*एनसीसी केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत धारा है- बालचंद्र सिंह,राणा प्रताप पी जी कॉलेज द्वारा आयोजन*
सुल्तानपुर,राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज, सुल्तानपुर की राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) इकाई द्वारा रविवार को एनसीसी डे के अवसर पर एक जागरूकता रैली का भव्य आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ पर्यावरण पार्क से हुआ, जहाँ महाविद्यालय के प्रबंधक बालचंद्र सिंह, प्राचार्य प्रो. डी. के. त्रिपाठी तथा एनसीसी अधिकारी डॉ. आलोक कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय के प्रबंधक, प्राचार्य और एनसीसी अधिकारी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए एनसीसी डे के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रबंधक बालचंद्र सिंह ने कहा कि एनसीसी केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत धारा है, जो युवाओं में अनुशासन, देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करती है। प्राचार्य प्रो डी के त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्र सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है। संबोधन के बाद प्रबंधक व प्राचार्य द्वारा रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रैली पर्यावरण पार्क से होते हुए दीवानी, तिकोनिया पार्क, कचहरी, सुपर मार्केट होते हुए राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज परिसर पहुंची। रास्ते भर कैडेट्स ने देशभक्ति नारों और जागरूकता संदेशों के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छता व राष्ट्रनिर्माण में योगदान हेतु प्रेरित किया। कॉलेज पहुँचने पर एनसीसी कैडेट्स ने परिसर में स्वच्छता अभियान के अंतर्गत श्रमदान किया। उन्होंने महाविद्यालय परिसर की साफ-सफाई कर स्वच्छ भारत मिशन को गति प्रदान की। इस अवसर पर एनसीसी ट्रेनर सतेन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कैडेट्स उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे और अपने अनुशासन व देशभक्ति का परिचय दिया।
*उद्योग बंधु, व्यापार बंधु तथा श्रम बन्धुओं की समस्याओं का करें समाधान संबंधित अधिकारी-जिलाधिकारी*

उद्योग, व्यापार तथा श्रम बन्धुओं द्वारा अवगत कराये गये समस्याओं का समय से करें समाधान-डीएम

मुन्न खां चौराहा से बड़गांव पुलिस चौकी बहराइच रोड तक रोड किनारे का हटेगा अतिक्रमण-जिलाधिकारी

गोण्डा। जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में उद्योग बंधु, श्रम बंधु व व्यापार बंधुओं की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। उद्योग बंधु की बैठक में सर्वप्रथम पिछले कार्यवृत्ति की अनुपालन स्थिति जानी गयी। जिलाधिकारी ने उद्यमियों की समस्याओं से अवगत होते हुए संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण हेतु निर्देश दिए। बैठक में उपायुक्त उद्योग के स्तर से आवेदनकर्ता की पात्रता व सभी संबंधित औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद अधिकारियों को अग्रसारित किया जाय। 

 सभी लंबित प्रकरणों को शीघ्र निस्तारण हेतु विभाग के अधिकारी को निर्देशित किया जाय।  

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि उद्योग बंधुओं एवं व्यापार बन्धुओं व श्रम बन्धुओं की समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण समाधान समय से करना सुनिश्चित करें। 

बैठक में उपायुक्त उद्योग व अन्य विभाग के अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा है कि व्यापार बन्धुओं व उद्योग बन्धुओं के व्यापार में अपेक्षित सहयोग करना सुनिश्चित करें। 

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इंडस्ट्रियल एरिया हेतु जो भूखंड आवंटित किए गए थे उन सभी का गहनता पूर्वक जांच किया जाए, साथ ही जिन भूखंड अवंटी के द्वारा मौके पर उद्योग स्थापित कर संचालित किया जा रहा है, उनको छोड़कर जिनके द्वारा अभी तक उपरोक्त भूखंड पर किसी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया जा रहा है, उनकी नियमानुसार निरस्त करने की कार्यवाही पूर्ण की जाए।

बैठक में व्यापारियों ने अपने-अपने सुझाव दिये जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी अधिकारी मिलकर समस्या का समय से समाधान करायें।

बैठक में युवा रोजगार योजना, इन्वेस्टर्स समिट सहित सभी अन्य योजनाओं की समीक्षा की गई।

 

बैठक के दौरान सभी पदाधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि शहर में अतिक्रमण से जाम की बहुत बड़ी समस्या है जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक टीम के साथ मुन्न खां चौराहा से बड़गांव पुलिस चौकी होते हुए बहराइच रोड तक टीम के साथ रोड की नपाई करके नियमानुसार सभी को अग्रिम सूचना देकर अतिक्रमण को हटाना सुनिश्चित करें, ताकि लोगों से जाम की समस्याओं से निजात मिल सके।

बैठक में जिला उद्योग अधिकारी बाबूराम, श्रम प्रवर्तन अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह, आयकर विभाग के अधिकारीगण सहित उद्योग, व्यापार, श्रम बन्धु के पदाधिकारीगण अन्य सभी सम्बन्धित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

48 घंटे में हत्या का खुलासा: तीन आरोपी गिरफ्तार, टाटा सफारी बरामद

दोस्तों के बीच शराबखोरी के बाद विवाद, गाड़ी चढ़ाकर की हत्या; कोतवाली नगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

गोण्डा। कोतवाली नगर पुलिस ने 48 घंटे के भीतर युवक की हत्या का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने नशे में हुए विवाद के बाद अपने ही दोस्त पर गाड़ी चढ़ाकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सफेद रंग की टाटा सफारी (UP32GC0622) भी बरामद की है।

घटना कैसे हुई?

