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एक स्नातक तथा पांच शिक्षक क्षेत्र के उम्मीदवार विजयी घोषित

लखनऊ, 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 05 स्नातक व 06 शिक्षक द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत अभी तक प्राप्त सूचना के अनुसार 01 स्नातक तथा 05 शिक्षक क्षेत्र के उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया गया है।

घोषित परिणाम निम्नवत हैं- 

1. मेरठ स्नातक क्षेत्र- दिनेश कुमार गोयल (भारतीय जनता पार्टी)

2. लखनऊ शिक्षक क्षेत्र- उमेश द्विवेदी (भारतीय जनता पार्टी) 

3. वाराणसी शिक्षक क्षेत्र- लाल बिहारी यादव (समाजवादी पार्टी) 

4. आगरा शिक्षक क्षेत्र- डॉo आकाश अग्रवाल (समाजवादी पार्टी) 

5. मेरठ शिक्षक क्षेत्र- श्रीचन्द शर्मा (भारतीय जनता पार्टी) 

6. बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र- डाo हरि सिंह ढिल्लो (भारतीय जनता पार्टी)

एक सप्ताह में मान्यता प्राप्त पत्रकारों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करें: सूचना निदेशक

- AB-PMJAY के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु पोर्टल को Go-Live करने की सहमति

- सूचना निदेशक विशाल सिंह की अध्यक्षता में AB-PMJAY पोर्टल संचालन का प्रशिक्षण सम्पन्न

लखनऊ। सूचना निदेशालय के सभागार में सूचना निदेशक, विशाल सिंह की अध्यक्षता में स्टेट हेल्थ एजेंसी, आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों एवं उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु विकसित किए गए नवीन पोर्टल के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। 

सूचना निदेशक सिंह द्वारा पोर्टल को Go-Live किये जाने की सहमति प्रदान की गई, तत्पश्चात स्टेट हेल्थ एजेंसी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अधिकारियों द्वारा पोर्टल के Process Flow का प्रस्तुतिकरण किया गया। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को आयुष्मान कार्ड जारी करने की प्रक्रिया, आवेदन, सत्यापन और कार्ड डाउनलोड करने की पूरी प्रक्रिया को लाइव डेमो के माध्यम से समझाया गया। इस प्रक्रिया में मुख्यालय एवं प्रदेश के समस्त जिला सूचना कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। 

सूचना निदेशक ने बताया कि पोर्टल को पत्रकारों के लिए सरल एवं सुगम बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक मान्यता प्राप्त पत्रकार बंधु व उनके परिजनों को इसका त्वरित लाभ मिल सकें। उन्होंने प्रदेश के समस्त जनपदीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे पत्रकार, जो मान्यता प्राप्त है, उनके व उनके परिजनों के आयुष्मान कार्ड अभी तक नहीं बने है, एक सप्ताह के अंदर समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करे। साथ ही मुख्यालय को भी अवगत कराए, ताकि मुख्यालय स्तर से अग्रेतर कार्यवाई त्वरित गति से सुनिश्चित करायी जा सके। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही न बरती जाएं।

बैठक में वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक सतीश चन्द्र भारती, डॉ. जितेन्द्र प्रताप सिंह, अमित कुमार यादव, महेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी/ कर्मचारी उपस्थित रहे।

श्रम संवाद 2026 का समापन- चारों श्रम संहिताओं के अनुपालन पर विस्तृत मार्गदर्शन, उद्योग जगत की शंकाओं का मौके पर समाधान

लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026।
श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार तथा श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में होटल ताज, लखनऊ में आयोजित दो-दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण एवं जागरूकता कार्यक्रम “श्रम संवाद 2026” के दूसरे दिन आज चारों श्रम संहिताओं के अनुपालन पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए।
मा0 राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश सरकार श्री मनोहर लाल मन्नू कोरी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मा. राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन श्री मनोहर लाल मन्नू कोरी ने कहा कि श्रमिक कल्याण और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस दोनों सरकार की प्राथमिकता हैं। श्रमिकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। नई श्रम संहिताओं से उद्योग जगत को अनेक समस्याओं से छुटकारा मिलेगा, उत्पादकता बढ़ेगी तथा भर्ती और वेतन में पारदर्शिता आएगी।
उन्होंने बताया कि श्रम कल्याण के कई क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है, और निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय व पेंशन जैसी व्यवस्थाएँ संचालित हैं। कार्यक्रम के लिए लखनऊ को चुनने हेतु उन्होंने श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का आभार व्यक्त किया।
प्रधान श्रम एवं रोज़गार सलाहकार आलोक चन्द्र ने कहा कि श्रम कानूनों का लगभग 90 प्रतिशत क्रियान्वयन राज्य स्तर पर होता है, इसलिए केंद्र व राज्य को साथ मिलकर काम करना होगा और प्रवर्तन एजेंसियों, उद्योग, एचआर व विधिक सलाहकारों में स्पष्टता ज़रूरी है।
निदेशक, श्रम सुधार, डॉ. पी.के. जेना ने बताया कि श्रम संवाद देश के 116 औद्योगिक जनपदों में आयोजित किया जाना है; लखनऊ का यह 17वाँ आयोजन है। 29 श्रम कानूनों को समाहित कर बनी चारों संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से पूरे देश में लागू हैं। उन्होंने वैधानिक राष्ट्रीय फ्लोर वेज, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन, वेतन की एकल परिभाषा, गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिकों को पहली बार कानूनी पहचान व सामाजिक सुरक्षा, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को एक वर्ष पर ग्रेच्युटी, आवागमन के दौरान दुर्घटना पर मुआवज़ा, रजिस्टर 84 से घटकर 8 किये जाने और रिटर्न 31 से घटकर एक किये जाने, एकल पंजीकरण व एकल लाइसेंस, नियुक्ति पत्र अनिवार्य, तथा छंटनी व स्थायी आदेश की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 किये जाने तथा अब निरीक्षक “इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर” होंगे, कार्यवाही से पहले 30 दिन का सुधार नोटिस मिलेगा और अपराधों के शमन (कंपाउंडिंग) की व्यवस्था पहली बार की गई है।
वेतन संहिता पर निदेशक, मंत्रालय सुश्री ऋचा शर्मा ने ओवरटाइम पर दोगुनी दर, मासिक वेतन अगले माह की 7 तारीख तक, तथा सेवा समाप्ति या त्यागपत्र पर अंतिम वेतन दो दिन में देने के प्रावधान बताए। उन्होंने राज्य से बोनस संबंधी अधिसूचनाएँ शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया।
अपर श्रमायुक्त, नोएडा श्री राकेश द्विवेदी ने प्रदेश की वेतन नियमावली की जानकारी दी, जिसमें वेतन दरें 8 घंटे व 26 दिन के आधार पर, न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण 5 वर्ष में, महँगाई भत्ता वर्ष में दो बार (अप्रैल व अक्टूबर), नॉमिनी की नई व्यवस्था तथा सभी अभिलेखों के लिए एकल रजिस्टर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बकाया के दावों में अब यह साबित करने का दायित्व नियोक्ता पर है कि भुगतान हो चुका है।
औद्योगिक संबंध संहिता पर डॉ. आर.जी. मीणा ने बताया कि हड़ताल नोटिस पर समझौता वार्ता अब सभी प्रतिष्ठानों में अनिवार्य है, मॉडल स्थायी आदेश अपनाने पर केवल सूचना देनी होगी, और प्रमाणन 60 दिन में न होने पर उसे प्रमाणित माना जाएगा। छंटनी किए गए श्रमिकों के लिए 15 दिन के वेतन के बराबर री-स्किलिंग फंड की व्यवस्था है। अपर श्रमायुक्त, लखनऊ सुश्री कल्पना श्रीवास्तव ने वार्ताकार यूनियन व वार्ता परिषद की मान्यता, शिकायत निवारण समिति और 300 से अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में ले-ऑफ, छंटनी व बंदी के लिए अनुमति के प्रावधान समझाए।
सामाजिक सुरक्षा संहिता पर उप श्रमायुक्त (मुख्यालय) श्री अजय मिश्रा ने बताया कि प्रदेश की नियमावली 27 अगस्त से लागू है। इसके अंतर्गत ग्रेच्युटी का भुगतान 30 दिन में करना होगा, 26 सप्ताह का मातृत्व लाभ व 3,500 चिकित्सा बोनस मिलेगा, आवागमन दुर्घटना पर मुआवज़ा एक माह में देना होगा, और अभिलेख 5 वर्ष तक सुरक्षित रखने होंगे।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता पर कारखाना विभाग के बृजेश सिंह ने 7 दिन में डीम्ड पंजीकरण, निःशुल्क सुरक्षा उपकरण, 100 से अधिक महिला कर्मियों पर महिला कल्याण अधिकारी, प्रतिदिन 8 व प्रति सप्ताह 48 घंटे की कार्य-सीमा, तथा जोखिम-आधारित निरीक्षण की जानकारी दी, जिसमें कम जोखिम वाली इकाइयों के लिए स्व-प्रमाणन है। श्री राकेश द्विवेदी ने बताया कि ठेकेदार को लाइसेंस तभी लेना होगा जब वह 50 से अधिक ठेका श्रमिक रखे, और पूरे देश या एक राज्य के लिए एकल लाइसेंस लिया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना पर सुश्री ऋचा शर्मा एवं ईपीएफओ के श्री उदय बक्शी ने बताया कि लगभग रू0 1 लाख करोड़ की यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक लागू है और इसका लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक रोज़गार है। पहली बार नौकरी पाने वालों को 15,000 तक और नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी 3,000 प्रतिमाह तक प्रोत्साहन मिलता है। देशभर में लगभग 5.81 लाख प्रतिष्ठान पंजीकृत हो चुके हैं और 4,000 करोड़ से अधिक वितरित हुए हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश में लगभग 174 करोड़ शामिल हैं। उन्होंने उद्योगों से लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने में सहयोग का आह्वान किया। सत्र में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना पर भी जानकारी दी गई।
बाल श्रम एवं बंधुआ श्रम सत्र में राज्य समन्वयक श्री सैयद रिज़वान अली ने बताया कि 14 वर्ष तक के बच्चों से काम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है और 18 वर्ष तक विनियमित है। पहली बार अपराध पर 6 माह से 2 वर्ष तक की सज़ा और 20,000 से 50,000 तक जुर्माना है, और सभी अपराध संज्ञेय हैं। बाल श्रम की सूचना पहचान बताए बिना ऑनलाइन पोर्टल पर दी जा सकती है। बंधुआ श्रम के लिए हर जनपद और तहसील में सतर्कता समितियाँ गठित हैं।
सेवानिवृत्त आईएएस श्री अशोक कुमार ने अपने जनपद का अनुभव साझा किया, जहाँ समुदाय, शिक्षकों, अभिभावकों और नियोक्ताओं की भागीदारी से 25 वर्षों से बाल श्रम शून्य है। उन्होंने बाल श्रम उन्मूलन के लिए “होल ऑफ गवर्नमेंट” दृष्टिकोण पर बल दिया और मा. मुख्यमंत्री के उत्तर प्रदेश को 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प की सराहना की।
प्रश्न सत्र में उद्योगों के प्रतिनिधियों ने निरंतर प्रक्रिया वाले उद्योगों में कार्य-घंटे, फिक्स्ड टर्म से स्थायी हुए कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, अनेक स्थलों पर पंजीकरण और ठेकेदारों की प्रतिभूति राशि जैसे प्रश्न रखे, जिनका अधिकारियों ने समाधान किया।
अन्त में विशेष सचिव, श्रम श्री कुणाल सिल्कू ने दोनो दिवस में उपस्थित रहे सभी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारीगण व उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारीगण व श्रम विभाग के सभी अधिकारीगण सहित उपस्थित सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में सचिव, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड सुश्री पूजा अग्रवाल, कल्याण आयुक्त श्री प्रद्युम्न कुमार राणा सहित केंद्र व राज्य के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए उद्योग प्रतिनिधि, एचआर प्रोफेशनल, विधिक सलाहकार और सिविल सोसाइटी के सदस्य सहित लखनऊ क्षेत्र लखनऊ की अपर श्रमायुक्त श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, नोएडा के अपर श्रमायुक्त श्री राकेश द्विवेदी, मुख्यालय कानपुर के अपर श्रमायुक्त श्री पी0के0 सिंह, उप श्रमायुक्त श्री अजय मिश्रा, उप श्रमायुक्त ए0के0 सिंह, उप श्रमायुक्त गोविन्द यादव, श्रम विभाग के क्षेत्रीय उप श्रमायुक्त
व जनपदों से सहायक श्रमायुक्त व जनपदों से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों सहित लगभग 300 प्रतिभागियों द्वारा किया गया।
कभी बेटियों का स्कूल जाना था मुश्किल, आज रात दो बजे भी बेखौफ लौटती हैं घर: मुख्यमंत्री योगी
- एक मीडिया संस्थान के यूथ आइकॉन कॉन्क्लेव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित
- पहले पहचान छिपाने को मजबूर थे यूपी के लोग, सुरक्षा के संकट से जूझते थे परिवार: मुख्यमंत्री योगी
- एचसीएल में नाइट शिफ्ट करने वाली बेटियां बाराबंकी, उन्नाव और सीतापुर से बेफिक्र होकर आती-जाती हैं
- आठ फ्रेम में सुनाई बदले उत्तर प्रदेश की कहानी, सुरक्षा से रोजगार और तकनीक तक के बदलाव गिनाए
- छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियों का लक्ष्य, अगले सप्ताह साढ़े चार हजार दारोगाओं को नियुक्ति पत्र

