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राहुल गांधी ने गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का मारा', बीजेपी का बड़ा आरोप

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बीजेपी ने दिल्ली में कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी पर एक प्रेग्नेंट महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया है। बीजेपी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि मार्च के दौरान राहुल ने गर्भवती महिला पत्रकार संग बदसलूकी की। बीजेपी ने महिला पत्रकार संग बदसलूकी वाले वीडियो भी शेयर किया है।

बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को एक विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बीजेपी ने अस्पताल में भर्ती महिला पत्रकार का एक वीडियो भी एक्स अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें उसने रोते हुए कांग्रेस सांसद पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया।

महिला पत्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप

बीजेपी विधायक उमंग बजाज ने मीडिया से कहा कि रात 10 बजे उन्हें जानकारी मिली कि महिला पत्रकार रिचा पराशर के साथ दुर्व्यवहार हुआ है। उनसे मिलने के लिए बजाज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी, राजेश भाटिया और स्थानीय मंडल अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पत्रकार की हालत का जायजा लेने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बजाज ने इस कथित घटना की निंदा करते हुए पोस्ट किया, “जो व्यक्ति ‘पितृसत्ता को तोड़ने’ की बात करता है, वह एक महिला पत्रकार के साथ, जो सिर्फ अपना काम कर रही थी, ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है? मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।”

महिला पत्रकार ने सुनाई आपबीती

वहीं, महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने खुद उनके कंधे से पकड़ा, फिर उन्हें जोर से खींचा जिससे वह जमीन पर गिड़ गईं और उनके ऊपर भी 4 से 5 लोग गिर गए। वह उनसे कोई सवाल भी नहीं पूछ रही थीं; वह बस विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पत्रकार की मदद के लिए कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता आगे नहीं आया और इसके बजाय उन पर आरोप लगाने की कोशिश की।

दिल्ली में विपक्ष का आंदोलन

बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में कई दिनों से सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। सोमवार को विपक्षी नेता और समर्थक दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाल रहे थे। मार्च का नेतृत्व राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे थे। इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, सीपीआई नेता डी. राजा सहित इंडिया गठबंधन के कई नेता शामिल थे।

राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक, 'चाय' पार्टी में तय होगी सरकार के खिलाफ आगे की रणनीति

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के आरोप में सरकार की जड़े हिलाने के लिए कमर कस ली है। चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफी की मांग को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। इस आंदोलन को और धार देने के लिए राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन में शामिल नेताओं को अपने आवास पर 'चाय' के लिए बुलाया है। उन्होंने शाम 4 बजे हाई टी पार्टी का आयोजन किया है। बताया जा रहा है कि आगे की रणनीति यही से तैयार होगी।

छात्र संगठनों को भी चाय पर बुलाया

राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के सांसदों, नागरिक समाज के सदस्यों और छात्र संगठनों को चाय पर बुलाया है। यह कार्यक्रम उनके आवास पर होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी। इसके बाद राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर चाय का कार्यक्रम रखा गया है।

निमंत्रण पत्र में क्या

निमंत्रण में लिखा है, आज (सोमवार) लोकतंत्र बचाओ मार्च और याचिका सौंपने के बाद, कल दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसके बाद चाय का कार्यक्रम होगा। मैं आपको मंगलवार, 13 अक्तूबर को शाम 4 बजे, 5, सुनहरी बाग रोड, नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर आने के लिए आमंत्रित करता हूं'।

सोमवार को राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट मार्च

राहुल गांधी के घर पर होने वाली यह 'हाई टी' उस घटनाक्रम के एक दिन बाद होगी, जब वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे जोरदार विरोध-प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए थे। विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में अपनी ताकत दिखाते हुए भारी बैरिकेडिंग वाले रास्ते पर "लोकतंत्र के लिए मार्च" (मार्च फॉर डेमोक्रेसी) निकाला और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ संयुक्त याचिका दायर की।

विपक्षी नेताओं से मिलने से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, अब होगा राहुल गांधी का अगला कदम?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगा है। खबर है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था।