रानीजोत बड़गांव निवासी शंकर दयाल मिश्रा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका पुत्र नितिन मिश्रा और उसका दोस्त अरुण मिश्रा, 26 नवंबर की रात करीब 11:30 बजे रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति को छोड़ने गए थे। स्टेशन के बाहर कुछ लोगों से कहासुनी हुई। तभी सफेद सफारी सवार युवकों ने तेज रफ्तार में कार चढ़ाकर नितिन और अरुण को घायल कर दिया।

दोनों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से नितिन को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। अरुण का इलाज चल रहा है।

परिजनों ने शक जताया कि पुरानी रंजिश के चलते साजिशन हत्या की गई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

तकनीकी जांच से पुलिस ने खोला पूरा मामला

एएसपी पूर्वी मनोज कुमार रावत और सीओ नगर आनंद कुमार राय के निर्देशन में कोतवाली नगर पुलिस ने तकनीकी व मैनुअल साक्ष्यों की मदद से 48 घंटे में तीन आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी

अभय तिवारी पुत्र ज्ञानेन्द्र कुमार तिवारी — पुरनिया चौराहा, लखनऊ से गिरफ्तार

अतुल पांडे पुत्र अजय पांडे — रोडवेज बस स्टैंड गोण्डा से गिरफ्तार

अंशुमान सिंह पुत्र जनार्दन सिंह — रोडवेज बस स्टैंड गोण्डा से गिरफ्तार

पूछताछ में निकली चौंकाने वाली कहानी

पूछताछ में तीनों ने स्वीकार किया कि वे और मृतक नितिन एक-दूसरे के दोस्त थे।

सब लोग रेलवे स्टेशन से साथ निकले और सूरज होटल में बैठकर शराब पी।

वापस लौटते समय किसी बात पर विवाद हुआ।

गाड़ी से उतरने के बाद नितिन और अरुण आगे जाकर खड़े हो गए।

तभी अभय तिवारी, अतुल पांडे, अभय दुबे आदि ने गाड़ी चढ़ाकर दोनों को कुचल दिया और मौके से फरार हो गए।

बरामदगी

घटना में प्रयुक्त टाटा सफारी

UP32GC0622 — सफेद रंग

पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

IND vs SA: रोहित-विराट की जोड़ी बनेगी नंबर-1, भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार होगा ऐसा

रांची के JSCA स्टेडियम में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेला जाने वाला वनडे सीरीज का पहला मैच रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए काफी खास होगा. जब दोनों टीमों के बीच मुकाबला शुरू होगा, तब मैदान पर सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, इतिहास भी बनेगा. भारतीय क्रिकेट के दिग्गज रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे ही इस मैच में एक साथ उतरेंगे, तो वह एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे. ये पल हर एक क्रिकेट फैन के लिए काफी खास रहने वाला है.

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जोड़ी नंबर-1 बनने से एक कदम दूर रोहित-विराट

याद कीजिए, 18 अगस्त 2008 का दिन. दांबुला में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में 20 साल के रोहित शर्मा और 19 साल के युवा विराट कोहली पहली बार भारतीय टीम के साथ मैदान पर उतरे थे. उस दिन किसी ने नहीं सोचा था कि यही दो लड़के 17 साल बाद भारतीय क्रिकेट की सबसे लंबे समय तक साथ चलने वाली जोड़े बन जाएंगी. दरअसल, रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे ही रांची के मैदान में एक साथ उतरेंगे, तो वह भारत के लिए सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाली जोड़ी बन जाएंगी.

यह दोनों खिलाड़ियों का एक साथ 392वां मैच होगा, जिसके साथ वह सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ की मशहूर जोड़ी के 391 मैचों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे. सचिन-द्रविड़ की जोड़ी ने 1996 से 2012 तक 391 मैच साथ खेले थे. उस दौर में उन्होंने न सिर्फ रन बनाए बल्कि भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ बने. अब रोहित और कोहली ने उस महान रिकॉर्ड को अपने नाम करने जा रहे हैं. खास बात यह है कि यह जोड़ी अभी भी सक्रिय है और आने वाले समय में 400 मैचों का आंकड़ा भी छू सकती है.

9 महीने बाद होगी वापसी

रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए ये मैच कई मायनों में खास है. ये दोनों खिलाड़ी टेस्ट और टी20I से संन्यास ले चुके हैं और सिर्फ भारतीय वनडे टीम का हिस्सा हैं. जिसके चलते वह टीम इंडिया की जर्सी ने 9 महीने के लंबे इंतजार के बाद भारत में खेलने उतरेंगे. इन दोनों खिलाड़ियों ने भारत में आखिरी मैच साल की शुरुआत में अहमदाबाद में इंग्लैंड की टीम के खिलाफ खेला था. यानी फैंस को ये लंबा इंतजार भी आज खत्म हो जाएगा.

मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत-प्रतिशत कार्य करने वाले बीएलओ सम्मानित

तहसील कादीपुर अन्तर्गत बूथ संख्या-261 पहाड़पुर वैश्य की बी0एल0ओ0 का एक पैर टूट जाने के बावजूद शत्-प्रतिशत एस.आई.आर. का कार्य किया गया पूर्ण

सुलतानपुर। जिला मजिस्ट्रेट, जिला निर्वाचन अधिकारी के कुशल नेतृत्व में विधान सभा निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान-2026 के अंतर्गत मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत्-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने वाले बी0एल0ओ0 को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

     

विधान सभा-187 इसौली के बूथ संख्या-51 के बीएलओ श्री विजय कुमार द्वारा गड़ना प्रपत्र फीडिंग का शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण किए जाने पर ERO/उप जिलाधिकारी बल्दीराय श्री प्रवीन कुमार एवं AERO श्री अरविंद तिवारी,द्वारा प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