लखनऊ, 27 अक्टूबर। कभी उत्तर प्रदेश में बेटियों का स्कूल जाना भी मुश्किल था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों में भेजने को मजबूर थे। आज वही बेटियां रात दो बजे भी अपनी ड्यूटी पूरी करके बेखौफ घर लौट रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राजधानी में एक मीडिया संस्थान के यूथ आइकॉन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए प्रदेश की कानून व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के सामने दो बड़े संकट थे। पहला पहचान का और दूसरा सुरक्षा का। प्रदेश के बाहर जाने पर लोग अपनी पहचान छिपाने को मजबूर होते थे और प्रदेश के भीतर सुरक्षा की चिंता सताती थी। आज उत्तर प्रदेश की पहचान उसके प्रतिभाशाली युवाओं, उद्योगों और उपलब्धियों से हो रही है। कार्यक्रम में खेल, उद्यमिता, कला, संस्कृति, सामाजिक कार्य और डिजिटल क्रिएशन सहित विभिन्न क्षेत्रों के 37 यूथ आइकॉन को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि इनकी सफलता लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया पर प्रचलित 'बिफोर एंड आफ्टर' रील का उदाहरण देते हुए साढ़े नौ वर्ष में बदले उत्तर प्रदेश की कहानी आठ फ्रेम में सुनाई। पहले फ्रेम में प्रदेश की पहचान और कानून व्यवस्था, दूसरे में सरकारी भर्तियों में सिफारिश के स्थान पर योग्यता को अवसर, तीसरे में खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां और चौथे में युवाओं के रोजगार देने वाला बनने की बात रखी। पांचवें फ्रेम में आधुनिक तकनीक, छठे में अर्थव्यवस्था, निवेश और बुनियादी ढांचे, सातवें में आस्था और पर्यटन से रोजगार तथा आठवें फ्रेम में विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की यह यात्रा युवाओं के विश्वास और अवसरों में आए बदलाव की कहानी भी है।
-  रात दो बजे भी बेखौफ घर लौटती हैं बेटियां
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बेटियों की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित रहते थे। साधन संपन्न परिवार बेटियों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में भेजते थे, जबकि गरीब परिवारों की बेटियों के लिए स्कूल जाना भी चुनौती था।
उन्होंने लखनऊ स्थित एचसीएल की महिला कर्मचारियों का उदाहरण दिया। बताया कि बाराबंकी, उन्नाव और सीतापुर से महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम करने आती हैं। हाल ही में उनसे बातचीत के दौरान पूछा था कि रात में घर लौटने में परेशानी तो नहीं होती। महिलाओं ने बताया कि रात दो बजे भी ड्यूटी समाप्त होने पर वे बेखौफ घर लौटती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे कानून व्यवस्था में आए बदलाव का उदाहरण बताया।
-  माफिया मिट्टी में मिल चुके, अब अपराधी बेच रहे केला
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफिया का वर्चस्व था। अब माफिया मिट्टी में मिल चुके हैं और अपराधी केला बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया जैसी स्थिति थी, जबकि आज वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से हर जिले के विशिष्ट उत्पाद को पहचान मिल रही है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनसे 3.25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। सरकार पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर भी उपलब्ध करा रही है।
-  बिना परीक्षा दिए मिल गया था नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकार बनने के बाद एक ऐसी नियुक्ति का मामला सामने आया, जिसमें संबंधित व्यक्ति ने न आवेदन किया था और न परीक्षा दी थी, फिर भी उसे नियुक्ति पत्र मिल गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले नियुक्तियों में सिफारिश और लेनदेन हावी था। अब योग्यता के आधार पर चयन हो रहा है। साढ़े नौ वर्ष में साढ़े नौ लाख सरकारी नियुक्तियां की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। अगले सप्ताह लगभग साढ़े चार हजार सब इंस्पेक्टरों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। 32 हजार से अधिक पुलिस कांस्टेबलों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने होमगार्ड तथा विभिन्न भर्ती आयोगों के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों का भी उल्लेख किया।
-  1400 खिलाड़ियों को मिली सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने खिलाड़ियों को पदक के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति देने की व्यवस्था की है। अब तक लगभग 1400 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने पारुल चौधरी, राजकुमार पाल और ललित उपाध्याय का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रदेश में सम्मान और रोजगार दोनों मिल रहे हैं। सरकार का संदेश है कि देश के लिए पदक लाओ और उत्तर प्रदेश में पद पाओ।
-  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना बनी सरकारी शार्क टैंक
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब 25 हजार हो गई है। एक हजार करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड बनाया गया है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत प्रतिवर्ष एक लाख युवाओं को बिना ब्याज और बिना गारंटी ऋण देने की व्यवस्था है। इसे सरकार का अपना 'शार्क टैंक' बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें युवाओं को अपनी इक्विटी भी नहीं देनी पड़ती।
उन्होंने बताया कि एचसीएल के लखनऊ परिसर में कर्मचारियों की संख्या लगभग सौ से बढ़कर 12,500 हो गई है। कंपनी ने छह हजार और युवाओं की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया है। ब्रह्मोस परियोजना में प्रदेश के 500 युवाओं को रोजगार मिला है। मिसाइलों की बिक्री से प्रदेश सरकार को 35 करोड़ रुपये का जीएसटी भी प्राप्त हुआ है।
-  साइबर सुरक्षा के नए मुख्यालय को मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि मंगलवार को कैबिनेट ने साइबर सुरक्षा के नए मुख्यालय को मंजूरी दी है। लखनऊ में एआई सिटी, कानपुर में ड्रोन तकनीक और नोएडा में रोबोटिक्स के क्षेत्र में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि एआई निर्णय दे सकता है, लेकिन निर्णायक मनुष्य को ही बनना होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था 12 लाख करोड़ से बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये होने और 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से रोजगार के नए अवसर बने हैं। आस्था और पर्यटन भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं।
-  2047 के भारत का नेतृत्व करेंगे आज के युवा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब आज के युवा अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व कर रहे होंगे। इसलिए उन्हें अभी से अपनी प्रतिभा और परिश्रम के माध्यम से भविष्य की तैयारी करनी होगी। उन्होंने युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना और मतदान करना केवल अधिकार नहीं, लोकतांत्रिक कर्तव्य भी है। युवाओं को अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।
-  37 यूथ आइकॉन का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में मीडिया संस्थान की ओर से खेल, उद्यमिता, कला, संस्कृति, सामाजिक कार्य और डिजिटल क्रिएशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले 37 यूथ आइकॉन को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।
खाद्य सुरक्षा के साथ फसल विविधीकरण व प्राकृतिक खेती को अपनाएं किसान: सूर्य प्रताप शाही
-  रबी सत्र में 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज अनुदान पर और 10 लाख किसानों को मिलेंगे निःशुल्क दलहन-तिलहन मिनीकिट
-  देश के 11 प्रतिशत भू-भाग पर 22 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन कर रहा यूपी, 196 प्रतिशत फसल सघनता के साथ बना देश का सिरमौर
-  पराली जलाने से बचें, 600 सीबीजी प्लांट से बनाएं आमदनी का जरिया; उत्कृष्ट वैज्ञानिक, 9 केवीके व 7 प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित

लखनऊ, 27 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि देश की मात्र 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर उत्तर प्रदेश लगभग 22 प्रतिशत खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन कर राष्ट्र के अन्न भंडार को सुदृढ़ता प्रदान कर रहा है। प्रदेश में फसल सघनता (क्रॉपिंग इंटेंसिटी) 196 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो वैश्विक स्तर की सघन कृषि पद्धतियों में शुमार है। कृषि मंत्री मंगलवार को आईसीएआर-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), लखनऊ के सभागार में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के 37वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी "उत्पादकता से आगे: उत्तर प्रदेश की कृषि के भविष्य की पुनर्कल्पना" के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
श्री शाही ने कहा कि कृषि एक सतत प्रवाहमान क्षेत्र है, जिसमें विकास की असीम संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की आबादी 42 करोड़ से बढ़कर 140 करोड़ हो चुकी है और भारत आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में 80 करोड़ नागरिकों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने में पूर्णतः सक्षम है। ऐसे में राष्ट्रीय व वैश्विक खाद्य सुरक्षा को अक्षुण्ण रखते हुए उत्पादन और उत्पादकता को निरंतर बढ़ाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के प्रभावी प्रयासों से राज्य का 80 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित हो चुका है तथा नहरों के संजाल से खरीफ के साथ-साथ रबी व जायद फसलों के लिए भी किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
किसानों की उत्पादन लागत घटाने और आमदनी में वृद्धि सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि चालू रबी सत्र में 12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को भारी अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के 4 लाख क्विंटल के सापेक्ष तीन गुना रिकॉर्ड वृद्धि है। इसके साथ ही गेहूं और गन्ने की पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करने तथा फसल विविधीकरण को गति देने के उद्देश्य से 10 लाख किसानों को दलहन व तिलहन के उन्नत बीज मिनीकिट निःशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से बाजार मांग और उच्च मूल्य आधारित फसलों (वैल्यू-बेस्ड एग्रीकल्चर) पर अनुसंधान केंद्रित करने का आह्वान किया, जिससे देश दलहन और खाद्य तेलों के उत्पादन में पूर्णतः आत्मनिर्भर बन सके।
मौसम की अनिश्चितताओं और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री ने उपकार और कृषि विश्वविद्यालयों को कम अवधि में तैयार होने वाली प्रजातियों तथा आपातकालीन फसल प्रबंधन तकनीकों को त्वरित गति से किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। मृदा में घटते ऑर्गेनिक कार्बन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने गोवंश आधारित गोबर, गोमूत्र और बायोमास आधारित प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप देने पर विशेष बल दिया।
धान कटाई के वर्तमान सत्र को दृष्टिगत रखते हुए उन्होंने किसानों से पराली न जलाने की अपील की और बताया कि प्रदेश में लगभग 600 कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इससे पराली और कृषि अवशेषों का सदुपयोग बायो-सीएनजी, कम्पोस्ट और मल्चिंग में संभव होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों को अतिरिक्त आय का साधन भी प्राप्त होगा। उन्होंने कृषि प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन में महिला किसानों तथा ग्रामीण युवाओं की सहभागिता बढ़ाने का भी आह्वान किया।
समारोह के दौरान कृषि अनुसंधान, तकनीकी प्रसार और नवाचारी कृषि पद्धतियों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, संस्थानों और कृषकों को कृषि मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट वैज्ञानिकों की श्रेणी में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के प्रसार निदेशक डॉ. राम बटुक सिंह तथा बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशक डॉ. एन. के. बाजपेई को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के लिए 9 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को सम्मानित किया गया, जिनमें मेरठ केवीके के अधीन रामपुर एवं हस्तिनापुर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अधीन बरकछा (मिर्ज़ापुर), बांदा कृषि विश्वविद्यालय के अधीन बांदा, महोबा एवं झांसी, चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के अधीन कानपुर देहात एवं फतेहपुर तथा आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अधीन जौनपुर (प्रथम) केवीके शामिल रहे।
फसल विविधीकरण व नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 7 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इनमें काला नमक धान उत्पादन के लिए सिद्धार्थ नगर के सुधीश नाथ शुक्ला, सीधी बिजाई विधि के लिए गाज़ीपुर के अमरजीत सिंह, मक्का बीज उत्पादन के लिए बहराइच के बुधई, ड्रैगन फ्रूट एवं स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए मिर्ज़ापुर की श्रीमती वंदना सिंह, संरक्षित खेती एवं मत्स्य पालन के लिए सहारनपुर के राजेंद्र पुंडीर, अपराजिता की औषधीय खेती के लिए सीतापुर की श्रीमती सीता देवी तथा संकर मक्का बीज उत्पादन के लिए बहराइच के जियाउल हक शामिल हैं। इसके साथ ही उपकार के वैज्ञानिक डॉ. रिन्नी सिंह (वैज्ञानिक अधिकारी - पादप प्रजनन एवं जैव प्रौद्योगिकी), डॉ. हिमांशु तिवारी (तकनीकी सचिव, डीजी उपकार) और प्रेमचंद चौरसिया (वैज्ञानिक अधिकारी - एग्रोफोरेस्ट्री) को भी उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता उपकार के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, बीज प्रमाणीकरण संस्था के उपाध्यक्ष राधेश्याम सिंह, कृषि एवं अनुसंधान के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शनमुगा सुंदरम, उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय कुमार, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील, विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, वैज्ञानिक, प्रसार कार्यकर्ता, प्रगतिशील किसान और एफपीओ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
न्यू स्टार्ट के बाद परमाणु हथियारों की नई होड़, दुनिया पर बढ़ता परमाणु खतरा

- अमरेश द्विवेदी

हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के 81 साल बाद दुनिया एक बार फिर परमाणु खतरे के दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। परमाणु हथियारों पर नियंत्रण के लिए बनाए गए कई महत्वपूर्ण समझौते या तो समाप्त हो चुके हैं या कमजोर पड़ गए हैं। इसी बीच अमेरिका, रूस और चीन समेत प्रमुख परमाणु शक्तियां अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण और विस्तार में जुटी हैं। इससे परमाणु हथियारों की नई होड़ और गलतफहमी के कारण परमाणु संघर्ष का जोखिम बढ़ने की चिंता सामने आ रही है।

जनवरी में ‘बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ ने अपनी ‘डूम्सडे क्लॉक’ को आधी रात से 85 सेकंड पहले पर रखा था। यह 1947 में घड़ी बनाए जाने के बाद से मानवता के संभावित विनाश के सबसे करीब का संकेत था। यह घड़ी किसी वास्तविक समय की गणना नहीं बल्कि परमाणु हथियारों, जलवायु परिवर्तन और अन्य वैश्विक जोखिमों के आधार पर वैज्ञानिकों की चेतावनी का प्रतीक है। इसका संदेश साफ था कि दुनिया को परमाणु खतरे को सामान्य मानने से बचना होगा।

इस चिंता को और बढ़ाने वाली सबसे बड़ी घटनाओं में से एक अमेरिका और रूस के बीच ‘न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (न्यू स्टार्ट) 5 फरवरी, 2026 को समाप्त हो गई है। यह अमेरिका और रूस के रणनीतिक परमाणु हथियारों पर सीमा लगाने वाला आखिरी प्रमुख द्विपक्षीय समझौता था। इसके तहत दोनों देशों के लिए तैनात रणनीतिक परमाणु हथियारों और उनके डिलीवरी सिस्टम पर सीमाएं तय थीं। संधि ने दोनों देशों को एक-दूसरे की परमाणु क्षमताओं के बारे में जानकारी हासिल करने और सत्यापन की व्यवस्था भी दी थी।

न्यू स्टार्ट के समाप्त होने से अमेरिका और रूस के पास अपने रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की अधिक गुंजाइश बन गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा खतरा केवल हथियारों की संख्या बढ़ने से नहीं बल्कि पारदर्शिता और भरोसे के कमजोर होने से है। संधि के तहत दोनों देशों के बीच डेटा साझा किया जाता था, निरीक्षण होते थे और परमाणु गतिविधियों पर बातचीत के लिए संस्थागत तंत्र मौजूद था। इन व्यवस्थाओं ने गलत अनुमान और अचानक सैन्य प्रतिक्रिया के जोखिम को कम करने में भूमिका निभाई।

हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान ऑन-साइट निरीक्षण बाधित हुए और बाद में रूस ने निरीक्षणों को रोक दिया। इसके बावजूद संधि के कई प्रावधान दोनों देशों को एक-दूसरे की रणनीतिक क्षमताओं का अनुमान लगाने में मदद करते रहे। अब इसके समाप्त होने के बाद खुफिया एजेंसियों को परमाणु गतिविधियों की निगरानी में अधिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी शुरुआती चेतावनी प्रणाली में तकनीकी समस्या या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो गलत तरीके से यह माना जा सकता है कि कोई हमला शुरू हो रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिका और रूस दोनों अपने परमाणु शस्त्रागार को आधुनिक बनाने की योजनाओं पर आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका अपनी परमाणु त्रयी- पनडुब्बियों, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों और रणनीतिक बमवर्षक विमानों के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश कर रहा है। रूस भी अपने रणनीतिक हथियारों और नई पीढ़ी की डिलीवरी प्रणालियों को विकसित कर रहा है। यदि एक देश अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाता है तो दूसरा देश भी जवाब में ऐसा करने की कोशिश कर सकता है। यही कार्रवाई और प्रतिक्रिया का चक्र हथियारों की नई दौड़ को जन्म दे सकता है। इस बदलते परमाणु समीकरण में चीन की भूमिका भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। पिछले वर्षों में चीन ने अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार तेज किया है। अमेरिकी आकलनों के अनुसार, चीन के परमाणु हथियारों की संख्या आने वाले वर्षों में काफी बढ़ सकती है। चीन के बढ़ते सैन्य और परमाणु सामर्थ्य ने अमेरिका की रणनीतिक योजना को भी प्रभावित किया है। इससे परमाणु हथियारों की पारंपरिक अमेरिका-रूस प्रतिस्पर्धा अब तीन प्रमुख शक्तियों के बीच जटिल रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में बदल रही है।

यूरोप में भी रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच परमाणु सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई है। फ्रांस ने अपने परमाणु प्रतिरोधक ढांचे को यूरोपीय सहयोगियों की सुरक्षा से जोड़ने की संभावना पर जोर दिया है। फिनलैंड ने अपने कानूनों में बदलाव कर विदेशी परमाणु हथियारों की संभावित तैनाती का रास्ता खोला है, जबकि लिथुआनिया में सामूहिक विनाश के हथियारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों में बदलाव की पहल हुई है। ये कदम यूरोप में बदलते सुरक्षा माहौल को दर्शाते हैं।

परमाणु अप्रसार की वैश्विक व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और निरस्त्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ना है। लेकिन परमाणु शक्तियों के बीच हथियार नियंत्रण वार्ता में रुकावट और नए हथियारों के आधुनिकीकरण ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध की संधि भी अस्तित्व में है, लेकिन परमाणु शक्तियां और उनके अधिकांश प्रमुख सहयोगी इसके पक्षकार नहीं हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद ने भी वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को चुनौती दी है। अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे माहौल में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यू स्टार्ट का समाप्त होना हथियार नियंत्रण का अंत नहीं होना चाहिए। इसके बजाय अमेरिका और रूस के बीच नए समझौते की जरूरत है, जिसमें रणनीतिक परमाणु हथियारों के साथ-साथ कम दूरी और कम क्षमता वाले गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों को भी शामिल किया जाए। इसके अलावा डेटा एक्सचेंज, निरीक्षण, मिसाइल परीक्षणों की जानकारी और आपसी संचार के तंत्र को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता होगी।

चीन को हथियार नियंत्रण की बातचीत में शामिल करना भी एक बड़ी चुनौती है। अमेरिका चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता को देखते हुए भविष्य की बातचीत में उसकी भागीदारी चाहता है लेकिन चीन ने अब तक अमेरिका और रूस जैसी औपचारिक मात्रात्मक सीमाओं में सीमित रुचि दिखाई है। इसलिए भविष्य का हथियार नियंत्रण मॉडल शीत युद्ध के दौर के द्विपक्षीय समझौतों से अलग हो सकता है।

परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा महंगी भी है और जोखिमपूर्ण भी। नई मिसाइलें, पनडुब्बियां, बमवर्षक और परमाणु कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम विकसित करने में भारी संसाधन लगते हैं। इससे सैन्य बजट पर दबाव बढ़ता है और ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसमें सुरक्षा बढ़ाने के नाम पर उठाया गया कदम दूसरे देश के लिए खतरा बन जाए।

आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि परमाणु हथियारों से लैस देशों के बीच भरोसा कमजोर हो रहा है और पुराने नियंत्रण तंत्र समाप्त हो रहे हैं। ऐसे समय में संवाद, पारदर्शिता और सत्यापन की व्यवस्था पहले से अधिक जरूरी हो जाती है। न्यू स्टार्ट का अंत अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण के एक युग का अंत जरूर है लेकिन इसे परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की कोशिशों का अंतिम अध्याय नहीं माना जाना चाहिए। आने वाले वर्षों में नई व्यवस्थाएं बनाना इसलिए जरूरी होगा ताकि परमाणु प्रतिस्पर्धा नियंत्रण से बाहर न जाए और परमाणु युद्ध के जोखिम को यथासंभव कम रखा जा सके।

- परमाणु हथियार : एक नजर में किसके पास कितने हथियार

परमाणु हथियारों की शुरुआत 1945 में अमेरिका के पहले परमाणु परीक्षण से हुई। उसी साल हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए। इसके बाद सोवियत संघ ने 1949 में पहला परमाणु परीक्षण किया, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और चीन क्रमशः 1952, 1960 और 1964 में परमाणु शक्ति बने। परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए 1968 में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और बाद में व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) जैसी व्यवस्थाएं बनाई गईं।

आज दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार होने का अनुमान है। इनमें एनपीटी द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त पांच देश- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं। इनके अलावा भारत व पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश हैं। इजराइल के पास आधिकारिक तौर पर परमाणु हथियार होने की पुष्टि नहीं है लेकिन उसके पास परमाणु हथियार मौजूद हैं। उत्तर कोरिया ने 2003 में एनपीटी से हटने की घोषणा की और इसके बाद कई परमाणु परीक्षण किए। जून, 2026 तक दुनिया में कुल परमाणु वॉरहेड की संख्या करीब 12,200 आंकी गई है।

- रूस और अमेरिका

रूस और अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बड़े परमाणु शस्त्रागार हैं। दोनों देशों ने दशकों तक हथियार नियंत्रण समझौतों के जरिए अपने रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या सीमित की। 2010 की न्यू स्टार्ट संधि के तहत दोनों देशों के लिए 1,550 तैनात रणनीतिक वॉरहेड की सीमा तय थी। हालांकि, यह संधि फरवरी 2026 में समाप्त हो गई। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुमान के अनुसार रूस के सैन्य भंडार में लगभग 4,400 परमाणु वॉरहेड हैं। अमेरिका के सैन्य स्टॉकपाइल में करीब 3,700 वॉरहेड होने का अनुमान है। दोनों देश अपने परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाली मिसाइलों, पनडुब्बियों और बमवर्षक विमानों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।

- चीन तेजी से बढ़ा रहा क्षमता

चीन के पास लगभग 600 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, चीन इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो 2030 तक उसके पास 1,000 तक परिचालन योग्य वॉरहेड हो सकते हैं। चीन जमीन और समुद्र से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों तथा परमाणु बमवर्षक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

