शादी के घरों में भोजन बनाना बड़ी चुनौती
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर अब आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और लगन सीजन शुरू होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से भीषण गर्मी में चाय-नाश्ते की दुकानों पर कर्मचारी कोयले की भट्टियां जलाकर काम करने को मजबूर हैं। तपती गर्मी में भट्ठियों के पास खड़े लोग परेशान नजर आ रहे हैं। एजेंसियों पर लोग घंटों लाइन में लगने को विवश हैं।
ज्ञानपुर नगर पंचायत में करीब 40 प्रतिशत दुकानदार इन दिनों कोयले की भट्ठी पर चाय-नाश्ता बना रहे हैं। लकड़ी की कीमत 6 से 8 रुपये प्रति किलो और कोयला 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
लगन के मौसम में शादी वाले घरों में भोजन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। लोग लकड़ी, कोयला और अन्य ईंधन के सहारे रिश्तेदारों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। हलवाई भी लकड़ी पर खाना बनाने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांग रहे हैं।
जिलापूर्ति अधिकारी सुनील कुमार के अनुसार, दुकानदारों को कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए कनेक्शन लेना होगा, जिसके बाद उन्हें सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। जिन घरों में शादी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर दिया जा रहा है। बुकिंग के बाद उपभोक्ता कार्यालय में कार्ड दिखाकर संबंधित एजेंसी से सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दुकानों पर घरेलू रसोई गैस का उपयोग करने वालों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है और कालाबाजारी करने वालों पर जल्द कार्रवाई होगी।

* गरम मसाले भी हुए महंगे
मध्य पूर्व में तनाव का असर अब मसालों पर भी दिखने लगा है। खड़ा धनिया, इलायची, लौंग, तेजपत्ता, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी और हल्दी समेत कई मसाले करीब 5 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इससे शादी समारोहों का खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

* ग्रामीण क्षेत्रों में उपली की मांग बढ़ी
ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की कमी के चलते लोग गोबर की उपली खरीद रहे हैं। गर्मी में उपली जल्दी सूखने से ग्रामीण महिलाएं इसे बेचकर अच्छा लाभ कमा रही हैं। दुकानदार 100 से 150 रुपये प्रति सैकड़ा उपली खरीद रहे हैं।
जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा एवं वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी
गोंडा। गोण्डा जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा तथा वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एआरटीओ (प्रशासन) आर.सी. भारतीय द्वारा महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 242 ऐसे विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जिनके 313 स्कूल वाहनों से संबंधित आवश्यक विवरण अब तक UPISVMP.COM पर अपडेट नहीं किए गए हैं।
एआरटीओ (प्रशासन) ने स्पष्ट किया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा वाहन चालकों का पूर्ण विवरण, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों के साथ शपथ पत्र पोर्टल पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद संबंधित विद्यालयों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई न किया जाना गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
सभी चिन्हित विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे 19 अप्रैल 2026 को अपने विद्यालय खुले रखें तथा अपने समस्त स्कूल वाहनों एवं चालकों का पूर्ण विवरण शपथ पत्र सहित तत्काल पोर्टल पर अपलोड करें।
इसके अतिरिक्त, सभी विद्यालयों को अपने वाहनों को निर्धारित तिथि पर एआरटीओ कार्यालय, एआरटीओ कार्यालय गोण्डा में प्रस्तुत कर भौतिक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान वाहन फिटनेस, सुरक्षा मानकों, परमिट तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
एआरटीओ (प्रशासन) ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जनपद के सभी विद्यालयों से अपील की गई है कि वे विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की दी मंजूरी
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए सड़कों और पुलों का व्यापक सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए संशोधित व्यय 83,977 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का कार्य इसी अवधि तक तथा पुलों का निर्माण मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, 31 मार्च 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अब तक टेंडर न हो सके परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। सरकार ने 961 करोड़ रुपये की लागत वाले 161 लंबी दूरी के पुलों को भी मंजूरी देने का निर्णय लिया है, जो पहले से स्वीकृत सड़कों के मार्ग पर लंबित हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, योजना की समयसीमा बढ़ाने से ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का पूरा लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, कृषि एवं अन्य उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान होगी और परिवहन लागत व समय में कमी आएगी।सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी, विशेषकर दूरदराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की दी मंजूरी
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए सड़कों और पुलों का व्यापक सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए संशोधित व्यय 83,977 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का कार्य इसी अवधि तक तथा पुलों का निर्माण मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, 31 मार्च 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अब तक टेंडर न हो सके परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। सरकार ने 961 करोड़ रुपये की लागत वाले 161 लंबी दूरी के पुलों को भी मंजूरी देने का निर्णय लिया है, जो पहले से स्वीकृत सड़कों के मार्ग पर लंबित हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, योजना की समयसीमा बढ़ाने से ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का पूरा लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, कृषि एवं अन्य उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान होगी और परिवहन लागत व समय में कमी आएगी।सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी, विशेषकर दूरदराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए।
दो दिवसीय 'दुग्ध स्वर्ण महोत्सव - 2026' का भव्य एवं सफल आयोजन संपन्न

