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दीपोत्सव के लिए सजने लगी रामनगरी, 300 फीट की स्क्रीन पर पहली बार दिखेगी रामकथा

- 5 से 8 नवंबर तक होगा आयोजन, 100 विदेशी मेहमानों को न्योता; 30 लाख से अधिक दीप जलाने का लक्ष्य

अयोध्या। दीपों के महापर्व दीपोत्सव से पहले रामनगरी अयोध्या को भव्य और दिव्य स्वरूप देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। सरयू तट से लेकर प्रमुख मार्गों और सांस्कृतिक आयोजन स्थलों तक सजावट और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कहीं घाटों को संवारा जा रहा है तो कहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए विशाल मंच तैयार किए जा रहे हैं। इस बार दीपोत्सव में आधुनिक तकनीक के माध्यम से रामकथा का भव्य प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होगा। वहीं, करीब 100 विदेशी मेहमानों को आमंत्रित कर आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की भी तैयारी है।

राम की पैड़ी पर दीपोत्सव की तैयारियां अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगी हैं। यहां लाल कारपेट बिछाया जा चुका है और सरयू तट के घाटों से सिल्ट हटाने का काम पूरा कर लिया गया है। लेजर शो और प्रोजेक्शन मैपिंग के लिए 300 फीट लंबी तथा 50 फीट ऊंची विशाल स्क्रीन तैयार की जा रही है। रामकथा पार्क के निकट विशिष्ट अतिथियों के आगमन के लिए अस्थायी हेलीपैड का निर्माण पूरा हो गया है। प्रमुख मार्गों और प्रवेश स्थलों पर तोरण द्वार बनाए जा रहे हैं, जबकि रामपथ की रेलिंग को चमकाने का काम जारी है।

- पहली बार विशाल स्क्रीन पर साकार होगी रामकथा

इस बार दीपोत्सव में रामकथा के मंचन और प्रदर्शन को नया स्वरूप दिया जा रहा है। पहली बार 300 फीट लंबी और 50 फीट ऊंची स्क्रीन पर लेजर शो तथा प्रोजेक्शन मैपिंग के जरिए रामकथा प्रस्तुत की जाएगी। पहले की तरह राम की पैड़ी के भवनों की दीवारों पर प्रोजेक्शन करने के बजाय इस बार अलग से विशाल स्क्रीन लगाई जा रही है। स्क्रीन के सामने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए तीन मंच बनाए जा रहे हैं। इनकी ऊंचाई क्रमशः 10, 20 और 30 फीट होगी। इन मंचों पर कलाकार विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण की प्रसंगों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करेंगे।

- 100 विदेशी मेहमानों को आमंत्रित करने की तैयारी

दीपोत्सव को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संपर्क किया जा रहा है। पांच से आठ नवंबर तक आयोजित होने वाले इस आयोजन में करीब 100 विदेशी मेहमानों को आमंत्रित करने की योजना है। इनमें 12 देशों के विशेष अतिथियों के साथ 30 से अधिक देशों के राजदूत और अन्य प्रतिनिधि शामिल होंगे। विभिन्न देशों में बसे प्रवासी भारतीयों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।

भारतीय दूतावासों और राजदूतों के माध्यम से निमंत्रण भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभिन्न देशों के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रियों अथवा उनके प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने की योजना है। विदेशी अतिथियों और प्रवासी भारतीयों की भागीदारी से अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है।

- देश-विदेश की रामलीलाओं का होगा मंचन

दीपोत्सव के दौरान पांच, छह और सात नवंबर को देश-विदेश की रामलीला परंपराओं का मंचन किया जाएगा। इसके जरिए विभिन्न देशों में प्रचलित रामकथा की परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विविधताओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

इस बार सरयू तट पर 30 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष यहां 26 लाख 17 हजार 215 दीप जलाकर आयोजन को भव्य स्वरूप दिया गया था। इस बार दीपों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ आधुनिक तकनीक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विदेशी मेहमानों की भागीदारी के जरिए दीपोत्सव को और व्यापक बनाने की तैयारी है।

पत्रकारों की पेंशन के लिए उचित मंच पर पैरवी करेंगे अवनीश अवस्थी

- आईएफडब्ल्यूजे के 76वें स्थापना दिवस पर मिला आश्वासन, 60 वर्ष से अधिक उम्र के पत्रकारों को लाभ दिलाने का प्रयास