- फ्रांस और ब्रिटेन

फ्रांस के पास लगभग 290 ऑपरेशनल परमाणु वॉरहेड का सैन्य भंडार माना जाता है। उसकी परमाणु क्षमता मुख्य रूप से बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों और एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइलों पर आधारित है। ब्रिटेन के पास करीब 225 परमाणु वॉरहेड का सैन्य स्टॉकपाइल है। उसका पूरा परमाणु प्रतिरोध समुद्र आधारित है और इसके लिए चार वैंगार्ड-क्लास परमाणु पनडुब्बियां इस्तेमाल की जाती हैं।

- भारत, पाकिस्तान और इजराइल

भारत के पास लगभग 190 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। भारत अपनी परमाणु क्षमता को जमीन, समुद्र और हवा से संचालित करने वाली त्रिस्तरीय व्यवस्था की दिशा में विकसित कर रहा है।

पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। भारत और पाकिस्तान दोनों लगातार नई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल क्षमताओं पर काम कर रहे हैं। इजराइल सार्वजनिक रूप से अपने परमाणु हथियारों की पुष्टि या खंडन नहीं करता लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि उसके पास करीब 90 परमाणु वॉरहेड हैं।

- उत्तर कोरिया और ईरान

उत्तर कोरिया के पास करीब 60 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है। वह प्लूटोनियम उत्पादन, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास जारी रखे हुए है।

ईरान के पास परमाणु हथियार होने का प्रमाण नहीं है, लेकिन उसके परमाणु कार्यक्रम और उच्च स्तर तक यूरेनियम संवर्धन ने उसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनाया है। 2015 के जेसीपीओए समझौते के बाद अमेरिका के 2018 में उससे हटने पर विवाद और बढ़ा। ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने की मंशा से इनकार करता रहा है।

कुछ देशों ने परमाणु हथियार बनाए या ऐसे कार्यक्रम चलाए लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया। सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन, बेलारूस और कजाकिस्तान के पास परमाणु हथियार आए, जिन्हें बाद में रूस को लौटा दिया गया। दक्षिण अफ्रीका ने गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित किए लेकिन 1990 के दशक में अपना कार्यक्रम समाप्त कर दिया। इराक, लीबिया और सीरिया के परमाणु कार्यक्रम भी अंतरराष्ट्रीय जांच और विवाद का विषय रहे हैं। इसके अलावा अर्जेंटीना, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान ने भी अलग-अलग समय में परमाणु हथियारों से जुड़े कार्यक्रम चलाए थे।

(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

कभी यूपी में निवेश से कतराते थे उद्योगपति, आज 50 लाख करोड़ के प्रस्ताव : योगी

- जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में मुख्यमंत्री योगी ने याद दिलाया दस साल पुराना दौर, जब लखनऊ आने को तैयार नहीं थे निवेशक

- 2015-16 में यूपी के लिए दिल्ली के फाइव स्टार होटल में करानी पड़ी थी इन्वेस्टर्स समिट

- 15 लाख करोड़ की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग, साढ़े सात लाख करोड़ के प्रस्ताव और तैयार

 - 2031 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

 - समिट में 15 निवेश समझौते और 13 शिक्षण संस्थानों से एमओयू, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स करेगी 634 करोड़ का निवेश

लखनऊ, 26 अक्टूबर। कभी उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर उद्योगपति यहां आने से कतराते थे। निवेशकों को लखनऊ बुलाना तक मुश्किल था। हालत यह थी कि वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश के लिए आयोजित होने वाली इन्वेस्टर्स समिट दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में करानी पड़ी थी। निवेश यूपी में होना था, लेकिन निवेशकों को बुलाने के लिए दिल्ली का सहारा लेना पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राजधानी में आयोजित जीसीसी इनोवेशन समिट-2026 में प्रदेश के उस दौर को याद करते हुए कहा कि आज तस्वीर बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं।

 लखनऊ के द सेंट्रम में आयोजित समिट में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दस साल पहले कोई कहता कि लखनऊ में जीसीसी इनोवेशन समिट होगी तो शायद यहां मौजूद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों में से कोई आने को तैयार नहीं होता। उस समय लखनऊ की पहचान निवेश के अनुकूल शहर के रूप में नहीं थी। निवेशकों के मन में यहां की कानून व्यवस्था को लेकर आशंकाएं थीं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ही सुरक्षित नहीं होगा तो उसकी पूंजी कैसे सुरक्षित रहेगी। यही वजह थी कि निवेशक उत्तर प्रदेश आने से बचते थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश की पहचान उपद्रव, अराजकता और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों के वर्चस्व से होती थी। राज्य पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार था। अकर्मण्यता और अव्यवस्था ने देश के सबसे युवा राज्य को बीमारू राज्यों की श्रेणी में पहुंचा दिया था। उत्तर प्रदेश अपनी पहचान खो चुका था। आज प्रदेश निवेश और तकनीक आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।

- दिल्ली में समिट कराने के बाद भी नहीं बदली थी तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी ने वर्ष 2015-16 के इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय की सरकार ने उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को लखनऊ आने का निमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया। निवेशकों का कहना था कि लखनऊ के बारे में उन्होंने बहुत खतरनाक शहर के रूप में सुना है। इसके बाद तत्कालीन सरकार को दिल्ली के फाइव स्टार होटल में समिट आयोजित करनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि निवेश का स्थान उत्तर प्रदेश था, लेकिन आयोजन दिल्ली में हो रहा था। ऐसे में निवेश के जो परिणाम सामने आए, वे किसी से छिपे नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के लिए केवल नीतियां घोषित करना पर्याप्त नहीं होता। निवेशकों को अपनी पूंजी और कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ बेहतर कारोबारी माहौल का भरोसा भी चाहिए।

- 50 लाख करोड़ के प्रस्ताव, 15 लाख करोड़ की ग्राउंड ब्रेकिंग

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बदलने के लिए कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे और नीतिगत सुधारों पर एक साथ काम किया गया। इसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है। इसके अतिरिक्त साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसरों में बदलना है। प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल नीतियां बनाई गई हैं। निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

- 2031 तक 500 नए जीसीसी स्थापित करने की तैयारी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम हो रहा है। वर्ष 2030-31 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चार करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने की योजना है।

समिट में प्रदर्शित लघु फिल्म में बताया गया कि प्रदेश में पहले से 200 से अधिक जीसीसी, 400 से ज्यादा एसटीपीआई-पंजीकृत आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां और 4.3 करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस उपलब्ध है। नोएडा जीसीसी के स्थापित केंद्र के रूप में उभरा है, जबकि लखनऊ में भी इस क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। कानपुर समेत अन्य शहरों में भी संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष बड़ी संख्या में तकनीकी स्नातक तैयार हो रहे हैं। सरकार का लक्ष्य छह लाख एसटीईएम स्नातकों की प्रतिभा क्षमता तैयार करना है, ताकि वैश्विक कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।

