The Bhopal Shift: How Definite Success Classes Is Turning the City into India’s New NEET Preparation Hub

For decades, the path for medical aspirants in India was predictable: if you wanted a top-tier rank in NEET-UG, you packed your bags for established coaching hubs like Kota or Delhi. However, over the last few years, a significant shift has been brewing in Central India. Bhopal, once seen primarily as a regional academic center, has transformed into a high-performance hub that is now outperforming legacy cities in "selection-to-enrollment" ratios.This transition is backed by a series of high-stakes results and a growing reputation for academic excellence that has caught the attention of education analysts nationwide.

Breaking the "AIIMS Delhi" Barrier

The most telling indicator of a city's academic depth is its ability to place students in AIIMS Delhi—the most competitive medical institution in the country. For Bhopal, this was a rare feat, with the city often going seven or eight years without a single selection to the premier institute.

That cycle was decisively broken in the 2025 results. Aagam Jain, a student from the premier educational organization Definite Success Classes, secured All India Rank 45, earning a seat at AIIMS Delhi. For observers, this was a "proof of concept" for the city's evolving academic infrastructure, proving that the highest level of conceptual mastery required for top national ranks is now available within Bhopal through elite-level mentorship.

A Growing Magnet for National Student Migration

One of the most remarkable highlights of Bhopal’s rise is the changing geography of its student population. No longer just a center for local talent, Bhopal has become a "magnet city," drawing students from across the Indian map.

Enrollment data reveals a significant trend of student migration to the city, specifically to study under the guidance of Definite Success Classes. Families are now bypassing closer, traditional options to send their children to Bhopal from diverse regions, including:

● North & West: Rajasthan (Jaipur, Alwar, Jhalawar), Uttar Pradesh (Agra, Pratapgarh, Jhansi, Raebareli), and Punjab (Amritsar).

● East & South: West Bengal (Kolkata, Jalpaiguri), Bihar (Rohtas, Katihar), Jharkhand (Jamtara), and Maharashtra (Amravati).

● Remote Frontiers: Even students from the J&K region (Ladakh) and Himachal Pradesh (Kangra) are now choosing the academic stability of Bhopal over larger, more crowded metros.

Education professionals suggest this cross-state movement occurs because families perceive Bhopal to offer a balanced academic ecosystem—combining the high-intensity preparation of a legacy hub with a more supportive, less overwhelming environment.

A Legacy of Excellence: The Multi-Year Record

This national trust is built on a foundation of consistent, verified results. At the center of this trend is the focused approach of Definite Success Classes, which prioritizes academic stability and actual college conversion.

● The 2024 Performance: The city maintained its momentum with over 116 MBBS selections from this prestigious organization. This included elite placements such as Akshar Dubey (AIIMS Bhopal, 705/720), Aashna Jain (GGMC Mumbai, 700/720), and Nandini Jain (AIIMS Rajkot, 696/720).

● The 2023 Foundation: In this cycle, Definite Success Classes recorded a massive surge in students crossing the 650-mark threshold, resulting in 5 AIIMS selections (including the city topper Samridhi Saxena at 693/720) and over 70 Government Medical College seats.

The "Bhopal Factor": Transparency and Well-being

Beyond the numbers, the human factor plays a major role in why families are choosing Bhopal. In an era of high-pressure advertising, Definite Success Classes has set a standard for transparency by publicly verifying results with confirmed college allotments.

Furthermore, Bhopal offers a high quality of life with significantly lower stress and living costs compared to Tier-1 cities. This allows medical aspirants to focus entirely on their preparation in a safe, conducive environment, supported by a healthy student-to-teacher ratio that ensures they are never treated as "just another number."

The New Educational Map

The data suggests that the days of a few cities holding a monopoly on medical education are ending. Bhopal’s ascent—spearheaded by the consistent performance of prestigious organizations like Definite Success Classes—signals a new era where quality is determined by actual college conversion rates rather than the size of a billboard.

As more students from every corner of India choose Bhopal for their NEET journey, the city is no longer just a regional player; it is firmly established on the national map as a premier destination for the next generation of India’s doctors.

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए किया नामांकन, अमित शाह की मौजूदगी में भरा पर्चा

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्य की सत्ता छोड़कर दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं। नीतीश कुमार ने आज राज्य सभा चुनाव के लिए अपना नॉमिनेशन पेपर फाइल कर दिया है। नीतीश कुमार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन पर्चा दाखिल किया है। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचे थे।

एक ही गाड़ी से विधानसभा पहुंचे

पटना स्थित विधानमंडल परिसर में उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा नामांकन के मौके पर तीनों दिग्गज नेता एक साथ नजर आए। खास बात यह रही कि अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन एक ही गाड़ी से बिहार विधानसभा पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। इस दौरान जदयू और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

नामांकन से पहले अमित शाह के साथ बैठक

राज्य सभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में पहले से ही हलचल थी। ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह का पटना दौरा इस चर्चा को और तेज कर गया। गुरुवार सुबह अमित शाह सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया और उन्हें शॉल भेंट किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक हुई, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राज्य सभा चुनाव के साथ-साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

भाजपा-जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर मंथन

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। एनडीए के अंदर नए सत्ता समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर विचार चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन की बैठक में बिहार की भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी बातचीत हुई है। हालांकि इस बैठक में क्या फैसला हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

नीतीश कुमार ने खुद दी राज्यसभा वाली जानकारी

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज घोषणा की कि वो राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। कुमार ने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। साथ ही उन्होंने ये बी भरोसा दिलाया कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा? बिहार को मिल सकता है पहला भाजपाई सीएम

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बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। पिछले 21 वर्षों से सूबे की सत्ता के केंद्र रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का मन बना लिया है।बिहार के सीएम नीतीश कमार आज सुबह 11 बजे राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नीतीश का दिल्ली जाना लगभग तय

बुधवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और कद्दावर नेता विजय चौधरी मौजूद रहे। बैठक के बाद विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है, लेकिन उनका दिल्ली जाना लगभग तय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे समर्थक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर फैलते ही पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अपने नेता के दिल्ली जाने की चर्चाओं से व्याकुल और भावुक कार्यकर्ता धीरे-धीरे मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे हैं, जिसके चलते इलाके में हलचल और पुलिस की चौकसी दोनों बढ़ गई है। हुए प्रशासन ने ‘एक अणे मार्ग’ के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनी रहे। 

पटना पहुंचे विधायक और बड़े नेता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने जेडीयू के भीतर भारी हलचल पैदा कर दी है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंथन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जिसके चलते पार्टी के तमाम विधायक और बड़े नेताओं को आपात स्थिति में पटना तलब किया गया है।

बिहार में अगला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा?