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने पत्रकारों की पेंशन का मुद्दा उचित मंच पर उठाने और इसके समाधान के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अपर मुख्य सचिव सूचना एवं निदेशक सूचना से भी वार्ता की जाएगी। साथ ही अगले सप्ताह यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर पत्रकारों की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। उनका प्रयास होगा कि 60 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को पेंशन का लाभ दिलाने की दिशा में ठोस पहल हो।

अवनीश अवस्थी गुरुवार को यूपी प्रेस क्लब में यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन की ओर से आयोजित इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आईएफडब्ल्यूजे) के 76वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पत्रकार सुरक्षा के मुद्दे पर गोष्ठी भी आयोजित की गई। कार्यक्रम में पत्रकारों की समस्याओं से संबंधित प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन मुख्य अतिथि को सौंपा गया। अवनीश अवस्थी ने पत्रकारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों का रजिस्टर तैयार करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों का एक राष्ट्रीय रजिस्टर बनने से उनकी पहचान सुनिश्चित करने और उन्हें सुविधाओं का लाभ दिलाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि पत्रकारों को लाभान्वित करने के लिए खेल विभाग से भी वार्ता की जाएगी। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और उन्हें अन्य संस्थागत स्तंभों की तरह मजबूत होकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

- राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे आईएफडब्ल्यूजे के अध्यक्ष गोपाल मिश्रा ने पत्रकारों का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करने के साथ ही पत्रकार सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को लेकर सरकार भी चिंतित है। उनकी मांगें जायज हैं और उनका समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार तमाम कठिनाइयों, अभावों और आलोचनाओं के बावजूद समाज और जनता के हितों के लिए लगातार संघर्ष करते हैं। पत्रकारों की सुरक्षा हो या पेंशन का विषय, इन समस्याओं का समाधान आवश्यक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पत्रकारों की समस्याओं को सरकार के समक्ष रखकर उनके निराकरण के लिए प्रयास करेंगे।

- पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों ने भी रखे विचार

समारोह में यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी, यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार सिंह, आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय महासचिव विश्वदेव राव, प्रदेश महामंत्री देवराज सिंह और लखनऊ इकाई के अध्यक्ष शिवशरण सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर महामंत्री नितिन श्रीवास्तव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेम कांत तिवारी, विजय शंकर पंकज, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रजा रिजवी, भास्कर दुबे, सुरेश यादव, सर्वेश तिवारी, अविनाश शुक्ला, अनिल सैनी, मोहम्मद जुबेर, पवन कुमार सिंह, रेनू निगम, नायला किदवाई, जेपी शुक्ला, सूर्य नारायण सिंह, कलानिधि मिश्रा, महिमा तिवारी, मुकुल मिश्रा, राकेश सिंह चौहान, अनिल त्रिपाठी, मोहम्मद जान तुर्की, विजय प्रकाश मिश्रा, आशीष कुमार सिंह, टीएन मिश्रा, भाजपा नेता प्रदीप सिंह बब्बू, सुमति सक्सेना, सुरेंद्र अग्निहोत्री, गंगेश मिश्रा, विजय मिश्रा और मोहम्मद तारिक फारुकी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

03 स्नातक तथा 06 शिक्षक क्षेत्र के उम्मीदवार विजयी घोषित

लखनऊ एवं वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना जारी

लखनऊ, 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 05 स्नातक व 06 शिक्षक द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत 03 स्नातक तथा 06 शिक्षक क्षेत्रों के उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया गया है। लखनऊ तथा वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सायं 8:00 बजे तक की प्राप्त सूचना के अनुसार मतगणना जारी है।

घोषित परिणाम निम्नवत हैं :-

1. मेरठ स्नातक क्षेत्र- दिनेश कुमार गोयल (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 24,929 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

2. आगरा स्नातक क्षेत्र- डा० मानवेंद्र प्रताप सिंह, गुरु जी (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 42,743 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

3. इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र- डा० मान सिंह यादव (समाजवादी पार्टी) ने कुल 60,358 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

4. लखनऊ शिक्षक क्षेत्र- उमेश द्विवेदी (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 13,179 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

5. वाराणसी शिक्षक क्षेत्र- लाल बिहारी यादव (समाजवादी पार्टी) ने कुल 11,612 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

