11th Annual Day of CD Foundation Brings Diplomacy, Tourism, Wellness & Global Collaboration Together in Delhi

New Delhi, 12 May 2026:New Delhi witnessed a unique coming together of diplomacy, culture, hospitality, entrepreneurship, wellness, and international engagement as CD Foundation celebrated its 11th Annual Day – Coffee Morning with Multiple Countries at Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR.

The gathering brought together diplomats, foreign dignitaries, tourism stakeholders, healthcare experts, hospitality leaders, academia, entrepreneurs, media, and institutional representatives for meaningful conversations around global collaboration, cultural diplomacy, tourism ecosystems, and people-to-people engagement.

Over the last 11 years, CD Foundation has steadily built a strong international presence through more than 100 initiatives across 45+ countries in collaboration with embassies, universities, hospitality groups, healthcare institutions, tourism stakeholders, and international organisations.

This year’s edition was curated around the theme:

“Tourism, Hospitality & Global Engagement: New Pathways for International Collaboration”

and reflected the organisation’s growing focus on relationship-driven international engagement through culture, wellness, tourism, entrepreneurship, and dialogue.

One of the most significant highlights of the morning was the launch of:

GOLDEN YEARS GLOBAL

“Ageing with Dignity – Travel, Wellness & Culture”

a new initiative by CD Foundation focused on premium elderly wellness, assisted luxury travel, cultural experiences, and meaningful global engagement for senior generations.

The initiative was unveiled by Mrs. Sumita Das, Dr. Prasun Chatterjee, and Mr. Kazem Samandari, Executive Chairman & Co-Founder of L’Opéra India, with the launch emerging as one of the most appreciated moments of the event.

Speaking during the programme, Dr. Prasun Chatterjee, Apollo Hospitals and WHO Advisory Member, highlighted the increasing global importance of conversations around longevity, wellbeing, emotional health, and quality of life for senior generations.

The programme also featured a Special Address by H.E. Mr. Wang Xinming, Minister Counsellor (Culture), Embassy of the People’s Republic of China, who appreciated CD Foundation’s efforts towards international cultural engagement and expressed interest in future Indo-cultural collaborations and people-to-people exchange initiatives.

A strong emphasis was also placed on youth engagement, entrepreneurship, and academic collaboration. Prof. Kumar Ashutosh from DCEE, University of Delhi, spoke about the importance of stronger partnerships between educational institutions, tourism ecosystems, entrepreneurship platforms, and international stakeholders to create meaningful opportunities for future generations.

Guests were hosted with a specially curated hospitality experience by Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR, whose elegant ambience and elaborate gourmet spread added significantly to the experience of the morning.

Commenting on the occasion, Mr. Ramneet Singh, Hotel Manager, Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR, said:

“It has been a privilege to host such a distinguished international gathering. The presence of diplomats and global delegates added tremendous prestige and visibility to the occasion.”

Reflecting on the organisation’s journey, Ms. Charu Das, Founder & Director, CD Foundation, said:

“For us, this platform has always been about creating meaningful international relationships and bringing together diplomacy, culture, tourism, wellness, entrepreneurship, and human connection under one shared vision.”

The event was organised by CD Foundation and Entrepreneur’s Club World & Us in partnership with Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR, with academic collaboration from DCEE, University of Delhi. Supporting partners included Drillcon Infrastructure Pvt. Ltd. and Perfume Point.

LinkedIn: https://linkedin.com/company/cdfoundationofficial

हमें अभी किसी युद्ध की जरूरत नहीं', ताइवान मुद्दे पर बदले ट्रंप के सुर, जिनपिंग की धमकी का असर?

#donaldtrumpsoftensstanceonchinaafterbejingvisit

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन और ताइवान के बीच चल रहे भारी तनाव को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर ताइवान पर बदले नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय अमेरिका को किसी भी युद्ध की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, खासकर ऐसे युद्ध की जो 9,500 मील दूर हो।

चीन यात्रा के समापन पर फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ट्रंप ने ताइवान को लेकर कहा, "हम युद्ध नहीं चाहते हैं और अगर आप स्थिति को वैसा ही बनाए रखते हैं, जैसी वह अभी है, तो मुझे लगता है कि चीन को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई यह कहे, चलो हम स्वतंत्र हो जाते हैं, क्योंकि अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है।" इंटरव्यू में ट्रंप ने दोहराया कि ताइवान पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

1982 के समझौते और हथियारों की बिक्री पर क्या बोले ट्रंप?

पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा 1982 में दिए गए उस भरोसे के बारे में पूछा, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचने पर चीन से सलाह नहीं लेगा, तो ट्रंप ने इसका बेबाकी से जवाब दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 1982 अब बहुत पुरानी बात हो चुकी है।

9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत-ट्रंप

ट्रंप ने साफ किया कि बातचीत के दौरान खुद चीनी राष्ट्रपति ने यह मुद्दा उठाया था। ट्रंप ने कहा कि वे 1982 के समझौते का हवाला देकर बातचीत से पीछे नहीं हट सकते थे। इसलिए दोनों नेताओं ने ताइवान और उसे हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि इस पर वह जल्द ही कोई फैसला लेंगे, लेकिन अभी 9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत है।

क्यों बदले ट्रंप के सुर?