    

इसी प्रकार तहसील कादीपुर अन्तर्गत मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत्-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने वाले के नाम निम्न हैं-बूथ संख्या-56 धतुरहा की बी0एल0ओ0 श्रीमती विजय लक्ष्मी सिंह(आं0का0), बूथ संख्या-80 कोटिया की बी0एल0ओ0 श्रीमती सावित्री यादव(आं0का0), बूथ संख्या-132 नरोत्तमपुर के बी0एल0ओ0 श्री हरिशंकर(शिक्षा मित्र), बूथ संख्या-241 मिसिरपुर जलालपुर के बी0एल0ओ0 श्री कमिश्नर कुमार सिंह(नलकूप चालक) बूथ संख्या-261 पहाड़पुर वैश्य की बी0एल0ओ0 श्रीमती ऊषा सिंह देवी(आं0का0) द्वारा एक पैर टूट जाने के बावजूद समय से पहले मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत्-प्रतिशत कार्य पूर्ण किया गया व बूथ संख्या-270 हरथुआवभनपुर की बी0एल0ओ0 श्रीमती सुनीता देवी (आं0का0), अखण्डनगर बूथ संख्या-374 की बी0एल0ओ0 (शिक्षा मित्र) को ERO/एसडीएम कादीपुर उत्तम कुमार द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

लखनऊ की सड़कों पर आफत: बाइक सवार युवक की मौत, कार सवारों का तांडव
लखनऊ । राजधानी में शनिवार को सड़क पर दो अलग-अलग घटनाओं ने सनसनी फैला दी। हुसैनगंज में नशे में कार चला रहे युवक की तेज रफ्तार कार बाइक सवार भाइयों से टकरा गई, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। वहीं, सरोजनीनगर के बंथरा में कार सवार ने ऑटो चालक से विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया और तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हुसैनगंज में बाइक सवार भाई पर कार की टक्कर

हुसैनगंज इलाके में शनिवार रात बाइक चला रहे मनीष कुमार (39) और उनके भाई दीपक के ऊपर पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। मनीष की मौके पर मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल है।मनीष के भाई नितिन ने बताया कि दोनों भाई शादी से लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि मनीष का हेलमेट सिर से छिटक गया और दोनों बाइक सहित करीब 50 मीटर तक घिसटते चले गए।पुलिस ने दोनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। मनीष को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दीपक को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। आरोपी कार चालक अभी फरार है। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

बंथरा में कार सवार का उत्पात, तीन लोग घायल

सरोजनीनगर के बंथरा कस्बे में शनिवार शाम एक कार चालक ने ऑटो चालक से ओवरटेक विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया। उसने पहले ऑटो चालक को पीटा और फिर गुस्से में कार दौड़ा कर भीड़ में घुस गया।इस घटना में स्कूटी सवार शिक्षिका दिव्या वर्मा, सुशील गुप्ता (50) और गुड्डू (55) घायल हो गए। गुस्साए लोगों ने कार पर ईंट-पत्थर बरसाए। आरोपी कार छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने घायल शिक्षिका की तहरीर पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।दोनों ही घटनाओं ने सड़क सुरक्षा की अहमियत को दोबारा उजागर कर दिया है। पुलिस जनता से सतर्क रहने और तेज रफ्तार वाहन से बचने की अपील कर रही है।
विकासनगर पुलिस की बड़ी सफलता, “Good Gang” व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर डकैती की साजिश रचने वाला 10,000 रुपये का इनामिया गिरफ्तार

लखनऊ । राजधानी की विकासनगर पुलिस ने एक बार फिर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी से हुई डकैती के मुख्य आरोपी और 10,000 रुपये के इनामिया शिवम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। यह वही आरोपी है, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर Good Gang (Gg) नाम का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था और उसी के ज़रिए डकैती की पूरी योजना तैयार की गई थी। कई महीनों से फरार चल रहा शिवम लगातार पुलिस और कोर्ट से बचने के लिए ठिकाने बदल रहा था, लेकिन अंततः पुलिस ने उसे गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से दबोच लिया।

इस तरह से हुई गिरफ्तारी

28 मार्च को एक कारोबारी के साथ हुई डकैती की घटना में शिवम दीक्षित का नाम सामने आया था। घटना के बाद से ही वह पुलिस को चकमा देकर फरार था।कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ गिरफ्तारी अधिपत्र (NBW) जारी किया गया था।धारा 84(1) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत उद्घोषणा भी की गई थी। पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) ने उस पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।लगातार निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के बाद विकासनगर पुलिस टीम को सूचना मिली कि शिवम गाजियाबाद के टीला शाहबाजपुर, तृप्ता सिटी क्षेत्र में छिपा है। टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

डकैती की पूरी साजिश ऐसे रची गई थी

शिवम दीक्षित कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि डकैती की योजना बनाने वाला गैंग लीडर था।उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अत्यंत सुनियोजित ढंग से वारदात को अंजाम दिया।

गिरोह का अपराध करने का तरीका

“Good Gang (Gg)” नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें सभी सदस्य जुड़े थे।
कारोबारी के नकद लेन-देन की जानकारी जुटाकर उसे “आसान टारगेट” मानकर डकैती की योजना बनाई गई।
घटना से पहले तय किया गया कि पीड़ित प्राथमिकी दर्ज नहीं कराएगा, इसलिए पकड़ की संभावना कम रहेगी।
डकैती के बाद लूटे गए धन को आपस में बांटने की तैयारी की गई।
शिवम ने अपना बोलेरो वाहन (UP76V8792) इस वारदात के लिए उपलब्ध कराया।
यह पूरी वारदात सोची-समझी रणनीति और तकनीकी माध्यमों के उपयोग का उदाहरण थी।

गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?

