शादी के घरों में भोजन बनाना बड़ी चुनौती
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर अब आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और लगन सीजन शुरू होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से भीषण गर्मी में चाय-नाश्ते की दुकानों पर कर्मचारी कोयले की भट्टियां जलाकर काम करने को मजबूर हैं। तपती गर्मी में भट्ठियों के पास खड़े लोग परेशान नजर आ रहे हैं। एजेंसियों पर लोग घंटों लाइन में लगने को विवश हैं।
ज्ञानपुर नगर पंचायत में करीब 40 प्रतिशत दुकानदार इन दिनों कोयले की भट्ठी पर चाय-नाश्ता बना रहे हैं। लकड़ी की कीमत 6 से 8 रुपये प्रति किलो और कोयला 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
लगन के मौसम में शादी वाले घरों में भोजन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। लोग लकड़ी, कोयला और अन्य ईंधन के सहारे रिश्तेदारों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। हलवाई भी लकड़ी पर खाना बनाने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांग रहे हैं।
जिलापूर्ति अधिकारी सुनील कुमार के अनुसार, दुकानदारों को कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए कनेक्शन लेना होगा, जिसके बाद उन्हें सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। जिन घरों में शादी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर दिया जा रहा है। बुकिंग के बाद उपभोक्ता कार्यालय में कार्ड दिखाकर संबंधित एजेंसी से सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दुकानों पर घरेलू रसोई गैस का उपयोग करने वालों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है और कालाबाजारी करने वालों पर जल्द कार्रवाई होगी।

* गरम मसाले भी हुए महंगे
मध्य पूर्व में तनाव का असर अब मसालों पर भी दिखने लगा है। खड़ा धनिया, इलायची, लौंग, तेजपत्ता, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी और हल्दी समेत कई मसाले करीब 5 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इससे शादी समारोहों का खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

* ग्रामीण क्षेत्रों में उपली की मांग बढ़ी
ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की कमी के चलते लोग गोबर की उपली खरीद रहे हैं। गर्मी में उपली जल्दी सूखने से ग्रामीण महिलाएं इसे बेचकर अच्छा लाभ कमा रही हैं। दुकानदार 100 से 150 रुपये प्रति सैकड़ा उपली खरीद रहे हैं।
जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा एवं वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी
गोंडा। गोण्डा जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा तथा वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एआरटीओ (प्रशासन) आर.सी. भारतीय द्वारा महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 242 ऐसे विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जिनके 313 स्कूल वाहनों से संबंधित आवश्यक विवरण अब तक UPISVMP.COM पर अपडेट नहीं किए गए हैं।
एआरटीओ (प्रशासन) ने स्पष्ट किया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा वाहन चालकों का पूर्ण विवरण, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों के साथ शपथ पत्र पोर्टल पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद संबंधित विद्यालयों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई न किया जाना गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
सभी चिन्हित विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे 19 अप्रैल 2026 को अपने विद्यालय खुले रखें तथा अपने समस्त स्कूल वाहनों एवं चालकों का पूर्ण विवरण शपथ पत्र सहित तत्काल पोर्टल पर अपलोड करें।
इसके अतिरिक्त, सभी विद्यालयों को अपने वाहनों को निर्धारित तिथि पर एआरटीओ कार्यालय, एआरटीओ कार्यालय गोण्डा में प्रस्तुत कर भौतिक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान वाहन फिटनेस, सुरक्षा मानकों, परमिट तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
एआरटीओ (प्रशासन) ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जनपद के सभी विद्यालयों से अपील की गई है कि वे विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा गया
मोनू भाटी

