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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को सत्ता से हटाने में अमेरिका का हाथ? सामने आ गई सीक्रेट फाइल

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इमरान खान को सत्ता से हटाने को लेकर विदेशी साजिश वाले आरोप फिर से चर्चा में हैं। पाकिस्तान की राजनीति में सालों से चर्चा में रहा एक खुफिया मैसेज यानी “साइफर” अब फिर सुर्खियों में है। अब इस कथित सीक्रेट दस्तावेज की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे पता चला है कि इमरान खान के वो दावे सौ फीसदी सही थे जिसमें उन्होंने साइफर का हवाला देते हुए अमेरिका पर अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगाया था।

इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी बैठक

'ड्रॉप साइट' नाम की वेबसाइट ने 'साइफर' नाम का सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक किया है। यह वही सीक्रेट राजनयिक दस्तावेज है, जिसे लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार विदेशी साजिश का आरोप लगाते रहे थे। इस दस्तावेज को 'केबल I-0678' के रूप में पहचाना गया है। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन वाशिंगटन स्थित राजदूत और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई एक बैठक का ब्योरा दर्ज है। यह बैठक अप्रैल 2022 में इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी।

इमरान खान के जाने के बाद शहबाज बने पाक पीएम

दस्तावेज में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन होने पर अमेरिका और यूरोप के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार संभव होगा। इसमें संकेत दिया गया कि इमरान खान के पद पर बने रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। जो बाइडेन उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे। इमरान खान के जाने के बाद शहबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री बने थे।

पाकिस्तान और अमेरिका से संबंध सुधारे

ड्रॉप साइट ने दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि इमरान खान की सरकार गिरने के बाद पिछले पांच सालों में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को एक नया रूप दिया गया और वॉशिंगटन और इस्लामाबाद को आपसी शक-शुबहे के माहौल से निकालकर एक-दूसरे के करीब ला दिया।

इमरान खान बार-बार किया था ये दावा

इमरान खान ने अपनी सत्ता जाने से पहले और संसद में सरकार गिरने के बाद बार-बार यह दावा किया था कि अमेरिका ने उनकी स्वतंत्र विदेश नीति और रूस और चीन के खिलाफ उसके साथ पूरी तरह से न जुड़ने के कारण उन्हें सत्ता से हटाने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। इमरान खान ने पाकिस्तान की वंशवादी राजनीतिक पार्टियों जैसे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-N और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पर भी आरोप लगाया कि वे उनकी सरकार को गिराने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही थीं।

इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव के कारण

रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव कई मुद्दों पर बढ़ाः-

1. अफगानिस्तान मुद्दा: अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान अपनी जमीन ड्रोन ऑपरेशन के लिए दे, लेकिन इमरान खान ने साफ इनकार कर दिया था।

2. रूस यात्रा: फरवरी 2022 में इमरान खान रूस पहुंचे और उसी दिन यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ। इस मुलाकात ने अमेरिका को नाराज कर दिया। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि रूस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में ‘दरार’ डाल दी थी।

3. यूएन वोटिंग: पाकिस्तान ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बनाई, जिससे पश्चिमी देशों की नाराजगी और बढ़ गई।

यूएस-ईरान शांति वार्ताःडील के लिए ट्रंप खुद पहुंच सकते हैं पाकिस्तान

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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इस बीच खबर आ रही है कि डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के साथ इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में समझौता होने की स्थिति में खुद भी शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की युद्धविराम वार्ता होने की उम्मीद अब काफी बढ़ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चर्चा में शामिल एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाल से कहा है कि बातचीत के फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने ये भी संकेत दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है तो या तो खुद डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान आ सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से इसमें शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने दी बम बरसाने की धमकी

ये खबर ऐसे वक्त में आई है, जब ईरान-अमेरिका वार्ता में लगातार गतिरोध चल रहा है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उन्होंने दावा किया है कि ईरान को समझौता करना ही होगा। उन्होंने अपनी ताजा धमकी में कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करेगा, तो बम बरसेंगे। हालांकि इसके बाद भी ईरान ने अड़ियल रवैया जारी रखा है।

