इस बारे में सपा सांसद एसटी हसन का कहना है कि मायावती उनके साथ जा रही हैं तो उन्हें पता है कि मुस्लिम वोट बसपा को नहीं मिल रहा है। वह पहले भी अपने वोट शिफ्ट करती रही हैं। पिछले कई चुनावों से लगातार बीएसपी को हार का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा में तो सफाया हो ही गया है। लोकसभा में दस सीटें सपा से गठबंधन के कारण मिली थीं। इस बार लोकसभा में भी सफाया तय है।

इंदिरा गांधी के आरएसएस के कई नेताओं के साथ थे अच्छे संबंध, आपातकाल में भी मिला था साथ, नई किताब में दावा

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कई नेताओं से अच्छे संबंध थे लेकिन उन्होंने सतर्कतापूर्ण संगठन से व्यक्तिगत दूरी रखी। आपातकाल के दौरान संघ ने न सिर्फ इंदिरा का साथ दिया, बल्कि 1980 में उन्हें सत्ता में लौटने में मदद भी की। पत्रकार नीरजा चौधरी की नई किताब 'हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड' में यह दावे किए गए हैं।

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पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी किताब में पूर्व प्रधानमंत्रियों के काम करने के तरीके का विश्लेषण उनके ऐतिहासिक महत्व के छह फैसलों के आधार पर किया है। इन छह निर्णयों में इंदिरा गांधी की आपातकाल के बाद 1980 में सत्ता में वापसी की रणनीति, शाह बानो मामला, मंडल आयोग, बाबरी मस्जिद की घटना, अटल बिहारी वाजपेयी की परमाणु परीक्षण की अनुमति और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत-अमेरिका परमाणु समझौता शामिल है।

आरएसएस ने पूरे आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के साथ मित्रवत संबंध रखा

किताब में दावा किया गया है कि आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इंदिरा गांधी को प्रस्ताव दिया था।किताब में दावा किया गया है कि आरएसएस ने पूरे आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के साथ मित्रवत संबंध रखा। चौधरी लिखती हैं, ‘आरएसएस प्रमुख बालासाहेब देवरस ने कई बार उन्हें पत्र लिखा। कुछ आरएसएस नेताओं ने कपिल मोहन के जरिये संजय गांधी से संपर्क किया। अब 1977 में उन्हें यह देखना है कि कैसे प्रतिक्रिया करनी है लेकिन उन्हें बहुत सतर्क होकर काम करना होगा।

इंदिरा मुसलमानों की नाराजगी से बचने के लिए राजनीति का हिंदूकरण करना चाहती

आपातकाल के दौर में आरएसएस तीसरे प्रमुख बालासाहेब देवरस ने उन्हें कई बार लिखा। कई संघ लीडर कपिल मोहन के जरिए संजय गांधी से संपर्क करते थे। नीरजा के अनुसार इंदिरा को यह अंदेशा था कि मुसलमान कांग्रेस से नाराज हो सकते हैं, इसी वजह से वे अपनी राजनीति का हिंदूकरण करना चाहती थीं। इस काम में आरएसएस से थोड़ा सा समर्थन बल्कि उसका तटस्थ रुख भी उनके लिए बड़ा मददगार साबित होता। साल 1980 में जब अटल बिहारी वाजपेयी अपनी सेकुलर छवि बनाने में जुटे थे, इंदिरा गांधी कांग्रेस का हिंदूकरण कर रहीं थीं। पुस्तक में बाली का कथन है कि इंदिरा गांधी मंदिरों में बहुत जाने लगी थीं, जिसने संघ के लीडरों को प्रभावित किया। बालासाहेब देवरस ने तो एक बार टिप्पणी भी की कि 'इंदिरा बहुत बड़ी हिंदू हैं।' बाली के अनुसार देवरस और बाकी संघ लीडर इंदिरा में हिंदुओं का नेता देखते थे।