गिरफ्तार आरोपी को विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा (रिमांड) पर जिला कारागार लखनऊ भेज दिया गया। इस मामले में अब तक कुल 11 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
राहगीरों को निशाना बनाने वाली महिला चोर गैंग का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार, भारी मात्रा में जेवरात बरामद

लखनऊ । राजधानी में सक्रिय महिला चोर गैंग पर मड़ियांव पुलिस ने बड़ी कार्रवाई कर दो शातिर महिला चोरों को गिरफ्तार कर लिया है। ये महिलाएँ ई-रिक्शा में सफर करने वाले यात्रियों को ही अपना निशाना बनाती थीं और पलक झपकते ही उनका सोना-चाँदी समेत कीमती सामान गायब कर देती थीं। मुखबिर की सटीक सूचना पर दोनों महिलाओं को सीतापुर रोड स्थित कोयला ढाल के पास से दबोचा गया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से चोरी के कई कीमती जेवर और नकदी बरामद हुई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय चोर गिरोहों पर भी बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

कैसे बेनकाब हुआ महिला चोर गिरोह

डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि 28 नवंबर को मड़ियांव पुलिस भिठौली चौराहे पर संदिग्धों की चेकिंग में थी। इसी दौरान पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि दो महिलाएँ, जिनका हुलिया पहले भी बताया गया था, सीतापुर रोड पर खड़ी हैं और राहगीरों का सामान चोरी करने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके की ओर दौड़ी और घेराबंदी करते हुए दोनों महिलाओं को पकड़ लिया।

पुलिस को लंबे समय से थी इनकी तलाश

गिरफ्तार महिलाओं का नाम रजनी पत्नी मनोज (25), निवासी पलवल, हरियाणा, रामबती पत्नी महावीर (26), निवासी धौलपुर, राजस्थान है। पूछताछ में दोनों ने कई वारदातों का खुलासा किया और चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस को लंबे समय से इनकी तलाश थी, क्योंकि हाल के दिनों में ई-रिक्शा यात्रियों से आभूषण चोरी की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।

खुल गए कई चोरी के मामले

गिरफ्तार महिलाओं की निशानदेही पर और बरामदगी के आधार पर मड़ियांव थाने में दर्ज कई मुकदमों का अनावरण हुआ है। बरामद माल के आधार पर मुकदमों की धारा में बढ़ोतरी भी की गई है। पुलिस ने महिलाओं को मौके पर ही कानूनन कार्रवाई की जानकारी देते हुए औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इनके पास से तीन अंगूठी, एक जोड़ी कुंडल, एक जोड़ी झुमकी, एक जोड़ी बुंदे, दो जोड़ी पायल, दो जोड़ी बिछया, 670 रुपये नकद बरामद किया गया है। बरामदगी यह साबित करती है कि दोनों महिलाएं लंबे समय से चोरी कर जेवर इकट्ठा करती थीं और इन्हें बेचकर ही अपना गुजर-बसर करती थीं।

कैसे देती थीं वारदात को अंजाम

दोनों अभियुक्ताएँ मजदूरी करने का बहाना बनाकर शहर में रहती थीं, लेकिन असल में ई-रिक्शा में यात्रियों के साथ सफर करके माहिराना तरीके से चोरी करती थीं।यात्रियों के साथ बैठते ही मौके की तलाश, ध्यान भटकते ही कान, हाथ या बैग में रखी कीमती चीजें झपट लेना, भीड़भाड़ वाले इलाके में उतरकर भीड़ में गुम हो जाना, इन्हें देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि ये पेशेवर चोर हैं।

अन्य जिलों तक फैली पड़ताल

पुलिस अब हरियाणा और राजस्थान पुलिस से समन्वय कर दोनों महिलाओं के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटा रही है। आशंका है कि इन्होंने अन्य राज्यों में भी कई वारदातें की होंगी।यह गिरफ्तारी न सिर्फ पुलिस की सतर्कता का उदाहरण है बल्कि यात्रियों को भी सचेत करती है कि सार्वजनिक वाहनों में सफर करते समय सावधान रहें।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
कादीपुर । SIR कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बीएलओ सम्मानित । उपजिलाधिकारी उत्तम कुमार तिवारी ने SIR अभियान में बेहतरीन कार्य करने वाल
कादीपुर ।
SIR कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बीएलओ सम्मानित ।
उपजिलाधिकारी उत्तम कुमार तिवारी ने SIR अभियान में बेहतरीन कार्य करने वाले बीएलओ को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