पाकिस्तान के लिए अब तक नहीं रवाना हुआ ईरानी प्रतिनिधिमंडल

ईरान की सरकारी टेलीविजन रिपोर्ट के अनुसार अभी तक कोई भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में भाग लेने के लिए रवाना नहीं हुआ है। यह वार्ता अमेरिका के साथ संभावित शांति वार्ता से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे लेकर क्षेत्रीय स्तर पर काफी चर्चा बनी हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से फिलहाल किसी भी डेलीगेशन के पाकिस्तान जाने की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे इस बैठक को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

इन मामलों पर विवाद बरकरार

-ईरान का परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे, जबकि तेहरान का कहना है कि किसी भी प्रतिबंध की समयसीमा सीमित होनी चाहिए।

-यूरेनियम भंडार: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के लगभग 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन ईरान ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान का कहना है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध तब तक जारी रखेगा जब तक अमेरिका अपने प्रतिबंध नहीं हटाता, जबकि अमेरिका का रुख सख्त बना हुआ है।

-जमे हुए आर्थिक संपत्ति: ईरान करीब 20 अरब डॉलर की फ्रीज़्ड संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।

-युद्ध क्षतिपूर्ति: तेहरान ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों से हुए नुकसान के बदले लगभग 270 अरब डॉलर के मुआवजे की भी मांग उठाई है।

पाकिस्तान में बैठी “पंचायत”, शांति वार्ता से पहले धमकी और चेतावनी, अमेरिका-ईरान के बीच हो पाएगा सुलह?

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज से शुरू होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा वक्त से जारी जंग और हालिया युद्धविराम के बीच यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। शांति वार्ता के लिए ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच गया है. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर कालिबाफ कर रहे हैं। इधर अमेरिका की ओर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारी-भरकम दल के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। हालांकि, वार्ता से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने बड़ी शर्त रखी है। वहीं, अमेरिका भी धमकी देने से नहीं चूका।

बातचीत से पहले ईरान ने रखीं दो शर्तें

वार्ता से पहले ईरान ने अपनी शर्तें भी साफ कर दी हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में युद्धविराम लागू होना चाहिए और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां रिलीज की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन शर्तों के बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

अमेरिका ने शांति वार्ता से पहले दी है चेतावनी

इससे पहले, इस्लामाबाद जाने वाले विमान में सवार होने से पहले वैंस ने मीडिया से कहा, "जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अगर ईरानी सद्भावना से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी वार्ताकार टीम इतनी सहृदय नहीं है।"

पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को ‘मेक ऑर ब्रेक’ बताया है। इस्लामाबाद में सेरेना होटल को वार्ता के लिए पूरी तरह खाली कराकर सुरक्षा घेरे में लिया गया है। शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पाकिस्तानी एयरफोर्स और उसके एयर डिफेंस एक्टिव हैं।

पाक रक्षा मंत्री पर भड़के नेतन्याहू, ऐसा लगाई लताड़ की डिलीट किया पोस्ट, इजरायल को बताया था 'कैंसर'

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तान और इजरायल भिड़ते दिख रहे है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया जिसके बाद पूरा मामल और गर्म हो गया है।

लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ और ‘कैंसर’ बताया। साथ ही लेबनान में हो रही सैन्य कार्रवाई को ‘नरसंहार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी चल रही है, उसी समय लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है। आसिफ ने आरोप लगाया कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में खूनखराबा जारी है।

ख्वाजा आसिफ के जहरीले बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को अभिशाप बताते हुए कहा, "जिन लोगों ने कैंसर जैसा देश बनाया है, वे उम्मीद करते हैं कि वो नर्क की आग में जलें।' हालांकि, बाद में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने इजरायल के खिलाफ दिए गए कैंसर वाले बयान समेत उन्हें नर्क में जला देने वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

ख्वाजा आसिफ के बयान पर क्या बोले नेतन्याहू ?

इस बयान के बाद इजरायल ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ है और किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता, खासकर उस देश के लिए जो खुद को शांति का मध्यस्थ बता रहा है। इसमें कहा गया कि इजरायल के विनाश की मांग घोर आपत्तिजनक है।

इजरायली विदेश मंत्री का पलटवार

इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, शांति की मध्यस्थता का दावा करने वाली सरकार की ओर से इन खुले तौर पर यहूदी-विरोधी और भड़काऊ आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है। यहूदी राष्ट्र को कैंसर कहना असल में उसे खत्म करने का ही आह्वान करना है। उन्होंने आगे कहा, इजरायल उन आतंकवादियों से अपनी रक्षा करेगा जिन्होंने उसे तबाह करने की कसम खाई है।

ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव, क्या अमेरिका लिख रहा शहबाज शरीफ की X पोस्ट क्या?

