श्रम संवाद 2026 का समापन- चारों श्रम संहिताओं के अनुपालन पर विस्तृत मार्गदर्शन, उद्योग जगत की शंकाओं का मौके पर समाधान
लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026।
श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार तथा श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में होटल ताज, लखनऊ में आयोजित दो-दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण एवं जागरूकता कार्यक्रम “श्रम संवाद 2026” के दूसरे दिन आज चारों श्रम संहिताओं के अनुपालन पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए।
मा0 राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश सरकार श्री मनोहर लाल मन्नू कोरी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मा. राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन श्री मनोहर लाल मन्नू कोरी ने कहा कि श्रमिक कल्याण और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस दोनों सरकार की प्राथमिकता हैं। श्रमिकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। नई श्रम संहिताओं से उद्योग जगत को अनेक समस्याओं से छुटकारा मिलेगा, उत्पादकता बढ़ेगी तथा भर्ती और वेतन में पारदर्शिता आएगी।
उन्होंने बताया कि श्रम कल्याण के कई क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है, और निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय व पेंशन जैसी व्यवस्थाएँ संचालित हैं। कार्यक्रम के लिए लखनऊ को चुनने हेतु उन्होंने श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का आभार व्यक्त किया।
प्रधान श्रम एवं रोज़गार सलाहकार आलोक चन्द्र ने कहा कि श्रम कानूनों का लगभग 90 प्रतिशत क्रियान्वयन राज्य स्तर पर होता है, इसलिए केंद्र व राज्य को साथ मिलकर काम करना होगा और प्रवर्तन एजेंसियों, उद्योग, एचआर व विधिक सलाहकारों में स्पष्टता ज़रूरी है।
निदेशक, श्रम सुधार, डॉ. पी.के. जेना ने बताया कि श्रम संवाद देश के 116 औद्योगिक जनपदों में आयोजित किया जाना है; लखनऊ का यह 17वाँ आयोजन है। 29 श्रम कानूनों को समाहित कर बनी चारों संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से पूरे देश में लागू हैं। उन्होंने वैधानिक राष्ट्रीय फ्लोर वेज, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन, वेतन की एकल परिभाषा, गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिकों को पहली बार कानूनी पहचान व सामाजिक सुरक्षा, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को एक वर्ष पर ग्रेच्युटी, आवागमन के दौरान दुर्घटना पर मुआवज़ा, रजिस्टर 84 से घटकर 8 किये जाने और रिटर्न 31 से घटकर एक किये जाने, एकल पंजीकरण व एकल लाइसेंस, नियुक्ति पत्र अनिवार्य, तथा छंटनी व स्थायी आदेश की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 किये जाने तथा अब निरीक्षक “इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर” होंगे, कार्यवाही से पहले 30 दिन का सुधार नोटिस मिलेगा और अपराधों के शमन (कंपाउंडिंग) की व्यवस्था पहली बार की गई है।
वेतन संहिता पर निदेशक, मंत्रालय सुश्री ऋचा शर्मा ने ओवरटाइम पर दोगुनी दर, मासिक वेतन अगले माह की 7 तारीख तक, तथा सेवा समाप्ति या त्यागपत्र पर अंतिम वेतन दो दिन में देने के प्रावधान बताए। उन्होंने राज्य से बोनस संबंधी अधिसूचनाएँ शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया।
अपर श्रमायुक्त, नोएडा श्री राकेश द्विवेदी ने प्रदेश की वेतन नियमावली की जानकारी दी, जिसमें वेतन दरें 8 घंटे व 26 दिन के आधार पर, न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण 5 वर्ष में, महँगाई भत्ता वर्ष में दो बार (अप्रैल व अक्टूबर), नॉमिनी की नई व्यवस्था तथा सभी अभिलेखों के लिए एकल रजिस्टर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बकाया के दावों में अब यह साबित करने का दायित्व नियोक्ता पर है कि भुगतान हो चुका है।
औद्योगिक संबंध संहिता पर डॉ. आर.जी. मीणा ने बताया कि हड़ताल नोटिस पर समझौता वार्ता अब सभी प्रतिष्ठानों में अनिवार्य है, मॉडल स्थायी आदेश अपनाने पर केवल सूचना देनी होगी, और प्रमाणन 60 दिन में न होने पर उसे प्रमाणित माना जाएगा। छंटनी किए गए श्रमिकों के लिए 15 दिन के वेतन के बराबर री-स्किलिंग फंड की व्यवस्था है। अपर श्रमायुक्त, लखनऊ सुश्री कल्पना श्रीवास्तव ने वार्ताकार यूनियन व वार्ता परिषद की मान्यता, शिकायत निवारण समिति और 300 से अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में ले-ऑफ, छंटनी व बंदी के लिए अनुमति के प्रावधान समझाए।