मवाना। नामित सभासद अर्जुन काली ने तहसील सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर एसडीएम मवाना तथा सीओ मवाना को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा।
अर्जुन काली ने बताया कि नगर पालिका क्षेत्र के तहसील ग्राउंड के पास स्थित विद्यालय में लगभग 150 से 200 छात्राएं पढ़ती हैं और छात्रावास में निवास करती हैं। विद्यालय की दीवार से सटे क्षेत्र में नगर पालिका परिषद मवाना द्वारा ओपन स्टेडियम की पेढ़ियां बनवाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय की दीवार पहले से ही काफी छोटी है। पेढ़ियों के निर्माण के बाद किसी बाहरी व्यक्ति के लिए दीवार फांदकर विद्यालय परिसर में प्रवेश करना आसान हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी तहसील ग्राउंड में नशा करने वाले कुछ लोगों ने विद्यालय में घुसने की कोशिश की है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार के *बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ* अभियान की भावना को ध्यान में रखते हुए पहले विद्यालय की दीवार ऊंची और मजबूत कराई जाए, ताकि कोई असामाजिक तत्व परिसर में प्रवेश न कर सके। इसके बाद ही स्टेडियम निर्माण कार्य कराया जाए।
अर्जुन काली ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन उचित कार्रवाई करे, जिससे भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका न रहे और छात्राओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
इस दौरान नवनीत चौहान, मोहित शर्मा, वंश जाटव, गणपत जाटव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
लीगल कॉन्क्लेव 2026 में न्याय व्यवस्था सुधार पर मंथन
* 6 करोड़ लंबित मामलों के समाधान को मध्यस्थता और एआई बताया अहम उपाय

* न्यायमूर्ति मनमोहन बोले— स्वस्थ बहस से मजबूत होगी न्याय प्रणाली, तकनीक सहायक बने, विकल्प नहीं

नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ, विधि शिक्षा में सुधार और न्याय को अधिक सुलभ व किफायती बनाने के मुद्दों पर शनिवार को आयोजित लीगल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026 में व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में कानूनी विशेषज्ञों ने मध्यस्थता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को न्यायिक सुधार का प्रभावी माध्यम बताया।
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) ने सोसाइटी ऑफ लीगल प्रोफेशनल्स (एसएलपी) के सहयोग से नई दिल्ली में “सभी के लिए किफायती और सुलभ न्याय” विषय पर इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया। मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय प्रणाली की कमियों की ओर ध्यान दिलाने का उद्देश्य निंदा नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना से ही न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि उसका उपयोग उसे वरदान या अभिशाप बना सकता है, इसलिए तकनीक को केवल सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने लंबित मामलों की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कानूनी समुदाय को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या आर्बिट्रेशन, जिसे कभी समाधान माना गया था, अब स्वयं चुनौती बन रहा है। हालांकि, उन्होंने वैवाहिक मामलों में मध्यस्थता की सफलता को सराहनीय बताया।
कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि देश में 6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता और तकनीक सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक दस्तावेजीकरण व प्रक्रियाओं को तेज कर सकती है, जिससे लाखों मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में न्याय प्रणाली की गति महत्वपूर्ण है और तकनीक इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
सिल्फ के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने विधि शिक्षा में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लॉ स्कूलों को छात्रों को तकनीक के सही उपयोग और उसके दुरुपयोग से बचाव के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में आर्बिट्रेशन व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सकी है, जिसके कारण कॉर्पोरेट विवाद अक्सर सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में ले जाए जाते हैं।
डॉ. भसीन ने भारत की पारंपरिक पंचायत आधारित सहमति न्याय प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समन्वय और सहमति से भी जुड़ा है। कॉन्क्लेव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई लॉ फर्मों का सफल नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो विधि क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रेरक उदाहरण हैं। यह कॉन्क्लेव न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विमर्श का मंच साबित हुआ।
महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर उत्तराखंड में सियासी संग्राम, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
* परिसीमन के मुद्दे पर तेज हुई तकरार, दोनों दलों ने एक-दूसरे पर साधा निशाना