लखनऊ। दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय **दुग्ध स्वर्ण महोत्सव - 2026** का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत योगी आदित्यनाथ द्वारा विभाग के नाम भेजे गए शुभकामना संदेश के वाचन से हुई।
कार्यक्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि डेयरी क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख साधन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तकनीक और नवाचार के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में दुग्ध विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभाग दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद आमजन तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाए रखने का संकल्प विभाग का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय उपलब्ध करा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
विभाग द्वारा **नन्द बाबा दुग्ध मिशन** और उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। “गौ से ग्राहक तक” समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार डेयरी क्षेत्र का राज्य के सकल मूल्यवर्धन (GSVA) में लगभग **1.72 लाख करोड़ रुपये** का योगदान है। अब तक दुग्ध विकास क्षेत्र में **25,000 करोड़ रुपये** से अधिक के **796 एमओयू** किए गए हैं, जिनसे **60,000 से अधिक रोजगार** सृजित होंगे।
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के अंतर्गत डेयरी सेक्टर में **2,000 करोड़ रुपये** की 72 परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ, जिनसे 4,000 रोजगार सृजित हुए। इसके अतिरिक्त **3,000 करोड़ रुपये** से अधिक के 59 नए एमओयू भी विभिन्न कंपनियों से किए जा रहे हैं।
महोत्सव में प्रदेश के लगभग **10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों** ने भाग लिया। वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों सहित देश-विदेश के लाखों लोगों को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया।
कार्यक्रम के दौरान विभाग में योगदान देने वाले कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा अधिकारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
गया में महिंद्रा ट्रैक्टर्स की N1 सीरीज़ लॉन्च, किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ

गया: गया शहर के विशाल तालाब स्थित एक निजी होटल में महिंद्रा ट्रैक्टर्स की नई N1 सीरीज़ का भव्य लॉन्च समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन सिद्धार्थ ट्रैक्टर्स द्वारा किया गया, जिसमें कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में स्टेट हेड बलवीर चौधरी, एरिया मैनेजर संजय दत्ता तथा क्षेत्रीय प्रबंधक रंजय कुमार ने भाग लिया।

इस अवसर पर सिद्धार्थ ट्रैक्टर्स के प्रोप्राइटर सिद्धि नाथ विश्वकर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में कृषि के क्षेत्र में तेजी से यांत्रिकीकरण बढ़ रहा है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने N1 सीरीज़ को किसानों के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि यह नई सीरीज़ खेती को अधिक आसान, तेज और किफायती बनाने में सहायक होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक रंजय कुमार ने बताया कि N1 सीरीज़ में पहले से अधिक शक्तिशाली इंजन दिया गया है, जो विभिन्न कृषि कार्यों को आसानी से करने में सक्षम है। इसके अलावा इस ट्रैक्टर में ड्यूल क्लच, रिवर्स पीटीओ, साइड गियर, मल्टी-स्पीड सिस्टम, बड़े टायर और पावर स्टीयरिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे किसानों को बेहतर प्रदर्शन और सुविधा मिलेगी।