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सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भारी किरकिरी हो रही है। अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच खुद को चौधरी दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पोल खुल गई है। शहबाज शरीफ के मात्र एक पोस्ट से ईरान जंग के सीजफायर पर पाकिस्तान के रोल पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे है कि क्या पाकिस्तान को अमेरिकी की तरफ से कंट्रोल किया जा रहा है?

कैसी है पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका?

दरअसल, पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक सोशल मीडिया पोस्ट की। शहबाज शरीफ ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई की समयसीमा बढ़ाने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि कूटनीति को आगे बढ़ने का मौका देने के लिए समय सीमा को दो सप्ताह तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का भी आग्रह किया था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

सारा विवाद तब शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया यूजर्स ने शहबाज शरीफ के पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर ध्यान दिया। यूजर्स का ध्यान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर चला गया, जिससे पता लगता है कि उनकी इस पोस्ट को किसी दूसरे ने तैयार किया है। स्क्रीनशॉट के अनुसार, उस पोस्ट के शुरुआती संस्करण में सबसे ऊपर लिखा था: ‘Draft – Pakistan’s PM Message on X यानी ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश।’

सिर्फ टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा संदेश

ऐसा होना यह केवल एक छोटी सी टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा इशारा? किसी देश के प्रधानमंत्री के ऑफिशियल कम्युनिकेशन में ड्राफ्ट शब्द लिखा होना बड़े सवाल पैदा करता है, लेकिन क्या ये पाकिस्तान के अधिकारियों की लापरवाही थी या फिर किसी बड़ी बात का संकेत। सवाल उठ रहें है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये ड्राफ्ट पाकिस्तान को भेजा था। या फिर किसी और ने भेजा था।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव?

आलोचकों का कहना है कि यह किसी लीडर के अपनी आवाज में बोलने जैसा कम और उसके लिए तैयार किए गए टेम्पलेट जैसा अधिक लगता है। इस घटना ने जियोपॉलिटिकल सर्कल में एक लंबे समय से चली आ रही सोच को और बढ़ा दिया है कि पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक और डिप्लोमैटिक फैसले अक्सर बाहरी ताकतों से प्रभावित होते हैं।

पाकिस्तान बना मुखौटा, चीन सीजफायर का सूत्रधार, ईरान को बातचीत के लिए किया तैयार

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अमेरिका और ईरान के बीच 5 हफ्तों से ज्यादा तक चली जंग के बाद बुधवार 8 अप्रैल की सुबह राहत भरी खबर आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमले रोकने की घोषणा की। ट्रंप ने इसे दो तरफा युद्धविराम बताया और कहा कि यह इस शर्त पर होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलेगी।

चीन ने पर्दे के पीछे रहकर किया काम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर के पीछे चीन की अहम भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे रहकर ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई।

आखिरी समय में चीन के दखल आई काम

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने युद्धविराम में अहम भूमिका निभाई है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में दो हफ्ते के सीजफायर के फैसले के पीछे पाकिस्तान के अलावा चीन की बड़ी भूमिका सामने आई है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के जोरदार प्रयास के साथ-साथ चीन ने आखिरी मिनट में दखल देकर ईरान को समझाया और तनाव कम किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ने ईरान को साफ चेतावनी दी कि अगर ट्रंप अपनी धमकी के मुताबिक ईरान के एनर्जी साइट्स और बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

ट्रंप बोले- चीन ने ईरान को किया तैयार

सीजफायर को लेकर ट्रंप ने कहा है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एक टेलीफोनिक बातचीत में उनसे पूछा गया कि क्या चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए प्रेरित किया। इस पर ट्रंप ने कहा, “हां, मैंने सुना है”। हालांकि, इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