देहरादून। उत्तराखंड में महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गई हैं तथा दोनों दल एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं।
संसद में संबंधित संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पक्ष में है, लेकिन उससे जुड़े परिसीमन प्रावधानों को लेकर उसकी आपत्ति है।
राजनीतिक विवाद की मुख्य वजह परिसीमन को माना जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से पुनर्गठन की बात कही गई है। विपक्ष का तर्क है कि इससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है, जबकि भाजपा इसे महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है। भाजपा ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है और विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का कहना है कि वह जनता के बीच जाकर विपक्ष की भूमिका को उजागर करेगी और महिला आरक्षण के समर्थन में जनमत तैयार करेगी।
वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि वास्तविक प्राथमिकता महिलाओं को तत्काल प्रतिनिधित्व देना होना चाहिए।आगामी चुनावों को देखते हुए उत्तराखंड में यह मुद्दा और गर्माने के आसार हैं। दोनों प्रमुख दल इसे बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की रणनीति में जुट गए हैं।
अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकथाम को लेकर कार्यशाला आयोजित
*गोण्डा 18 अप्रैल,2026*।
जनपद में अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए विकास भवन स्थित चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संरक्षण अधिकारी चन्द्रमोहन वर्मा ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है, जिसे खत्म करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर शिवेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर बाल विवाह की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए सतर्कता और जनजागरूकता बेहद जरूरी है। जिला समन्वयक अपराजिता अभय पाण्डेय ने कहा कि कानून के तहत बाल विवाह दंडनीय अपराध है और इसकी सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान सेंटर मैनेजर चेतना सिंह, जेंडर स्पेशलिस्ट राजकुमार आर्य व ज्योत्सना सिंह, नीतू त्रिपाठी, शान्तनु उपाध्याय, आत्रेय त्रिपाठी, हितेश कुमार सहित पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बाल संरक्षण और जागरूकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
हरदोई में फोटोग्राफर्स एसोसिएशन की नई टीम का गठन,
रितेश मिश्रा
हरदोई। उत्तर प्रदेश फोटोग्राफर्स एसोसिएशन की हरदोई इकाई का आज औपचारिक गठन किया गया। वर्ष 2018 में गठित कमेटी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह नई टीम घोषित की गई। जिला अध्यक्ष दीपक कपूर ने पूर्व में त्यागपत्र देकर विनोद दीक्षित को जिला प्रभारी नामित किया था, जिसके क्रम में आज शेष पदों पर भी चयन प्रक्रिया पूर्ण की गई।
इस दौरान किसी भी पद के लिए एक से अधिक नामांकन न होने के कारण चुनाव की आवश्यकता नहीं पड़ी और सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चयन किया गया। नई टीम में संजीव सिंह को अध्यक्ष, दुर्गेश अवस्थी व तालिब अब्बास जैदी को उपाध्यक्ष बनाया गया। विनोद दीक्षित जिला प्रभारी, शिवम राठौर महामंत्री, गौरव वर्मा, अभिषेक प्रजापति व अनुराग तिवारी "रामू"   राजेश राजवंशी मंत्री चुने गए। वहीं नवल किशोर को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
