गणेश महोत्सव पर सजा कवियों का मंच, काव्य रस की वर्षा से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता, देर रात तक गूंजे ठहाके और राष्ट्रभक्ति के तराने*
Sb न्यूज़ ब्यूरो रितेश मिश्रा
कछौना, हरदोई।* सोमेश्वर महादेव सेवा समिति, कछौना के तत्वावधान में गणेश महोत्सव के पावन अवसर पर एक भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न अंचलों से आए लब्धप्रतिष्ठित कवियों ने अपनी कालजयी रचनाओं और अनूठे अंदाज से पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। पूरा वातावरण कभी प्रेम की संवेदनाओं, कभी हास्य के ठहाकों, तो कभी राष्ट्रभक्ति के गौरव से सराबोर नजर आया। कवियों की विविध रसों से सजी इन प्रस्तुतियों ने गणेश महोत्सव की इस सांस्कृतिक संध्या को हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया। कवि सम्मेलन का कुशल संचालन हरदोई के सुप्रसिद्ध कवि अजीत शुक्ल ने अपने चिरपरिचित अंदाज में किया। उन्होंने अपने संचालन के दौरान समसामयिक विषयों और राजनीति पर तीखे कटाक्ष किए। बदलते राजनीतिक परिवेश और चाटुकारिता पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने पढ़ा—"चाटुकारिता के फंडे बदल रहे हैं, आ रहा चुनाव तो झंडे बदल रहे हैं।"उनकी इन पंक्तियों पर प्रबुद्ध श्रोताओं ने मेजें थपथपाकर उनका समर्थन किया।कवि सम्मेलन में प्रेम और श्रृंगार के रसगुल्ले घोलने आए विख्यात कवि राघवेन्द्र सिंह राघव ने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज में जीवन की हकीकत को बयां करते हुए कहा—"प्रेम का रंग चढ़ाया नहीं आपने, दिल से दिल भी मिलाया नहीं आपने। चार पैसों में गुजरी चली जिंदगी, और कुछ भी कमाया नहीं आपने।"उनकी इस मर्मस्पर्शी रचना को सुनकर दीर्घा में बैठी जनता भावविभोर हो गई। इसी क्रम में मनोज मधुवन (कासगंज) ने प्रेम की अलौकिक अनुभूति को अपनी सुंदर रचना में पिरोते हुए मंच से कहा—"भाव से भाव का जब वरण हो गया, कामना वासना का क्षरण हो गया, दो हृदय जब मिले, हो गया एक मन, बस वहीं प्रेम का अवतरण हो गया। कवयित्री पल्लवी मिश्रा (हरदोई) ने जब राम-सिया के पावन संदर्भ में अपनी भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की, तो पंडाल में भक्ति का अनूठा रस घुल गया। उन्होंने अत्यंत मार्मिक ढंग से पढ़ा—"राम ही राम जपती तुम्हारी प्रिया, हाय! कैसी परीक्षा सिया के पिया..."उनकी इस शानदार प्रस्तुति ने पंडाल में मौजूद सभी श्रोताओं की आंखें नम कर दीं और लोग भावविभोर हो उठे।युवाओं के चहेते और हास्य-व्यंग्य के चर्चित हस्ताक्षर कवि अनुभव अज्ञानी ने जैसे ही मंच संभाला, श्रोता हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। उन्होंने आज के दौर की विसंगतियों पर व्यंग्यबाण छोड़ते हुए पढ़ा—"लगा के दिल में आग जाता है, ऐन मौके में जाग जाता है, इश्क हो गया है विजय माल्या, पैसे मिलते ही भाग जाता है।"इसी रंग को आगे बढ़ाते हुए बाराबंकी से आए कवि विकास बौखल ने अपनी अनूठी हास्य रचना से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने ठंडी के मौसम को मजाकिया अंदाज में जोड़ते हुए पढ़ा—"कुएं पे ध्यान दो ना ही खाई पे ध्यान दो, अब ठंड आ रही है रजाई पे ध्यान दो।"इस चुटीले व्यंग्य पर श्रोताओं के बीच जमकर ठहाके गूंजे। अम्बेडकर नगर से पधारे ओज के सशक्त हस्ताक्षर कवि अभय निर्भीक ने अपनी बुलंद आवाज से पंडाल में बैठे युवाओं के भीतर देशभक्ति का जज्बा फूंक दिया। भारत माता के वैभव पर उन्होंने कहा—"भारत माता का हरगिज सम्मान नहीं खोने देंगे, अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे।"इसके साथ ही इटावा से आए विख्यात कवि गौरव चौहान ने भी सामाजिक सरोकारों और व्यवस्था से जुड़ी अपनी बेहतरीन रचना प्रस्तुत कर प्रबुद्ध श्रोताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। कवि सम्मेलन के समापन अवसर पर कछौना नगर पंचायत अध्यक्ष राधा रमण शुक्ल ने मंच पर आकर कवि सम्मेलन में आए सभी रचनाकारों, अतिथियों और दूर-दराज से आए श्रोताओं का सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस भव्य और सफल आयोजन के लिए सोमेश्वर महादेव सेवा समिति के सभी पदाधिकारियों तथा सहयोगियों की पीठ थपथपाई और उन्हें धन्यवाद दिया। इस गौरवमयी सांस्कृतिक संध्या में मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, उपाध्यक्ष प्रीतेश दीक्षित, संदीप सिंह, माधौगंज नगर पंचायत अध्यक्ष अनुराग मिश्र, अधिशासी अधिकारी देवांशी दीक्षित, क्रांति वीर सिंह, विनय शुक्ल, रवि गुप्ता सहित भारी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, समाज सेवी, मातृशक्ति और युवा श्रोता देर रात तक डटे रहे और तालियों से कवियों का हौसला बढ़ाया
Sep 18 2026, 19:28
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