संघर्ष के बाद से ही चीन सीजफायर के लिए था प्रयासरत

वहीं, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही चीन सीजफायर और युद्ध खत्म कराने के लिए काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन हर उस प्रयास का स्वागत करता है जो शांति की दिशा में हो और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए मतभेद खत्म करने चाहिए। चीन ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष इस मौके का फायदा उठाकर जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करेंगे। गौरतलब है कि चीन इससे पहले 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता कराने में भी अहम भूमिका निभा चुका है।

टुकड़े-टुकड़े होगा पाकिस्तान…कोलकाता पर हमले की धमकी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का करारा जवाब

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पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता नहीं रहा। पाकिस्तानी हुक्मरान समय-समय पर बेतुके बयान से सुर्खियां बटोरते रहते हैं। ऐसी ही टिप्पणी पड़ोसी मुल्क के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में की थी। अब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की धमकी पर कड़ा जवाब दिया है। राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि वे 55 साल पहले के अंजाम को न भूलें जब पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया था। 

पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को ऐसा उकसाने वाला बयान नहीं देना चाहिए था। 55 साल पहले उन्होंने जब गलती की थी, तो पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया था। अगर इस बार वे बंगाल पर नजर डालने की कोशिश करेंगे, तो भगवान ही जानते हैं कि पाकिस्तान इस बार कितने हिस्सों में बंटेगा।

1971 भारत पाकिस्तान युद्ध की दिलाई याद

राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक मंच से कहा कि पाकिस्तान को ऐसे उकसावे वाले बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भारत के खिलाफ कोई भी गलत कदम उठाया गया तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। राजनाथ सिंह ने अपने बयान में 1971 भारत पाकिस्तान युद्ध का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को इतिहास याद दिलाया।

पाकिस्तान के साथ टीएमसी को भी जवाब

बैरकपुर में चुनावी रैली के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की धमकी और उस पर तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया था कि पाकिस्तानी धमकी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं। इस पर पलटवार करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश का रक्षा मंत्री होने के नाते वह खुद इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहे हैं और यह जरूरी नहीं कि हर बात पर प्रधानमंत्री ही बोलें। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा और रक्षा मामलों पर सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट है।

ख्वाजा आसिफ ने दी थी धमकी

शनिवार को सियालकोट में पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि भारत किसी फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत इस बार फॉल्स फ्लैग करने की कोशिश करता है, तो इंशाअल्लाह हम उसका जवाब कोलकाता तक ले जाएंगे। आसिफ ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान में बंद कुछ लोगों की लाशों का इस्तेमाल करके उन्हें आतंकी बताने की साजिश रची जा रही है। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान का जवाब तेज, सटीक और निर्णायक होगा।

ट्रंप ने फिर लिया भारत-पाक के बीच सुलह का श्रेय, ईरान के साथ जंग के बीच 50 करोड़ लोगों की जान बचाने का दावा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को समाप्त कराया था। उन्होंने कहा मैंने दो परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध खत्म करवा नहीं तो वह खतरनाक हो सकता था। ऐसा करके मैंने 50 करोड़ लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने ये बयान उस वक्त दिया है, जब ईरान के बीच जंग तेज होती जा रही है और पश्चिमी एशिया में तनाव अपने चरम पर है।

8 युद्ध खत्म कराने का दावा

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'मैंने भारत और पाकिस्तान समेत 8 युद्ध खत्म कराए हैं, यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा कि मैंने 30 से 50 मिलियन लोगों की जान बचाई।' 

नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने जताया अफसोस

ट्रंप ने यह भी कहा कि एक और युद्ध खत्म करना बाकी है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह ईरान, यूक्रेन या कोई अन्य वैश्विक संघर्ष है। साथ ही नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर फिर से अफसोस जताया।

ट्रंप का यह दावा नया नहीं

ट्रंप का यह दावा नया नहीं है; उन्होंने पहले भी कई बार कहा है कि उन्होंने इस संघर्ष को समाप्त कराया था, जबकि भारत सरकार ने इन दावों का खंडन किया है। दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जो कि 3 दिनों तक चला था। इसी जंग को लेकर ट्रंप एक बार नहीं दो बार नहीं कई बार युद्ध को रुकवाने का दावा कर चुके हैं।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को सत्ता से हटाने में अमेरिका का हाथ? सामने आ गई सीक्रेट फाइल