कंपनी ने इस नई सीरीज़ पर 28 अप्रैल तक विशेष इंट्रोडक्टरी ऑफर भी घोषित किया है। इस ऑफर के तहत किसान आकर्षक लाभ के साथ ट्रैक्टर खरीद सकते हैं। इच्छुक ग्राहक सिद्धार्थ ट्रैक्टर्स से संपर्क कर इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में किसानों और उपस्थित लोगों ने नई तकनीक से लैस इस ट्रैक्टर की सराहना की और इसे कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी बताया।

दो दिन से लापता युवक का शव गंगनहर की पटरी पर पडा मिला मौके पर पहुँची पुलिस।

कँवरपाल सिंह


मुजफ्फरनगर,, थाना रामराज।
थाना रामराज पर सुरेश पुत्र बाबूराम के परिजनों ने सुरेश के गुमशुदा होने का एक प्रार्थना पत्र देकर बताया कि दिनांक 16,,04,,2026,, को सुरेश किसी काम से मीरापुर गया हुआ था। देर रात तक जब सुरेश घर नहीं लोटा थाना रामराज पुलिस टीम ने परिजनों से प्रार्थना पत्र लेकर परिजनों को अशवाशन दिया लापता युवक की जल्द तलाश की जायेगी। आज दिनांक,18,,04,,2026,, को थाना रामराज पुलिस टीम को सुचना प्राप्त हुई। बहसुमा थाना क्षेत्र रामराज गंगनहर पटरी के निचे अज्ञात शव पडा हुआ है। सुचना मिलते थाना रामराज पुलिस टीम मौके पर पहुॅची तथा शव की पहचान सुरेश पुत्र बाबूराम निवासी ग्राम पुटठीइब्राहिमपुर के रूप मे हुई। पुलिस टीम द्वारा शव को कब्जे मे लिया गया। तथा शव को लेकर थाने पर आ गयी। तथा उसके परिजनों को अवगत कराया। परिजनों ने थाने पहुँच कर शव की पहचान सुरेश के रुप मे की गई। शव को देखकर परिजन थाने मे दहाड़े मार मार कर रोने लगे।तथा पुलिस टीम ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने बताया पुलिस टीम द्वारा जांच की जा रही है।जांच के बाद आगे की कर्यवाही की जायेगी।
लीगल कॉन्क्लेव 2026 में न्याय व्यवस्था सुधार पर मंथन
* 6 करोड़ लंबित मामलों के समाधान को मध्यस्थता और एआई बताया अहम उपाय

* न्यायमूर्ति मनमोहन बोले— स्वस्थ बहस से मजबूत होगी न्याय प्रणाली, तकनीक सहायक बने, विकल्प नहीं

नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ, विधि शिक्षा में सुधार और न्याय को अधिक सुलभ व किफायती बनाने के मुद्दों पर शनिवार को आयोजित लीगल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026 में व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में कानूनी विशेषज्ञों ने मध्यस्थता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को न्यायिक सुधार का प्रभावी माध्यम बताया।
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) ने सोसाइटी ऑफ लीगल प्रोफेशनल्स (एसएलपी) के सहयोग से नई दिल्ली में “सभी के लिए किफायती और सुलभ न्याय” विषय पर इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया। मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय प्रणाली की कमियों की ओर ध्यान दिलाने का उद्देश्य निंदा नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना से ही न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि उसका उपयोग उसे वरदान या अभिशाप बना सकता है, इसलिए तकनीक को केवल सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने लंबित मामलों की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कानूनी समुदाय को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या आर्बिट्रेशन, जिसे कभी समाधान माना गया था, अब स्वयं चुनौती बन रहा है। हालांकि, उन्होंने वैवाहिक मामलों में मध्यस्थता की सफलता को सराहनीय बताया।
कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि देश में 6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता और तकनीक सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक दस्तावेजीकरण व प्रक्रियाओं को तेज कर सकती है, जिससे लाखों मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में न्याय प्रणाली की गति महत्वपूर्ण है और तकनीक इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
सिल्फ के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने विधि शिक्षा में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लॉ स्कूलों को छात्रों को तकनीक के सही उपयोग और उसके दुरुपयोग से बचाव के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में आर्बिट्रेशन व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सकी है, जिसके कारण कॉर्पोरेट विवाद अक्सर सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में ले जाए जाते हैं।
डॉ. भसीन ने भारत की पारंपरिक पंचायत आधारित सहमति न्याय प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समन्वय और सहमति से भी जुड़ा है। कॉन्क्लेव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई लॉ फर्मों का सफल नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो विधि क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रेरक उदाहरण हैं। यह कॉन्क्लेव न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विमर्श का मंच साबित हुआ।
नई दिल्ली में आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्यों का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण
नई दिल्ली। राजधानी में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का कार्य तेज़ी से जारी है। इसी क्रम में रेखा गुप्ता ने मेट्रो फेज-4 के तहत आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम के अधिकारियों के साथ परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और यात्री सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता, सुरक्षा और तय समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि मेट्रो दिल्ली की जीवनरेखा है और प्रतिदिन लाखों लोग इसका उपयोग करते हैं। ऐसे में हर स्तर पर पारदर्शिता और कार्य में तेजी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और आवश्यकताओं को देखते हुए आधुनिक और मजबूत कनेक्टिविटी तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है, जो विकसित दिल्ली की दिशा में अहम कदम है।
गौरतलब है कि मेट्रो फेज-4 के तहत तीन नए कॉरिडोर—लाजपत नगर-साकेत, इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ और रिठाला-कुंडली—के लिए 3,386.18 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है। करीब 14,630.80 करोड़ रुपये की लागत से अगले चार वर्षों में 47.22 किलोमीटर लंबा नेटवर्क तैयार होगा, जिससे उत्तर, मध्य और दक्षिणी दिल्ली को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
गया के गांधी मैदान स्टेडियम में चैंपियंस फैक्ट्री गर्ल्स फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन, लड़की टीम रही विजेता, उपहार दिया गया

गया: गया शहर के गांधी मैदान स्टेडियम में ए.आर.एस क्रीड़ाशाला टूर्नामेंट के तत्वावधान में चैंपियनशिप फैक्ट्री गर्ल्स फुटबॉल टूर्नामेंट का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिला खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का दिल जीत लिया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों में जबरदस्त जोश और प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहा। दोनों टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया, जिससे दर्शकों में भी उत्साह चरम पर रहा। मैच के दौरान काजल कुमारी ने पहला गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई, जबकि दूसरा गोल चंदन ने दागा। खिलाड़ियों की गति, तालमेल और रणनीति ने मैच को बेहद आकर्षक बना दिया। फाइनल मुकाबले में एफसी नोनो गर्ल्स टीम ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। टीम के खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और अंततः विजेता बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, राधी को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान ए.आर.एस क्रीड़ाशाला टूर्नामेंट के फाउंडर अतुल आनंद ने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करना और उनमें खेल भावना को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि फिलहाल संस्था द्वारा क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गया से शुरू हुआ यह प्रयास आगे चलकर पूरे बिहार में बड़े स्तर पर क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन तक पहुंचेगा।

इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि राकेश सिन्हा, रवि चौरसिया, नंदू कुमार और धीरेंद्र कुमार ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मंच प्रदान करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही, इससे खेल के प्रति युवाओं की रुचि भी बढ़ती है। पूरे आयोजन के दौरान दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ मौजूद रही, जिन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। यह टूर्नामेंट महिला खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ, जहां उन्होंने न केवल अपने खेल का प्रदर्शन किया, बल्कि भविष्य में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्राप्त की।