टीम गठन से पूर्व सुबह 9 बजे कैनन कैमरा कंपनी द्वारा सिनेमैटिक वीडियोग्राफी वर्कशॉप आयोजित की गई। इस वर्कशॉप में मेंटर अमित सक्सेना ने फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स को सिनेमैटोग्राफी की बारीकियों के साथ कैमरा सेटिंग्स की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान लखनऊ से आईं अपूर्वा अस्थाना ने मॉडल के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रदेश प्रवक्ता व हरदोई टीम के संयोजक दीपक कपूर ने सभी उपस्थित फोटोग्राफर्स का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में रोहित गुप्ता, अभिषेक सिंह, आशुतोष, कुलदीप राजवंशी, दयाशंकर, सिद्धार्थ, राजकुमार, गौरव कुमार, गौरव गुप्ता, देवराज, राजेश, लोकेश, राहुल, शिवांशु त्रिपाठी, विपिन, संदीप कुमार, रवि गुप्ता, कमल सहित बड़ी संख्या में फोटोग्राफर्स मौजूद रहे।
कुर्ला में फिटनेस और एकता का उत्सव,5वीं माइकलाइट मैराथन
मुंबई। कुर्ला पश्चिम स्थित CES Michael High School द्वारा आयोजित 5वीं माइकलाइट मैराथन बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस आयोजन ने कुर्ला के जीवंत समुदाय को एकजुट करते हुए एकता और उत्साह की भावना को मजबूत किया। इस मैराथन में 750 से अधिक प्रतिभागियों छात्र, अभिभावक और शिक्षकों ने भाग लिया।
“Run for Unity and Michaelites smile while running miles” थीम पर आधारित यह मैराथन कुर्ला क्षेत्र के सबसे बड़े सामुदायिक आयोजनों में से एक बनकर उभरी। प्रतिभागियों ने ऊर्जा, अनुशासन और खेल भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिससे यह आयोजन प्रेरणादायक और यादगार बन गया।
यह कार्यक्रम प्रधानाचार्या डॉ. सैवी मेंडोंका के नेतृत्व में निदेशक जीन मोजेस गोम्स और संस्थापक मोजेस माइकल गोम्स के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। विनोबा भावे नगर पुलिस स्टेशन तथा ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से पूरे कार्यक्रम के दौरान यातायात प्रबंधन और सुरक्षा की उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
इस अवसर पर आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, पुलिस अधिकारी संतोष माने, मुंबई उत्कल स्कूल के अध्यक्ष सूर्य गौड़ा सहित समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। उनके प्रोत्साहन ने प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ाया। 5वीं माइकलाइट मैराथन ने न केवल शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा दिया, बल्कि सामुदायिक एकजुटता को भी मजबूत किया, जिससे यह कुर्ला के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण और यादगार आयोजन बन गया।
अभियान का उद्देश्य वाहनों में अवैध रूप से लगाए मॉडिफाइड साइलेंसरों के खिलाफ कार्रवाई तथा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना*
*गोण्डा 18 अप्रैल,2026*
जनपद में सड़क सुरक्षा एवं ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर परिवहन विभाग द्वारा सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में एआरटीओ (प्रशासन) श्री आर.सी. भारतीय के नेतृत्व में चेकिंग अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय टीम ने जिले के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर व्यापक निरीक्षण किया।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वाहनों में अवैध रूप से लगाए गए मॉडिफाइड साइलेंसरों के खिलाफ कार्रवाई करना तथा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना था। चेकिंग के दौरान कई ऐसे वाहन पाए गए, जिनमें नियमों के विपरीत तेज आवाज उत्पन्न करने वाले साइलेंसर लगाए गए थे। ऐसे वाहन चालकों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से चालान की कार्रवाई की गई तथा कुछ मामलों में साइलेंसरों को मौके पर ही हटवाया गया।

