ट्रंप आज से लागू करेंगे जवाबी हैरिफ, भारत समेत कई देशों पर होगा असर


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अमेरिकी आज यानी बुधवार से दुनियाभर में रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने जा रहा है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो अप्रैल से कई देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ यानी जवाबी आयात शुल्क लगाने का एलान करेंगे। व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा ट्रंप बुधवार को शाम 4 बजे (स्थानीय समय) रोज गार्डन में ‘मेक अमेरिका वेल्दी अगेन इवेंट में भाषण देंगे। इसी इवेंट में रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर घोषणा होगी।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को 'लिबरेशन डे' के रूप में मनाना चाहते हैं। इसके लिए वह अपने व्यापार सलाहकारों के साथ मिलकर टैरिफ योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। ट्रंप बुधवार को वाइट हाउस के रोज गार्डन में शाम 4 बजे (स्थानीय समय) औपचारिक घोषणा करेंगे। इस घोषणा में टैरिफ की पूरी जानकारी दी जाएगी। कैरोलीन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। अगर कोई विदेशी नेता या उद्योगपति छूट चाहते हैं तो वह उनसे बात करने को तैयार हैं। लीविट ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी श्रमिकों को उचित मौका दिलाने पर ध्यान दे रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने टैरिफ को लेकर यूरोपीय संघ, भारत, जापान और कनाडा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाता है, जबकि अन्य देशों की नीतियां भी इसी तरह की हैं। यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिकी डेयरी पर 50% तक, जापान की ओर से अमेरिकी चावल पर 700% तक और कनाडा की ओर से अमेरिकी मक्खन व पनीर पर लगभग 300% तक टैरिफ लगाया जाता है। लेविट ने कहा कि अमेरिकी उत्पादों के लिए ये शुल्क अनुचित व्यापार प्रथाएं हैं और हमें इसे बदलना होगा।

ट्रंप का दावा- भारत टैरिफ घटाने को राजी

ट्रंप ने जिन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है उनमें भारत भी शामिल है। हालांकि, एक दिन पहले तक भारत को 'टैरिफ किंग' और 'व्यापार के मामले में बड़ा दुर्व्यवहारकर्ता' कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद जताई है कि भारत उनके अन्य सहयोगियों की तरह अपने टैरिफ में कटौती करेगा। ओवल ऑफिस से बोलते हुए सोमवार को ट्रम्प ने कहा था, "मैंने सुना है कि भारत अपने टैरिफ में भारी कमी करने जा रहा है। बहुत से देश अपने टैरिफ में कमी करने जा रहे हैं।

ट्रंप ने कहा था कि भारत हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलता है

अमेरिकी संसद के जॉइंट सेशन में ट्रंप ने कहा था, भारत हमसे 100% से ज्यादा टैरिफ वसूलता है, हम भी अगले महीने से ऐसा ही करने जा रहे हैं। उन्होनें ऐलान किया कि उनके प्रशासन के तहत, अगर कोई कंपनी अमेरिका में अपना प्रोडक्ट नहीं बनाएगी, तो उसे टैरिफ देना होगा। कुछ मामलों में, यह टैरिफ बहुत बड़ा होगा।

1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा का हवाला

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दूसरे देश अमेरिका पर भारी टैक्स और टैरिफ लगाते हैं, जबकि अमेरिका उन पर बहुत कम लगाता है। यह बहुत अन्यायपूर्ण है। दूसरे देश दशकों से हम पर टैरिफ लगाते आ रहे हैं, अब हमारी बारी है। ट्रंप का कहना है कि कई देश अमेरिकी उत्पादों पर जबरदस्त टैरिफ लगाते हैं, वहीं अमेरिका उन देशों के उत्पादों पर कम आयात शुल्क वसूलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि इसकी वजह से अमेरिका को 1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा उठाना पड़ता है, जो कि अमेरिकी उद्योगों और कामगारों के लिए नुकसान देह है।

टैरिफ एक तरह का बॉर्डर फीस या टैक्स होता है, जो कोई भी देश विदेशों से अपने यहां आने वाले सामान पर लगाता है। यह टैक्स आयात करने वाली कंपनी पर लगाया जाता है। इसे घटा-बढ़ाकर ही देश आपस में व्यापार को कंट्रोल करते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग का राजनीतिक दलों के साथ सबसे बड़ा सहभागिता अभियान

नई दिल्ली-  भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देश भर में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ अनेक संरचनाबद्ध सहभागिता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 25 दिनों की अवधि में और 31 मार्च 2025 तक, कुल 4,719 बैठकें आयोजित की गई, जिनमें सीईओ द्वारा 40, डीईओ द्वारा 800 और ईआरओ द्वारा 3,879 बैठकों का आयोजन किया गया। इनमें देश-भर से राजनीतिक दलों के 28,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

ये बैठकें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी द्वारा 4-5 मार्च, 2025 को आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान जारी निदेशों के अनुसरण में आयोजित की गईं।

इन बैठकों का उद्देश्य संबंधित सक्षम प्राधिकारी यानी ईआरओ या डीईओ या सीईओ द्वारा किसी भी लंबित मुद्दे का लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960, निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 में निर्धारित कानूनी ढांचे और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी मैनुअल, दिशा-निर्देशों और अनुदेशों के भीतर समाधान करना है। सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के सीईओ से आगे और मूल्यांकन किए जाने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है और मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर कोई भी मुद्दा यदि अनसुलझा रह जाता है, तो आयोग द्वारा उस पर विचार किया जाएगा।

राजनीतिक दलों द्वारा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों, जिलों और राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों में आयोजित इन बैठकों में सक्रिय और उत्साहपूर्ण सहभागिता करके इनका स्वागत किया गया है। देश-भर से प्राप्त इन बैठकों की तस्वीरें आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर देखी जा सकती हैं: https://x.com/ECISVEEP?refsrc=twsrc%5E.google%7Ctwcamp%5Eserp%7Ctwgr%5Eauthor

दंतेवाड़ा नक्सल एनकाउंटर : DRG की जवानों ने 25 लाख की ईनामी नक्सली रेणुका को मार गिराया

दंतेवाड़ा- दंतेवाड़ा-बीजापुर जिला के सरहदी नेलगोड़ा, एकेली और बेलनार इलाके में आज सुबह DRG के जवानों की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें 25 लाख की ईनामी DKSZC मेंबर रेणुका उर्फ बानु को मार गिराया. इनकाउंटर से लौटते समय जवानों का हौसला हाफजाई करने DIG कमलोचन कश्यप पहुंचे थे. 

DKSZCM (Dandakaranya Special Zonal Committee Member) नक्सली संगठन में एक बड़ी जिम्मेदारी का पद होता है, जो मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना के नक्सल ग्रस्त इलाकों में सक्रिय है.

यह स्पेशल जोनल कमेटी बड़े फैसले लेने वाली क्षमता रखती है, जो नक्सली गतिविधियों की योजना, रणनीति और संचालन की देखरेख करती है. इस कमेटी के सदस्य (DKSZCM) संगठन के अंदर महत्वपूर्ण पदों पर होते हैं, और उन्हें बड़े ऑपरेशनों की जिम्मेदारी दी जाती है.

Nutrition experts Talk on Decoding Cravings: Understanding the Connection Between Nutrient Deficiencies and Food Desires

In March, a team of diet consultants, led by Nutritionist Harpreet Pasricha, conducted a series of talks on cravings in celebration of International Women’s Day. These sessions were held at Pentair, Mount Litera Zee School, Indian Naval units, and all Diet Dr Clinics in Goa, Ludhiana, and Amritsar.