ट्रंप का यह बयान तब आया है, जब शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मीटिंग में ताइवान के मुद्दे पर चेतावनी दे दी थी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। शी ने ट्रंप से कहा, अगर ताइवान के मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों में टकराव या यहां तक कि झड़प भी हो सकती।

चीन और ताइवान में तनाव की वजह

चीन ताइवान पर अपना अधिकार जताता है और इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं करता है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का कहना है कि ताइवान को औपचारिक आजादी घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह खुद को पहले से ही एक संप्रभु राष्ट्र मानता है। ताइवान के राष्ट्रपति को लेकर बीजिंग अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुका है। चीन ने उन्हें समस्या पैदा करने वाला और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति भंग करने वाला बताया है। ताइवान में बहुत से लोग खुद को अलग देश का हिस्सा मानते हैं। हालांकि, उनमें से ज्यादातर मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के पक्ष में हैं, जिसमें ताइवान न तो चीन से आजादी घोषित करता है और न ही उसके साथ होता है।वहीं, अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता रहा है, जिसमें उसे आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराना भी शामिल है।

ताइवान मुद्दे पर अमेरिका संग सैन्य संघर्ष भी हो सकता है', चीन पहुंचे ट्रंप को जिनपिंग की चेतावनी

#uschinasummitxijinpingwarnsdonald_trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर हैं। सुबह ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया। हालांकि, जल्द ही बीजिंग में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की मुलाकात के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोस्ती और शानदार भविष्य की बातें कर रहे थे, वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ चेतावनी दे दी कि अगर ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है।

ट्रंप ने शी को बताया महान नेता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय बैठक से पहले उद्घाटन भाषण में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महान नेता बताया। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वह जिनपिंग के साथ बातचीत को लेकर उत्साहित हैं और अमेरिका में हर कोई इस शिखर बैठक की चर्चा कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि आपके साथ होना सम्मान की बात है। आपका दोस्त होना सम्मान की बात है और अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं।

ट्रंप ने दिया अमेरिका-चीन संबंध की मजबूती पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को साझेदार होना चाहिए, न कि प्रतिद्वंदी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया बदलाव से गुजर रही है। यह एक सदी में नहीं देखा गया है। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच अमेरिका और चीन के संबंध को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।

ताइवान पर टकराव की संभावना पर किया आगाह

वहीं, दूसरी तरफ बीजिंग में ट्रंप-शी जिनपिंग की हाई-लेवल बैठक के दौरान ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा। शी जिनपिंग ने साफ कहा कि अगर ताइवान मुद्दे को ठीक से हैंडल नहीं किया गया तो अमेरिका और चीन के रिश्ते ‘बहुत खतरनाक स्थिति’ में पहुंच सकते हैं और टकराव भी हो सकता है। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों का सबसे अहम मुद्दा बताया।

जिनपिंग ने ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का किया जिक्र

बीजिंग में बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने अपने बयान में ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र कर सबका ध्यान खींच लिया। यह अवधारणा प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडिडीज से जुड़ी है, जिसमें कहा गया है कि जब कोई उभरती ताकत स्थापित शक्ति को चुनौती देती है तो टकराव का खतरा बढ़ जाता है। शी जिनपिंग ने ट्रंप के सामने सवाल रखा कि क्या अमेरिका और चीन इस ‘जाल’ से ऊपर उठ सकते हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता और संतुलन जरूरी है।

दोनों के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत

चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों की सबसे संवेदनशील और अहम कड़ी है। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे को सावधानी और समझदारी से संभाला गया, तो दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर इसमें दखल बढ़ा या गलत कदम उठाए गए, तो इससे पूरे द्विपक्षीय संबंध खतरे में पड़ सकते हैं।

अहम है ताइवान का मुद्दा?

ताइवान लंबे समय से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देता रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है।

पाकिस्तान बना मुखौटा, चीन सीजफायर का सूत्रधार, ईरान को बातचीत के लिए किया तैयार

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अमेरिका और ईरान के बीच 5 हफ्तों से ज्यादा तक चली जंग के बाद बुधवार 8 अप्रैल की सुबह राहत भरी खबर आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमले रोकने की घोषणा की। ट्रंप ने इसे दो तरफा युद्धविराम बताया और कहा कि यह इस शर्त पर होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलेगी।

चीन ने पर्दे के पीछे रहकर किया काम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर के पीछे चीन की अहम भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे रहकर ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई।

आखिरी समय में चीन के दखल आई काम

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने युद्धविराम में अहम भूमिका निभाई है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में दो हफ्ते के सीजफायर के फैसले के पीछे पाकिस्तान के अलावा चीन की बड़ी भूमिका सामने आई है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के जोरदार प्रयास के साथ-साथ चीन ने आखिरी मिनट में दखल देकर ईरान को समझाया और तनाव कम किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ने ईरान को साफ चेतावनी दी कि अगर ट्रंप अपनी धमकी के मुताबिक ईरान के एनर्जी साइट्स और बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

ट्रंप बोले- चीन ने ईरान को किया तैयार

सीजफायर को लेकर ट्रंप ने कहा है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एक टेलीफोनिक बातचीत में उनसे पूछा गया कि क्या चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए प्रेरित किया। इस पर ट्रंप ने कहा, “हां, मैंने सुना है”। हालांकि, इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

संघर्ष के बाद से ही चीन सीजफायर के लिए था प्रयासरत

वहीं, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही चीन सीजफायर और युद्ध खत्म कराने के लिए काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन हर उस प्रयास का स्वागत करता है जो शांति की दिशा में हो और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए मतभेद खत्म करने चाहिए। चीन ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष इस मौके का फायदा उठाकर जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करेंगे। गौरतलब है कि चीन इससे पहले 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता कराने में भी अहम भूमिका निभा चुका है।

