डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ‘निराला शब्द श्री’ से विभूषित, साहित्य जगत में हर्ष की लहर
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ंजीव सिंह (बलिया)! महात्मा बुद्ध की निर्वाण स्थली कुशीनगर के पडरौना में आयोजित निराला शब्द-संवाद मंच के राष्ट्रीय अधिवेशन में जनपद बलिया के प्रख्यात दार्शनिक, मनीषी एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को संस्था के सर्वोच्च अलंकरण निराला शब्द श्री 2025 से सम्मानित किया गया। भारत के विभिन्न राज्यों एवं पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से आए लब्धप्रतिष्ठ विद्वानों, भाषाविदों और शब्द-शिल्पियों की उपस्थिति में यह गरिमामयी अलंकरण डॉ. उपाध्याय के विराट साहित्यिक और दार्शनिक अवदान को समर्पित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. जयप्रकाश नारायण द्विवेदी, निदेशक संस्कृत एवं प्राच्य विद्या शोध संस्थान, द्वारका, गुजरात, विशिष्ट अतिथि डॉ. दिवाकर प्रसाद पाण्डेय, अध्यक्ष, भोजपुरी विभाग, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, बिहार एवं विनय जायसवाल, अध्यक्ष नगरपालिका परिषद पडरौना ने डॉ. उपाध्याय को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र भेंट कर अलंकृत किया। मंच की अध्यक्षता कर रहे डॉ. ओमप्रकाश द्विवेदी ओम एवं अन्य वक्ताओं ने डॉ. उपाध्याय द्वारा रचित 23 कृतियों और उनके राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्याख्यानों की चर्चा करते हुए उन्हें दर्शन और काव्य का अनूठा संगम बताया। समारोह में प्रोफेसर डॉ. वैद्यनाथ मिश्र, अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, बिहार, डॉ. गौरव तिवारी, आचार्य हिन्दी विभाग बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर और डॉ. प्रेम चन्द्र सिंह, कुल आचार्य, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज जैसे विद्वानों ने डॉ. उपाध्याय की लेखनी को आधुनिक युग में भारतीय वाङ्मय का गौरव बताया। सम्मान से अभिभूत डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि यह स्नेह मात्र एक अलंकरण नहीं, अपितु मेरी लेखनी और वाणी को समाज व राष्ट्र के प्रति और अधिक उत्तरदायी, समर्पित एवं सार्थक बनाने का एक पवित्र संकल्प है। उन्होंने इस सम्मान के लिए चयन समिति और आयोजक मंडल का हृदय से आभार व्यक्त किया। डॉ. उपाध्याय की इस उपलब्धि पर जनपद के साहित्यिक गलियारों में हर्ष का वातावरण है। बधाई देने वालों में मुख्य रूप से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय, अवध बिहारी चौबे, डॉ. जैनेन्द्र पाण्डेय, डॉ. विजय प्रताप आर्य, हरेंद्र नाथ मिश्र, डॉ. गणेश पाठक, डॉ सुनील ओझा, राजेश सिंह श्रेयश, लल्लन पाण्डेय, संजय मिश्रा, डॉ. मदन राम, नियामुल हक खान, उमाशंकर राम, मृत्युंजय शुक्ला, आकाश तिवारी, संतोष गुप्ता, नीरज कुमार मिश्र, राम कृष्ण मौर्य, रामदरश यादव क्रांति, पवन कुमार तिवारी, आदित्य प्रताप सिंह सोनू एवं अजय पाण्डेय सम्मिलित हैं। सभी ने इसे जनपद बलिया की साहित्यिक परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
4 min ago
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