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इमरान खान को सत्ता से हटाने को लेकर विदेशी साजिश वाले आरोप फिर से चर्चा में हैं। पाकिस्तान की राजनीति में सालों से चर्चा में रहा एक खुफिया मैसेज यानी “साइफर” अब फिर सुर्खियों में है। अब इस कथित सीक्रेट दस्तावेज की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे पता चला है कि इमरान खान के वो दावे सौ फीसदी सही थे जिसमें उन्होंने साइफर का हवाला देते हुए अमेरिका पर अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगाया था।

इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी बैठक

'ड्रॉप साइट' नाम की वेबसाइट ने 'साइफर' नाम का सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक किया है। यह वही सीक्रेट राजनयिक दस्तावेज है, जिसे लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार विदेशी साजिश का आरोप लगाते रहे थे। इस दस्तावेज को 'केबल I-0678' के रूप में पहचाना गया है। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन वाशिंगटन स्थित राजदूत और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई एक बैठक का ब्योरा दर्ज है। यह बैठक अप्रैल 2022 में इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी।

इमरान खान के जाने के बाद शहबाज बने पाक पीएम

दस्तावेज में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन होने पर अमेरिका और यूरोप के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार संभव होगा। इसमें संकेत दिया गया कि इमरान खान के पद पर बने रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। जो बाइडेन उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे। इमरान खान के जाने के बाद शहबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री बने थे।

पाकिस्तान और अमेरिका से संबंध सुधारे

ड्रॉप साइट ने दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि इमरान खान की सरकार गिरने के बाद पिछले पांच सालों में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को एक नया रूप दिया गया और वॉशिंगटन और इस्लामाबाद को आपसी शक-शुबहे के माहौल से निकालकर एक-दूसरे के करीब ला दिया।

इमरान खान बार-बार किया था ये दावा

इमरान खान ने अपनी सत्ता जाने से पहले और संसद में सरकार गिरने के बाद बार-बार यह दावा किया था कि अमेरिका ने उनकी स्वतंत्र विदेश नीति और रूस और चीन के खिलाफ उसके साथ पूरी तरह से न जुड़ने के कारण उन्हें सत्ता से हटाने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। इमरान खान ने पाकिस्तान की वंशवादी राजनीतिक पार्टियों जैसे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-N और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पर भी आरोप लगाया कि वे उनकी सरकार को गिराने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही थीं।

इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव के कारण

रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव कई मुद्दों पर बढ़ाः-

1. अफगानिस्तान मुद्दा: अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान अपनी जमीन ड्रोन ऑपरेशन के लिए दे, लेकिन इमरान खान ने साफ इनकार कर दिया था।

2. रूस यात्रा: फरवरी 2022 में इमरान खान रूस पहुंचे और उसी दिन यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ। इस मुलाकात ने अमेरिका को नाराज कर दिया। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि रूस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में ‘दरार’ डाल दी थी।

3. यूएन वोटिंग: पाकिस्तान ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बनाई, जिससे पश्चिमी देशों की नाराजगी और बढ़ गई।

यूएस-ईरान शांति वार्ताःडील के लिए ट्रंप खुद पहुंच सकते हैं पाकिस्तान

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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इस बीच खबर आ रही है कि डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के साथ इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में समझौता होने की स्थिति में खुद भी शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की युद्धविराम वार्ता होने की उम्मीद अब काफी बढ़ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चर्चा में शामिल एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाल से कहा है कि बातचीत के फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने ये भी संकेत दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है तो या तो खुद डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान आ सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से इसमें शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने दी बम बरसाने की धमकी

ये खबर ऐसे वक्त में आई है, जब ईरान-अमेरिका वार्ता में लगातार गतिरोध चल रहा है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उन्होंने दावा किया है कि ईरान को समझौता करना ही होगा। उन्होंने अपनी ताजा धमकी में कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करेगा, तो बम बरसेंगे। हालांकि इसके बाद भी ईरान ने अड़ियल रवैया जारी रखा है।

पाकिस्तान के लिए अब तक नहीं रवाना हुआ ईरानी प्रतिनिधिमंडल

ईरान की सरकारी टेलीविजन रिपोर्ट के अनुसार अभी तक कोई भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में भाग लेने के लिए रवाना नहीं हुआ है। यह वार्ता अमेरिका के साथ संभावित शांति वार्ता से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे लेकर क्षेत्रीय स्तर पर काफी चर्चा बनी हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से फिलहाल किसी भी डेलीगेशन के पाकिस्तान जाने की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे इस बैठक को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