नीतीश कुमार अगर राज्यसभा जाते हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न ये होगा कि बाहिर का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सूत्रों के मुताबिक अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है।

बदलेगी बीजेपी और जदयू की भूमिका?

बिहार में सियासी सरगर्मी के बीच वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त ही सबकुछ तय हो चुका था। लेकिन चुनाव में नीतीश कुमार के नाम पर ही एनडीए को बड़ी सफलता मिली थी, इसलिए उन्हें 10वीं बार सीएम के रूप में शपथ दिलाई गई। लेकिन अब पावर ट्रांसफर की तैयारी पूरी हो चुकी है।नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए जाने के बाद बिहार में बीजेपी और जदयू की भूमिका पूरी तरह से बदल सकती है। अभी नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी कोटे से दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन किसी बीजेपी नेता के सीएम बनने पर नई सरकार में जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

रायपुर साहित्य महोत्सव में जुटे देशभर के साहित्यकार, आज आयोजन का दूसरा दिन

रायपुर। नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित रायपुर साहित्य महोत्सव का आज दूसरा दिन है। महोत्सव में देशभर से आए साहित्य प्रेमियों और लेखकों की भारी मौजूदगी देखने को मिल रही है। आज का प्रमुख आकर्षण देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित विशेष काव्य-पाठ है।

पूरी खबर यहां पढ़ें - https://news4u36.in/raipur-sahitya-mahotsav-second-day-atal-bihari-vajpayee-poetry-event/

From Medicine to Market: How 24-Year-Old Dr. Sarwar Alam is Transforming Hair Care Innovation in Bihar

In the heart of Bihar’s Saharsa district, far away from India’s traditional startup hubs, a quiet but powerful transformation is taking place in the beauty and personal care industry. At just 24 years of age, Dr. Md. Sarwar Alam has emerged as a young entrepreneur who is challenging long-established norms in the hair care market through his premium brand, K-SARWAR. His journey from medicine to innovation reflects a new wave of Indian entrepreneurship where science, tradition, and social responsibility come together.

The Indian hair care industry has for decades been dominated by chemical-heavy formulations, often marketed with tall claims but limited scientific backing. Millions of Indians struggle with hair fall, thinning, and scalp issues, yet affordable, safe, and evidence-based solutions remain scarce—especially in semi-urban and rural regions. Recognizing this gap early, Dr. Sarwar Alam decided to chart a different path.What truly sets Dr. Alam apart from most young founders is his solid medical and research background. He holds degrees in B.E.M.S and D.H.P, along with a Master’s degree in Clinical Research. This rare combination gives him physician-level insight into formulation science and patient-centric problem solving. Instead of relying on outsourced development or generic formulas, Dr. Alam personally oversees product research and testing at his own facility under Sarbar Research Lab Private Limited.

Every K-SARWAR product—whether it is a hair regrowth oil, density-boosting shampoo, or scalp-care formulation—is developed with clinical precision. The brand draws from India’s rich Ayurvedic heritage while applying modern research standards to ensure safety, efficacy, and consistency. Ingredients such as rosemary, cedarwood, peppermint oil, and other botanicals are used not as trends, but as carefully studied components chosen for their proven benefits to scalp health and hair regeneration.

The philosophy behind K-SARWAR is simple yet powerful: natural solutions should be both effective and accessible. While many premium brands target only metro cities and high-income consumers, K-SARWAR focuses on affordability without compromising quality. This approach resonates strongly with its core audience—the common Indian consumer who seeks results-driven hair care without harsh side effects.

Early market response suggests that this strategy is working. K-SARWAR’s formulations for hair fall control and regrowth have gained notable traction among first-time users and repeat customers alike. Positive word-of-mouth and growing demand indicate a shift in consumer mindset toward natural, evidence-based alternatives. For Dr. Alam, this validation is not just commercial success but confirmation that science-backed herbal care has a strong future in India.

Beyond business metrics, the rise of K-SARWAR carries deeper significance for Bihar’s entrepreneurial ecosystem. Saharsa, like many districts in the state, is rarely associated with advanced research or premium product manufacturing. Dr. Alam’s success challenges this perception and proves that innovation is not limited by geography. By leveraging local resources and Bihar’s herbal wealth, K-SARWAR demonstrates that global-quality products can emerge from regional India.

Looking ahead, Dr. Alam’s vision extends well beyond product sales. He believes hair loss is not merely a cosmetic issue but one that affects confidence, self-image, and mental well-being. Through K-SARWAR, he aims to restore not just hair health but also dignity and confidence among users. His long-term goal is to establish the brand as a trusted name in natural wellness—one that stands for integrity, clinical efficacy, and Indian innovation.

The story of Dr. Sarwar Alam and K-SARWAR serves as inspiration for young professionals across the country. It highlights how a strong educational foundation, respect for traditional knowledge, and commitment to quality can redefine even the most competitive industries. For Bihar’s beauty and personal care sector, this marks the beginning of a natural, science-led revolution—one rooted in local values but built for a global future.