सीजेआ ने बताई मुलाकात से इनकार की वजह

जानकारी के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपना जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजहें भी बताई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस को भेजे अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। वे सीजेआई को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने कहा था, "कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा। ऐसा भारत हम नहीं चाहते। कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।"

ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

राहुल गांधी और प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज, आकाशवाणी कार्यालय में जबरन घुसने का आरोप

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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के परिसर में बिना अनुमति के दाखिल होने और वहां धरना देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने संज्ञान लिया है। पुलिस ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी दलों के गठबंधन के कई अन्य सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

राहुल-प्रियंका समेत कई अन्य पर एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ आकाशवाणी कार्यालय में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई सांसदों पर आकाशवाणी कार्यालय में जबरन प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों से आकाशवाणी भवन परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया।

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाला था मार्च

एक दिन पहले ही सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही पुलिस की ओर से इसकी अनुमति दी गई थी। निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां भी विरोध-प्रदर्शन जारी रखा।

राहुल गांधी ने लगाया विपक्षी दलों को खत्म करने का आरोप, बीजेपी ने किया पलटवार

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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का सिंबल फ्रीज कर दिया है। जिसपर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ-साथ चुनाव आयोग पर निशाना साधा। अब केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को भस्मासुर कहा

सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा- पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। बीजेपी नेता ने कहा कि इन तीन दलों का नाम लेकर राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाने का प्रयास किया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी पढ़ाई-लिखाई नहीं करते हैं, उन्हें इतिहास पता करना चाहिए।

राहुल गांधी को अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता- सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'भारत की राजनीति के सदा सर्वदा व्याकुल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जिनको देश और यहां की संस्कृति और धर्म के बारे में कुछ पता है। लेकिन आज ये पता लगा उनको अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता है। आज उन्होंने टीएमसी, एनसीपी का नाम लिया और कहा बीजेपी इनको खत्म कर रही है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि ये पार्टियां स्वयं कांग्रेस से टूटकर बनी थीं। कांग्रेस ने न जाने की कितनी पार्टियों को तोड़ा।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर अलग पार्टी बनाई- सुधांशु त्रिवेदी

बीजेपी नेता ने कहा, 'ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। राहुल गांधी परिवार का ही इतिहास पता कर लीजिए। इंदिरा गांधी ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ वोट करवा दिया था। अभी अशोक गहलोत कुछ समय पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे थे उन्होंने ही कहा है उनको निपटा दिया गया।'

पूर्व पीएम चंद्रशेखर और चरण सिंह का लिया नाम

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, 'जनता पार्टी की सरकार ने चौधरी चरण सिंह जी के साथ धोखा किसने दिया। अभी राजस्थान में आधा दर्जन हाथी निगल गए थे। बसपा ने समर्थन दिया फिर भी उनके विधायकों को अपने में शामिल कर लिया। एनटी रामाराव की पार्टी के साथ भी यही किया। चंद्रशेखर जी के साथ भी यही किया। तीन महीने में ही उनकी सरकार को गिरा दिया था। देवगौड़ा और गुजराल जी की सरकार भी कांग्रेस ने गिराई। 1980 में जब सत्ता में आए तो 9 राज्यों की सरकारों को इसलिए डिसमिस कर दिया कि उनकी केंद्र से सरकार चली गई थी। अपने दौर का ही देख लो कितने मुख्यमंत्रियों को खा गए। गुलाम नबी आजाद, अमरिंदर सिंह, विजय बहुगुणा इनको खा गए।'

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल टीएमसी के नाम और निशान छिन लिए जाने के बाद कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न - भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। उन्होंने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। राहुल गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।

वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’, टीएमसी विवाद पर राहुल गांधी का केन्द्र और चुनाव आयोग पर हमला

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ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को बारतीय निर्वाचन आयोग ने फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ ही चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।

टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जोड़ा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जुड़े मामलों से जोड़ते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न।’ राहुल गांधी ने दावा किया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ रहे हैं और उनके चुनाव चिन्ह छीने जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है।

‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’

राहुल गांधी ने कहा कि अगर पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने अपने बयान में ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ को लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि आयोग का काम जनता के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक आयोग ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलट देती हैं।