इन मामलों पर विवाद बरकरार

-ईरान का परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे, जबकि तेहरान का कहना है कि किसी भी प्रतिबंध की समयसीमा सीमित होनी चाहिए।

-यूरेनियम भंडार: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के लगभग 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन ईरान ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान का कहना है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध तब तक जारी रखेगा जब तक अमेरिका अपने प्रतिबंध नहीं हटाता, जबकि अमेरिका का रुख सख्त बना हुआ है।

-जमे हुए आर्थिक संपत्ति: ईरान करीब 20 अरब डॉलर की फ्रीज़्ड संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।

-युद्ध क्षतिपूर्ति: तेहरान ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों से हुए नुकसान के बदले लगभग 270 अरब डॉलर के मुआवजे की भी मांग उठाई है।

पाकिस्तान में बैठी “पंचायत”, शांति वार्ता से पहले धमकी और चेतावनी, अमेरिका-ईरान के बीच हो पाएगा सुलह?

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज से शुरू होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा वक्त से जारी जंग और हालिया युद्धविराम के बीच यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। शांति वार्ता के लिए ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच गया है. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर कालिबाफ कर रहे हैं। इधर अमेरिका की ओर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारी-भरकम दल के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। हालांकि, वार्ता से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने बड़ी शर्त रखी है। वहीं, अमेरिका भी धमकी देने से नहीं चूका।

बातचीत से पहले ईरान ने रखीं दो शर्तें

वार्ता से पहले ईरान ने अपनी शर्तें भी साफ कर दी हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में युद्धविराम लागू होना चाहिए और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां रिलीज की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन शर्तों के बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

अमेरिका ने शांति वार्ता से पहले दी है चेतावनी

इससे पहले, इस्लामाबाद जाने वाले विमान में सवार होने से पहले वैंस ने मीडिया से कहा, "जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अगर ईरानी सद्भावना से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि हमारी वार्ताकार टीम इतनी सहृदय नहीं है।"

पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को ‘मेक ऑर ब्रेक’ बताया है। इस्लामाबाद में सेरेना होटल को वार्ता के लिए पूरी तरह खाली कराकर सुरक्षा घेरे में लिया गया है। शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। पाकिस्तानी एयरफोर्स और उसके एयर डिफेंस एक्टिव हैं।

पाक रक्षा मंत्री पर भड़के नेतन्याहू, ऐसा लगाई लताड़ की डिलीट किया पोस्ट, इजरायल को बताया था 'कैंसर'

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तान और इजरायल भिड़ते दिख रहे है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया जिसके बाद पूरा मामल और गर्म हो गया है।

लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ और ‘कैंसर’ बताया। साथ ही लेबनान में हो रही सैन्य कार्रवाई को ‘नरसंहार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी चल रही है, उसी समय लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है। आसिफ ने आरोप लगाया कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में खूनखराबा जारी है।

ख्वाजा आसिफ के जहरीले बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को अभिशाप बताते हुए कहा, "जिन लोगों ने कैंसर जैसा देश बनाया है, वे उम्मीद करते हैं कि वो नर्क की आग में जलें।' हालांकि, बाद में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने इजरायल के खिलाफ दिए गए कैंसर वाले बयान समेत उन्हें नर्क में जला देने वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

ख्वाजा आसिफ के बयान पर क्या बोले नेतन्याहू ?

इस बयान के बाद इजरायल ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ है और किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता, खासकर उस देश के लिए जो खुद को शांति का मध्यस्थ बता रहा है। इसमें कहा गया कि इजरायल के विनाश की मांग घोर आपत्तिजनक है।

इजरायली विदेश मंत्री का पलटवार

इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, शांति की मध्यस्थता का दावा करने वाली सरकार की ओर से इन खुले तौर पर यहूदी-विरोधी और भड़काऊ आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है। यहूदी राष्ट्र को कैंसर कहना असल में उसे खत्म करने का ही आह्वान करना है। उन्होंने आगे कहा, इजरायल उन आतंकवादियों से अपनी रक्षा करेगा जिन्होंने उसे तबाह करने की कसम खाई है।

ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव, क्या अमेरिका लिख रहा शहबाज शरीफ की X पोस्ट क्या?