Cravings are intense desires for specific foods that many individuals experience. While they can be influenced by emotions and habits, they may also indicate underlying nutrient deficiencies. This article explores the possible link between cravings and nutritional gaps, offering insights on how to address them effectively.

Understanding Cravings

Cravings are more than mere hunger; they are powerful urges for particular foods. These desires can be influenced by:

• Physiological Needs: The body’s requirement for specific nutrients.

• Emotional States: Stress, anxiety, or sadness leading to comfort eating.

• Hormonal Fluctuations: Changes during menstrual cycles or pregnancy affecting appetite.

Recognizing the root cause of cravings is essential for maintaining overall health and well-being.

Common Cravings and Their Potential Nutrient Links

1. Chocolate

• Possible Deficiency: Magnesium

• Explanation: Chocolate, especially dark chocolate, is rich in magnesium. A craving for chocolate might indicate a need for this essential mineral, which plays roles in muscle function, nerve signaling, and energy production.

• Sources of Magnesium: Nuts, seeds, legumes, whole grains, and leafy green vegetables.

2. Ice (Pagophagia)

• Possible Deficiency: Iron

• Explanation: The compulsive consumption of ice, known as pagophagia, has been linked to iron-deficiency anemia. Chewing ice may provide temporary relief to oral inflammation caused by anemia.

• Sources of Iron: Red meat, poultry, seafood, beans, dark leafy greens, and iron-fortified cereals.

3. Salty Foods

• Possible Deficiency: Sodium or Chloride

• Explanation: An intense desire for salty snacks might suggest an electrolyte imbalance, particularly involving sodium or chloride. These minerals are vital for maintaining fluid balance and nerve function.

• Sources of Sodium and Chloride: Table salt, seafood, and vegetables like celery and tomatoes.

4. Red Meat

• Possible Deficiency: Iron or Vitamin B12

• Explanation: Craving red meat could signal low levels of iron or vitamin B12, both crucial for red blood cell formation and preventing anemia.

• Sources of Vitamin B12: Fish, meat, poultry, eggs, and dairy products.

5. Cheese or Dairy

• Possible Deficiency: Calcium or Vitamin D

• Explanation: A hankering for cheese or dairy products may indicate a need for calcium or vitamin D, essential for bone health and muscle function.

• Sources of Calcium: Dairy products, fortified plant-based milks, and leafy green vegetables.

• Sources of Vitamin D: Fatty fish, fortified dairy products, and exposure to sunlight.

6. Sugary Foods

• Possible Deficiency: Chromium or Magnesium

• Explanation: A sweet tooth might be linked to low levels of chromium, which aids in blood sugar regulation, or magnesium, involved in glucose metabolism.

• Sources of Chromium: Broccoli, grapes, whole-grain products, and meats.

7. Pickles or Sour Foods

• Possible Deficiency: Sodium

• Explanation: Craving pickles or sour foods can be a sign of sodium deficiency, especially in individuals with low blood pressure or those losing sodium through sweat.

8. Fried or Fatty Foods

• Possible Deficiency: Essential Fatty Acids

• Explanation: A desire for fried foods may suggest a lack of essential fatty acids, necessary for brain function and hormone production.

• Sources of Essential Fatty Acids: Fatty fish, flaxseeds, walnuts, and chia seeds.

9. Carbonated Drinks

• Possible Deficiency: Calcium

• Explanation: Some theories propose that craving fizzy drinks is linked to low calcium levels, though more research is needed in this area.

The Broader Impact of Nutrient Deficiencies

Nutrient deficiencies can manifest in various ways beyond cravings.

For instance:

• Iron Deficiency: Affects approximately one in three adults, leading to symptoms like fatigue, dizziness, and pica (craving non-nutritional substances). Addressing this requires incorporating iron-rich foods into the diet or considering supplements under medical guidance.

• Hidden Hunger: This term refers to subclinical nutrient deficiencies that don’t show immediate symptoms but can increase the risk of chronic diseases, including type 2 diabetes. A balanced diet rich in essential nutrients is crucial to combat this issue.

Addressing and Preventing Nutrient Deficiencies

To mitigate cravings linked to nutrient deficiencies:

• Balanced Diet: Ensure a varied diet that includes all essential nutrients. Incorporate fruits, vegetables, whole grains, lean proteins, and healthy fats.

• Regular Health Check-ups: Routine medical examinations can detect deficiencies early, allowing for timely interventions.

• Mindful Eating: Pay attention to hunger cues and cravings. Reflecting on what your body might be signaling can guide healthier food choices.

• Supplementation: When necessary, supplements can help address specific deficiencies. However, it’s essential to consult with a healthcare professional before starting any supplement regimen.

When to Seek Professional Help

If you experience persistent cravings or suspect a nutrient deficiency, consulting a registered dietitian or nutritionist is advisable. They can assess your dietary habits, identify potential deficiencies, and determine underlying causes, such as:

• Dietary Imbalances: Consuming foods that hinder nutrient absorption or lack essential nutrients.

• Malabsorption Issues: Conditions like celiac disease, Crohn’s disease, or environmental enteropathy can impair nutrient absorption, leading to deficiencies. For instance, environmental enteropathy, prevalent in low-resource settings, is characterized by chronic intestinal inflammation, reducing nutrient absorption and leading to malnutrition and stunted growth.

• Medication Interactions: Some medications can interfere with nutrient absorption. For example, metformin, a common diabetes medication, has been associated with vitamin B12 deficiency.

A healthcare professional can conduct necessary tests to diagnose deficiencies and recommend appropriate dietary adjustments or supplements.

To summarise, cravings can serve as insightful indicators of our body’s nutritional needs. By understanding the potential links between specific cravings and nutrient deficiencies, we can make informed dietary choices that promote overall health. Emphasizing a balanced diet, staying attuned to our body’s signals, and seeking professional guidance when needed are pivotal steps toward well-being.

About Harpreet Pasricha (Author): Harpreet Pasricha is a renowned nutritionist, dietitian, and wellness expert with extensive experience in the field of health and nutrition. She is the founder of Diet Dr Clinic, where she provides personalized nutrition plans to individuals, athletes, and corporate clients. With a strong background in functional nutrition, Harpreet emphasizes a holistic approach to health, focusing on balanced diets, lifestyle modifications, and scientific dietary solutions. She has conducted numerous workshops and awareness programs on wellness, weight management, and sports nutrition. Passionate about empowering individuals with the right nutritional knowledge, she continues to inspire healthier lifestyles through her expertise and guidance.

एस जयशंकर ने यूएन महासचिव के विशेष दूत से की मुलाकात, म्यांमार को लेकर हुई चर्चा l

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दक्षिण-पूर्वी एशिया का एक छोटा सा देश म्यांमार जो आंतरिक कलह से जूझ रहा है। भारत का ये पड़ोसी देश लोकतंत्र की बहाली को लेकर जद्दोजहद कर रहा है। 2021 में सेना ने लोकतांत्रिक तरीके़ से चुनी हुई सरकार का तख़्तापलट किया था। जिसके बाद से म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत की अपने पड़ोसी देश म्यांमार की स्थिती पर हमेशा से नजरें लगी हुईं हैं। इसी क्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत जूली बिशप ने मंगलवार को म्यांमार में तेजी से बदलते हालात पर चर्चा की। पिछले साल अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बिशप को म्यांमार के लिए अपना विशेष दूत नियुक्त किया था। बिशप इन दिनों भारत की यात्रा पर आई हैं।

जयशंकर ने एक्स पर कहा कि मंगलवार शाम दिल्ली में म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जूली बिशप से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिरता, शरणार्थियों की स्थिति, म्यांमार से अंजाम दिए जा रहे अंतरराष्ट्रीय अपराध तथा देश को आर्थिक सहायता प्रदान करने के बारे में चर्चा हुई। राजनीतिक हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

