वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’, टीएमसी विवाद पर राहुल गांधी का केन्द्र और चुनाव आयोग पर हमला

#rahulgandhisupportedmamatabanerjeeintmcsymbolfrozen

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को बारतीय निर्वाचन आयोग ने फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ ही चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।

टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जोड़ा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जुड़े मामलों से जोड़ते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न।’ राहुल गांधी ने दावा किया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ रहे हैं और उनके चुनाव चिन्ह छीने जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है।

‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’

राहुल गांधी ने कहा कि अगर पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने अपने बयान में ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ को लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि आयोग का काम जनता के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक आयोग ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलट देती हैं।

राहुल बोले- यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर मतदाता की है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उनका यह बयान चुनाव आयोग की ओर से टीएमसी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद आया है।

टीएमसी का नाम और निशान छिना

बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीएमसी के विधायकों में टूट हो गई। अधिकतर विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया। बागी गुट की अगुवाई अरूप रॉय कर रहे हैं। इसके बाद टीएमसी के नाम और पार्टी सिंबल को लेकर जंग शुरू हो गई। दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने पहुंचा। चुनाव आयोग ने उपचुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फूल और घास के आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है।

ममता बनर्जी हाउस अरेस्ट…', बारुईपुर जाने से पहले सिक्यॉरिटी बढ़ाने पर टीएमसी का गंभीर आरोप

#mamatabanerjeesecuritytmcallegesobstructioninbaruipurvictim_case

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 साल वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर सूबे की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी इस घटना के बाद बारुईपुर का दौरा करने वाली हैं। हालांकि, इससे पहले उनके आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई। आवास के बाहर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।वहां बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं। इसका मकसद ममता बनर्जी को बारुईपुर जाने से रोकना है। टीएमसी ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री को नजरबंद करने की साजिश बताया है।

ममता बनर्जी के घर के बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा

टीएमसी ने बताया कि ममता बनर्जी का घर कालीघाट में है। उनके घर के बाहर की संकरी गली में 10 से ज्यादा पुलिस की गाड़ियां खड़ी कर दी गई हैं। पास में ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का भी घर है। वहां भी पुलिस तैनात है। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूर्व सीएम बारुईपुर जाने वाली थीं। लेकिन उन्हें घर से निकलने से रोकने के लिए बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा दिए गए।

ममता ने पूछा- क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?

बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और हत्या के बाद पीड़िता के परिवार से मिलने के उनके प्रस्तावित दौरे से पहले पूर्व सीएम ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर के बाहर केंद्रीय बल और पुलिसकर्मी तैनात किए गए। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने 11 साल की लड़की के परिवार से मिलने के लिए बारुईपुर जाने का प्लान बनाया था। ऐसा क्या हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है? मैं बारुईपुर जाकर परिवार से मिलना चाहती थी। उन्होंने मेरे घर के बाहर इतनी पुलिस क्यों लगा दी है? क्यों? क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?’

टीएमसी ने कहा- सुपर इमरजेंसी

वहीं, टीएमसी सांसद डोला सेन ने इसे सुपर इमरजेंसी करार दिया। डोला सेन ने पत्रकारों से कहा कि बंगाल और कोलकाता में क्या हो रहा है? हर कोई जानता है कि बारुईपुर में क्या हुआ। दीदी (ममता बनर्जी) जन-नेता हैं। इतनी भयानक घटना के बाद वह वहां जाना चाहती थीं। लेकिन क्या उन्होंने उन्हें नजरबंद कर दिया है? ऐसा करके क्या वे दीदी को रोक पाएंगे? मुझे इसी वजह से यहां आना पड़ा। बिना किसी वजह के यहां इतनी पुलिस और प्रशासन तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन जो कर रहा है, वह सही नहीं है। यह सुपर इमरजेंसी है।

क्या है मामला?

यह सारा विवाद बच्ची का शव मिलने के कुछ घंटों बाद शुरू हुआ। यह बच्ची एक दिन पहले लापता हो गई थी। उसका शव कोलकाता से करीब 15 किलोमीटर दूर बारुईपुर के सूर्यपुर हाट इलाके में मिला। बच्ची का शव एक बोरे में भरा हुआ था। इसके बाद स्थानीय लोग भड़क गए। लोगों ने सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाए। गुस्साए लोगों ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। लोग दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में यह घटना और हिंसक हो गई। एक गुस्साई भीड़ ने अपराध में शामिल होने के आरोपी एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जीत को दी चुनौती, खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

#mamata_banerjee_challenges_bhabanipur_election_result_calcutta_high_court

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा चुनाव में मिली हार को अभी तक पचा नहीं पाई हैं। यही वजह है कि उन्होंने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव रिजल्ट को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में कोर्ट से रिजल्ट की वैधता पर विचार करने की मांग की है।