Message Dr Sarwar Alam on WhatsApp. https://wa.me/message/TNLT7E4TDRP4F1

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संजय सरावगी बने बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, दरभंगा सदर से लगातार 5 बार हैं विधायक

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बिहार बीजेपी में बड़ा बदलाव हुआ है। उत्तर प्रदेश के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बिहार संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए संजय सरावगी को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

मिथिलांचल में पार्टी का चर्चित और पुराना चेहरा

निवर्तमान अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के स्थान पर सरावगी की ताजपोशी को पार्टी की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। संजय सरावगी का संबंध राज्य के मिथिलांचल क्षेत्र (दरभंगा) से है, जिसे बीजेपी ने आने वाले समय में अपने मुख्य फोकस में रखा है। संजय सरावगी दरभंगा शहर के विधायक हैं और इस क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ये इलाका पारंपरिक रूप से अन्य दलों का मजबूत गढ़ रहा है, जिसे भेदने के लिए बीजेपी ने एक मजबूत चेहरा आगे किया है। पार्टी का मानना है कि नए अध्यक्ष के नेतृत्व में मिथिलांचल की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत सुनिश्चित की जा सकती है, जिसका असर आगामी चुनावों में जरूर दिखेगा।

2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए

संजय सरावगी छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भी रहे, जो कि बीजेपी का विद्यार्थी संगठन है। संजय ने साल 1995 में बीजेपी की सदस्यता ली। 2003 में उन्होंने दरभंगा नगर निगम से वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। संजय साल 2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए।

लगातार पांचवीं बार बने विधायक

2005 के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। 2025 के विधानसभा चुनाव में संजय ने उमेश सहनी को बड़े अंतर से हराया।

दिलीप जायसवाल की जगह पार्टी की कमान

बता दें कि बीजेपी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला चलता है। इसके तहत वर्तमान में उद्योग मंत्री बने दिलीप कुमार जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा है। अब बीजेपी ने दिलीप जायसवाल की जगह संजय सरावगी को बिहार बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

बिहार में सताने लगी सर्दी, पछुआ हवा ने बढ़ाई परेशानी, तापमान में तेज गिरावट

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बिहार में ठंड और तेज होती जा रही है। पूरे राज्य में शीतलहर ने दस्तक दे दी है।बिहार में पछुआ हवा के कारण ठंड और बढ़ गई है। 20–25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा चल रही है। जिसके कारण राज्य भर में न्यूनतम तापमान लगातार नीचे जा रहा है, जिससे कड़ाके की ठंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों में राज्य के कई जिलों में रात का पारा काफी नीचे तक रिकॉर्ड किया गया है। पटना में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस और गया में 10.6 डिग्री दर्ज हुआ। प्रशासन ने बच्चों, बुजुर्गों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है, क्योंकि ये ठंड अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

घने कोहरे को लेकर अलर्ट

बिहार मौसम सेवा केंद्र ने 11 दिसंबर तक राज्य के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में घने कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, गोपालगंज, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज जैसे जिलों में घने कोहरे की चेतावनी है, जबकि औरंगाबाद, गया, रोहतास और कैमूर में भी कोहरे का असर दिख सकता है। सबसे कम तापमान सबौर में 8.4 डिग्री दर्ज किया गया है।

48 घंटे तक लगातार जारी रहेंगी पछुआ हवाएं

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 15-20 किमी/घंटा की रफ्तार वाली ठंडी पछुआ हवाएं अगले 48 घंटे तक लगातार जारी रहेंगी। हवाओं और तापमान में गिरावट के कारण सुबह के समय घना कोहरा दिख रहा है। जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो जा रही है। विजिबिलिटी कई जिलों में 50 मीटर से भी नीचे जाने की आशंका है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की संभावना है।

अगले 3–4 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 3–4 दिनों में प्रदेश के मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके साथ ही, अधिकतम तापमान में हल्की कमी आ सकती है, जबकि न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना नहीं जताई गई है। दक्षिण बिहार के कई जिले जैसे बक्सर, भोजपुर, औरंगाबाद, अरवल और रोहतास में रात का तापमान 8 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। 15 दिसंबर तक पूरे राज्य में मौसम शुष्क बने रहने का अनुमान है और बारिश को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

प्रमण्डलीय आयुक्त, उत्तरी छोटानागपुर प्रमण्डल द्वारा महत्वपूर्ण अधिनियमों पर कार्यशाला आयोजित

हजारीबाग: आज (बुधवार) को समाहरणालय, हजारीबाग के सभागार में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार की अध्यक्षता में राजस्व अभिलेख, भूमिधारण, किरायेदारी अधिकार एवं वन क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर केंद्रित एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया।​ यह कार्यशाला भू-राजस्व एवं भूमि सुधार से संबंधित विभिन्न अधिनियमों के तहत लंबित मामलों की समीक्षा तथा उन पर विचार-विमर्श के लिए आहूत की गई।

कार्यशाला में विभिन्न अधिनियमों की महत्वपूर्ण धाराओं तथा उनके अंतर्गत लंबित प्रकरणों की Case History, मुख्य विषय एवं अधिनियमों पर विस्तृत चर्चा की गई। जिसमें The Bihar Tenants Holding (Maintenance of Records) Act, 1973 की धारा 14, 15, 16 एवं 18 पर आधारित मामले, किरायेदारी अभिलेखों के अद्यतन, धारणाधिकार की पुष्टि, रिकॉर्ड के अनुरक्षण, एवं राजस्व अभिलेखों में संशोधन और त्रुटि सुधार आदि विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।

■CNT Act, 1908, धारा 46 एवं 49 के निहित भूमिहस्तांतरण प्रतिबंध, अवैध रूपांतरण, पुश्तैनी भूमि संरक्षण, परंपरागत अधिकारों के हनन से जुड़े मामलों की स्थिति संग अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को निर्देशित किया गया।

■BLR Act, 1950-धारा 4(h) के मद्देनजर अवैध कब्जा, अनधिकार, जमाबंदी, रद्दीकरण एवं पुनर्वितरण से जुड़े लंबित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई।

■JBCA एवं Forest Act, खास महल अधिनियमों के अंतर्गत केस–हिस्ट्री का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें वन, भूमि विवाद, अतिक्रमण, सीमांकन, विभागीय समन्वय से संबंधित मुद्दों की गहन समीक्षा की गई।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने सभी राजस्व एवं वन-भूमि प्रकरणों का समयबद्ध और पारदर्शी निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों का नियमित अद्यतन अनिवार्य है और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके विवादों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए। ​उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी आम नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है, अतः सभी अधिकारी इन मामलों का पूरी संवेदनशीलता के साथ निष्पादन सुनिश्चित करें। 