शादी के घरों में भोजन बनाना बड़ी चुनौती
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर अब आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और लगन सीजन शुरू होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से भीषण गर्मी में चाय-नाश्ते की दुकानों पर कर्मचारी कोयले की भट्टियां जलाकर काम करने को मजबूर हैं। तपती गर्मी में भट्ठियों के पास खड़े लोग परेशान नजर आ रहे हैं। एजेंसियों पर लोग घंटों लाइन में लगने को विवश हैं।
ज्ञानपुर नगर पंचायत में करीब 40 प्रतिशत दुकानदार इन दिनों कोयले की भट्ठी पर चाय-नाश्ता बना रहे हैं। लकड़ी की कीमत 6 से 8 रुपये प्रति किलो और कोयला 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
लगन के मौसम में शादी वाले घरों में भोजन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। लोग लकड़ी, कोयला और अन्य ईंधन के सहारे रिश्तेदारों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। हलवाई भी लकड़ी पर खाना बनाने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांग रहे हैं।
जिलापूर्ति अधिकारी सुनील कुमार के अनुसार, दुकानदारों को कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए कनेक्शन लेना होगा, जिसके बाद उन्हें सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। जिन घरों में शादी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर दिया जा रहा है। बुकिंग के बाद उपभोक्ता कार्यालय में कार्ड दिखाकर संबंधित एजेंसी से सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दुकानों पर घरेलू रसोई गैस का उपयोग करने वालों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है और कालाबाजारी करने वालों पर जल्द कार्रवाई होगी।

* गरम मसाले भी हुए महंगे
मध्य पूर्व में तनाव का असर अब मसालों पर भी दिखने लगा है। खड़ा धनिया, इलायची, लौंग, तेजपत्ता, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी और हल्दी समेत कई मसाले करीब 5 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इससे शादी समारोहों का खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

* ग्रामीण क्षेत्रों में उपली की मांग बढ़ी
ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की कमी के चलते लोग गोबर की उपली खरीद रहे हैं। गर्मी में उपली जल्दी सूखने से ग्रामीण महिलाएं इसे बेचकर अच्छा लाभ कमा रही हैं। दुकानदार 100 से 150 रुपये प्रति सैकड़ा उपली खरीद रहे हैं।
जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा एवं वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी
गोंडा। गोण्डा जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा तथा वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एआरटीओ (प्रशासन) आर.सी. भारतीय द्वारा महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 242 ऐसे विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जिनके 313 स्कूल वाहनों से संबंधित आवश्यक विवरण अब तक UPISVMP.COM पर अपडेट नहीं किए गए हैं।
एआरटीओ (प्रशासन) ने स्पष्ट किया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा वाहन चालकों का पूर्ण विवरण, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों के साथ शपथ पत्र पोर्टल पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद संबंधित विद्यालयों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई न किया जाना गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
सभी चिन्हित विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे 19 अप्रैल 2026 को अपने विद्यालय खुले रखें तथा अपने समस्त स्कूल वाहनों एवं चालकों का पूर्ण विवरण शपथ पत्र सहित तत्काल पोर्टल पर अपलोड करें।
इसके अतिरिक्त, सभी विद्यालयों को अपने वाहनों को निर्धारित तिथि पर एआरटीओ कार्यालय, एआरटीओ कार्यालय गोण्डा में प्रस्तुत कर भौतिक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान वाहन फिटनेस, सुरक्षा मानकों, परमिट तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
एआरटीओ (प्रशासन) ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जनपद के सभी विद्यालयों से अपील की गई है कि वे विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की दी मंजूरी
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए सड़कों और पुलों का व्यापक सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए संशोधित व्यय 83,977 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का कार्य इसी अवधि तक तथा पुलों का निर्माण मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, 31 मार्च 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अब तक टेंडर न हो सके परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। सरकार ने 961 करोड़ रुपये की लागत वाले 161 लंबी दूरी के पुलों को भी मंजूरी देने का निर्णय लिया है, जो पहले से स्वीकृत सड़कों के मार्ग पर लंबित हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, योजना की समयसीमा बढ़ाने से ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का पूरा लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, कृषि एवं अन्य उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान होगी और परिवहन लागत व समय में कमी आएगी।सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी, विशेषकर दूरदराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की दी मंजूरी
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए सड़कों और पुलों का व्यापक सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए संशोधित व्यय 83,977 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का कार्य इसी अवधि तक तथा पुलों का निर्माण मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, 31 मार्च 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अब तक टेंडर न हो सके परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। सरकार ने 961 करोड़ रुपये की लागत वाले 161 लंबी दूरी के पुलों को भी मंजूरी देने का निर्णय लिया है, जो पहले से स्वीकृत सड़कों के मार्ग पर लंबित हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, योजना की समयसीमा बढ़ाने से ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का पूरा लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, कृषि एवं अन्य उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान होगी और परिवहन लागत व समय में कमी आएगी।सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी, विशेषकर दूरदराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए।
दो दिवसीय 'दुग्ध स्वर्ण महोत्सव - 2026' का भव्य एवं सफल आयोजन संपन्न