म्यांमार भारत के रणनीतिक पड़ोसियों में से एक है और यह उग्रवाद प्रभावित नागालैंड और मणिपुर सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों के साथ 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। सीमा पर बढ़ती हिंसा और अस्थिरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी में सीमा पर बाड़ लगाने की योजना की घोषणा की थी।

इस साल फरवरी में, भारत और म्यांमार ने फार्मास्यूटिकल्स, दालों और बीन्स, पेट्रोलियम उत्पादों और हाल ही में शुरू किए गए रुपया-क्यात व्यापार निपटान तंत्र के अधिक उपयोग के क्षेत्रों में संभावनाओं पर चर्चा की ताकि आपसी विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

दोनों देशों के बीच चर्चा में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और म्यांमार के वाणिज्य मंत्रालय के उप मंत्री महामहिम यू मिन मिन ने भाग लिया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। बैठक के दौरान भारत और म्यांमार के नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया और सड़कों के माध्यम से सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने के महत्व को भी स्वीकार किया और इस मुद्दे पर कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।

ईआरओ, डीईओ, सीईओ स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ जमीनी स्तर की बैठकें जारी

रायपुर- देश भर में 4,123 ईआरओ अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों (एसी) में मतदान केंद्र स्तर पर लंबित किसी भी मुद्दे का समाधान करने के लिए सर्वदलीय बैठकें कर रहे हैं। इसी तरह, सभी 28 राज्यों और 8 संघ राज्य-क्षेत्रों के सभी 788 जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और 36 सीईओ को जिला और राज्य/संघ राज्य-क्षेत्र स्तर पर ऐसी बैठकों का आयोजन करने तथा लंबित मुद्दों का समाधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960, निर्वाचनों का संचालन नियम 1961 में निर्धारित कानूनी ढांचे और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी मैनुअल, दिशा-निर्देशों और अनुदेशों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है। राष्ट्रीय/राज्यीय राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी के साथ ये बैठकें पहले ही शुरू हो चुकी हैं। ऐसी सभी बैठकें पूरे देश में प्रत्येक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, जिले और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में 31 मार्च, 2025 तक पूरी कर ली जाएंगी।

यह कदम आयोग द्वारा 4 मार्च, 2025 को आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के सीईओ और प्रत्येक राज्य से एक डीईओ और ईआरओ की भागीदारी वाले सम्मेलन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में तथा निर्वाचन आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में दिए गए निदेशों के अनुरूप है।

राजनीतिक दलों और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों जैसे बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए), पोलिंग एजेंटों, काउंटिंग एजेंटों और चुनाव एजेंटों की चुनाव संचालन सहित विभिन्न चुनावी प्रक्रियाओं में विशिष्ट भूमिकाएं होती हैं।

विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों, जिलों और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आयोजित बैठकों में सक्रिय रूप से और उत्साहपूर्वक भाग लेकर राजनीतिक दलों द्वारा जमीनी स्तर पर उनकी इस प्रकार की भागीदारी का स्वागत किया गया है। आयोग सभी राष्ट्रीय/राज्यीय राजनीतिक दलों से अपील करता है कि वे किसी भी लंबित मुद्दे को समयबद्ध तरीके से हल करने के लिए चुनाव अधिकारियों के साथ अपनी इस जमीनी स्तर की भागीदारी का सक्रियतापूर्वक लाभ उठाएं। राष्ट्रव्यापी स्तर पर आयोजित राजनीतिक दलों की इन बैठकों की तस्वीरें आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडलः https://x.com/ECISVEEP?ref_src=twsrc%5Egoogle%7Ctwcamp%5Eserp%7Ctwgr%5Eauthor पर देखी जा सकती हैं।

आईपीएस अमित लोढ़ा बने एडीजी, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

डेस्क : बिहार पुलिस महकमे से एक बड़ी खबर सामने आई है। बिहार कैडर 1998 बैच के चर्चित आईपीएस अमित लोढा को प्रमोशन दिया गया है। गृह विभाग ने इससे जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है। राज्यपाल के आदेश के बाद सरकार के अवर सचिव एम.एस. रिजवानी ने इसे लेकर आदेश जारी किया है।

गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, अमित लोढ़ा को अपर पुलिस महानिदेशक कोटि में प्रमोशन दिया गया है। उनके कनीय 1998 बैच के आईपीएस रत्न संजय कटियार की सापेक्षता में प्रदान की जाती है। अमित लोढ़ा को प्रदत्त यह प्रोन्नति कनीय की तिथि से वैचारिक रूप से तथा प्रोन्नत कोटि में पदस्थापन के फलस्वरूप पदभार ग्रहण करने की तिथि से वास्तविक रूप से देय होगी।

बता दें अमित लोढ़ा 1998 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जो अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली और कड़ी मेहनत के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपनी सेवाओं के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और अपनी मेहनत से पुलिस सेवा में कई बदलाव लाए। अमित लोढ़ा राजस्थान से हैं और उन्हें विशेष रूप से उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई के लिए जाना जाता है।

अमित लोढ़ा बिहार के सबसे तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। इन्हें लोग बिहार का सिंघम भी कहते हैं। 'खाकी' नाम की वेब सीरीज इनके ऊपर बन चुकी है। हालांकि इन पर पद का दुरूपयोग कर गलत तरीके से पैसे कमाने का आरोप है। बीते दिनों अमित लोढ़ा और उनकी पत्नी कौमुदी लोढ़ा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में ईडी ने केस दर्ज किया था।

विशेष निगरानी इकाई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में 7 दिसंबर 2022 को FIR दर्ज की थी। तत्कालीन आईजी को इसमें नामजद अभियुक्त बनाया गया था। अमित लोढ़ा इस मामले में हाईकोर्ट भी गए, लेकिन राहत नहीं मिली। ईडी ने इसी के आधार पर उनके खिलाफ ECIR दर्ज की थी।

Our journalist had the privilege of speaking with Commander Mandeep Pasricha

Our journalist had the privilege of speaking with Commander Mandeep Pasricha, a seasoned veteran with 24 years of distinguished service in Indian Navy. He comes with management qualifications from JBIMS, Mumbai University, and Symbiosis Pune. He has also worked with aircraft giants like Boeing, Ilyushin and Israel Aerospace. He is a certified Project Management Professional, with wide exposure in Revenue and Capital procurements and Product Management.

With a wealth of leadership experience, strategic acumen, and an unshakable commitment to excellence, he has successfully navigated the challenging transition from military life to the corporate world. In this candid conversation, he shares invaluable insights, practical advice, and hard-earned lessons for fellow faujis considering their next mission—thriving in the business world.

Fauji to Fauji: The Corporate Transition Playbook – An Interview

Interviewer: Welcome, Cdr Pasricha! There’s always a lot of buzz around military personnel transitioning to the corporate world. Many serving officers are on the fence about making the switch. What’s the most common question you hear from your fellow faujis?

Cdr Pasricha: Oh, I get a range of them! "Will I adjust to the new world order?", "How is corporate life?", "Is there stability at work?", "What do I need to plan before leaving service?"—the list goes on. The transition can feel like stepping into uncharted territory, but trust me, it's nothing a Fauji can't handle!

Interviewer: That’s reassuring! But let's be honest—military life is all about discipline, structure, and a well-defined purpose. The corporate world, on the other hand, is more profit-driven. How does this impact retired personnel?

Cdr Pasricha: Ah, the great shift in purpose! In the military, every mission serves a greater good—national security, saving lives, protecting borders. In the corporate world, success is measured by profits, market shares, and business growth. Many veterans initially struggle to find meaning in their work. The trick is to align yourself with roles that resonate with your core values—leadership development, consulting, or even CSR initiatives. Find your mission within the mission!