एआरटीओ (प्रशासन) श्री आर.सी. भारतीय ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेंसर न केवल ध्वनि प्रदूषण बढ़ाते हैं, बल्कि आम जनमानस के लिए असुविधा एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण भी बनते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के अवैध संशोधनों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के प्रति कठोर कार्रवाई की जाएगी।

अभियान के दौरान वाहन चालकों को जागरूक भी किया गया और उन्हें सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। विभागीय अधिकारियों ने लोगों को हेलमेट एवं सीट बेल्ट के उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन करने तथा यातायात संकेतों का सम्मान करने की सलाह दी।

परिवहन विभाग ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों में किसी भी प्रकार का अवैध परिवर्तन न करें और यातायात नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण यातायात व्यवस्था स्थापित करना है।

इस प्रकार के अभियान से जनपद में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

#womensreservationconstitutionalamendmentbill_defeated

महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

शादी के घरों में भोजन बनाना बड़ी चुनौती
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर अब आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और लगन सीजन शुरू होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से भीषण गर्मी में चाय-नाश्ते की दुकानों पर कर्मचारी कोयले की भट्टियां जलाकर काम करने को मजबूर हैं। तपती गर्मी में भट्ठियों के पास खड़े लोग परेशान नजर आ रहे हैं। एजेंसियों पर लोग घंटों लाइन में लगने को विवश हैं।
ज्ञानपुर नगर पंचायत में करीब 40 प्रतिशत दुकानदार इन दिनों कोयले की भट्ठी पर चाय-नाश्ता बना रहे हैं। लकड़ी की कीमत 6 से 8 रुपये प्रति किलो और कोयला 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
लगन के मौसम में शादी वाले घरों में भोजन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। लोग लकड़ी, कोयला और अन्य ईंधन के सहारे रिश्तेदारों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं। हलवाई भी लकड़ी पर खाना बनाने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांग रहे हैं।
जिलापूर्ति अधिकारी सुनील कुमार के अनुसार, दुकानदारों को कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए कनेक्शन लेना होगा, जिसके बाद उन्हें सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। जिन घरों में शादी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर दिया जा रहा है। बुकिंग के बाद उपभोक्ता कार्यालय में कार्ड दिखाकर संबंधित एजेंसी से सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दुकानों पर घरेलू रसोई गैस का उपयोग करने वालों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है और कालाबाजारी करने वालों पर जल्द कार्रवाई होगी।

* गरम मसाले भी हुए महंगे
मध्य पूर्व में तनाव का असर अब मसालों पर भी दिखने लगा है। खड़ा धनिया, इलायची, लौंग, तेजपत्ता, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी और हल्दी समेत कई मसाले करीब 5 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इससे शादी समारोहों का खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

* ग्रामीण क्षेत्रों में उपली की मांग बढ़ी
ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर की कमी के चलते लोग गोबर की उपली खरीद रहे हैं। गर्मी में उपली जल्दी सूखने से ग्रामीण महिलाएं इसे बेचकर अच्छा लाभ कमा रही हैं। दुकानदार 100 से 150 रुपये प्रति सैकड़ा उपली खरीद रहे हैं।
जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा एवं वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी
गोंडा। गोण्डा जनपद में संचालित विद्यालयों के वाहनों की सुरक्षा तथा वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एआरटीओ (प्रशासन) आर.सी. भारतीय द्वारा महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 242 ऐसे विद्यालय चिन्हित किए गए हैं, जिनके 313 स्कूल वाहनों से संबंधित आवश्यक विवरण अब तक UPISVMP.COM पर अपडेट नहीं किए गए हैं।
एआरटीओ (प्रशासन) ने स्पष्ट किया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा वाहन चालकों का पूर्ण विवरण, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा तथा अन्य आवश्यक अभिलेखों के साथ शपथ पत्र पोर्टल पर अपलोड किया जाना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद संबंधित विद्यालयों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई न किया जाना गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
सभी चिन्हित विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे 19 अप्रैल 2026 को अपने विद्यालय खुले रखें तथा अपने समस्त स्कूल वाहनों एवं चालकों का पूर्ण विवरण शपथ पत्र सहित तत्काल पोर्टल पर अपलोड करें।
इसके अतिरिक्त, सभी विद्यालयों को अपने वाहनों को निर्धारित तिथि पर एआरटीओ कार्यालय, एआरटीओ कार्यालय गोण्डा में प्रस्तुत कर भौतिक निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान वाहन फिटनेस, सुरक्षा मानकों, परमिट तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
एआरटीओ (प्रशासन) ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जनपद के सभी विद्यालयों से अपील की गई है कि वे विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा गया
मोनू भाटी