बैठक में उपायुक्त हजारीबाग, उप विकास आयुक्त हजारीबाग, अपर समाहर्ता हजारीबाग, जिला खनन पदाधिकारी, जिले के अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, कार्यपालक दंडाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रखंड अंचल निरीक्षक संग अन्य उपस्थित रहे।

राजस्व मामलों पर चतरा में एकदिवसीय कार्यशाला, प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने की समीक्षा

हजारीबाग: राजस्व मामलों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन चतरा समाहरणालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने की। इस कार्यशाला का उद्देश्य राजस्व प्रशासन से जुड़े प्रक्रियात्मक पहलुओं की समीक्षा करना तथा लंबित मामलों के निष्पादन की गति को तेज करना था।

बैठक की शुरुआत में अधिकारियों के साथ The Bihar Tenants Holdings (Maintenance of Records) Act, 1973, CNT Act, 1908, BLR Act, 1950, JBCA तथा Khas Mahal से संबंधित प्रावधानों का अद्यतन विवरण साझा किया गया। संबंधित धाराओं एवं संशोधनों की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया गया कि वर्तमान परिस्थिति में किन प्रकार के प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना आवश्यक है। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों, भूमि हस्तांतरण, बंधन-मुक्ति, दाखिल-खारिज, लीज, खतियान-जमाबंदी, उत्तराधिकार, वंशावली एवं प्रमाण-पत्र संबंधी विषयों पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।

प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने अंचलवार लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्व मामलों में विलंब का सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है, इसलिए समयबद्ध एवं पारदर्शी कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि कानून में निहित प्रावधानों की स्पष्ट समझ के साथ प्रत्येक प्रकरण का निष्पादन किया जाए। आयुक्त ने कार्यप्रणाली में सुधार और जवाबदेही को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि जनता को शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कार्यशाला में उपायुक्त श्रीमती कीर्तिश्री, उप विकास आयुक्त श्री अमरेंद्र कुमार सिन्हा, अपर समाहर्ता अरविंद कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी श्री जहूर आलम, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी वैभव सिंह सहित अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

जहरीला' है मां का दूध, एम्स और महावीर कैंसर संस्थान की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

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बिहार के छह जिलों में स्तनपान कराने वाली माताओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मां के दूध में यूरेनियम (यू-238) की मौजूदगी का दानवा किया जा रहा है। महावीर कैंसर संस्थान, पटना और एम्स नई दिल्ली की संयुक्त स्टडी में यह बात सामने आई है कि राज्य के छह जिलों भोजपुर, समस्तीपुर, मुंगेर, भागलपुर, खगड़िया और नालंदा में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम पाया गया है।

40 महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क की जांच

अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच किए गए इस शोध में बेगूसराय, भोजपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, कटिहार और नालंदा जैसे जिलों से सैंपल लिए गए थे। इन जिलों से 17 से 35 वर्ष की आयु की 40 महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क के नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था। इन सभी नमूनों में यूरेनियम यानी U-238 पाया गया है। इस दूध में यूरेनियम की मात्रा 0 से 5.25 जी/एल के बीच दर्ज की गई है।

70% शिशुओं के स्वास्थ्य का जोखिम बढ़ा

इस शोध को महावीर कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र, पटना, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और एम्स, नई दिल्ली के वैज्ञानिकों के एक समूह ने मिलकर किया है। ब्रिटिश जर्नल 'साइंटिफिक रिपोर्ट्स' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन में बिहार के स्तन के दूध के नमूनों में 5 पीपीबी (प्रति अरब भाग) तक यूरेनियम पाया गया।अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% शिशुओं के स्वास्थ्य का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि यह साफ किया गया है कि इससे कैंसर का खतरा नहीं है यह स्तर अभी स्वीकार्य सीमा से नीचे हैं और घबराने की जरूरत नहीं है।

यूरेनियम भूजल के जरिए शरीर में पहुंच रहा

इस स्टडी का नेतृत्व महावीर कैंसर संस्थान के डॉ. अरुण कुमार ने किया। एम्स नई दिल्ली के डॉ. अशोक शर्मा रिसर्च के सह लेखक रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूरेनियम भूजल के जरिए शरीर में पहुंच रहा है, क्योंकि इन जिलों में पानी पहले से ही दूषित बताया जाता रहा है। यह दूषित पानी पीने और भोजन के माध्यम से शरीर में जाता है और फिर माताओं के दूध में पहुंचकर बच्चों के लिए खतरा पैदा करता है।

माताओं को स्तनपान बंद करने की कोई जरूरत नहीं

शोधकर्ताओं ने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि यूरेनियम का स्रोत कौन- सी जगह या गतिविधि है, लेकिन यह तथ्य गंभीर है कि यह सीधे बच्चों तक पहुंच रहा है। एम्स दिल्ली के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा ने कहा, 70% शिशुओं में जोखिम का संकेत जरूर मिला है, लेकिन स्वास्थ्य पर इसका वास्तविक प्रभाव कम होने की संभावना है। माताओं को स्तनपान बंद करने की कोई जरूरत नहीं है। यह शिशु के पोषण का सबसे सुरक्षित और प्रभावी स्रोत है।

पानी में आर्सेनिक ज्यादा

बिहार के 6 जिलों में लोगों का पीने का पानी और खाने का अनाज धीरे-धीरे जहर में बदलता जा रहा है। स्टडी में टीम ने बिहार के पटना, वैशाली, सारण, भोजपुर, बक्सर और नालंदा जिलों में सर्वे किया। कुल 286 घरों से हैंडपंप के पानी, गेहूं, चावल, बाल और नाखून के नमूने एकत्र किए गए। जांच में लगभग 14% हैंडपंपों के पानी, 44% गेहूं और 3% चावल के नमूनों में आर्सेनिक की मात्रा WHO की तय सीमा से अधिक पाई गई।

The Bhopal Shift: How Definite Success Classes Is Turning the City into India’s New NEET Preparation Hub

For decades, the path for medical aspirants in India was predictable: if you wanted a top-tier rank in NEET-UG, you packed your bags for established coaching hubs like Kota or Delhi. However, over the last few years, a significant shift has been brewing in Central India. Bhopal, once seen primarily as a regional academic center, has transformed into a high-performance hub that is now outperforming legacy cities in "selection-to-enrollment" ratios.This transition is backed by a series of high-stakes results and a growing reputation for academic excellence that has caught the attention of education analysts nationwide.