- पांच कंपनियों को एलओसी, 6,467 रोजगार की संभावना

समिट में मुख्यमंत्री योगी ने पांच प्रमुख जीसीसी परियोजनाओं के लिए कंपनियों के प्रतिनिधियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट प्रदान किए। इनमें हैवेल्स, एमरी प्राइस, मेटलाइफ, एलजी और डब्ल्यूएसपी शामिल हैं। इन परियोजनाओं से 6,467 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके साथ ही जीसीसी निवेशकों के साथ 15 एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। इनमें ईवाईजीडीएस, एएमएल राइटसोर्स, कंप्यूटसेंटर, मेटलाइफ, डीएसवी, स्मार्टवर्क्स, डेमैक, एलट्रूस्ट, पेटीएम, एडब्ल्यूएस, बार्कलेज, नौकरी और आईबीएन समेत अन्य कंपनियां शामिल रहीं। तकनीकी प्रतिभा और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल के लिए 13 विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी संस्थानों के साथ भी समझौते किए गए। इनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू, आईआईटी रुड़की, आईआईएम लखनऊ, आईआईआईटी लखनऊ, एकेटीयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख संस्थान शामिल हैं।

- एलजी करेगी 634 करोड़ का निवेश

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रतिनिधि बृजेश शर्मा ने बताया कि कंपनी उत्तर प्रदेश में 634 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसमें प्रतिभा विकास और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाएगा। परियोजना से 500 से अधिक उच्च-मूल्य वाली नौकरियां सृजित होने की संभावना है।

 स्मार्टवर्क्स के प्रतिनिधि हर्ष बिनानी ने बताया कि कंपनी नोएडा में 20 लाख वर्ग फीट क्षेत्र का प्रबंधन कर रही है, जहां 110 से अधिक कंपनियां मौजूद हैं। लखनऊ के बीबीडी टाइम्स स्क्वायर में भी दो लाख वर्ग फीट क्षेत्र विकसित किया गया है। उन्होंने प्रदेश में निवेश प्रक्रिया और मिले सहयोग का उल्लेख किया।

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर के प्रतिनिधि राजीव कुमार ने नोएडा में कंपनी के विस्तार का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि निवेश के लिए प्रतिभा, सुरक्षा और बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण हैं। नोएडा में माइक्रोसॉफ्ट का केंद्र तीन वर्षों में तीन हजार कर्मचारियों तक पहुंच चुका है। एचसीएल टेक के प्रतिनिधि किरण चेरुकुरी ने बताया कि कंपनी लखनऊ में 12,500 कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। उन्होंने एआई आधारित जीसीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए एडब्ल्यूएस और डीप-टेक नवाचार के लिए आईआईटी कानपुर के साथ सहयोग की जानकारी दी।

- सुरक्षा, प्रतिभा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेशकों का भरोसा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई संपर्क, मेट्रो, औद्योगिक भूमि और तकनीकी शिक्षा के विस्तार ने निवेश की संभावनाएं बढ़ाई हैं। प्रदेश में 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध है। पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या 120 से बढ़कर लगभग 25 हजार तक पहुंच चुकी है। हर वर्ष करीब दो लाख एसटीईएम स्नातक तैयार हो रहे हैं। इस प्रतिभा को तकनीक आधारित उद्योगों से जोड़ने पर सरकार का विशेष जोर है।

 कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जीसीसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी उद्योगों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में एक हजार से अधिक व्यवसाय अनुकूल सुधार लागू किए गए हैं।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समिट में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल सहित विभिन्न कंपनियों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का तुलसी के पौधे भेंट कर स्वागत किया गया।

निर्माणाधीन बाईपास के निरीक्षण के दौरान फिसले सीएम पुष्कर सिंह धामी

हल्द्वानी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी में निर्माणाधीन बाईपास मार्ग का निरीक्षण करते समय अचानक फिसलकर गिर पड़े। कच्चा रास्ता होने के कारण उनका पैर फिसल गया। हालांकि, गिरने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री उठ खड़े हुए।
हल्द्वानी से कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से बाईपास का निर्माण कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री इसी निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान यह घटना हुई।
बड़े मियां और छोटे मियां को घुसपैठियों से प्यार, गरीबों के हक पर डाल रहे डाका: सीएम योगी
-  महर्षि वाल्मीकि जयंती पर बिठूर में आयोजित कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित
-  बिठूर की विरासत को मिलेगी नई पहचान, रामायण सर्किट से धार्मिक पर्यटन को मिलेगी रफ्तार
-  बिल्हौर-बिठूर को 411 करोड़ की सौगात, 48 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
-  कहा- सपा का मतलब दंगा, भ्रष्टाचार और परिवारवाद, काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती


कानपुर, 26 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में दो मियां हैं, एक बड़े मियां और दूसरे छोटे मियां। दोनों को बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों से प्यार है, लेकिन दलितों, वंचितों, गरीबों, किसानों और युवाओं के अधिकारों की चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि घुसपैठियों को राशन कार्ड और सरकारी सुविधाएं दिलाकर गरीबों के हक पर डाका डालने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी ने सपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों को सबक सिखाने का समय आने वाला है। सपा का मतलब ही दंगा, भ्रष्टाचार और परिवारवाद है। विरासत में सत्ता मिल सकती है, लेकिन जनता का विश्वास विरासत में नहीं मिलता। काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।
मुख्यमंत्री योगी सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर बिठूर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने महर्षि वाल्मीकि आश्रम में पूजा-अर्चना और रामायण पाठ किया। इस अवसर पर बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रों की 411 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें 29 परियोजनाओं का लोकार्पण और 19 का शिलान्यास शामिल है। विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए।
-  सीएए का विरोध करने पर सपा-कांग्रेस से सवाल
मुख्यमंत्री योगी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष को बताना चाहिए कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर आए पात्र हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों के लोगों को नागरिकता देने की व्यवस्था का विरोध क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वाले दलों को गरीबों और वंचितों के अधिकारों पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
अखिलेश यादव की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सत्ता विरासत में मिल सकती है, लेकिन उसे दोबारा हासिल करने के लिए जनता का विश्वास अर्जित करना पड़ता है। केवल पारिवारिक विरासत के भरोसे राजनीति नहीं चल सकती।
-  जवाहर बाग से मुजफ्फरनगर तक की घटनाओं का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी ने सपा की पूर्ववर्ती सरकार पर दंगाइयों और भू-माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कोसी कलां, मुजफ्फरनगर और मथुरा के जवाहर बाग की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में आम लोगों के साथ पुलिसकर्मी भी सुरक्षित नहीं थे। जवाहर बाग में अवैध कब्जा हटाने पहुंचे पुलिस अधिकारी मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव की हत्या कर दी गई थी।
मुख्यमंत्री योगी ने कानपुर में वर्ष 1931 के दंगे में पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की हत्या और बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा सोनकर के पिता की हत्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने दंगों और राजनीतिक हिंसा का दौर देखा है। कानून का शासन और शांतिपूर्ण वातावरण विकास की पहली आवश्यकता है।
-  रामायण और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत समेटे है बिठूर
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बिठूर महर्षि वाल्मीकि की साधना और रामायण की रचना से जुड़ी भूमि है। इसी धरती पर माता सीता को आश्रय मिला और लव-कुश के बाल्यकाल की स्मृतियां जुड़ी हैं। बिठूर नाना साहब पेशवा और तात्या टोपे जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत भी समेटे हुए है।
मुख्यमंत्री योगी ने महर्षि वाल्मीकि आश्रम के साथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक और आरती की। बटुकों से मुलाकात की और साधु-संतों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया। इसके बाद नाना साहब धुंधूपंत पेशवा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर प्रदेश के हजारों मंदिरों में अखंड रामायण पाठ कराया जा रहा है।
-  चार हजार स्थलों पर होंगे संरक्षण और सुंदरीकरण के कार्य
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े करीब चार हजार स्थलों के विकास की योजना है। यहां चहारदीवारी, छत, कैनोपी और सुंदरीकरण के कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि मंदिर के विकास और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखे जाने का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री योगी ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या, मां विंध्यवासिनी धाम, मथुरा-वृंदावन, नैमिषारण्य और बिठूर में धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के विकास की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की स्मृतियों को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
-  वीरांगनाओं के नाम पर महिला पीएसी बटालियन
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी, बदायूं में वीरांगना अवंती बाई लोधी और गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर महिला पीएसी बटालियन गठित की गई हैं। लखनऊ में महाराजा बिजली पासी के स्मारक और किले के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झांसी के किले में लाइट एंड साउंड कार्यक्रम के जरिए रानी लक्ष्मीबाई और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाई जा रही है।
-  16 करोड़ को मुफ्त राशन, 65 लाख परिवारों को आवास
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना भेदभाव पहुंच रहा है। प्रदेश में करीब 16 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और 65 लाख गरीब परिवारों को आवास मिला है। उन्होंने 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ तथा दो करोड़ लोगों को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन मिलने की जानकारी दी। दीपावली पर पात्र उज्ज्वला लाभार्थियों को मुफ्त गैस सिलेंडर देने की बात भी कही। मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि 67 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पांच लाख से अधिक बेटियों की शादी कराई गई है। पात्र लाभार्थियों को विवाह के लिए एक लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
- दस लाभार्थियों को मिले योजनाओं के प्रमाणपत्र
मुख्यमंत्री योगी ने मुख्यमंत्री आवास योजना की रीना और सौरभ यादव, स्वदेशी गोसंवर्धन योजना के आशुतोष पांडेय, लखपति दीदी योजना की सीमा और रुखसार बानो, नंद बाबा दुग्ध मिशन के प्रियांशु, आयुष्मान योजना की सुषमा कुशवाहा तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की डॉ. दीप्ति तिवारी को प्रमाणपत्र दिए। सफाईकर्मी राजपाल वाल्मीकि और शिवम वाल्मीकि को भी प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
-  सड़क, शिक्षा और पर्यटन से जुड़ी 48 परियोजनाओं की सौगात
बिल्हौर और बिठूर में लोकार्पित तथा शिलान्यास की गई परियोजनाओं में सड़क संपर्क, धार्मिक पर्यटन, शिक्षा, औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। रामायण सर्किट के अंतर्गत घाटों के विकास, नौका सुविधा और होमस्टे को बढ़ावा देने की योजना है। मंधना-गंगा बैराज-शुक्लागंज-पुरवा-मोहनलालगंज मार्ग के चौड़ीकरण, लखनऊ-मोहान-बांगरमऊ-बिल्हौर मार्ग के सुदृढ़ीकरण और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के कानपुर नोड में आधारभूत सुविधाओं के विकास से जुड़े कार्य भी शामिल हैं।
बिठूर में बोटैनिकल गार्डन, बिल्हौर के ग्राम बनी, चौबेपुर और बिठूर क्षेत्र में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों, न्यू कानपुर सिटी में 30 मीटर चौड़ी सड़क तथा ग्राम बर्रा खानपुर में ईसन नदी पर पुल के निर्माण से संबंधित परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने कानपुर मेट्रो, एयरपोर्ट, लखनऊ से जुड़ने वाले नए एक्सप्रेसवे और ट्रांस गंगा क्षेत्र में नए पुल की स्वीकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे क्षेत्र में आवागमन और विकास को गति मिलेगी।
-  जनप्रतिनिधियों ने दी क्षेत्र के विकास कार्यों की जानकारी
बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने क्षेत्र में सड़क, बिजली और घाटों के विकास का उल्लेख किया। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन को समता, न्याय और मानवता का संदेश देने वाला बताया। बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा सोनकर ने सड़कों के चौड़ीकरण, खेरेश्वर मंदिर में जनसुविधाओं और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय के निर्माण से जुड़े कार्यों की जानकारी दी।
-  कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, मंत्री प्रतिभा शुक्ला, सांसद रमेश अवस्थी, महापौर प्रमिला पांडेय, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, विधायक अभिजीत सिंह सांगा, राहुल बच्चा सोनकर, नीलिमा कटियार, महेश त्रिवेदी और सरोज कुरील, विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, अविनाश सिंह चौहान और मानवेंद्र सिंह, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू तथा ग्रामीण जिलाध्यक्ष उपेंद्र पासवान सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
कन्नौज के बाद आजमगढ़ में बजेगा अखिलेश की विदाई का बाजा : ओपी राजभर

- 'PDA के ढकोसले का सत्यानाश देखने को तैयार रहिए', अखिलेश को ओपी राजभर की खुली चुनौती
- 'एक-एक करके ढह रहा सपा का काल्पनिक गढ़, 27 में हो जाएगा सफाया', अखिलेश यादव को राजभर की दो टूक

लखनऊ, 26 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव के PDA पर सीधा हमला बोलते हुए आजमगढ़ में सपा का किला ढहाने की चुनौती दी है। उन्होंने ने कहा कि कन्नौज के बाद अब आजमगढ़ में भी अखिलेश यादव की विदाई का बाजा बजने वाला है।
कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि 29 नवंबर को सुभासपा की सामाजिक समरसता महारैली में राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल, पाल समेत गैर-यादव पिछड़ों और बहुजन समाज की ताकत दिखेगी। PDA फार्मूले के नाम पर किए जा रहे ढकोसले का सच सबके सामने आएगा।
- आजमगढ़ में भी विदाई का बाजा बजने वाला है
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि आपके 'काल्पनिक गढ़' एक के बाद एक ढह रहे हैं। कन्नौज के बाद अब आजमगढ़ में भी आपकी विदाई का बाजा बजने वाला है या यूं कहें लंका लग गई। उन्होंने दावा किया कि आजमगढ़ में गैर-यादव पिछड़ों और बहुजन समाज की असली ताकत सामने आने के बाद अखिलेश यादव का भ्रम टूट जाएगा।
- PDA के नारे पर राजभर का हमला
राजभर ने अखिलेश यादव के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके नाम पर फैलाए गए ढकोसले का सच अब सामने आएगा। उन्होंने कहा कि राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल, पाल और दूसरे गैर-यादव पिछड़े समाज को केवल चुनाव के समय याद करने का दौर खत्म हो गया है। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव आजमगढ़ को अपना गढ़ बताते हैं, लेकिन अब इसी क्षेत्र में बहुजन समाज अपनी आवाज बुलंद करेगा।
- 29 नवंबर की महारैली को लेकर किया बड़ा दावा
सुभासपा प्रमुख ने बताया कि 29 नवंबर को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में पार्टी की विशाल सामाजिक समरसता महारैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस रैली में पूर्वांचल के दलित, पिछड़े और खासकर गैर-यादव पिछड़े समाज की एकजुटता दिखाई देगी। राजभर ने अखिलेश यादव को रैली की वीडियो रिकॉर्डिंग देखकर अपनी राजनीतिक ताकत का आकलन करने की चुनौती भी दी।