राहुल बोले- यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर मतदाता की है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उनका यह बयान चुनाव आयोग की ओर से टीएमसी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद आया है।

टीएमसी का नाम और निशान छिना

बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीएमसी के विधायकों में टूट हो गई। अधिकतर विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया। बागी गुट की अगुवाई अरूप रॉय कर रहे हैं। इसके बाद टीएमसी के नाम और पार्टी सिंबल को लेकर जंग शुरू हो गई। दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने पहुंचा। चुनाव आयोग ने उपचुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फूल और घास के आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, डेटा जुटाने के तरीके का किया विरोध, दिए ये सुझाव

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पत्र लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। खड़गे और राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जानी जाती है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा। हमारी मांग स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।”

पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव

खड़गे और राहुल गांधी ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर ऐसी सूची तैयार की जा सकती है।

बिहार-तेलंगाना जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार नहीं है और सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता’ वाले बयान पर मचा बवाल, शहजाद पूनावाला बोले-बकलोली मचा रखी है

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राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति का एक श्लोक उद्धृत किया था। अब राहुल गांधी के बयान पर शहजाद पूनावाला ने बहुत ही जोरदार हमला बोला है।

'स्मैश द पैट्रियार्की' वाली राहुल गांधी की टिप्पणी पर निशाना साधते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता और उनकी पार्टी को आईना दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा है, 'राहुल घैंडी बकलोली बंद कीजिए। पहले अपने परिवार और पार्टी में पितृसत्ता को तोड़ें!'

इटली पीएम मेलोनी को लेकर भी उठाया सवाल

शहजाद पूनावाला वीडियो में बोलते दिखते हैं कि राहुल गांधी ये जो बकलोली तुमने लगा रखी है,स्मैश द पैट्रियार्की आदि,ये तब ठीक लगती जब तुम और संदीप दीक्षित स्टेज पर खड़े होकर एक विदेशी महिला प्रधानमंत्री मेलोनी के बारे में सेक्सिस्ट, पेट्रियार्कल और मिस्थोजेनिस्टिक कमेंट नहीं करते।

राहुल को घर में पैट्रियार्की खत्म करने की सलाह

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी अपने घर में तो पैट्रियार्की खत्म कर नहीं पा रहे हैं और दूसरों को ज्ञान देने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा, बेटे को आगे बढ़ाने के चक्कर में बेटी को तो आगे बढ़ने नहीं दिया गया। प्रियंका को नेतृत्व में आगे लेकर आइए।

कांग्रेस के अंदर कास्टिंग काउच का आरोप

पूनावाला ने कांग्रेस पार्टी के अंदर कास्टिंग काउच को लेकर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। पूनावाला ने कहा, 'शारदा राठौर से लेकर सिमोन रोजवेल जॉन से लेकर बाकी जो महिलाएं कास्टिंग काउच का शिकार बनी हैं, यौन उत्पीड़न का शिकार बनी हैं, उनसे जाकर पूछिए।'

हलाला और यूसीसी पर का भी जिक्र

शहजाद पूनावाला नयहीं नहीं रूके। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदू रीति रिवाज और मनुस्मृति को महिला विरोधी बताते हैं और गाली देते हैं, लेकिन अपने बगल में हिजाब डाली खड़ी मुस्लिम महिला पर राहुल गांधी की जुबान नहीं खुली।

पुणे के कार्यक्रम में राहुल ने दिया था बयान

बता दें कि पुणे में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने देश में पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि इसमें महिला को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्रों के अधीन बताया गया है। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए कहा था कि पिता, पति और बेटे के अलावा महिलाओं की अपनी अलग पहचान है। इसी बयान का जवाब देते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखा हमला बोला।

राहुल गांधी ने गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का मारा', बीजेपी का बड़ा आरोप

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बीजेपी ने दिल्ली में कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी पर एक प्रेग्नेंट महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया है। बीजेपी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि मार्च के दौरान राहुल ने गर्भवती महिला पत्रकार संग बदसलूकी की। बीजेपी ने महिला पत्रकार संग बदसलूकी वाले वीडियो भी शेयर किया है।

बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को एक विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बीजेपी ने अस्पताल में भर्ती महिला पत्रकार का एक वीडियो भी एक्स अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें उसने रोते हुए कांग्रेस सांसद पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया।

महिला पत्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप

बीजेपी विधायक उमंग बजाज ने मीडिया से कहा कि रात 10 बजे उन्हें जानकारी मिली कि महिला पत्रकार रिचा पराशर के साथ दुर्व्यवहार हुआ है। उनसे मिलने के लिए बजाज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी, राजेश भाटिया और स्थानीय मंडल अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पत्रकार की हालत का जायजा लेने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बजाज ने इस कथित घटना की निंदा करते हुए पोस्ट किया, “जो व्यक्ति ‘पितृसत्ता को तोड़ने’ की बात करता है, वह एक महिला पत्रकार के साथ, जो सिर्फ अपना काम कर रही थी, ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है? मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।”

महिला पत्रकार ने सुनाई आपबीती

वहीं, महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने खुद उनके कंधे से पकड़ा, फिर उन्हें जोर से खींचा जिससे वह जमीन पर गिड़ गईं और उनके ऊपर भी 4 से 5 लोग गिर गए। वह उनसे कोई सवाल भी नहीं पूछ रही थीं; वह बस विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पत्रकार की मदद के लिए कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता आगे नहीं आया और इसके बजाय उन पर आरोप लगाने की कोशिश की।

दिल्ली में विपक्ष का आंदोलन

बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में कई दिनों से सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। सोमवार को विपक्षी नेता और समर्थक दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाल रहे थे। मार्च का नेतृत्व राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे थे। इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, सीपीआई नेता डी. राजा सहित इंडिया गठबंधन के कई नेता शामिल थे।

राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक, 'चाय' पार्टी में तय होगी सरकार के खिलाफ आगे की रणनीति

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के आरोप में सरकार की जड़े हिलाने के लिए कमर कस ली है। चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफी की मांग को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। इस आंदोलन को और धार देने के लिए राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन में शामिल नेताओं को अपने आवास पर 'चाय' के लिए बुलाया है। उन्होंने शाम 4 बजे हाई टी पार्टी का आयोजन किया है। बताया जा रहा है कि आगे की रणनीति यही से तैयार होगी।

छात्र संगठनों को भी चाय पर बुलाया

राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के सांसदों, नागरिक समाज के सदस्यों और छात्र संगठनों को चाय पर बुलाया है। यह कार्यक्रम उनके आवास पर होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी। इसके बाद राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर चाय का कार्यक्रम रखा गया है।

निमंत्रण पत्र में क्या

निमंत्रण में लिखा है, आज (सोमवार) लोकतंत्र बचाओ मार्च और याचिका सौंपने के बाद, कल दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसके बाद चाय का कार्यक्रम होगा। मैं आपको मंगलवार, 13 अक्तूबर को शाम 4 बजे, 5, सुनहरी बाग रोड, नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर आने के लिए आमंत्रित करता हूं'।

सोमवार को राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट मार्च

राहुल गांधी के घर पर होने वाली यह 'हाई टी' उस घटनाक्रम के एक दिन बाद होगी, जब वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे जोरदार विरोध-प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए थे। विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में अपनी ताकत दिखाते हुए भारी बैरिकेडिंग वाले रास्ते पर "लोकतंत्र के लिए मार्च" (मार्च फॉर डेमोक्रेसी) निकाला और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ संयुक्त याचिका दायर की।

विपक्षी नेताओं से मिलने से सीजेआई सूर्यकांत का इनकार, अब होगा राहुल गांधी का अगला कदम?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को एक बड़ा झटका लगा है। खबर है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मसले पर चर्चा के लिए सोमवार को मुलाकात का समय मांगा था।

सीजेआ ने बताई मुलाकात से इनकार की वजह

जानकारी के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपना जवाब भेजा है। इसमें उन्होंने मुलाकात से इनकार करने की वजहें भी बताई हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कांग्रेस को भेजे अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने प्रशासनिक पक्ष से सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए निर्देश जारी नहीं कर सकता। बता दें कि कांग्रेस नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते थे, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च का ऐलान