Interviewer: Well said! Now, the work culture is another massive change. In the military, hierarchy is everything—orders are followed, no questions asked. But in corporate life, collaboration and debate are encouraged. How do retired officers adapt?

Cdr Pasricha: You nailed it! In the forces, when a command is given, it’s executed—period. In the corporate world, questioning, brainstorming, and debating ideas are the norm. Initially, this can feel chaotic for veterans. My advice? Observe first. Soak in the dynamics. Once you get the hang of it, you’ll see that leadership here is more about influence than authority.

And here’s a pro tip: Instead of giving orders, ask, "What do you think?"—it works wonders!

Interviewer: That’s a gold nugget right there! Another big shift must be decision-making. Military officers are trained to take quick, high-pressure decisions. But the corporate world thrives on stakeholder consensus. Is that a tough adjustment?

Cdr Pasricha: Absolutely! In the military, a delay in decision-making can be life-threatening. In business, it’s all about buy-in from different stakeholders, endless meetings, and navigating office politics. Initially, the pace can be frustrating. But once you learn the game, you’ll see that your ability to make firm, informed decisions is a superpower. Just learn to balance decisiveness with diplomacy.

Interviewer: Speaking of adjustments, work-life balance is another big one. Defence personnel live in a close-knit community. But in corporate life, people clock out and go their own way. How does this impact retired officers?

Cdr Pasricha: Oh, this is a real shocker! In the armed forces, your colleagues are your family. You live together, train together, celebrate together. Then suddenly, you’re in a world where relationships are transactional, and weekend plans are personal. The key is to build new networks—join corporate clubs, alumni groups, or even veteran communities. Find your tribe, and you won’t feel alone!

Interviewer: That makes sense. Now, let’s talk money. The military offers a structured salary, benefits, housing, and medical perks. In corporate life, it’s all about negotiations. How can veterans ensure they get their due?

Cdr Pasricha: Negotiating salaries? That’s foreign territory for most of us! In the forces, our pay scales are fixed. But in corporate life, everything is negotiable. My advice? Do your homework. Know your market value. Speak to other veterans who have transitioned. And don’t undersell yourself—your leadership, discipline, and crisis-management skills are priceless.

Interviewer: What about career progression? In the military, promotions are structured. But in business, growth depends on networking and performance. How do retired personnel adapt to this?

Cdr Pasricha: That’s a mindset shift! In the armed forces, you rise through the ranks over time. In corporate, you must actively chase opportunities—network, take on new challenges, switch functions if needed. It’s more of a jungle gym than a ladder. My tip? Be open to lateral moves; they often lead to bigger roles down the line!

Interviewer: This has been enlightening! Before we wrap up, can you share some tips for faujis planning their corporate transition?

Cdr Pasricha: Of course! Here are my top five:

Upskill yourself – An executive MBA, project management certification, or industry-specific training will make you job-ready.

Leverage veteran networks – Connect with those who have successfully transitioned; they’ll guide you through.

Embrace change – Be open to feedback, learn new skills, and adapt quickly.

Play to your strengths – Leadership, crisis management, discipline—these are gold in the corporate world.

Use specialized agencies – There are organizations that help veterans with job placements, resumes, and career counseling.

Interviewer: This has been an eye-opener! Thank you, Cdr Pasricha, for sharing your insights. One last question—would you say this transition is difficult?

Cdr Pasricha: Difficult? Not at all! Challenging? Yes. But show me a Fauji who doesn’t love a challenge! We’ve conquered tougher terrains—this is just another mission. Plan well, adapt fast, and march forward. The corporate world isn’t ready for the force that’s coming their way!

Interviewer: (Laughs) Well, that’s the spirit! Thanks again, Cdr Pasricha. Wishing all our veterans a smooth and successful transition!

Final Thought: For every Fauji considering the corporate shift, remember: You’re not just a job-seeker—you’re a leader, a strategist, and a problem-solver. The boardroom needs more of your kind. Go, own it!

ट्रंप ने फिर लिया भारत का नाम, बोले-जो जितना टैक्स लगाएगा, उस पर वैसे ही टैरिफ लगाएंगे, 2 अप्रैल तय की डेडलाइन

#reciprocal_tariffs_against_india_china_on_april_2_says_trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को यूएस कांग्रेस को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने टैरिफ को लेकर एक बार फिर भारत का नाम लिया। वहीं, चीन को भी घेरा।इस दौरान उन्होंने अपने 44 दिनों के कार्यकाल की उपलब्धिया गिनाई। साथ ही पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को अमेरिका का सबसे खराब राष्ट्रपति करार दिया।

डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए भारत, चीन, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों को अमेरिकी आयात पर उच्च शुल्क लगाने वाले देशों में रखा। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश हम पर जितना टैरिफ लगाएगा, हम उसके खिलाफ उतना ही टैरिफ लगाने जा रहे हैं। हमने इसके लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की है। ट्रंप ने कहा कि शुल्क अमेरिका को फिर से अमीर और महान बनाने के लिए हैं।

भारत हम पर ज्यादा टैरिफ चार्ज करता है-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है। अब उन अन्य देशों के खिलाफ उनके हथियार का ही इस्तेमाल करने की हमारी बारी है। औसतन यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत... और अनगिनत अन्य देश हमसे बहुत अधिक टैरिफ वसूलते हैं। उनकी तुलना में हम उनसे कम टैरिफ लेते हैं। यह बहुत अनुचित है। उन्होंने भारत का नाम लेकर कहा कि भारत हम पर ज्यादा टैरिफ चार्ज करता है। वह कई चीजों पर 100 फीसदी से अधिक टैरिफ चार्ज करता है। चीन हमसे दोगुना टैरिफ वसूलता है, दक्षिण कोरिया चार गुना टैरिफ लगाता है।

2 अप्रैल को पारस्परिक टैरिफ लागू होंगे-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 2 अप्रैल से जो देश जितना टैरिफ लगाएगा हम उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं चाहता था एक अप्रैल से करूं, लेकिन एक अप्रैल से नहीं किया क्यों एक अप्रैल ‘अप्रैल फूल’ डे है। हम नई ट्रेड पॉलिसी लाएंगे, जो अमेरिका के किसानों के लिए शानदार होगी। मैं किसानों से प्यार करता हूं। गंदा और घटिया विदेशी सामान अमेरिका में आ रहा है, जो अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी एल्युमिनियम, कॉपर, लंबर और स्टील पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। यह सिर्फ अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए नहीं हैं, ये हमारे देश की आत्मा की रक्षा करने के लिए हैं।

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ट्रंप आज से लागू करेंगे जवाबी हैरिफ, भारत समेत कई देशों पर होगा असर


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अमेरिकी आज यानी बुधवार से दुनियाभर में रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने जा रहा है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो अप्रैल से कई देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ यानी जवाबी आयात शुल्क लगाने का एलान करेंगे। व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा ट्रंप बुधवार को शाम 4 बजे (स्थानीय समय) रोज गार्डन में ‘मेक अमेरिका वेल्दी अगेन इवेंट में भाषण देंगे। इसी इवेंट में रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर घोषणा होगी।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को 'लिबरेशन डे' के रूप में मनाना चाहते हैं। इसके लिए वह अपने व्यापार सलाहकारों के साथ मिलकर टैरिफ योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। ट्रंप बुधवार को वाइट हाउस के रोज गार्डन में शाम 4 बजे (स्थानीय समय) औपचारिक घोषणा करेंगे। इस घोषणा में टैरिफ की पूरी जानकारी दी जाएगी। कैरोलीन लीविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं। अगर कोई विदेशी नेता या उद्योगपति छूट चाहते हैं तो वह उनसे बात करने को तैयार हैं। लीविट ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी श्रमिकों को उचित मौका दिलाने पर ध्यान दे रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने टैरिफ को लेकर यूरोपीय संघ, भारत, जापान और कनाडा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाता है, जबकि अन्य देशों की नीतियां भी इसी तरह की हैं। यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिकी डेयरी पर 50% तक, जापान की ओर से अमेरिकी चावल पर 700% तक और कनाडा की ओर से अमेरिकी मक्खन व पनीर पर लगभग 300% तक टैरिफ लगाया जाता है। लेविट ने कहा कि अमेरिकी उत्पादों के लिए ये शुल्क अनुचित व्यापार प्रथाएं हैं और हमें इसे बदलना होगा।