ऊषा देवी (बूथ 261) पैर टूटने के बावजूद कार्य पूरा कर बनाया अद्भुत उदाहरण।
विजय लक्ष्मी सिंह (बूथ 56) – समय से पहले कार्य पूर्ण।
सावित्री देवी (बूथ 80) – जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन।
हरिशंकर सिंह (बूथ 132) – व्यवस्थित व समयबद्ध कार्य।
कमिश्नर कुमार सिंह (बूथ 241) – पूरे समर्पण से लक्ष्य समयपूर्व हासिल।
बूथ 270 हरहुआ बभनपुर – पूरे बूथ का कार्य निर्धारित समय से पहले पूर्ण।
एसडीएम ने सभी के समर्पण, निष्ठा और कार्यकुशलता की प्रशंसा करते हुए कहा
“ऐसा कार्य लोकतंत्र को और मजबूत करता है।
*एनसीसी केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत धारा है- बालचंद्र सिंह,राणा प्रताप पी जी कॉलेज द्वारा आयोजन*
सुल्तानपुर,राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज, सुल्तानपुर की राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) इकाई द्वारा रविवार को एनसीसी डे के अवसर पर एक जागरूकता रैली का भव्य आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ पर्यावरण पार्क से हुआ, जहाँ महाविद्यालय के प्रबंधक बालचंद्र सिंह, प्राचार्य प्रो. डी. के. त्रिपाठी तथा एनसीसी अधिकारी डॉ. आलोक कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय के प्रबंधक, प्राचार्य और एनसीसी अधिकारी ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए एनसीसी डे के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रबंधक बालचंद्र सिंह ने कहा कि एनसीसी केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत धारा है, जो युवाओं में अनुशासन, देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करती है। प्राचार्य प्रो डी के त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्र सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है। संबोधन के बाद प्रबंधक व प्राचार्य द्वारा रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। रैली पर्यावरण पार्क से होते हुए दीवानी, तिकोनिया पार्क, कचहरी, सुपर मार्केट होते हुए राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज परिसर पहुंची। रास्ते भर कैडेट्स ने देशभक्ति नारों और जागरूकता संदेशों के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छता व राष्ट्रनिर्माण में योगदान हेतु प्रेरित किया। कॉलेज पहुँचने पर एनसीसी कैडेट्स ने परिसर में स्वच्छता अभियान के अंतर्गत श्रमदान किया। उन्होंने महाविद्यालय परिसर की साफ-सफाई कर स्वच्छ भारत मिशन को गति प्रदान की। इस अवसर पर एनसीसी ट्रेनर सतेन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों कैडेट्स उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे और अपने अनुशासन व देशभक्ति का परिचय दिया।
*उद्योग बंधु, व्यापार बंधु तथा श्रम बन्धुओं की समस्याओं का करें समाधान संबंधित अधिकारी-जिलाधिकारी*

उद्योग, व्यापार तथा श्रम बन्धुओं द्वारा अवगत कराये गये समस्याओं का समय से करें समाधान-डीएम

मुन्न खां चौराहा से बड़गांव पुलिस चौकी बहराइच रोड तक रोड किनारे का हटेगा अतिक्रमण-जिलाधिकारी

गोण्डा। जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में उद्योग बंधु, श्रम बंधु व व्यापार बंधुओं की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। उद्योग बंधु की बैठक में सर्वप्रथम पिछले कार्यवृत्ति की अनुपालन स्थिति जानी गयी। जिलाधिकारी ने उद्यमियों की समस्याओं से अवगत होते हुए संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण हेतु निर्देश दिए। बैठक में उपायुक्त उद्योग के स्तर से आवेदनकर्ता की पात्रता व सभी संबंधित औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद अधिकारियों को अग्रसारित किया जाय। 

 सभी लंबित प्रकरणों को शीघ्र निस्तारण हेतु विभाग के अधिकारी को निर्देशित किया जाय।  

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि उद्योग बंधुओं एवं व्यापार बन्धुओं व श्रम बन्धुओं की समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण समाधान समय से करना सुनिश्चित करें। 

बैठक में उपायुक्त उद्योग व अन्य विभाग के अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा है कि व्यापार बन्धुओं व उद्योग बन्धुओं के व्यापार में अपेक्षित सहयोग करना सुनिश्चित करें। 

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इंडस्ट्रियल एरिया हेतु जो भूखंड आवंटित किए गए थे उन सभी का गहनता पूर्वक जांच किया जाए, साथ ही जिन भूखंड अवंटी के द्वारा मौके पर उद्योग स्थापित कर संचालित किया जा रहा है, उनको छोड़कर जिनके द्वारा अभी तक उपरोक्त भूखंड पर किसी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया जा रहा है, उनकी नियमानुसार निरस्त करने की कार्यवाही पूर्ण की जाए।

बैठक में व्यापारियों ने अपने-अपने सुझाव दिये जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी अधिकारी मिलकर समस्या का समय से समाधान करायें।

बैठक में युवा रोजगार योजना, इन्वेस्टर्स समिट सहित सभी अन्य योजनाओं की समीक्षा की गई।

 

बैठक के दौरान सभी पदाधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि शहर में अतिक्रमण से जाम की बहुत बड़ी समस्या है जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक टीम के साथ मुन्न खां चौराहा से बड़गांव पुलिस चौकी होते हुए बहराइच रोड तक टीम के साथ रोड की नपाई करके नियमानुसार सभी को अग्रिम सूचना देकर अतिक्रमण को हटाना सुनिश्चित करें, ताकि लोगों से जाम की समस्याओं से निजात मिल सके।

बैठक में जिला उद्योग अधिकारी बाबूराम, श्रम प्रवर्तन अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह, आयकर विभाग के अधिकारीगण सहित उद्योग, व्यापार, श्रम बन्धु के पदाधिकारीगण अन्य सभी सम्बन्धित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

48 घंटे में हत्या का खुलासा: तीन आरोपी गिरफ्तार, टाटा सफारी बरामद

दोस्तों के बीच शराबखोरी के बाद विवाद, गाड़ी चढ़ाकर की हत्या; कोतवाली नगर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

गोण्डा। कोतवाली नगर पुलिस ने 48 घंटे के भीतर युवक की हत्या का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने नशे में हुए विवाद के बाद अपने ही दोस्त पर गाड़ी चढ़ाकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त सफेद रंग की टाटा सफारी (UP32GC0622) भी बरामद की है।

घटना कैसे हुई?