कहां है शक्सगाम घाटी? जिसे लेकर भारत-चीन फिर आमने सामने

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भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी का विवाद एक बार फिर गहरा गया है।चीन ने फिर से लद्दाख की शक्सगाम घाटी पर आधिकारिक दावा किया है। मंगलवार को चीन ने फिर से इस घाटी पर अपना दावा दोहराया है और भारत पर पलटवार किया है।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर भारत के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे चीन का क्षेत्र बताया। सीमा विवाद और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर पूछे गए सवालों के जवाब में माओ निंग ने कहा, “जिस क्षेत्र का आपने उल्लेख किया है, वह चीन का है। चीन को अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करने का पूरा अधिकार है।”

अपने दावे के पक्ष में चीन ने 1960 के दशक में पाकिस्तान के साथ हुए एक 'सीमा समझौता' का हवाला दिया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने आगे दावा किया कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों देशों के बीच सीमा का सीमांकन किया गया था। माओ निंग ने इस समझौते को दो संप्रभु देशों द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग के रूप में बताया।

1963 का समझौता भारत को मंजूर नहीं

वहीं, शक्सगाम घाटी को लेकर भारत ने चीन और पाकिस्तान को एक बार फिर साफ संदेश दिया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दोहराया कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ सीमा समझौता भारत के लिए पूरी तरह गैर-कानूनी और अमान्य है। उन्होंने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और वहां किसी भी तरह की गतिविधि को भारत मान्यता नहीं देता। जनरल द्विवेदी ने कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी भारत के लिए मान्य नहीं है। उन्होंने इसे दोनों देशों द्वारा किया जा रहा गैर-कानूनी काम बताया और कहा कि यह परियोजना भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरती है।

क्या है 1963 का समझौता ?

शक्सगाम घाटी लद्दाख के सुदूर उत्तरी क्षेत्र में काराकोरम रेंज से भी उत्तर में बहुत ही ऊंचाई पर स्थित घाटी है। यह पाकिस्तानी कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके के नजदीक और सियाचिन/अक्साई चिन के बेहद पास का क्षेत्र है। अभी इसपर चीन का कब्जा है, जो इसे झिंजियांग का हिस्सा बताता है। भारत का कहना है कि यह पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर रियासत का हिस्सा है, जिसका 1947 में भारत के साथ कानूनी रूप से विलय हो चुका है। इसलिए यह अब लद्दाख का हिस्सा है। 1947-1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर-PoK) पर अवैध कब्जा कर लिया था और 1963 में उसने चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के नाम पर चीन के हवाले कर दिया।

भारत पर अब 500 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में ट्रंप! रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग हो सकती है। बिल को मंजूरी मिलने पर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग

सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक के बाद इस विधेयक को मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि यह बिल अगले सप्ताह तक वोटिंग के लिए पेश किया जा सकता है।इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों को सजा देने की अनुमति

ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्राहम ने बताया कि इस बिल पर वह सीनेटर ब्लूमथल और कई दूसरे लोगों के साथ महीनों से काम कर रहे थे।

सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025

अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बिल का नाम सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसमें व्यक्तियों और संस्थाओं पर जुर्माने के साथ ही रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर ड्यूटी को कीमत के कम से कम 500% तक बढ़ाना शामिल है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध पर अमेरिका के बाद चीन का बड़ा दावा, कहा-हमने संघर्ष रुकवाया

#chinaclaimstoendindiapakistantension

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब चीन ने दावा है कि भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में उसने अहम भूमिका निभाई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर एक संगोष्ठी में कहा कि इस साल चीन ने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में मध्यस्थता की है। हालांकि, भारत ने चीन के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन गरमागरम मुद्दों में शामिल था, जिनमें चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। विदेश मंत्रालय ने 13 मई को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि समझौते की तारीख, समय और शब्दावली दोनों देशों के डीजीएमओ ने 10 मई 2025 को फोन पर हुई बातचीत के दौरान तय की, जो 15:35 बजे शुरू हुई थी।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे अस्थिर दौर- वांग

बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है। उन्होंने कहा, स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

इन तनावों की मध्यस्थता का दावा

चीनी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि 'टकराव वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए इसी चीनी नजरिए को अपनाते हुए हमने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के बीच मुद्दों और कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया है और कहा है कि 88 घंटे तक चला सैन्य टकराव किसी तीसरे पक्ष के दखल के बिना सीधे दोनों देशों के मिलिट्री कम्युनिकेशन के जरिए सुलझाया गया था। 13 मई को एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने बाहरी मध्यस्थता के दावों को खारिज कर दिया था। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि भारत और पाकिस्तान के मामलों में किसी तीसरे पक्ष के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।

The trial cultivation of China Millets has been successful.

These millets were grown at the Agricultural Research Centre located at the headquarters of Jai Dharti Maa Foundation.

Founder Ravi Kumar Nishad, Dhanbad, Jharkhand, said:

“The soil of Jharkhand has immense potential to grow highly valuable agricultural crops. What we lack is only the willingness to come forward and take up farming. I request all farmers and people from the business community to explore millet varieties like China Millets. These crops require very little cost and maintenance, yet provide good returns.”

China Millet is a type of coarse grain. It is also known as Punarva. It is not clearly known where it was first cultivated, but it has been grown as a crop in the Caucasus and China for more than 7,000 years. It is believed that the crop might have been domesticated independently in these regions.

Today, China Millets are grown extensively in India, Russia, Ukraine, the Middle East, Turkey, and Romania. The grain is considered highly beneficial for health. Since it is gluten-free, it can be consumed even by people who are allergic to wheat.