चुनावी परिणामों पर लगातार सवाल उठा रहीं ममता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के ऐलान के बाद से ही ममता बनर्जी इन परिणामों को लेकर लगातार सवाल उठा रही थीं। अब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाकर इस पूरे मामले को कानूनी मोड़ दे दिया है। इसी को लेकर ममता बनर्जी मंगलवार दोपहर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं। उनके साथ पार्टी के सीनियर नेता कुणाल घोष और डोला सेन भी मौजूद थे। उन्होंने वहां अपनी याचिका दायर की और कुछ ही देर में बाहर निकल आईं।

सबूतों को सहेजने की मांग

हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर मांगें रखी हैं। कानूनी याचिका के जरिए उन्होंने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के सभी चुनाव संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। इसमें मतदान से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ईवीएम शामिल हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों को तुरंत सील किया जाए ताकि इनके साथ कोई छेड़छाड़ या इन्हें नष्ट न किया जा सके।

शुभेंदु ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया

भवानीपुर सीट पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया था। यह सीट पहले ममता बनर्जी के पास थी। उन्होंने इस सीट पर काउंटिंग के दौरान अनियमितताओं और अपने साथ मारपीट के आरोप भी लगाए थे।

ममता बनर्जी बनर्जी के खिलाफ FIR, जानें क्या है पूरा मामला

#firfiledagainstmamatabanerjee_ 

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। उन पर विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता में धरना मंच से कथित तौर पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप है। ममता बनर्जी के खिलाफ यह एफआईआर ऐसे वक्त पर हुई है जब उनके भतीजे बंगाल में चुनावों में हिंसा के साथ-साथ विधायकों के फर्जी दस्तखत करने के आरोपों को लेकर सीआईडी जांच का सामना कर रहे हैं।

विशेष समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणी का आरोप

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक कथित बयान को लेकर सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता के हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान एक विशेष समुदाय को लेकर ऐसी विवादित टिप्पणी की, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और समाज में नफरत फैल सकती है।

चुनावी हार के बाद यह दूसरी एफआईआर

बता दें कि एडवोकेट रिंकी चट्टोपाध्याय सिंह की शिकायत पर सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में ममता बनर्जी के खिलाफ मई महीने में भी एक एफआईआर दर्ज की गई थी। एडवोकेट रिंकी चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया गया था कि टीएमसी प्रमुख ने सनातन धर्म को न सिर्फ गंदा धर्म कर धार्मिक भावनाओं को आहत किया, बल्कि यह भी कहा कि एक खास समुदाय दूसरों को पांच मिनट में खत्म कर सकता है। बंगाल की लगातार तीन बार सीएम रही ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में भवानीपुर से हार गई थीं। वर्तमान में ममता बनर्जी किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।

वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’, टीएमसी विवाद पर राहुल गांधी का केन्द्र और चुनाव आयोग पर हमला

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ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को बारतीय निर्वाचन आयोग ने फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ ही चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।

टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जोड़ा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जुड़े मामलों से जोड़ते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न।’ राहुल गांधी ने दावा किया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ रहे हैं और उनके चुनाव चिन्ह छीने जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है।

‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’

राहुल गांधी ने कहा कि अगर पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने अपने बयान में ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ को लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि आयोग का काम जनता के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक आयोग ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलट देती हैं।

राहुल बोले- यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर मतदाता की है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उनका यह बयान चुनाव आयोग की ओर से टीएमसी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद आया है।

टीएमसी का नाम और निशान छिना

बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीएमसी के विधायकों में टूट हो गई। अधिकतर विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया। बागी गुट की अगुवाई अरूप रॉय कर रहे हैं। इसके बाद टीएमसी के नाम और पार्टी सिंबल को लेकर जंग शुरू हो गई। दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने पहुंचा। चुनाव आयोग ने उपचुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फूल और घास के आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है।

ममता बनर्जी हाउस अरेस्ट…', बारुईपुर जाने से पहले सिक्यॉरिटी बढ़ाने पर टीएमसी का गंभीर आरोप

#mamatabanerjeesecuritytmcallegesobstructioninbaruipurvictim_case

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 साल वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर सूबे की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी इस घटना के बाद बारुईपुर का दौरा करने वाली हैं। हालांकि, इससे पहले उनके आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई। आवास के बाहर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।वहां बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं। इसका मकसद ममता बनर्जी को बारुईपुर जाने से रोकना है। टीएमसी ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री को नजरबंद करने की साजिश बताया है।

ममता बनर्जी के घर के बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा

टीएमसी ने बताया कि ममता बनर्जी का घर कालीघाट में है। उनके घर के बाहर की संकरी गली में 10 से ज्यादा पुलिस की गाड़ियां खड़ी कर दी गई हैं। पास में ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का भी घर है। वहां भी पुलिस तैनात है। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूर्व सीएम बारुईपुर जाने वाली थीं। लेकिन उन्हें घर से निकलने से रोकने के लिए बाहर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स लगा दिए गए।

ममता ने पूछा- क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?

बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और हत्या के बाद पीड़िता के परिवार से मिलने के उनके प्रस्तावित दौरे से पहले पूर्व सीएम ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर के बाहर केंद्रीय बल और पुलिसकर्मी तैनात किए गए। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने 11 साल की लड़की के परिवार से मिलने के लिए बारुईपुर जाने का प्लान बनाया था। ऐसा क्या हुआ कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है? मैं बारुईपुर जाकर परिवार से मिलना चाहती थी। उन्होंने मेरे घर के बाहर इतनी पुलिस क्यों लगा दी है? क्यों? क्या वे मुझे नजरबंद करने की कोशिश कर रहे हैं?’

टीएमसी ने कहा- सुपर इमरजेंसी

वहीं, टीएमसी सांसद डोला सेन ने इसे सुपर इमरजेंसी करार दिया। डोला सेन ने पत्रकारों से कहा कि बंगाल और कोलकाता में क्या हो रहा है? हर कोई जानता है कि बारुईपुर में क्या हुआ। दीदी (ममता बनर्जी) जन-नेता हैं। इतनी भयानक घटना के बाद वह वहां जाना चाहती थीं। लेकिन क्या उन्होंने उन्हें नजरबंद कर दिया है? ऐसा करके क्या वे दीदी को रोक पाएंगे? मुझे इसी वजह से यहां आना पड़ा। बिना किसी वजह के यहां इतनी पुलिस और प्रशासन तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन जो कर रहा है, वह सही नहीं है। यह सुपर इमरजेंसी है।

क्या है मामला?

यह सारा विवाद बच्ची का शव मिलने के कुछ घंटों बाद शुरू हुआ। यह बच्ची एक दिन पहले लापता हो गई थी। उसका शव कोलकाता से करीब 15 किलोमीटर दूर बारुईपुर के सूर्यपुर हाट इलाके में मिला। बच्ची का शव एक बोरे में भरा हुआ था। इसके बाद स्थानीय लोग भड़क गए। लोगों ने सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाए। गुस्साए लोगों ने पुलिस की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। लोग दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे थे। बाद में यह घटना और हिंसक हो गई। एक गुस्साई भीड़ ने अपराध में शामिल होने के आरोपी एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जीत को दी चुनौती, खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा चुनाव में मिली हार को अभी तक पचा नहीं पाई हैं। यही वजह है कि उन्होंने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव रिजल्ट को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने अपनी याचिका में कोर्ट से रिजल्ट की वैधता पर विचार करने की मांग की है।

चुनावी परिणामों पर लगातार सवाल उठा रहीं ममता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के ऐलान के बाद से ही ममता बनर्जी इन परिणामों को लेकर लगातार सवाल उठा रही थीं। अब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाकर इस पूरे मामले को कानूनी मोड़ दे दिया है। इसी को लेकर ममता बनर्जी मंगलवार दोपहर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं। उनके साथ पार्टी के सीनियर नेता कुणाल घोष और डोला सेन भी मौजूद थे। उन्होंने वहां अपनी याचिका दायर की और कुछ ही देर में बाहर निकल आईं।

सबूतों को सहेजने की मांग

हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में ममता बनर्जी ने बेहद गंभीर मांगें रखी हैं। कानूनी याचिका के जरिए उन्होंने भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के सभी चुनाव संबंधी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। इसमें मतदान से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ईवीएम शामिल हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों को तुरंत सील किया जाए ताकि इनके साथ कोई छेड़छाड़ या इन्हें नष्ट न किया जा सके।

शुभेंदु ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया

भवानीपुर सीट पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया था। यह सीट पहले ममता बनर्जी के पास थी। उन्होंने इस सीट पर काउंटिंग के दौरान अनियमितताओं और अपने साथ मारपीट के आरोप भी लगाए थे।

ममता बनर्जी बनर्जी के खिलाफ FIR, जानें क्या है पूरा मामला

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। उन पर विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता में धरना मंच से कथित तौर पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप है। ममता बनर्जी के खिलाफ यह एफआईआर ऐसे वक्त पर हुई है जब उनके भतीजे बंगाल में चुनावों में हिंसा के साथ-साथ विधायकों के फर्जी दस्तखत करने के आरोपों को लेकर सीआईडी जांच का सामना कर रहे हैं।

विशेष समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणी का आरोप

विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक कथित बयान को लेकर सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता के हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान एक विशेष समुदाय को लेकर ऐसी विवादित टिप्पणी की, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और समाज में नफरत फैल सकती है।

चुनावी हार के बाद यह दूसरी एफआईआर

बता दें कि एडवोकेट रिंकी चट्टोपाध्याय सिंह की शिकायत पर सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में ममता बनर्जी के खिलाफ मई महीने में भी एक एफआईआर दर्ज की गई थी। एडवोकेट रिंकी चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया गया था कि टीएमसी प्रमुख ने सनातन धर्म को न सिर्फ गंदा धर्म कर धार्मिक भावनाओं को आहत किया, बल्कि यह भी कहा कि एक खास समुदाय दूसरों को पांच मिनट में खत्म कर सकता है। बंगाल की लगातार तीन बार सीएम रही ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में भवानीपुर से हार गई थीं। वर्तमान में ममता बनर्जी किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।