रानीजोत बड़गांव निवासी शंकर दयाल मिश्रा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका पुत्र नितिन मिश्रा और उसका दोस्त अरुण मिश्रा, 26 नवंबर की रात करीब 11:30 बजे रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति को छोड़ने गए थे। स्टेशन के बाहर कुछ लोगों से कहासुनी हुई। तभी सफेद सफारी सवार युवकों ने तेज रफ्तार में कार चढ़ाकर नितिन और अरुण को घायल कर दिया।

दोनों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से नितिन को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। अरुण का इलाज चल रहा है।

परिजनों ने शक जताया कि पुरानी रंजिश के चलते साजिशन हत्या की गई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

तकनीकी जांच से पुलिस ने खोला पूरा मामला

एएसपी पूर्वी मनोज कुमार रावत और सीओ नगर आनंद कुमार राय के निर्देशन में कोतवाली नगर पुलिस ने तकनीकी व मैनुअल साक्ष्यों की मदद से 48 घंटे में तीन आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी

अभय तिवारी पुत्र ज्ञानेन्द्र कुमार तिवारी — पुरनिया चौराहा, लखनऊ से गिरफ्तार

अतुल पांडे पुत्र अजय पांडे — रोडवेज बस स्टैंड गोण्डा से गिरफ्तार

अंशुमान सिंह पुत्र जनार्दन सिंह — रोडवेज बस स्टैंड गोण्डा से गिरफ्तार

पूछताछ में निकली चौंकाने वाली कहानी

पूछताछ में तीनों ने स्वीकार किया कि वे और मृतक नितिन एक-दूसरे के दोस्त थे।

सब लोग रेलवे स्टेशन से साथ निकले और सूरज होटल में बैठकर शराब पी।

वापस लौटते समय किसी बात पर विवाद हुआ।

गाड़ी से उतरने के बाद नितिन और अरुण आगे जाकर खड़े हो गए।

तभी अभय तिवारी, अतुल पांडे, अभय दुबे आदि ने गाड़ी चढ़ाकर दोनों को कुचल दिया और मौके से फरार हो गए।

बरामदगी

घटना में प्रयुक्त टाटा सफारी

UP32GC0622 — सफेद रंग

पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

IND vs SA: रोहित-विराट की जोड़ी बनेगी नंबर-1, भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार होगा ऐसा

रांची के JSCA स्टेडियम में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेला जाने वाला वनडे सीरीज का पहला मैच रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए काफी खास होगा. जब दोनों टीमों के बीच मुकाबला शुरू होगा, तब मैदान पर सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, इतिहास भी बनेगा. भारतीय क्रिकेट के दिग्गज रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे ही इस मैच में एक साथ उतरेंगे, तो वह एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे. ये पल हर एक क्रिकेट फैन के लिए काफी खास रहने वाला है.

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जोड़ी नंबर-1 बनने से एक कदम दूर रोहित-विराट

याद कीजिए, 18 अगस्त 2008 का दिन. दांबुला में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में 20 साल के रोहित शर्मा और 19 साल के युवा विराट कोहली पहली बार भारतीय टीम के साथ मैदान पर उतरे थे. उस दिन किसी ने नहीं सोचा था कि यही दो लड़के 17 साल बाद भारतीय क्रिकेट की सबसे लंबे समय तक साथ चलने वाली जोड़े बन जाएंगी. दरअसल, रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे ही रांची के मैदान में एक साथ उतरेंगे, तो वह भारत के लिए सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाली जोड़ी बन जाएंगी.

यह दोनों खिलाड़ियों का एक साथ 392वां मैच होगा, जिसके साथ वह सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ की मशहूर जोड़ी के 391 मैचों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे. सचिन-द्रविड़ की जोड़ी ने 1996 से 2012 तक 391 मैच साथ खेले थे. उस दौर में उन्होंने न सिर्फ रन बनाए बल्कि भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ बने. अब रोहित और कोहली ने उस महान रिकॉर्ड को अपने नाम करने जा रहे हैं. खास बात यह है कि यह जोड़ी अभी भी सक्रिय है और आने वाले समय में 400 मैचों का आंकड़ा भी छू सकती है.

9 महीने बाद होगी वापसी

रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए ये मैच कई मायनों में खास है. ये दोनों खिलाड़ी टेस्ट और टी20I से संन्यास ले चुके हैं और सिर्फ भारतीय वनडे टीम का हिस्सा हैं. जिसके चलते वह टीम इंडिया की जर्सी ने 9 महीने के लंबे इंतजार के बाद भारत में खेलने उतरेंगे. इन दोनों खिलाड़ियों ने भारत में आखिरी मैच साल की शुरुआत में अहमदाबाद में इंग्लैंड की टीम के खिलाफ खेला था. यानी फैंस को ये लंबा इंतजार भी आज खत्म हो जाएगा.

मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत-प्रतिशत कार्य करने वाले बीएलओ सम्मानित

तहसील कादीपुर अन्तर्गत बूथ संख्या-261 पहाड़पुर वैश्य की बी0एल0ओ0 का एक पैर टूट जाने के बावजूद शत्-प्रतिशत एस.आई.आर. का कार्य किया गया पूर्ण

सुलतानपुर। जिला मजिस्ट्रेट, जिला निर्वाचन अधिकारी के कुशल नेतृत्व में विधान सभा निर्वाचक नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान-2026 के अंतर्गत मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत्-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने वाले बी0एल0ओ0 को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

     

विधान सभा-187 इसौली के बूथ संख्या-51 के बीएलओ श्री विजय कुमार द्वारा गड़ना प्रपत्र फीडिंग का शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण किए जाने पर ERO/उप जिलाधिकारी बल्दीराय श्री प्रवीन कुमार एवं AERO श्री अरविंद तिवारी,द्वारा प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

    