When Diplomacy Meets Over Coffee: CD Foundation’s Decade-long Journey Inspires Global Bridges

New Delhi, September 12, 2025 — It wasn’t a conference room, but a coffee table that brought the world together on Friday morning at the Eros Hotel, New Delhi. Against the aroma of freshly brewed coffee and the warmth of Indian hospitality, diplomats, partners, and cultural leaders gathered to celebrate a rare milestone: ten years of CD Foundation’s cultural diplomacy.

Founded in 2015 by Charu Das, Founder & Director, CD Foundation began as a small idea — a neutral, people-first space for embassies and communities to meet beyond politics. A decade later, it has blossomed into an internationally recognized platform spanning 45+ countries, proof that “soft power” can be stronger than any hard negotiation.

A Gathering of Nations

The Diplomatic Coffee Morning turned into a mini-United Nations in New Delhi, with dignitaries from Bangladesh, Belarus, China, Indonesia, Iran, Iraq, and Zambia among the attendees. Their presence not only lent gravitas but also reaffirmed the Coffee Morning’s reputation as a hub of genuine dialogue and exchange.

The event opened with a traditional lamp-lighting ceremony followed by a short film capturing CD Foundation’s journey — from Delhi’s embassy corridors to international festivals and partnerships shaping global conversations.

Voices of Influence

Dr. Amrendra Khatua, Former Secretary, Ministry of External Affairs, set the tone, reminding the audience that “where politics falters, culture succeeds.” His words were echoed by H.E. Mr. Oday Hatim Mohammed of Iraq and Mrs. Phalecy Mwenda Yambayamba of Zambia, who emphasized the shared future that diplomacy-through-culture could nurture.

The event’s global spirit was further amplified through a virtual address from H.E. Dr. Madan Mohan Sethi, Consul General of India in Auckland. His remarks spotlighted the India–New Zealand bridge of trade, tourism, and culture, underlining how cultural diplomacy carries real economic weight. Adding a local yet international flavor, Ms. Mahia Williams of the Whiria Collective (New Zealand) spoke of Māori–Indian collaborations not as symbolic, but as living exchanges.

Partnerships with Purpose

Beyond diplomacy, the Coffee Morning also recognized healthcare and humanitarian champions. Dr. Amit Luthra of Amolik Health Care highlighted India’s emerging role in medical diplomacy, while United Sikh drew attention to its relief efforts in flood-hit Punjab — a reminder that people-to-people diplomacy extends to those who need it most.

Looking Ahead

The celebration was not just about looking back but also about unveiling the future. Upcoming initiatives include:

  • India–UK Festival (Manchester & Leeds, November 2025)
  • Delegations to China (late 2025)
  • Reciprocal Festivals in India (early 2026)

Each marks a continuation of CD Foundation’s mission: to turn connections into collaborations.

A New Beginning at Ten

As the morning ended, there was no sense of closure — only continuity. Ten years may mark a milestone, but for CD Foundation, it is just the first chapter of a much bigger global story waiting to be written.

For more information you can visit https://www.cdfoundation.co.in/

 

चीन में पीएम मोदी और पुतिन की खास मुलाकात, एक दूसरे को लगाया गले, देखते रह गए शहबाज शरीफ

#chinascosummit202russianpresidentvladimirputinhugspmmodi

चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। तियानजिन से पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक खास तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने एक-दूसरे का गले लगाकर गर्मजोशी से अभिवादन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एससीसो मंच पर एक साथ नजर आए। इसकी तस्वीर सामने आई है। तीनों नेता आपस में बातचीत करते दिखे। इस दौरान तीनों देशों की ट्रायो डिप्लोमेसी देखने को मिली, यानी ये देश आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

पुतिन और मोदी की द्विपक्षीय बैठक से पहले हुई मुलाकात

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दो तस्वीरें शेयर की। एक तस्वीर में मोदी पुतिन को गले लगाते नजर आ रहे हैं। दूसरी तस्वीर में दोनों नेता हाथ मिलाते हुए नजर आ रहे हैं। तस्वीर शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह मुलाकात उनकी द्विपक्षीय बैठक से पहले हुई, जो पूर्ण सत्र के बाद होने वाली है।

मोदी-पुतिन-जिनपिंग कि तिकड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एससीओ शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र से पहले कुछ समय साथ बिताया। इस दौरान तीनों ही नेता एक-दूसरे से हल्के फुल्के अंदाज में हंसी मजाक करते नजर आए। इस दौरान तीनों नेता हंसी ठहाके लगाते दिखाई दिए। इसके बाद पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन एक साथ मंच की ओर चले गए। इस दौरान दोनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने से निकले, जो पहले से ही मंच पर फोटो सेशन के लिए खड़े थे। इस दौरान शहबाज की नजरें पीएम मोदी और पुतिन पर ही टिकी हुई थीं। उनके चेहरे से बेबसी के भाव साफ जाहिर हो रहे थे।

एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा समिट

एससीओ समिट चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी में हो रही है। यह एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा समिट है, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल हैं। सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिजिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं, जबकि पर्यवेक्षक और संवाद साझेदार देशों में तुर्की, मालदीव, नेपाल, म्यांमार, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस जैसे नाम हैं।

समिट का फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर है। चीनी विदेश मंत्रालय के सहायक मंत्री लिउ बिन ने कहा कि शी जिनपिंग तियानजिन घोषणा जारी करेंगे, जो एससीओ के अगले 10 वर्षों की विकास रणनीति को रेखांकित करेगी।

11th Annual Day of CD Foundation Brings Diplomacy, Tourism, Wellness & Global Collaboration Together in Delhi

New Delhi, 12 May 2026:New Delhi witnessed a unique coming together of diplomacy, culture, hospitality, entrepreneurship, wellness, and international engagement as CD Foundation celebrated its 11th Annual Day – Coffee Morning with Multiple Countries at Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR.