मवाना। नामित सभासद अर्जुन काली ने तहसील सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर एसडीएम मवाना तथा सीओ मवाना को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा।
अर्जुन काली ने बताया कि नगर पालिका क्षेत्र के तहसील ग्राउंड के पास स्थित विद्यालय में लगभग 150 से 200 छात्राएं पढ़ती हैं और छात्रावास में निवास करती हैं। विद्यालय की दीवार से सटे क्षेत्र में नगर पालिका परिषद मवाना द्वारा ओपन स्टेडियम की पेढ़ियां बनवाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय की दीवार पहले से ही काफी छोटी है। पेढ़ियों के निर्माण के बाद किसी बाहरी व्यक्ति के लिए दीवार फांदकर विद्यालय परिसर में प्रवेश करना आसान हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी तहसील ग्राउंड में नशा करने वाले कुछ लोगों ने विद्यालय में घुसने की कोशिश की है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार के *बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ* अभियान की भावना को ध्यान में रखते हुए पहले विद्यालय की दीवार ऊंची और मजबूत कराई जाए, ताकि कोई असामाजिक तत्व परिसर में प्रवेश न कर सके। इसके बाद ही स्टेडियम निर्माण कार्य कराया जाए।
अर्जुन काली ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन उचित कार्रवाई करे, जिससे भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका न रहे और छात्राओं को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
इस दौरान नवनीत चौहान, मोहित शर्मा, वंश जाटव, गणपत जाटव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
लीगल कॉन्क्लेव 2026 में न्याय व्यवस्था सुधार पर मंथन
* 6 करोड़ लंबित मामलों के समाधान को मध्यस्थता और एआई बताया अहम उपाय

* न्यायमूर्ति मनमोहन बोले— स्वस्थ बहस से मजबूत होगी न्याय प्रणाली, तकनीक सहायक बने, विकल्प नहीं

नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ, विधि शिक्षा में सुधार और न्याय को अधिक सुलभ व किफायती बनाने के मुद्दों पर शनिवार को आयोजित लीगल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026 में व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में कानूनी विशेषज्ञों ने मध्यस्थता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को न्यायिक सुधार का प्रभावी माध्यम बताया।
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) ने सोसाइटी ऑफ लीगल प्रोफेशनल्स (एसएलपी) के सहयोग से नई दिल्ली में “सभी के लिए किफायती और सुलभ न्याय” विषय पर इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया। मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय प्रणाली की कमियों की ओर ध्यान दिलाने का उद्देश्य निंदा नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना से ही न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि उसका उपयोग उसे वरदान या अभिशाप बना सकता है, इसलिए तकनीक को केवल सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने लंबित मामलों की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कानूनी समुदाय को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या आर्बिट्रेशन, जिसे कभी समाधान माना गया था, अब स्वयं चुनौती बन रहा है। हालांकि, उन्होंने वैवाहिक मामलों में मध्यस्थता की सफलता को सराहनीय बताया।
कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि देश में 6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता और तकनीक सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक दस्तावेजीकरण व प्रक्रियाओं को तेज कर सकती है, जिससे लाखों मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में न्याय प्रणाली की गति महत्वपूर्ण है और तकनीक इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
सिल्फ के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने विधि शिक्षा में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लॉ स्कूलों को छात्रों को तकनीक के सही उपयोग और उसके दुरुपयोग से बचाव के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में आर्बिट्रेशन व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सकी है, जिसके कारण कॉर्पोरेट विवाद अक्सर सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में ले जाए जाते हैं।
डॉ. भसीन ने भारत की पारंपरिक पंचायत आधारित सहमति न्याय प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समन्वय और सहमति से भी जुड़ा है। कॉन्क्लेव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई लॉ फर्मों का सफल नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो विधि क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रेरक उदाहरण हैं। यह कॉन्क्लेव न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विमर्श का मंच साबित हुआ।
महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम पर उत्तराखंड में सियासी संग्राम, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
* परिसीमन के मुद्दे पर तेज हुई तकरार, दोनों दलों ने एक-दूसरे पर साधा निशाना