ट्रंप का दावा- भारत टैरिफ घटाने को राजी

ट्रंप ने जिन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है उनमें भारत भी शामिल है। हालांकि, एक दिन पहले तक भारत को 'टैरिफ किंग' और 'व्यापार के मामले में बड़ा दुर्व्यवहारकर्ता' कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद जताई है कि भारत उनके अन्य सहयोगियों की तरह अपने टैरिफ में कटौती करेगा। ओवल ऑफिस से बोलते हुए सोमवार को ट्रम्प ने कहा था, "मैंने सुना है कि भारत अपने टैरिफ में भारी कमी करने जा रहा है। बहुत से देश अपने टैरिफ में कमी करने जा रहे हैं।

ट्रंप ने कहा था कि भारत हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलता है

अमेरिकी संसद के जॉइंट सेशन में ट्रंप ने कहा था, भारत हमसे 100% से ज्यादा टैरिफ वसूलता है, हम भी अगले महीने से ऐसा ही करने जा रहे हैं। उन्होनें ऐलान किया कि उनके प्रशासन के तहत, अगर कोई कंपनी अमेरिका में अपना प्रोडक्ट नहीं बनाएगी, तो उसे टैरिफ देना होगा। कुछ मामलों में, यह टैरिफ बहुत बड़ा होगा।

1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा का हवाला

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दूसरे देश अमेरिका पर भारी टैक्स और टैरिफ लगाते हैं, जबकि अमेरिका उन पर बहुत कम लगाता है। यह बहुत अन्यायपूर्ण है। दूसरे देश दशकों से हम पर टैरिफ लगाते आ रहे हैं, अब हमारी बारी है। ट्रंप का कहना है कि कई देश अमेरिकी उत्पादों पर जबरदस्त टैरिफ लगाते हैं, वहीं अमेरिका उन देशों के उत्पादों पर कम आयात शुल्क वसूलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि इसकी वजह से अमेरिका को 1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार घाटा उठाना पड़ता है, जो कि अमेरिकी उद्योगों और कामगारों के लिए नुकसान देह है।

टैरिफ एक तरह का बॉर्डर फीस या टैक्स होता है, जो कोई भी देश विदेशों से अपने यहां आने वाले सामान पर लगाता है। यह टैक्स आयात करने वाली कंपनी पर लगाया जाता है। इसे घटा-बढ़ाकर ही देश आपस में व्यापार को कंट्रोल करते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग का राजनीतिक दलों के साथ सबसे बड़ा सहभागिता अभियान

नई दिल्ली-  भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देश भर में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ अनेक संरचनाबद्ध सहभागिता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 25 दिनों की अवधि में और 31 मार्च 2025 तक, कुल 4,719 बैठकें आयोजित की गई, जिनमें सीईओ द्वारा 40, डीईओ द्वारा 800 और ईआरओ द्वारा 3,879 बैठकों का आयोजन किया गया। इनमें देश-भर से राजनीतिक दलों के 28,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

ये बैठकें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी द्वारा 4-5 मार्च, 2025 को आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान जारी निदेशों के अनुसरण में आयोजित की गईं।

इन बैठकों का उद्देश्य संबंधित सक्षम प्राधिकारी यानी ईआरओ या डीईओ या सीईओ द्वारा किसी भी लंबित मुद्दे का लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960, निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 में निर्धारित कानूनी ढांचे और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी मैनुअल, दिशा-निर्देशों और अनुदेशों के भीतर समाधान करना है। सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के सीईओ से आगे और मूल्यांकन किए जाने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है और मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर कोई भी मुद्दा यदि अनसुलझा रह जाता है, तो आयोग द्वारा उस पर विचार किया जाएगा।

राजनीतिक दलों द्वारा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों, जिलों और राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों में आयोजित इन बैठकों में सक्रिय और उत्साहपूर्ण सहभागिता करके इनका स्वागत किया गया है। देश-भर से प्राप्त इन बैठकों की तस्वीरें आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर देखी जा सकती हैं: https://x.com/ECISVEEP?refsrc=twsrc%5E.google%7Ctwcamp%5Eserp%7Ctwgr%5Eauthor

दंतेवाड़ा नक्सल एनकाउंटर : DRG की जवानों ने 25 लाख की ईनामी नक्सली रेणुका को मार गिराया

दंतेवाड़ा- दंतेवाड़ा-बीजापुर जिला के सरहदी नेलगोड़ा, एकेली और बेलनार इलाके में आज सुबह DRG के जवानों की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें 25 लाख की ईनामी DKSZC मेंबर रेणुका उर्फ बानु को मार गिराया. इनकाउंटर से लौटते समय जवानों का हौसला हाफजाई करने DIG कमलोचन कश्यप पहुंचे थे. 

DKSZCM (Dandakaranya Special Zonal Committee Member) नक्सली संगठन में एक बड़ी जिम्मेदारी का पद होता है, जो मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना के नक्सल ग्रस्त इलाकों में सक्रिय है.

यह स्पेशल जोनल कमेटी बड़े फैसले लेने वाली क्षमता रखती है, जो नक्सली गतिविधियों की योजना, रणनीति और संचालन की देखरेख करती है. इस कमेटी के सदस्य (DKSZCM) संगठन के अंदर महत्वपूर्ण पदों पर होते हैं, और उन्हें बड़े ऑपरेशनों की जिम्मेदारी दी जाती है.

Nutrition experts Talk on Decoding Cravings: Understanding the Connection Between Nutrient Deficiencies and Food Desires

In March, a team of diet consultants, led by Nutritionist Harpreet Pasricha, conducted a series of talks on cravings in celebration of International Women’s Day. These sessions were held at Pentair, Mount Litera Zee School, Indian Naval units, and all Diet Dr Clinics in Goa, Ludhiana, and Amritsar.

Cravings are intense desires for specific foods that many individuals experience. While they can be influenced by emotions and habits, they may also indicate underlying nutrient deficiencies. This article explores the possible link between cravings and nutritional gaps, offering insights on how to address them effectively.

Understanding Cravings

Cravings are more than mere hunger; they are powerful urges for particular foods. These desires can be influenced by:

• Physiological Needs: The body’s requirement for specific nutrients.

• Emotional States: Stress, anxiety, or sadness leading to comfort eating.

• Hormonal Fluctuations: Changes during menstrual cycles or pregnancy affecting appetite.

Recognizing the root cause of cravings is essential for maintaining overall health and well-being.

Common Cravings and Their Potential Nutrient Links

1. Chocolate

• Possible Deficiency: Magnesium

• Explanation: Chocolate, especially dark chocolate, is rich in magnesium. A craving for chocolate might indicate a need for this essential mineral, which plays roles in muscle function, nerve signaling, and energy production.

• Sources of Magnesium: Nuts, seeds, legumes, whole grains, and leafy green vegetables.

2. Ice (Pagophagia)

• Possible Deficiency: Iron

• Explanation: The compulsive consumption of ice, known as pagophagia, has been linked to iron-deficiency anemia. Chewing ice may provide temporary relief to oral inflammation caused by anemia.