The gathering brought together diplomats, foreign dignitaries, tourism stakeholders, healthcare experts, hospitality leaders, academia, entrepreneurs, media, and institutional representatives for meaningful conversations around global collaboration, cultural diplomacy, tourism ecosystems, and people-to-people engagement.

Over the last 11 years, CD Foundation has steadily built a strong international presence through more than 100 initiatives across 45+ countries in collaboration with embassies, universities, hospitality groups, healthcare institutions, tourism stakeholders, and international organisations.

This year’s edition was curated around the theme:

“Tourism, Hospitality & Global Engagement: New Pathways for International Collaboration”

and reflected the organisation’s growing focus on relationship-driven international engagement through culture, wellness, tourism, entrepreneurship, and dialogue.

One of the most significant highlights of the morning was the launch of:

GOLDEN YEARS GLOBAL

“Ageing with Dignity – Travel, Wellness & Culture”

a new initiative by CD Foundation focused on premium elderly wellness, assisted luxury travel, cultural experiences, and meaningful global engagement for senior generations.

The initiative was unveiled by Mrs. Sumita Das, Dr. Prasun Chatterjee, and Mr. Kazem Samandari, Executive Chairman & Co-Founder of L’Opéra India, with the launch emerging as one of the most appreciated moments of the event.

Speaking during the programme, Dr. Prasun Chatterjee, Apollo Hospitals and WHO Advisory Member, highlighted the increasing global importance of conversations around longevity, wellbeing, emotional health, and quality of life for senior generations.

The programme also featured a Special Address by H.E. Mr. Wang Xinming, Minister Counsellor (Culture), Embassy of the People’s Republic of China, who appreciated CD Foundation’s efforts towards international cultural engagement and expressed interest in future Indo-cultural collaborations and people-to-people exchange initiatives.

A strong emphasis was also placed on youth engagement, entrepreneurship, and academic collaboration. Prof. Kumar Ashutosh from DCEE, University of Delhi, spoke about the importance of stronger partnerships between educational institutions, tourism ecosystems, entrepreneurship platforms, and international stakeholders to create meaningful opportunities for future generations.

Guests were hosted with a specially curated hospitality experience by Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR, whose elegant ambience and elaborate gourmet spread added significantly to the experience of the morning.

Commenting on the occasion, Mr. Ramneet Singh, Hotel Manager, Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR, said:

“It has been a privilege to host such a distinguished international gathering. The presence of diplomats and global delegates added tremendous prestige and visibility to the occasion.”

Reflecting on the organisation’s journey, Ms. Charu Das, Founder & Director, CD Foundation, said:

“For us, this platform has always been about creating meaningful international relationships and bringing together diplomacy, culture, tourism, wellness, entrepreneurship, and human connection under one shared vision.”

The event was organised by CD Foundation and Entrepreneur’s Club World & Us in partnership with Taj Surajkund Resort & Spa, Delhi NCR, with academic collaboration from DCEE, University of Delhi. Supporting partners included Drillcon Infrastructure Pvt. Ltd. and Perfume Point.

LinkedIn: https://linkedin.com/company/cdfoundationofficial

हमें अभी किसी युद्ध की जरूरत नहीं', ताइवान मुद्दे पर बदले ट्रंप के सुर, जिनपिंग की धमकी का असर?

#donaldtrumpsoftensstanceonchinaafterbejingvisit

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन और ताइवान के बीच चल रहे भारी तनाव को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर ताइवान पर बदले नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय अमेरिका को किसी भी युद्ध की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, खासकर ऐसे युद्ध की जो 9,500 मील दूर हो।

चीन यात्रा के समापन पर फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ट्रंप ने ताइवान को लेकर कहा, "हम युद्ध नहीं चाहते हैं और अगर आप स्थिति को वैसा ही बनाए रखते हैं, जैसी वह अभी है, तो मुझे लगता है कि चीन को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई यह कहे, चलो हम स्वतंत्र हो जाते हैं, क्योंकि अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है।" इंटरव्यू में ट्रंप ने दोहराया कि ताइवान पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।

1982 के समझौते और हथियारों की बिक्री पर क्या बोले ट्रंप?

पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा 1982 में दिए गए उस भरोसे के बारे में पूछा, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचने पर चीन से सलाह नहीं लेगा, तो ट्रंप ने इसका बेबाकी से जवाब दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि 1982 अब बहुत पुरानी बात हो चुकी है।

9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत-ट्रंप

ट्रंप ने साफ किया कि बातचीत के दौरान खुद चीनी राष्ट्रपति ने यह मुद्दा उठाया था। ट्रंप ने कहा कि वे 1982 के समझौते का हवाला देकर बातचीत से पीछे नहीं हट सकते थे। इसलिए दोनों नेताओं ने ताइवान और उसे हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि इस पर वह जल्द ही कोई फैसला लेंगे, लेकिन अभी 9,500 मील दूर एक युद्ध अमेरिका की आखिरी जरूरत है।

क्यों बदले ट्रंप के सुर?