6. आगरा शिक्षक क्षेत्र- डॉ० आकाश अग्रवाल (समाजवादी पार्टी) ने कुल 14,046 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

7. मेरठ शिक्षक क्षेत्र- श्रीचन्द शर्मा (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 18,099 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

8. बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र- डा० हरी सिंह ढिल्लो (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 21,672 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

9. गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र- ध्रुव कुमार त्रिपाठी (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 16,790 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की।

* लखनऊ एवं वाराणसी स्नातक क्षेत्र की रात्रि 8 बजे तक की गणना सूचना निम्नवत है:-

01. लखनऊ स्नातक क्षेत्र में आठवे चरण की गणना समाप्त, अगले चरण की गणना प्रारंभ।

02. वाराणसी स्नातक क्षेत्र में पांचवे चरण की गणना समाप्त, अगले चरण की गणना प्रारंभ।

सरकारी अस्पतालों में बेडशीट, पिलो कवर एवं गॉज-बैंडेज की आपूर्ति करेंगे राज्य हथकरघा निगम और यूपिका

- मंत्री राकेश सचान ने सरकारी चिकित्सालयों में हथकरघा उत्पादों की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

- सरकारी अस्पतालों में हथकरघा उत्पादों की खरीद प्रक्रिया होगी, एसओपी एवं समझौता ज्ञापन को शीघ्र अंतिम रूप देने की तैयारी 

लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026। प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने बुधवार को विधान भवन के प्रथम तल स्थित कक्ष संख्या-80 में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा हथकरघा विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड (यूपिका / यूपी हैंडलूम्स) द्वारा उत्पादित बेडशीट, पिलो कवर, गॉज एवं बैंडेज क्लॉथ की प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सालयों में समयबद्ध एवं सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित कराने पर विस्तृत चर्चा हुई और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश के स्थानीय बुनकरों एवं बुनकर सहकारी समितियों के आर्थिक स्वावलंबन के कटिबद्ध है। इसके तहत सरकारी चिकित्सालयों में उपयोग होने वाली बेडशीट, तकिया कवर तथा गॉज एवं बैंडेज की खरीद राज्य हथकरघा निगम और यूपिका के माध्यम से की जानी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था से जहां एक ओर राज्य के बुनकरों की आय बढ़ाने में होगा, वहीं चिकित्सालयों को भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध होंगे।

मंत्री राकेश सचान ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्तमान में उपयोग किए जा रहे उत्पादों के मानक एवं नमूने तत्काल उपलब्ध कराए जाएं और हथकरघा निगम निर्धारित मानकों पर आधारित नए सैंपल तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सौंपे। इसके साथ ही मंत्री राकेश सचान ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों से कहा कि वे यूपिका एवं यूपी हैंडलूम्स के साथ आपूर्ति संबंधी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया को शीघ्रता से अंतिम रूप दें तथा जेम पोर्टल पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों के तहत क्रय व्यवस्था को पारदर्शी व बाधा रहित बनाएं। 

इस अवसर पर हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर सहित राज्य हथकरघा निगम, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सालयों के प्रतिनिधि तथा तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

माटीकला महोत्सव-2026 का शुभारंभ, योगी सरकार में परंपरागत शिल्प को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़ने पर जोर

- खादी भवन में खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने फीता काटकर किया शुभारंभ

- पिछले वर्ष पांच करोड़ रुपये से अधिक की हुई थी बिक्री, इस बार और अधिक बिक्री का अनुमान