• Sources of Iron: Red meat, poultry, seafood, beans, dark leafy greens, and iron-fortified cereals.

3. Salty Foods

• Possible Deficiency: Sodium or Chloride

• Explanation: An intense desire for salty snacks might suggest an electrolyte imbalance, particularly involving sodium or chloride. These minerals are vital for maintaining fluid balance and nerve function.

• Sources of Sodium and Chloride: Table salt, seafood, and vegetables like celery and tomatoes.

4. Red Meat

• Possible Deficiency: Iron or Vitamin B12

• Explanation: Craving red meat could signal low levels of iron or vitamin B12, both crucial for red blood cell formation and preventing anemia.

• Sources of Vitamin B12: Fish, meat, poultry, eggs, and dairy products.

5. Cheese or Dairy

• Possible Deficiency: Calcium or Vitamin D

• Explanation: A hankering for cheese or dairy products may indicate a need for calcium or vitamin D, essential for bone health and muscle function.

• Sources of Calcium: Dairy products, fortified plant-based milks, and leafy green vegetables.

• Sources of Vitamin D: Fatty fish, fortified dairy products, and exposure to sunlight.

6. Sugary Foods

• Possible Deficiency: Chromium or Magnesium

• Explanation: A sweet tooth might be linked to low levels of chromium, which aids in blood sugar regulation, or magnesium, involved in glucose metabolism.

• Sources of Chromium: Broccoli, grapes, whole-grain products, and meats.

7. Pickles or Sour Foods

• Possible Deficiency: Sodium

• Explanation: Craving pickles or sour foods can be a sign of sodium deficiency, especially in individuals with low blood pressure or those losing sodium through sweat.

8. Fried or Fatty Foods

• Possible Deficiency: Essential Fatty Acids

• Explanation: A desire for fried foods may suggest a lack of essential fatty acids, necessary for brain function and hormone production.

• Sources of Essential Fatty Acids: Fatty fish, flaxseeds, walnuts, and chia seeds.

9. Carbonated Drinks

• Possible Deficiency: Calcium

• Explanation: Some theories propose that craving fizzy drinks is linked to low calcium levels, though more research is needed in this area.

The Broader Impact of Nutrient Deficiencies

Nutrient deficiencies can manifest in various ways beyond cravings.

For instance:

• Iron Deficiency: Affects approximately one in three adults, leading to symptoms like fatigue, dizziness, and pica (craving non-nutritional substances). Addressing this requires incorporating iron-rich foods into the diet or considering supplements under medical guidance.

• Hidden Hunger: This term refers to subclinical nutrient deficiencies that don’t show immediate symptoms but can increase the risk of chronic diseases, including type 2 diabetes. A balanced diet rich in essential nutrients is crucial to combat this issue.

Addressing and Preventing Nutrient Deficiencies

To mitigate cravings linked to nutrient deficiencies:

• Balanced Diet: Ensure a varied diet that includes all essential nutrients. Incorporate fruits, vegetables, whole grains, lean proteins, and healthy fats.

• Regular Health Check-ups: Routine medical examinations can detect deficiencies early, allowing for timely interventions.

• Mindful Eating: Pay attention to hunger cues and cravings. Reflecting on what your body might be signaling can guide healthier food choices.

• Supplementation: When necessary, supplements can help address specific deficiencies. However, it’s essential to consult with a healthcare professional before starting any supplement regimen.

When to Seek Professional Help

If you experience persistent cravings or suspect a nutrient deficiency, consulting a registered dietitian or nutritionist is advisable. They can assess your dietary habits, identify potential deficiencies, and determine underlying causes, such as:

• Dietary Imbalances: Consuming foods that hinder nutrient absorption or lack essential nutrients.

• Malabsorption Issues: Conditions like celiac disease, Crohn’s disease, or environmental enteropathy can impair nutrient absorption, leading to deficiencies. For instance, environmental enteropathy, prevalent in low-resource settings, is characterized by chronic intestinal inflammation, reducing nutrient absorption and leading to malnutrition and stunted growth.

• Medication Interactions: Some medications can interfere with nutrient absorption. For example, metformin, a common diabetes medication, has been associated with vitamin B12 deficiency.

A healthcare professional can conduct necessary tests to diagnose deficiencies and recommend appropriate dietary adjustments or supplements.

To summarise, cravings can serve as insightful indicators of our body’s nutritional needs. By understanding the potential links between specific cravings and nutrient deficiencies, we can make informed dietary choices that promote overall health. Emphasizing a balanced diet, staying attuned to our body’s signals, and seeking professional guidance when needed are pivotal steps toward well-being.

About Harpreet Pasricha (Author): Harpreet Pasricha is a renowned nutritionist, dietitian, and wellness expert with extensive experience in the field of health and nutrition. She is the founder of Diet Dr Clinic, where she provides personalized nutrition plans to individuals, athletes, and corporate clients. With a strong background in functional nutrition, Harpreet emphasizes a holistic approach to health, focusing on balanced diets, lifestyle modifications, and scientific dietary solutions. She has conducted numerous workshops and awareness programs on wellness, weight management, and sports nutrition. Passionate about empowering individuals with the right nutritional knowledge, she continues to inspire healthier lifestyles through her expertise and guidance.

एस जयशंकर ने यूएन महासचिव के विशेष दूत से की मुलाकात, म्यांमार को लेकर हुई चर्चा l

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दक्षिण-पूर्वी एशिया का एक छोटा सा देश म्यांमार जो आंतरिक कलह से जूझ रहा है। भारत का ये पड़ोसी देश लोकतंत्र की बहाली को लेकर जद्दोजहद कर रहा है। 2021 में सेना ने लोकतांत्रिक तरीके़ से चुनी हुई सरकार का तख़्तापलट किया था। जिसके बाद से म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत की अपने पड़ोसी देश म्यांमार की स्थिती पर हमेशा से नजरें लगी हुईं हैं। इसी क्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत जूली बिशप ने मंगलवार को म्यांमार में तेजी से बदलते हालात पर चर्चा की। पिछले साल अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बिशप को म्यांमार के लिए अपना विशेष दूत नियुक्त किया था। बिशप इन दिनों भारत की यात्रा पर आई हैं।

जयशंकर ने एक्स पर कहा कि मंगलवार शाम दिल्ली में म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जूली बिशप से मिलकर खुशी हुई। उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिरता, शरणार्थियों की स्थिति, म्यांमार से अंजाम दिए जा रहे अंतरराष्ट्रीय अपराध तथा देश को आर्थिक सहायता प्रदान करने के बारे में चर्चा हुई। राजनीतिक हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

म्यांमार भारत के रणनीतिक पड़ोसियों में से एक है और यह उग्रवाद प्रभावित नागालैंड और मणिपुर सहित कई पूर्वोत्तर राज्यों के साथ 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। सीमा पर बढ़ती हिंसा और अस्थिरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी में सीमा पर बाड़ लगाने की योजना की घोषणा की थी।

इस साल फरवरी में, भारत और म्यांमार ने फार्मास्यूटिकल्स, दालों और बीन्स, पेट्रोलियम उत्पादों और हाल ही में शुरू किए गए रुपया-क्यात व्यापार निपटान तंत्र के अधिक उपयोग के क्षेत्रों में संभावनाओं पर चर्चा की ताकि आपसी विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

दोनों देशों के बीच चर्चा में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और म्यांमार के वाणिज्य मंत्रालय के उप मंत्री महामहिम यू मिन मिन ने भाग लिया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। बैठक के दौरान भारत और म्यांमार के नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया और सड़कों के माध्यम से सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने के महत्व को भी स्वीकार किया और इस मुद्दे पर कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।

ईआरओ, डीईओ, सीईओ स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ जमीनी स्तर की बैठकें जारी