देहरादून। उत्तराखंड में महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गई हैं तथा दोनों दल एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं।
संसद में संबंधित संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पक्ष में है, लेकिन उससे जुड़े परिसीमन प्रावधानों को लेकर उसकी आपत्ति है।
राजनीतिक विवाद की मुख्य वजह परिसीमन को माना जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से पुनर्गठन की बात कही गई है। विपक्ष का तर्क है कि इससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है, जबकि भाजपा इसे महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है। भाजपा ने इस मुद्दे पर देशव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है और विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का कहना है कि वह जनता के बीच जाकर विपक्ष की भूमिका को उजागर करेगी और महिला आरक्षण के समर्थन में जनमत तैयार करेगी।
वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती है, जबकि वास्तविक प्राथमिकता महिलाओं को तत्काल प्रतिनिधित्व देना होना चाहिए।आगामी चुनावों को देखते हुए उत्तराखंड में यह मुद्दा और गर्माने के आसार हैं। दोनों प्रमुख दल इसे बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की रणनीति में जुट गए हैं।
अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकथाम को लेकर कार्यशाला आयोजित
*गोण्डा 18 अप्रैल,2026*।
जनपद में अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए विकास भवन स्थित चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संरक्षण अधिकारी चन्द्रमोहन वर्मा ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है, जिसे खत्म करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर शिवेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर बाल विवाह की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए सतर्कता और जनजागरूकता बेहद जरूरी है। जिला समन्वयक अपराजिता अभय पाण्डेय ने कहा कि कानून के तहत बाल विवाह दंडनीय अपराध है और इसकी सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान सेंटर मैनेजर चेतना सिंह, जेंडर स्पेशलिस्ट राजकुमार आर्य व ज्योत्सना सिंह, नीतू त्रिपाठी, शान्तनु उपाध्याय, आत्रेय त्रिपाठी, हितेश कुमार सहित पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बाल संरक्षण और जागरूकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
हरदोई में फोटोग्राफर्स एसोसिएशन की नई टीम का गठन,
रितेश मिश्रा
हरदोई। उत्तर प्रदेश फोटोग्राफर्स एसोसिएशन की हरदोई इकाई का आज औपचारिक गठन किया गया। वर्ष 2018 में गठित कमेटी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह नई टीम घोषित की गई। जिला अध्यक्ष दीपक कपूर ने पूर्व में त्यागपत्र देकर विनोद दीक्षित को जिला प्रभारी नामित किया था, जिसके क्रम में आज शेष पदों पर भी चयन प्रक्रिया पूर्ण की गई।
इस दौरान किसी भी पद के लिए एक से अधिक नामांकन न होने के कारण चुनाव की आवश्यकता नहीं पड़ी और सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चयन किया गया। नई टीम में संजीव सिंह को अध्यक्ष, दुर्गेश अवस्थी व तालिब अब्बास जैदी को उपाध्यक्ष बनाया गया। विनोद दीक्षित जिला प्रभारी, शिवम राठौर महामंत्री, गौरव वर्मा, अभिषेक प्रजापति व अनुराग तिवारी "रामू"   राजेश राजवंशी मंत्री चुने गए। वहीं नवल किशोर को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
टीम गठन से पूर्व सुबह 9 बजे कैनन कैमरा कंपनी द्वारा सिनेमैटिक वीडियोग्राफी वर्कशॉप आयोजित की गई। इस वर्कशॉप में मेंटर अमित सक्सेना ने फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स को सिनेमैटोग्राफी की बारीकियों के साथ कैमरा सेटिंग्स की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान लखनऊ से आईं अपूर्वा अस्थाना ने मॉडल के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रदेश प्रवक्ता व हरदोई टीम के संयोजक दीपक कपूर ने सभी उपस्थित फोटोग्राफर्स का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में रोहित गुप्ता, अभिषेक सिंह, आशुतोष, कुलदीप राजवंशी, दयाशंकर, सिद्धार्थ, राजकुमार, गौरव कुमार, गौरव गुप्ता, देवराज, राजेश, लोकेश, राहुल, शिवांशु त्रिपाठी, विपिन, संदीप कुमार, रवि गुप्ता, कमल सहित बड़ी संख्या में फोटोग्राफर्स मौजूद रहे।