#whyispmshahbazbeingtrolledaftertheiran_war

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भारी किरकिरी हो रही है। अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच खुद को चौधरी दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पोल खुल गई है। शहबाज शरीफ के मात्र एक पोस्ट से ईरान जंग के सीजफायर पर पाकिस्तान के रोल पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे है कि क्या पाकिस्तान को अमेरिकी की तरफ से कंट्रोल किया जा रहा है?

कैसी है पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका?

दरअसल, पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक सोशल मीडिया पोस्ट की। शहबाज शरीफ ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई की समयसीमा बढ़ाने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था कि कूटनीति को आगे बढ़ने का मौका देने के लिए समय सीमा को दो सप्ताह तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का भी आग्रह किया था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

सारा विवाद तब शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया यूजर्स ने शहबाज शरीफ के पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर ध्यान दिया। यूजर्स का ध्यान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की पोस्ट की ‘एडिट हिस्ट्री’ पर चला गया, जिससे पता लगता है कि उनकी इस पोस्ट को किसी दूसरे ने तैयार किया है। स्क्रीनशॉट के अनुसार, उस पोस्ट के शुरुआती संस्करण में सबसे ऊपर लिखा था: ‘Draft – Pakistan’s PM Message on X यानी ड्राफ्ट- एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का संदेश।’

सिर्फ टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा संदेश

ऐसा होना यह केवल एक छोटी सी टेक्निकल गलती थी या कोई बड़ा इशारा? किसी देश के प्रधानमंत्री के ऑफिशियल कम्युनिकेशन में ड्राफ्ट शब्द लिखा होना बड़े सवाल पैदा करता है, लेकिन क्या ये पाकिस्तान के अधिकारियों की लापरवाही थी या फिर किसी बड़ी बात का संकेत। सवाल उठ रहें है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये ड्राफ्ट पाकिस्तान को भेजा था। या फिर किसी और ने भेजा था।

कौन कर रहा पाकिस्तान की गाड़ी ड्राइव?

आलोचकों का कहना है कि यह किसी लीडर के अपनी आवाज में बोलने जैसा कम और उसके लिए तैयार किए गए टेम्पलेट जैसा अधिक लगता है। इस घटना ने जियोपॉलिटिकल सर्कल में एक लंबे समय से चली आ रही सोच को और बढ़ा दिया है कि पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक और डिप्लोमैटिक फैसले अक्सर बाहरी ताकतों से प्रभावित होते हैं।

पाकिस्तान बना मुखौटा, चीन सीजफायर का सूत्रधार, ईरान को बातचीत के लिए किया तैयार

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अमेरिका और ईरान के बीच 5 हफ्तों से ज्यादा तक चली जंग के बाद बुधवार 8 अप्रैल की सुबह राहत भरी खबर आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों तक हमले रोकने की घोषणा की। ट्रंप ने इसे दो तरफा युद्धविराम बताया और कहा कि यह इस शर्त पर होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलेगी।

चीन ने पर्दे के पीछे रहकर किया काम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर के पीछे चीन की अहम भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे रहकर ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई।

आखिरी समय में चीन के दखल आई काम

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने युद्धविराम में अहम भूमिका निभाई है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में दो हफ्ते के सीजफायर के फैसले के पीछे पाकिस्तान के अलावा चीन की बड़ी भूमिका सामने आई है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के जोरदार प्रयास के साथ-साथ चीन ने आखिरी मिनट में दखल देकर ईरान को समझाया और तनाव कम किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ने ईरान को साफ चेतावनी दी कि अगर ट्रंप अपनी धमकी के मुताबिक ईरान के एनर्जी साइट्स और बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी।

ट्रंप बोले- चीन ने ईरान को किया तैयार

सीजफायर को लेकर ट्रंप ने कहा है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। एक टेलीफोनिक बातचीत में उनसे पूछा गया कि क्या चीन ने ईरान को सीजफायर के लिए प्रेरित किया। इस पर ट्रंप ने कहा, “हां, मैंने सुना है”। हालांकि, इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