रायपुर- देश भर में 4,123 ईआरओ अपने-अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों (एसी) में मतदान केंद्र स्तर पर लंबित किसी भी मुद्दे का समाधान करने के लिए सर्वदलीय बैठकें कर रहे हैं। इसी तरह, सभी 28 राज्यों और 8 संघ राज्य-क्षेत्रों के सभी 788 जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और 36 सीईओ को जिला और राज्य/संघ राज्य-क्षेत्र स्तर पर ऐसी बैठकों का आयोजन करने तथा लंबित मुद्दों का समाधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960, निर्वाचनों का संचालन नियम 1961 में निर्धारित कानूनी ढांचे और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी मैनुअल, दिशा-निर्देशों और अनुदेशों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है। राष्ट्रीय/राज्यीय राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी के साथ ये बैठकें पहले ही शुरू हो चुकी हैं। ऐसी सभी बैठकें पूरे देश में प्रत्येक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, जिले और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में 31 मार्च, 2025 तक पूरी कर ली जाएंगी।

यह कदम आयोग द्वारा 4 मार्च, 2025 को आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के सीईओ और प्रत्येक राज्य से एक डीईओ और ईआरओ की भागीदारी वाले सम्मेलन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में तथा निर्वाचन आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी की उपस्थिति में दिए गए निदेशों के अनुरूप है।

राजनीतिक दलों और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों जैसे बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए), पोलिंग एजेंटों, काउंटिंग एजेंटों और चुनाव एजेंटों की चुनाव संचालन सहित विभिन्न चुनावी प्रक्रियाओं में विशिष्ट भूमिकाएं होती हैं।

विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों, जिलों और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में आयोजित बैठकों में सक्रिय रूप से और उत्साहपूर्वक भाग लेकर राजनीतिक दलों द्वारा जमीनी स्तर पर उनकी इस प्रकार की भागीदारी का स्वागत किया गया है। आयोग सभी राष्ट्रीय/राज्यीय राजनीतिक दलों से अपील करता है कि वे किसी भी लंबित मुद्दे को समयबद्ध तरीके से हल करने के लिए चुनाव अधिकारियों के साथ अपनी इस जमीनी स्तर की भागीदारी का सक्रियतापूर्वक लाभ उठाएं। राष्ट्रव्यापी स्तर पर आयोजित राजनीतिक दलों की इन बैठकों की तस्वीरें आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडलः https://x.com/ECISVEEP?ref_src=twsrc%5Egoogle%7Ctwcamp%5Eserp%7Ctwgr%5Eauthor पर देखी जा सकती हैं।

आईपीएस अमित लोढ़ा बने एडीजी, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

डेस्क : बिहार पुलिस महकमे से एक बड़ी खबर सामने आई है। बिहार कैडर 1998 बैच के चर्चित आईपीएस अमित लोढा को प्रमोशन दिया गया है। गृह विभाग ने इससे जुड़ी अधिसूचना जारी कर दी है। राज्यपाल के आदेश के बाद सरकार के अवर सचिव एम.एस. रिजवानी ने इसे लेकर आदेश जारी किया है।

गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक, राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, अमित लोढ़ा को अपर पुलिस महानिदेशक कोटि में प्रमोशन दिया गया है। उनके कनीय 1998 बैच के आईपीएस रत्न संजय कटियार की सापेक्षता में प्रदान की जाती है। अमित लोढ़ा को प्रदत्त यह प्रोन्नति कनीय की तिथि से वैचारिक रूप से तथा प्रोन्नत कोटि में पदस्थापन के फलस्वरूप पदभार ग्रहण करने की तिथि से वास्तविक रूप से देय होगी।

बता दें अमित लोढ़ा 1998 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जो अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली और कड़ी मेहनत के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपनी सेवाओं के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और अपनी मेहनत से पुलिस सेवा में कई बदलाव लाए। अमित लोढ़ा राजस्थान से हैं और उन्हें विशेष रूप से उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई के लिए जाना जाता है।

अमित लोढ़ा बिहार के सबसे तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। इन्हें लोग बिहार का सिंघम भी कहते हैं। 'खाकी' नाम की वेब सीरीज इनके ऊपर बन चुकी है। हालांकि इन पर पद का दुरूपयोग कर गलत तरीके से पैसे कमाने का आरोप है। बीते दिनों अमित लोढ़ा और उनकी पत्नी कौमुदी लोढ़ा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में ईडी ने केस दर्ज किया था।

विशेष निगरानी इकाई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में 7 दिसंबर 2022 को FIR दर्ज की थी। तत्कालीन आईजी को इसमें नामजद अभियुक्त बनाया गया था। अमित लोढ़ा इस मामले में हाईकोर्ट भी गए, लेकिन राहत नहीं मिली। ईडी ने इसी के आधार पर उनके खिलाफ ECIR दर्ज की थी।

Our journalist had the privilege of speaking with Commander Mandeep Pasricha

Our journalist had the privilege of speaking with Commander Mandeep Pasricha, a seasoned veteran with 24 years of distinguished service in Indian Navy. He comes with management qualifications from JBIMS, Mumbai University, and Symbiosis Pune. He has also worked with aircraft giants like Boeing, Ilyushin and Israel Aerospace. He is a certified Project Management Professional, with wide exposure in Revenue and Capital procurements and Product Management.

With a wealth of leadership experience, strategic acumen, and an unshakable commitment to excellence, he has successfully navigated the challenging transition from military life to the corporate world. In this candid conversation, he shares invaluable insights, practical advice, and hard-earned lessons for fellow faujis considering their next mission—thriving in the business world.

Fauji to Fauji: The Corporate Transition Playbook – An Interview

Interviewer: Welcome, Cdr Pasricha! There’s always a lot of buzz around military personnel transitioning to the corporate world. Many serving officers are on the fence about making the switch. What’s the most common question you hear from your fellow faujis?

Cdr Pasricha: Oh, I get a range of them! "Will I adjust to the new world order?", "How is corporate life?", "Is there stability at work?", "What do I need to plan before leaving service?"—the list goes on. The transition can feel like stepping into uncharted territory, but trust me, it's nothing a Fauji can't handle!

Interviewer: That’s reassuring! But let's be honest—military life is all about discipline, structure, and a well-defined purpose. The corporate world, on the other hand, is more profit-driven. How does this impact retired personnel?

Cdr Pasricha: Ah, the great shift in purpose! In the military, every mission serves a greater good—national security, saving lives, protecting borders. In the corporate world, success is measured by profits, market shares, and business growth. Many veterans initially struggle to find meaning in their work. The trick is to align yourself with roles that resonate with your core values—leadership development, consulting, or even CSR initiatives. Find your mission within the mission!

Interviewer: Well said! Now, the work culture is another massive change. In the military, hierarchy is everything—orders are followed, no questions asked. But in corporate life, collaboration and debate are encouraged. How do retired officers adapt?

Cdr Pasricha: You nailed it! In the forces, when a command is given, it’s executed—period. In the corporate world, questioning, brainstorming, and debating ideas are the norm. Initially, this can feel chaotic for veterans. My advice? Observe first. Soak in the dynamics. Once you get the hang of it, you’ll see that leadership here is more about influence than authority.

And here’s a pro tip: Instead of giving orders, ask, "What do you think?"—it works wonders!

Interviewer: That’s a gold nugget right there! Another big shift must be decision-making. Military officers are trained to take quick, high-pressure decisions. But the corporate world thrives on stakeholder consensus. Is that a tough adjustment?

Cdr Pasricha: Absolutely! In the military, a delay in decision-making can be life-threatening. In business, it’s all about buy-in from different stakeholders, endless meetings, and navigating office politics. Initially, the pace can be frustrating. But once you learn the game, you’ll see that your ability to make firm, informed decisions is a superpower. Just learn to balance decisiveness with diplomacy.