ट्रंप का यह बयान तब आया है, जब शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मीटिंग में ताइवान के मुद्दे पर चेतावनी दे दी थी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। शी ने ट्रंप से कहा, अगर ताइवान के मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों में टकराव या यहां तक कि झड़प भी हो सकती।

चीन और ताइवान में तनाव की वजह

चीन ताइवान पर अपना अधिकार जताता है और इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से भी इनकार नहीं करता है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का कहना है कि ताइवान को औपचारिक आजादी घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह खुद को पहले से ही एक संप्रभु राष्ट्र मानता है। ताइवान के राष्ट्रपति को लेकर बीजिंग अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुका है। चीन ने उन्हें समस्या पैदा करने वाला और ताइवान जलडमरूमध्य में शांति भंग करने वाला बताया है। ताइवान में बहुत से लोग खुद को अलग देश का हिस्सा मानते हैं। हालांकि, उनमें से ज्यादातर मौजूदा स्थिति को बनाए रखने के पक्ष में हैं, जिसमें ताइवान न तो चीन से आजादी घोषित करता है और न ही उसके साथ होता है।वहीं, अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता रहा है, जिसमें उसे आत्मरक्षा के लिए हथियार उपलब्ध कराना भी शामिल है।

ताइवान मुद्दे पर अमेरिका संग सैन्य संघर्ष भी हो सकता है', चीन पहुंचे ट्रंप को जिनपिंग की चेतावनी

#uschinasummitxijinpingwarnsdonald_trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर हैं। सुबह ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया। हालांकि, जल्द ही बीजिंग में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की मुलाकात के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोस्ती और शानदार भविष्य की बातें कर रहे थे, वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ चेतावनी दे दी कि अगर ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है।

ट्रंप ने शी को बताया महान नेता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय बैठक से पहले उद्घाटन भाषण में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महान नेता बताया। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वह जिनपिंग के साथ बातचीत को लेकर उत्साहित हैं और अमेरिका में हर कोई इस शिखर बैठक की चर्चा कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि आपके साथ होना सम्मान की बात है। आपका दोस्त होना सम्मान की बात है और अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं।

ट्रंप ने दिया अमेरिका-चीन संबंध की मजबूती पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को साझेदार होना चाहिए, न कि प्रतिद्वंदी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया बदलाव से गुजर रही है। यह एक सदी में नहीं देखा गया है। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच अमेरिका और चीन के संबंध को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।

ताइवान पर टकराव की संभावना पर किया आगाह

वहीं, दूसरी तरफ बीजिंग में ट्रंप-शी जिनपिंग की हाई-लेवल बैठक के दौरान ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा। शी जिनपिंग ने साफ कहा कि अगर ताइवान मुद्दे को ठीक से हैंडल नहीं किया गया तो अमेरिका और चीन के रिश्ते ‘बहुत खतरनाक स्थिति’ में पहुंच सकते हैं और टकराव भी हो सकता है। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों का सबसे अहम मुद्दा बताया।

जिनपिंग ने ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का किया जिक्र

बीजिंग में बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने अपने बयान में ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र कर सबका ध्यान खींच लिया। यह अवधारणा प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडिडीज से जुड़ी है, जिसमें कहा गया है कि जब कोई उभरती ताकत स्थापित शक्ति को चुनौती देती है तो टकराव का खतरा बढ़ जाता है। शी जिनपिंग ने ट्रंप के सामने सवाल रखा कि क्या अमेरिका और चीन इस ‘जाल’ से ऊपर उठ सकते हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता और संतुलन जरूरी है।

दोनों के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत

चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों की सबसे संवेदनशील और अहम कड़ी है। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे को सावधानी और समझदारी से संभाला गया, तो दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर इसमें दखल बढ़ा या गलत कदम उठाए गए, तो इससे पूरे द्विपक्षीय संबंध खतरे में पड़ सकते हैं।

अहम है ताइवान का मुद्दा?

ताइवान लंबे समय से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देता रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है।

पाकिस्तान बना मुखौटा, चीन सीजफायर का सूत्रधार, ईरान को बातचीत के लिए किया तैयार

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अमेरिका और ईरान के बीच 5 हफ्तों से ज्यादा तक चली जंग के बाद बुधवार 8 अप्रैल की सुबह राहत भरी खबर आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमले रोकने की घोषणा की। ट्रंप ने इसे दो तरफा युद्धविराम बताया और कहा कि यह इस शर्त पर होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलेगी।

चीन ने पर्दे के पीछे रहकर किया काम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर के पीछे चीन की अहम भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे रहकर ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई।

आखिरी समय में चीन के दखल आई काम

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने युद्धविराम में अहम भूमिका निभाई है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में दो हफ्ते के सीजफायर के फैसले के पीछे पाकिस्तान के अलावा चीन की बड़ी भूमिका सामने आई है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के जोरदार प्रयास के साथ-साथ चीन ने आखिरी मिनट में दखल देकर ईरान को समझाया और तनाव कम किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ने ईरान को साफ चेतावनी दी कि अगर ट्रंप अपनी धमकी के मुताबिक ईरान के एनर्जी साइट्स और बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

ट्रंप बोले- चीन ने ईरान को किया तैयार

सीजफायर को लेकर ट्रंप ने कहा है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एक टेलीफोनिक बातचीत में उनसे पूछा गया कि क्या चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए प्रेरित किया। इस पर ट्रंप ने कहा, “हां, मैंने सुना है”। हालांकि, इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

संघर्ष के बाद से ही चीन सीजफायर के लिए था प्रयासरत

वहीं, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही चीन सीजफायर और युद्ध खत्म कराने के लिए काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन हर उस प्रयास का स्वागत करता है जो शांति की दिशा में हो और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए मतभेद खत्म करने चाहिए। चीन ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष इस मौके का फायदा उठाकर जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करेंगे। गौरतलब है कि चीन इससे पहले 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता कराने में भी अहम भूमिका निभा चुका है।