- 48 हजार से अधिक कारीगर परिवार चिन्हित, 18,432 विद्युत चालित चाक वितरित

लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की समृद्ध माटीकला परंपरा को नया आयाम देने और इससे जुड़े कारीगरों को रोजगार एवं उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बुधवार को खादी भवन में माटीकला महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया गया। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने फीता काटकर महोत्सव का शुभारंभ किया और इस बार पिछली बिक्री का रिकॉर्ड टूटने की संभावना भी जताई। महोत्सव के अवसर पर पांच कारीगरों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक, दो कारीगरों को पगमिल मशीन तथा मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के एक लाभार्थी को बैंक ऋण का चेक वितरित किया गया। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। माटीकला महोत्सव इसी प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कारीगरों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करता है। मंत्री राकेश सचान ने कहा कि मिट्टी के दीये, खिलौने, मूर्तियां, बर्तन और अन्य कलात्मक उत्पाद भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। बदलती जीवनशैली के बीच इन उत्पादों को फिर से लोकप्रिय बनाने और इनसे जुड़े कारीगरों की आजीविका मजबूत करने की दिशा में सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। माटीकला क्षेत्र को संगठित रूप से प्रोत्साहित करने के लिए 19 जुलाई, 2018 को उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड के माध्यम से अब तक प्रदेश में 48,048 कारीगर परिवारों को चिन्हित किया जा चुका है। कारीगरों को कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 39,468 माटीकला कारीगरों को मिट्टी निकासी के पट्टे भी आवंटित किए गए हैं।

कारीगरों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में अब तक 18,432 विद्युत चालित चाक वितरित किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,740 अतिरिक्त विद्युत चालित चाक वितरित करने का लक्ष्य है। इसी प्रकार मिट्टी गूथने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 675 पगमिल मशीनें वितरित की गई हैं, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 300 और मशीनें वितरित करने की योजना है।

इसके अतिरिक्त मूर्तियों के निर्माण के लिए 603 जोड़ी पीओपी डाई, पेंटिंग के लिए 31 मशीनें और दीये बनाने के लिए 81 मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। आधुनिक उपकरणों से उत्पादन प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने और कारीगरों को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में मदद मिल सकती है।

योगी सरकार की मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पिछले सात वर्षों में 1,333 लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत कराकर माटीकला इकाइयां स्थापित कराई गई हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मार्च 2027 तक 300 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कारीगरों के कौशल विकास के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। पिछले सात वर्षों में 18,432 लाभार्थियों को आधुनिक उपकरण संचालन का तकनीकी प्रशिक्षण, 1,333 लाभार्थियों को उद्यम संचालन का प्रशिक्षण और 7,836 लाभार्थियों को शिल्पकारी का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के 10 जनपदों - पीलीभीत, रामपुर, कन्नौज, अमरोहा, बाराबंकी, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमेठी, बरेली और जालौन में कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए गए हैं।

मिट्टी के बर्तनों और पारंपरिक उत्पादों का उपयोग भारतीय जीवनशैली का पुराना हिस्सा रहा है। कुल्हड़, घड़ा, सुराही और मिट्टी के दीये जैसे उत्पाद आज भी अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। मिट्टी के उत्पादों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय कारीगरों की मांग बढ़ाने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को प्रोत्साहित करने की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं। माटीकला महोत्सव जैसे आयोजन कारीगरों और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने, उत्पादों को पहचान दिलाने तथा पारंपरिक शिल्प के प्रति नई पीढ़ी का आकर्षण बढ़ाने में सहायक हैं। सरकार की पहल का उद्देश्य माटीकला को केवल परंपरा तक सीमित न रखते हुए इसे रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का मजबूत माध्यम बनाना है।

मंत्री राकेश सचान ने कहा कि माटीकला महोत्सव के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलता है। पिछले वर्ष महोत्सव में पांच करोड़ रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हुई थी। इस वर्ष भी कारीगरों के उत्साह और मिट्टी के उत्पादों के प्रति बढ़ते आकर्षण को देखते हुए बिक्री का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

माटीकला महोत्सव-2026 के शुभारंभ अवसर पर विद्युत चालित चाक के लिए लखनऊ के शिवा प्रजापति, राम खेलावन, नन्हा, अजय और गायत्री को लाभार्थी के रूप में सम्मानित किया गया। वहीं, पगमिल मशीन के लिए लखनऊ के रमेश कुमार और दिलीप कुमार को लाभान्वित किया गया। मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत लखनऊ की मुंशीगंज, डालीगंज निवासी श्रेया को ₹2 लाख के ऋण का चेक प्रदान किया गया।  

इस अवसर पर प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग तथा सार्वजनिक उद्यम विभाग अनिल सागर और सीईओ उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड शिशिर उपस्थित रहे।

जेवर एयरपोर्ट के पास विकसित होगी ‘सिंगापुर सिटी’, औद्योगिक साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान

- वित्त एवं औद्योगिक विकास मंत्री नन्दी ने सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ की बैठक

- इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एआई और ग्रीन एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा

लखनऊ: 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश में वैश्विक निवेश को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में बुधवार को वित्त एवं औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने होटल ताज पैलेस में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक सहयोग और आधुनिक औद्योगिक एवं शहरी विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के निकट ‘सिंगापुर सिटी’ और हाईटेक इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने की परिकल्पना पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेस्ट मैनेजमेंट और आधुनिक शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में सिंगापुर की कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रस्तावित ‘सिंगापुर सिटी’ को प्रदेश में सिंगापुर की कंपनियों के कारोबार विस्तार और औद्योगिक निवेश के लिए एक मजबूत आधार के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी मंथन किया गया।

बैठक में मंत्री नन्दी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रदेश की मजबूत औद्योगिक आधारभूत संरचना, बेहतर कनेक्टिविटी, कुशल मानव संसाधन और निवेश-अनुकूल नीतियां वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसर सृजित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि सिंगापुर ने तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक औद्योगिक व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं और निवेश के अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। ऐसे में सिंगापुर की तकनीकी विशेषज्ञता और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता का समन्वय दोनों पक्षों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। इससे निवेश विस्तार, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि को नई गति मिलेगी।

- जेवर एयरपोर्ट के आसपास निवेश की व्यापक संभावनाएं

मंत्री नन्दी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र ने निवेश के नए द्वार खोले हैं। इस क्षेत्र में आधुनिक औद्योगिक इकाइयों, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ‘सिंगापुर सिटी’ विकसित करने की परिकल्पना पर काम कर रही है, ताकि सिंगापुर की कंपनियों को उत्तर प्रदेश में कारोबार स्थापित करने और उसका विस्तार करने के लिए बेहतर अवसर एवं मजबूत आधार मिल सके। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग और आधुनिक लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, तकनीक आधारित उद्योगों के विस्तार से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तर प्रदेश की वैश्विक औद्योगिक पहचान और सुदृढ़ होगी।

बैठक में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के चेयरमैन मार्क ली, सीईओ कोक पिंग सून, एसबीएफ इंडिया बिजनेस कमेटी के चेयरमैन प्रसून मुखर्जी, यूनिवर्सल सक्सेस एंटरप्राइजेज के एमडी प्रशांत मुखर्जी, आईएचसीएल (टाटा ग्रुप) के एमडी एवं सीईओ पुनीत छतवाल और एग्रीकैप इंटरनेशनल के सीईओ विशाल विजय सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुमोदित कार्ययोजनाओं को लोकार्पण के लिए दिसम्बर तक तैयार की जाए : जयवीर सिंह

- पर्यटन मंत्री ने कहा- दीपोत्सव-2026 तथा देव दीपावली का आयोजन भव्य एवं अविस्मरणीय ढंग से किया जाए

- पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने की संस्कृति तथा पर्यटन विभाग की समीक्षा

लखनऊ: 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को पर्यटन भवन में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के कार्यकलापों की गहन समीक्षा करते हुए कार्यदायी संस्थाओं एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुमोदित कार्य योजनाओं को नवम्बर तक पूरा करते हुए दिसम्बर में लोकार्पण के लिए तैयार किया जाए। उन्होंने सभी क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारियों को राज्य योजना अंतर्गत सम्मिलित परियोजनाओं के आगणनों को तीन दिन के अंदर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। विलम्ब होने की दशा में जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्यवाही की जायेगी।

उन्होंने कार्ययोजना के अंतर्गत आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए जिलाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर उनका समाधान करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने 01 अप्रैल, 2026 से 26 अक्टूबर, 2026 तक कुल प्राप्त उपयोगिता प्रमाण पत्रों के विवरण की भी समीक्षा की। इसके अलावा पीपीपी मॉडल पर आवंटित संपत्तियों से लीज रेंट की वसूली की भी जानकारी ली। 

बैठक में बताया गया कि रामगढ़ ताल गोरखपुर तथा देवरिया एवं नैमिषारण्य सीतापुर में लीज रेंट बकाया नहीं है। इसके अलावा कालिंजर बांदा, राधाकुण्ड मथुरा, सुमेर सिंह किला इटावा, देवाशरीफ बाराबंकी, शिकोहाबाद फिरोजाबाद, गोपीगंज भदोही, मुंशीगंज अमेठी, कपिलवस्तु का कोई भी बकाया नहीं है। इसके अतिरिक्त विन्ध्याचल मिर्जापुर, भदोही झील महल रेस्टोरंेट मऊ तथा आगरा, मथुरा की सम्पत्तियों से लीज रेंट वसूला जा चुका है। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 तक जिला महोत्सव हेतु उपलब्ध कराई गयी धनराशि के सापेक्ष सम्पन्न कार्यक्रमों का विवरण एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र की समीक्षा की।