Breaking the "AIIMS Delhi" Barrier

The most telling indicator of a city's academic depth is its ability to place students in AIIMS Delhi—the most competitive medical institution in the country. For Bhopal, this was a rare feat, with the city often going seven or eight years without a single selection to the premier institute.

That cycle was decisively broken in the 2025 results. Aagam Jain, a student from the premier educational organization Definite Success Classes, secured All India Rank 45, earning a seat at AIIMS Delhi. For observers, this was a "proof of concept" for the city's evolving academic infrastructure, proving that the highest level of conceptual mastery required for top national ranks is now available within Bhopal through elite-level mentorship.

A Growing Magnet for National Student Migration

One of the most remarkable highlights of Bhopal’s rise is the changing geography of its student population. No longer just a center for local talent, Bhopal has become a "magnet city," drawing students from across the Indian map.

Enrollment data reveals a significant trend of student migration to the city, specifically to study under the guidance of Definite Success Classes. Families are now bypassing closer, traditional options to send their children to Bhopal from diverse regions, including:

● North & West: Rajasthan (Jaipur, Alwar, Jhalawar), Uttar Pradesh (Agra, Pratapgarh, Jhansi, Raebareli), and Punjab (Amritsar).

● East & South: West Bengal (Kolkata, Jalpaiguri), Bihar (Rohtas, Katihar), Jharkhand (Jamtara), and Maharashtra (Amravati).

● Remote Frontiers: Even students from the J&K region (Ladakh) and Himachal Pradesh (Kangra) are now choosing the academic stability of Bhopal over larger, more crowded metros.

Education professionals suggest this cross-state movement occurs because families perceive Bhopal to offer a balanced academic ecosystem—combining the high-intensity preparation of a legacy hub with a more supportive, less overwhelming environment.

A Legacy of Excellence: The Multi-Year Record

This national trust is built on a foundation of consistent, verified results. At the center of this trend is the focused approach of Definite Success Classes, which prioritizes academic stability and actual college conversion.

● The 2024 Performance: The city maintained its momentum with over 116 MBBS selections from this prestigious organization. This included elite placements such as Akshar Dubey (AIIMS Bhopal, 705/720), Aashna Jain (GGMC Mumbai, 700/720), and Nandini Jain (AIIMS Rajkot, 696/720).

● The 2023 Foundation: In this cycle, Definite Success Classes recorded a massive surge in students crossing the 650-mark threshold, resulting in 5 AIIMS selections (including the city topper Samridhi Saxena at 693/720) and over 70 Government Medical College seats.

The "Bhopal Factor": Transparency and Well-being

Beyond the numbers, the human factor plays a major role in why families are choosing Bhopal. In an era of high-pressure advertising, Definite Success Classes has set a standard for transparency by publicly verifying results with confirmed college allotments.

Furthermore, Bhopal offers a high quality of life with significantly lower stress and living costs compared to Tier-1 cities. This allows medical aspirants to focus entirely on their preparation in a safe, conducive environment, supported by a healthy student-to-teacher ratio that ensures they are never treated as "just another number."

The New Educational Map

The data suggests that the days of a few cities holding a monopoly on medical education are ending. Bhopal’s ascent—spearheaded by the consistent performance of prestigious organizations like Definite Success Classes—signals a new era where quality is determined by actual college conversion rates rather than the size of a billboard.

As more students from every corner of India choose Bhopal for their NEET journey, the city is no longer just a regional player; it is firmly established on the national map as a premier destination for the next generation of India’s doctors.

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए किया नामांकन, अमित शाह की मौजूदगी में भरा पर्चा

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्य की सत्ता छोड़कर दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं। नीतीश कुमार ने आज राज्य सभा चुनाव के लिए अपना नॉमिनेशन पेपर फाइल कर दिया है। नीतीश कुमार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन पर्चा दाखिल किया है। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचे थे।

एक ही गाड़ी से विधानसभा पहुंचे

पटना स्थित विधानमंडल परिसर में उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा नामांकन के मौके पर तीनों दिग्गज नेता एक साथ नजर आए। खास बात यह रही कि अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन एक ही गाड़ी से बिहार विधानसभा पहुंचे, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। इस दौरान जदयू और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे।

नामांकन से पहले अमित शाह के साथ बैठक

राज्य सभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में पहले से ही हलचल थी। ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह का पटना दौरा इस चर्चा को और तेज कर गया। गुरुवार सुबह अमित शाह सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया और उन्हें शॉल भेंट किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक हुई, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में राज्य सभा चुनाव के साथ-साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

भाजपा-जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर मंथन

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। एनडीए के अंदर नए सत्ता समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि भाजपा और जेडीयू के बीच नए राजनीतिक फॉर्मूले पर विचार चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह, नीतीश कुमार और नितिन नवीन की बैठक में बिहार की भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी बातचीत हुई है। हालांकि इस बैठक में क्या फैसला हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

नीतीश कुमार ने खुद दी राज्यसभा वाली जानकारी

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज घोषणा की कि वो राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे। कुमार ने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। साथ ही उन्होंने ये बी भरोसा दिलाया कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।

नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा? बिहार को मिल सकता है पहला भाजपाई सीएम

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बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। पिछले 21 वर्षों से सूबे की सत्ता के केंद्र रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का मन बना लिया है।बिहार के सीएम नीतीश कमार आज सुबह 11 बजे राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नीतीश का दिल्ली जाना लगभग तय

बुधवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और कद्दावर नेता विजय चौधरी मौजूद रहे। बैठक के बाद विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है, लेकिन उनका दिल्ली जाना लगभग तय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे समर्थक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर फैलते ही पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अपने नेता के दिल्ली जाने की चर्चाओं से व्याकुल और भावुक कार्यकर्ता धीरे-धीरे मुख्यमंत्री आवास पर जुटने लगे हैं, जिसके चलते इलाके में हलचल और पुलिस की चौकसी दोनों बढ़ गई है। हुए प्रशासन ने ‘एक अणे मार्ग’ के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनी रहे। 

पटना पहुंचे विधायक और बड़े नेता

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने जेडीयू के भीतर भारी हलचल पैदा कर दी है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंथन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जिसके चलते पार्टी के तमाम विधायक और बड़े नेताओं को आपात स्थिति में पटना तलब किया गया है।

बिहार में अगला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा?