कहां है शक्सगाम घाटी? जिसे लेकर भारत-चीन फिर आमने सामने

#shaksgamvalleywillindiachinaclashagain

भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी का विवाद एक बार फिर गहरा गया है।चीन ने फिर से लद्दाख की शक्सगाम घाटी पर आधिकारिक दावा किया है। मंगलवार को चीन ने फिर से इस घाटी पर अपना दावा दोहराया है और भारत पर पलटवार किया है।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर भारत के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे चीन का क्षेत्र बताया। सीमा विवाद और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर पूछे गए सवालों के जवाब में माओ निंग ने कहा, “जिस क्षेत्र का आपने उल्लेख किया है, वह चीन का है। चीन को अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करने का पूरा अधिकार है।”

अपने दावे के पक्ष में चीन ने 1960 के दशक में पाकिस्तान के साथ हुए एक 'सीमा समझौता' का हवाला दिया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने आगे दावा किया कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों देशों के बीच सीमा का सीमांकन किया गया था। माओ निंग ने इस समझौते को दो संप्रभु देशों द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग के रूप में बताया।

1963 का समझौता भारत को मंजूर नहीं

वहीं, शक्सगाम घाटी को लेकर भारत ने चीन और पाकिस्तान को एक बार फिर साफ संदेश दिया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दोहराया कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ सीमा समझौता भारत के लिए पूरी तरह गैर-कानूनी और अमान्य है। उन्होंने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और वहां किसी भी तरह की गतिविधि को भारत मान्यता नहीं देता। जनरल द्विवेदी ने कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी भारत के लिए मान्य नहीं है। उन्होंने इसे दोनों देशों द्वारा किया जा रहा गैर-कानूनी काम बताया और कहा कि यह परियोजना भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरती है।

क्या है 1963 का समझौता ?

शक्सगाम घाटी लद्दाख के सुदूर उत्तरी क्षेत्र में काराकोरम रेंज से भी उत्तर में बहुत ही ऊंचाई पर स्थित घाटी है। यह पाकिस्तानी कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके के नजदीक और सियाचिन/अक्साई चिन के बेहद पास का क्षेत्र है। अभी इसपर चीन का कब्जा है, जो इसे झिंजियांग का हिस्सा बताता है। भारत का कहना है कि यह पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर रियासत का हिस्सा है, जिसका 1947 में भारत के साथ कानूनी रूप से विलय हो चुका है। इसलिए यह अब लद्दाख का हिस्सा है। 1947-1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर-PoK) पर अवैध कब्जा कर लिया था और 1963 में उसने चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के नाम पर चीन के हवाले कर दिया।

भारत पर अब 500 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में ट्रंप! रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त

#trumpproposes500percenttariffonindiachinaandbraziloverrussianoil_purchases

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग हो सकती है। बिल को मंजूरी मिलने पर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग

सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक के बाद इस विधेयक को मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि यह बिल अगले सप्ताह तक वोटिंग के लिए पेश किया जा सकता है।इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों को सजा देने की अनुमति

ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्राहम ने बताया कि इस बिल पर वह सीनेटर ब्लूमथल और कई दूसरे लोगों के साथ महीनों से काम कर रहे थे।

सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025

अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बिल का नाम सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसमें व्यक्तियों और संस्थाओं पर जुर्माने के साथ ही रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर ड्यूटी को कीमत के कम से कम 500% तक बढ़ाना शामिल है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध पर अमेरिका के बाद चीन का बड़ा दावा, कहा-हमने संघर्ष रुकवाया

#chinaclaimstoendindiapakistantension

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब चीन ने दावा है कि भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में उसने अहम भूमिका निभाई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर एक संगोष्ठी में कहा कि इस साल चीन ने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में मध्यस्थता की है। हालांकि, भारत ने चीन के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन गरमागरम मुद्दों में शामिल था, जिनमें चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। विदेश मंत्रालय ने 13 मई को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि समझौते की तारीख, समय और शब्दावली दोनों देशों के डीजीएमओ ने 10 मई 2025 को फोन पर हुई बातचीत के दौरान तय की, जो 15:35 बजे शुरू हुई थी।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे अस्थिर दौर- वांग

बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है। उन्होंने कहा, स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

इन तनावों की मध्यस्थता का दावा

चीनी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि 'टकराव वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए इसी चीनी नजरिए को अपनाते हुए हमने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के बीच मुद्दों और कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया है और कहा है कि 88 घंटे तक चला सैन्य टकराव किसी तीसरे पक्ष के दखल के बिना सीधे दोनों देशों के मिलिट्री कम्युनिकेशन के जरिए सुलझाया गया था। 13 मई को एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने बाहरी मध्यस्थता के दावों को खारिज कर दिया था। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि भारत और पाकिस्तान के मामलों में किसी तीसरे पक्ष के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।

The trial cultivation of China Millets has been successful.

These millets were grown at the Agricultural Research Centre located at the headquarters of Jai Dharti Maa Foundation.

Founder Ravi Kumar Nishad, Dhanbad, Jharkhand, said:

“The soil of Jharkhand has immense potential to grow highly valuable agricultural crops. What we lack is only the willingness to come forward and take up farming. I request all farmers and people from the business community to explore millet varieties like China Millets. These crops require very little cost and maintenance, yet provide good returns.”

China Millet is a type of coarse grain. It is also known as Punarva. It is not clearly known where it was first cultivated, but it has been grown as a crop in the Caucasus and China for more than 7,000 years. It is believed that the crop might have been domesticated independently in these regions.

Today, China Millets are grown extensively in India, Russia, Ukraine, the Middle East, Turkey, and Romania. The grain is considered highly beneficial for health. Since it is gluten-free, it can be consumed even by people who are allergic to wheat.