पर्यटन मंत्री ने दीपोत्सव-2026 में किये जाने वाले आयोजन एवं उनके सापेक्ष क्रियान्वयन की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिये कि दीपोत्सव-2026 को भव्य एवं अविस्मरणीय बनाने में कोई कोेताही न की जाए। इसके अतिरिक्त देव दीपावली वाराणसी-2026 के आयोजन की भी समीक्षा की। उन्होंने संग्रहालयों के क्यूरेशन कार्य, मूर्तियों के निर्माण एवं स्थापना तथा मा0 मंत्री परिषद के विचारार्थ लंबित प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए वेबसाइट पर क्यूआर कोड को लिंक कराने का कार्य निर्धारित समय में पूरा कर लिया जाए। उन्होंने प्राचीन, ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्व के स्थलों का शिलालेखन का कार्य, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, मान्यताओं एवं किवदंतियों को शामिल करते हुए किया जाए।

पर्यटन मंत्री ने पूर्व बैठकों में लिये गये निर्णय के सापेक्ष अनुपालन की भी समीक्षा की। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार के संभावित योजनाओं की स्थिति, राही पर्यटक आवास गृहों को प्रबंधकीय संविदा पर संचालन की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह चुनावी वर्ष है, इसलिए युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए सभी लंबित परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ पूरा करें।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पर्यटन संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात, निदेशक संस्कृति संजय कुमार सिंह, निदेशक एवं विशेष सचिव पर्यटन मृदुल चौधरी, विशेष सचिव संस्कृति श्रीमती दीपा रंजन, एमडी पर्यटन विकास निगम आशीष कुमार, पर्यटल सलाहकार जेपी सिंह के अलावा मंजू चौधरी, रेनू रंग भारती, तुहिन द्विवेदी एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे।

विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में ऊर्जा क्षेत्र की होगी अहम भूमिका: ए.के. शर्मा
- स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार, सस्ती बिजली और आधुनिक ग्रिड व्यवस्था पर जोर, ORF की अंतरराष्ट्रीय विषयवस्तु वाली बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए ऊर्जा मंत्री

लखनऊ, 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वच्छ, सतत और किफायती ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि देश के भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और विकास की गति बनाए रखने में ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और उपभोक्ताओं को भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना जरूरी है।
ऊर्जा मंत्री बुधवार को ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) की ओर से ‘Powering Viksit Bharat 2047: Subnational Pathways for India's Energy Transition’ विषय पर आयोजित बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, विद्युत आपूर्ति को विश्वसनीय एवं किफायती बनाने, बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
- सौर ऊर्जा के विस्तार और आधुनिक तकनीक पर जोर
मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने में ऊर्जा क्षेत्र की अहम भागीदारी है। उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने के साथ प्रदेशवासियों को सुलभ और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का विस्तार करना होगा। इसके साथ ही विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की जरूरत है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करके प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाया जा सकता है।
- राज्यों के बीच समन्वय से ऊर्जा संक्रमण को मिलेगी गति
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि देश में ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सफल प्रयोगों का आदान-प्रदान जरूरी है। प्रत्येक राज्य की ऊर्जा संबंधी जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप नीतियां तैयार करने से स्वच्छ ऊर्जा के विकास को गति मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वच्छ, सतत और किफायती ऊर्जा व्यवस्था के निर्माण के जरिए राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, आधुनिक विद्युत ढांचे और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था पर केंद्रित प्रयास प्रदेश को भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
गोमती नदी में छोड़ी गईं 50 हजार मछलियों की अंगुलिकाएं, जलीय जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
- उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य विकास मंत्री संजय निषाद की मौजूदगी में रिवर रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित, मछुआरों की आजीविका मजबूत करने पर जोर