नीतीश कुमार अगर राज्यसभा जाते हैं, तो सबसे बड़ा प्रश्न ये होगा कि बाहिर का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सूत्रों के मुताबिक अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जदयू से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है।

बदलेगी बीजेपी और जदयू की भूमिका?

बिहार में सियासी सरगर्मी के बीच वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त ही सबकुछ तय हो चुका था। लेकिन चुनाव में नीतीश कुमार के नाम पर ही एनडीए को बड़ी सफलता मिली थी, इसलिए उन्हें 10वीं बार सीएम के रूप में शपथ दिलाई गई। लेकिन अब पावर ट्रांसफर की तैयारी पूरी हो चुकी है।नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए जाने के बाद बिहार में बीजेपी और जदयू की भूमिका पूरी तरह से बदल सकती है। अभी नीतीश कुमार की सरकार में बीजेपी कोटे से दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन किसी बीजेपी नेता के सीएम बनने पर नई सरकार में जदयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

रायपुर साहित्य महोत्सव में जुटे देशभर के साहित्यकार, आज आयोजन का दूसरा दिन

रायपुर। नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित रायपुर साहित्य महोत्सव का आज दूसरा दिन है। महोत्सव में देशभर से आए साहित्य प्रेमियों और लेखकों की भारी मौजूदगी देखने को मिल रही है। आज का प्रमुख आकर्षण देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित विशेष काव्य-पाठ है।

पूरी खबर यहां पढ़ें - https://news4u36.in/raipur-sahitya-mahotsav-second-day-atal-bihari-vajpayee-poetry-event/

From Medicine to Market: How 24-Year-Old Dr. Sarwar Alam is Transforming Hair Care Innovation in Bihar

In the heart of Bihar’s Saharsa district, far away from India’s traditional startup hubs, a quiet but powerful transformation is taking place in the beauty and personal care industry. At just 24 years of age, Dr. Md. Sarwar Alam has emerged as a young entrepreneur who is challenging long-established norms in the hair care market through his premium brand, K-SARWAR. His journey from medicine to innovation reflects a new wave of Indian entrepreneurship where science, tradition, and social responsibility come together.

The Indian hair care industry has for decades been dominated by chemical-heavy formulations, often marketed with tall claims but limited scientific backing. Millions of Indians struggle with hair fall, thinning, and scalp issues, yet affordable, safe, and evidence-based solutions remain scarce—especially in semi-urban and rural regions. Recognizing this gap early, Dr. Sarwar Alam decided to chart a different path.What truly sets Dr. Alam apart from most young founders is his solid medical and research background. He holds degrees in B.E.M.S and D.H.P, along with a Master’s degree in Clinical Research. This rare combination gives him physician-level insight into formulation science and patient-centric problem solving. Instead of relying on outsourced development or generic formulas, Dr. Alam personally oversees product research and testing at his own facility under Sarbar Research Lab Private Limited.

Every K-SARWAR product—whether it is a hair regrowth oil, density-boosting shampoo, or scalp-care formulation—is developed with clinical precision. The brand draws from India’s rich Ayurvedic heritage while applying modern research standards to ensure safety, efficacy, and consistency. Ingredients such as rosemary, cedarwood, peppermint oil, and other botanicals are used not as trends, but as carefully studied components chosen for their proven benefits to scalp health and hair regeneration.

The philosophy behind K-SARWAR is simple yet powerful: natural solutions should be both effective and accessible. While many premium brands target only metro cities and high-income consumers, K-SARWAR focuses on affordability without compromising quality. This approach resonates strongly with its core audience—the common Indian consumer who seeks results-driven hair care without harsh side effects.

Early market response suggests that this strategy is working. K-SARWAR’s formulations for hair fall control and regrowth have gained notable traction among first-time users and repeat customers alike. Positive word-of-mouth and growing demand indicate a shift in consumer mindset toward natural, evidence-based alternatives. For Dr. Alam, this validation is not just commercial success but confirmation that science-backed herbal care has a strong future in India.

Beyond business metrics, the rise of K-SARWAR carries deeper significance for Bihar’s entrepreneurial ecosystem. Saharsa, like many districts in the state, is rarely associated with advanced research or premium product manufacturing. Dr. Alam’s success challenges this perception and proves that innovation is not limited by geography. By leveraging local resources and Bihar’s herbal wealth, K-SARWAR demonstrates that global-quality products can emerge from regional India.

Looking ahead, Dr. Alam’s vision extends well beyond product sales. He believes hair loss is not merely a cosmetic issue but one that affects confidence, self-image, and mental well-being. Through K-SARWAR, he aims to restore not just hair health but also dignity and confidence among users. His long-term goal is to establish the brand as a trusted name in natural wellness—one that stands for integrity, clinical efficacy, and Indian innovation.

The story of Dr. Sarwar Alam and K-SARWAR serves as inspiration for young professionals across the country. It highlights how a strong educational foundation, respect for traditional knowledge, and commitment to quality can redefine even the most competitive industries. For Bihar’s beauty and personal care sector, this marks the beginning of a natural, science-led revolution—one rooted in local values but built for a global future.