When Diplomacy Meets Over Coffee: CD Foundation’s Decade-long Journey Inspires Global Bridges

New Delhi, September 12, 2025 — It wasn’t a conference room, but a coffee table that brought the world together on Friday morning at the Eros Hotel, New Delhi. Against the aroma of freshly brewed coffee and the warmth of Indian hospitality, diplomats, partners, and cultural leaders gathered to celebrate a rare milestone: ten years of CD Foundation’s cultural diplomacy.

Founded in 2015 by Charu Das, Founder & Director, CD Foundation began as a small idea — a neutral, people-first space for embassies and communities to meet beyond politics. A decade later, it has blossomed into an internationally recognized platform spanning 45+ countries, proof that “soft power” can be stronger than any hard negotiation.

A Gathering of Nations

The Diplomatic Coffee Morning turned into a mini-United Nations in New Delhi, with dignitaries from Bangladesh, Belarus, China, Indonesia, Iran, Iraq, and Zambia among the attendees. Their presence not only lent gravitas but also reaffirmed the Coffee Morning’s reputation as a hub of genuine dialogue and exchange.

The event opened with a traditional lamp-lighting ceremony followed by a short film capturing CD Foundation’s journey — from Delhi’s embassy corridors to international festivals and partnerships shaping global conversations.

Voices of Influence

Dr. Amrendra Khatua, Former Secretary, Ministry of External Affairs, set the tone, reminding the audience that “where politics falters, culture succeeds.” His words were echoed by H.E. Mr. Oday Hatim Mohammed of Iraq and Mrs. Phalecy Mwenda Yambayamba of Zambia, who emphasized the shared future that diplomacy-through-culture could nurture.

The event’s global spirit was further amplified through a virtual address from H.E. Dr. Madan Mohan Sethi, Consul General of India in Auckland. His remarks spotlighted the India–New Zealand bridge of trade, tourism, and culture, underlining how cultural diplomacy carries real economic weight. Adding a local yet international flavor, Ms. Mahia Williams of the Whiria Collective (New Zealand) spoke of Māori–Indian collaborations not as symbolic, but as living exchanges.

Partnerships with Purpose

Beyond diplomacy, the Coffee Morning also recognized healthcare and humanitarian champions. Dr. Amit Luthra of Amolik Health Care highlighted India’s emerging role in medical diplomacy, while United Sikh drew attention to its relief efforts in flood-hit Punjab — a reminder that people-to-people diplomacy extends to those who need it most.

Looking Ahead

The celebration was not just about looking back but also about unveiling the future. Upcoming initiatives include:

  • India–UK Festival (Manchester & Leeds, November 2025)
  • Delegations to China (late 2025)
  • Reciprocal Festivals in India (early 2026)

Each marks a continuation of CD Foundation’s mission: to turn connections into collaborations.

A New Beginning at Ten

As the morning ended, there was no sense of closure — only continuity. Ten years may mark a milestone, but for CD Foundation, it is just the first chapter of a much bigger global story waiting to be written.

For more information you can visit https://www.cdfoundation.co.in/

 

चीन में पीएम मोदी और पुतिन की खास मुलाकात, एक दूसरे को लगाया गले, देखते रह गए शहबाज शरीफ

#chinascosummit202russianpresidentvladimirputinhugspmmodi

चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। तियानजिन से पीएम नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक खास तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने एक-दूसरे का गले लगाकर गर्मजोशी से अभिवादन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एससीसो मंच पर एक साथ नजर आए। इसकी तस्वीर सामने आई है। तीनों नेता आपस में बातचीत करते दिखे। इस दौरान तीनों देशों की ट्रायो डिप्लोमेसी देखने को मिली, यानी ये देश आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

पुतिन और मोदी की द्विपक्षीय बैठक से पहले हुई मुलाकात

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दो तस्वीरें शेयर की। एक तस्वीर में मोदी पुतिन को गले लगाते नजर आ रहे हैं। दूसरी तस्वीर में दोनों नेता हाथ मिलाते हुए नजर आ रहे हैं। तस्वीर शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह मुलाकात उनकी द्विपक्षीय बैठक से पहले हुई, जो पूर्ण सत्र के बाद होने वाली है।

मोदी-पुतिन-जिनपिंग कि तिकड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एससीओ शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र से पहले कुछ समय साथ बिताया। इस दौरान तीनों ही नेता एक-दूसरे से हल्के फुल्के अंदाज में हंसी मजाक करते नजर आए। इस दौरान तीनों नेता हंसी ठहाके लगाते दिखाई दिए। इसके बाद पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन एक साथ मंच की ओर चले गए। इस दौरान दोनों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने से निकले, जो पहले से ही मंच पर फोटो सेशन के लिए खड़े थे। इस दौरान शहबाज की नजरें पीएम मोदी और पुतिन पर ही टिकी हुई थीं। उनके चेहरे से बेबसी के भाव साफ जाहिर हो रहे थे।

एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा समिट

एससीओ समिट चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी में हो रही है। यह एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा समिट है, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल हैं। सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिजिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं, जबकि पर्यवेक्षक और संवाद साझेदार देशों में तुर्की, मालदीव, नेपाल, म्यांमार, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस जैसे नाम हैं।

समिट का फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर है। चीनी विदेश मंत्रालय के सहायक मंत्री लिउ बिन ने कहा कि शी जिनपिंग तियानजिन घोषणा जारी करेंगे, जो एससीओ के अगले 10 वर्षों की विकास रणनीति को रेखांकित करेगी।