लखनऊ, 28 अक्टूबर। गोमती नदी में मछलियों की प्राकृतिक आबादी बढ़ाने और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के उद्देश्य से बुधवार को रिवर रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। लक्ष्मण पार्क स्थित रिवर फ्रंट पर आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की मौजूदगी में 50 हजार मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को नदी में छोड़ा गया। इस पहल से नदी में मत्स्य संसाधनों के संवर्धन, स्थानीय मछली प्रजातियों के संरक्षण और मछुआरा समुदाय की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में प्रयास किए गए।
कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक पद्धति से तैयार 80 से 100 मिलीमीटर आकार की गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज अंगुलिकाओं का गोमती नदी में संचय किया गया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मछलियों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ जलीय जैव विविधता को संरक्षित करना और नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में योगदान देना है।
- नदी संरक्षण में अहम है रिवर रैंचिंग
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि नदियों की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने और मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने में रिवर रैंचिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जनभागीदारी के जरिए प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के सम्मान, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है। मछुआरा समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उनके पारंपरिक व्यवसाय को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदी में मछलियों की उपलब्धता बढ़ने से मत्स्य क्षेत्र के विकास और इससे जुड़े लोगों की आजीविका को भी सहारा मिल सकता है।
- मछुआरों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश सरकार नदियों में मत्स्य संपदा के संरक्षण, जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देने और मछुआरा समुदाय की आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। रिवर रैंचिंग प्राकृतिक जल संसाधनों में मछलियों की आबादी बनाए रखने और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल है।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में उपयुक्त प्रजातियों की गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ा जाता है। अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर इससे मछलियों की प्राकृतिक आबादी बढ़ने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहन मिलता है।
मंत्री ने कहा कि नदी और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर पारंपरिक मछुआरा परिवारों की आजीविका को मजबूत करना भी इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। स्थानीय और देशज मछली प्रजातियों के संरक्षण के साथ मत्स्य क्षेत्र में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के विशेष सचिव सुशील कुमार, उप निदेशक पुनीत कुमार, उप निदेशक उग्रसेन सिंह, उप निदेशक सृष्टि यादव सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
उप्र के ओशो अद्वैत ने मात्र 6 वर्ष की आयु मे सभी 12 ज्योतिर्लिंग और 4 धाम की यात्रा कर रचा कीर्तिमान

 ​लखनऊ। ​सुशांत गोल्फ सिटी (अंसल एपीआई), लखनऊ निवासी मात्र 6 वर्ष 1 महीने के बालक ओशो अद्वैत ने सनातन धर्म के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों और 4 धामों की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। माता तृप्ति पंडित और पिता संयोग कुमार राजपूत के सुपुत्र ओशो अद्वैत ने इतनी छोटी उम्र में यह कठिन और भक्तिमयी यात्रा पूरी कर सभी को अचंभित व प्रेरित किया है। ​ओशो अद्वैत की यह भक्ति यात्रा 06 मई 2023 को बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ शुरू हुई थी, जो 22 अक्टूबर 2026 को बाबा केदारनाथ के दर्शन के साथ संपन्न हुई।

- 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा का विवरण:

​काशी विश्वनाथ – 06 मई 2023

​ओंकारेश्वर – 16 नवंबर 2024

​महाकालेश्वर – 18 नवंबर 2024

​त्र्यंबकेश्वर – 11 मार्च 2025

​भीमाशंकर – 12 मार्च 2025

​घृष्णेश्वर – 13 मार्च 2025

​वैद्यनाथ – 08 जून 2025

​सोमनाथ – 24 जून 2025

​नागेश्वर – 26 जून 2025

​मल्लिकार्जुन – 11 अगस्त 2025

​रामेश्वरम – 13 अगस्त 2025

​केदारनाथ – 22 अक्टूबर 2026

- 4 धाम यात्रा का विवरण:

​द्वारका – 25 जून 2025

​रामेश्वरम – 13 अगस्त 2025

​जगन्नाथ पुरी – 28 अगस्त 2026

​बद्रीनाथ – 19 अक्टूबर 2026

उल्लेखनीय है कि ​इतनी अल्प आयु में दुर्गम पहाड़ियों और कठिन मौसम की परवाह किए बिना भगवान शिव और विष्णु के इन सभी परम पवित्र धामों के दर्शन करना ओशो अद्वैत की अद्भुत ईश्वर भक्ति और परिवार के दृढ संकल्प को दर्शाता है। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है।