इसी प्रकार तहसील कादीपुर अन्तर्गत मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत्-प्रतिशत कार्य पूर्ण करने वाले के नाम निम्न हैं-बूथ संख्या-56 धतुरहा की बी0एल0ओ0 श्रीमती विजय लक्ष्मी सिंह(आं0का0), बूथ संख्या-80 कोटिया की बी0एल0ओ0 श्रीमती सावित्री यादव(आं0का0), बूथ संख्या-132 नरोत्तमपुर के बी0एल0ओ0 श्री हरिशंकर(शिक्षा मित्र), बूथ संख्या-241 मिसिरपुर जलालपुर के बी0एल0ओ0 श्री कमिश्नर कुमार सिंह(नलकूप चालक) बूथ संख्या-261 पहाड़पुर वैश्य की बी0एल0ओ0 श्रीमती ऊषा सिंह देवी(आं0का0) द्वारा एक पैर टूट जाने के बावजूद समय से पहले मतदाताओं को गणना प्रपत्र के वितरण एवं उनकी फीडिंग में शत्-प्रतिशत कार्य पूर्ण किया गया व बूथ संख्या-270 हरथुआवभनपुर की बी0एल0ओ0 श्रीमती सुनीता देवी (आं0का0), अखण्डनगर बूथ संख्या-374 की बी0एल0ओ0 (शिक्षा मित्र) को ERO/एसडीएम कादीपुर उत्तम कुमार द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

लखनऊ की सड़कों पर आफत: बाइक सवार युवक की मौत, कार सवारों का तांडव
लखनऊ । राजधानी में शनिवार को सड़क पर दो अलग-अलग घटनाओं ने सनसनी फैला दी। हुसैनगंज में नशे में कार चला रहे युवक की तेज रफ्तार कार बाइक सवार भाइयों से टकरा गई, जिसमें एक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। वहीं, सरोजनीनगर के बंथरा में कार सवार ने ऑटो चालक से विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया और तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हुसैनगंज में बाइक सवार भाई पर कार की टक्कर

हुसैनगंज इलाके में शनिवार रात बाइक चला रहे मनीष कुमार (39) और उनके भाई दीपक के ऊपर पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। मनीष की मौके पर मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल है।मनीष के भाई नितिन ने बताया कि दोनों भाई शादी से लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि मनीष का हेलमेट सिर से छिटक गया और दोनों बाइक सहित करीब 50 मीटर तक घिसटते चले गए।पुलिस ने दोनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। मनीष को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि दीपक को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। आरोपी कार चालक अभी फरार है। पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने की धारा में एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

बंथरा में कार सवार का उत्पात, तीन लोग घायल

सरोजनीनगर के बंथरा कस्बे में शनिवार शाम एक कार चालक ने ऑटो चालक से ओवरटेक विवाद के बाद सड़क पर उत्पात मचाया। उसने पहले ऑटो चालक को पीटा और फिर गुस्से में कार दौड़ा कर भीड़ में घुस गया।इस घटना में स्कूटी सवार शिक्षिका दिव्या वर्मा, सुशील गुप्ता (50) और गुड्डू (55) घायल हो गए। गुस्साए लोगों ने कार पर ईंट-पत्थर बरसाए। आरोपी कार छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने घायल शिक्षिका की तहरीर पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।दोनों ही घटनाओं ने सड़क सुरक्षा की अहमियत को दोबारा उजागर कर दिया है। पुलिस जनता से सतर्क रहने और तेज रफ्तार वाहन से बचने की अपील कर रही है।
विकासनगर पुलिस की बड़ी सफलता, “Good Gang” व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर डकैती की साजिश रचने वाला 10,000 रुपये का इनामिया गिरफ्तार

लखनऊ । राजधानी की विकासनगर पुलिस ने एक बार फिर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी से हुई डकैती के मुख्य आरोपी और 10,000 रुपये के इनामिया शिवम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। यह वही आरोपी है, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर Good Gang (Gg) नाम का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था और उसी के ज़रिए डकैती की पूरी योजना तैयार की गई थी। कई महीनों से फरार चल रहा शिवम लगातार पुलिस और कोर्ट से बचने के लिए ठिकाने बदल रहा था, लेकिन अंततः पुलिस ने उसे गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से दबोच लिया।

इस तरह से हुई गिरफ्तारी

28 मार्च को एक कारोबारी के साथ हुई डकैती की घटना में शिवम दीक्षित का नाम सामने आया था। घटना के बाद से ही वह पुलिस को चकमा देकर फरार था।कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ गिरफ्तारी अधिपत्र (NBW) जारी किया गया था।धारा 84(1) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत उद्घोषणा भी की गई थी। पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) ने उस पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।लगातार निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के बाद विकासनगर पुलिस टीम को सूचना मिली कि शिवम गाजियाबाद के टीला शाहबाजपुर, तृप्ता सिटी क्षेत्र में छिपा है। टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

डकैती की पूरी साजिश ऐसे रची गई थी

शिवम दीक्षित कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि डकैती की योजना बनाने वाला गैंग लीडर था।उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अत्यंत सुनियोजित ढंग से वारदात को अंजाम दिया।

गिरोह का अपराध करने का तरीका

“Good Gang (Gg)” नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें सभी सदस्य जुड़े थे।
कारोबारी के नकद लेन-देन की जानकारी जुटाकर उसे “आसान टारगेट” मानकर डकैती की योजना बनाई गई।
घटना से पहले तय किया गया कि पीड़ित प्राथमिकी दर्ज नहीं कराएगा, इसलिए पकड़ की संभावना कम रहेगी।
डकैती के बाद लूटे गए धन को आपस में बांटने की तैयारी की गई।
शिवम ने अपना बोलेरो वाहन (UP76V8792) इस वारदात के लिए उपलब्ध कराया।
यह पूरी वारदात सोची-समझी रणनीति और तकनीकी माध्यमों के उपयोग का उदाहरण थी।

गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?