Message Dr Sarwar Alam on WhatsApp. https://wa.me/message/TNLT7E4TDRP4F1

Visit for more : https://www.instagram.com/k_sarwar_?igsh=YmRneDI5d3o5Nnl5

संजय सरावगी बने बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, दरभंगा सदर से लगातार 5 बार हैं विधायक

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बिहार बीजेपी में बड़ा बदलाव हुआ है। उत्तर प्रदेश के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बिहार संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए संजय सरावगी को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

मिथिलांचल में पार्टी का चर्चित और पुराना चेहरा

निवर्तमान अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के स्थान पर सरावगी की ताजपोशी को पार्टी की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। संजय सरावगी का संबंध राज्य के मिथिलांचल क्षेत्र (दरभंगा) से है, जिसे बीजेपी ने आने वाले समय में अपने मुख्य फोकस में रखा है। संजय सरावगी दरभंगा शहर के विधायक हैं और इस क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ये इलाका पारंपरिक रूप से अन्य दलों का मजबूत गढ़ रहा है, जिसे भेदने के लिए बीजेपी ने एक मजबूत चेहरा आगे किया है। पार्टी का मानना है कि नए अध्यक्ष के नेतृत्व में मिथिलांचल की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत सुनिश्चित की जा सकती है, जिसका असर आगामी चुनावों में जरूर दिखेगा।

2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए

संजय सरावगी छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भी रहे, जो कि बीजेपी का विद्यार्थी संगठन है। संजय ने साल 1995 में बीजेपी की सदस्यता ली। 2003 में उन्होंने दरभंगा नगर निगम से वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। संजय साल 2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए।

लगातार पांचवीं बार बने विधायक

2005 के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। 2025 के विधानसभा चुनाव में संजय ने उमेश सहनी को बड़े अंतर से हराया।

दिलीप जायसवाल की जगह पार्टी की कमान

बता दें कि बीजेपी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला चलता है। इसके तहत वर्तमान में उद्योग मंत्री बने दिलीप कुमार जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा है। अब बीजेपी ने दिलीप जायसवाल की जगह संजय सरावगी को बिहार बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

बिहार में सताने लगी सर्दी, पछुआ हवा ने बढ़ाई परेशानी, तापमान में तेज गिरावट

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बिहार में ठंड और तेज होती जा रही है। पूरे राज्य में शीतलहर ने दस्तक दे दी है।बिहार में पछुआ हवा के कारण ठंड और बढ़ गई है। 20–25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा चल रही है। जिसके कारण राज्य भर में न्यूनतम तापमान लगातार नीचे जा रहा है, जिससे कड़ाके की ठंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों में राज्य के कई जिलों में रात का पारा काफी नीचे तक रिकॉर्ड किया गया है। पटना में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस और गया में 10.6 डिग्री दर्ज हुआ। प्रशासन ने बच्चों, बुजुर्गों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है, क्योंकि ये ठंड अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

घने कोहरे को लेकर अलर्ट

बिहार मौसम सेवा केंद्र ने 11 दिसंबर तक राज्य के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में घने कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, गोपालगंज, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज जैसे जिलों में घने कोहरे की चेतावनी है, जबकि औरंगाबाद, गया, रोहतास और कैमूर में भी कोहरे का असर दिख सकता है। सबसे कम तापमान सबौर में 8.4 डिग्री दर्ज किया गया है।

48 घंटे तक लगातार जारी रहेंगी पछुआ हवाएं

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 15-20 किमी/घंटा की रफ्तार वाली ठंडी पछुआ हवाएं अगले 48 घंटे तक लगातार जारी रहेंगी। हवाओं और तापमान में गिरावट के कारण सुबह के समय घना कोहरा दिख रहा है। जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम हो जा रही है। विजिबिलिटी कई जिलों में 50 मीटर से भी नीचे जाने की आशंका है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की संभावना है।

अगले 3–4 दिनों तक कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 3–4 दिनों में प्रदेश के मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके साथ ही, अधिकतम तापमान में हल्की कमी आ सकती है, जबकि न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना नहीं जताई गई है। दक्षिण बिहार के कई जिले जैसे बक्सर, भोजपुर, औरंगाबाद, अरवल और रोहतास में रात का तापमान 8 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। 15 दिसंबर तक पूरे राज्य में मौसम शुष्क बने रहने का अनुमान है और बारिश को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

प्रमण्डलीय आयुक्त, उत्तरी छोटानागपुर प्रमण्डल द्वारा महत्वपूर्ण अधिनियमों पर कार्यशाला आयोजित

हजारीबाग: आज (बुधवार) को समाहरणालय, हजारीबाग के सभागार में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार की अध्यक्षता में राजस्व अभिलेख, भूमिधारण, किरायेदारी अधिकार एवं वन क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर केंद्रित एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया।​ यह कार्यशाला भू-राजस्व एवं भूमि सुधार से संबंधित विभिन्न अधिनियमों के तहत लंबित मामलों की समीक्षा तथा उन पर विचार-विमर्श के लिए आहूत की गई।

कार्यशाला में विभिन्न अधिनियमों की महत्वपूर्ण धाराओं तथा उनके अंतर्गत लंबित प्रकरणों की Case History, मुख्य विषय एवं अधिनियमों पर विस्तृत चर्चा की गई। जिसमें The Bihar Tenants Holding (Maintenance of Records) Act, 1973 की धारा 14, 15, 16 एवं 18 पर आधारित मामले, किरायेदारी अभिलेखों के अद्यतन, धारणाधिकार की पुष्टि, रिकॉर्ड के अनुरक्षण, एवं राजस्व अभिलेखों में संशोधन और त्रुटि सुधार आदि विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।

■CNT Act, 1908, धारा 46 एवं 49 के निहित भूमिहस्तांतरण प्रतिबंध, अवैध रूपांतरण, पुश्तैनी भूमि संरक्षण, परंपरागत अधिकारों के हनन से जुड़े मामलों की स्थिति संग अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को निर्देशित किया गया।

■BLR Act, 1950-धारा 4(h) के मद्देनजर अवैध कब्जा, अनधिकार, जमाबंदी, रद्दीकरण एवं पुनर्वितरण से जुड़े लंबित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई।

■JBCA एवं Forest Act, खास महल अधिनियमों के अंतर्गत केस–हिस्ट्री का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें वन, भूमि विवाद, अतिक्रमण, सीमांकन, विभागीय समन्वय से संबंधित मुद्दों की गहन समीक्षा की गई।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने सभी राजस्व एवं वन-भूमि प्रकरणों का समयबद्ध और पारदर्शी निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भूमि अभिलेखों का नियमित अद्यतन अनिवार्य है और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके विवादों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए। ​उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी आम नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है, अतः सभी अधिकारी इन मामलों का पूरी संवेदनशीलता के साथ निष्पादन सुनिश्चित करें। 