कुर्ला में फिटनेस और एकता का उत्सव,5वीं माइकलाइट मैराथन
मुंबई। कुर्ला पश्चिम स्थित CES Michael High School द्वारा आयोजित 5वीं माइकलाइट मैराथन बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुई। इस आयोजन ने कुर्ला के जीवंत समुदाय को एकजुट करते हुए एकता और उत्साह की भावना को मजबूत किया। इस मैराथन में 750 से अधिक प्रतिभागियों छात्र, अभिभावक और शिक्षकों ने भाग लिया।
“Run for Unity and Michaelites smile while running miles” थीम पर आधारित यह मैराथन कुर्ला क्षेत्र के सबसे बड़े सामुदायिक आयोजनों में से एक बनकर उभरी। प्रतिभागियों ने ऊर्जा, अनुशासन और खेल भावना का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिससे यह आयोजन प्रेरणादायक और यादगार बन गया।
यह कार्यक्रम प्रधानाचार्या डॉ. सैवी मेंडोंका के नेतृत्व में निदेशक जीन मोजेस गोम्स और संस्थापक मोजेस माइकल गोम्स के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। विनोबा भावे नगर पुलिस स्टेशन तथा ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से पूरे कार्यक्रम के दौरान यातायात प्रबंधन और सुरक्षा की उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
इस अवसर पर आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली, पुलिस अधिकारी संतोष माने, मुंबई उत्कल स्कूल के अध्यक्ष सूर्य गौड़ा सहित समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। उनके प्रोत्साहन ने प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ाया। 5वीं माइकलाइट मैराथन ने न केवल शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा दिया, बल्कि सामुदायिक एकजुटता को भी मजबूत किया, जिससे यह कुर्ला के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण और यादगार आयोजन बन गया।
अभियान का उद्देश्य वाहनों में अवैध रूप से लगाए मॉडिफाइड साइलेंसरों के खिलाफ कार्रवाई तथा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना*
*गोण्डा 18 अप्रैल,2026*
जनपद में सड़क सुरक्षा एवं ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर परिवहन विभाग द्वारा सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में एआरटीओ (प्रशासन) श्री आर.सी. भारतीय के नेतृत्व में चेकिंग अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें विभागीय टीम ने जिले के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर व्यापक निरीक्षण किया।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वाहनों में अवैध रूप से लगाए गए मॉडिफाइड साइलेंसरों के खिलाफ कार्रवाई करना तथा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना था। चेकिंग के दौरान कई ऐसे वाहन पाए गए, जिनमें नियमों के विपरीत तेज आवाज उत्पन्न करने वाले साइलेंसर लगाए गए थे। ऐसे वाहन चालकों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से चालान की कार्रवाई की गई तथा कुछ मामलों में साइलेंसरों को मौके पर ही हटवाया गया।

एआरटीओ (प्रशासन) श्री आर.सी. भारतीय ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेंसर न केवल ध्वनि प्रदूषण बढ़ाते हैं, बल्कि आम जनमानस के लिए असुविधा एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण भी बनते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के अवैध संशोधनों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के प्रति कठोर कार्रवाई की जाएगी।

अभियान के दौरान वाहन चालकों को जागरूक भी किया गया और उन्हें सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। विभागीय अधिकारियों ने लोगों को हेलमेट एवं सीट बेल्ट के उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन करने तथा यातायात संकेतों का सम्मान करने की सलाह दी।

परिवहन विभाग ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों में किसी भी प्रकार का अवैध परिवर्तन न करें और यातायात नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण यातायात व्यवस्था स्थापित करना है।

इस प्रकार के अभियान से जनपद में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

#womensreservationconstitutionalamendmentbill_defeated

महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।