गिरफ्तार आरोपी को विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा (रिमांड) पर जिला कारागार लखनऊ भेज दिया गया। इस मामले में अब तक कुल 11 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
राहगीरों को निशाना बनाने वाली महिला चोर गैंग का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार, भारी मात्रा में जेवरात बरामद

लखनऊ । राजधानी में सक्रिय महिला चोर गैंग पर मड़ियांव पुलिस ने बड़ी कार्रवाई कर दो शातिर महिला चोरों को गिरफ्तार कर लिया है। ये महिलाएँ ई-रिक्शा में सफर करने वाले यात्रियों को ही अपना निशाना बनाती थीं और पलक झपकते ही उनका सोना-चाँदी समेत कीमती सामान गायब कर देती थीं। मुखबिर की सटीक सूचना पर दोनों महिलाओं को सीतापुर रोड स्थित कोयला ढाल के पास से दबोचा गया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से चोरी के कई कीमती जेवर और नकदी बरामद हुई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय चोर गिरोहों पर भी बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

कैसे बेनकाब हुआ महिला चोर गिरोह

डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि 28 नवंबर को मड़ियांव पुलिस भिठौली चौराहे पर संदिग्धों की चेकिंग में थी। इसी दौरान पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि दो महिलाएँ, जिनका हुलिया पहले भी बताया गया था, सीतापुर रोड पर खड़ी हैं और राहगीरों का सामान चोरी करने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके की ओर दौड़ी और घेराबंदी करते हुए दोनों महिलाओं को पकड़ लिया।

पुलिस को लंबे समय से थी इनकी तलाश

गिरफ्तार महिलाओं का नाम रजनी पत्नी मनोज (25), निवासी पलवल, हरियाणा, रामबती पत्नी महावीर (26), निवासी धौलपुर, राजस्थान है। पूछताछ में दोनों ने कई वारदातों का खुलासा किया और चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस को लंबे समय से इनकी तलाश थी, क्योंकि हाल के दिनों में ई-रिक्शा यात्रियों से आभूषण चोरी की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।

खुल गए कई चोरी के मामले

गिरफ्तार महिलाओं की निशानदेही पर और बरामदगी के आधार पर मड़ियांव थाने में दर्ज कई मुकदमों का अनावरण हुआ है। बरामद माल के आधार पर मुकदमों की धारा में बढ़ोतरी भी की गई है। पुलिस ने महिलाओं को मौके पर ही कानूनन कार्रवाई की जानकारी देते हुए औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इनके पास से तीन अंगूठी, एक जोड़ी कुंडल, एक जोड़ी झुमकी, एक जोड़ी बुंदे, दो जोड़ी पायल, दो जोड़ी बिछया, 670 रुपये नकद बरामद किया गया है। बरामदगी यह साबित करती है कि दोनों महिलाएं लंबे समय से चोरी कर जेवर इकट्ठा करती थीं और इन्हें बेचकर ही अपना गुजर-बसर करती थीं।

कैसे देती थीं वारदात को अंजाम

दोनों अभियुक्ताएँ मजदूरी करने का बहाना बनाकर शहर में रहती थीं, लेकिन असल में ई-रिक्शा में यात्रियों के साथ सफर करके माहिराना तरीके से चोरी करती थीं।यात्रियों के साथ बैठते ही मौके की तलाश, ध्यान भटकते ही कान, हाथ या बैग में रखी कीमती चीजें झपट लेना, भीड़भाड़ वाले इलाके में उतरकर भीड़ में गुम हो जाना, इन्हें देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि ये पेशेवर चोर हैं।

अन्य जिलों तक फैली पड़ताल

पुलिस अब हरियाणा और राजस्थान पुलिस से समन्वय कर दोनों महिलाओं के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटा रही है। आशंका है कि इन्होंने अन्य राज्यों में भी कई वारदातें की होंगी।यह गिरफ्तारी न सिर्फ पुलिस की सतर्कता का उदाहरण है बल्कि यात्रियों को भी सचेत करती है कि सार्वजनिक वाहनों में सफर करते समय सावधान रहें।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
कादीपुर । SIR कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बीएलओ सम्मानित । उपजिलाधिकारी उत्तम कुमार तिवारी ने SIR अभियान में बेहतरीन कार्य करने वाल
कादीपुर ।
SIR कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बीएलओ सम्मानित ।
उपजिलाधिकारी उत्तम कुमार तिवारी ने SIR अभियान में बेहतरीन कार्य करने वाले बीएलओ को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

ऊषा देवी (बूथ 261) पैर टूटने के बावजूद कार्य पूरा कर बनाया अद्भुत उदाहरण।
विजय लक्ष्मी सिंह (बूथ 56) – समय से पहले कार्य पूर्ण।
सावित्री देवी (बूथ 80) – जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन।
हरिशंकर सिंह (बूथ 132) – व्यवस्थित व समयबद्ध कार्य।
कमिश्नर कुमार सिंह (बूथ 241) – पूरे समर्पण से लक्ष्य समयपूर्व हासिल।
बूथ 270 हरहुआ बभनपुर – पूरे बूथ का कार्य निर्धारित समय से पहले पूर्ण।
एसडीएम ने सभी के समर्पण, निष्ठा और कार्यकुशलता की प्रशंसा करते हुए कहा
“ऐसा कार्य लोकतंत्र को और मजबूत करता है।