बैठक में उपायुक्त हजारीबाग, उप विकास आयुक्त हजारीबाग, अपर समाहर्ता हजारीबाग, जिला खनन पदाधिकारी, जिले के अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, कार्यपालक दंडाधिकारी, अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रखंड अंचल निरीक्षक संग अन्य उपस्थित रहे।

राजस्व मामलों पर चतरा में एकदिवसीय कार्यशाला, प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने की समीक्षा

हजारीबाग: राजस्व मामलों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन चतरा समाहरणालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने की। इस कार्यशाला का उद्देश्य राजस्व प्रशासन से जुड़े प्रक्रियात्मक पहलुओं की समीक्षा करना तथा लंबित मामलों के निष्पादन की गति को तेज करना था।

बैठक की शुरुआत में अधिकारियों के साथ The Bihar Tenants Holdings (Maintenance of Records) Act, 1973, CNT Act, 1908, BLR Act, 1950, JBCA तथा Khas Mahal से संबंधित प्रावधानों का अद्यतन विवरण साझा किया गया। संबंधित धाराओं एवं संशोधनों की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया गया कि वर्तमान परिस्थिति में किन प्रकार के प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना आवश्यक है। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों, भूमि हस्तांतरण, बंधन-मुक्ति, दाखिल-खारिज, लीज, खतियान-जमाबंदी, उत्तराधिकार, वंशावली एवं प्रमाण-पत्र संबंधी विषयों पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।

प्रमंडलीय आयुक्त श्री पवन कुमार ने अंचलवार लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा करते हुए कहा कि राजस्व मामलों में विलंब का सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है, इसलिए समयबद्ध एवं पारदर्शी कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि कानून में निहित प्रावधानों की स्पष्ट समझ के साथ प्रत्येक प्रकरण का निष्पादन किया जाए। आयुक्त ने कार्यप्रणाली में सुधार और जवाबदेही को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि जनता को शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कार्यशाला में उपायुक्त श्रीमती कीर्तिश्री, उप विकास आयुक्त श्री अमरेंद्र कुमार सिन्हा, अपर समाहर्ता अरविंद कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी श्री जहूर आलम, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी वैभव सिंह सहित अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

जहरीला' है मां का दूध, एम्स और महावीर कैंसर संस्थान की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

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बिहार के छह जिलों में स्तनपान कराने वाली माताओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मां के दूध में यूरेनियम (यू-238) की मौजूदगी का दानवा किया जा रहा है। महावीर कैंसर संस्थान, पटना और एम्स नई दिल्ली की संयुक्त स्टडी में यह बात सामने आई है कि राज्य के छह जिलों भोजपुर, समस्तीपुर, मुंगेर, भागलपुर, खगड़िया और नालंदा में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम पाया गया है।

40 महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क की जांच

अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच किए गए इस शोध में बेगूसराय, भोजपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, कटिहार और नालंदा जैसे जिलों से सैंपल लिए गए थे। इन जिलों से 17 से 35 वर्ष की आयु की 40 महिलाओं के ब्रेस्ट मिल्क के नमूनों को जांच के लिए भेजा गया था। इन सभी नमूनों में यूरेनियम यानी U-238 पाया गया है। इस दूध में यूरेनियम की मात्रा 0 से 5.25 जी/एल के बीच दर्ज की गई है।

70% शिशुओं के स्वास्थ्य का जोखिम बढ़ा

इस शोध को महावीर कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र, पटना, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और एम्स, नई दिल्ली के वैज्ञानिकों के एक समूह ने मिलकर किया है। ब्रिटिश जर्नल 'साइंटिफिक रिपोर्ट्स' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्ययन में बिहार के स्तन के दूध के नमूनों में 5 पीपीबी (प्रति अरब भाग) तक यूरेनियम पाया गया।अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% शिशुओं के स्वास्थ्य का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि यह साफ किया गया है कि इससे कैंसर का खतरा नहीं है यह स्तर अभी स्वीकार्य सीमा से नीचे हैं और घबराने की जरूरत नहीं है।

यूरेनियम भूजल के जरिए शरीर में पहुंच रहा

इस स्टडी का नेतृत्व महावीर कैंसर संस्थान के डॉ. अरुण कुमार ने किया। एम्स नई दिल्ली के डॉ. अशोक शर्मा रिसर्च के सह लेखक रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूरेनियम भूजल के जरिए शरीर में पहुंच रहा है, क्योंकि इन जिलों में पानी पहले से ही दूषित बताया जाता रहा है। यह दूषित पानी पीने और भोजन के माध्यम से शरीर में जाता है और फिर माताओं के दूध में पहुंचकर बच्चों के लिए खतरा पैदा करता है।

माताओं को स्तनपान बंद करने की कोई जरूरत नहीं

शोधकर्ताओं ने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि यूरेनियम का स्रोत कौन- सी जगह या गतिविधि है, लेकिन यह तथ्य गंभीर है कि यह सीधे बच्चों तक पहुंच रहा है। एम्स दिल्ली के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा ने कहा, 70% शिशुओं में जोखिम का संकेत जरूर मिला है, लेकिन स्वास्थ्य पर इसका वास्तविक प्रभाव कम होने की संभावना है। माताओं को स्तनपान बंद करने की कोई जरूरत नहीं है। यह शिशु के पोषण का सबसे सुरक्षित और प्रभावी स्रोत है।

पानी में आर्सेनिक ज्यादा

बिहार के 6 जिलों में लोगों का पीने का पानी और खाने का अनाज धीरे-धीरे जहर में बदलता जा रहा है। स्टडी में टीम ने बिहार के पटना, वैशाली, सारण, भोजपुर, बक्सर और नालंदा जिलों में सर्वे किया। कुल 286 घरों से हैंडपंप के पानी, गेहूं, चावल, बाल और नाखून के नमूने एकत्र किए गए। जांच में लगभग 14% हैंडपंपों के पानी, 44% गेहूं और 3% चावल के नमूनों में आर्सेनिक की मात्रा WHO की तय सीमा से अधिक पाई गई।