इससे पहले रविवार को राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्षी दल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। वे सीजेआई को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने कहा था, "कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा। ऐसा भारत हम नहीं चाहते। कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।"

ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

राहुल गांधी और प्रियंका के खिलाफ केस दर्ज, आकाशवाणी कार्यालय में जबरन घुसने का आरोप

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चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के परिसर में बिना अनुमति के दाखिल होने और वहां धरना देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने संज्ञान लिया है। पुलिस ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी दलों के गठबंधन के कई अन्य सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

राहुल-प्रियंका समेत कई अन्य पर एफआईआर

दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ आकाशवाणी कार्यालय में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई सांसदों पर आकाशवाणी कार्यालय में जबरन प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों से आकाशवाणी भवन परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया।

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निकाला था मार्च

एक दिन पहले ही सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही पुलिस की ओर से इसकी अनुमति दी गई थी। निर्वाचन आयोग के कार्यालय के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। इसी दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां भी विरोध-प्रदर्शन जारी रखा।

राहुल गांधी ने लगाया विपक्षी दलों को खत्म करने का आरोप, बीजेपी ने किया पलटवार

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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का सिंबल फ्रीज कर दिया है। जिसपर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ-साथ चुनाव आयोग पर निशाना साधा। अब केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को भस्मासुर कहा

सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा- पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। बीजेपी नेता ने कहा कि इन तीन दलों का नाम लेकर राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाने का प्रयास किया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी पढ़ाई-लिखाई नहीं करते हैं, उन्हें इतिहास पता करना चाहिए।

राहुल गांधी को अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता- सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'भारत की राजनीति के सदा सर्वदा व्याकुल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जिनको देश और यहां की संस्कृति और धर्म के बारे में कुछ पता है। लेकिन आज ये पता लगा उनको अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता है। आज उन्होंने टीएमसी, एनसीपी का नाम लिया और कहा बीजेपी इनको खत्म कर रही है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि ये पार्टियां स्वयं कांग्रेस से टूटकर बनी थीं। कांग्रेस ने न जाने की कितनी पार्टियों को तोड़ा।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर अलग पार्टी बनाई- सुधांशु त्रिवेदी

बीजेपी नेता ने कहा, 'ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। राहुल गांधी परिवार का ही इतिहास पता कर लीजिए। इंदिरा गांधी ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ वोट करवा दिया था। अभी अशोक गहलोत कुछ समय पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे थे उन्होंने ही कहा है उनको निपटा दिया गया।'

पूर्व पीएम चंद्रशेखर और चरण सिंह का लिया नाम

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, 'जनता पार्टी की सरकार ने चौधरी चरण सिंह जी के साथ धोखा किसने दिया। अभी राजस्थान में आधा दर्जन हाथी निगल गए थे। बसपा ने समर्थन दिया फिर भी उनके विधायकों को अपने में शामिल कर लिया। एनटी रामाराव की पार्टी के साथ भी यही किया। चंद्रशेखर जी के साथ भी यही किया। तीन महीने में ही उनकी सरकार को गिरा दिया था। देवगौड़ा और गुजराल जी की सरकार भी कांग्रेस ने गिराई। 1980 में जब सत्ता में आए तो 9 राज्यों की सरकारों को इसलिए डिसमिस कर दिया कि उनकी केंद्र से सरकार चली गई थी। अपने दौर का ही देख लो कितने मुख्यमंत्रियों को खा गए। गुलाम नबी आजाद, अमरिंदर सिंह, विजय बहुगुणा इनको खा गए।'

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल टीएमसी के नाम और निशान छिन लिए जाने के बाद कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न - भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। उन्होंने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। राहुल गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।

वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’, टीएमसी विवाद पर राहुल गांधी का केन्द्र और चुनाव आयोग पर हमला

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ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को बारतीय निर्वाचन आयोग ने फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ ही चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।

टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जोड़ा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जुड़े मामलों से जोड़ते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न।’ राहुल गांधी ने दावा किया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ रहे हैं और उनके चुनाव चिन्ह छीने जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है।

‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’

राहुल गांधी ने कहा कि अगर पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने अपने बयान में ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ को लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि आयोग का काम जनता के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक आयोग ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलट देती हैं।

राहुल बोले- यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर मतदाता की है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उनका यह बयान चुनाव आयोग की ओर से टीएमसी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद आया है।

टीएमसी का नाम और निशान छिना

बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीएमसी के विधायकों में टूट हो गई। अधिकतर विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया। बागी गुट की अगुवाई अरूप रॉय कर रहे हैं। इसके बाद टीएमसी के नाम और पार्टी सिंबल को लेकर जंग शुरू हो गई। दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने पहुंचा। चुनाव आयोग ने उपचुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फूल और घास के आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, डेटा जुटाने के तरीके का किया विरोध, दिए ये सुझाव

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पत्र लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। खड़गे और राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जानी जाती है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा। हमारी मांग स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।”

पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव

खड़गे और राहुल गांधी ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर ऐसी सूची तैयार की जा सकती है।

बिहार-तेलंगाना जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार नहीं है और सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता’ वाले बयान पर मचा बवाल, शहजाद पूनावाला बोले-बकलोली मचा रखी है

#shehzadpoonawallalashedoutatrahulgandhioversmash_patriarchy

राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति का एक श्लोक उद्धृत किया था। अब राहुल गांधी के बयान पर शहजाद पूनावाला ने बहुत ही जोरदार हमला बोला है।

'स्मैश द पैट्रियार्की' वाली राहुल गांधी की टिप्पणी पर निशाना साधते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता और उनकी पार्टी को आईना दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा है, 'राहुल घैंडी बकलोली बंद कीजिए। पहले अपने परिवार और पार्टी में पितृसत्ता को तोड़ें!'

इटली पीएम मेलोनी को लेकर भी उठाया सवाल

शहजाद पूनावाला वीडियो में बोलते दिखते हैं कि राहुल गांधी ये जो बकलोली तुमने लगा रखी है,स्मैश द पैट्रियार्की आदि,ये तब ठीक लगती जब तुम और संदीप दीक्षित स्टेज पर खड़े होकर एक विदेशी महिला प्रधानमंत्री मेलोनी के बारे में सेक्सिस्ट, पेट्रियार्कल और मिस्थोजेनिस्टिक कमेंट नहीं करते।

राहुल को घर में पैट्रियार्की खत्म करने की सलाह

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी अपने घर में तो पैट्रियार्की खत्म कर नहीं पा रहे हैं और दूसरों को ज्ञान देने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा, बेटे को आगे बढ़ाने के चक्कर में बेटी को तो आगे बढ़ने नहीं दिया गया। प्रियंका को नेतृत्व में आगे लेकर आइए।

कांग्रेस के अंदर कास्टिंग काउच का आरोप

पूनावाला ने कांग्रेस पार्टी के अंदर कास्टिंग काउच को लेकर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। पूनावाला ने कहा, 'शारदा राठौर से लेकर सिमोन रोजवेल जॉन से लेकर बाकी जो महिलाएं कास्टिंग काउच का शिकार बनी हैं, यौन उत्पीड़न का शिकार बनी हैं, उनसे जाकर पूछिए।'

हलाला और यूसीसी पर का भी जिक्र

शहजाद पूनावाला नयहीं नहीं रूके। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदू रीति रिवाज और मनुस्मृति को महिला विरोधी बताते हैं और गाली देते हैं, लेकिन अपने बगल में हिजाब डाली खड़ी मुस्लिम महिला पर राहुल गांधी की जुबान नहीं खुली।

पुणे के कार्यक्रम में राहुल ने दिया था बयान

बता दें कि पुणे में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने देश में पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि इसमें महिला को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्रों के अधीन बताया गया है। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए कहा था कि पिता, पति और बेटे के अलावा महिलाओं की अपनी अलग पहचान है। इसी बयान का जवाब देते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखा हमला बोला।