सामाजिक सुरक्षा संहिता पर उप श्रमायुक्त (मुख्यालय) श्री अजय मिश्रा ने बताया कि प्रदेश की नियमावली 27 अगस्त से लागू है। इसके अंतर्गत ग्रेच्युटी का भुगतान 30 दिन में करना होगा, 26 सप्ताह का मातृत्व लाभ व 3,500 चिकित्सा बोनस मिलेगा, आवागमन दुर्घटना पर मुआवज़ा एक माह में देना होगा, और अभिलेख 5 वर्ष तक सुरक्षित रखने होंगे।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता पर कारखाना विभाग के बृजेश सिंह ने 7 दिन में डीम्ड पंजीकरण, निःशुल्क सुरक्षा उपकरण, 100 से अधिक महिला कर्मियों पर महिला कल्याण अधिकारी, प्रतिदिन 8 व प्रति सप्ताह 48 घंटे की कार्य-सीमा, तथा जोखिम-आधारित निरीक्षण की जानकारी दी, जिसमें कम जोखिम वाली इकाइयों के लिए स्व-प्रमाणन है। श्री राकेश द्विवेदी ने बताया कि ठेकेदार को लाइसेंस तभी लेना होगा जब वह 50 से अधिक ठेका श्रमिक रखे, और पूरे देश या एक राज्य के लिए एकल लाइसेंस लिया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना पर सुश्री ऋचा शर्मा एवं ईपीएफओ के श्री उदय बक्शी ने बताया कि लगभग रू0 1 लाख करोड़ की यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक लागू है और इसका लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक रोज़गार है। पहली बार नौकरी पाने वालों को 15,000 तक और नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी 3,000 प्रतिमाह तक प्रोत्साहन मिलता है। देशभर में लगभग 5.81 लाख प्रतिष्ठान पंजीकृत हो चुके हैं और 4,000 करोड़ से अधिक वितरित हुए हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश में लगभग 174 करोड़ शामिल हैं। उन्होंने उद्योगों से लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने में सहयोग का आह्वान किया। सत्र में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना पर भी जानकारी दी गई।
बाल श्रम एवं बंधुआ श्रम सत्र में राज्य समन्वयक श्री सैयद रिज़वान अली ने बताया कि 14 वर्ष तक के बच्चों से काम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है और 18 वर्ष तक विनियमित है। पहली बार अपराध पर 6 माह से 2 वर्ष तक की सज़ा और 20,000 से 50,000 तक जुर्माना है, और सभी अपराध संज्ञेय हैं। बाल श्रम की सूचना पहचान बताए बिना ऑनलाइन पोर्टल पर दी जा सकती है। बंधुआ श्रम के लिए हर जनपद और तहसील में सतर्कता समितियाँ गठित हैं।
सेवानिवृत्त आईएएस श्री अशोक कुमार ने अपने जनपद का अनुभव साझा किया, जहाँ समुदाय, शिक्षकों, अभिभावकों और नियोक्ताओं की भागीदारी से 25 वर्षों से बाल श्रम शून्य है। उन्होंने बाल श्रम उन्मूलन के लिए “होल ऑफ गवर्नमेंट” दृष्टिकोण पर बल दिया और मा. मुख्यमंत्री के उत्तर प्रदेश को 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प की सराहना की।
प्रश्न सत्र में उद्योगों के प्रतिनिधियों ने निरंतर प्रक्रिया वाले उद्योगों में कार्य-घंटे, फिक्स्ड टर्म से स्थायी हुए कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, अनेक स्थलों पर पंजीकरण और ठेकेदारों की प्रतिभूति राशि जैसे प्रश्न रखे, जिनका अधिकारियों ने समाधान किया।
अन्त में विशेष सचिव, श्रम श्री कुणाल सिल्कू ने दोनो दिवस में उपस्थित रहे सभी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारीगण व उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारीगण व श्रम विभाग के सभी अधिकारीगण सहित उपस्थित सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में सचिव, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड सुश्री पूजा अग्रवाल, कल्याण आयुक्त श्री प्रद्युम्न कुमार राणा सहित केंद्र व राज्य के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए उद्योग प्रतिनिधि, एचआर प्रोफेशनल, विधिक सलाहकार और सिविल सोसाइटी के सदस्य सहित लखनऊ क्षेत्र लखनऊ की अपर श्रमायुक्त श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, नोएडा के अपर श्रमायुक्त श्री राकेश द्विवेदी, मुख्यालय कानपुर के अपर श्रमायुक्त श्री पी0के0 सिंह, उप श्रमायुक्त श्री अजय मिश्रा, उप श्रमायुक्त ए0के0 सिंह, उप श्रमायुक्त गोविन्द यादव, श्रम विभाग के क्षेत्रीय उप श्रमायुक्त
व जनपदों से सहायक श्रमायुक्त व जनपदों से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों सहित लगभग 300 प्रतिभागियों द्वारा किया गया।
10 hours ago
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