आरएसएस ने 1980 में 353 सीटों के साथ सत्ता में लौटने में मदद की

पुस्तक में इंदिरा के करीबी रहे अनिल बाली के हवाले से दावा किया गया कि संघ ने उन्हें 1980 में 353 सीटों की विशाल जीत के साथ सत्ता में लौटने में मदद की, वे खुद इतनी सीटें नहीं जीत सकती थीं। वह जानती थी कि आरएसएस ने उसका समर्थन किया है, लेकिन उसने कभी भी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया। वह निजी तौर पर स्वीकार करती थी कि अगर आरएसएस ने उसे समर्थन नहीं दिया होता, तो वह 353 सीटें नहीं जीत पाती, जो कि उसके सुनहरे दिनों में जीती गई सीटों से एक अधिक है।

हरियाणा के मेवात-नूंह में शुरू हुई हिंसा गुरुग्राम तक पहुंची, प्रदेश के कई जिलों में बंद हुआ इंटरनेट, 29 पर FIR, 116 गिरफ्तार, अब हालात नियंत्रण

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हरियाणा के मेवात-नूंह में सोमवार को आरम्भ हुई हिंसा गुरुग्राम तक पहुंच गई। मंगलवार देर रात भीड़ ने यहां मस्जिद पर हमला करके मौलवी का क़त्ल कर दिया। दुकानों को भी आग के हवाले किया गया। हिंसा में अब तक दो होमगार्ड सहित 5 व्यक्तियों की मौत हो गई। नूंह में कर्फ्यू लगा दिया गया। हिंसा पर नियंत्रण पाने के लिए अर्धसैनिक बलों की 20 टुकड़ियों को तैनात किया गया है। नूंह, पलवल, मानेसर, सोहाना एवं पटौदी में इंटरनेट बंद कर दिया गया। अब हालात नियंत्रण में बताए जा रहे है। RAF ने कई स्थानों पर फ्लैग मार्च निकाला। हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद ने आज देशव्यापी प्रदर्शन बुलाया है। उधर, हरियाणा में हिंसा को देखते हुए उत्तर प्रदेश के 11 जिलों मे अलर्ट है। राजस्थान मे भरतपुर के पश्चात् अब अलवर में धारा 144 लागू कर दी गई है।  

दरअसल, नूंह में हिंदू संगठनों ने प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी बृजमंडल यात्रा निकालने की घोषणा की थी। प्रशासन से इसकी इजाजत भी ली गई थी। सोमवार को बृजमंडल यात्रा के चलते इस पर पथराव हो गया था। देखते ही देखते यह हिंसा में बदल गया। सैकड़ों कारों को आग लगा दी गई। साइबर थाने पर भी हमला किया गया। फायरिंग भी हुई। इसके अतिरिक्त एक मंदिर में सैकड़ों व्यक्तियों को बंधक बनाया गया। पुलिस की दखल के पश्चात् लोगों को वहां से निकाला गया। पुलिस पर भी हमला हुआ। नूंह के पश्चात् सोहना में भी पथराव और फायरिंग हुई। वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। 

नूंह के अतिरिक्त गुरुग्राम और पलवल में भी हिंसा की सूचना मिली। पलवल में भीड़ ने परशुराम कॉलोनी में 25 से ज्यादा झोपड़ियों में आग लगा दी। हालांकि, किसी को कोई चोट नहीं आई। उधर, राजस्थान के भिवाड़ी में हाइवे पर भीड़ ने दो तीन दुकानों में तोड़फोड़ की। नूंह में सोमवार को 50 से ज्यादा चोटिल व्यक्तियों में से दो और व्यक्तियों की चिकित्सालय में मौत हो गई। हिंसा में अब तक 2 होमगार्ड सहित 5 लोग मारे गए। चोटिल व्यक्तियों में 10 पुलिसकर्मी हैं, जिनमें से तीन वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने नूंह हमले को एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा बताया, जबकि VHP ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी से हिंसा की जांच की मांग की। इससे पहले नूंह जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया। सुरक्षा बलों ने आसपास के जिलों में भी फ्लैग मार्च किया तथा कई शांति समिति की बैठकें की गईं।