लखनऊ। दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय **दुग्ध स्वर्ण महोत्सव - 2026** का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत योगी आदित्यनाथ द्वारा विभाग के नाम भेजे गए शुभकामना संदेश के वाचन से हुई।
कार्यक्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि डेयरी क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख साधन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तकनीक और नवाचार के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में दुग्ध विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभाग दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद आमजन तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाए रखने का संकल्प विभाग का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय उपलब्ध करा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
विभाग द्वारा **नन्द बाबा दुग्ध मिशन** और उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। “गौ से ग्राहक तक” समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार डेयरी क्षेत्र का राज्य के सकल मूल्यवर्धन (GSVA) में लगभग **1.72 लाख करोड़ रुपये** का योगदान है। अब तक दुग्ध विकास क्षेत्र में **25,000 करोड़ रुपये** से अधिक के **796 एमओयू** किए गए हैं, जिनसे **60,000 से अधिक रोजगार** सृजित होंगे।
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के अंतर्गत डेयरी सेक्टर में **2,000 करोड़ रुपये** की 72 परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ, जिनसे 4,000 रोजगार सृजित हुए। इसके अतिरिक्त **3,000 करोड़ रुपये** से अधिक के 59 नए एमओयू भी विभिन्न कंपनियों से किए जा रहे हैं।
महोत्सव में प्रदेश के लगभग **10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों** ने भाग लिया। वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों सहित देश-विदेश के लाखों लोगों को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया।
कार्यक्रम के दौरान विभाग में योगदान देने वाले कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा अधिकारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
गया में महिंद्रा ट्रैक्टर्स की N1 सीरीज़ लॉन्च, किसानों को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ

गया: गया शहर के विशाल तालाब स्थित एक निजी होटल में महिंद्रा ट्रैक्टर्स की नई N1 सीरीज़ का भव्य लॉन्च समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन सिद्धार्थ ट्रैक्टर्स द्वारा किया गया, जिसमें कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में स्टेट हेड बलवीर चौधरी, एरिया मैनेजर संजय दत्ता तथा क्षेत्रीय प्रबंधक रंजय कुमार ने भाग लिया।

इस अवसर पर सिद्धार्थ ट्रैक्टर्स के प्रोप्राइटर सिद्धि नाथ विश्वकर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में कृषि के क्षेत्र में तेजी से यांत्रिकीकरण बढ़ रहा है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने N1 सीरीज़ को किसानों के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि यह नई सीरीज़ खेती को अधिक आसान, तेज और किफायती बनाने में सहायक होगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय प्रबंधक रंजय कुमार ने बताया कि N1 सीरीज़ में पहले से अधिक शक्तिशाली इंजन दिया गया है, जो विभिन्न कृषि कार्यों को आसानी से करने में सक्षम है। इसके अलावा इस ट्रैक्टर में ड्यूल क्लच, रिवर्स पीटीओ, साइड गियर, मल्टी-स्पीड सिस्टम, बड़े टायर और पावर स्टीयरिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे किसानों को बेहतर प्रदर्शन और सुविधा मिलेगी।