संघर्ष के बाद से ही चीन सीजफायर के लिए था प्रयासरत

वहीं, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से ही चीन सीजफायर और युद्ध खत्म कराने के लिए काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि चीन हर उस प्रयास का स्वागत करता है जो शांति की दिशा में हो और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए मतभेद खत्म करने चाहिए। चीन ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष इस मौके का फायदा उठाकर जल्द से जल्द संघर्ष खत्म करेंगे। गौरतलब है कि चीन इससे पहले 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता कराने में भी अहम भूमिका निभा चुका है।

टुकड़े-टुकड़े होगा पाकिस्तान…कोलकाता पर हमले की धमकी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का करारा जवाब

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पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता नहीं रहा। पाकिस्तानी हुक्मरान समय-समय पर बेतुके बयान से सुर्खियां बटोरते रहते हैं। ऐसी ही टिप्पणी पड़ोसी मुल्क के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में की थी। अब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की धमकी पर कड़ा जवाब दिया है। राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि वे 55 साल पहले के अंजाम को न भूलें जब पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया था। 

पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को ऐसा उकसाने वाला बयान नहीं देना चाहिए था। 55 साल पहले उन्होंने जब गलती की थी, तो पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया था। अगर इस बार वे बंगाल पर नजर डालने की कोशिश करेंगे, तो भगवान ही जानते हैं कि पाकिस्तान इस बार कितने हिस्सों में बंटेगा।

1971 भारत पाकिस्तान युद्ध की दिलाई याद

राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक मंच से कहा कि पाकिस्तान को ऐसे उकसावे वाले बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भारत के खिलाफ कोई भी गलत कदम उठाया गया तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। राजनाथ सिंह ने अपने बयान में 1971 भारत पाकिस्तान युद्ध का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को इतिहास याद दिलाया।

पाकिस्तान के साथ टीएमसी को भी जवाब

बैरकपुर में चुनावी रैली के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की धमकी और उस पर तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया था कि पाकिस्तानी धमकी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं। इस पर पलटवार करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश का रक्षा मंत्री होने के नाते वह खुद इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहे हैं और यह जरूरी नहीं कि हर बात पर प्रधानमंत्री ही बोलें। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा और रक्षा मामलों पर सरकार की नीति पूरी तरह स्पष्ट है।

ख्वाजा आसिफ ने दी थी धमकी

शनिवार को सियालकोट में पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि भारत किसी फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत इस बार फॉल्स फ्लैग करने की कोशिश करता है, तो इंशाअल्लाह हम उसका जवाब कोलकाता तक ले जाएंगे। आसिफ ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान में बंद कुछ लोगों की लाशों का इस्तेमाल करके उन्हें आतंकी बताने की साजिश रची जा रही है। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान का जवाब तेज, सटीक और निर्णायक होगा।

ट्रंप ने फिर लिया भारत-पाक के बीच सुलह का श्रेय, ईरान के साथ जंग के बीच 50 करोड़ लोगों की जान बचाने का दावा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को समाप्त कराया था। उन्होंने कहा मैंने दो परमाणु शक्तियों के बीच युद्ध खत्म करवा नहीं तो वह खतरनाक हो सकता था। ऐसा करके मैंने 50 करोड़ लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने ये बयान उस वक्त दिया है, जब ईरान के बीच जंग तेज होती जा रही है और पश्चिमी एशिया में तनाव अपने चरम पर है।

8 युद्ध खत्म कराने का दावा

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'मैंने भारत और पाकिस्तान समेत 8 युद्ध खत्म कराए हैं, यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझसे कहा कि मैंने 30 से 50 मिलियन लोगों की जान बचाई।' 

नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने जताया अफसोस

ट्रंप ने यह भी कहा कि एक और युद्ध खत्म करना बाकी है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह ईरान, यूक्रेन या कोई अन्य वैश्विक संघर्ष है। साथ ही नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर फिर से अफसोस जताया।

ट्रंप का यह दावा नया नहीं

ट्रंप का यह दावा नया नहीं है; उन्होंने पहले भी कई बार कहा है कि उन्होंने इस संघर्ष को समाप्त कराया था, जबकि भारत सरकार ने इन दावों का खंडन किया है। दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जो कि 3 दिनों तक चला था। इसी जंग को लेकर ट्रंप एक बार नहीं दो बार नहीं कई बार युद्ध को रुकवाने का दावा कर चुके हैं।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।