Interviewer: Speaking of adjustments, work-life balance is another big one. Defence personnel live in a close-knit community. But in corporate life, people clock out and go their own way. How does this impact retired officers?

Cdr Pasricha: Oh, this is a real shocker! In the armed forces, your colleagues are your family. You live together, train together, celebrate together. Then suddenly, you’re in a world where relationships are transactional, and weekend plans are personal. The key is to build new networks—join corporate clubs, alumni groups, or even veteran communities. Find your tribe, and you won’t feel alone!

Interviewer: That makes sense. Now, let’s talk money. The military offers a structured salary, benefits, housing, and medical perks. In corporate life, it’s all about negotiations. How can veterans ensure they get their due?

Cdr Pasricha: Negotiating salaries? That’s foreign territory for most of us! In the forces, our pay scales are fixed. But in corporate life, everything is negotiable. My advice? Do your homework. Know your market value. Speak to other veterans who have transitioned. And don’t undersell yourself—your leadership, discipline, and crisis-management skills are priceless.

Interviewer: What about career progression? In the military, promotions are structured. But in business, growth depends on networking and performance. How do retired personnel adapt to this?

Cdr Pasricha: That’s a mindset shift! In the armed forces, you rise through the ranks over time. In corporate, you must actively chase opportunities—network, take on new challenges, switch functions if needed. It’s more of a jungle gym than a ladder. My tip? Be open to lateral moves; they often lead to bigger roles down the line!

Interviewer: This has been enlightening! Before we wrap up, can you share some tips for faujis planning their corporate transition?

Cdr Pasricha: Of course! Here are my top five:

Upskill yourself – An executive MBA, project management certification, or industry-specific training will make you job-ready.

Leverage veteran networks – Connect with those who have successfully transitioned; they’ll guide you through.

Embrace change – Be open to feedback, learn new skills, and adapt quickly.

Play to your strengths – Leadership, crisis management, discipline—these are gold in the corporate world.

Use specialized agencies – There are organizations that help veterans with job placements, resumes, and career counseling.

Interviewer: This has been an eye-opener! Thank you, Cdr Pasricha, for sharing your insights. One last question—would you say this transition is difficult?

Cdr Pasricha: Difficult? Not at all! Challenging? Yes. But show me a Fauji who doesn’t love a challenge! We’ve conquered tougher terrains—this is just another mission. Plan well, adapt fast, and march forward. The corporate world isn’t ready for the force that’s coming their way!

Interviewer: (Laughs) Well, that’s the spirit! Thanks again, Cdr Pasricha. Wishing all our veterans a smooth and successful transition!

Final Thought: For every Fauji considering the corporate shift, remember: You’re not just a job-seeker—you’re a leader, a strategist, and a problem-solver. The boardroom needs more of your kind. Go, own it!

ट्रंप ने फिर लिया भारत का नाम, बोले-जो जितना टैक्स लगाएगा, उस पर वैसे ही टैरिफ लगाएंगे, 2 अप्रैल तय की डेडलाइन

#reciprocal_tariffs_against_india_china_on_april_2_says_trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को यूएस कांग्रेस को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने टैरिफ को लेकर एक बार फिर भारत का नाम लिया। वहीं, चीन को भी घेरा।इस दौरान उन्होंने अपने 44 दिनों के कार्यकाल की उपलब्धिया गिनाई। साथ ही पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को अमेरिका का सबसे खराब राष्ट्रपति करार दिया।

डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए भारत, चीन, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों को अमेरिकी आयात पर उच्च शुल्क लगाने वाले देशों में रखा। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश हम पर जितना टैरिफ लगाएगा, हम उसके खिलाफ उतना ही टैरिफ लगाने जा रहे हैं। हमने इसके लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की है। ट्रंप ने कहा कि शुल्क अमेरिका को फिर से अमीर और महान बनाने के लिए हैं।

भारत हम पर ज्यादा टैरिफ चार्ज करता है-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है। अब उन अन्य देशों के खिलाफ उनके हथियार का ही इस्तेमाल करने की हमारी बारी है। औसतन यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत... और अनगिनत अन्य देश हमसे बहुत अधिक टैरिफ वसूलते हैं। उनकी तुलना में हम उनसे कम टैरिफ लेते हैं। यह बहुत अनुचित है। उन्होंने भारत का नाम लेकर कहा कि भारत हम पर ज्यादा टैरिफ चार्ज करता है। वह कई चीजों पर 100 फीसदी से अधिक टैरिफ चार्ज करता है। चीन हमसे दोगुना टैरिफ वसूलता है, दक्षिण कोरिया चार गुना टैरिफ लगाता है।

2 अप्रैल को पारस्परिक टैरिफ लागू होंगे-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 2 अप्रैल से जो देश जितना टैरिफ लगाएगा हम उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं चाहता था एक अप्रैल से करूं, लेकिन एक अप्रैल से नहीं किया क्यों एक अप्रैल ‘अप्रैल फूल’ डे है। हम नई ट्रेड पॉलिसी लाएंगे, जो अमेरिका के किसानों के लिए शानदार होगी। मैं किसानों से प्यार करता हूं। गंदा और घटिया विदेशी सामान अमेरिका में आ रहा है, जो अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी एल्युमिनियम, कॉपर, लंबर और स्टील पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। यह सिर्फ अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए नहीं हैं, ये हमारे देश की आत्मा की रक्षा करने के लिए हैं।

Dignexus: Your One-Stop Shop in Kolkata for Mobile App Development, Website Design, and Digital Marketing

 

Dignexus, a reputed company that excels in Data-Driven Digital Marketing, Custom Software Development, and Mobile App Development, is proud to commemorate ten years of success in the IT industry. They are one of the pioneers in IT consulting and development services and can boast of their ground-breaking solutions that enhance the growth of their clients and help them stay ahead of their competitors. 

The Vision Behind The Success So Far

Dignexus commenced its successful journey 10 years ago with a dream and vision to empower businesses with data-driven strategies and cutting-edge technology. So far they have worked with numerous companies from different niches and have been a part of their clients’ success stories.

The vast sphere of companies in which they have excelled includes healthcare, e-commerce, banking, education, automotive, travel, and both B2B and B2C sectors.

Empowering Clients for Success 

Dignexus' main focus and priority is to empower the clients and make their vision into a reality. The motto they abide by is helping the clients "win in their domain." That vision has always been the driving force behind the excellent teamwork of Dignexus. The skilled team is always eager to walk the extra mile to deliver more than expected. 

Dignexus’s industry-leading solutions and innovative approach are what make them stand apart from other companies. From designing engaging and efficient mobile applications to developing custom software tailored to specific business requirements, Dignexus makes sure its clients stay ahead in the cutthroat market of today.

Why Dignexus Is the Best Choice

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As the best Digital Marketing Agency in Kolkata, we can efficiently leverage the true power of analytics to create data-based campaigns that maximize ROI.

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We have already earned our name and have been recognized as the best Website Design Company in Kolkata. We are known for creating visually stunning and user-friendly websites that enhance brand presence.

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We have successfully completed a decade as one of the best solution-driven companies with a large number of clients applauding us.  

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From empowering startups to simplifying operations for large corporations, Dignexus has been essential in helping companies succeed in their domains. The diverse industries represented in our portfolio demonstrate our capacity to adapt to the different needs of different clients. 

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Dignexus is a Kolkata-based IT consulting and development company specializing in Mobile App Development, Custom Software Development, and Data-Driven Digital Marketing. With 10 years of industry experience and an excellent team of skilled and dedicated professionals, Dignexus is focused on evolving to keep delivering world-class IT solutions that empower businesses to achieve their business goals.

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