कंपनी ने इस नई सीरीज़ पर 28 अप्रैल तक विशेष इंट्रोडक्टरी ऑफर भी घोषित किया है। इस ऑफर के तहत किसान आकर्षक लाभ के साथ ट्रैक्टर खरीद सकते हैं। इच्छुक ग्राहक सिद्धार्थ ट्रैक्टर्स से संपर्क कर इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में किसानों और उपस्थित लोगों ने नई तकनीक से लैस इस ट्रैक्टर की सराहना की और इसे कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी बताया।

दो दिन से लापता युवक का शव गंगनहर की पटरी पर पडा मिला मौके पर पहुँची पुलिस।

कँवरपाल सिंह


मुजफ्फरनगर,, थाना रामराज।
थाना रामराज पर सुरेश पुत्र बाबूराम के परिजनों ने सुरेश के गुमशुदा होने का एक प्रार्थना पत्र देकर बताया कि दिनांक 16,,04,,2026,, को सुरेश किसी काम से मीरापुर गया हुआ था। देर रात तक जब सुरेश घर नहीं लोटा थाना रामराज पुलिस टीम ने परिजनों से प्रार्थना पत्र लेकर परिजनों को अशवाशन दिया लापता युवक की जल्द तलाश की जायेगी। आज दिनांक,18,,04,,2026,, को थाना रामराज पुलिस टीम को सुचना प्राप्त हुई। बहसुमा थाना क्षेत्र रामराज गंगनहर पटरी के निचे अज्ञात शव पडा हुआ है। सुचना मिलते थाना रामराज पुलिस टीम मौके पर पहुॅची तथा शव की पहचान सुरेश पुत्र बाबूराम निवासी ग्राम पुटठीइब्राहिमपुर के रूप मे हुई। पुलिस टीम द्वारा शव को कब्जे मे लिया गया। तथा शव को लेकर थाने पर आ गयी। तथा उसके परिजनों को अवगत कराया। परिजनों ने थाने पहुँच कर शव की पहचान सुरेश के रुप मे की गई। शव को देखकर परिजन थाने मे दहाड़े मार मार कर रोने लगे।तथा पुलिस टीम ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने बताया पुलिस टीम द्वारा जांच की जा रही है।जांच के बाद आगे की कर्यवाही की जायेगी।
लीगल कॉन्क्लेव 2026 में न्याय व्यवस्था सुधार पर मंथन
* 6 करोड़ लंबित मामलों के समाधान को मध्यस्थता और एआई बताया अहम उपाय

* न्यायमूर्ति मनमोहन बोले— स्वस्थ बहस से मजबूत होगी न्याय प्रणाली, तकनीक सहायक बने, विकल्प नहीं

नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ, विधि शिक्षा में सुधार और न्याय को अधिक सुलभ व किफायती बनाने के मुद्दों पर शनिवार को आयोजित लीगल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026 में व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में कानूनी विशेषज्ञों ने मध्यस्थता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को न्यायिक सुधार का प्रभावी माध्यम बताया।
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) ने सोसाइटी ऑफ लीगल प्रोफेशनल्स (एसएलपी) के सहयोग से नई दिल्ली में “सभी के लिए किफायती और सुलभ न्याय” विषय पर इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया। मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय प्रणाली की कमियों की ओर ध्यान दिलाने का उद्देश्य निंदा नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना से ही न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि उसका उपयोग उसे वरदान या अभिशाप बना सकता है, इसलिए तकनीक को केवल सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने लंबित मामलों की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कानूनी समुदाय को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या आर्बिट्रेशन, जिसे कभी समाधान माना गया था, अब स्वयं चुनौती बन रहा है। हालांकि, उन्होंने वैवाहिक मामलों में मध्यस्थता की सफलता को सराहनीय बताया।
कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि देश में 6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता और तकनीक सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक दस्तावेजीकरण व प्रक्रियाओं को तेज कर सकती है, जिससे लाखों मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में न्याय प्रणाली की गति महत्वपूर्ण है और तकनीक इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
सिल्फ के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने विधि शिक्षा में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लॉ स्कूलों को छात्रों को तकनीक के सही उपयोग और उसके दुरुपयोग से बचाव के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में आर्बिट्रेशन व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सकी है, जिसके कारण कॉर्पोरेट विवाद अक्सर सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में ले जाए जाते हैं।
डॉ. भसीन ने भारत की पारंपरिक पंचायत आधारित सहमति न्याय प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समन्वय और सहमति से भी जुड़ा है। कॉन्क्लेव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई लॉ फर्मों का सफल नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो विधि क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रेरक उदाहरण हैं। यह कॉन्क्लेव न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विमर्श का मंच साबित हुआ।
नई दिल्ली में आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्यों का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण
नई दिल्ली। राजधानी में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का कार्य तेज़ी से जारी है। इसी क्रम में रेखा गुप्ता ने मेट्रो फेज-4 के तहत आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम के अधिकारियों के साथ परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और यात्री सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता, सुरक्षा और तय समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि मेट्रो दिल्ली की जीवनरेखा है और प्रतिदिन लाखों लोग इसका उपयोग करते हैं। ऐसे में हर स्तर पर पारदर्शिता और कार्य में तेजी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और आवश्यकताओं को देखते हुए आधुनिक और मजबूत कनेक्टिविटी तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है, जो विकसित दिल्ली की दिशा में अहम कदम है।
गौरतलब है कि मेट्रो फेज-4 के तहत तीन नए कॉरिडोर—लाजपत नगर-साकेत, इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ और रिठाला-कुंडली—के लिए 3,386.18 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है। करीब 14,630.80 करोड़ रुपये की लागत से अगले चार वर्षों में 47.22 किलोमीटर लंबा नेटवर्क तैयार होगा, जिससे उत्तर, मध्य और दक्षिणी दिल्ली को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
गया के गांधी मैदान स्टेडियम में चैंपियंस फैक्ट्री गर्ल्स फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन, लड़की टीम रही विजेता, उपहार दिया गया

गया: गया शहर के गांधी मैदान स्टेडियम में ए.आर.एस क्रीड़ाशाला टूर्नामेंट के तत्वावधान में चैंपियनशिप फैक्ट्री गर्ल्स फुटबॉल टूर्नामेंट का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिला खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का दिल जीत लिया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों में जबरदस्त जोश और प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहा। दोनों टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया, जिससे दर्शकों में भी उत्साह चरम पर रहा। मैच के दौरान काजल कुमारी ने पहला गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई, जबकि दूसरा गोल चंदन ने दागा। खिलाड़ियों की गति, तालमेल और रणनीति ने मैच को बेहद आकर्षक बना दिया। फाइनल मुकाबले में एफसी नोनो गर्ल्स टीम ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। टीम के खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और अंततः विजेता बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, राधी को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के खिताब से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान ए.आर.एस क्रीड़ाशाला टूर्नामेंट के फाउंडर अतुल आनंद ने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करना और उनमें खेल भावना को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि फिलहाल संस्था द्वारा क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स सहित अन्य खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि गया से शुरू हुआ यह प्रयास आगे चलकर पूरे बिहार में बड़े स्तर पर क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन तक पहुंचेगा।

इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि राकेश सिन्हा, रवि चौरसिया, नंदू कुमार और धीरेंद्र कुमार ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मंच प्रदान करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही, इससे खेल के प्रति युवाओं की रुचि भी बढ़ती है। पूरे आयोजन के दौरान दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ मौजूद रही, जिन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। यह टूर्नामेंट महिला खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ, जहां उन्होंने न केवल अपने खेल का प्रदर्शन किया, बल्कि भविष्य में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्राप्त की।